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पहले शादी, फिर जमीन पर कब्जे की साजिश: UP में आदिवासी महिलाओं से जुड़ा मामला सामने आया

सोनभद्र  उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के दुद्धी तहसील क्षेत्र में आदिवासी समाज की जमीनों पर कब्जे का एक गंभीर मामला सामने आया है. आरोप है कि एक समुदाय विशेष के लोग अनुसूचित जनजाति की महिलाओं से शादी कर या धर्म परिवर्तन का दबाव डालकर उनकी जमीनें हड़प रहे हैं. इतना ही नहीं 50 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वाले क्षेत्र में एक समुदाय विशेष की बसावट करा रहे हैं. मामला सामने आने के बाद पीड़ितों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है. बता दें कि झारखण्ड और मध्य प्रदेश सीमा से सटे दुद्धी क्षेत्र में जनजातीय आबादी लगभग 50 प्रतिशत है. लेकिन आरोप है कि यहां की जनजातीय महिलाओं को फंसाकर पहले शादी फिर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाकर उनकी जमीनों पर कब्ज़ा किया जा रहा है. इतना ही नहीं इन जमीनों पर एक समुदाय विशेष को बसाया भी जा रहा है. मामला सामने आने के बाद बघाड़ू गांव के निवासी बहादुर अली, नसीम उद्दीन, अजमत अली, रजिया पनिका और अमवार गांव के अब्दुल सुभान के खिलाफ धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और दलित उत्पीड़न के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है. लेकिन ऐसे मामलों से आदिवासी समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है. पीड़ित ने बहादुर अली पर लगाए आरोप पीड़ित मनोज गौड़ ने बताया कि उनके परिवार में चार बेटियां और एक छोटा बेटा है. एक व्यक्ति बहादुर अली पर आरोप है कि वह उनकी चारों बेटियों पर धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बना रहा है. इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के नाम पर सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं. पीड़ित परिवार ने जिला अधिकारी से न्याय न मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च स्तर पर जांच से उन्हें इंसाफ मिलेगा. प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन का दबाव मनोज पेशे से भूजा बेचते हैं. उनकी बेटी रेनू कुमारी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि कुछ दिनों से गांव के बहादुर अली, नसीम उद्दीन, अजमत अली, रजिया पनिका और अमवार निवासी अब्दुल सुभान उसके घर पर बार-बार आकर उसके परिवार को प्रलोभन देकर मुस्लिम धर्म में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं. उनका कहना है कि हमारे बेटों से शादी कर लेने पर वे मालामाल हो जायेंगे. इतना ही नहीं अच्छा गहरा भी बनवा देंगे और जिंदगी बदल जाएगी. बात न मानने पर परिवार खत्म करने की धमकी रेनू ने बताया कि जब परिवार ने उनके ऑफर को ठुकरा दिया तो उन्होंने जान से मारने की धमकी दे डाली। रेनू का यह भी आरोप है कि कॉलेज जाते समय आरोपी उसे छेड़ते हैं. रेनू का यह भी आरोप है कि बहादुर अली गांव में जमीन खरीदकर मुस्लिमों को बसाने का काम भी कर रहा है. उसने आदिवासी महिला से शादी कर पत्नी और साले के नाम पर कई जमीन खरीद रखी है. इस मामले में दूधी कोतवाली इंचार्ज स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है.

ग्वालियर में नए साल की शराब पार्टी महंगी, 500 लोगों के लिए 25 हजार शुल्क तय

ग्वालियर  नए साल के जश्न को मनाने के लिए शराब पार्टी करने वालों को इस बार अधिक फीस चुकानी होगी। अगर 500 लोगों की पार्टी कोई करता है, तो आयोजक को 25 हजार रुपये खर्च कर शराब परोसने का एक दिन का लाइसेंस लेना होगा। इसी तरह जितनी संख्या बढ़ती जाएगी उतनी फीस भी बढ़ जाएगी। एक हजार लोगों की शराब पार्टी के लिए एक लाख फीस एक हजार लोगों की शराब पार्टी के लिए एक लाख रुपये तक फीस है। इस बार की आबकारी नीति में यह प्रविधान किए गए हैं, जिसके बाद इनका उपयोग किया जा रहा है। वहीं इसको लेकर आबकारी विभाग की नौ सर्किल टीमों का गठन किया गया है। जो नए साल की पूर्व संध्या पर निगरानी करेंगी। शहर में ओपन एयर बार का ट्रेंड भी बढ़ा वहीं, पिछले दिनों शहर में ओपन एयर बार का ट्रेंड भी बढ़ा है। कई जगह ऐसी भी शिकायतें हैं जहां बिना लाइसेंस के शराब परोसी जाती है। बता दें कि नए साल को लेकर हर साल आबकारी विभाग के अधिकारी तैयारी करते हैं और अस्थायी लाइसेंस दिए जाने की प्रक्रिया की जाती है। जिले में आबकारी विभाग के जो नौ सर्किल हैं, उनके प्रभारियों सहित टीमें बनी हैं। वहीं अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन का सिलसिला 25 दिसंबर से शुरू हो जाता है। सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि नए साल की पूर्व संध्या पर बिना लाइसेंस के पार्टी करवाने वालों की संख्या बहुत होती है। सिटी सेंटर क्षेत्र में सबसे ज्यादा शराबखोरी आबकारी विभाग की टीम मुख्य स्थानों पर तो निगरानी रखती है, लेकिन शहर में इन दिनों हाईवे से लेकर अंदर के कई मार्गों पर स्थित रेस्टोरेंट और ढाबों पर शराब परोसी जाती है। सिटी सेंटर सहित शहर के कई इलाकों में कारों में शराबखोरी का चलन बढ़ गया है। अहाते बंद होने के बाद सड़कों पर और कार में शराब पीने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन पुलिस हो या आबकारी विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है। एसपी ऑफिस के पीछे शाम ढलते ही शराबखोरी कारों में शराब पीने वाले लोग रात में पॉश कॉलोनियों के रहवासियों सहित व्यावसायिक इलाकों में निजी कर्मचारियों के साथ अभद्रता करते हैं और उत्पात मचाते हैं। खासकर सिटी सेंटर की एयरटेल रोड, एलेन कोचिंग के पास भूखंडों में लग्जरी गाड़ियों को पार्क करके शराबखोरी की जाती है। इसके अलावा एसपी ऑफिस रोड से लेकर एसपी ऑफिस के पीछे शाम ढलते ही शराबखोरी करने वाली कारों को आसानी से देखा जा सकता है। 

BMC Chunav: कांग्रेस हुई अलग-थलग, ठाकरे बंधु और शरद पवार ने किया किनारा

मुंबई  मुंबई नगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस पार्टी अलग-थलग पड़ती दिख रही है. राज्य विधानसभा और उससे पहले लोकसभा चुनाव में जो महाविकास अघाड़ी बनी थी वो अब दरकती दिख रही है. महाविकास अघाड़ी के दो दल शिव सेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट ने हाथ मिला लिया है. इन दोनों ने कांग्रेस को दरकिनार कर इस गठबंधन में मनसे को शामिल किया है. इससे बीएमसी चुनाव काफी दिलचस्प होते जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी चुनाव की घोषणा के साथ ही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा शुरू हो चुकी है. ऐसी प्रबल संभावना है कि ठाकरे समूह और राष्ट्रवादी शरद पवार समूह मुंबई नगर निगम चुनाव में एमएनएस के साथ गठबंधन करेंगे. ठाकरे बंधुओं का गठबंधन लगभग पक्का हो चुका है और दूसरी ओर, ऐसी खबरें हैं कि सीट बंटवारे का फॉर्मूला भी लगभग अंतिम रूप ले चुका है. गठबंधन में कौन-कौन हैं शामिल? शिवसेना (ठाकरे गुट), एमएनएस और एनसीपी शरद गुट ने मुंबई नगर निगम का चुनाव संयुक्त रूप से लड़ने पर लगभग सहमति बना ली है. इस बात की प्रबल संभावना है कि वामपंथी दल भी इस गठबंधन में शामिल होंगे. लेकिन, इस पूरे गठबंधन से कांग्रेस को अलग रखा गया है. यह भी कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी ने खुद को गठबंधन से अलग रखा है. ठाकरे गुट के एक नेता के मुताबिक प्रारंभिक चर्चा के आधार पर ठाकरे गुट 120 से 125 वार्डों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है. संभावना है कि 75 से 80 वार्ड एमएनएस को और 20 से 27 वार्ड एनसीपी शरद गुट को मिलेंगे. चूंकि यह लगभग तय है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी, इसलिए माना जा रहा है कि इन तीनों पार्टियों ने गठबंधन किया है. फरवरी 2017 में हुए नगर निगम चुनावों में शिवसेना के 84 पार्षद चुने गए थे. ठाकरे समूह ने 36 से 40 नए वार्डों पर दावा किया है, जबकि मौजूदा वार्डों को बरकरार रखा है. हालांकि गठबंधन में वार्डों के आवंटन पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन पार्टी कम से कम 120 से 125 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ी हुई है. जानकारी मिली है कि एमएनएस और शिवसेना के वरिष्ठ नेता इस बात पर चर्चा करेंगे कि कौन से वार्ड किसे दिए जाएं और फिर अंतिम निर्णय लेंगे. एमएनएस को कितनी सीटें मिलेंगी? एमएनएस को 75 से 80 वार्ड मिलने की संभावना है और एमएनएस ठाकरे समूह द्वारा पिछले चुनावों में जीते गए कुछ वार्डों की मांग कर सकती है, जिनमें 2017 में चुने गए सात पार्षदों के वार्ड भी शामिल हैं. इनमें माहिम, सेवरी, वर्ली, भांडुप और विक्रोली विधानसभा क्षेत्रों के वार्ड शामिल हैं. इसलिए, इन स्थानों पर सीटों के आवंटन के दौरान तकरार की संभावना है. हालांकि, नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने का निर्णय लिया जा चुका है, इसलिए ठाकरे समूह को कुछ रियायतें देनी होंगी और कुछ वार्ड छोड़ने होंगे. एनसीपी के लिए कितनी सीटें हैं? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फूट पड़ने के कारण मुंबई में शरद पवार गुट का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो गया है. फिर भी, महा विकास अघाड़ी में घटक दल होने के नाते एनसीपी को 20 से 27 वार्ड मिल सकते हैं. 2017 के चुनावों में एनसीपी के नौ पार्षद चुने गए थे. इन वार्डों के अलावा एनसीपी शरद ने घाटकोपर, कुर्ला, चुनाभट्टी, मलाड, भांडुप, कंजूरमार्ग, अनुशक्ति नगर, बायकुला आदि क्षेत्रों में 10 से 15 अन्य वार्डों पर भी दावा किया है. यहां एनसीपी का काफी प्रभाव है.

भारत ने AI क्षेत्र में तीसरा स्थान हासिल किया, UK और साउथ कोरिया को पछाड़ा

 नई दिल्ली भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है. Stanford University की 2025 Global AI Vibrancy Tool रिपोर्ट (2024 के डेटा पर आधारित) में भारत दुनिया में तीसरी पोजिशन पर है. रिपोर्ट की मानें, तो भारत को 21.59 स्कोर मिला है. इस लिस्ट में भारत सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे है.  जहां अमेरिका का स्कोर 78.6 है, जबकि चीन का स्कोर 36.95 है. एक साल पहले तक भारत 7वें स्थान पर था और महज एक साल में भारत ऊंची छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है.  क्या है स्टैनफोर्ड का ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल?  ये टूल एक ऑनलाइन डैशबोर्ड है, जो देशों को AI इकोसिस्टम में उनकी एक्टिविटी और कॉम्पिटेटिवनेस के आधार पर रैंक करता है. ये डैशबोर्ड देशों का आकलन 7 पिलर- रिसर्च, टैलेंट, इकोनॉमी, पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिस्पॉन्सिबल AI और पब्लिक ओपिनियन के आधार पर करता है.  जहां इस लिस्ट में भारत पिछले साल 7वें स्थान पर था, इस साल तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. भारत ने साउथ कोरिया और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ दिया है.  7वें से तीसरे नंबर पर सिर्फ एक साल में भारत कैसे पहुंचा?  भारत के तेजी से आगे बढ़ने के कई कारण हैं. रिपोर्ट की मानें, तो मजबूत पॉलिसी, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और AI टैलेंट का बड़ा पूल भारत को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रहा है.  इसकी वजह से भारत कई मोर्चों पर मजबूत हुआ है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत को AI के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 'नई और बड़ी पहलों' का सीधा फायदा मिला है. इन्हीं कदमों के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए ग्लोबल AI रेस में अपनी स्थिति मजबूत की है. स्टार्टअप और प्राइवेट सेक्टर पुश कितना जरूरी है?  भारत की AI वाइब्रेंसी तेजी से आगे बढ़ते स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस इकोसिस्टम से जुड़ी हुई है. स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस फाइनेंस से लेकर हेल्थकेयर, एजुकेशन और लॉजिस्टिक तक विभिन्न सेक्टर्स में AI को जोड़ रहे हैं. भारत के बड़े डिजिटल बाजार और एक्टिव कंपनियां इसे उभरते मार्केट्स में सबसे अधिक कॉम्पिटेटिव AI इकोनॉमी में से एक बनाती हैं. भारत का टैलेंट एडवांटेज कितना बड़ा है?  भारत AI टैलेंट का ग्लोबल पावर हाउस है. AI हायरिंग में भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ हासिल की है. साल 2024 में भारत AI से जुड़े GitHub प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला दूसरा देश बन गया है. AI स्किल पेनिट्रेशन के मामले में भी भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल है. यह रैंकिंग भारत की मजबूत इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को दिखाती है.  क्या भारत वास्तव में AI रिसर्च और इनोवेशन में मजबूत है?  भले ही भारत, अमेरिका और चीन से पीछे है, लेकिन AI पब्लिकेशन और पेटेंटिंग में भारत के सुधार साफ नजर आते हैं. ये दोनों ही फैक्टर R&D पिलर के लिए महत्वपूर्ण हैं. स्टैनफोर्ड के AI इंडेक्स के मुताबिक भारत लगातार अपनी AI आउटपुट क्षमता बढ़ा रहा है और खुद को एक स्ट्रैटेजिक AI डेवलपमेंट हब के तौर पर स्थापित कर रहा है. खासकर एकेडमिक-इंडस्ट्री के बीच बढ़ता सहयोग, भारत को मजबूत कर रहा है.  सरकार का क्या रोल है?  यहां IndiaAI Mission एक प्रमुख प्लेयर है. इस मिशन को केंद्रीय कैबिनेट ने अगले 5 सालों के लिए लगभग 10,300–10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी. इसके तहत 10 हजार से ज्यादा GPUs को कंप्यूटिंग कैपेसिटी बढ़ने के लिए लगाना, एक नेशनल नॉन-पर्सनल डेटा प्लेटफॉर्म डेवलप करना और सुरक्षित और भरोसेमंद AI के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना है. इसका सीधा असर पॉलिसी, गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पिलर्स पर पड़ा है.  हाई रैंकिंग के बाद भी भारत अभी कहां पिछड़ रहा है? एनालिस्ट को यहां कई गैप्स नजर आ रहे हैं. कटिंग-एज AI रिसर्च और ग्लोबल विजिबल फाउंडेशनल मॉडल्स, चीन और अमेरिकी के मुकाबले हाई-वैल्यू प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फ्लो, डेटा क्वालिटी और एडवांस R&D कैपेसिटी में बॉटलनेक स्थिति बड़ी चुनौतियां हैं. भारत को प्रमुश शहरी केंद्रों के आगे रिस्पॉन्सिबल AI रेगुलेशन और एक्सेस पर काम करने की जरूरत है.  भारत के AI फ्यूचर के लिए ये रैंकिंग क्या मायने रखती है?  तीसरे स्थान पर होना ये दिखाता है कि भारत दुनिया की सबसे ज्यादा कॉम्पिटेटिव AI पावर में से एक है. साथ ही भारत लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों के आगे खड़ा है. हालांकि, फ्रंटियर कैपेबिलिटी के मामले में अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत काफी पीछे है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारत AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बनाए रखता है, रिसर्च और इनोवेशन पर दोगुना जोर दे और एथिकल व इन्क्लूसिव AI गवर्नेंस को मजबूत करता है, तो आने वाले में दशक में भारत की AI ग्रोथ रेट काफी तेज हो सकती है.  

मध्य प्रदेश में MSME से लेकर स्टार्टअप्स तक, निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में बनी सुविचारित नीतियों से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रोजगार सृजन को भी गति मिली है। वर्तमान में 4.26 लाख से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय हैं। इससे औद्योगिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। आत्मनिर्भरता को मिला आधार राज्य सरकार द्वारा किए गए निवेश प्रोत्साहन उपायों का सीधा असर नई इकाइयों की स्थापना के रूप में सामने आया है। वर्ष 2022-23 में 67,332 मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के पंजीकरण से बढ़कर 2024-25 में यह संख्या 1,13,696 तक पहुँच गई  है। नीतिगत सुधारों का सीधा असर उद्योगों के सामने आने वाली प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही ‘जनविश्वास (संशोधन) विधेयक 2024’ के माध्यम से उद्योगों पर लगाए गए दंडात्मक प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाया गया है। इंडस्ट्रियल लैंड अलॉटमेंट सिस्टम और सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से भूमि आवंटन और स्वीकृति प्रक्रियाएँ पारदर्शी और समयबद्ध हुई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। एमएसएमई सेक्टर से एक करोड़ से अधिक को रोज़गार प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर एक मजबूत आधार के रूप में उभरा है। वर्तमान में 20.43 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और ट्रेड जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यह सेक्टर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और एक करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार उपलब्ध करा रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है, बल्कि छोटे व्यापार, सेवाओं और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिला है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास में क्षेत्रीय संतुलन मजबूत हुआ है। लॉजिस्टिक्स से उद्योगों को मिला रास्ता औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को मजबूत करना आवश्यक था। इसी दृष्टि से राज्य में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, इनलैंड कंटेनर डिपो और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क से जोड़ने पर लगातार काम किया जा रहा है। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान से जुड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश के उद्योगों को देश के प्रमुख बाजारों और निर्यात केंद्रों से जोड़ने में सहायता की है। इससे माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आई है और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है।  स्टार्टअप से भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक बनाने के लिए नवाचार और कौशल विकास को समान रूप से महत्व दिया गया है। राज्य में 6000 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर्स नवाचार को सहयोग दे रहे हैं। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है। स्टार्टअप पॉलिसी 2025 के तहत सीड फंडिंग, कैपिटल फंड और एन्ट्रेप्रेन्योर इन रेजिडेंस प्रोग्राम जैसे प्रयास युवाओं को रोजगार सृजन से जोड़ने का काम कर रहे हैं। आने वाले समय में प्रत्येक जिले में प्लग एण्ड प्ले मॉडल पर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर्स स्थापित किए जाने से स्थानीय नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी।

इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल का 773 करोड़ रुपए की लागत से होगा नवनिर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को ऊर्जा संरक्षण के लिए किया सम्मानित इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल का 773 करोड़ रुपए की लागत से होगा नवनिर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर बनने वाले द्वार, विरासत से विकास के संकल्प की करेंगे सिद्धी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को सम्मानित किया है। म्याना स्टेशन को 9687 यूनिट विद्युत ऊर्जा की बचत के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि म्याना रेलवे स्टेशन का बेस्ट परफॉर्मिंग यूनिट के रूप में सम्मानित होना, प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बैतूल जिले के शिल्पकार श्री बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्होंने बताया कि भरेवा धातु शिल्प को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है। गोंड जनजाति की एक उपजाति धातु ढलाई का यह कौशल, पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करती है। यह शिल्पकार प्रतीकात्मक देवी-देवताओं की मूर्ति, परंपरागत आभूषण, गोंड अनुष्ठान में प्रयुक्त धार्मिक सामान के साथ ही मोर लैंप, बैलगाड़ी, घंटियां, पायल, दर्पण के फ्रेम जैसी सजावटी वस्तुएं का निर्माण करते हैं। इस सामग्री की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत लोकप्रियता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री वाघमारे को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 773 करोड रुपए लागत से इंदौर में एम.वाय. हॉस्पिटल का नवनिर्माण किया जाएगा। नए 1450 बिस्तरीय एम.वाय हॉस्पिटल के निर्माण से पुरानी बिल्डिंग की कठिनाईयों से मुक्ति मिलेगी। अस्पताल के साथ ही नर्सिंग हॉस्टल, ऑडिटोरियम आदि का भी निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया की विमेन टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 (ब्लाइंड) का फाइनल मैच जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल मध्यप्रदेश की तीन दृष्टि बाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों सुश्री सुनीता सराठे, सुश्री सुषमा पटेल और सुश्री दुर्गा येवले को 25-25 लाख रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जा रही है। प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 10-10 लाख रुपए नगद और 15-15 लाख रुपए की एफडी की व्यवस्था है। टीम के तीनों कोच सर्वश्री सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पहाड़े को एक-एक लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नई दिल्ली में 12, 13 ,14 दिसंबर को मध्यप्रदेश उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें हस्तशिल्प, एक जिला-एक उत्पाद, माटी कला परिषद, पर्यटन आदि के स्टाल लगाए गए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधायक श्री मधु वर्मा ने अपने पुत्र का विवाह, आगर मालवा में हुए सामूहिक विवाह समारोह में कर, अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक श्री वर्मा द्वारा सामाजिक समरसता और शादियों में अपव्यय को रोकने के लिए की गई इस पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल को प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धता से जोड़ने के संकल्प के अंतर्गत राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर महापुरुषों को समर्पित द्वार बनाने का निर्णय लिया गया था। गत वर्ष भोपाल-नर्मदापुरम मार्ग पर राजा भोज द्वार के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई, इसी क्रम में भोपाल-इंदौर मार्ग पर हाल ही में विक्रमादित्य द्वार निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया गया। वास्तु शिल्प के अद्भुत उदाहरण इन द्वारों से राजधानी भोपाल का गौरव बढ़ेगा। यह द्वार, विरासत से विकास के संकल्प की सिद्धी की दिशा में प्रभावी कदम सिद्ध होंगे।  

2500 करोड़ में तैयार होगा मिनी ब्रह्मोस, DRDO के पिनाका Mk3 से दो मोर्चों पर हमला संभव

बेंगलुरु  भारतीय सेना की आर्टिलरी ताकत में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के नए वर्जन पर काम शुरू दिया है. रक्षा विभाग ने 120 किमी रेंज वाली पिनाका रॉकेट्स को भारतीय सेना में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया है. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 2500 करोड़ रुपये है. मौजूदा पिनाका की रेंज 75-90 किमी तक है, लेकिन यह नया वर्जन पिनाका Mk3 120 किलोमीटर तक मार करेगा, जो पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के लिए बड़ा खतरा साबित होगा. यह प्रोजेक्ट ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सबक से प्रेरित है, जहां पिनाका ने पाकिस्तानी ड्रोन्स, जेट्स और फॉरवर्ड पोस्ट्स को नेस्तनाबूद किया था. अब भारतीय सेना ने डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने 2500 करोड़ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें इन एक्सटेंडेड रेंज गाइडेड रॉकेट्स की खरीद शामिल है. इसे नए पिनाका को भारत का ‘मिनी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि यह सुपरसॉनिक स्पीड से दुश्मन के गहरे इलाकों में घुसकर सटीक वार करने में सक्षम होगी. DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) ने इन रॉकेट्स को डिजाइन किया है, और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत इन्हें बनाएगी. इसके ट्रायल्स अगले कुछ महीनों में शुरू होने वाले हैं और ये मौजूदा पिनाका लॉन्चर्स से ही फायर किए जा सकेंगे… यानी इसके लिए कोई नया इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं चाहिए. क्यों कह रहे हैं ‘मिनी ब्रह्मोस’? ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल की स्पीड Mach 3 तक है, और यह दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करती है. पिनाका की यह नई रॉकेट Mach 4.5 की स्पीड से उड़ान भरती है, 40 किमी की ऊंचाई तक जाती है और Mach 1.8 पर टारगेट हिट करती है. 250 किलो वॉरहेड के साथ GPS-गाइडेड यह रॉकेट 10 मीटर की सटीकता से हमला करेगी. पिनाका मिसाइल की मुख्य खूबियां पिनाका भारतीय सेना की स्वदेशी रॉकेट सिस्टम है, जो दुश्मन पर भारी तबाही मचा सकती है. यहां इसकी खास बातें…     मार करने की दूरी: अभी यह रॉकेट 75-90 किलोमीटर तक मार करती है, नया वर्जन 120 किलोमीटर तक जा सकेगा. आगे 300 किलोमीटर वाला भी आएगा.     स्पीड: हवा से 4.7 गुना तेज उड़ती है, 40 किलोमीटर ऊंचाई तक जाती है और टारगेट पर ध्वनि की स्पीड से ज्यादा तेज हमला करती है.     निशाना: जीपीएस और भारतीय नेविक सिस्टम से चलती है, सिर्फ 10 मीटर के दायरे में सटीक गिरती है, बिल्कुल पिन की तरह.     विस्फोटक ताकत: 250 किलो तक का बारूद ले जा सकती है, बड़े इलाके को एक साथ तबाह करने के लिए कई तरह के वॉरहेड हैं.     एक साथ फायरिंग: एक लॉन्चर से 12 रॉकेट 44 सेकंड में छोड़ सकता है. पूरी बैटरी से 72 रॉकेट एक साथ 1 वर्ग किलोमीटर को मिनटों में बर्बाद कर सकता है.     लाना-ले जाना आसान: बड़े ट्रक पर लगा होता है, गोली चलाकर तुरंत जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन का जवाबी हमला बेकार.     पुराने सिस्टम से काम चलेगा: नई रॉकेट्स पुराने लॉन्चर से ही चलेंगी, कोई नया सामान खरीदने की जरूरत नहीं.     किसी भी मौसम में काम: बारिश, ठंड या पहाड़ – हर जगह चलती है. कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में इसका कमाल दिख चुका है.     पूरी तरह भारतीय: डीआरडीओ ने बनाई, भारतीय कंपनियां बनाती हैं. आर्मेनिया जैसे देशों को बेची भी जा रही है. ब्रह्मोस की तरह यह भी डीप स्ट्राइक करने में माहिर है… पाकिस्तान के सियालकोट, नारोवाल, कसूर या मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों को भारतीय बॉर्डर से 100-120 किमी दूर से टारगेट कर सकती है. इसकी एक बैटरी 44 सेकंड में 72 रॉकेट्स फायर कर 1 वर्ग किमी एरिया को तबाह कर देगी. जहां एक ब्रह्मोस मिसाइल की कीमत 25-35 करोड़ है, वहीं पिनाका रॉकेट्स सस्ती और बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं. यही इसे ‘मिनी ब्रह्मोस’ बनाता है. पाकिस्तान पर कितना असर? पठानकोट, उधमपुर, देहरादून, अंबाला और जोधपुर जैसे नॉर्दर्न बेस से ये रॉकेट्स पाकिस्तान के स्टेजिंग एरिया, लॉजिस्टिक्स नोड्स, अम्यूनिशन डिपो और टेरर लॉन्चपैड्स को आसानी से टारगेट कर सकेंगी. सीमा के मैदानी इलाकों में पाकिस्तान के पास कवर कम है, इसलिए यह भारतीय सेना को डिटरेंस थ्रू डोमिनेंस देगी. एक रेजिमेंट (18 लॉन्चर्स) में 216 रॉकेट्स एक मिनट से कम में फायर हो सकते हैं. पांच बेस पर एक-एक रेजिमेंट तैनात करने से करीब 1100 रॉकेट्स हेयर-ट्रिगर अलर्ट पर रहेंगे. पाकिस्तान की एयर डिफेंस इसे रोकने में नाकाम रहेगी, क्योंकि लॉन्चर्स 50-70 किमी पीछे छिपे रहेंगे. चीन के खिलाफ कैसे बनेगा गेम चेंजर? भारतीय सेना की दो फ्रंट वॉर की तैयारी में ये रॉकेट्स अक्साई चिन या ईस्टर्न लद्दाख में चीनी सैनिकों को रोकेंगी. ब्रह्मोस के साथ टैग-टीम बनाकर यह हॉटन एयरपोर्ट या तियानशुईहाई के हेलीपैड्स को टारगेट कर सकती हैं. सेना चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंबी रेंज वाली पिनाका तैयार होते ही अन्य लॉन्ग-रेंज वेपन्स की प्लानिंग ड्रॉप की जा सकती है. भविष्य में 300 किमी रेंज वाला वर्जन भी आएगा, जो ‘वेरी डीप’ टारगेट्स जैसे एयरबेस और इंडस्ट्रियल प्लांट्स को हिट करेगा. यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ का बेहतरीन उदाहरण है. पिनाका पहले ही आर्मेनिया जैसे देशों को एक्सपोर्ट हो चुकी है, और अब यूरोपीय देश भी इंटरेस्ट दिखा रहे हैं. 2500 करोड़ का यह निवेश न सिर्फ सेना को मजबूत बनाएगा, बल्कि हजारों जॉब्स क्रिएट करेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में देसी MBRL को प्राथमिकता दी जा रही है. दुश्मन अब भारत के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले दस बार सोचेगा, क्योंकि यह ‘मिनी ब्रह्मोस’ उनके घर में घुसकर वार करने वाली है. भारतीय सेना की यह धुरंधर मिसाइल सीमाओं की रक्षा को नई ऊंचाई देगी.

रेलवे कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से पहले सैलरी बढ़ोतरी का रास्ता साफ, जानिए क्या है नई योजना

नईदिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने से पहले ही भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी हैं। वेतन और पेंशन पर भविष्य में पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को देखते हुए रेलवे अभी से खर्च घटाने, बचत बढ़ाने और आय के नए स्रोत मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। संकेत साफ हैं कि 8वें वेतन आयोग के लागू होते ही रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग का गठन जनवरी 2025 में हुआ था और 28 अक्टूबर 2025 को इसके टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए गए। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में जनवरी 2026 से पहले रिपोर्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी सीमित समय को देखते हुए रेलवे ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। 7वें वेतन आयोग का अनुभव रेलवे को 7वें वेतन आयोग का असर अब भी याद है। साल 2016 में आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में 14% से 26% तक की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे रेलवे के वेतन और पेंशन खर्च में सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। अब आंतरिक आकलन के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग के बाद यह बोझ बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बढ़ते खर्च से निपटने की रणनीति रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही ठोस योजना बनाई जा रही है।     ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर     फ्रेट यानी माल ढुलाई से होने वाली आय बढ़ाने की रणनीति     आंतरिक संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग रेलवे की मौजूदा वित्तीय स्थिति वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 98.90% रहा, जबकि इस दौरान शुद्ध आय 1,341.31 करोड़ रुपये दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑपरेटिंग रेश्यो को घटाकर 98.43% करने का लक्ष्य रखा गया है और नेट रेवेन्यू 3,041.31 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और कर्ज से होगी बड़ी बचत पूरे रेल नेटवर्क के इलेक्ट्रिफिकेशन से हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, 2027-28 से रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को किए जाने वाले भुगतान में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि हाल के वर्षों में पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा बजटीय सहायता से पूरा किया गया है। फिटमेंट फैक्टर बना अहम मुद्दा कर्मचारी संगठनों की मांगें भी रेलवे के लिए बड़ी चुनौती हैं। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जबकि अब यूनियनें 2.86 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। अगर यह मांग मान ली जाती है, तो वेतन खर्च में 22% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। बजट बढ़ोतरी से मिला भरोसा इन तमाम चुनौतियों के बावजूद रेलवे आश्वस्त नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन के लिए बजट बढ़ाकर 1.28 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल 1.17 लाख करोड़ रुपये था। पेंशन मद में भी अधिक फंड आवंटित किया गया है। रेलवे का मानना है कि सही योजना, बढ़ती आय और बेहतर प्रबंधन के जरिए 8वें वेतन आयोग के असर को संतुलित किया जा सकेगा, जिसका सीधा लाभ 12.5 लाख से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा।