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धमकी भरे संदेशों के बाद एक्शन मोड में प्रशासन, स्कूलों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग सतर्क

अमृतसर  जिले के सरकारी, प्राइवेट और एडिड स्कूलों में संदिग्ध व्यक्तियों की एंट्री बैन लगा दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी सैकेंडरी राजेश शर्मा द्वारा स्कूल में आने वाले हरेक व्यक्ति का काम्पलैक्स के मुख्य गेट पर रिकार्ड मुकम्मल दर्ज होने के आदेश दिए हैं। अधिकारी द्वारा स्कूल प्रमुखों को स्पष्ट किया है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति स्कूल काम्पलैक्स में आता है तो इसकी सूचना तुरंत शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को दी जाए। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश शर्मा ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग पूरी तरह से तैयार है और प्रशासन भी इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। राजेश शर्मा ने कहा कि स्कूल के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश न करने दें व छात्रों के माता-पिता और स्कूल परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से मुख्य द्वार पर पूछताछ की जाए और उनका डेटा रजिस्टर में दर्ज किया जाए। इसके साथ ही स्कूल के प्रिंसीपलों को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूल आने वाले प्रत्येक अध्यापक को स्कूल शुरू होने से पहले अपनी कक्षाओं का गंभीरता से निरीक्षण करने के लिए कहें व यदि कुछ भी संदिग्ध पाया जाता है तो इसकी सूचना तुरंत स्कूल के प्रिंसीपल को दी जाए। इसके साथ ही, यदि छात्रों को स्कूल में कुछ भी संदिग्ध दिखाई दे तो उन्हें स्कूल के प्रमुखो को सूचित करना चाहिए। जल्द ही स्कूल प्रमुखों को पत्र होंगे जारी राजेश शर्मा ने बताया कि उपरोक्त निर्देशों से संबंधी जल्द ही स्कूल प्रमुखों को पत्र जारी किए जा रहे है। इसके साथ ही स्कूल प्रमुखो को निर्देश दिया गया है कि वे रात के समय भी स्कूलों में सुरक्षाकर्मी तैनात करें और स्कूल काम्पलैक्स की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छात्रों और उनके अभिभावकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पूरी तत्परता से काम कर रहे हैं। स्कूलों में छात्रों को अच्छा शैक्षणिक वातावरण प्रदान किया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले समय में अमृतसर जिले के कुछ निजी स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिले थे, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए स्कूलों में जांच की और ईमेल झूठे साबित हुए। फिलहाल पुलिस प्रशासन भी पूरी तत्परता से काम कर रहा है व फर्जी ईमेल भेजने वाले शरारती तत्वों की तलाश जारी है।

SC में कैश कांड की एंट्री: जस्टिस यशवंत वर्मा ने जांच को दी चुनौती, याचिका पर सुनवाई होगी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति की वैधता को चुनौती दी है। यह समिति जज पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने लोकसभा स्पीकर के कार्यालय तथा लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है। जांच समिति का गठन और पूरा मामला यह जांच समिति लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3(2) के तहत गठित की गई थी। समिति में शामिल सदस्य हैं:     सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार (अध्यक्ष),     मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव, -कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य। यह समिति 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने की घटना के बाद मिले जले हुए नकदी के बंडलों से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। आग बुझाने पहुंची दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस कर्मियों ने जलें हुए नोटों के ढेर पाए थे, जिसके बाद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया और उनकी न्यायिक जिम्मेदारियां छीन ली गईं। पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा गठित एक इन-हाउस जांच समिति ने भी आरोपों में दम पाया और हटाने की सिफारिश की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज नहीं किया। इसके बाद 146 सांसदों (सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों से) द्वारा हस्ताक्षरित हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में स्वीकार किया गया, जिसके आधार पर जांच समिति बनी। हाल ही में, दिसंबर 2025 में समिति ने जस्टिस वर्मा को आरोपों का मेमो सौंपा और जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। जस्टिस वर्मा की याचिका में मुख्य दलीलें जस्टिस वर्मा की याचिका में लोकसभा स्पीकर के 12 अगस्त 2025 के उस निर्णय को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है, जिसमें केवल लोकसभा स्पीकर ने एकतरफा समिति गठित की। याचिका में कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 का उल्लंघन है तथा जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत है। याचिका के अनुसार, जब दोनों सदनों में जज के हटाने का प्रस्ताव पेश किया जाता है या स्वीकार किया जाता है, तो जांच समिति का गठन लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना चाहिए, न कि केवल लोकसभा स्पीकर द्वारा एकतरफा। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रस्ताव दोनों सदनों में पेश होने की स्थिति में समिति का गठन संयुक्त रूप से अनिवार्य है। कानूनी प्रावधान जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के अनुसार, जज के हटाने (इंपिचमेंट) का प्रस्ताव किसी एक सदन में स्वीकार होने पर स्पीकर या चेयरमैन (जैसा लागू हो) जांच समिति गठित करते हैं। यदि दोनों सदनों में एक ही दिन प्रस्ताव पेश होता है और दोनों में स्वीकार होता है, तो समिति संयुक्त रूप से गठित की जाती है। वर्तमान मामले में प्रस्ताव केवल लोकसभा में स्वीकार हुआ, इसलिए स्पीकर द्वारा एकतरफा गठन कानूनी रूप से सही प्रतीत होता है, लेकिन याचिका इसी बिंदु पर चुनौती दे रही है।

ओपी चौधरी का 35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र में चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया. वित्तीय वर्ष समाप्त होने से महज तीन महीने पहले भारी-भरकम अनुपूरक बजट पर कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सवाल उठाते हुए इसमें विजन नहीं होने की बात कही, वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया. अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज कर्ज में डूबते जा रहा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि 35 हजार करोड़ का भारी-भरकम अनुपूरक बजट की मांग क्यों की जा रही है. वह भी वित्तीय वर्ष के ठीक 3 महीने पहले. मुझे इस अनुपूरक बजट में ऐसी कोई बात दिख नहीं रही है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज महिलाओं के साथ क्या हो रहा है ? महतारी वंदन के नाम पर 1 हजार दिया जा रहा है, लेकिन बिजली बिल पर उससे ज्यादा लिया जा रहा है. सरकार इवेंट मैनेजमेंट पर फोकस है. सरकार कार्यक्रम ज्यादा आयोजित कर रही है, काम कम हो रहा है. उत्सव जनता को मनाने दिया जा रहा है. सरकार उत्सव मनाने के लिए बजट खर्च कर रही है. दरअसल, सरकार का विजन क्या है यह स्पष्ट नहीं है. इस अनुपूरक बजट में भी कोई विजन नहीं है. कांग्रेस विधायक ने कहा कि नए पदों पर भर्ती की बात की थी, इसमें कुछ नहीं है. अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई थी, नहीं है. 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन ही नहीं हो पाया. किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है. गिरदावरी का काम नए लड़कों से करा लिया गया. सड़क, धान, आदिवासी, किसान, युवा, महिलाओं के विकास पर लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा. रोजगार मूलक उद्योगों को देना होगा बढ़ावा अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट आया है. राजस्व व्यय को बढ़ाने की शुरुआत भूपेश बघेल सरकार ने की. कांग्रेस सरकार ने धान खरीदी को राजनीतिक विषय बनाया. छत्तीसगढ़ में नए क्षेत्रों में रोजगार का सृजन हो, इस दिशा में काम करना होगा. ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता देना है, जिसमें छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का हित हो. कृषि क्षेत्र आज भी रोजगार का सबसे मजबूत क्षेत्र है. राज्य की ओर से कृषि अनुसंधान केंद्रों को पैसा नहीं मिल रहा है. इसकी चिंता की जाए. भाजपा विधायक ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह की अवधारणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की थी. जिससे आज कुटीर और पारंपरिक उद्योगों के साथ रोजगार के साधन बने. महिलाएं मजबूत हुईं हैं. छत्तीसगढ़ में 42 प्रतिशत से आबादी एससी-एसटी की है. उनके हित के बारे में हमारी सरकार बेहतर काम कर रही है.

मेसी विवाद में गई कुर्सी, बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने दिया इस्तीफा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह कदम 13 दिसंबर को युवा भारती क्रीड़ांगन में लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के बाद उठाया गया है। इस घटना ने देश और दुनिया में कोलकाता की बदनामी कराई। अरूप विश्वास ने हाथ से लिखा पत्र लिखकर पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया है। हालांकि अरूप विश्वास या तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दरअसल पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खेल मंत्री से कहा था कि वह मैसी के कार्यक्रम में हुए हंगामे की जिम्मेदारी लें या इस्तीफा दें। इसके बाद खेल मंत्री ने यह कदम उठाया है। अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा यह घटना 13 दिसंबर को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (जिसे सॉल्ट लेक स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है) में हुई थी। लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में काफी अव्यवस्था फैल गई थी। इस हंगामे के कारण कोलकाता की काफी किरकिरी हुई। इसी घटना से आहत होकर खेल मंत्री अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लेटर अरूप विश्वास का यह हाथ से लिखा हुआ पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने मंगलवार को यह जानकारी दी। घोष ने एक फेसबुक पोस्ट में बिस्वास की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे गए इस्तीफे की प्रति शेयर की। इसमें उन्होंने राज्य के खेल मंत्री के रूप में अपने दायित्वों से मुक्त करने का अनुरोध किया है। घोष की पोस्ट में क्या? कुणाल घोष ने अपनी पोस्ट में कहा कि खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर खेल विभाग की जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस कदम का कारण मेस्सी के कार्यक्रम में उत्पन्न हुई आराजकता से उपजे विवाद को बताया गया है। हालांकि, तृणमूल नेता द्वारा साझा किया गया पत्र बिस्वास के आधिकारिक लेटरहेड पर नहीं था। इससे राजनीतिक हलकों में इसकी औपचारिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि ममता बनर्जी सरकार 13 दिसंबर को मशहूर फुटबॉलर मेसी के कार्यक्रम दौरान हुई अव्यवस्था, भीड़ के कुप्रबंधन और सुरक्षा में चूक की घटनाओं से हुई आलोचनाओं को कितनी गंभीरता से ले रही है. सरकार के सूत्रों ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की. बिस्वास के हाथ से लिखे इस्तीफे के पत्र में, जिसकी तारीख 15 दिसंबर है और जिसमें मुख्यमंत्री को "आदरणीय दीदी" कहकर संबोधित किया गया है, कहा गया है कि वह "निष्पक्ष जांच" के हित में पद छोड़ना चाहते हैं. उन्होंने लिखा कि वह नहीं चाहते कि उनके पद पर बने रहने से जांच पर कोई असर पड़े. 13 दिसंबर को सॉल्ट लेक स्टेडियम में अव्यवस्था के बाद से ही खेल विभाग पर दबाव बढ़ रहा था, जनता और पूरे राजनीतिक गलियारों से आलोचना हो रही थी, क्योंकि इस घटना को दुनिया के सबसे मशहूर खिलाड़ियों में से एक के इवेंट के लिए प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन की नाकामी के तौर पर देखा जा रहा था. उधर, खेल मंत्री के इस्तीफे से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है. मुख्य सचिव के दफ्तर से जारी एक प्रेस रिलीज में, राज्य सरकार ने कहा कि DGP राजीव कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 24 घंटे के अंदर यह बताने को कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन कैसे होने दिया गया और निजी आयोजकों और दूसरे हितधारकों के साथ प्रभावी तालमेल की कमी क्यों थी. बिधाननगर पुलिस कमिश्नर मुकेश कुमार से भी उनके कमिश्नरेट की भूमिका के बारे में इसी तरह का स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. राज्य के प्रशासनिक इतिहास में इस तरह से पुलिस के आला अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराना बहुत कम होता है. सॉल्ट लेक स्टेडियम के यूथ सर्विसेज एंड स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के सीईओ देब कुमार नंदन को इवेंट मैनेजमेंट में लापरवाही के लिए तुरंत उनके पद से हटा दिया गया है. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) अनीश सरकार, जो इवेंट के दिन मौके पर इंचार्ज थे, उन्हें कथित लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है, और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. खेल विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार सिन्हा को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस असीम कुमार रे की सलाह पर चार सदस्यों वाली SIT बनाई है, जिन्होंने एक स्वतंत्र जांच की जरूरत पर जोर दिया था. SIT में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडे, जावेद शमीम, सुप्रतिम सरकार और मुरलीधर शामिल हैं. बिस्वास का नहीं आया सार्वजनिक बयान नहीं बिस्वास ने बार-बार इस मामले पर संपर्क करने की कोशिश की और फोन कॉल एवं संदेश भेजे गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस बात की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई कि इस्तीफे का अनुरोध स्वीकार किया गया है या नहीं। तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी बिस्वास ने इस मामले पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। बीजेपी का मैसी के मुंबई टूर का वीडियो पोस्ट कर तंज उधर, कोलकाता में फुलबॉलर के कार्यक्रम में हंगामे पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। बाद में बीजेपी ने मैसी के मुंबई टूर का वीडियो पोस्ट कर तंज कसा था। दरअसल मुंबई वाले कार्यक्रम में मैसी के प्रशंसक काफी खुश थे। सोशल मीडिया पर कहा गया कि बंगाल पुलिस को मुंबई पुलिस से सीखना चाहिए।  

संसद में गरजे शशि थरूर: राम के नाम पर राजनीति बंद हो, कांग्रेस लाइन में लौटे नेता

नई दिल्ली लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलने समेत कई प्रावधानों में फेरबदल वाले विधेयक को पेश किया गया है। इस विधेयक में मनरेगा को अब 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना नाम देने की तैयारी है। इसे लेकर संसद में दिलचस्प बहस देखने को मिली है। कांग्रेस की ओर से सांसद प्रियंका गांधी ने तीखा विरोध किया तो वहीं उनके बाद बोलने खड़े हुए शशि थरूर ने भी लंबे समय बाद पार्टी के सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि मैं मनरेगा स्कीम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम बदलने के खिलाफ हूं। उन कारणों पर मैं विस्तार से नहीं जाऊंगा क्योंकि पूर्व के वक्ताओं ने उस पर काफी बोला है।   शशि थरूर ने कहा कि मैं जी राम जी विधेयक का विरोध करता हूं। मेरी पहली शिकायत यह है कि इसका नाम बदला जा रहा है, जो पहले महात्मा गांधी के ऊपर था। महात्मा गांधी का राम राज्य का विजन राजनीतिक आयोजन नहीं था बल्कि सामाजिक सुधार था। वह चाहते थे कि हर गांव सशक्त हो और राम राज्य जैसी स्थिति बने। उनके नाम को हटाना गलत है और नैतिकता के खिलाफ है। मेरे बचपन में गाते थे- देखो ओ दिवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो। तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद ने कहा कि इसके अलावा 40 फीसदी बजट सीधे राज्य सरकार के हिस्से में डालना भी गलत है। इससे उन राज्यों के लिए संकट की स्थिति पैदा होगी, जिनके पास राजस्व का संग्रह कम है। ऐसे राज्य जो पहले ही किसी तरह की मदद पर निर्भर हैं, आखिर वे कैसे इस स्कीम के लिए फंडिंग कर पाएंगे। कांग्रेस सांसद का पार्टी के स्टैंड से मिलता हुआ यह रुख लंबे समय बाद देखने को मिला है। वह कई बार पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस की लगातार तीन मीटिंगों से गैरहाजिर रहे हैं। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर कयास लगते रहे हैं। इसलिए जब वह संसद में इस पर बोलने खड़े हुए और कांग्रेस का समर्थन किया तो यह महत्वपूर्ण था। उन्होंने साफ कर दिया कि वह वैचारिक तौर पर अब भी अडिग हैं।  

जी राम जी योजना पर सियासी घमासान, विपक्ष के विरोध पर शिवराज चौहान ने पूछा– राम से दिक्कत क्या है?

नई दिल्ली  मनरेगा का नाम बदलने वाले बिल को लेकर विपक्ष की आपत्ति के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को पता नहीं क्या परेशानी हो जाती है। मंगलवार को लोकसभा में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन -ग्रामीण (VB- G RAM G) विधेयक 2025 पेश किया गया। इस मौके पर चौहान ने कहा, ‘महात्मा गांधी खुद राम राज की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द भी हे राम करते थे। हर गरीब को बेरोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले और उसके लिए यह बिल आया है। 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा। यह पूरा बिल महात्मा गांधी के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि राम नाम जुड़ते ही इन लोगों को बिल से क्या आपत्ति हो गई है, जबकि भगवान राम तो खुद ही राम राज्य की बात करते थे।’   ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना उनका अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’ उनका कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। कांग्रेस ने भी बदला था जवाहर रोजगार योजना का नाम शिवराज चौहान ने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस की सरकार ने भी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?’’ चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘हम इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दे रहे हैं। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक से गांवों का संपूर्ण विकास होगा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक में केंद्र के अनुदान को 90 से 60 प्रतिशत किया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक वापस लिया जाना चाहिए या कम से कम स्थायी समिति के पास भेजा जाए।’’ प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी की ‘‘निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रह’’ के आधार पर कोई विधेयक पेश नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए।  

राघवेंद्र सिंह का विरोध: अनुपूरक बजट में नहीं दिखा कोई स्पष्ट विजन

  रायपुर  छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन आज अनुपूरक बजट मांग पर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट आया है. राजस्व व्यय को बढ़ाने की शुरुआत भूपेश बघेल सरकार ने की. कांग्रेस सरकार ने धान खरीदी को राजनीतिक विषय बनाया. छत्तीसगढ़ में नए क्षेत्रों में रोजागर का सृजन हो, इस दिशा में काम करना होगा. ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता देना है, जिसमें छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का हित हो. अजय चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ की संस्कृति दुनियाभर में सबसे समृद्ध संस्कृति है. इसे दुनियाभर के लोगों तक लेकर जाना चाहिए. छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने दिल्ली तक लेकर जाएं. अलग-अलग दुनिया के दूतावास के अधिकारियों को दिखाया जाए. इस दिशा में प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा, बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास को लेकर जल्द से जल्द काम होना चाहिए. चंद्राकर ने कहा, कृषि क्षेत्र आज भी रोजगार का सबसे मजबूत क्षेत्र है. राज्य की ओर से कृषि अनुसंधान केंद्रों को पैसा नहीं मिल रहा है. इसकी चिंता की जाए. महिला स्व-सहायता समूह की अवधारणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की थी, जिससे आज कुटीर और पारंपरिक उद्योगों के साथ रोजगार के साधन बने. महिलाएं मजबूत हुई है. उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में 42 प्रतिशत से आबादी एससी-एसटी की है. उनके हित के बारे में हमारी सरकार बेहतर काम कर रही है. कांग्रेस विधायक राघवेंद्र बोले – सरकार का विजन स्पष्ट नहीं कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा, छत्तीसगढ़ आज कर्ज में डूबते जा रहा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि 35 हजार करोड़ का भारी-भरकम अनुपूरक बजट की मांग क्यों की जा रही है. वह भी वित्तीय वर्ष के ठीक 3 महीने पहले. मुझे इस अनुपूरक बजट में ऐसी कोई बात दिख नहीं रही है. उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में आज महिलाओं के साथ क्या हो रहा है ? महतारी वंदन के नाम पर 1 हजार दिया जा रहा है, लेकिन बिजली बिल पर उससे ज्यादा लिया जा रहा है. सरकार इवेंट मैनेजमेंट पर फोकस है. सरकार कार्यक्रम ज्यादा आयोजित कर रही है, काम कम हो रहा है. उत्सव जनता को मनाने दिया जा रहा है. सरकार उत्सव मनाने के लिए बजट खर्च कर रही है. दरअसल सरकार का विजन क्या है, यह स्पष्ट नहीं है. इस अनुपूरक बजट में भी कोई विजन नहीं है. विधायक राघवेंद्र ने कहा, नए पदों पर भर्ती की बात की थी, इसमें कुछ नहीं है. अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई थी, अब तक नहीं की गई है. धान बेचने के लिए 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन ही नहीं हो पाया. किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है. गिरदावरी का काम नए लड़कों से करा लिया गया. सड़क, धान, आदिवासी, किसान, युवा, महिलाओं के विकास पर लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा.

जी राम जी योजना पर प्रियंका का हमला: बोलीं— नाम बदलने की सनक देशहित में नहीं

नई दिल्ली  लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलने वाला बिल पेश किया गया है। अब इसका नाम VB-जी राम जी होगा और उसे लेकर संसद में डिबेट शुरू हो गई है। कांग्रेस की सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार के अधिकारों को तो बढ़ाया जा रहा है, लेकिन उसकी फंडिंग कम की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ में नहीं आती है। ऐसा जब भी किया जाता है तो सरकार को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि नया बिल संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। प्रियंका गांधी ने कहा कि इसमें मजदूरी के दिनों को 100 से 125 दिन करने की बात तो कही गई है, लेकिन मानदेय बढ़ाने पर कोई बात नहीं हुई है। प्रियंका गांधी ने महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाए जाने का भी विरोध किया। इस दौरान भाजपा सदस्यों ने कुछ कहा तो प्रियंका ने कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार के सदस्य नहीं थे, लेकिन परिवार के मेंबर जैसे ही थे। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की सनक के आधार पर किसी योजना में बदलाव नहीं होना चाहिए। इस बिल को लेकर सदन में कोई चर्चा नहीं हुई। इसलिए मेरी राय है कि पहले संसद में डिबेट हो और फिर जरूरी सुझावों को शामिल करते हुए नया विधेयक लाया जाए। यह विधेयक कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेश किया, जिस पर संसद में बहस चल रही है। सौगत राय भी भड़के, बोले- राम पूजनीय हैं, लेकिन…. टीएमसी के सांसद सौगत राय ने भी योजना के नामकरण को लेकर आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि भगवान राम पूजनीय हैं, लेकिन महात्मा गांधी इस वक्त ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि अब जो विधेयक में प्रावधान जोड़े गए हैं, उसके तहत राज्यों पर बोझ बढ़ेगा। इसलिए हम विरोध करते हैं। दरअसल विपक्षी दलों का कहना है कि इस विधेयक में अब स्कीम की फंडिंग का 40 फीसदी भार राज्य सरकारों पर होगा। इससे पहले यह आंकड़ा 10 फीसदी ही था। ऐसे में इससे राज्यों पर बोझ बढ़ेगा। प्रियंका गांधी ने कहा कि इस विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी में भेजा जाए। सभी जरूरी सुझावों को शामिल करने के बाद इसे वापस सदन में पेश किया जाए। केसी वेणुगोपाल बोले- शिवराज को बापू का नाम हटाने के लिए याद किया जाएगा इस स्कीम से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी तीखा विरोध किया। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को ऐसे मंत्री के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने महात्मा गांधी का नाम हटा दिया था। ऐसा करना गलत और अपमानजनक है। वहीं सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी कहा कि स्कीम से नाम हटाना सीधे तौर पर महात्मा गांधी का अपमान है।

झाड़ियों में छिपाए शव : शिकार के चक्कर में खुद फंसे शिकारकर्ता

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जंगली सुअर के शिकार के लिए अवैध रूप से बिजली के तार से हुकिंग कर बिछाए गए करंट की चपेट में आने से दो ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद शवों को छिपाने के प्रयास के मामले में पुलिस ने जांच के बाद एक नाबालिग सहित पांच आरोपियों को गैर इरादतन हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह गंभीर मामला जिले के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार, चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम छोटे रेगड़ा निवासी पुनीलाल यादव उर्फ मंत्री और संदीप एक्का के लापता होने की रिपोर्ट परिजनों ने 12 दिसंबर को थाने में दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। परिजनों द्वारा पुलिस को बताया गया कि दोनों नौ दिसंबर को घर से निकले थे और वापस नहीं लौटे। अगले दिन, 13 दिसंबर को ग्राम संबलपुरी से बहने वाली नदी किनारे टिकरा क्षेत्र में दोनों के शव मिलने की सूचना पर एफएसएल टीम और थाना चक्रधरनगर पुलिस मौके पर पहुंची। वहां मर्ग पंचनामा की कार्रवाई की गई और शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों द्वारा दोनों की मृत्यु बिजली के करंट से होना तथा मृत्यु की प्रकृति को दुर्घटनात्मक बताया गया। सबूत मिटाने का है आरोप मृतक पुनीलाल यादव के पुत्र विजय यादव से पुनः पूछताछ में एक अहम खुलासा हुआ। उसने बताया कि 9 दिसंबर को पुनीलाल यादव और संदीप एक्का कुछ साथियों के साथ जंगली सुअर के शिकार के लिए निकले थे, जहां बिजली का करंट बिछाया गया था। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से दोनों की मृत्यु हो गई। विवेचना के दौरान यह भी सामने आया कि घटना के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शवों को झाड़ियों में छिपाने का प्रयास किया गया था। इस आधार पर थाना चक्रधरनगर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 238(ख), और 3(5) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई। हाई टेंशन बिजली खंभे से अवैध हुकिंग परिजनों से पूछताछ में यह भी पता चला कि पुनीलाल यादव उर्फ मंत्री और संदीप एक्का ग्राम छोटे रेगड़ा निवासी जयकिशन एक्का, रमेश उरांव, राजू टोप्पो, आकाश टोप्पो तथा एक नाबालिग बालक के साथ शिकार पर गए थे। संदेह के आधार पर जयकिशन एक्का और आकाश टोप्पो को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें दोनों ने स्वीकार किया कि संबलपुरी नाला किनारे हाई टेंशन बिजली खंभे से अवैध हुकिंग कर बिजली का तार बिछाया गया था। डर के कारण शवों को छिपाया बिछाए गए करंट प्रवाहित तार में शिकार फंसा है या नहीं, यह देखने के दौरान पुनीलाल यादव और संदीप एक्का तार की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई। साथ मौजूद नाबालिग बालक के पैर में भी करंट से जलने की चोट आई। घटना के बाद, आरोपी डर के कारण शवों को झाड़ियों में छिपाने लगे थे। आकाश टोप्पो की निशानदेही पर अवैध हुकिंग में प्रयुक्त तार को बरामद किया गया, जिसे बाद में लपेटकर ले जाया गया था। आरोपियों को भेजा गया जेल एक से अधिक आरोपियों द्वारा बिजली चोरी कर अवैध हुकिंग किए जाने की पुष्टि होने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) और विद्युत अधिनियम की धारा 135 भी जोड़ी गई। इसके बाद अन्य आरोपी रमेश उरांव, राजू टोप्पो तथा विधि के साथ संघर्षरत बालक को भी हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में आकाश टोप्पो (उम्र 18 वर्ष), जयकिशन एक्का (उम्र 19 वर्ष), रमेश उरांव (उम्र 60 वर्ष), राजू टोप्पो (उम्र 19 वर्ष) सभी निवासी ग्राम छोटे रेगड़ा शामिल हैं। विधि के साथ संघर्षरत बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

कोहरे ने ली कई जानें: पंजाब में दर्दनाक सड़क हादसा, मौके पर मची चीख-पुकार

चंडीगढ़  पंजाब में कोहरे की वजह से बड़ा हादसा हो गया, जिस दौरान 2 सगे भाईयों को मौत हो गई। घने कोहरे की वजह से बठिंडा-अमृतसर नेशनल हाईवे पर तलवंडी भाई और कोट कारो कलां के बीच एक भयानक हादसा हुआ, जिसमें 2 भाइयों की मौत हो गई। जानकारी देते हुए तलवंडी भाई थाने के SHO जसविंदर सिंह बराड़ और केस के जांच अधिकारी बलदेव सिंह ने बताया कि कल देर रात फरीदकोट से बकरियां लादकर अमृतसर जा रहा एक ट्रक गांव कोट कारो कलां के टोल बैरियर के पास खड़े ट्रक से टकरा गया।  इस भयानक और दर्दनाक हादसे में ट्रक ड्राइवर जगसीर राम पुत्र राम चंदर, निवासी मिर्जे वाला, श्री गंगानगर, राजस्थान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ बैठे उसके भाई सुरिंदर की भी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने बताया कि ट्रक ड्राइवर ट्रक समेत मौके से फरार हो गया। टोल अधिकारियों ने क्रेन की मदद से मृतकों और घायलों को बाहर निकाला। पुलिस ने आरोपी ट्रक ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश कर रही है।