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कोहरा और ठिठुरन का दौर: मौसम विभाग ने जारी की बड़ी चेतावनी, 48 घंटे चुनौतीपूर्ण

पटना बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को लगातार पांचवें दिन न्यूनतम तापमान  में गिरावट देखी गई, क्योंकि पिछले दिन धूप न निकलने से ठंड बढ़ गई थी। मौसम विभाग (IMD) ने पटना के लिए कोल्ड डे की चेतावनी जारी की है। साथ ही राज्य में अगले 48 घंटों के लिए अलर्ट (IMD Alert) जारी किया गया है। इस दौरान जबरदस्त ठंड के साथ पछुआ हवाओं और कोहरे की मार झेलनी पड़ सकती है। कुछ जगहों पर कोल्ड डे की स्थिति मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार को पश्चिमी और मध्य बिहार में कुछ जगहों पर कोल्ड डे की स्थिति बनी रह सकती है। अधिकांश जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे के साथ बादल छाए रहने की उम्मीद है। मंगलवार को उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में एक या दो जगहों पर घना कोहरा छाए रहने की संभावना है, जबकि अन्य जगहों पर हल्का से मध्यम कोहरा बना रह सकता है। अगले दो दिनों में अधिकतम या न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव की उम्मीद नहीं है।  IMD ने अगले छह दिनों तक पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने का भी पूर्वानुमान लगाया है। पटना एयरपोर्ट पर 5 उड़ानें रद्द ठंड और घने कोहरे का असर परिवहन व्यवस्था पर साफ दिख रहा है। रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, पटना से गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनें 10 से 20 घंटे देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। पटना एयरपोर्ट पर खराब विजिबिलिटी के कारण पांच उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि कई अन्य उड़ानें काफी देरी से संचालित हुईं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति में सुधार होने तक पहले से शेड्यूल जांच लें और सतर्क रहें। शिवहर में, जहां एक हफ्ते से अधिक समय से शीतलहर जारी है, जिला मजिस्ट्रेट प्रतिभा रानी ने 23 दिसंबर तक सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। यह फैसला गिरते तापमान और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यह बंदी कक्षा 1 से 8 तक के लिए लागू है, जबकि शिक्षकों को नियमित रूप से स्कूल आने का निर्देश दिया गया है।   इन जिलों में स्कूल बंद बिहार में कड़ाके की ठंड की वजह से अररिया, सिवान, भोजपुर, गोपालगंज और सीतामढ़ी के जिला प्रशासन ने 24 दिसंबर तक सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। मुजफ़्फरपुर में, पूरी तरह से बंद करने के बजाय, स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों में पढ़ाई सुबह 10.00 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक ही होगी। गोपालगंज जिले में, प्रशासन ने ठंड की लहर के बीच बच्चों की सेहत और सुरक्षा को देखते हुए 22 दिसंबर से 24 दिसंबर तक सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों, प्री-स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ाई बंद कर दी है। हालांकि, क्लास 9 और उससे ऊपर की क्लास के लिए कुछ छूट दी गई है, जो सुबह 10.00 बजे से शाम 4.30 बजे तक चलेंगी।

जनवरी 2026 में होगी बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर परीक्षा, जानें एडमिट कार्ड की डेट

पटना बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने गृह विभाग (पुलिस शाखा) में सब-इंस्पेक्टर (SI) पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर जाकर आधिकारिक नोटिस चेक कर सकते हैं। ऑफिशियल नोटिफिकेशन में दी गई जानकारी के अनुसार सब-इंस्पेक्टर (SI) पर चयन के लिए प्रारंभिक लिखित परीक्षा का आयोजन 18 जनवरी 2026 (रविवार) और 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को किया जाएगा। परीक्षा का आयोजन दो शिफ्टों में किया जाएगा। पहली शिफ्ट का आयोजन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक किया जाएगा। पहली शिफ्ट का आयोजन दोपहर 2:30 बजे से दोपहर 4:30 बजे तक किया जाएगा। उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए 2 घंटे का समय दिया जाएगा। ई-एडमिट कार्ड की जानकारी- प्रारंभिक लिखित परीक्षा के लिए उम्मीदवारों के ई-एडमिट कार्ड (E-Admit Card) आधिकारिक वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर 30 दिसंबर 2025 से उपलब्ध होंगे। परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए अभ्यर्थी ई-एडमिट कार्ड के साथ अपना एक वैलिड फोटो आईडी जैसे-मतदाता पहचान-पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड अथवा आधार कार्ड भी लेकर जरूर जाएं। यदि ई- एडमिट कार्ड पर फोटो स्पष्ट नहीं है या उपलब्ध नहीं है तो ऐसी स्थिति में अभ्यर्थी परीक्षा केन्द्र पर अपने साथ आवेदन फॉर्म के समान दो फोटोग्राफ भी ले जाएं। जो अभ्यर्थी किसी कारणवश वेबसाईट से ई- एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं कर सकें वे 9 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के 5, हार्डिंग रोड, पटना-800001 स्थित ऑफिस से अपने आवेदन फॉर्म की फोटोकॉपी और एक वैलिड फोटो आईडी कार्ड के साथ स्वयं उपस्थित होकर अपने खर्च पर डुप्लिकेट ई- एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। पदों की डिटेल्स- इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए दरोगा के कुल 1799 पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। उम्मीदवारों को वेतनमान लेवल 6 के अनुसार दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया- 1. प्रारंभिक लिखित परीक्षा 2. मेंस लिखित परीक्षा 3. शारीरिक योग्यता/दक्षता परीक्षा 4. मेरिट लिस्ट एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें- 1. सबसे पहले आपको ऑफिशियल वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर जाना होगा। 2. इसके बाद आपको होम पेज पर दिए गए ‘Home Dept.’ टैब में जाकर एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करना होगा। 3. इसके बाद आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर लॉगिन करना होगा। 4. अब आपकी स्क्रीन पर आपका एडमिट कार्ड ओपन हो जाएगा। 5. अब आप एडमिट कार्ड को डाउनलोड कर लीजिए। 6. परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट निकाल लीजिए।  

सूर्य–चंद्र ग्रहण की पूरी गाइड: पंचांग की मान्यताएं और वैज्ञानिक तथ्य

हिंदू धर्म, शास्त्र और खगोल विज्ञान तीनों में ग्रहण का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को न केवल खगोलीय घटना माना जाता है, बल्कि इसका आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रभाव भी स्वीकार किया गया है। वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। आइए, हिंदू पंचांग, शास्त्र और आधुनिक विज्ञान के अनुसार 2026 के सभी ग्रहणों की सरल और प्रमाणिक जानकारी जानते हैं। साल 2026 में कितने ग्रहण लगेंगे? हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में कुल 4 ग्रहण होंगे। 2 सूर्य ग्रहण 2 चंद्र ग्रहण। इनमें से केवल एक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए उसी ग्रहण में सूतक काल मान्य होगा। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। सूर्य ग्रहण 2026 की तिथि और समय पहला सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी 2026 समय: दोपहर 3:26 बजे से शाम 7:57 बजे तक भारत में दृश्य: नहीं सूतक काल: मान्य नहीं दृश्य क्षेत्र: अफ्रीका, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका आदि यह ग्रहण भारत में न दिखने के कारण धार्मिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। दूसरा सूर्य ग्रहण – 12 अगस्त 2026 समय: रात 9:04 बजे से 13 अगस्त सुबह 4:25 बजे तक भारत में दृश्य: नहीं सूतक काल: मान्य नहीं दृश्य क्षेत्र: यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, कनाडा आदि चंद्र ग्रहण 2026 की तिथि और समय पहला चंद्र ग्रहण – 3 मार्च 2026 प्रकार: खंडग्रास चंद्र ग्रहण समय: दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक भारत में दृश्य: हां (कुछ भागों में) सूतक काल: मान्य शास्त्रों के अनुसार इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और दान करना शुभ माना गया है। दूसरा चंद्र ग्रहण – 28 अगस्त 2026 समय: सुबह 8:04 बजे से दोपहर 11:22 बजे तक भारत में दृश्य: नहीं सूतक काल: मान्य नहीं ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें? शास्त्र और विज्ञान दोनों के अनुसार मंत्र जाप, ध्यान, नाम स्मरण, भोजन बनाना व ग्रहण करना, मूर्ति स्पर्श और शुभ कार्य। ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और साधना का समय भी है। सही जानकारी के साथ ग्रहण काल को समझना हर आयु वर्ग के लिए उपयोगी है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से कितना होगा वेतन बढ़ोतरी, जानें पूरी टाइमलाइन

नई दिल्ली साल 2025 खत्म होने वाला है और नए साल (New Year 2026) का आगाज होने जा रहा है. नए साल का इंतजार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेसब्री से है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने वाला है. इसके बाद कर्मचारियों को जबर्दस्त सैलरी हाइक (Salary Hike) मिलेगी, इसे लेकर तमाम एक्सपर्ट्स अपने अनुमान जाहिर कर रहे हैं. वहीं बढ़ा हुआ पैसे कर्मचारियों के बैंक अकाउंट (Bank Account) तक कब पहुंचेगा, इसके बारे में संकेत पहले लागू हुए वेतन आयोगों को देखकर लगाया जा सकता है.   8वां वेतन लागू होते ही मिलेगा बढ़ा हुआ पैसा?  8th Pay Commission ने वेतन वृद्धि के संकेत दे दिए हैं. सवाल उठता है कि बढ़ा हुआ वेतन और बकाया राशि क्या इसके लागू होने के तुरंत बाद खाते में पहुंच जाएगी. इसके जबाव के लिए इतिहास पर नजर डालें, तो संशोधित वेतन और बकाया राशि वास्तव में कर्मचारियों तक पहुंचने में समय लगता है. 7th Pay Commission 31 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग का आगाज होगा.  हालांकि अगले वेतन संशोधन के बारे में तो तमाम अनुमान आ रहे हैं, लेकिन इसकी डेडलाइन और वास्तविक भुगतान पर स्पष्टता अभी बाकी है. पूर्व की परंपरा को देखें तो अगर 1 जनवरी 2026 को कागजों पर नया सैलरी स्ट्रक्चर प्रभावी हो सकता है, लेकिन एक्सपर्ट कह रहे हैं कि वास्तविक वेतन संशोधन और बकाया राशि मिलने में समय लग सकता है, पहले के वेतन आयोगों की तरह कर्मचारियों को प्रतीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए. यानी यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि बढ़ी हुई सैलरी तुरंत उनके बैंक खातों में दिखाई देगी.  एक्सपर्ट ने साफ की तस्वीर  इस साल अक्टूबर 2025 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8th Pay Commission के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दी थी. इस आयोग को नवंबर 2025 से लगभग 18 महीने का समय दिया गया है, ताकि वह वेतन, भत्ते और पेंशन पर वो अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर सके. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के एमडी प्रतीक वैद्य का कहना है कि आधिकारिक प्रभावी तिथि और वास्तविक भुगतान के बीच आमतौर पर अंतर होता है. वैद्य के मुताबिक,कागज़ पर 8th CPC को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी वेतन संशोधन का कार्य सौंपा गया है. लेकिन, पिछले अनुभव से पता चलता है कि प्रभावी तिथि और बैंक खातों में पहला बढ़ा हुआ वेतन आने के बीच आमतौर पर एक अंतराल होता है. उन्होंने 7वें वेतन आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि ये वेतन संशोधन जनवरी 2016 से लागू हो गया था, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी उसी वर्ष जून में मिली थी और बकाया राशि का भुगतान बाद के महीनों में किया गया था. कितना हो सकता है Salary Hike?  अब बात करते हैं कि 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, अभी तक इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन इसे लेकर कई शुरुआती अनुमान जारी किए जा चुके हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पिछले वेतन आयोगों और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर ये सभी अनुमान लगाए जा रहे हैं. 6वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद औसत वेतन में करीब 40% की बढ़ोतरी हुई थी. वहीं सातवें वेतन आयोग ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर लगभग 23-25% की वृद्धि की थी. 8वें वेतन आयोग के लिए प्रारंभिक अनुमानों से पता चलता है कि वेतन में 20% से 35% तक का इजाफा देखने को मिल सकता है. सैलरी तय करने में अहम माना जाने वाले Fitment Factor 2.4 और 3.0 के बीच रहने की उम्मीद है. इससे खासतौर पर न्यूनतम और एंट्री लेवल पर सैलरी में अधिक वृद्धि हो सकती है. हालांकि, एक्सपर्ट इस बात पर जोर देते हैं कि ये सिर्फ अनुमान ही हैं, गारंटी नहीं. वैद्य ने कहा सैलरी में इजाफे का अंतिम आंकड़ा अगले 12-18 महीनों में महंगा, 16वें वित्त आयोग के बाद राजकोषीय गुंजाइश और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा.

मध्यप्रदेश में बड़ा बदलाव: 6 जिलों और 15 औद्योगिक क्षेत्रों को मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल किया जाएगा

भोपाल  भोपाल शहर को मेट्रोपॉलिटन रीजन (बीएमआर) में बदलने की तस्वीर साफ होते ही अब विकास को गति मिलेगी। एक ओर आर्थिक विकास तो दूसरी ओर करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे। केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते दिन बीएमआर का मैप जारी किया। इसमें साफ हो गया कि करीब 12,099 वर्ग किमी में फैले बीएमआर में 6 जिलों के कुछ हिस्से शामिल होंगे। इनमें 12 नगरीय क्षेत्र, 30 तहसील व 2524 गांव शामिल होंगे। इसमें 15 बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ बड़ी संख्या में पर्यटन क्षेत्रों तक इसका विस्तार किया है। रोजगार के द्वार खुलेंगे इससे औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेगी और पर्यटन स्थल सीधे जुड़ेगे। हालांकि बीएमआर में शामिल 6 जिलों में से किसी भी जिले के सभी नगरों को शामिल नहीं किया है। इससे उन्हें ट्रांसपोर्टेशन और अन्य विकास कार्यों का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन यहां के लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे, क्योंकि इसमें शामिल नगरों में आइटी पार्क व स्पेशल इकोनोमिक जोन का विकास होगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल, रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, सीहोर, राजगढ़ व आसपास के कस्बों को मध्यभारत के प्रमुख आर्थिक केंद्र में बदलेगी। ये औद्योगिक क्षेत्र शामिल बीएमआर में गोविंदपुरा, अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, टेक्सटाइल पार्क, बगरौदा और आइटी पार्क शामिल हैं। सीहोर जिले के बड़ियाखेड़ी, बुधनी, औद्योगिक क्षेत्र और रायसेन जिले के आष्टा एग्रो प्रोसेसिंग, पचामा मंडीदीप व प्लास्टिक पार्क तामोट को शामिल किया है। नर्मदापुरम जिले के फूड पार्क बाबई और मोहासा बाबई एनर्जी पार्क व राजगढ़ के पीलूखेड़ी औद्योगिक और विदिशा का जांबर बांगरी औद्योगिक क्षेत्र को शामिल किया है। 6 से अधिक एमएसएमई के औद्योगिक पार्क और क्लस्टर शामिल हैं। इससे विनिर्माण, आइटी, लॉजिस्टिक्स, वस्त्र उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, आइटी, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण व पर्यटन क्षेत्रों में करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे। मेट्रोपॉलिटन रीजन में निगम का नया सेटअप भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। संचालनालय ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर शहर में मौजूद बीएमसी के सभी प्रकार के इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार करने कहा है। इंजीनियर वर्ग को मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग जिम्मेदारी दी जानी हैं। एमपीआर में चार बिल्डिंग परमिशन सेल बनाई जानी है जिसके लिए सिविल कैडर से चार सिटी प्लानर बनेंगे। सीवेज, पार्किंग, रोड, ट्रैफिक, लाइटिंग जैसे कामों के लिए अलग-अलग कार्यपालन यंत्री निर्धारित किए जाएंगे जिनके निर्देशन में टीम काम करेगी। केबिनेट में होगी चर्चा अभी नगर 85 वार्ड में काम चलाऊ व्यवस्था पर टिका है। नगरीय प्रशासन विभाग के मसौदे पर केबिनेट में चर्चा होगी। मंजूरी मिलते ही इसे नए सिस्टम में शामिल कर लिया जाएगा। इसका सीधा फायदा नगर निगम के लंबित प्रोजेक्ट में तेजी आने के रूप में मिलेगा। नगर निगम में सीएम हेल्प लाइन की शिकायतों में एक बार फिर सबसे नीचे आया है। इसी प्रमुख वजह कम इंजीनियर, विकास कार्य ठप होने को माना जा रहा है। नगर परिषद की बैठक में पार्षदों ने इस बात को प्रमुख से सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया था।

रूस की पुतिन सरकार ने भारतीय छात्रों के लिए की बड़ी घोषणा, बिना परीक्षा मिलेगा विश्वविद्यालय में दाखिला

नई दिल्ली  भारतीय छात्रों के लिए रूस से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। रूसी सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए अपने प्रतिष्ठित सरकारी छात्रवृत्ति कार्यक्रम (Government Scholarship Program) की घोषणा कर दी है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब भारतीय छात्रों को रूस में उच्च शिक्षा पाने के लिए किसी भी प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। चयन का आधार और पाठ्यक्रम यह छात्रवृत्ति स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), पीएचडी और उन्नत प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए प्रदान की जा रही है। उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह से उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड और पोर्टफोलियो के आधार पर किया जाएगा। पोर्टफोलियो में शोध पत्र, अनुशंसा पत्र (LOR), और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रमाणपत्रों को वरीयता दी जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत मेडिसिन, इंजीनियरिंग, फार्मेसी और स्पेस स्टडीज जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई की जा सकेगी। रूस ने भाषा की बाधा को दूर करने के लिए कई कोर्स अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध कराए हैं। जो छात्र रूसी भाषा सीखना चाहते हैं, उनके लिए मुख्य पाठ्यक्रम शुरू होने से पहले एक वर्षीय प्रारंभिक भाषा पाठ्यक्रम (Preparatory Language Course) का विकल्प भी रखा गया है। आवेदन प्रक्रिया और समय सीमा एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रवृत्ति की चयन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन और प्रारंभिक चयन किया जाएगा और यह प्रक्रिया 15 जनवरी तक चलेगी। दूसरे चरण में रूसी विज्ञान और उच्च शिक्षा मंत्रालय चयनित छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार विश्वविद्यालय आवंटित करेगा और वीजा संबंधी प्रक्रिया पूरी करेगा। भारतीय छात्र मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग, कजान और व्लादिवोस्तोक जैसे प्रमुख शहरों के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट education-in-russia.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह पहल न केवल छात्रों का भविष्य संवारेगी, बल्कि भारत-रूस के शैक्षिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में कदम, एफटीए की प्रक्रिया में तेजी, पीयूष गोयल बोले

नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) फाइनल होते ही भारत अब फुल फॉर्म में दिख रहा है. भारत ने अगला बड़ा दांव अमेरिका की ओर बढ़ा दिया है. वॉशिंगटन के साथ ट्रेड डील को लेकर चर्चाएं तेज हैं और संकेत साफ हैं कि मामला सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहा.  केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब कागजों से निकलकर हकीकत की तरफ बढ़ रही है. सवाल बस इतना है कि क्या अगला बड़ा FTA अमेरिका के नाम होगा? गोयल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में है और दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से मजबूती आ रही है. नई दिल्ली में मीडिया को ब्रीफ करते हुए गोयल ने बताया कि भारत अब खुद को ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इससे पहले वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कह चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच शुरुआती फ्रेमवर्क डील लगभग तय होने के करीब है. हो चुकी है 6 दौर की बातचीत अग्रवाल के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अब तक 6 दौर की बातचीत हो चुकी है. इसमें बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) और ऊंचे टैरिफ को कम करने के लिए अंतरिम समझौते पर चर्चा हुई है. उम्मीद है कि इससे ज्यादातर भारतीय निर्यात पर लगने वाले भारी टैरिफ घटाए जा सकेंगे. रीजनल ट्रेड को मिलेगी नई रफ्तार इस बीच भारत इंडो-पैसिफिक रीजन में भी अपनी आर्थिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है. गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से रीजनल ट्रेड को नई रफ्तार मिलेगी. यह फाइव आइज देशों के साथ भारत का तीसरा FTA है, इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ समझौता हो चुका है. भारत को मिलेगा 100% मार्केट एक्सेस न्यूजीलैंड FTA के तहत भारत को 100% मार्केट एक्सेस मिलेगा. आईटी, टूरिज्म, टेलीकॉम, कंस्ट्रक्शन और ऑडियो-विजुअल जैसे 118 सर्विस सेक्टर्स खुलेंगे. दोनों देशों को उम्मीद है कि अगले 5 साल में बाइलेटरल ट्रेड दोगुना हो सकता है. फार्मा कंपनियों को भी बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि दवाओं के लिए फास्ट-ट्रैक अप्रूवल और मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स की आपसी मान्यता पर सहमति बनी है.

सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश: नियम तोड़ने वालों को कोई राहत नहीं, अवैध निर्माण गिराने के आदेश में नहीं होगा हस्तक्षेप

 नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने हाल में कर्ज वसूली और अवैध निर्माण से जुड़े दो मामलों में सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने वालों को कैसी भी राहत नहीं दी जा सकती. पहले मामले में कर्ज वसूली से जुड़े एक आरोपी को राहत देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत में ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जहां बेईमान लोग आखिरी तारीख तक इंतजार करते हैं और फिर याचिका दायर कर राहत मांगने लगते हैं. CJI ने साफ शब्दों में कहा कि आपने पैसा हड़प लिया और फिर वापस नहीं किया. ऐसे मामलों में किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती. दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कैंटोनमेंट इलाके में बिना अनुमति बनाए गए निर्माण को गिराने के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया. इस मामले में भी CJI ने कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि लोग क्रेजी हो गए हैं, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कोर्ट का तात्पर्य ये रहा कि लोग अब हद से ज्यादा चालाक हो गए हैं. अगर उन्हें एक कमरा कंपाउंड करने की अनुमति दी जाती है, तो वे सीढ़ी बना लेते हैं, फिर छत पर कब्जा कर लेते हैं. इसके बाद 30 साल तक अदालतों में अधिकारियों को घसीटते रहते हैं और कहते हैं कि यह कंपाउंडेबल है, वह कंपाउंडेबल है. CJI ने सीधे सवाल किया जब आपको पता था कि निर्माण की अनुमति नहीं है, तो आपने बिना इजाजत कमरा क्यों बनाया? कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में वह हस्तक्षेप नहीं करेगा. सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों से साफ संकेत मिलता है कि चाहे कर्ज न चुकाने का मामला हो या अवैध निर्माण का, नियम तोड़ने वालों के प्रति अदालत अब कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है.    

टाटा सिएरा ईवी जल्द होगी लॉन्च, टेस्टिंग में आई पहली बार नजर

नई दिल्ली टाटा मोटर्स ने हाल ही में भारत में बहुप्रतीक्षित सिएरा एसयूवी लॉन्च की है, जिसकी कीमत 11.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. इसी रफ्तार को आगे बढ़ाते हुए कंपनी अब इसके इलेक्ट्रिक वर्जन, टाटा सिएरा ईवी की लॉन्चिंग की तैयारी कर रही है. सिएरा ईवी का टेस्ट म्यूल भारतीय सड़कों पर देखा जा चुका है, जिससे ग्राहकों को इसकी झलक मिल गई है. स्पाई शॉट्स में कई मैकेनिकल अपग्रेड्स और डिजाइन में बदलाव नजर आ रहे हैं, जो इसे इसके पेट्रोल-डीजल वेरिएंट से अलग बनाते हैं. यह टाटा के सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में अगला बड़ा कदम है. टाटा सिएरा ईवी टाटा सिएरा ईवी में बैटरी पैक के विकल्प हैरियर ईवी से लिए जा सकते हैं, जिसमें 65kWh और 75kWh की कॉन्फिगरेशन मिल सकती है. इसमें टू-व्हील-ड्राइव और ऑल-व्हील-ड्राइव दोनों वेरिएंट्स आने की संभावना है, जैसा कि हैरियर ईवी में देखने को मिलता है. हालांकि, टाटा सिएरा ईवी की पावर फिगर्स को इसके बड़े भाई से थोड़ा कम रख सकता है, ताकि दोनों प्रोडक्ट्स में फर्क साफ रहे. इससे एफिशिएंसी भी बेहतर होगी और ड्राइविंग रेंज को प्राथमिकता दी जाएगी. इन बदलावों से टाटा की रणनीति साफ नजर आती है, जिसमें क्षमता, प्रैक्टिकलिटी और पोर्टफोलियो में सही जगह का संतुलन रखा गया है. स्पाई शॉट्स आए सामने टाटा सिएरा ईवी की हालिया स्पाई शॉट्स इसकी इलेक्ट्रिक पहचान को पुख्ता करती हैं, जिसमें एग्जॉस्ट पाइप की गैरमौजूदगी पावरट्रेन में बदलाव को साफ दिखाती है. सबसे अहम बात यह है कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिएरा ईवी में इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन सेटअप मिलेगा, जो इस सेगमेंट में आमतौर पर मिलने वाले बीम एक्सल अरेंजमेंट से काफी बेहतर है. यह एडवांस्ड सस्पेंशन न सिर्फ महंगा है, बल्कि कई फायदे भी देता है. इससे कार्नरिंग के दौरान बॉडी रोल कम होता है और उबड़-खाबड़ रास्तों पर व्हील आर्टिकुलेशन बेहतर होती है, जिससे स्टेबिलिटी, कम्फर्ट और कैपेबिलिटी बढ़ती है. इससे सिएरा ईवी एक ज्यादा एडवांस और वर्सेटाइल एसयूवी बन जाती है. इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन टाटा मोटर्स का सिएरा ईवी में इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन देना मिड-साइज एसयूवी सेगमेंट के किफायती मानकों से अलग सोच को दर्शाता है. जहां ज्यादातर प्रतिद्वंद्वी सिंपल और सस्ते सेटअप पर निर्भर करते हैं, वहीं यह एडवांस डिजाइन ड्राइविंग डायनामिक्स और कम्फर्ट को बेहतर बनाता है. इससे सिएरा ईवी को एक प्रीमियम प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया जा सकता है, जिससे इसकी कीमत टाटा के इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो में ज्यादा हो सकती है. इंटीरियर स्पेसिफिकेशन्स हालांकि टाटा मोटर्स ने सिएरा ईवी के इंटीरियर स्पेसिफिकेशन्स की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि एसयूवी में ब्रांड के इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो के मुताबिक कई कॉस्मेटिक और फंक्शनल अपग्रेड्स मिलेंगे. इसमें Arcade.ev ऐप सूट के जरिए बेहतर कनेक्टिविटी, एयरोडायनामिक्स के लिए क्लोज्ड-ऑफ ग्रिल, खास .ev बैजिंग और ड्रैग कम करने के लिए एयरो-ऑप्टिमाइज्ड अलॉय व्हील्स शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा, टाटा सिएरा ईवी में डिजिटल इंटीरियर रियर-व्यू मिरर भी दिया जा सकता है, जैसा कि हैरियर ईवी में मिलता है, जिसमें रियर-माउंटेड कैमरा से क्लियर और बिना रुकावट वाला व्यू मिलता है.

सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद विवाद: अरावली की पहचान के लिए 100 मीटर ऊंचाई का नियम कैसे बना?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अरावली पहाड़ियों की एक समान परिभाषा को मंजूरी दे दी है. इसके अनुसार, आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंची कोई भी भू-आकृति ही अरावली पहाड़ी मानी जाएगी. ऐसी दो या ज्यादा पहाड़ियां अगर एक-दूसरे से 500 मीटर के दायरे में हैं, तो वे अरावली रेंज कहलाएंगी. यह परिभाषा केंद्र सरकार की समिति की सिफारिश पर आधारित है, लेकिन इससे विवाद खड़ा हो गया है. पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे अरावली का 90% से ज्यादा हिस्सा संरक्षण से बाहर हो सकता है, जबकि सरकार इसे पुरानी व्यवस्था का विस्तार बता रही है. मई 2024 में बनी थी कमेटी सरकार ने ‘100 मीटर’ के मापदंड को लेकर चल रहे विवाद के बीच जारी स्पष्टीकरण में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखला की परिभाषा को सभी राज्यों में मानकीकृत किया गया है ताकि अस्पष्टता को दूर किया जा सके और दुरुपयोग को रोका जा सके। विशेष रूप से वे प्रथाएं जिनके कारण पहाड़ियों के आधार के बेहद करीब खनन जारी रखना संभव हुआ। पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन से संबंधित काफी समय से लंबित मामलों की सुनवाई करते हुए मई 2024 में एक ‘समान परिभाषा’ की सिफारिश करने के लिए एक समिति का गठन किया था। पर्यावरण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में गठित इस समिति में राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली के प्रतिनिधियों के साथ-साथ तकनीकी निकायों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। समिति ने पाया कि केवल राजस्थान में ही एक औपचारिक रूप से स्थापित परिभाषा है, जिसका वह 2006 से पालन कर रहा है। क्या है 100 मीटर वाली परिभाषा इस परिभाषा के अनुसार, स्थानीय भू-भाग से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृतियों को पहाड़ियां माना जाता है। ऐसी पहाड़ियों को घेरने वाली सबसे निचली सीमा रेखा के भीतर खनन निषिद्ध है, चाहे उस रेखा के भीतर की भू-आकृतियों की ऊंचाई या ढलान कुछ भी हो। सूत्रों ने बताया कि चारों राज्य इस लंबे समय से चली आ रही राजस्थान की परिभाषा को अपनाने पर सहमत हो गए हैं। साथ ही इसे वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया गया है। इन उपायों में एक-दूसरे से 500 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ियों को एक ही पर्वत श्रृंखला मानना, किसी भी खनन निर्णय से पहले भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्रों पर पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं का अनिवार्य मानचित्रण और खनन निषिद्ध मुख्य और संरक्षित क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान करना शामिल है। निष्कर्ष निकालना गलत सरकार ने 100 मीटर से नीचे के क्षेत्रों में खनन की अनुमति दिए जाने के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि यह प्रतिबंध संपूर्ण पहाड़ी प्रणालियों और उनके भीतर स्थित भू-आकृतियों पर लागू होता है, न कि केवल पहाड़ी के शिखर या ढलान पर। सरकार की ओर से कहा गया कि यह निष्कर्ष निकालना ‘गलत है’ कि 100 मीटर से नीचे की सभी भू-आकृतियां खनन के लिए खुली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत गठित एक समिति की अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की परिभाषा संबंधी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। विवाद की जड़ें 2002 में यह कहानी अप्रैल 2002 से शुरू होती है. सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी (सीईसी) को हरियाणा के कोट और आलमपुर में अरावली में अवैध खनन की शिकायत मिली. अक्टूबर 2002 में सीईसी ने खनन रोकने का आदेश दिया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कहा गया कि ऐसे खनन से अरावली का अस्तित्व खत्म हो जाएगा. 30 अक्टूबर 2002 को कोर्ट ने हरियाणा और राजस्थान समेत पूरे अरावली क्षेत्र में सभी तरह के खनन पर रोक लगा दी. राजस्थान में इससे बड़ा संकट खड़ा हो गया. मार्बल, ग्रेनाइट और अन्य खनन उद्योग से जुड़े लाखों लोग बेरोजगार हो गए. तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने कोर्ट से अपील की कि चल रहे खनन को बंद न किया जाए, क्योंकि यह लोगों की आजीविका से जुड़ा है. दिसंबर 2002 में कोर्ट ने चल रहे खनन को फिर शुरू करने की अनुमति दे दी, लेकिन नई इकाइयों पर रोक लगा दी. 100 मीटर फॉर्मूला की शुरुआत स्थायी हल के लिए गहलोत सरकार ने एक कमेटी बनाई. मई 2003 में कमिटी ने अमेरिकी भू-आकृति विशेषज्ञ रिचर्ड मर्फी के सिद्धांत को अपनाया, जिसमें समुद्र तल से 100 मीटर ऊंची पहाड़ी को ही पहाड़ माना जाता है. कमेटी ने मर्फी के अन्य सिद्धांतों (संरचनात्मक और क्षरण आधारित) को नजरअंदाज कर दिया. अगस्त 2003 में गहलोत सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली जगहों पर खनन की संभावनाएं तलाशें. 2003 में वसुंधरा राजे सरकार आने के बाद इस फॉर्मूले को आगे बढ़ाया गया और खनन आवंटन शुरू हो गए. इसे कोर्ट के 2002 आदेश की अवमानना मानते हुए बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने याचिका दायर की. अप्रैल 2005 में कोर्ट ने नए आवंटनों को बंद करने का आदेश दिया. राजस्थान में दुरुपयोग और कोर्ट की चिंता बाद में गहलोत सरकार के समय फिर खनन शुरू हुए. कुछ जगहों पर ऊंचाई मापने में गड़बड़ी हुई – अल्टीमीटर से जमीन से चोटी की ऊंचाई नापकर 160 मीटर की पहाड़ी को 80-90 मीटर दिखाया गया. इससे अलवर, सिरोही और उदयपुर में बड़े पैमाने पर खनन हुआ. 2010 में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) और सीईसी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राजस्थान में अवैध खनन जोरों पर है. अलवर में 2269 पहाड़ियों में से 25% गायब हो चुकी थीं. कई पहाड़ियां पूरी तरह खत्म हो गईं. कोर्ट ने केंद्र से अरावली की स्पष्ट परिभाषा मांगी. केंद्र की 2025 सिफारिश और सुप्रीम कोर्ट का फैसला नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने मर्फी फॉर्मूले को आगे बढ़ाते हुए कहा कि 100 मीटर ऊंचाई (लोकल रिलीफ से) वाली पहाड़ियां ही अरावली मानी जाएंगी. साथ ही, सबसे निचली कंटूर लाइन के अंदर का पूरा क्षेत्र (ढलान सहित) संरक्षित होगा. सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को इस परिभाषा को सभी राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली) के लिए समान रूप से लागू कर दिया. कोर्ट ने नए खनन पट्टे देने पर भी रोक लगा दी, जब तक पूरी अरावली के लिए सस्टेनेबल माइनिंग … Read more