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दिल्ली-NCR का मौसम करवट पर: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बढ़ी बादल छाया, कोहरा छाने के आसार

नई दिल्ली  मौसम विभाग की मानें तो एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तर पश्चिमी भारत के विभिन्न हिस्सों पर नजर आना शुरू हो गया है। यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तरी पाकिस्तान और उसके आस-पास के इलाकों पर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में दिख रहा है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊंची चोटियों पर हल्की बारिश और हिमपात का अनुमान है। दिल्ली के साथ ही एनसीआर के इलाकों में भी छिटपुट बादल नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान दिल्ली के साथ ही एनसीआर के इलाकों में आंशिक रूप से हल्के बादलों की आवाजाही दिखने का अनुमान जताया है। शाम और सुबह के वक्त धुंध छाने का अनुमान है। मौसम विभाग की मानें तो कल यानी रविवार को भी आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। सुबह के समय अधिकांश जगहों पर हल्का कोहरा नजर आ सकता है। ठंड का असहास कम होगा क्योंकि न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। 15 दिसंबर के बाद से दिल्ली के साथ ही एनसीआर के इलाकों में आसमान साफ रहेगा। दिल्ली में 15 दिसंबर को सुबह के समय अधिकांश जगहों पर हल्का कोहरा रहने का अनुमान है। कुछ जबहों पर मध्यम कोहरा नजर आ सकता है। मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली में 15 और 16 दिसंबर को न्यूनतम तापमान में कुछ कमी देखी जाएगी। 15 के बाद 19 दिसंबर तक दिन में आसमान साफ रहने का अनुमान है। सुबह के वक्त हल्का कोहरा देखा जा सकता है। दिल्ली में 15, 17, 18 और 19 दिसंबर को न्यूनतम तापमान के 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दिल्ली के साथ ही एनसीआर में 15 दिसंबर तक हवा की रफ्तार धीमी रहने का अनुमान है। इससे दिल्ली और एनसीआर में पलूशन बढ़ने का अनुमान है। हालांकि 15 दिसंबर के बाद से हवा की स्पीड में मामूली तेजी देखी जाएगी इससे पलूशन के स्तर में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। कुल मिलाकर अगले छह दिन के दौरान दिल्ली के मौसम उतार चढ़ाव देखा जा सकता है।  

इतिहास की गोल्फ शॉट: जन्मतिथि विशेष पर जानिए दीक्षा डागर की अनोखी ओलंपिक–डेफलंपिक्स उपलब्धि

नई दिल्ली  भारत में गोल्फ धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। दीक्षा डागर का नाम उन खिलाड़ियों में लिया जाता है जिन्होंने गोल्फ को देश में एक सशक्त खेल के रूप में बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। उनकी भूमिका इसलिए भी अहम है क्योंकि शारीरिक अक्षमता के बावजूद उन्होंने उस खेल में बड़ी सफलता हासिल की है जिसे देश में आज भी शीर्ष खेलों की सूची में शामिल होने का इंतजार है। दीक्षा डागर का जन्म 14 दिसंबर 2000 को झज्जर, हरियाणा में हुआ था। दीक्षा बचपन से ही सुनने में कमजोर रही हैं। गोल्फ दीक्षा को विरासत में मिली है। उनके पिता नीरज डागर भी गोल्फर हैं। उन्होंने ही दीक्षा का परिचय गोल्फ से कराया था। 6 साल की उम्र में उन्होंने गोल्फ खेलना शुरू कर दिया था। पिता गोल्फर थे, इसलिए खेल की तकनीक बेटी को जल्द समझ आ गई और इसका असर 2011 में दिखा। 2011 में 11 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप जीता। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2016 में इंग्लैंड के यॉर्कशायर में आयोजित विश्व जूनियर गोल्फ चैंपियनशिप में उन्होंने एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता। इन दो पदकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें पहचान दिलायी। 2017 में ताइपे में हुए डेफलिंपिक्स में दीक्षा ने मिश्रित टीम इवेंट में रजत पदक जीता। इस आयोजन में पदक जीतने वाली वह भारत की पहली महिला गोल्फर बनीं। दीक्षा 'हेरिटेज लेडीज ओपन' और 'लागो ताहो ओपन' जैसे प्रमुख टूर्नामेंट जीत चुकी हैं। दीक्षा ने 2021 में टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लिया था। 24 साल की इस खिलाड़ी ने 2017 डेफलिंपिक्स में रजत जबकि 2021 और 2025 डेफलिंपिक्स में स्वर्ण जीता। टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच और अमेरिकी गोल्फर टाइगर वुड्स को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाली दीक्षा ओलंपिक्स और डेफलंपिक्स दोनों में हिस्सा लेने वाली इतिहास की पहली गोल्फर हैं। भारत सरकार ने 2023 में दीक्षा को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। दीक्षा डागर बेशक अपने आस-पास घटित होने वाली चीजों को सुनने में सक्षम न हों, लेकिन उनके गोल्फ स्टिक से निकलने वाली गेंद की गूंज पूरी दुनिया सुनती है। दृढ़ इच्छाशक्ति की धनी इस खिलाड़ी से भारत को भविष्य में बड़ी उम्मीद है।

कोहरे की दस्तक: हरियाणा के 8 जिलों में अलर्ट, सफर करने वालों के लिए चेतावनी

हरियाणा  हरियाणा के कई जिलों में आज कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग ने 8 जिलों पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद और सोनीपत में गहरी धुंध का अलर्ट जारी किया। वहीं यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 16 दिसंबर से उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना है।  मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा में 24 घंटों के दौरान औसत न्यूनतम तापमान में 0.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार तापमान सामान्य सीमा के आसपास ही बना हुआ है। राज्य में सबसे कम न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस हिसार में दर्ज किया गया। कई जिलों में तापमान सामान्य से 1 से 2 डिग्री कम बना हुआ है। अगले कुछ दिनों में सुबह और रात के समय कोहरा बढ़ने की संभावना है, जिससे ठंड का असर और तेज महसूस होगा।  महेंद्रगढ़ की रात रही सबसे ठंडी राज्य का सबसे कम न्यूनतम तापमान हिसार में 6.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यह तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस कम है। चंडीगढ़ शहर में न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि अंबाला में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.1 डिग्री ज्यादा दर्ज हुआ है। हिसार के बाद महेंद्रगढ़ की रात सबसे ठंडी बीती है।

‘यह जानलेवा लापरवाही है’ — मेस्सी इवेंट कराने वालों पर सख्त हुए राज्यपाल आनंदबोस

कोलकाता  कोलकाता के स्टेडियम में मशहूर फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम में उत्पात को लेकर राज्यपाल सीवी आनंदबोस ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस इवेंट के आयोजकों को तत्काल गिरफ्तार करके उनपर हत्या की कोशिश का मुकदमा ठोक देना चाहिए। वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने मुख्य आयोजक को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। जिन लोगों ने भी इस तरह का कुप्रबंधन किया है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि इस कार्यक्रम की महंगी टिकटों को लेकर भी राज्यपाल ने आपत्ति जताई थी। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टिकटें 10-10 हजार रुपये में बेची गईं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस कार्यक्रम में शामिल होने वाली थीं लेकिन उनके पहुचंने से पहले ही उपद्रव शुरू हो गया। इसके बाद लियोनेल मेस्सी वहां से निकल गए। इससे भीड़ में नाराजगी और बढ़ गई और लोग कुर्सियां तोड़ने लगे। लोकभवन के एक अधकारी ने कहा, राज्यपाल इस घटना से बहुत हैरान हैं। मेस्सी से मिलने जा रहीं मुख्यमंत्री को भी रास्ते से ही लौटना पड़ गया। टिकट का रिफंड दें और स्टेडियम का मुआवजा भरें आयोजक उन्होंने कहा, अगर मुख्यमंत्री को ही रास्ते से लौटना पड़ता है तो यह मामला बेहद गंभीर है। राज्यपाल ने कहा कि जिन लोगों ने भी टिकट खरीदा था उनको रिफंड मिलना चाहिए। इसके अलावा स्टेडियम को हुए नुकसान की भरपाई भी आयोजकों से ही करना चाहिए। जिन पुलिस अधिकारियों ने भी लापरवाही की है उन्हें भी सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए। बोस ने कहा कि सरकार को पता लगाना चाहिए कि आखिर मेस्सी का इस्तेमाल कमोडिटी के तौर पर कैसे होने लगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना के बाद मेसी के साथ-साथ फुटबॉल प्रशंसकों से सार्वजनिक माफी मांगी। उन्होंने एक्स पर एक बयान में कहा कि स्टेडियम में जो कुछ हुआ, उससे "बहुत परेशान और हैरान" है। यहां हजारों दर्शक अपने पसंदीदा फुटबॉलर को देखने की उम्मीद में इकट्ठा हुए थे। उन्होंने कहा कि वह उस समय वह खुद कार्यक्रम स्थल पर जा रही थीं। बनर्जी ने कहा, "मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिये लियोनेल मेसी के साथ-साथ सभी खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से ईमानदारी से माफी मांगती हूं। मैं न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) असीम कुमार राय की अध्यक्षता में एक जांच समिति बना रही हूं। गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव इसके सदस्य होंगे।" मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति को स्टेडियम में व्यवस्था बिगड़ने वाली घटनाओं की जांच करने, कुप्रबंधन के लिये जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। खासकर तब, जब अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से जुड़े बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। बनर्जी ने कहा, "जांच समिति जिम्मेदारी तय करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी। एक बार फिर, मैं सभी खेल प्रेमियों से दिल से माफी मांगती हूं।"

सच से नहीं भाग सकते— सीएम मान ने सिद्धू और चन्नी पर कसा तंज, कही कई बड़ी बातें

पंजाब  पंजाब की राजनीति में चल रही हलचल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विरोधियों पर निशाना साधा है। सीएम मान ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि विरोधी पार्टियां अपने कारणों से चुनाव हारती हैं लेकिन हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ देती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के बैलेट पेपर वाले बयान पर जवाब देते हुए सीएम मान ने कहा कि अकाली दल और कांग्रेस दोनों ने हार मान ली है और अब वे डरे हुए हैं। सीएम मान ने कहा कि, 4 साल बाद सबको पंजाब याद आया है। उन्होंने कहा कि हम पंजाब में किए गए काम के आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू को पूरी तरह फेल कहा जा रहा है और 4 साल बाद जोगी (कैप्टन अमरिंदर सिंह) भी पहाड़ों से नीचे आ गए हैं और BJP को गाली दे रहे हैं। पंजाब को बिकने का सामान समझने वाले ये लोग चुनाव के करीब नीचे आ जाएंगे। सुखजिंदर सिंह रंधावा पर निशाना साधते हुए उन्हें 2.5 km दूर का मुख्यमंत्री और अपने होम टाउन डेरा बाबा नानक से हारने वाला बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री मान नवजोत सिद्धू पर भी तीखा हमला किया और कहा कि जब सिद्धू के पास मंत्रालय होता, तब वे पंजाब को सुधार देते। उन्होंने आम लोगों से अपील की और कहा कि वे सिर्फ अच्छे लोगों को वोट दें जो उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात 20.53 करोड़ की मिली स्वीकृति

रायपुर अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी का मतलब ऐसी अकादमी से है जहाँ खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बेहतरीन सुविधाएं (जैसे हॉस्टल, इनडोर/आउटडोर रेंज) मिलती हैं, ताकि वे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में जशपुर जिले को एक और बड़ी सौगात मिली है। जिले के बगीचा विकासखंड के पंडरा पाठ में अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी (आर्चरी सेंटर) के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गई है।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण हेतु एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा सीएसआर फंड से 20.53 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। युवा तीरंदाजों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा नई तीरंदाजी अकादमी बनने से जिले के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएँ मिलेंगी। यह पहल आने वाले समय में जशपुर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतिभाओं का हब बनाने में निर्णायक साबित होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें विश्व पटल तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता का यह एक और बड़ा उदाहरण है। अकादमी के बनने से जशपुर न केवल खेल के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा, बल्कि यह देश के युवा तीरंदाजों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभरेगा। यह पहल खेलों के विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा हैं।  वित्तीय सहयोग एनटीपीसी के सामाजिक उत्तरदायित्व विभाग से  तीरंदाजी अकादमी के निर्माण में एनटीपीसी लिमिटेड अपनी कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। यहां आउटडोर और वातानुकूलित इनडोर तीरंदाजी रेंज, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, छात्रावास जैसे निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं।जशपुर के युवाओं में इस घोषणा को लेकर उत्साह का माहौल है और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वां वेतन आयोग कब लागू होगा, सरकार ने किया साफ

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने इस नए वेतन आयोग का गठन तो कर दिया है लेकिन अब तक इसे लागू किए जाने की तिथि नहीं बताई गई है। दरअसल, 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है। ऐसे में नए वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से लागू किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, अब सरकार की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई है। हाल ही में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि 8वें वेतन आयोग के समय और फंडिंग पर बाद में फैसला लिया जाएगा। इसका मतलब है कि 1 जनवरी 2026 से वेतन आयोग लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में पंकज चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी अधिसूचित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आयोग अपनी रिपोर्ट गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंपेगा। मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार के लगभग 50.14 लाख कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी हैं, जिन पर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर पड़ेगा। 8वां वेतन आयोग बता दें कि 8वें वेतन आयोग की घोषणा केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी में की थी। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को आयोग की कमान सौंपी गई है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 18 महीनों में देगा, जबकि समय-समय पर अंतरिम रिपोर्टें भी देता रहेगा। मंत्रिमंडल ने न्यायमूर्ति देसाई को आयोग का प्रमुख बनाने के साथ भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), बेंगलूर के प्रोफेसर पुलक घोष को अंशकालिक सदस्य और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन को सदस्य-सचिव बनाने का भी फैसला किया। आमतौर पर हर 10 वर्ष के अंतराल पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाती हैं। इस परिपाटी को देखते हुए आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के भी जनवरी, 2026 से लागू किए जाने की संभावना है।  

डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति:डिजिटल कनेक्टिविटी से सशक्त होंगे सुदूर क्षेत्र

रायपुर : नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की ठोस पहल: दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा डिजिटल नेटवर्क डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति:डिजिटल कनेक्टिविटी से सशक्त होंगे सुदूर क्षेत्र 513 नए 4G टावरों से शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन को मिलेगा बल : मुख्यमंत्री साय रायपुर, डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर स्थापित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ अंचलों में शांति, सुरक्षा और विकास के साझा प्रयासों का महत्वपूर्ण प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय नक्सल उन्मूलन की दिशा में चल रहे प्रभावी प्रयासों की एक मजबूत कड़ी है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई और प्रशासनिक समन्वय से जिन क्षेत्रों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाली जनता को पहली बार सुलभ और विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं प्राप्त होंगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रशासनिक सेवाओं और आपातकालीन संचार की सुविधा सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी का यह विस्तार वित्तीय समावेशन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। मोबाइल नेटवर्क के सशक्त होने से बैंकिंग सेवाएं, डीबीटी, यूपीआई, बीमा, पेंशन और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच आम नागरिकों तक सहज रूप से सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल “डिजिटल इंडिया” के उस मूल उद्देश्य को साकार करती है, जिसमें अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने का संकल्प निहित है। इससे स्थानीय युवाओं को डिजिटल माध्यमों से नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस विजन के अनुरूप केंद्र के साथ मिलकर राज्य के प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।  

मप्र में मोहन सरकार के 2 साल: अतीत की सीख, वर्तमान की मजबूती और भविष्य की दिशा

मप्र में मोहन सरकार के दो वर्ष: अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ लेकर चलने का संकल्प भोपाल मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में सरकार ने अतीत के सांस्कृतिक वैभव को पुनर्स्थापित करने, वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों को साधने और भविष्य की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कई पहलें की हैं। मुख्यमंत्रीडॉ. यादव ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक और विकासात्मक—दोनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई। काल को तीन खंडों में विभाजित किया जाता रहा है, अतीत, वर्तमान और भविष्य। इन तीनों काल के लिए एक साथ कुछ करने की सामर्थ्य विरले ही व्यक्तित्वों में होती है। लेकिन तीनों कालों के लिए बहुत कुछ करने का चमत्कार बाबा महाकाल की नगरी के डॉ मोहन यादव ने दो साल की अवधि में कर दिखाया है। एक ओर जहां उन्होने मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत को प्रभावी ढंग से संरक्षित और पुनर्स्थापित किया है, तो महाराज विक्रमादित्य के शासनकाल की झलक इन दो वर्षों के वर्तमान कार्यकाल में देखी जा सकती है। देश के इस हृदय प्रदेश को लेकर उनकी दूरगामी योजनाएं सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं। अतीत: सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। महाकाल कॉरिडोर के विस्तार कार्यों ने उज्जैन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राज्य के प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गईं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के चरण मध्यप्रदेश की भूमि पर जिन स्थानों पर पड़े, उन्हे श्रीकृष्ण पाथेय में समाहित कर इनको तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे पर फोकस दो वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी है। प्रमुख सड़क मार्गों, औद्योगिक कॉरिडोरों और शहरी सुविधाओं को उन्नत करने के कार्य जारी हैं। ग्रामीण सड़कों का उन्नयन भी अभियान मोड में किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी सुधार, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर काम किया गया है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाओं—जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम—के क्रियान्वयन पर भी जोर रहा। भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य ढांचे की तैयारियाँ राज्य सरकार ने आगामी दशक के विकास को लक्ष्य बनाते हुए कई योजनाएँ तैयार की हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत MSME और बड़े निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में कदम तेज हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला एवं ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है। संतुलित नेतृत्व का संकेत डॉ. मोहन यादव के दो वर्ष का कार्यकाल यह संकेत देता है कि सरकार अतीत के सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में दिखाई देगा।                                                                                                                                                   नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मोहन सरकार की कृषि नीति का असर: मध्य प्रदेश में 55 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को शुक्रवार को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इन दो वर्षों में कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने उत्पादन, उत्पादकता और विविधीकरण के नये रिकॉर्ड बनाए हैं। वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 55 लाख टन से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की कृषि नीति, सिंचाई विस्तार और किसान हितैषी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.34 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 6.13 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। वहीं, कुल कृषि उत्पादन 7.24 करोड़ टन से बढ़कर 7.79 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। इसमें 55 लाख टन की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी उन्नत बीज वितरण, फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि यंत्रीकरण का सीधा परिणाम मानी जा रही है। गेहूं, मक्का और धान ने बढ़ाया प्रदेश का मान सरकारी आंकड़ों के अनुसार गेहूं उत्पादन 2023-24 में 3.28 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 3.82 करोड़ टन हो गया। मक्का उत्पादन 48.68 लाख टन से बढ़कर 69.37 लाख टन, धान का उत्पादन 1.40 करोड़ से थोड़ा घटकर 1.36 करोड़ टन हुआ। हालांकि, धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 3415 किलोग्राम से बढ़कर 3551 किग्रा हो गई। दलहन-तिलहन भी बढ़ा रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन उत्पादन 66.24 लाख टन, मूंगफली उत्पादन 15.47 लाख टन, तिल उत्पादन 1.69 लाख टन हुआ। कुल तिलहन उत्पादन थोड़ी कमी के साथ 94.95 लाख टन पर स्थिर रहा। वहीं, दलहन उत्पादन में चना 35.83 लाख टन से घटकर 22.04 लाख टन, मूंग बढ़कर 21.28 लाख टन और उड़द बढ़कर 1.51 लाख टन रही। उत्पादकता में भी लगातार सुधार सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कुल कुल खाद्यान्न उत्पादकता 2023-24 में 3322 किग्रा प्रति हेक्टेयर और 2024-25 में 3650 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। वहीं, कुल कृषि उत्पादकता 2379 से बढ़कर 2627 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस मोहन सरकार ने दो वर्ष में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें एमएसपी पर खरीदी का दायरा बढ़ाया, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा, फसल विविधीकरण नीति लागू करना और ई-उपार्जन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया किया गया है। क्या कहते हैं कि विशेषज्ञ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में खेती में यह बढ़त केवल अनुकूल मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि नीतिगत निर्णय, समय पर खाद-बीज उपलब्धता और किसानों को त्वरित भुगतान का असर है। खाद्यान्न में नया कीर्तिमान जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पीके मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए भावांतर, सौर ऊर्जा संयंत्र और दुग्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने खेती की लागत कम की है और आमदनी बढ़ाने का रास्ता खोला है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव तभी टिकाऊ होगा, जब मंडियों, सिंचाई ढांचे और तकनीकी क्षेत्र को और मजबूत किया जाए। साथ ही किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाए।