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मध्य प्रदेश में नए साल पर प्रशासनिक फेरबदल, 71 IAS अधिकारी होंगे प्रमोट, 2 को प्रमुख सचिव का पद

भोपाल  मध्यप्रदेश में नए साल पर प्रशासनिक हलचल तेज होने वाली है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 71 IAS अधिकारियों को प्रमोशन दिया जाएगा, जिसके बाद पूरा प्रशासनिक ढांचा नई शक्ल ले सकता है। सबसे अहम बात— 25 साल की सेवा पूरी करने वाले दो वरिष्ठ IAS अफसरों को प्रमुख सचिव (Principal Secretary) बनाया जाएगा। कौन-कौन होंगे प्रमोट? 2010 बैच के 17 IAS अधिकारी 1 जनवरी से सचिव (Secretary) पद पर प्रमोट होंगे। सूची में शामिल प्रमुख नाम कौशलेंद्र विक्रम सिंह (कलेक्टर, भोपाल) अभिजीत अग्रवाल (आबकारी आयुक्त) आशीष सिंह (कमिश्नर, उज्जैन संभाग) भास्कर लक्ष्यकर (कमिश्नर, ट्रेजरी) दीपक सक्सेना (CPR) 31 दिसंबर को जारी होंगे आदेश मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी ने 71 अधिकारियों की पदोन्नति पर हरी झंडी दे दी है। प्रमोशन के आधिकारिक आदेश 31 दिसंबर को जारी होंगे। नए साल में प्रशासनिक तंत्र में यह बड़ा फेरबदल प्रदेश की कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा और नए समीकरण तय करेगा।

आसमानी ब्रह्मास्त्र: 7400 KMPH की गति, ब्रह्मोस से भी ज्यादा खतरनाक, दुश्मन को पलक झपकते ढेर कर दे

नई दिल्ली भारत ग्‍लोबल लेवल पर सामरिक और रणनीतिक तौर पर एक बड़ा प्‍लेयर है. डिफेंस में भी अपनी अलग पहचान रखता है. पहलगाम की बैसरन घाटी में भारत की इसी पहचान को चुनौती देने की नापाक कोशिश की गई थी. भारत ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च कर इसका माकूल और मुंहतोड़ जवाब दिया था. पाकिस्‍तान के साथ टकराव के दौरान चीन और तुर्की जैसे देशों ने खुलकर आतंकियों को पनाह देने वाले देश का सपोर्ट किया था. पश्चिम से लेकर उत्‍तर और पूरब तक दुश्‍मनों के फैलाव को देखते हुए भारत अब एक साथ दो मोर्चों पर सैन्‍य टकराव जैसे हालात से निपटने की तैयारी कर रहा है. इस सल‍िसिले में अल्‍ट्रा मॉडर्न फाइटर जेट, एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ ही कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी से लैस बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल डेवलप करने में भी जुटा है. डिफेंस इक्विपमेंट की खरीद पर भी हजारों-लाखों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसी रणनीति के तहत भारत ने ब्रह्मोस से भी खतरनाक एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने की कोशिश में लगा है. इसी क्रम में भारत-रूस के बीच अत्‍याधुनिक मिसाइल खरीद को लेकर जल्‍द ही एक डील पक्‍की होने वाली है. बताया जा रहा है कि इससे भारत के एयर पावर में काफी वृद्धि होगी. Su-30MKI फाइटर जेट की ताकत भी कई गुना तक बढ़ जाएगी. दरअसल, भारत मित्र देश रूस से लॉन्‍ग रेंज की एयर-टू-एयर R-37M मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया में है. ऐसी 300 मिसाइलें इंपोर्ट करने की योजना है. डील पर जल्‍द ही मुहर लगने की उम्‍मीद है. डील डन होने के बाद 12 से 18 महीनों में इसकी डिलीवरी शुरू हो जाएगी. भारत अपनी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. भारतीय वायु सेना (IAF) और रूस के बीच लगभग 300 R-37M (नाटो नाम: AA-13 Axehead) बहुत लंबी दूरी तक मार करने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद पर समझौता लगभग तय हो चुका है. इस सौदे से जुड़े कई सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. उम्मीद है कि समझौते के औपचारिक होते ही इन मिसाइलों की डिलीवरी 12 से 18 महीनों के भीतर शुरू हो जाएगी. R-37M मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल मैक 6 यानी 7400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार. यह एक क्रूज मिसाइल है, जो बेहद खतरनाक है. एयर-टू-एयर बैलिस्टिक मिसाइल में बेहद खतरनाक. इसकी रफ्तार मैक 2.8 या 3 यानी 3700 KMPH है. रूस-यूक्रेन जंग में इसने अपनी उपयोगिता साबित की है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने अपनी ताकत दिखाई. चीन के PL-15 का मुकम्‍मल जवाब है यह मिसाइल. जल, थल और नभ से अटैक करने में पूरी तरह से सक्षम Su-30MKI में आसानी से इंटीग्रेट किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई. क्‍यों खास है R-37M मिसाइल? R-37M को दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली एक्टिव एयर-टू-एयर मिसाइल माना जाता है. यह 300 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेद सकती है. उड़ान की ऊंचाई और लक्ष्य की दिशा के आधार पर इसकी आधिकारिक रेंज 150 से 200+ किमी बताई जाती है, लेकिन इसका वास्तविक मारक दायरा इससे काफी अधिक माना जाता है. यह मिसाइल ऊंचाई पर तेज गति से उड़ रहे भारतीय Su-30MKI लड़ाकू विमानों से दागी जाएगी और दुश्मन के AWACS, एयर-टैंकर, स्टैंड-ऑफ जैमर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही खत्म करने में सक्षम होगी. IAF के लिए यह मिसाइल जोड़ना भी अपेक्षाकृत आसान होगा, क्योंकि R-37M पहले से ही रूस के Su-30SM और Su-35S विमानों पर ऑपरेशनल है. चूंकि Su-30SM का डिज़ाइन भारत के Su-30MKI से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए मिसाइल को जोड़ने के लिए केवल कुछ सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत पड़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, N011M Bars रडार और मिशन कंप्यूटर में छोटे बदलाव करके Su-30MKI पूरी तरह इस मिसाइल का इस्तेमाल कर सकेंगे. क्‍या चीन की PL-15 का जवाब है R-37M? इस सौदे की तेजी का एक बड़ा कारण हालिया अनुभव है. मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान IAF के Su-30MKI कई बार पाकिस्तानी वायु सेना (PAF) के J-10CE विमानों से रेंज में पीछे रह गए थे. J-10CE विमानों पर चीन की PL-15 मिसाइल लगी है, जिसकी रेंज 180–200 किमी तक मानी जाती है. भारतीय लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी की मिसाइल न होने के कारण कई बार पीछे हटना पड़ा. R-37M आने के बाद यह स्थिति पलट जाएगी. भारतीय Su-30MKI दुश्मन पर पहले नजर, पहले हमला और पहले लक्ष्य भेदने की क्षमता हासिल कर लेंगे. यानी उन्हें स्टैंड-ऑफ दूरी से ही दुश्मन के अहम एयरबोर्न सिस्टम को गिराने में बड़ी बढ़त मिल जाएगी. एक वरिष्ठ IAF अधिकारी ने बताया कि Astra Mk-2 अभी दो साल दूर है और Rafale पर Meteor मिसाइल इंटीग्रेशन में देरी हो रही है. ऐसे में R-37M ही एकमात्र ऐसा हथियार है जो 250–300 किमी दूर महत्वपूर्ण दुश्मन लक्ष्यों को तुरंत मार गिरा सकता है. सिर्फ एक Su-30MKI में दो R-37M लग जाएं, तो वह पूरे सेक्टर में दुश्मन के AWACS और टैंकरों को आगे आने से रोक सकता है. Astra Mk-3 आने तक यह बनेगी अंतरिम ताकत भारत भविष्य में अपनी स्वदेशी SFDR तकनीक वाली Astra Mk-3 मिसाइल (300+ किमी रेंज) पर निर्भर होना चाहता है. लेकिन यह मिसाइल 2030–32 के आसपास उत्पादन में आएगी. तब तक R-37M एक महत्वपूर्ण गैप भरने का काम करेगी. Su-30MKI पर इसे फ्यूज़लेज के नीचे सेमी-रिसेस्‍ड (semi-recessed) तरीके से लगाया जाएगा. प्रत्येक विमान पर दो मिसाइलें लग सकेंगी. इससे विमानों के पंखों पर छोटी रेंज की R-77-1 और Astra Mk-1/2 मिसाइलों को जगह मिल जाएगी. इस सौदे के बाद IAF की लंबी दूरी की हवाई लड़ाई की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. दुश्मन के निगरानी विमान, टैंकर और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को पीछे धकेलने से भारत को पूरे हवाई क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय वायु सेना को एशिया की सबसे घातक लंबी-रेंज एयर कॉम्बैट क्षमता प्रदान करेगी.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का गुस्सा: पुलिस के रवैये से नाराज होकर 6 पुलिसवालों को सस्पेंड किया, गृह सचिव को तलब

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पुलिस के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अफीम तस्करी के मामले में बीएनएसएस के प्रावधानों का पुलिस द्वारा पालन नहीं किए जाने पर गृह विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लगता है कि राज्य के अधिकारियों ने इन प्रावधानों को भुला दिया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर बीएनएसएस के प्रावधानों का राज्य पुलिस द्वारा पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए गृह विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने यह टिप्पणी सूबे के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाना क्षेत्र में 18 साल के युवक को 2.71 किलोग्राम अफीम की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के मामले में की। युवक ने हाई कोर्ट की शरण लेते हुए दावा किया है कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद एक थाना प्रभारी समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इन पुलिस कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने मामले की जांच के दौरान तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बीएनएसएस की धारा 105 और धारा 185 का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रावधानों से विधायिका ने ऑडियो-वीडियो माध्यम से तलाशी और जब्ती को रिकॉर्ड करने की जरूरत को ध्यान में रखा है। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के अधिकारियों द्वारा इन प्रावधानों को आसानी से भुला दिया गया है। हाई कोर्ट ने मामले में नौ दिसंबर को हुई सुनवाई के आधार पर पारित आदेश में कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गृह विभाग के प्रमुख सचिव/ प्रतिवादी राज्य को उपरोक्त प्रावधानों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में इस अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया जाता है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2026 की तारीख तय की है। हाई कोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को इस तारीख को अदालत के सामने हाजिर होने को कहा है। एकल पीठ ने राज्य सरकार को यह बताने का निर्देश भी दिया है कि क्या उसने पुलिस कर्मियों को शरीर पर पहने जाने वाले कैमरे उपलब्ध कराने पर कोई विचार किया है? हाई कोर्ट ने अफीम तस्करी के आरोप में एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार युवक को पांच दिसंबर को अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने का आदेश दिया था। राजस्थान के निवासी युवक की ओर से अदालत में अपने बचाव में दावा किया गया है कि उसे पुलिस कर्मियों ने एक अंतरराज्यीय यात्री बस में 29 अगस्त की सुबह 11:15 बजे के आस-पास अवैध तौर पर पकड़ा। जबकि दस्तावेजों में उसकी इस तारीख को शाम 5:15 बजे गिरफ्तारी दिखाई गई। आरोपी के वकील हिमांशु ठाकुर ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मेरा मुवक्किल इस बस से मध्य प्रदेश के मंदसौर से राजस्थान के प्रतापगढ़ जा रहा था। वह एक मेधावी छात्र है और उसने 12वीं की परीक्षा फर्स्ट डिविजन से पास की है। ठाकुर ने बताया कि हाई कोर्ट में उनके मुवक्किल की ओर से यात्री बस के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज भी पेश किया गया है, जिसका अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है। इस फुटेज में सादे कपड़े पहने तीन लोग युवक को बस से बाहर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। राजस्थान से सटा मंदसौर जिला अफीम की खेती के लिए मशहूर है। जिले में मादक पदार्थों के अवैध उत्पादन, भण्डारण, कारोबार और तस्करी के मामले लगातार सामने आते हैं।  

रायपुर : आत्मनिर्भरता, खुशहाली और ग्रामीण प्रेरणा की अद्भुत मिसाल

रायपुर : आत्मनिर्भरता, खुशहाली और ग्रामीण प्रेरणा की अद्भुत मिसाल मनरेगा की डबरी से बदली रमेश की जिंदगी सब्जी उत्पादन और मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर, गांव के लिए बने प्रेरणास्रोत रायपुर महात्मा गांधी नरेगा के डबरी निर्माण ने ग्राम पंचायत रेगड़ा के पट्टाधारी किसान रमेश के जीवन में नई आशाएं जगाई है। सिंचाई, मछली पालन और सब्जी उत्पादन से उनकी आय बढ़ी। पानी की कमी से जूझता जीवन अब खुशहाली में बदल रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।           रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत रेगड़ा के वन अधिकार पट्टाधारी किसान रमेश के जीवन में मनरेगा के तहत निर्मित डबरी ने वह बदलाव लाया जिसकी उन्हें वर्षों से तलाश थी। पहले रमेश की खेती पूरी तरह वर्षा पर आधारित थी, जिससे उत्पादन सीमित होता था और आय भी अनिश्चित रहती थी। कठिन परिश्रम करने के बावजूद परिवार की आजीविका पर हमेशा संकट बना रहता था। परंतु मनरेगा के माध्यम से उनके खेत में कराए गए डबरी निर्माण कार्य ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। कठिन मिट्टी और चट्टानों से भरे क्षेत्र में डबरी बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक और मेट के मार्गदर्शन में कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में 652 मानव दिवस सृजित हुए, जिससे ग्रामीणों को तात्कालिक रोजगार और आय का अवसर मिला। डबरी निर्माण से स्थायी आजीविका स्रोत       डबरी निर्माण के बाद रमेश के खेत में वर्षभर सिंचाई उपलब्ध हो गई। इसका प्रत्यक्ष लाभ उन्हें खेती में मिला। अब उनके खेत में धान, मूंगफली, तरबूज, केला तथा विविध सब्जियों का उत्पादन होने लगा है। इससे न केवल उनके कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि अतिरिक्त आय का मार्ग भी खुला। साथ ही डबरी में मछली पालन की शुरुआत ने उन्हें एक और स्थायी आजीविका स्रोत प्रदान किया। डबरी निर्माण से खुशहाली और आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहा है रमेश     मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सरकारी योजनाओं को ईमानदारी और सही दिशा में लागू किया जाए, तो ग्रामीण जीवन में स्थायी बदलाव संभव है। आज रमेश का परिवार आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है और उनकी तरक्की की कहानी पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी है। ग्राम पंचायत रेगड़ा में निर्मित यह डबरी आज रोजगार, विकास और समृद्धि का नया प्रतीक है। रमेश गर्व से कहते हैं “डबरी ने हमारे जीवन में स्थायी खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई राह खोल दी है।”

मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र की जनहित योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में की महत्वपूर्ण भूमिका: सुरेश पचौरी

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में देश में विकास की जो गंगा प्रवाहित हो रही है उससे मध्‍यप्रदेश भी अछूता नहीं है। श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में संचालित केन्‍द्रीय योजनाओं का मध्‍यप्रदेश को भरपूर लाभ मिल रहा है। केन्‍द्र सरकार की महत्‍वपूर्ण जनहितैषी योजनाओं के क्रियान्‍वयन से उनका लाभ पात्र हितग्राहियों को दिलाने में मध्‍यप्रदेश देश में लगातार अग्रणी बना हुआ है। जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी व ग्रामीण) आयुष्‍मान भारत योजना आदि। विगत 2 वर्षों की महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों की बात की जाए तो मध्‍यप्रदेश में भारत सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 11 लाख 46 हजार आवास से मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8 लाख 64 हजार आवासों का कार्य पूर्ण हो चुका है। गरीब बंदी सहायता योजना का क्रियान्‍वयन करने वाला प्रथम राज्‍य बना है। प्रदेश में 80 लाख 52 हजार घरों तक नल कनेक्‍शन दिए गए। प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश में लगभग 85 लाख से अधिक हितग्राहियों को कुल 8 हजार 690 करोड़ से अधिक का लाभ प्रदान किया गया। प्रदेश के 82 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्‍मान निधि की 1671.00 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया गया है। आयुष्‍मान निरामयम भारत योजनांतर्गत 3 लाख एक हजार 496 परिवारों के सदस्‍यों को चिकित्‍सा सहायता प्रदान की गई। राज्‍य में मातृ शक्ति को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाये गए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं का 512 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता उपलब्‍ध कराई गई। मध्‍यप्रदेश में निवेश भोपाल में पिछले दिनों ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट की सफलता ने पूरे देश का ध्‍यान आकर्षित किया। इसके उद्धाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और समापन अवसर पर केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मध्‍यप्रदेश को देश का अग्रणी विकसित राज्‍य बनाने के मुख्‍यमंत्री के अथक् परिश्रम और दृढ इच्‍छाशक्ति की प्रशंसा की। प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में राज्‍य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन अंतर्गत अब तक 8.57 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्‍ताव धरातल पर आ चुके हैं। इसके अलावा मुख्‍यमंत्री कन्‍या विवाह/निकाह सहायता योजनांतर्गत 1 लाख 52 हजार 353 हितग्राहियों को सहायता राशि रुपए 83844.39 लाख दी गई। सिंहस्‍थ – उज्‍जैन मध्‍यप्रदेश सरकार के सामने आने वाले दिनों में उज्‍जैन में होने वाले सिंहस्‍थ पर्व को सुसम्‍पन्‍न कराने की एक बड़ी चुनौती है। इस धार्मिक समागम में देश विदेश से करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसे निर्विघ्‍न व गरिमापूर्ण तरीके से संपन्‍न कराने के लिए राज्‍य सरकार ने कमर कस ली है। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की बागडोर संभालते ही शासन-प्रशासन के अधिकारियों को सिंहस्‍थ महापर्व की तैयारियां करने के निर्देश दे दिए थे, ताकि सारे काम समय पर पूरे हो जाएं। इसके लिए यथासमय बजट का आवंटन किया गया। वर्ष 2025-26 में सिंहस्‍थ 2028 के लिए 67 आवासीय भवन के निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान की गई। सिंहस्‍थ के अवसर पर दुनिया भर से उज्‍जैन आने वाले श्रद्धा‍लुओं तथा तीर्थयात्रियों को किसी तरह की तकलीफ न होने पाए, इसके लिए युद्ध स्‍तर पर तैयारियां चल रही है। प्रदेश की सांस्‍कृतिक, ऐतिहासिक तथा धार्मिक पहचान रखने वाले प्रमुख स्‍थानों के साथ ही पर्यटन स्‍थलों को विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के चित्रकूट, उज्‍जैन, ओंकारेश्‍वर, महेश्‍वर, ओरछा, मैहर आदि स्‍थानों को उनके प्राचीन गौरव, वैभव और गरिमा के अनुसार सजाया-संवारा जा रहा है। मध्‍यप्रदेश में द्रुत गति से विकास के काम जारी हैं। श्रीराम वन गमन पथ श्रीराम के कर्तव्‍य पालन और राष्‍ट्र निर्माण का समर्पण संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का आधार देगा। साथ ही राज्‍य शासन द्वारा उन सभी स्‍थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ श्रीकृष्‍ण के स्‍मृति चिन्‍ह विराजमान हैं। मध्‍यप्रदेश में नक्‍सल समस्‍या मध्‍यप्रदेश में नक्‍सल मोर्चे पर सबसे बड़ी कामयाबी दर्ज की गई है। मध्‍यप्रदेश में 2.36 करोड़ रुपए के इनामी 10 हार्डकोर नक्‍सलियों ने एके-47 समेत आई.एन.एस.ए.एस. राइफल, एस.एल.आर. और सिंगल शॉट गन जैसे घातक हथियारों के साथ मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने सरेंडर किया है। नि:संदेह, मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार प्रदेशवासियों के हितों के मद्देनजर तमाम लोककल्‍याणकारी योजनाओं के माध्‍यम से निष्‍ठापूर्वक राजधर्म निभा रही है तथा एक लोकप्रिय सरकार बनने की दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रही है। भौगोलिक दृष्टि से देश के इस बड़े राज्‍य के सामने जहां तमाम चुनौतियां हैं, वहीं जनता की अनगिनत अपेक्षाएं भी हैं। सरकार चुनौतियों से भी निपट रही है और जनापेक्षाओं को भी पूरा कर रही है। विकास सतत् चलने वाली प्रक्रिया है और आशा की जानी चाहिए कि देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार विकास के रथ को रुकने नहीं देगी। मध्‍यप्रदेश सरकार के उपलब्धियों भरे 2 वर्ष पूरे होने के अवसर यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल के ऊर्जावान सहयोगियों, राज्‍य की प्रशासनिक टीम तथा प्रदेश की जागरूक जनता को हार्दिक बधाई।

रूस करेगा S-400 का अपग्रेड, नई तकनीक से भारत का रक्षा कवच होगा और भी ताकतवर

नई दिल्ली रूस दुनिया का सबसे ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम S-400 ट्रायम्फ को और मजबूत बनाने की योजना बना रहा है. यूक्रेन युद्ध में इस सिस्टम के इस्तेमाल से मिली सीखों को अपनाकर रूस इसे नई चुनौतियों के खिलाफ और प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है.  यह अपग्रेड न सिर्फ रूस की सेना के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भारत जैसे खरीदार देशों के लिए भी खुशखबरी है. भारत ने 2018 में 5.43 अरब डॉलर के सौदे में पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदे हैं, जिनमें से तीन पहले ही तैनात हैं. बाकी दो 2026 तक मिलने की उम्मीद है. S-400 क्या है और क्यों खास? S-400 एक मोबाइल सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के विमान, मिसाइल, ड्रोन और यहां तक कि हाइपरसोनिक हथियारों को 400 किलोमीटर दूर से नष्ट कर सकता है. यह 600 किलोमीटर तक टारगेट को डिटेक्ट कर सकता है. इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ 80 टारगेट ट्रैक कर सकता है. 36 को एक साथ मार गिरा सकता है. भारत में इसे 'सुदर्शन चक्र' नाम दिया गया है. यह सिस्टम अमेरिकी पैट्रियट या इजरायली आयरन डोम से भी ज्यादा एडवांस्ड माना जाता है. रूस का दावा है कि कोई विदेशी सिस्टम अभी तक इसके मुकाबले नहीं टिक पाया. यूक्रेन युद्ध ने कैसे बदला S-400 का खेल? यूक्रेन युद्ध (जिसे रूस 'स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन' कहता है) में S-400 ने कमाल कर दिखाया. रूसी सेना ने इसे अमेरिकी ATACMS मिसाइलों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया. अगस्त 2025 से इसकी प्रभावशीलता में इजाफा हुआ है. नवंबर 2025 में रूसी सीमा पर ATACMS हमलों को सफलतापूर्वक रोका गया. युद्ध ने कमजोरियां भी उजागर कीं. यूक्रेन ने ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से कई S-400 रडार और लॉन्चर नष्ट किए, जैसे सितंबर 2025 में क्रीमिया में. इससे रूस को एहसास हुआ कि सिस्टम को जैमिंग और लो-फ्लाइंग थ्रेट्स के खिलाफ मजबूत बनाना जरूरी है. युद्ध से मिली सीखों से S-400 को नई क्षमताएं दी जा रही हैं, जो एयर डिफेंस सिस्टम में आमतौर पर नहीं होतीं. अपग्रेड की क्या डिटेल्स हैं? अल्माज-एंटे ग्रुप के सीईओ यान नोविकोव ने हाल ही में कहा कि तकनीकी क्रांति की रफ्तार से हम नई चुनौतियों का तुरंत जवाब दे सकते हैं. S-400 का अपग्रेड पोटेंशियल इतना बड़ा है कि हम युद्ध के दौरान ही उभरती धमकियों को खत्म कर सकते हैं.   विशेषज्ञों का अनुमान है कि अपग्रेड में ये बदलाव हो सकते हैं…     बेहतर रडार: एंटी-जैमिंग तकनीक मजबूत, ड्रोन और लो-लेवल मिसाइलों को बेहतर डिटेक्ट करने की क्षमता.     नई मिसाइलें: लंबी रेंज वाली 40N6 मिसाइलें, जो 400 किमी से ज्यादा दूर टारगेट मार सकें.     नेटवर्किंग: AWACS (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) से बेहतर कनेक्शन, ताकि ज्यादा दुश्मन टारगेट एक साथ हैंडल हो सकें.     मोबिलिटी: सिस्टम को जल्दी मूव करने और छिपाने की सुविधा, ताकि दुश्मन इसे आसानी से निशाना न बना सके. ये बदलाव S-400 को और अजेय बना देंगे. रूस का कहना है कि यह अपग्रेड एक्सपोर्ट के लिए भी फायदेमंद होगा. भारत के लिए क्या मतलब? Operation Sindoor में दिखाया कमाल भारत के लिए यह अपग्रेड किसी तोहफे से कम नहीं. 2018 के सौदे के तहत भारत को पांच स्क्वाड्रन मिलने हैं. तीन आ चुके हैं जो पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर सीमाओं पर तैनात हैं. लेकिन मई 2025 में हुए Operation Sindoor ने S-400 की ताकत साबित कर दी.  22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी कैंपों पर मिसाइल हमले किए. चार दिनों (7-10 मई) की इस जंग में S-400 ने चमत्कार किया…     300 किमी दूर पाकिस्तानी JF-17 फाइटर जेट, F-16 और एक AWACS (SAAB-2000 एरेये) विमान को मार गिराया.     पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को 15 भारतीय शहरों पर हमलों से रोका.     लाहौर में चीनी LY-80 सिस्टम और कराची में HQ-9 को नष्ट किया. भारतीय वायुसेना के चीफ एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा सरफेस-टू-एयर किल रिकॉर्ड है. Operation Sindoor के बाद भारत ने और S-400 खरीदने का फैसला किया. दिसंबर 2025 में PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात में पांच और स्क्वाड्रन और 10,000 करोड़ रुपये के मिसाइल डील पर बात होगी.  साथ ही, S-500 (S-400 का अपग्रेड वर्जन) खरीदने की चर्चा भी है. रूस ने आश्वासन दिया है कि यूक्रेन युद्ध के बावजूद बाकी डिलीवरी 2026 तक हो जाएगी. भारत S-400 को Akash, Spyder और MRSAM से जोड़कर लेयर्ड डिफेंस बना रहा है. चुनौतियां और भविष्य S-400 की कीमत और रखरखाव महंगा है. अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की धमकी दी थी, लेकिन भारत ने इसे नजरअंदाज किया है. यूक्रेन युद्ध ने दिखाया कि कोई सिस्टम परफेक्ट नहीं – यूक्रेन ने कई S-400 नष्ट किए. लेकिन अपग्रेड से यह कमजोरी दूर हो सकती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अपग्रेड भारत-पाक और भारत-चीन बॉर्डर पर गेम-चेंजर बनेगा. रूस का दावा है कि S-400 अब असामान्य क्षमताओं वाला हो गया है. अगर भारत को अपग्रेड वर्जन मिला, तो हमारी एयर डिफेंस दुनिया की सबसे मजबूत हो जाएगी.

मध्यप्रदेश ने नक्सलवाद से मुक्ति पाई, सीएम मोहन यादव ने बीजेपी सरकार के दो साल पूरे होने से पहले किया ऐलान

भोपाल  मध्य प्रदेश देश का पहला नक्सल मुक्त राज्य बन गया है. ये घोषणा खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की है. खास बात ये है कि मध्य प्रदेश सरकार ने ये उपलब्धि निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर ली है.  मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बालाघाट में 11 दिसंबर को आखिरी दो नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. दीपक उइके और रोहित ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्चुअल मौजूदगी में सरेंडर किया – और इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित कर दिया. ये भी संयोग है कि 13 दिसंबर को मोहन यादव की सरकार के दो साल पूरे होने जा रहे हैं, और दो दिन पहले ही ये उपलब्धि हासिल हुई है. देश के पहले नक्सल मुक्त राज्य बनने की कहानी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सूबे को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 26 जनवरी की तारीख तय कर रखी थी, लेकिन लक्ष्य करीब डेढ़ महीने पहले ही हासिल हो गया.  मोहन यादव को ये मौका बीजेपी की नई सरकार के दो साल पूरे होने से पहले ही मिल गया. दो साल के शासन की ये सबसे बड़ी उपलब्धि मिल गई है.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 2026 में नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य पहले ही निर्धारित कर रखा है. और, इसके लिए मार्च तक का लक्ष्य रखा है – मध्य प्रदेश ने इस मामले में पहले ही बाजी मार ली है.  मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुताबिक, MMC जोन में बीते 42 दिनों में 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ को नक्सल प्रभावित इलाकों की MMC जोन कैटेगरी में रखा गया है.  मोहन यादव ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 42 नक्सलियों पर कुल 7.75 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. और, 2025 में अकेले मध्य प्रदेश में, राज्य की पुलिस ने 13 नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराया, जबकि 10 एनकाउंटर में मारे गए.  मध्य प्रदेश के तीन जिले बालाघाट, डिंडोरी और मंडला नक्सल प्रभावित थे, जो दीपक उइके और रोहित के सरेंडर के बाद पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुके हैं.  नक्सलियों के न भूलने वाले कारनामे बालाघाट मध्य प्रदेश का वो इलाका है जिसकी सीमा महाराष्ट्र के गोंदिया, और छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव लगती है – और ये पूरा इलाका माओवादी हिंसा से बुरी तरह प्रभावित रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बालाघाट की वो घटना भी याद दिलाई, जब मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे लखीराम कावरे की नक्सलियों ने घर में घुसकर उनको बाहर निकाला और बेरहमी से मौत के घात उतार डाला. ये 1999 की घटना है, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे, और कांग्रेस की सरकार थी.   1. लखीराम कावरे बालाघाट के ही रहने वाले थे. वो अपने गांव में रहते थे दिग्विजय सिंह ने 1998 में जब दूसरी बार सरकार बनाई तो लखीराम कावरे को परिवहन मंत्री बनाया.  लखीराम कावरे गांव में अपने घर पर थे. अचानक ही माओवादियों ने उनका घर चारों तरफ से घेर लिया. लखीराम कावरे को घर से बाहर निकाला और वहीं कुल्हाड़ी से काट डाला – 15 दिसंबर, 1999 का दिन शायद ही कभी कोई भूल पाए.  2. छत्तीसगढ़ की भी नक्सल हमले की एक घटना कभी न भूलने वाली है. 2013 के आखिर में विधानसभा के लिए चुनाव होने थे, और कांग्रेस जोर शोर से तैयारी कर रही थी. बीजेपी की सरकार थी, और डॉक्टर रमन सिंह मुख्यमंत्री थे. तब कांग्रेस नेता बीजेपी सरकार के खिलाफ परिवर्तन रैली कर रहे थे.  25 मई, 2013 को सुकमा में कांग्रेस की परिवर्तन रैली थी. रैली खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था. कांग्रेस नेताओं के काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं, और उनमें करीब 200 नेता सवार थे. शाम के 4 बज रहे थे, और कांग्रेस का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था. रास्ते में पेड़ काटकर गिरा दिए गए थे. रास्ता बंद होने के कारण एक के पीछे एक सारी गाड़ियां रुक गईं, और इससे पहले कि किसी को कुछ समझ आ पाता, आस पास के पेड़ों के पीछे छिपे नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. हमलावरों ने सभी गाड़ियों को निशाना बनाया. करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही.  करीब साढ़े पांच बजे हमलावरों का एक जत्था मौके पर पहुंचकर चेक कर रहे थे कि कोई जिंदा तो नहीं बचा है. जो जिंदा बचे थे, उनको पकड़कर बंधक बना रहे थे, और जो जो मरे हुए समझ में आ रहे थे, उनको भी फिर से गोली मार रहे थे, और चाकू से भी वार कर रहे थे, ताकि जिंदा बचने की कोई गुंजाइश न रहे.  तभी महेंद्र कर्मा अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, और बोले,  ‘मुझे बंधक बना लो, बाकियों को छोड़ दो.’ नक्स्लिी महेंद्र कर्मा को थोड़ी दूर तक ले गए, और उनको भी मार डाला. असल में, ‘सलवा जुडूम’ का नेतृत्व करने की वजह से नक्सली उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे. महेंद्र कर्मा के शरीर पर नक्सलियों ने चाकू से 50 से ज्यादा वार किए थे, और करीब 100 गोलियां भी दागी थी – बताते हैं, हत्या के बाद नक्सलियों ने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था. हमले में महेंद्र कर्मा, कांग्रेस नेता नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल सहित 30 लोग मारे गए थे. घायलों में केंद्रीय मंत्री रहे वीसी शुक्ल भी घायल हुए थे.  सरेंडर कर चुके एक नक्सली की पुराने साथियों से अपील  नक्सलियों को सबसे बड़ा झटका लगा है हिडमा के मारे जाने के बाद. आंध्र प्रदेश में हुए एक मुठभेड़ में नक्सली कमांडर हिडमा की मौत के एक दिन बाद पूर्व नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​भूपति पुराने साथियों से एक बड़ी अपील की. मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​भूपति ने 15 अक्टूबर को ही 60 नक्सलियों के साथ सरेंडर किया था. भूपति की अपील का वीडियो गढ़चिरौली पुलिस की तरफ से जारी किया गया है.  भूपति ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) कैडर से सशस्त्र संघर्ष छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है. भूपति का कहना है, ‘यह बहुत चिंताजनक मसला है… मैं आपको बताना चाहता हूं… हमने लगभग डेढ़ महीने पहले सशस्त्र संघर्ष छोड़ दिया था… क्योंकि हमें एहसास हुआ कि बदलते हालात में … Read more

आगरा-ग्वालियर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे: 45 मिनट में तय होगा सफर, 85 किमी में तीन एंट्री और एग्जिट प्वाइंट

ग्वालियर  आगरा-ग्वालियर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे में आगरा से ग्वालियर के बीच 85 किलोमीटर के दायरे में तीन एंट्री और तीन एग्जिट प्वाइंट तय किए गए हैं। इस व्यवस्था से यातायात को सुगम बनाया जा सकेगा। इसका फायदा यह होगा कि ग्रीन फील्ड से ग्वालियर आने वाले वाहन 45 मिनट में पहुंच सकेंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ग्वालियर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर उमाकांत मीणा ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे का कार्य जल्द ही शुरू होगा। इस निर्माण के बाद आगरा से ग्वालियर 4 घंटे का सफर केवल 45 मिनट में पूरा हो सकेगा। उन्होंने बताया कि आगरा-ग्वालियर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर प्रवेश और बाहर निकलने के लिए तीन प्वाइंट नूराबाद-मालनपुर, धौलपुर राजाखेड़ा-आगरा और दिमनी पर बनेंगे। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के किनारे कहीं भी स्थानीय ब्रिज भी नहीं होंगे। अधिकारियों ने बताया कि ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के चालू हो जाने से ग्वालियर तक पहुंचने में लगने वाले समय की बचत होगी और दुर्घटना की संभावना भी कम होगी।  ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे ग्वालियर से निकलकर आगरा में यमुना एक्सप्रेसवे से कनेक्ट कर दिया जाएगा, ताकि ग्वालियर से दिल्ली-नोएडा जाने वाले वाहन दो घंटे 45 मिनट में यात्रा पूरी कर सकें। इसके एग्जिट व एंट्री प्वाइंट से पुराना ग्वालियर-आगरा राजमार्ग और ग्वालियर-इटावा राजमार्ग भी कनेक्ट हो जाएगा, ताकि वाहन चालकों को अपने गंतव्य के लिए असुविधा नहीं हो। 

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर नवविवाहित कपल का प्राइवेट वीडियो वायरल, पुलिस ने तीन ATMS कर्मियों को किया गिरफ्तार

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने यहां सफर करने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा और निजता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. एक्सप्रेसवे पर लगाए गए हाईटेक कैमरे जहां गाड़ियों की स्पीड मॉनिटर करते हैं, वहीं अब यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मचारी इन कैमरों का दुरुपयोग कर लोगों की निजी जिंदगी में झांक रहे हैं. एक ताजा घटना में नव विवाहित कपल को वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया, वसूली की गई और बाद में उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया. यह घटना 25 अक्टूबर की है. आजमगढ़ से लखनऊ जा रहे एक नव विवाहित कपल की कार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 93 किलोमीटर प्वाइंट से गुजर रही थी. हलियापुर टोल के अंतर्गत बने ATMS कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारियों की नजर CCTV स्क्रीन पर इस कार पर गई. कार के अंदर पति-पत्नी रोमांस कर रहे थे. कैमरे से वीडियो बनाकर कंट्रोल रूम के कर्मियों ने पहले दीवार पर लगी स्क्रीन पर इसे रिकॉर्ड किया और फिर कपल को ब्लैकमेल करने की योजना बनाई. कार में पति-पत्नी कर रहे थे रोमांस  वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद दो ATMS कर्मचारी करीब 13 किलोमीटर तक बाइक से उस कार का पीछा करते हुए पहुंचे. कार चला रहे युवक को रोककर उसे वीडियो दिखाया और वायरल करने की धमकी दी. इसके बदले में पैसे की मांग की गई. कार से बातचीत करने वाला CCTV फुटेज भी सामने आया है जिसमें कर्मचारी युवक को धमकाते नजर आ रहे हैं. चार दिन बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस हरकत में आई. जांच शुरू हुई तो ATMS के असिस्टेंट मैनेजर आशुतोष सरकार को हिरासत में लिया गया. पूछताछ में उसने चौंकाने वाला दावा किया कि बीते ढाई साल में ऐसे हजारों मामले सामने आए हैं, लेकिन वीडियो कभी वायरल नहीं हुआ इसलिए मामला खुला नहीं. इस बार वीडियो वायरल कराने में नौकरी से निकाले गए कुछ कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है. प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया हुआ था वायरल सरकार ने करोड़ों की लागत से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर यात्रा मिले. एक्सप्रेसवे पर हर 10 किलोमीटर पर स्मार्ट CCTV लगाए गए जो स्पीड चेक करते हैं और आकस्मिक घटनाओं पर तुरंत सूचना देते हैं. टोल पर पुलिस, फायर विभाग और YUPIDA के वाहन भी तैनात रहते हैं. लेकिन ATMS का काम संभाल रही कंपनी SCIPL Superwave Communication and Infra Solutions Pvt Ltd के कुछ कर्मियों ने इस सिस्टम को ब्लैकमेलिंग का अड्डा बना दिया. हमारी टीम जब हलियापुर टोल के ATMS कंट्रोल रूम में पहुंची तो वहां अयोध्या के ब्रजेश उपाध्याय मिले. वह पिछले 15 दिनों से अपने भांजे के एक्सीडेंट का CCTV फुटेज ढूंढने के लिए यहां चक्कर लगा रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके भांजे की गाड़ी को टक्कर किसने मारी, यह खोजने के लिए वह उसी दिन का फुटेज मांग रहे हैं लेकिन कंट्रोल रूम में वह फुटेज उपलब्ध नहीं है. ब्लैकमेलिंग के लिए बनाया था वीडियो यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि जहां ब्लैकमेलिंग के लिए वीडियो आसानी से बनाया और निकाला जा रहा था, वहीं जरूरतमंद लोगों के लिए जरूरी रिकॉर्ड मिल नहीं रहा. एक ओर ATMS कर्मचारी कपल का पीछा करते हुए 13 किलोमीटर तक पहुंच जाते हैं, वहीं दूसरी ओर एक्सीडेंट जैसे गंभीर मामलों के रिकॉर्ड ढूंढे नहीं मिलते. फिलहाल पुलिस ने कपल को ब्लैकमेल करने वाले ATMS के असिस्टेंट मैनेजर आशुतोष सरकार, कर्मचारी अभिषेक तिवारी और सिस्टम इंजीनियर प्रमोद पटेल को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि वीडियो वायरल करने वाला शशांक शेखर सिंह अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है. टोल के आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल हलियापुर टोल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में भी डर का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि यह कैमरे सुरक्षा के लिए लगाए गए थे लेकिन अब यह उनके लिए खतरा बन गए हैं. कैमरे खेतों में काम कर रही महिलाओं तक को कैद कर सकते हैं. गांव वालों का कहना है कि कैमरों की पहुंच बहुत गहरी है और यह पता नहीं कि बीते ढाई सालों में कितने वीडियो रिकॉर्ड होकर वायरल हुए होंगे. कंपनी ने इस मामले में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है और अब कंट्रोल रूम में काम कर रहे सभी कर्मचारियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है. पुलिस जांच जारी है और इस मामले ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल उठा दिया है.

तानसेन समारोह 2025 में 114 कलाकार करेंगे लाइव पेंटिंग, 10 राष्ट्रीय स्तर के चित्रकार भी भाग लेंगे

ग्वालियर  विश्वविख्यात अखिल भारतीय तानसेन समारोह की शुरुआत 15 दिसंबर से तानसेन समाधि स्थल पर होने जा रही है। इस दौरान चार दिन तक सजीव चित्रांकन भी रहेगा, जिसकी शुरुआत समारोह की शुरुआत के साथ 15 दिसंबर से ही होगी। इसमें देशभर से 114 कलाकार भाग लेंगे। वे समारोह के दौरान अपने कल्पना के रंगों को कैनवास पर उकेरते नजर आएंगे। इनमें राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध 10 कलाकार भी लाइव चित्रांकन करेंगे। ललित कला संस्थान इंदौर, ललित कला संस्थान धार, ललित कला संस्थान खंडवा और ललित कला संस्थान जबलपुर के छात्र-छात्राएं भी चित्र बनाते नजर जाएंगे। संस्कृति विभाग ने सजीव चित्रांकन के लिए कलाकारों की सूची जारी कर दी है। उल्लेखनीय है कि सजीव चित्रांकन का लुत्फ संगीतप्रेमी 18 दिसंबर तक समाधि स्थल पर सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक उठा सकेंगे। 19 दिसंबर को सुबह की सभा बेहट और शाम की सभा गूजरी महल में होगी। इसके पूर्व 14 दिसंबर को इंटक मैदान में पूर्व रंग गमक कार्यक्रम होगा, जिसमें सूफी गायिका जसपिंदर नरूला प्रस्तुति देंगी। पुणे से नवनाथ, मुंबई से सुमित्रा, कोल्हापुर से अरुण बनाएंगे पेंटिंग सजीव चित्रांकन में शहर के 30 कलाकारों को मौका दिया जा रहा है। साथ ही राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय एवं ललित कला संस्थान ग्वालियर के 50 छात्र-छात्राएं, प्रदेश के ललित कला संस्था इंदौर, धार, खंडवा, जबलपुर से 24 कलाकार शामिल होंगे। इसके अलावा 10 राष्ट्रीय स्तर के कलाकार शामिल होंगे, जिनमें भोपाल से आलोक भावसार, पुणे से नवनाथ क्षीरसागर, कोल्हापुर से अरुण सुतार, जयपुर से कृष्ण कुमार कुंडारा, भुवनेश्वर से रघुनाथ साहू, भोपाल से दुर्गा बाई व्यास, दिल्ली से सुमित्रा अहलावत, मुंबई से निशिकांत पलांदे, उदयपुर से मदीप शर्मा, महाराष्ट्र से संदीप अहीर आएंगे। प्रदर्शनी में 76 कलाकारों की पेंटिंग का होगा प्रदर्शन समारोह के दौरान तानसेन समारोह की प्रस्तुतियों पर एकाग्र चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें 76 कलाकारों की पेंटिंग शामिल की गई हैं, जिन्हें डिस्प्ले किया जाएगा। संगीत रसिकों के अवलोकन के लिए यह सुबह 10 बजे से रात तक खुली रहेगी।