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स्क्रब vs पॉलिश: क्या आप भी कंफ्यूज हैं? यहां समझें दोनों का फर्क

चेहरे के साथ-साथ बॉडी को खास केयर देना चाहते हैं तो बॉडी स्क्रब और बॉडी पॉलिश काफी कारगर हो सकते हैं। एक जैसे तत्वों के साथ दोनों ही प्रोडक्ट्स ड्राई पैचेस, सेल्युलाइट्स को कम करते हैं। बॉडी पॉलिश एक्स्ट्रा केयर देते हुए स्किन को पल्म्प और हाइड्रेट करने का भी काम करता है। बॉडी पॉलिश और बॉडी स्क्रब में काफी कुछ एक जैसा होता है। इन दोनों में ही लगभग एक जैसे तत्वों का इस्तेमाल होता है, फिर भी दोनों अलग-अलग तरह का काम करते हैं। आइए जानते हैं दोनों के बीच का फर्क और इनके फायदे।  ये हैं अंतर     नेचुरल एक्सफोलिएट्स में शुगर और सॉल्ट जैसी सामग्री का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि बॉडी पॉलिश में इसकी मात्रा कम होती है।     बॉडी पॉलिश में बॉडी स्क्रब की तुलना में मॉइश्चराइज करने वाली चीजें ज्यादा होती हैं जैसे शीया बटर, ग्रीन टी, विटामिन सी। किसे चाहिए बॉडी स्क्रब और किसे बॉडी पॉलिश यह चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी स्किन को किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है। अगर आपकी स्किन बेहतर तरीके से मॉइश्चराइज है तो फिर उसे डीप क्लींजिंग की जरूरत है। ऐसे में बॉडी स्क्रब ज्यादा बेहतर ऑप्शन है। वहीं, स्किन बैरियर में रुकावट होने और ड्राई पैचेस की समस्या होने पर बॉडी पॉलिश का विकल्प चुना जाना चाहिए। इस तरह मिलेगा ज्यादा फायदा     बॉडी स्क्रब को पहले एक्सफोलिएट और फिर मॉइश्चराइज करने के लिए बनाया गया है। वैसे तो हर स्किन टाइप के लिए बॉडी स्क्रब सही है लेकिन सेंसिटिव स्किन वालों इसके इस्तेमाल सावधानी बरतना चाहिए।     बॉडी स्क्रब का इस्तेमाल करने के दौरान डार्क पैचेस, सेल्युलाइट, डैड स्किन सेल्स वाले हिस्से पर ज्यादा फोकस करें।     बॉडी स्क्रब को सर्कुलर मोशन में लगाने पर ब्लड फ्लो बढ़ता है और बेहतर सफाई होती है। इसे आप स्ट्रेच मार्क्स, चोट के पुराने दागों पर भी अप्लाय कर सकते हैं।     नहाने के बाद बॉडी ऑयल या मॉइश्चराइजर लगाना ना भूलें, इससे स्किन को आराम मिलेगा। इस तरह लगाएं बॉडी पॅालिश     साफ स्किन पर इसे सीधे अप्लाई करें।     ड्राई हिस्से, स्ट्रेच मार्क्स, जख्मों के निशान, असमान रंगत वाले हिस्से या फिर उन हिस्सों पर लगाएं जहां आप शेविंग करना चाह रही हैं।     बॉडी पॉलिश लगाने के बाद साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे मॉइश्चराइजिंग वाला इफेक्ट भी खत्म हो जाएगा।  

1971 का इतिहास मत भूलो! रूस का बांग्लादेश को दो-टूक संदेश—भारत से दुश्मनी भारी पड़ेगी

ढाका  बांग्लादेश में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर ने ढाका को 1971 के ऐतिहासिक युद्ध की याद दिलाते हुए भारत के साथ बढ़ते तनाव पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को “जल्द से जल्द” भारत के साथ रिश्तों में तनाव कम करना चाहिए और यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी आज़ादी में भारत और तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) की निर्णायक भूमिका रही है।   रूसी राजदूत ने साफ शब्दों में कहा कि 1971 में भारत ने न सिर्फ सैन्य स्तर पर अहम योगदान दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बांग्लादेश के पक्ष में मजबूती से खड़ा रहा। वहीं, सोवियत संघ ने उस दौर में भारत-बांग्लादेश को कूटनीतिक और रणनीतिक समर्थन देकर पश्चिमी दबावों को संतुलित किया था। राजदूत अलेक्जेंडर के मुताबिक,“बांग्लादेश की स्वतंत्रता किसी एक देश की देन नहीं थी। भारत और रूस दोनों ने भारी बलिदान दिए। ऐसे में इतिहास को नज़रअंदाज़ करना भविष्य के रिश्तों के लिए खतरनाक हो सकता है।”   उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास, आंतरिक अस्थिरता और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। मॉस्को का संकेत साफ माना जा रहा है कि वह दक्षिण एशिया में तनाव नहीं, संतुलन और स्थिरता चाहता है।विश्लेषकों का कहना है कि रूस का यह बयान सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि ढाका के लिए एक कूटनीतिक चेतावनी भी है कि इतिहास से मुंह मोड़ना उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर सकता है।  

चिकित्सा का चमत्कार: AIIMS Bhopal में महाधमनी की हाई-रिस्क सर्जरी, मरीज को मिला नया जीवन

भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के विशेषज्ञों ने एक 35 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। यह मरीज पिछले आठ महीनों से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहा था और कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी उसे राहत नहीं मिली थी। जानलेवा थी बीमारी, महाधमनी में सूजन एम्स में हुई जांच में सामने आया कि मरीज ''सुप्रा-रीनल एब्डामिनल एआर्टिक एन्यूरिज्म'' नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। इसमें पेट की महाधमनी (शरीर की सबसे बड़ी रक्त नली) में खतरनाक सूजन आ गई थी। यह सूजन आंतों और दोनों किडनियों को रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख धमनियों तक फैल चुकी थी। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज की बाईं किडनी ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। यदि समय रहते सर्जरी न होती, तो महाधमनी के फटने से मरीज की जान जा सकती थी। छाती और पेट के रास्ते हुई सर्जरी सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में यह मैराथन सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने पेट और छाती के हिस्से से चीरा लगाकर ऑपरेशन शुरू किया। प्रक्रिया के दौरान सूजनग्रस्त महाधमनी को हटाकर उसकी जगह ग्राफ्ट (कृत्रिम रक्त नली) लगाई गई। साथ ही खराब हो चुकी बाईं किडनी को शरीर से अलग किया गया। सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा दाईं ओर की स्वस्थ किडनी और आंतों की प्रमुख धमनियों को ग्राफ्ट में फिर से जोड़ना (प्रत्यारोपित करना) था, जिसे टीम ने बखूबी अंजाम दिया। विशेषज्ञों की टीम का समन्वय सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन आईसीयू में निगरानी में रखा गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। इस सफलता में डॉ. निवारिया के साथ डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही शामिल थे। इसके अलावा यूरोलाजी विभाग से डॉ. माधवन, डॉ. केतन मेहरा, एनेस्थीसिया से डॉ. हरीश और सर्जिकल आन्कोलाजी से डॉ. अंकित जैन का विशेष सहयोग रहा।  

सांसद कंगना रनोट को लेकर मंडी में सियासी बवाल, युवा कांग्रेस ने चंदा अभियान चलाकर किया विरोध प्रदर्शन

मंडी हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने अपने 90 दिवसीय एजेंडे के तहत शनिवार को मंडी में सांसद कंगना रनोट के कथित बयानों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान युवा कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सांसद कंगना रनोट के निजी खर्चों को पूरा करने के नाम पर चंदा एकत्रित किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी ज्योतिष एचएम के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष निखिल ठाकुर और प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी भी मौजूद रहे। ज्योतिष एचएम ने बताया कि सांसद कंगना रनोट द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान के जवाब में यह चंदा अभियान शुरू किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सांसद के तौर पर मिलने वाले वेतन से उनके स्टाफ का खर्च भी पूरा नहीं हो पाता। कार्यक्रम के तहत युवा कांग्रेस ने मंडी शहर में रोष रैली भी निकाली। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए डीसी कार्यालय के बाहर केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों को अब तक केंद्र से कोई ठोस मदद नहीं मिली है, जिससे प्रदेश के युवाओं में भारी रोष है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनहित के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है और योजनाओं के नाम बदलकर लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। युवा कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों को नजरअंदाज करना बंद करे और आपदा प्रभावितों सहित आम जनता को तुरंत राहत प्रदान करे।

सोशल मीडिया यूजर्स सावधान! अप्रैल 2026 से आपकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखेगा ये विभाग

नई दिल्ली  1 अप्रैल 2026 से भारत में इनकम टैक्स नियमों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नए नियमों के तहत इनकम टैक्स अधिकारियों को सिर्फ भौतिक संपत्तियों तक सीमित रहने की बजाय नागरिकों की डिजिटल गतिविधियों तक पहुंच बनाने का अधिकार मिलेगा। यह पहली बार होगा जब टैक्स अधिकारी औपचारिक रूप से डिजिटल दुनिया में भी जांच कर सकेंगे। दरअसल, यह बदलाव टैक्स चोरी रोकने और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। अब सिर्फ कैश और ज्वेलरी नहीं, डिजिटल स्पेस भी रडार पर पहले इनकम टैक्स अधिकारियों को छापेमारी के दौरान घर, प्रॉपर्टी, नकदी, दस्तावेज और गहनों जैसी भौतिक चीजों की जांच की अनुमति थी। यह अधिकार इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 132 के तहत आता था। लेकिन नए प्रस्तावित नियमों के तहत अब अधिकारियों को वर्चुअल डिजिटल स्पेस तक पहुंच का अधिकार मिलेगा। इस डिजिटल स्पेस में शामिल होंगे: ईमेल अकाउंट, क्लाउड स्टोरेज , डिजिटल वॉलेट ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया प्रोफाइल और चैट्स, अन्य ऑनलाइन अकाउंट।  यानि Gmail, WhatsApp, Facebook और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी टैक्स जांच के दायरे में आ सकते हैं। सरकार ऐसा बदलाव क्यों कर रही है? सरकार का कहना है कि आज के समय में ज्यादातर वित्तीय लेनदेन ऑनलाइन हो चुके हैं।       बैंकिंग और निवेश     स्टॉक ट्रेडिंग     क्रिप्टो एसेट्स     ऑनलाइन खरीदारी इन सभी लेनदेन को फिजिकल जांच के जरिए पकड़ना अब प्रभावी नहीं रहा। इनकम टैक्स अधिकारियों का मानना है कि किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय गतिविधि डिजिटल फुटप्रिंट में छिपी होती है। डिजिटल डेटा तक पहुंच मिलने से टैक्स चोरी के मामलों को ज्यादा सटीक तरीके से पकड़ा जा सकेगा। क्या हर किसी का डेटा कभी भी चेक किया जा सकता है? सबसे बड़ा सवाल है प्राइवेसी का। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टैक्स अधिकारी मनमाने तरीके से किसी का डिजिटल डेटा एक्सेस नहीं कर सकेंगे। जैसे पहले छापेमारी के लिए 'reason to believe' जरूरी होता था, वैसी ही शर्त अब डिजिटल अकाउंट्स पर भी लागू रहेगी। मतलब: जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आय या वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी का ठोस आधार नहीं होगा, तब तक ईमेल, सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल अकाउंट्स को एक्सेस नहीं किया जा सकेगा। टैक्सपेयर्स के लिए इसका क्या मतलब है?     टैक्स से जुड़ी पारदर्शिता बढ़ेगी।     लोगों को अपनी डिजिटल गतिविधियों में सावधानी बरतनी होगी।     अगर आपकी इनकम और लेनदेन साफ-सुथरे और सही तरीके से घोषित हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं।  

2026 में सरप्राइज देने आ रहा है ऐपल का ये खास डिवाइस, आईफोन नहीं फिर भी सबकी नजर

 नई दिल्ली  नए साल का आगाज होने वाला है। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में साल 2026 कई बदलाव लेकर आ सकता है। टेक‍ दिग्‍गज ऐपल को लेकर कहा जा रहा है कि नए साल में कंपनी आईफोन या मैकबुक से ज्‍यादा किसी और प्रोडक्‍ट पर ध्‍यान दे रही है। ऐपल सीईओ टिम कुक के लिए कंपनी के टेक डेवलपमेंट की सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐपल ग्‍लासेज हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा हो सकता है कि नए साल में कंपनी एक बड़ा लॉन्‍च आयोजित करे। 2026 में हो सकता है बड़ा लॉन्‍च 9to5Mac की रिपोर्ट (ref.) के मुताबिक, ऐसा हो सकता है कि ऐपल साल 2026 में बड़े लॉन्‍च की तैयारी कर रही है और ऐपल ग्‍लासेज उसका हाइलाइट हो सकते हैं। अन्‍य रिपोर्टों की मानें तो कंपनी ‘अनवील्‍ड’ शब्‍द पर अधिक जोर दे रही है जो संकेत हो सकता है कि ऐपल ग्‍लासेज को सिर्फ प्रदर्शित किया जाएगा, लॉन्‍च को टाला जा सकता है। ऐसा हुआ तो कंपनी वियरेबल सेगमेंट में एक और डिवाइस तो ले आएगी, लेकिन उसे लोगों के बीच पहुंचने में वक्‍त लग सकता है। हर दिन पहनने वाले चश्‍मे हालांकि ऐपल ग्‍लास ेज के लॉन्‍च होने की संभावनाएं इसलिए भी बन रही हैं, क्‍योंकि गूगल भी अपने ग्‍लासेज नए साल में ला सकती है और मेटा के मेटा ग्‍लास पहले से ही मार्केट में मौजूद हैं। यह सेगमेंट ऐसा है, जिसमें चीनी स्‍मार्टफोन कंपनियों की मौजूदगी अधिक नहीं है। ऐपल इस सेगमेंट में कदम रखकर अपना दबदबा बना सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, ऐपल का मकसद पूरी तरह से ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) ग्लासेज देना है, जिसे लोग हर दिन पहन सकें। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लास को पहनने के बाद उससे ही कई सारे काम किए जा सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसा रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेज (Ray-Ban Meta smart glasses) में मुमकिन है। ऐपल ग्‍लासेज के फीचर्स ऐपल ग्‍लासेज को बिना डिस्‍प्‍ले के पेश किया जा सकता है। वह आईफोन से कनेक्‍ट होकर काम करेगा। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लासेज में सिरी, ऐपल इंटेलिजेंस और बिल्‍ट इन ओपन ईयर स्‍पीकर्स का सपोर्ट होगा। हालांकि चश्‍मों को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए आईफोन चाहिए होगा। कहा जाता है कि कंपनी एक ऐसा गैजेट पेश करना चाहती है जिसे यूजर अपने रोजाना इस्‍तेमाल में पहन सके। कंपनी मेटा से मुकाबला करना चाहती है, जिसने अपने स्‍मार्ट ग्‍लासेज को एक के बाद एक लॉन्‍च करके पॉपुलर बनाने की कोशिश की है।

सुनील गावस्कर के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने विवादित कंटेंट हटाने को कहा

नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर की पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की रक्षा के लिए एक अंतरिम रोक लगाई और सोशल मीडिया माध्यमों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को उनकी अनुमति के बिना उनके नाम और तस्वीर के इस्तेमाल वाले कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया। जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की सिंगल-जज बेंच ने मेटा और एक्स कॉर्प समेत प्लेटफॉर्म्स को यह आदेश दिया कि गावस्कर के बारे में गलत बयान वाले यूआरएल 72 घंटे के अंदर हटा दिए जाएं। दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया कि अगर उपभोक्ता तय समय के अंदर उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने में असफल रहते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट तक एक्सेस को बंद करना होगा। जस्टिस अरोड़ा ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को गावस्कर के नाम पर बिना अनुमति के बेचे जा रहे उत्पादों की सूची हटाने का भी निर्देश दिया, और कहा कि अगर विक्रेता 72 घंटे के अंदर उल्लंघन करने वाले उत्पाद हटाने में फेल हो जाते हैं, तो प्लेटफॉर्म्स उन्हें डीलिस्ट कर देंगे। यह अंतरिम राहत गावस्कर को उस केस में मिली जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया और ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर बिना उनकी इजाजत के उनसे जुड़ी चीजों के खिलाफ इस्तेमाल के खिलाफ अपनी पर्सनैलिटी के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी। पूर्व क्रिकेटर ने आरोप लगाया कि कई सोशल मीडिया पेज उनके नाम से मनगढ़ंत बातें बता रहे थे, जबकि कई ऑनलाइन विक्रेता उनसे गलत तरीके से जुड़े नकली ऑटोग्राफ वाले आइटम और दूसरा सामान बेच रहे थे। पहले की सुनवाई में, जस्टिस अरोड़ा ने गावस्कर से गूगल, मेटा और एक्स को गलत यूआरएल देने को कहा था, साथ ही इंटरमीडियरी को एक हफ्ते के अंदर सूचना तकनीक नियम, 2021 के तहत उनके अनुरोध पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। गावस्कर का मामला उन हाई-प्रोफाइल पर्सनैलिटी की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जो दिल्ली हाई कोर्ट के सामने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी के अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने गावस्कर के केस की अगली सुनवाई 22 मई, 2026 को तय की है।

आज नहीं तो कभी नहीं! साल की अंतिम चतुर्थी पर गणेश पूजा में इन गलतियों से बचें

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत हो या संकटों का निवारण, बप्पा का नाम सबसे पहले लिया जाता है. इस साल की आखिरी विनायक चतुर्थी कल यानी 24 दिसंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी. चूंकि यह साल की अंतिम विनायक चतुर्थी है और बुधवार का दिन भगवान गणेश को ही समर्पित है, इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है. लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा के दौरान की गई छोटी सी चूक आपको शुभ फल से वंचित कर सकती है. विनायक चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 23 दिसंबर की दोपहर से हो जाएगी, लेकिन उदय तिथि की मान्यता के कारण व्रत और मुख्य पूजा 24 दिसंबर को ही की जाएगी.     चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 23 दिसंबर 2025, दोपहर से     चतुर्थी तिथि समाप्त: 24 दिसंबर 2025, दोपहर तक     पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 11:19 AM से दोपहर 1:11 PM तक. गणेश पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां! तुलसी का प्रयोग वर्जित गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें. पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित किया है. इसकी जगह उन्हें ‘दुर्वा’ (दूब घास) अर्पित करें. चंद्रमा के दर्शन से बचें विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे कलंक लगने का भय रहता है. इसलिए शाम के समय सावधानी बरतें. खंडित मूर्ति की पूजा पूजा स्थान पर कभी भी ऐसी गणेश प्रतिमा न रखें जो कहीं से टूटी या चटक गई हो. खंडित मूर्ति की पूजा करने से घर में अशांति और दोष बढ़ता है. दिशा का ध्यान न रखना बप्पा की स्थापना करते समय ध्यान रखें कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो. पूजा के समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना श्रेष्ठ माना जाता है. तामसिक भोजन और क्रोध विनायक चतुर्थी के दिन घर में लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें. साथ ही, इस दिन किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी को अपशब्द बोलें, नहीं तो मानसिक शांति भंग हो सकती है. कैसे करें सही विधि से पूजा? सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें. शुभ मुहूर्त में गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें. बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें. भगवान गणेश को 21 दुर्वा की गांठें और उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग जरूर लगाएं. आखिर में गणेश चालीसा का पाठ करें और सपरिवार आरती उतारें.

भोपाल के कोलार में बड़ी स्वास्थ्य सौगात, CHC में बच्चों को चौबीसों घंटे इलाज और इनडोर सुविधा

भोपाल कोलार और आसपास के रहवासियों को अब बीमार बच्चों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार में बच्चों के लिए 24 घंटे उपचार और भर्ती की सुविधा शुरू की जाएगी। यह निर्देश सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने मंगलवार को अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान दिए। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की मानिटरिंग के निर्देश डॉ. शर्मा ने प्रसूति वार्ड, ओपीडी, पोषण पुनर्वास केंद्र और न्यूबार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट का जायजा लिया। उन्होंने संस्था प्रभारी को स्पष्ट किया कि अस्पताल में अब शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो चुकी है। इसलिए केवल डे-केयर (दिन में इलाज) तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर बच्चों को वार्ड में भर्ती कर इलाज करें। उन्होंने निर्देश दिए कि केवल अति गंभीर स्थिति में ही बच्चों को हमीदिया या अन्य उच्च संस्थानों में रेफर किया जाए।   गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने भर्ती प्रसूता महिलाओं से भोजन और इलाज का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की संभावित डिलीवरी डेट से पहले पूरी जांच की जाए, ताकि समय रहते जटिलताओं को रोका जा सके। हाल ही में पकड़ में आए अटेंडेंस फर्जीवाड़े के बाद सीएमएचओ ने कोलार अस्पताल के स्टाफ की बैठक में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक कहा कि डाक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक, सभी को ओपीडी समय पर आना होगा। उपस्थिति केवल 'सार्थक ऐप' के जरिए ही मान्य होगी और उसी आधार पर वेतन आहरित किया जाएगा। साथ ही मरीजों और परिजनों से व्यवहार में शालीनता बरतने की हिदायत दी गई। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।  

शिकायतों पर सख्त रुख: खेल मंत्री गौतम ने कोच को किया सस्पेंड, विभाग में हड़कंप

चंडीगढ़ खेल मंत्री गौरव गौतम ने झन्जर जिले के गांव खरहर के ग्रामीणों द्वारा प्रशिक्षक अजय राठी के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही तथा बच्चों को नियमित प्रशिक्षण न देने संबंधी शिकायत पर कोच को निलंबित करने के आदेश जारी किए थे। खेल विभाग ने सोमवार को कोच को निलंबित कर दिया और जांच अवधि तक हैड ऑफिस पंचकूला में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए। पिछले ही महीने गांव खरहर जिला झज्जर में कार्यरत एथलैटिक्स कोच के ट्रांसफर हो जाने पर नए कोच अजय राठी को विभाग द्वारा स्थानांतरित किया गया था। इसके पश्चात नए कोच अजय राठी के खिलाफ लगातार मैदान पर अनुपस्थिति की शिकायत गांव के सरपंच और अन्य सदस्यों द्वारा डी. एस. ओ. झज्जर को भी दी गई परंतु कोई उचित कार्रवाई न होने के कारण गांववासियों ने खेल मंत्री को कोच के अनुचित व्यवहार से खिलाड़ियों के होने वाले नुकसान से अवगत करवाया था। खेल मंत्री ने जिला खेल अधिकारी और निजी खेल सलाहकार को औचक निरीक्षण के लिए भेजा जिसमें कोच सुबह की ट्रेनिंग से नदारद पाया गया। इस दौरान मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों ने भी अधिकारियों को अवगत करवाया कि संबंधित कोच मैदान पर सिर्फ शाम की ट्रेनिंग पर हफ्ते में 1-2 दिन मौजूद रहते हैं और अधिकांश खिलाड़ी स्वयं ही मैदान पर प्रैक्टिस करते हैं। इस संबंध में जब फोन के माध्यम से कोच से अनुपस्थिति का कारण पूछा गया तो कोच अजय द्वारा फोन पर भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।