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वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कनाडा से बड़ी खुशखबरी: नागरिकता कानून में ऐतिहासिक बदलाव, भारतवंशियों को मिलेगा फायदा

कनाडा  कनाडा ने अपने नागरिकता नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे विदेश में पैदा हुए या गोद लिए गए बच्चों को कनाडाई नागरिकता का मार्ग खुल गया है। 15 दिसंबर से बिल C-3 लागू हो गया है, जिससे नागरिकता के अधिकार में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। यह कदम उन परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है जिनके सदस्य विदेश में रहते हैं या पैदा हुए हैं। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय निवास कर रहा है, इसलिए यह नया नियम भारतीय मूल के नागरिकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है, खासकर उन बच्चों के लिए जिनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हैं लेकिन वे खुद विदेश में पैदा हुए हैं। नए नियम से क्या बदला अब कनाडाई नागरिक माता-पिता विदेश में पैदा हुए या गोद लिए बच्चों को नागरिकता दे सकते हैं, बशर्ते कि माता-पिता ने बच्चे के जन्म या गोद लेने से पहले कम से कम तीन साल (1095 दिन) कनाडा में शारीरिक रूप से निवास किया हो। यह परिवर्तन नागरिकता के प्रति देश के दृष्टिकोण को अधिक उदार और आधुनिक बनाता है। अब पहली पीढ़ी के बाहर भी नागरिकता की पात्रता का विस्तार किया गया है।   बिल C-3 क्यों जरूरी? कनाडा में 2009 में लागू “फर्स्ट-जनरेशन लिमिट” के नियम ने विदेशी जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित कर दिया था, भले ही उनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हों। यह नीति कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय रही है। दिसंबर 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इस सीमा के मुख्य हिस्सों को असंवैधानिक बताया था। अदालत ने कहा कि यह नियम उन नागरिक परिवारों के लिए गलत नतीजे दे रहा है जो कनाडा के बाहर बच्चे का जन्म या गोद लेने के बाद नागरिकता चाहते हैं। इसके बाद संघीय सरकार ने अपील न करने का फैसला किया और बिल C-3 को लागू कर व्यापक सुधार किया। भारतीय समुदाय पर असर कनाडा में भारतीय मूल की एक बड़ी आबादी रहती है। कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म विदेश में हुआ लेकिन उनके माता-पिता की पहचान कनाडाई नागरिक के रूप में है। इस नए नियम से वे अब नागरिकता के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे और उन्हें कई अधिकार मिलेंगे जो पहले प्रतिबंधित थे।

विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में नारीशक्ति और जलशक्ति की निर्णायक भूमिका : मंत्री श्रीमती संपतिया उइके

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा के छठवीं विधानसभा के अष्टम सत्र के दौरान "विकसित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध मध्यप्रदेश” विषय पर हुई चर्चा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने महिला सशक्तिकरण और पेयजल सुरक्षा को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताते हुए सरकार की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों के स्पष्ट रोडमैप को सदन के समक्ष रखा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि विकास की वास्तविक परिभाषा केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह इस बात से तय होती है कि समाज का अंतिम व्यक्ति, विशेषकर महिलाएँ, बच्चे, जनजातीय समुदाय और कमजोर वर्ग कितना सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और पेयजल सुरक्षा किसी भी संवेदनशील और उत्तरदायी शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती उइके ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा किए गए ठोस प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि आंगनवाड़ी सेवाओं में पारदर्शी एवं मेरिट आधारित ऑनलाइन चयन प्रक्रिया लागू कर मध्यप्रदेश ने देश में एक नई मिसाल कायम की है। इस प्रक्रिया के तहत 19 हजार 477 रिक्त पदों के विरुद्ध 3 लाख 99 हजार 331 आवेदन प्राप्त हुए जिसमें से अब तक 12 हजार 75 नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। शेष पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था महिला सशक्तिकरण के साथ साथ सुशासन और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है। मंत्री श्रीमती उइके ने लाड़ली बहना योजना को महिला आर्थिक आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक निर्णयों में सहभागिता सुदृढ़ हुई है। इससे लगभग एक करोड़ 26 लाख महिलाएँ लाभ उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से 24 घंटे सातों दिन निःशुल्क सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पेयजल सुरक्षा पर बोलते हुए मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। इसी सामाजिक यथार्थ को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन को जन-आंदोलन के रूप में लागू किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जहां केवल 12.11 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध था, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 72.79 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। प्रदेश के 23 हजार से अधिक गांवों को "हर घर जल ग्राम" घोषित किया जा चुका है। जनजातीय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के गांवों में जल जीवन मिशन की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 70 प्रतिशत से अधिक परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। "जल सखी" मॉडल के माध्यम से महिलाओं को जन योजनाओं के संचालन, संधारण और जल गुणवत्ता परीक्षण में निर्णायक भूमिका दी गई है, जिससे महिला नेतृत्व को नई पहचान मिली है। मंत्री श्रीमती उइके ने आगामी तीन वर्षों के रोडमैप की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना, जल स्रोतों का संरक्षण-पुनर्भरण, तकनीक आधारित निगरानी तथा महिलाओं को नीति निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका देना है। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने नारीशक्ति और जलशक्ति को केंद्र में रखकर विकास की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए सभी मिलकर रचनात्मक और परिणामोन्मुख सहयोग करें।  

विरासत के साथ विकास का स्वर्णिम अध्याय लिख रहा मध्यप्रदेश : विधायक शर्मा

विधानसभा के 8वें सत्र में गूंजा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद भोपाल  भारत माता को परम वैभव के शिखर पर प्रतिष्ठित करने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "विरासत भी, विकास भी" के महामंत्र और मध्यप्रदेश के "धर्म-ध्वज वाहक" मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भगीरथ प्रयासों से प्रदेश में एक नए 'सांस्कृतिक अभ्युदय' का सूर्योदय हो चुका है। विधानसभा के अष्टम सत्र के दौरान पूर्व प्रोटेम स्पीकर और हुजूर विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में मोदी-मोहन की डबल इंजन सरकार की इस युगांतकारी यात्रा का विषद चित्रण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी-मोहन सरकार केवल 'शासन' नहीं, बल्कि 'साधना' कर रही है, जिसके फलस्वरूप मध्यप्रदेश भारत की 'सांस्कृतिक चेतना का स्पंदन' बन गया है। विधायक श्री शर्मा ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने जिस सांस्कृतिक अनुष्ठान का आरंभ काशी और अयोध्या से किया, उसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश की पुण्य धरा पर मूर्त रूप दे रहे हैं। मोहन सरकार का विजन स्पष्ट है—मध्यप्रदेश को भारत का 'आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र' बनाना। इस दिशा में 'श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास' के माध्यम से भगवान श्रीराम के पदचिह्नों को सहेजा जा रहा है, तो वहीं 'श्रीकृष्ण पाथेय न्यास' के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन और संबंधित स्थलों को विश्व पटल पर स्थापित करने का महायज्ञ चल रहा है। विधायक श्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश में 'लोकों' का निर्माण आस्था और अर्थव्यवस्था के संगम का प्रमाण है। महाकाल लोक की तर्ज पर ओंकारेश्वर में 'ममलेश्वर लोक', ओरछा में 'रामराजा लोक' और सलकनपुर में 'देवी लोक' जैसे 20 लोकों का निर्माण 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है। प्रदेश के सांस्कृतिक विकास में नदियों के योगदान के बारे में बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति में नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि सभ्यता की धमनियां हैं, और सरकार इनके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यटन और आर्थिक प्रगति के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए विधायक श्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2023-24 में जहाँ 11 करोड़ पर्यटकों ने भ्रमण किया, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 14 करोड़ के पार पहुँच गई है। सिंहस्थ-2028 के लिए युद्धस्तर पर तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उज्जैन के पास 18 ग्रामों को 'पर्यटन ग्राम' के रूप में विकसित किया जा रहा है। विधायक श्री शर्मा ने बताया कि कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' और 'हेली पर्यटन सेवा' जैसी अनूठी पहल शुरू की गई है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को भी सुगम यात्रा का लाभ मिल रहा है। अपने उद्बोधन के समापन में विधायक श्री शर्मा ने 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य देश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10% करना है। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश एक ऐसा गंतव्य बनेगा, जहाँ दुनिया केवल घूमने नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को अनुभव करने आएगी।  

सुकमा में आत्मसमर्पित माओवादियों को मिला सम्मानजनक नया जीवन

छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति से लौटी उम्मीदें 75 को 5G स्मार्टफोन, 25 को मेसन किट का वितरण रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे।आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है l  पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया। डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है। सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

युवाओं पर देश को विश्वगुरू बनाने की महती जिम्मेदारी: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

राज्यपाल अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के दीक्षांत समारोह में हुए शामिल मानद उपाधियाँ ले. जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह और डॉ वाई.के. मिश्रा को भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक देश को विश्वगुरू और आधुनिकतम विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। युवाओं पर देश को विश्वगुरू बनाने की महती जिम्मेदारी है। युवा अपनी प्रतिभा, लगन और देशभक्ति से इस संकल्प पूरा करने के लिए दृढ़-प्रतिज्ञ रहे। राज्यपाल श्री पटेल बुधवार को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के तेरहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की। लेफ्टिनेंट जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह को डी. लिट तथा प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. युगल किशोर मिश्रा को डी.एस.ई. की मानद उपाधि प्रदान की। राज्यपाल श्री पटेल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के नव निर्मित रिसर्च, इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर का और विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का लोकार्पण किया। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी दीक्षांत शपथ को आत्मसात करें। उसका आजीवन अनुसरण करें। शिक्षक, विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा देने के साथ ही भारतीयता के संस्कार और जीवन जीने की कला अवश्य सिखाएं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और महापुरूषों के जीवन से प्रेरणा लें। राज्यपाल श्री पटेल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा रामायण पीठ की स्थापना की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि पीठ रामायण पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और विद्वानों को नए अवसर प्रदान करेगी। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में देश के प्राचीन ज्ञान और परंपराओं का आधुनिक विज्ञान के साथ समावेश किया गया है। इससे देश की शिक्षा प्रणाली को भारतीयता का मजबूत आधार मिला है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कारों की शिक्षा मिल रही है। समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरदास ने कहा कि जात-पात और धर्म का भेद मिटाकर हम सब सच्चे मन से भारतीय बनकर भारत माँ की सेवा करें। भारत के प्राचीन दर्शन और शिक्षा के महान संस्कारों को आत्मसात करें। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के समक्ष विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह तथा शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्री रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय के आचार्यगण तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।                            

राष्ट्र नायकों को समर्पित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन

लखनऊ,  राष्ट्रीय प्रेरणा के प्रतीक राष्ट्र नायकों को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई को समर्पित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को करेंगे। इस संबंध में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का दौरा कर, उद्घाटन समारोह की तैयरियों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्घाटन समारोह के लिए हो रही तैयारियों, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में संज्ञान लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एलडीए वीसी प्रथमेश‌ कुमार, लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और सुरक्षा व्यवस्था देख रहे पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा, पार्किंग और स्वच्छता व्यवस्था का पूरा ध्यान रखने के दिये निर्देश   राष्ट्र प्रेरणा स्थल के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने और दीवारों पर फेंसिग को और ऊंचा करने के निर्देश दिये। उन्होंने उद्घाटन समारोह में किसी तरह की आवाजाही और ट्रैफिक की समस्या पैदा न हो इसके लिये चाक-चौबंद पार्किंग व्यवस्था को सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पार्किंग की संख्या और लोगों के आने- जाने के मार्गों पर डाइवर्जन और साइनेज की व्यवस्था को जल्द ही पूरा करने को कहा । म्युजियम परिसर के निरीक्षण के दौरन उन्होंने क्यूरेशन और फिनिशिंग के कार्यों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा पर हो रहे पेंटिंग के कार्य के बारे में भी संज्ञान लिया। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि पेंटिंग का कार्य दो दिन में पूरा हो जाएगा, क्यूरेशन का कार्य उद्घाटन समारोह के दो दिन पूर्व पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि लखनऊ नगर निगम, उद्घाटन समारोह के दिन साफ-सफाई, अस्थाई टायलेट और पेय जल की व्यवस्था कर रहा है।   उद्घाटन समारोह की सभी गतिविधियों का सीएम ने लिए संज्ञान   मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एलडीए वीसी ने उद्घाटन समारोह की सभी गतिविधियों से भी अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि उद्घाटन समारोह के दिन प्रधानमंत्री सबसे पहले राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं का अनावरण कर, श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीयता की भावना के संचार के लिए ट्राइ कलर बैलून छोड़े जाएगें। प्रतिमा अनावरण के बाद प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल में राष्ट्र नायकों को समर्पित म्युजियम का उद्घाटन करेंगे। यहां वो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेई को समर्पित गैलरियों और कोर्टयार्ड का अवलोकन करेंगे। पहली गैलरी के ओरियेंटेशन रूम में वीडियो और एवी के माध्यम से राष्ट्र नायकों के संक्षिप्त जीवन परिचय को दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री म्यूजियम परिसर में ही बने भारत माता कोर्टयार्ड, जन संघ के प्रतीक चिंह दीपक कोर्टयार्ड, सुदर्शन चक्र कोर्टयार्ड जाएगें और राष्ट्र नायकों जुड़ी हुई वस्तुओं का अवलोकन करने के लिए फर्स्ट फ्लोर पर बने कोर्टयार्ड जाएगें। म्युजियम से बाहर निकल कर प्रधानमंत्री, प्रेरणा स्थल पर बने मंच से गणमान्य अतिथियों और उद्घाटन समारोह के साक्षी बनने वाले लाखों की संख्यां में प्रत्यक्षदर्शियों को संबोंधित करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाबा गुरु घासीदास जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

“मनखे-मनखे एक समान” का संदेश बाबा गुरु घासीदास जी की अमर विरासत: सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध चेतना के अग्रदूत थे बाबा गुरु घासीदास जी – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय रायपुर   मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास जी की 18 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी ने अपने दिव्य उपदेशों और आचरण से समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर किया। उनका अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला ऐसा जीवन-दर्शन है, जो भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी ने छत्तीसगढ़ की धरती पर सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरण की सुदृढ़ आधारशिला रखी। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानताओं और अंधविश्वासों के विरुद्ध चेतना जगाते हुए नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की और जनमानस को आत्मसम्मान एवं मानवीय गरिमा का बोध कराया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा जी का जीवन-दर्शन करुणा, सहिष्णुता, प्रेम, सत्यनिष्ठा और परस्पर सम्मान जैसे मानवीय गुणों के विकास का मार्गदर्शक है। उनके विचार और आदर्श समय की कसौटी पर खरे उतरते हुए आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत बने हुए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा गुरु घासीदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सामाजिक समरसता, शांति और सौहार्द के साथ एक समृद्ध एवं समावेशी छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

इथियोपिया में अफ्रीकी चैप्टर क्लोज, अब अरब दुनिया में भारत की सियासी पकड़ मजबूत करेंगे PM मोदी

अफ्रीका अफ्रीका में कूटनीतिक इतिहास रचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अरब जगत में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की अपनी चार दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार को इथियोपिया से ओमान के लिए रवाना हो गए। यह यात्रा भारत की अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का अहम संकेत मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यह इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो ऐतिहासिक साबित हुई। इस दौरान भारत और इथियोपिया ने अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, जहां उन्होंने आतंकवाद, वैश्विक शांति और विकास पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। इसी दौरान उन्हें इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी नेता बने। अब प्रधानमंत्री मोदी ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर मस्कट पहुंचेंगे।   ओमान में वे रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी वहां प्रवासी भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी की ओमान की दूसरी यात्रा होगी।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को राज्य स्तरीय ओपन फिटनेस रन का आमंत्रण

रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में विधायक श्री मोतीलाल साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बलौदाबाजार जिले के ग्राम खरतोरा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय ओपन फिटनेस रन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया तथा आयोजन की प्रतीकात्मक टी-शर्ट भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना, पुलिस तथा सीमा सुरक्षा बल के जवानों को सम्मानित किया जाएगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में सतत रूप से समर्पित जवानों का सम्मान करना पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति जैसे मूल्यों को एक मंच पर जोड़ने वाले ऐसे आयोजन स्वस्थ, सशक्त और जागरूक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।