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मौत को मात देकर शिवभक्त बना एकमात्र अंग्रेज, पत्नी के तप और बैजनाथ महादेव से जुड़ी चमत्कारी कथा

मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित बैजनाथ महादेव मंदिर का एक अनूठा इतिहास रहा है. ये मंदिर आगर-मालवा के सुसनेर रोड पर स्थित है, जोकि जिले के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों में से एक है. मंदिर के शिखर की ऊंचाई लगभग 50 फीट है. यह भारत का एकमात्र मंदिर है जिसका अंग्रेजों ने जीर्णोद्धार करवाया. मंदिर बाणगंगा नदी के किनारे बना हुआ है. दरअसल, 16वीं शताब्दी में निर्मित इस प्राचीन मंदिर का 1883 में एक ब्रिटिश सेना अधिकारी ने जीर्णोद्धार कराया गया था. वह अधिकारी एक चमत्कारिक घटना के कारण शिव का भक्त बन गया था. ब्रिटिश सेना का नाम लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन था, जोकि अफगानिस्तान युद्ध में भाग लेने गए. उनकी पत्नी आगर मालवा छावनी में रहती थीं. उन्हें कुछ दिनों तक अपने पति की कोई खबर नहीं मिली. एक दिन वह चिंतित होकर घोड़े पर सवार होकर जीर्ण-शीर्ण बैजनाथ मंदिर पहुंचीं. वहां की आरती और मंत्रोच्चार ने उसे आकर्षित किया. उनकी व्याकुलता देखकर पुजारियों ने उन्हें 11 दिनों तक ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने की सलाह दी. उन्होंने प्रतिज्ञा की कि यदि उनका पति सुरक्षित लौट आता है, तो वह मंदिर का जीर्णोद्धार करवाएंगी. मार्टिन की पत्नी के मंत्र जपने का फल जब उन्होंने मंत्र का जाप करना शुरू किया उसके ठीक दसवें दिन मार्टिन का एक पत्र आया. उसमें उसने एक चौंकाने वाली बात लिखी. उसने बताया कि जब युद्ध में शत्रुओं ने उसे घेर लिया, तो बाघ की खाल पहने और हाथ में त्रिशूल लिए एक योगी प्रकट हुए और उन्होंने शत्रुओं को भगा दिया. मार्टिन ने बताया कि योगी ने उससे कहा कि वह उनकी पत्नी की प्रार्थनाओं के कारण उसे बचाने आए हैं. सौभाग्य से, पति की सुरक्षित वापसी के बाद मार्टिन दंपति ने 15,000 रुपए के भारी दान से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. इसका प्रमाण आज भी मंदिर के शिलालेखों में देखा जा सकता है. इसके बाद वे इंग्लैंड चले गए, लेकिन कहा जाता है कि उन्होंने अपने घर में एक शिवलिंग स्थापित किया और अपनी अंतिम सांस तक शिव की पूजा की. बैजनाथ महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे? हवाई मार्ग: सबसे निकट इंदौर का देवी अहिल्या बाई होलकर हवाई अड्डा है, जोकि 126 किमी दूर है. यह मध्य प्रदेश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा माना जाता है. दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, रायपुर और जबलपुर जैसे शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. रेल मार्गः इस मंदिर के सबसे पास उज्जैन का रेलवे स्टेशन है, जोकि 68 किमी दूर है. उज्जैन रेलवे स्टेशन मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. सड़क मार्गः आगर-मालवा सड़क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. आप यहां एक कैब किराए पर ले सकते हैं या उज्जैन, इंदौर (126 किमी), भोपाल (184 किमी) और कोटा राजस्थान (195 किमी) से बस पकड़कर यहां पहुंच सकते हैं.

यात्रीगण ध्यान दें! रेलवे किराए में बढ़ोतरी लागू, स्लीपर–एसी सफर अब पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली  भारतीय रेल ने हाल में रेल किराया बढ़ाने की घोषणा की थी, जो आज (26 दिसंबर) से प्रभावी हो गया। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पहले से की गई बुकिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, 26 दिसंबर या उसके बाद की गई नई बुकिंग पर नए किराए लागू होंगे। रेलवे के अनुसार, उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों के किरायों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अन्य श्रेणियों की ट्रेनों और सेवाओं पर यह संशोधन लागू होगा। आपको बता दें कि यह एक साल में दूसरी बार है जब मंत्रालय ने यात्री रेल किरायों में संशोधन किया है। इससे पहले जुलाई में किराया में वृद्धि की गयी थी। रेल मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए साधारण श्रेणी के टिकट की कीमत में एक पैसा प्रति किलोमीटर तथा मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की गैर वातानुकूलित और सभी ट्रेनों की वातानुकूलित श्रेणियों के टिकट की कीमत में दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की अधिसूचना जारी की।अगर आप से आप टिकट बुक कर रहे हैं तो महंगा किराया चुकाना होगा. यह बढ़ोत्‍तरी एक और दो पैसे प्रति किमी. की गयी है. हालांकि इससे कम दूरी तक जनरल क्‍लास से और लोकल ट्रेनों में सफर वालों को राहत दी गयी है, यानी उनके किराए में कोई बढ़ोत्‍तरी नहीं हुई है. आइए जानते हैं कि इस बढ़ोत्‍तरी पर आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा. हालांकि साल में यह दूसरी बार बढ़ोत्‍तरी हुई है. इससे पहले जुलाई में भी बढ़ोत्‍तरी हुई थी. रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक सूचना और प्रसार दिलीप कुमार बताते हैं कि आज से ट्रेनों का किराया महंगा हो गया है. इस बढ़ोत्‍तरी से 215 किमी. से कम की जनरल क्‍लास और सबअर्बन ट्रेनों में कोई असर नहीं पड़ेगा. यात्रियों को ट्रेनों और स्‍टेशनों में और बेहतर सुविधाएं देने के लिए यह बढ़ोत्‍तरी की गयी है. साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को 1 पैसा प्रति किलोमीटर अतिरिक्त देना है. वहीं, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी और एसी श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 2 पैसे प्रति किलोमीटर है. इससे पहले कब बढ़ा किराया भारतीय रेलवे द्वारा 21 दिसंबर को जारी आदेश के अनुसार 26 दिसंबर से ट्रेन के किराए में बढ़ोतरी का फैसला किया था. किराया बढ़ोत्‍तरी वित्‍तीय साल 2025-26 में दूसरी बार किया गया है. इससे पहले जुलाई में किराया बढ़ाया गया था. इसमें नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस में आधा पैसा (0.5 पैसे) प्रति किमी और एसी क्लासेस में 2 पैसे प्रति किमी की बढ़ोतरी की गई थी. 500 किमी तक नॉन-एसी जनरल में कोई बदलाव नहीं था. इससे रेलवे को करीब 700 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान था.     कम दूरी पर कोई असर नहीं     अगर आप जनरल क्लास में सफर करते हैं, तो रेलवे ने यहां एक ‘किलोमीटर वाला फॉर्मूला’ लगाया है.     अगर आपकी यात्रा 215 किलोमीटर के दायरे में है, तो पुराना किराया ही लगेगा. यानी छोटे शहरों के बीच आने-जाने वालों पर कोई बोझ नहीं है.     216 से 750 किमी के सफर के लिए सिर्फ 5 रुपये बढ़ेंगे. वहीं, 751 से 1250 किमी के लिए 10 रुपये, 1251 से 1750 किमी के लिए 15 रुपये और इससे अधिक दूरी के लिए अधिकतम 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.     स्लीपर और फर्स्ट क्लास (साधारण): यहां प्रति किलोमीटर के हिसाब से मात्र 1 पैसे का इजाफा किया गया है.     आज से पहले बुक टिकट पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा.     215 किमी तक जनरल/सेकंड क्लास और लोकल ट्रेनों में कोई बढ़ोतरी नहीं.यानी रोजाना ऑफिस/स्कूल जाने वाले यात्रियों को कोई फर्क नहीं.     इस साल दूसरी बार बढ़ोतरी. पहली बार 1 जुलाई 2025 में हुई बदलाव किया गया था.     इससे आने वाले राज्‍सव से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी.     रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज, में कोई वृद्धि नहीं. पुराने नियम ही लागू. वे को कितने राजस्‍व का फायदा इस बढ़ोत्‍तरी के साथ एक साल में रेलवे को 1300 करोड़ के अतिरिक्‍त राजस्‍व होने की संभावना है. पहले बढ़ोत्‍तरी के आदेश से 700 और इस बार के आदेश से 600 करोड़ रुपये सालाना आया की बढ़ोत्‍तरी होगी. इस तरह पूरे साल में 1300 रुपये अतिरिक्‍त आय रेलवे को होने का अनुमान है. दिल्‍ली से मुंबई पर कितना पड़ेगा असार दिल्ली से मुंबई के बीच ट्रेन दूरी करीब 1384 किमी. है. अगर जनरल क्लास (अनरिजर्व) की बात करें तो पहले किराया करीब 350 के आसपास होता था, एक पैसे प्रति किमी. के हिसाब से करीब 14 रुपए पहले की तुलना में अधिक चुकान होंगे. यानी 364 के आसपास जनरल क्‍लास वालों को किराया चुकाना होगा. नॉन-एसी यानी  (स्लीपर क्लास) का पुराना किराया 585 रुपये के आसपास है, दो फसे प्रति किमी. बढ़ोत्‍तरी के हिसाब से करीब 32 रुपये ज्‍यादा चुकाने होंगे. वहीं, थर्ड एसी का पुराना किराया करीब 1600 रुपये था, जो बढ़कर 1643 रुपये के आसपास हो गया. दिल्‍ली से पटना के किराए में कितना फर्क पड़ेगा दिल्‍ली से पटना की दूरी करीब 998 किलोमीटर है. जनरल क्लास (अनरिवर्ज) का मौजूदा किराया पुराना किराया 250 के आसपास है, बढ़ोत्‍तरी होने के बाद किराए में 10 रुपये की बढ़ोत्‍तरी होगी, कुल किराया 260 रुपये के आसपास . वहीं नॉन-एसी में किराए में 24 रुपये तक की बढ़ोत्‍तरी . इसी रूट पर थर्ड एसी का पुराना किराया करीब 1370 रुपये है. स्‍लीपर जितना इस क्‍लास में बढ़ाने के बाद किराया 1395 रुपए के आसपास .

हेलमेट नहीं तो जेब पर भारी मार! MP में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अर्थदंड बढ़कर 500 रुपये

भोपाल प्रदेश में हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। हेलमेट नहीं लगाने पर अब 300 की जगह 500 रुपये अर्थदंड लगाने का प्रस्ताव है। वाहन चालक हो या पीछे बैठने वाला दोनों के लिए 500-500 रुपये अर्थंदड का प्रविधान किया जाएगा। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसे शीघ्र ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं अधिकारियों के अनुसार जनवरी, 2026 से नए प्रविधान लागू हो सकते हैं। एमपी में भी लगभग तीन वर्ष पहले अर्थदंड बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में आया था, पर कुछ मंत्रियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे जनता की जेब पर बोझ बढ़ेगा। इस कारण इसे स्वीकृति नहीं मिली थी। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इनमें दोपहिया वाहन सवार जितने लोगों की मौत होती हैं, उनमें 80 प्रतिशत से अधिक बिना हेलमेट वाले होते हैं।   6541 लोग बिना हेलमेट के थे इस कारण अर्थदंड बढ़ाने की तैयारी है। चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पहले से चालान 500 रुपये है। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीटीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान चली गई, जिनमें 6541 लोग बिना हेलमेट के थे। ये वाहन चालक या पीछे बैठने वाले थे। पड़ोसी राज्यों की तुलना में एमपी में हेलमेट नहीं पहनने पर अर्थदंड बहुत कम है। यूपी और बिहार में एक हजार और छत्तीसगढ़ में 500 रुपये अर्थदंड उत्तर प्रदेश और बिहार में एक हजार और छत्तीसगढ़ में 500 रुपये अर्थदंड लगाया जाता है। सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने भी इस वर्ष दो बार प्रदेश का दौरा किया, जिसमें नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा था। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 15-20 दिन के भीतर हेलमेट नहीं लगाने पर अर्थदंड बढ़ाने की अधिसूचना जारी हो सकती है।  

उदयपुर गैंगरेप मामला: चलती कार में वारदात, आईटी कंपनी के CEO समेत 3 की गिरफ्तारी

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर में एक निजी आईटी कंपनी की मैनेजर के साथ कथित कॉर्पोरेट गैंगरेप मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने बताया कि जांच की ज़िम्मेदारी एडिशनल एसपी माधुरी वर्मा को सौंपी गई है. एसपी गोयल के अनुसार, पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की गई. मेडिकल जांच में चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया गैंगरेप की पुष्टि होती दिखाई दे रही है. पुलिस को जांच में एक अहम सुराग भी हाथ लगा है. आरोपियों की कार में लगे डैशकैम के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, जिसमें घटना के दौरान की आवाजें कैद होने की बात सामने आई है.  तीन आरोपी अरेस्ट पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें आईटी कंपनी का सीईओ जितेश, उसकी सहकर्मी महिला एग्जीक्यूटिव हेड शिल्पा और उसका पति गौरव शामिल हैं. तीनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. आरोपी सीईओ जितेश सिसौदिया आईआईटीयन है. पुलिस के मुताबिक, 20 दिसंबर को कंपनी के सीईओ की बर्थडे और न्यू ईयर पार्टी उदयपुर के शोभागपुरा इलाके के एक होटल में आयोजित की गई थी. पीड़िता रात करीब 9 बजे पार्टी में पहुंची थी, जो देर रात 1:30 बजे तक चली. पार्टी के बाद जब पीड़िता की तबीयत बिगड़ने लगी तो कुछ लोग उन्हें घर छोड़ने की बात कर रहे थे, लेकिन महिला एग्जीक्यूटिव हेड ने उन्हें आफ्टर पार्टी के लिए साथ चलने का प्रस्ताव दिया. गैंगरेप के बाद पीड़िता को घर छोड़ा गया इसके बाद रात करीब 1:45 बजे पीड़िता को कार में बैठाया गया, जिसमें पहले से सीईओ और महिला एग्जीक्यूटिव का पति मौजूद था. रास्ते में एक दुकान से स्मोकिंग सामग्री खरीदी गई और पीड़िता को भी स्मोक कराया गया, जिससे वह बेहोशी की हालत में चली गई. होश में आने पर पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ छेड़छाड़ और सामूहिक बलात्कार किया गया. सुबह करीब 5 बजे पीड़िता को घर छोड़ा गया. होश आने पर उसे अपने कान की बाली, मोज़े और अंडरगारमेंट्स गायब मिले और निजी अंगों पर चोट के निशान थे. बाद में जब कार के डैशकैम की जांच की गई तो घटना से जुड़े अहम सबूत रिकॉर्डिंग में पाए गए.

झांसी मंडल में पहली बार एफपीओ के उत्पाद को मिला एगमार्क

योगी सरकार की कोशिशों से झांसी के एफपीओ को मिली सफलता, खाद्यान्न और मसालों को मिला एगमार्क झांसी मंडल में पहली बार एफपीओ के उत्पाद को मिला एगमार्क सरकार की योजनाओं से बुंदेलखंड में एग्रो बिजनेस का बढ़ रहा दायरा झांसी  प्रदेश सरकार बुंदेलखंड में एग्रो प्रोडक्शन और एग्रो बिजनेस को बढ़ावा देने की ओर निरंतर प्रयासरत है। योगी सरकार की मदद से झांसी के एक एफपीओ को दो श्रेणी के उत्पादों के लिए एगमार्क हासिल करने में सफलता मिली है। एगमार्क भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा प्रदान किया जाता है। एगमार्क खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करता है। झांसी के चिरगांव देहात स्थित श्री खाटू श्याम जी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को खाद्यान्न और मसालों के उत्पादों के लिए एगमार्क प्रदान किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग ने एफपीओ के आवेदन की प्रक्रिया में मदद की और विभाग के माध्यम से एगमार्क का आवेदन भारत सरकार के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय को भेजा गया। निदेशालय से झांसी के एफपीओ को दो श्रेणियों के उत्पादों – खाद्यान्न और मसालों को एगमार्क प्रदान किया गया है। झांसी मंडल में पहली बार किसी एफपीओ के उत्पाद को एगमार्क प्रदान किया गया है। श्री खाटू श्याम जी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की डायरेक्टर पूजा राजपूत ने बताया कि एफपीओ से अभी तक लगभग 300 किसान जुड़े हैं। वर्तमान समय में हल्दी, धनिया, मिर्ची और पोहा तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। मकसद है कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो और किसानों की आमदनी में इजाफा हो। झांसी के ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक प्रखर कुमार ने बताया कि एगमार्क से उत्पाद की गुणवत्ता प्रमाणित होती है। इस एगमार्क के उपयोग की निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

रायपुर–भिलाई: सेवा और विकास के दो साल पूरे, विशेष कार्यक्रम में दिखी उपलब्धियों की झलक

रायपुर : सेवा और विकास के दो वर्ष पूर्ण होने पर भिलाई में विशेष कार्यक्रम का हुआ आयोजन रायपुर सेवा और विकास के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनसंपर्क विभाग द्वारा नेहरू नगर पार्क, जोन क्रमांक 1 भिलाई में एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में रेडियो जॉकी (आरजे) अनिमेश जैन एवं उनकी टीम ने रोचक गतिविधियों का संचालन किया, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और जीवंतता बनी रही।  सेवा और विकास के दो वर्ष पूर्ण होने पर भिलाई में विशेष कार्यक्रम का हुआ आयोजन        मंच पर स्थानीय कलाकारों द्वारा नृत्य, गायन और कविता पाठ जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण शासकीय योजनाओं पर आधारित क्विज एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही। आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में  प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।         आयोजित प्रश्नोत्तरी में महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि से जुड़ी प्रमुख योजनाओं पर आधारित प्रश्न लोगों से पूछे गए एवं उन्हें पुरस्कार भी दिए गए। सुशासन तिहार के अवसर पर विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इन योजनाओं ने उनके जीवन में सकारात्मक और वास्तविक बदलाव लाए हैं।        इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को सुशासन के महत्व से जोड़ना, शासन की योजनाओं की जानकारी देना तथा स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना रहा। प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को स्थानीय दुकानों एवं स्टॉल्स की ओर से डिस्काउंट वाउचर और कूपन भी प्रदान किए गए। आयोजन के माध्यम से जनसंपर्क विभाग ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को सरल और मनोरंजक तरीके से आमजन तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया।

नकल पर नकेल: जीवाजी विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, प्रैक्टिकल परीक्षा की होगी अनिवार्य वीडियोग्राफी

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। अब विश्वविद्यालय से संबद्ध अंचल के सभी महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित की जाएंगी। नए निर्देशों के तहत प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड की जाएगी। इतना ही नहीं, परीक्षकों की उपस्थिति, प्रश्न पूछने की प्रक्रिया और मूल्यांकन से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि भी रिकॉर्डिंग के दायरे में रहेगी। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े और मनमानी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।   उडनदस्ता भी करेगा वीडियोग्राफी परीक्षा अवधि में निरीक्षण के लिए जाने वाले उड़नदस्तों को भी अपनी पूरी कार्रवाई आवश्यकतानुसार कैमरे में रिकॉर्ड करनी होगी। उड़नदस्ता जब किसी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करेगा, उस दौरान की गई जांच, बातचीत और व्यवस्थाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निरीक्षण प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। रिकार्डिंग नहीं तो अंक नहीं महत्वपूर्ण बात यह है कि अब छात्रों को दिए जाने वाले प्रायोगिक अंकों को भी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर ही मान्यता दी जाएगी। यदि किसी परीक्षा या मूल्यांकन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो रिकॉर्डिंग को प्रमाण के रूप में उपयोग किया जाएगा। वहीं अगर किसी कालेज से वीडियो प्राप्त नहीं होती है तो उस कालेज के छात्रों के अंक अपड़ेट नहीं किए जाएंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन इस व्यवस्था को अपने अधीनस्थ अंचल के 350 से अधिक शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में लागू कर रहा है। कथन: ‘प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कई बार गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं ऐसे में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्य की जा रही है।’ -राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू

अब बचने का कोई रास्ता नहीं! WhatsApp पर ब्लॉक होते ही हर प्लेटफॉर्म से होंगे बाहर

नई दिल्ली  डिजिटल दुनिया में ठगी करने वालों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार एक बेहद सख्त कदम उठाने जा रही है। अब तक व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर ब्लॉक होने के बाद स्कैमर्स टेलीग्राम या स्नैपचैट जैसे अन्य प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर लोगों को निशाना बनाते थे लेकिन जल्द ही यह रास्ता बंद होने वाला है। सरकार एक ऐसा यूनिफाइड ब्लॉकिंग सिस्टम लाने पर विचार कर रही है जिसके तहत एक प्लेटफॉर्म पर बैन हुआ यूजर पूरे डिजिटल इकोसिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। वन प्लेटफॉर्म ब्लॉक, ऑल प्लेटफॉर्म आउट मौजूदा व्यवस्था में व्हाट्सऐप हर महीने लाखों संदिग्ध अकाउंट्स को ब्लॉक करता है लेकिन स्कैमर्स आसानी से अपना प्लेटफॉर्म बदल लेते हैं। सरकार की नई योजना इसे जड़ से खत्म करने की है। व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स अब उन मोबाइल नंबरों की लिस्ट सरकार के साथ साझा करेंगे जिन्हें फ्रॉड या नियमों के उल्लंघन के लिए बैन किया गया है। सरकार इन नंबरों को एक सेंट्रल डेटाबेस में डालेगी जिससे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे अन्य ऐप्स भी उन्हें ऑटोमैटिक तरीके से ब्लॉक कर सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य स्कैमर्स को एक ऐप से दूसरे ऐप पर शिफ्ट होने से रोकना है।    सिम बाइंडिंग (Sim Binding): बिना सिम नहीं चलेगा ऐप स्कैमर्स की एक बड़ी चालाकी यह होती है कि वे एक बार ओटीपी (OTP) लेकर अकाउंट बना लेते हैं और फिर सिम कार्ड निकाल फेंकते हैं। इससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इससे निपटने के लिए सरकार सिम बाइंडिंग को अनिवार्य करने जा रही है। इस नियम के बाद अगर आपके फोन में एक्टिव सिम कार्ड नहीं है तो आप व्हाट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इससे किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में अपराधी की लोकेशन और पहचान को तुरंत ट्रैक करना संभव होगा।   क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत? व्हाट्सऐप की मासिक कंप्लायंस रिपोर्ट (Compliance Report) बताती है कि हर महीने लाखों अकाउंट्स पर कार्रवाई होती है फिर भी साइबर अपराध कम नहीं हो रहे हैं। केवल एक ऐप पर बैन लगाना काफी नहीं है क्योंकि अपराधी के पास दर्जनों डिजिटल रास्ते खुले होते हैं। सरकार का मानना है कि प्लेटफॉर्म्स के बीच आपसी तालमेल से ही साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।  

लगातार सीरीज़ और टूर्नामेंट: 2026 में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के सामने बड़ी चुनौतियां

नई दिल्ली उतार-चढ़ाव भरे 2025 के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के सामने 2026 में बेहद व्यस्त कार्यक्रम रहने वाला है। इस साल की सबसे बड़ी खासियत घरेलू परिस्थितियों में होने वाले टी20 विश्व कप का खिताब बचाने की चुनौती, बड़ी संख्या में वनडे मुकाबले और विदेशी धरती पर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) की कठिन परीक्षाएं होंगी। साल 2025 भारत के लिए यादगार रहा। दुबई में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब जीता, जिसमें चार स्पिनरों की रणनीति काफी सफल रही। टी20 अंतरराष्ट्रीय में भी भारत की प्रगति जारी रही और टीम ने घरेलू व विदेशी दौरों पर द्विपक्षीय सीरीज के साथ एशिया कप में भी जीत दर्ज की, हालांकि अभी तक टी20 विश्व कप की ट्रॉफी हाथ में नहीं आई। टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। सिडनी में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार के साथ ही भारत को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज में 3-1 से हार झेलनी पड़ी और डब्ल्यूटीसी फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। इसी दौरान विराट कोहली, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जिससे टीम में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई। शुभमन गिल को नया टेस्ट कप्तान नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने वनडे टीम की भी कमान संभाली। इंग्लैंड में 2-2 से ड्रॉ रही सीरीज के बाद भारत ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज को 2-0 से हराया। हालांकि, न्यूजीलैंड से मिली 3-0 की हार की यादें तब फिर ताजा हो गईं जब दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 2-0 से पराजित किया। टेस्ट टीम में बल्लेबाजी क्रम अब भी स्थिर नहीं है और लगातार प्रयोगों के कारण भूमिका स्पष्टता व दीर्घकालिक योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 2026 में भारत का ध्यान सबसे ज्यादा टी20 क्रिकेट पर रहेगा, जबकि टी20 विश्व कप के बाद वनडे प्रारूप पर फोकस बढ़ेगा। साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड की टीम तीन वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए भारत दौरे पर आएगी। इसके बाद 7 फरवरी से 8 मार्च तक भारत और श्रीलंका की मेजबानी में टी20 विश्व कप खेला जाएगा। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरेगा। मौजूदा फॉर्म और खिलाड़ियों की उपलब्धता को देखते हुए टीम इंडिया के पास खिताब बचाने का सुनहरा मौका होगा। अगर भारत ऐसा करने में सफल रहता है, तो वह घरेलू मैदान पर टी20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनेगा और कुल तीन खिताब जीतने वाली इकलौती टीम भी। टी20 विश्व कप और आईपीएल 2026 के बाद जून में अफगानिस्तान की टीम एक टेस्ट (डब्ल्यूटीसी चक्र से बाहर) और तीन वनडे खेलने भारत आएगी। इसके बाद जुलाई में भारत इंग्लैंड के खिलाफ तीन वनडे और पांच टी20 मैचों की सफेद गेंद की सीरीज खेलेगा। डब्ल्यूटीसी 2026 के तहत भारत की टेस्ट चुनौतियां अगस्त में श्रीलंका दौरे से शुरू होंगी, जहां दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। यह दौरा खास तौर पर अहम होगा, क्योंकि स्पिन-अनुकूल पिचों पर स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ भारत का प्रदर्शन अब तक चिंता का विषय रहा है। सितंबर में यूएई में अफगानिस्तान के खिलाफ तीन टी20 मैचों की सीरीज संभावित है। बांग्लादेश दौरे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि वहां की मौजूदा परिस्थितियों के चलते यह दौरा टल सकता है। इसके अलावा 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के टी20 मुकाबलों में भारत की दूसरी पंक्ति की टीम हिस्सा ले सकती है। भारत का घरेलू सत्र सितंबर-अक्टूबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे और पांच टी20 मैचों से शुरू होगा। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में टीम न्यूजीलैंड के कठिन विदेशी दौरे पर जाएगी, जहां दो टेस्ट, तीन वनडे और पांच टी20 मैच खेले जाएंगे। साल के अंत में दिसंबर में भारत श्रीलंका की मेजबानी करेगा, जहां तीन वनडे और तीन टी20 मैच खेले जाएंगे। यह सीरीज 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। तीनों प्रारूपों में लगातार व्यस्त कार्यक्रम के बीच भारतीय खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन के लिए कार्यभार प्रबंधन बेहद अहम रहेगा, ताकि टीम विभिन्न द्विपक्षीय सीरीज और बड़े टूर्नामेंटों में ट्रॉफी जीतने के लक्ष्य के साथ लगातार बेहतर प्रदर्शन कर सके।  

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार कोई बिजली यूनिट लगातार 450 दिन से कर रही उत्पादन

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने बड़ा कमाल दिखाते हुए लगातार 450 दिन बिजली उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। चचाई की यूनिट नंबर 5 प्रदेश के इतिहास में ऐसी प्रथम विद्युत उत्पादन यूनिट है जो लगातार 450 दिनों से संचालित है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से निरंतर रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने गत माह अक्टूबर की 4 तारीख को लगातार 365 दिन (एक वर्ष) तक निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का तमगा हासिल किया था। यूनिट 5 के निर्बाध संचालन से प्रदेश के विद्युत ग्रिड को स्थिरता मिली और घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई। इस उपलब्धि से न केवल म.प्र. पावर जनरेशन कंपनी की साख मजबूत हुई बल्कि यह प्रदेश की अन्य ताप विद्युत इकाइयों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी है। ऊर्जा मंत्री ने ऐतिहासिक सफलता पर दी बधाई अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 की इस सफलता व उपलब्ध‍ि पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई व MPPGCL के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह हर्ष ने व्यक्त करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध‍ि अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के यूनिट नंबर के ऑपरेशन व मेंटेनेंस अभियंताओं व कार्मिकों की लगन, मेहनत व समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता दर्शाते आंकड़े निरंतर संचालन की इस असाधारण अवधि के दौरान यूनिट नंबर 5 ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए 98.48% का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 94.91% का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) प्राप्त किया है और 9.29% की सहायक विद्युत खपत (APC) बनाए रखी। ये परिचालन सूचकांक स्पष्ट रूप से इस अवधि के दौरान संयंत्र टीम द्वारा उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को बनाये रखा गया। चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों ने दिखाया कमाल पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित कार्यशैली व उच्च तकनीकी दक्षता से अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 जैसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। चुनौतीपूर्ण लक्ष्य लगातार एक वर्ष तक बिना रुकावट संचालन किसी भी ताप विद्युत इकाई के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर एवं सहायक प्रणालियों का सटीक रखरखाव, निरंतर निगरानी व तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान जरूरी होता है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की समर्पित टीम के निरंतर परिश्रम व तकनीकी विशेषज्ञता का परिणाम है।