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CAA के तहत असम में पहली नागरिकता मंजूर, बांग्लादेशी मूल की महिला बनी भारत की नागरिक

दिसपुर  असम के श्रीभूमि जिले में रहने वाली 40 वर्षीय एक महिला को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। यह असम में CAA के अंतर्गत नागरिकता पाने वाली पहली महिला हैं और राज्य में रजिस्ट्रेशन रूट से नागरिकता हासिल करने वाली भी पहली व्यक्ति मानी जा रही हैं। यह महिला 2007 में बांग्लादेश से भारत आई थीं और श्रीभूमि जिले में रह रही थीं। बता दें कि श्रीभूमि जिले का नाम पहले करीमगंज था। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व विदेशी न्यायाधिकरण (FT) सदस्य धर्मानंद देब ने इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिला अब बनर्जी उपनाम का उपयोग करती हैं, वर्ष 2007 में बांग्लादेश से भारत आई थीं। वह सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के लिए अपने एक रिश्तेदार के साथ सिलचर पहुंची थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात श्रीभूमि जिले के एक स्थानीय युवक से हुई, दोनों ने विवाह किया और महिला भारत में ही रहने लगीं। बाद में दंपति का एक बेटा भी हुआ। हालांकि महिला का परिवार अब भी बांग्लादेश के चटगांव में रहता है, लेकिन वह लंबे समय से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की इच्छा रखती थीं। नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियम अधिसूचित होने के बाद उन्होंने पिछले साल जुलाई में नागरिकता के लिए आवेदन किया। पहला आवेदन हुआ था खारिज रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मानंद देब ने बताया कि महिला का पहला आवेदन लोकसभा चुनाव से पहले हुए परिसीमन (डिलिमिटेशन) अभ्यास के कारण उत्पन्न भ्रम की वजह से खारिज हो गया था। महिला जिस बदरपुर क्षेत्र में रहती हैं, उसका एक हिस्सा श्रीभूमि जिले से हटाकर कछार जिले में शामिल कर दिया गया था। इससे जिला अधिकार क्षेत्र को लेकर असमंजस पैदा हो गया। इसके बाद अधिवक्ता ने दोबारा आवेदन किया और सभी दस्तावेजों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया। अंततः महिला का मामला स्वीकृत कर लिया गया। कानूनी प्रावधानों के तहत मिली नागरिकता धर्मानंद देब ने बताया कि महिला को नागरिकता- नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5(1)(c) को धारा 6B के तहत दी गई है। इस प्रावधान के तहत किसी भारतीय नागरिक से विवाह करने वाला व्यक्ति, यदि वह भारत में कम से कम सात वर्ष तक निवास कर चुका हो, तो पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि असम में यह पहला मामला है जिसमें CAA के तहत रजिस्ट्रेशन रूट से नागरिकता दी गई है। एक अन्य व्यक्ति को भी मिली नागरिकता इस महिला के अलावा कछार जिले के 61 वर्षीय एक पुरुष को भी CAA के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। गृह मंत्रालय (MHA) ने शुक्रवार को दोनों को नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए। नागरिकता को उनके भारत में प्रवेश की तिथि से प्रभावी माना गया है। भावित सामाजिक उत्पीड़न को देखते हुए दोनों नए नागरिकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। CAA को लेकर असम में विरोध गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 11 दिसंबर 2019 को पारित किया गया था, जिसके बाद असम सहित पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। नियम अधिसूचित होने के बाद अब तक असम में लगभग 40 लोगों ने CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है। CAA के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, ईसाई, बौद्ध, सिख, जैन और पारसी समुदाय के वे प्रवासी, जो 25 मार्च 1971 से 31 दिसंबर 2014 के बीच भारत आए थे, वे नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। असम में लगभग दो लाख लोग अब भी ‘संदिग्ध नागरिक’ के रूप में चिन्हित हैं, लेकिन अब तक बहुत कम लोगों ने CAA के तहत आवेदन किया है। मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा कई बार कह चुके हैं कि असम में अधिकांश हिंदू प्रवासी 1971 की कट-ऑफ तारीख से पहले ही आ चुके थे। CAA के तहत पहली महिला को नागरिकता मिलने को असम में इस कानून के क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

“महासमुंद में अवैध धान भंडारण और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 4 प्रकरणों में 2112 कट्टा धान जब्त

महासमुंद राज्य शासन के मंशानुरूप, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से प्राप्त निर्देशों के पालन में जिले में अवैध रबी एवं खरीफ धान के संग्रहण एवं परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राजस्व, मंडी विभाग एवं संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से विभिन्न तहसीलों में की गई कार्रवाई के दौरान कुल 2112 कट्टा धान जब्त किया गया है।  विकासखंड सरायपाली अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनुपमा आनंद के नेतृत्व में ग्राम बारडोली में रवि फसल का 95 कट्टा धान जब्त किया गया। वहीं ग्राम चनाट में कार्रवाई करते हुए 267 पैकेट अवैध रबी धान पकड़ा गया। इसके अलावा रात्रिकालीन गश्त के दौरान सराईपाली–सरसिवा मार्ग पर बगयीजोर के पास धान से लदे 5 वाहन जिसमें 4 माजदा एवं 1 छोटा हाथी जब्त किए गए। इन वाहनों से कुल 750 पैकेट, लगभग 300 क्विंटल धान बरामद किया गया, जिसे थाना सरायपाली की सुपुर्दगी में दिया गया है। वहीं विकासखण्ड पिथौरा अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बजरंग वर्मा के नेतृत्व में ग्राम टोंगोपथरा में धनुर्जय साहू के निवास पर छापेमारी के दौरान लगभग 1000 कट्टा धान का अवैध संग्रहण पाया गया। उक्त धान को जब्त कर कृषि उपज मंडी पिथौरा को सुपुर्द किया गया।  यह कार्रवाई शासन द्वारा निर्धारित नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु की गई है। जिला प्रशासन ने कहा है कि अवैध धान संग्रहण एवं परिवहन के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

आज से आगामी एक सप्ताह पीएम आवास के लिए डेडीकेटेड, सभी अप्रारम्भ

सूरजपुर : पीएम आवास के एक-एक हितग्राही तक पहुंच रही है टीम आज से आगामी एक सप्ताह पीएम आवास के लिए डेडीकेटेड, सभी अप्रारम्भ  आवासों को प्रारम्भ एवं प्रगतिरत आवासों को पूर्ण करने का लक्ष्य समस्त स्वीकृत आवासों को 31 जनवरी तक पूर्ण करने का है लक्ष्य सूरजपुर कलेक्टर एस जयवर्धन के निर्देश व सीईओ जिला पंचायत विजेंद्र सिंह पाटले के  मार्गदर्शन  में पीएम आवास ग्रामीण निरन्तर प्रगति के लिए कार्य कर रहा है। विगत दो वर्षों में 34784 आवास स्वीकृत, 30776 आवास पूर्ण एवं 349 करोड़ से अधिक की राशि हितग्राहियों के खातों में हस्तांतरित कर जिले ने एक कीर्तिमान स्थापित किया है। पूरी तरह पारदर्शी पीएम आवास योजना ग्रामीण योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु प्रशासन सतत् प्रयासरत है।  उक्त तारतम्य में आज से आगामी 7 दिन डेडीकेटेड पीएम आवास के निर्माण में फोकस करने के लिए रखा गया है। इसके अंतर्गत आवास निर्माण के लिए लंबित हितग्राहियों को बुलाकर जगह जगह आवास चौपाल, निरंतर फील्ड विजिट, क्लस्टर के सभी स्टाफो की मीटिंग, हितग्राहियों से फोन के माध्यम से बात करने जैसे कार्य किए जा रहे है। ताकि जितने आवास अप्रारम्भ है उन्हें प्रारम्भ, और प्लिंथ से ऊपर स्तर पर है उन्हें तत्काल पूर्ण करा लिए जाए तथा हितग्राहियों को सभी किस्तें समय पर प्रदाय कर दी जाए। इस उद्देश्य के साथ यह सप्ताह जिला प्रशासन द्वारा शासन की महत्वाकांक्षी पीएम आवास योजना ग्रामीण में प्रगति के लिए पूरी तरह समर्पित है। आवास निर्माण की दृष्टि से दिसंबर एवं जनवरी सबसे अनुकूल समय है, इस समय अधिक से अधिक आवास पूर्ण किए जा सकते है। हितग्राहियों के सभी प्रकार के समस्याओं का समाधान करते हुए, इन्हें लगातार आवास निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सामग्री की व्यवस्था से लेकर मिस्त्री एवं आवश्यकतानुसार बिहान योजना से हितग्राहियों को लोन का प्रावधान कराने जैसे सारे प्रयास किए जा रहे है ताकि निर्माण कार्य में तेजी आ सके। उक्त निर्माण कार्य समाप्ति उपरान्त आवास प्लस 2024 के माध्यम से सर्वेक्षित हुए, पात्र परिवारों को आवास से लाभान्वित करने की कार्यवाही प्रारंभ की जावेगी।  जिला प्रशासन का हितग्राहियों से अपील है कि अपने आवास को आप जल्दी से पूर्ण कराते हुए, आवास की सभी किश्तों को प्राप्त कर लीजिए। किसी के बहकावे में आकर आवास की राशि किसी भी अन्य व्यक्ति या अन्य कार्यों में खर्च कदापि ना करें। किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर +91-9244049285 पर सीधे संपर्क कर सकते है। 

इंडिगो विवाद: बीमारी से जूझ रहे कैप्टन पर गिरी गाज, कंपनी ने संकट का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ा!

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में जारी ऑपरेशनल संकट के बीच नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के एक बड़े फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। विमानन विशेषज्ञों ने DGCA द्वारा चार वरिष्ठ फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स (FOIs) की सेवाएं समाप्त किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि इनमें से कुछ अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में विमानन विशेषज्ञ संजय लाजर ने कहा कि उन्हें एक चौंकाने वाली सच्चाई पता चली है। उन्होंने लिखा कि चार में से कुछ पायलट ऐसे हैं जिनका इंडिगो संकट से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। लाजर ने विशेष रूप से कैप्टन अनिल कुमार पोखरियाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह एडवांस स्टेज कैंसर से जूझ रहे हैं, अस्पताल में भर्ती हैं और काफी पहले ही इस्तीफा दे चुके थे। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई की गई। DGCA ने 11 दिसंबर को चार FOI को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। बर्खास्त किए गए अधिकारियों के नाम हैं:     रिषि राज चटर्जी (कंसल्टेंट, डिप्टी चीफ FOI)     सीमा झामनानी (सीनियर FOI)     अनिल कुमार पोखरियाल (कंसल्टेंट, FOI)     प्रियम कौशिक (कंसल्टेंट, FOI) लाजर ने एक वाट्सऐप चैट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा- मुझे अभी एक चौंकाने वाली सच्चाई पता चली है कि इन 4 पायलटों में से कुछ को किसी और के अपराधों के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है। कैप्टन पोखरियाल हॉस्पिटल में हैं और उन्हें एडवांस कैंसर है और उन्होंने बहुत पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनका FDTL से भी कोई लेना-देना नहीं था (बाकी 2 लोगों का भी यही हाल है) इन लोगों को फंसाया जा रहा है। कैप्टन, नोटिस के आधार पर आपको जज करने के लिए माफी चाहता हूं और जल्दी ठीक हो जाइए। लाजर के अलावा, डॉ. नीलिमा श्रीवास्तव नाम की एक यूजर ने एक्स पर लिखा- इंडिगो संकट में DGCA द्वारा सस्पेंड किए गए चार FOI में से एक, अनिल कुमार पोखरियाल पिछले एक महीने से एडवांस कैंसर से जूझते हुए अस्पताल में हैं। उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और FDTL मामलों में शामिल नहीं थे, फिर भी उनका नाम लिया गया है। एक ऐसे व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जा रहा है जिसने 35 साल तक सेना में सेवा की, जबकि सिस्टम की कमियों पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों पर दोष लगाना सबसे आसान होता है। असली जवाबदेही अभी भी अछूती है। हड़बड़ी में लिया गया फैसला या जिम्मेदारी से बचाव? इन गंभीर आरोपों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या DGCA ने बिना पूरी जांच के यह कार्रवाई कर दी या फिर ऊपरी स्तर पर हुई चूकों से ध्यान हटाने के लिए कुछ अधिकारियों को निशाना बनाया गया। खासतौर पर तब, जब इंडिगो में सामने आई अव्यवस्थाओं की जड़ नई पायलट ड्यूटी और रेस्ट नियमों के क्रियान्वयन में बताई जा रही है। बीते दिनों इंडिगो के घरेलू नेटवर्क में भारी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं, क्रू शेड्यूलिंग फेल रही और यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इन समस्याओं को नई ड्यूटी और रेस्ट नॉर्म्स से जुड़ी प्लानिंग की चूक से जोड़ा जा रहा है। फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स का क्या काम होता है? फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स यानी FOI, नागर विमानन महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं जो इसके नियामक एवं सुरक्षा निरीक्षण कार्यों को अंजाम देते हैं और अकसर विमानन कंपनी के परिचालन की निगरानी के लिए तैनात किए जाते हैं। इस बीच इंडिगो में परिचालन संकट की जांच कर रही उच्चस्तरीय समिति के समक्ष एयरलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन पेश हुए। सूत्रों ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की तरफ से गठित चार-सदस्यीय समिति ने एयरलाइन के सीईओ के अलावा मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) इसिद्रो पोर्केरास से भी कई घंटों तक पूछताछ की। सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि एयरलाइन के दोनों शीर्ष अधिकारियों को चार-सदस्यीय पैनल के सामने अलग-अलग बुलाया गया। एल्बर्स करीब सात घंटे और पोर्केरास लगभग पांच घंटे पैनल के समक्ष रहे। इस दौरान समिति ने इंडिगो के परिचालन में पैदा हुए व्यापक व्यवधान से जुड़े बिंदुओं पर कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से सवाल पूछे।

रायपुर: विशेष लेख – फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर बना मध्यभारत में दिव्यांगों के पुनर्वास का प्रमुख उदाहरण

रायपुर : विशेष लेख : फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर बना मध्यभारत में दिव्यांग पुनर्वास की मिसाल रायपुर छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2012 में स्थापित फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर, माना कैम्प ने दिव्यांगजन पुनर्वास और कृत्रिम अंग निर्माण के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य करते हुए मध्यभारत में एक आदर्श और अग्रणी संस्थान के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी चिकित्सकीय एवं तकनीकी विशेषज्ञों की समर्पित टीम और मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित कार्य संस्कृति के चलते यह केंद्र आज केवल एक उपचार या तकनीकी सुविधा का स्थान नहीं, बल्कि हजारों दिव्यांगजनों के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मानपूर्ण जीवन और नए भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुका है। राज्य ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में दिव्यांगजन यहाँ पहुँचकर पुनर्वास सेवाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे यह केंद्र छत्तीसगढ़ की सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेदनशील शासन व्यवस्था का प्रभावी प्रतीक बनकर उभरा है। सात हजार से अधिक दिव्यांगजनों को मिला नया जीवन केंद्र द्वारा अब तक 7000 से अधिक कृत्रिम हाथ-पैर एवं प्रोस्थेटिक उपकरण निःशुल्क तैयार कर वितरित किए गए हैं। इन उपकरणों से अनेक दिव्यांगजन दोबारा चलने-फिरने और कामकाज में सक्षम हुए, युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले, विद्यार्थी पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े और बुजुर्गों ने स्वतंत्र रूप से जीवन जीने की क्षमता प्राप्त की। यह सहायता केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक सहभागिता को भी सशक्त करती है। आधुनिक तकनीक से सटीक और निःशुल्क सेवाएँ फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर में आधुनिक मापन तकनीक, उच्च गुणवत्ता सामग्री और अनुभवी तकनीशियनों की टीम द्वारा प्रत्येक लाभार्थी की आवश्यकता के अनुरूप टिकाऊ प्रोस्थेटिक और ऑर्थाेटिक उपकरण तैयार किए जाते हैं। केंद्र की सभी सेवाएँ पूर्णतः निःशुल्क हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दिव्यांगजनों को भी उच्च गुणवत्ता की सुविधाएँ सुलभ हो रही हैं। इसके साथ ही व्हीलचेयर, कैलिपर्स, एल्बो क्रचेज़ एवं अन्य सहायक उपकरणों का वितरण कर दैनिक जीवन को और अधिक सुगम बनाया जा रहा है। 3डी तकनीक से और सशक्त होगी पुनर्वास व्यवस्था समाज कल्याण विभाग द्वारा केंद्र को तकनीकी रूप से और उन्नत करने की दिशा में 3डी प्रिंटर आधारित कृत्रिम अंग निर्माण तकनीक शीघ्र शुरू की जा रही है। इस तकनीक से कृत्रिम अंग निर्माण का समय कम होगा, लाभार्थियों के लिए परफेक्ट-फिट उपकरण तैयार किए जा सकेंगे और गुणवत्ता व आराम में उल्लेखनीय सुधार आएगा। यह पहल छत्तीसगढ़ में प्रोस्थेटिक निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है। भविष्य में और जिलों तक पहुँचेगी सेवा विभाग का लक्ष्य आने वाले समय में केंद्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई अत्याधुनिक तकनीकें जोड़ने और सेवाओं का विस्तार दूरस्थ एवं अधिक जिलों तक करने का है, ताकि राज्य का प्रत्येक जरूरतमंद दिव्यांगजन गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाओं से लाभान्वित हो सके। आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का केंद्र फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर केवल एक पुनर्वास संस्थान नहीं, बल्कि हजारों दिव्यांगजनों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। यहाँ से मिलने वाला हर कृत्रिम अंग किसी जीवन को नई दिशा और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।      डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक (जनसंपर्क)

पी. चिदंबरम का कर्नाटक गृहमंत्री पर तीखा हमला, कहा– सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

बेंगलुरु  कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर द्वारा ड्रग तस्करों के घरों पर बुलडोजर ऐक्शन संबंधी बयान दिए जाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने उनकी आलोचना की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वह इस बयान से चिंतित है। माननीय कोर्ट भी यह साफ कर चुका है कि बिना उचित कार्रवाई के घर गिराना कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।   सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चिदंबरम ने कहा, "मैंने कर्नाटक गृहमंत्री का एक रिपोर्टेड बयान पढ़ा। इसमें वह ड्रग तस्करों के ऊपर बुलडोजर ऐक्शन की बात कह रहे हैं। मैं इस बयान से चिंतित हूं। उम्मीद है कि यह रिपोर्ट गलत हो।" पूर्व गृहमंत्री ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट का कानून यह स्पष्ट कर चुका है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के घर गिराना अवैध है और इससे परिवार के अन्य सदस्यों के आवास के अधिकार का उल्लंघन होगा।" उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में सरकार द्वारा चलाई गई बुलडोजर व्यवस्था का कांग्रेस पार्टी लगातार विरोध करती रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "कर्नाटक जैसे कांग्रेस शासित राज्य को उत्तर प्रदेश की राह पर नहीं जाना चाहिए। क्या कहा था परमेश्वर ने? कर्नाटक में बढ़ते ड्रग तस्करों की कमर तोड़ने के लिए सरकार लगातार ऐक्शन में है। गृहमंत्री ने इसी मामले पर एक बयान जारी करते हुए कहा था कि राज्य सरकार इन तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारी न केवल तस्करों पर नजर रख रहे हैं बल्कि उन्हें घर किराए पर देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रहे हैं। सरकार उनके घरों को गिराने पर भी विचार कर रही है।

शादी मंडप में ड्रामा: 20 लाख और कार की डिमांड पर दुल्हन ने कराई दूल्हे की गिरफ्तारी

बरेली  यूपी के बरेली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां शुक्रवार देर रात एक बारात में दहेज को लेकर हंगामा हो गया। दरअसल, सात फेरों से पहले दूल्हे ने कार और 20 लाख रुपए मांग रख दी। वर पक्ष ने कहा कि ऐसा न होने पर सात फेरे नहीं होंगे। वधू पक्ष ने भारी भरकम रुपये और कार देने पर असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर हंगामा हो गया और पुलिस पहुंच गई। तब दूल्हा सात फेरे लेने के स्थान पर हवालात में पहुंच गया। पुलिस ने दूल्हा समेत छह मामला दर्ज कर लिया है। कैंट स्थित युगवीणा में धूमधाम से एक बारात पहुंची। वधू पक्ष ने जोरदार स्वागत भी किया लेकिन शादी में फेरों से पहले दूल्हा और उसके परिवार लोग ब्रेजा कार और 20 लाख रुपए मांगने पर अड़ गए। काफी समझाने बाद भी दहेज लोभी नहीं माने। जिसको लेकर बारात में हंगामा हो गया। जानकारी पर कैंट पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने दूल्हा उसके पिता और जीजा को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि दुल्हन पक्ष की ओर से तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, कैंट थाना क्षेत्र सदर बाजार निवासी मुरली मनोहर की बेटी ज्योति की शादी करीब आठ माह पहले नई बस्ती थाना प्रेम नगर निवासी ऋषभ साथ तय हुई थी। मई महीने में लड़की पक्ष ने शहर के एक बड़े होटल में सगाई की थी। जिसमें लड़की पक्ष का तीन लाख खर्च हुआ था। इसके साथ लड़की पक्ष ने लड़के को सोने की अंगूठी चेन और 5 लाख नगद दिए थे। गुरुवार को लड़की पक्ष लग्न लेकर पहुंचे। इस दौरान लड़की पक्ष ने एसी, फ्रिज और वाशिंग मशीन साथ ही बतौर शगुन एक लाख बीस हजार रुपए नगद दिए।   प्रेमिका के साथ पति को रंगे हाथ पकड़ा, पत्नी ने चप्पलों से की जमकर धुनाई शुक्रवार देर रात लड़का पक्ष बारात लेकर पहुंचा। जहां लड़की पक्ष ने काफी धूमधाम से बारात का स्वागत किया। शादी के दौरान फेरों से पहले दूल्हा पक्ष 20 लाख रुपए नगद और एक ब्रेजा कार लेने पर मांग पर अड़ गए। काफी समझाने के बाद भी दूल्हा और उसके परिवार के लोग नहीं माने। आधी रात तक कार न मिलने की बात कहने पर कर का भी नगद भुगतान करने की मांग करने लगे। इसको लेकर बारात में हंगामा हो गया। दूल्हा पक्ष बारात कैंसल कर वापस लौटा कर ले जाने लगे। सूचना पर पहुंची कैंट पुलिस ने दूल्हा ऋषभ उसके पिता राम अवतार और जीजा को हिरासत में ले लिया। लड़की पक्ष का आरोप है कि शादी लगाने वाले इंद्रपाल ने भी उन्हें लगातार गुमराह किया। लड़की पक्ष ने बताया कि शादी में भी करीब 15 लाख रुपए खर्च आया है। इसके साथ ही रस्म के तौर पर बारात में भी दूल्हे को और उसके परिजनों को सोने की चेन अंगूठी और नकदी दी गई है। कैंट पुलिस ने बताया कि तहरीर आधार पर दूल्हा समेत 6 पर मामला दर्ज कर लिया है।  

पराली जलाने में भारी कमी: Stubble Burning के ताज़ा आंकड़ों ने सबको किया हैरान

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में आसमान अपेक्षाकृत साफ ​​​​रहा है। वायु गुणवत्ता में सुधार आया है। जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। राज्य सरकार ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 2025 में खेतों में आग लगाने की 5,114 घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2021 की तुलना में 93 प्रतिशत तक कम है। हरियाणा में इसके 662 मामले सामने आए, जो 91 प्रतिशत कम हैं। ‘कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन ऐग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस' (CREAMS) प्रयोगशाला से प्राप्त उपग्रह आंकड़ों ने धान की पराली जलाने में भारी कमी का संकेत दिया है, जो 57 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यहां 2023 में इसके कुल 42,962 मामले थे, जो 2024 में घटकर 18,457 हो गए। कई जिलों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। आंकड़ों के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 200 से नीचे रहने वाले दिनों की संख्या 2016 में 110 दिन थी जो 2025 में बढ़कर 200 दिन हो गई है। विशेषज्ञों के हवाले से बयान में कहा गया है कि यह सुधार सरकारी नीतियों, किसानों में जागरूकता, नई कृषि पद्धतियों के उपयोग और निजी क्षेत्र की पहलों का परिणाम है। अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाली कंपनियां किसानों को फसलों के अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए उनका उपयोग करने में मदद कर रही हैं। 

गुरुग्राम को मिलेगी नई सड़क, 6 गांवों की 276 एकड़ भूमि अधिग्रहित करने की अधिसूचना जारी

गुरुग्राम  गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड को गुरुग्राम-सोहना रोड से नई सड़क के माध्यम से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है। भूमि अधिग्रहण विभाग इसके लिए छह गांवों की 276 एकड़ जमीन अधिग्रहीत करेगा। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। अगले महीने अवॉर्ड घोषित करने के बाद मुआवजा जमीन मालिकों को दिया जाएगा। भूमि अधिग्रहण विभाग ने 31 दिसंबर, 2023 को सोहना के गांव बहरामपुर की करीब 26 एकड़, उल्लावास की करीब 17 एकड़, कादरपुर की करीब 77 एकड़, मैदावास की करीब 50 एकड़, घूमसपुर की करीब 54 एकड़, बादशाहपुर की करीब 51 एकड़ जमीन को अधिग्रहण के नोटिस जारी किए थे। जमीन मालिकों ने भूमि अधिग्रहण की धारा 4 के नोटिस के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। जमीन अधिग्रहण पर स्टे हो गया। करीब 11 साल तक यह मामला हाईकोर्ट में चला। अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और भूमि अधिग्रहण विभाग के पक्ष में फैसला आ गया है। मार्च में हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि जमीन अधिग्रहण तो पुरानी नीति से कर सकते हैं, लेकिन जमीन मालिकों को मुआवजा राशि साल 2013 की भूमि अधिग्रहण नीति के मुताबिक देना होगा।   विभाग ने भूमि अधिग्रहण नीति की धारा 6 के तहत जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इसके पश्चात धारा नौ के तहत अवॉर्ड घोषित किया जाएगा। जमीन मालिकों को मुआवजा राशि वितरित करने के पश्चात 150 मीटर चौड़ाई के इस रोड का निर्माण शुरू किया जाएगा। ग्रेटर एसपीआर के लिए जमीन ली जाएगी ग्रेटर एसपीआर (सोहना रोड से लेकर दिल्ली-जयपुर हाईवे को जोड़ने वाली रोड) को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पारित होने के बाद एचएसवीपी और भूमि अधिग्रहण विभाग ने इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिग्रहण को मंजूरी देने की फाइल को मुख्यालय भेजा गया है। साल 2013 की नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत जमीन मालिकों को मुआवजा दिया जाएगा। इसके तहत गांव अकलीमपुर की छह एकड़, टीकली की 63 एकड़, सकतपुर की 68 एकड़, शिकोहपुर की 16 एकड़, नौरंगपुर की 49 एकड़, बाढ गुर्जर की 99 एकड़, मानेसर की 33 एकड़ और नैनवाल की 60 एकड़ का अधिग्रहण किया जाएगा। इस जमीन को धारा 4 के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। समीक्षा बैठक 16 को होगी इन दोनों रोड को लेकर शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी की अध्यक्षता में 16 दिसंबर को बैठक होगी। इसमें एचएसवीपी और भूमि अधिग्रहण विभाग के अधिकारियों से इस रोड के लिए जमीन अधिग्रहण की समीक्षा की जाएगी। बैठक में वाटिका चौक से लेकर द्वारका एक्सप्रेस वे तक प्रस्तावित एलिवेटिड रोड और वाटिका चौक पर क्लोवरलीफ के निर्माण की समीक्षा की होगी।  

सरकार किसानों के साथ: टोकन सिस्टम में समय की बंदिश खत्म

रायपुर : धान खरीदी को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार का निर्णायक कदम: धान विक्रय प्रक्रिया हुई सरल, अब दिन-रात कभी भी मिलेगा तूहर टोकन सरकार किसानों के साथ: टोकन सिस्टम में समय की बंदिश खत्म किसानों के लिए बड़ी सहूलियत: तूहर टोकन ऐप अब 24 घंटे उपलब्ध किसानों की सुविधा सर्वोपरि, टोकन व्यवस्था को बनाया गया सहज रायपुर प्रदेश के किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 खोल दिया गया है। अब मोबाइल एप से टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नहीं रहेगी। किसान दिन-रात किसी भी समय अपनी सुविधा के अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। अब किसान 13 जनवरी तक अगले 20 दिनों तक के लिए टोकन ले सकते हैं।इससे किसानों को धान विक्रय की योजना बनाने और टोकन प्राप्त करने में पर्याप्त समय मिलेगा तथा भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या से राहत मिलेगी। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप से टोकन ले सकेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लघु किसनों के लिए यह सुविधा मुहैया कराई गई है l उल्लेखनीय है कि टोकन प्रत्येक सहकारी समिति को आबंटित सीमा के भीतर ही जारी किए जाएंगे। किसानों से आग्रह है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त करें और किसी भी असुविधा से बचें। *"किसानों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तूहर टोकन ऐप को 24×7 खोलने और समय की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। अब किसान बिना किसी दबाव के, अपनी सुविधा अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिये टोकन की अतिरिक्त समय सीमा और अवधि का विस्तार किसानों को वास्तविक राहत देगा। राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।"-