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फिर बढ़ा संक्रमण का खतरा, साल खत्म होने से पहले डराने लगी यह बीमारी

अमेरिका में छुट्टियों और जश्न के माहौल के बीच कोरोना वायरस (COVID-19) ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। जैसे-जैसे लोग क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के लिए यात्रा कर रहे हैं और ठंडे मौसम के कारण घरों के अंदर समय बिता रहे हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण की एक नई लहर की चेतावनी दी है। Stratus वैरिएंट का बढ़ता प्रभाव इस साल की शुरुआत में अमेरिका में लेट-समर वेव देखी गई थी जिसका कारण XFG वैरिएंट था। इसे वैज्ञानिक भाषा में Stratus भी कहा जाता है। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन के अन्य रूपों की तरह ही बहुत संक्रामक है और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर आसानी से फैलता है। CDC (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) के ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के 31 राज्यों में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? संक्रमण के स्तर को मापने के लिए वैज्ञानिक वेस्टवॉटर (गंदे पानी) की जांच करते हैं। इसमें दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं: CDC की रिपोर्ट: 13 दिसंबर तक देशभर में वायरस की मात्रा कम स्तर पर थी लेकिन 15 राज्यों में यह मध्यम से उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। WastewaterSCAN की रिपोर्ट: इसके अनुसार नवंबर से अब तक वायरस की मौजूदगी में 21% की बढ़ोतरी हुई है और राष्ट्रीय स्तर पर इसे हाई माना जा रहा है।  बुजुर्गों के लिए बढ़ता खतरा वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉ. विलियम शैफनर का कहना है कि वर्तमान में फ्लू (Flu) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं जबकि कोविड की रफ्तार फिलहाल धीमी लेकिन स्थिर है। सबसे ज्यादा चिंता 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को लेकर है क्योंकि इस आयु वर्ग में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। विशेषज्ञ इसकी वजह समय के साथ कम होती इम्युनिटी और बूस्टर डोज न लगवाना बता रहे हैं। सबसे प्रभावित इलाके और राज्य फिलहाल अमेरिका के मिडवेस्ट और नॉर्थईस्ट इलाकों में संक्रमण सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। मिशिगन, मिनेसोटा, ओहियो, मैसाचुसेट्स, कनेक्टिकट, एरिजोना, कंसास, केंटकी और न्यू हैम्पशायर जैसे राज्यों में कोविड का स्तर 'हाई' या 'मॉडरेट' दर्ज किया गया है।   बचाव के तरीके छुट्टियों के इस सीजन में खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सलाह दी है: वैक्सीनेशन: अपनी बूस्टर डोज समय पर लें। सावधानी: यात्रा के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क का प्रयोग करें। स्वच्छता: हाथों को बार-बार धोएं और सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखने पर खुद को आइसोलेट करें।

ठंड से कांपा बिहार: घना कोहरा, कोल्ड वेव के बीच 29 दिसंबर तक ऑरेंज अलर्ट

पटना बिहार इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। मौसम विभाग ने शीतलहर और घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और राज्य को 29 दिसंबर तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर बिहार के मैदानी जिलों में देखा जा रहा है। बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण ठंड बढ़ गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने पूरे राज्य के लिए शीतलहर और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट  जारी किया है, जो कम से कम अगले चार से पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा। बिहार में कोल्ड डे जैसे हालात मौसम विभाग के अनुसार, 29 दिसंबर तक राज्य के कई हिस्सों में भीषण शीतलहर का दौर जारी रहने की संभावना है। बीते एक सप्ताह से बिहार में ‘कोल्ड-डे' जैसी स्थिति बनी हुई है। लगातार धूप नहीं निकलने के कारण दिन के तापमान में असामान्य गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे दिन में भी अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। तापमान 10 डिग्री तक पहुंचा विशेषज्ञों का मानना है कि 30 दिसंबर के बाद ही मौसम में हल्का सुधार संभव है, उससे पहले राहत की उम्मीद कम है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बिहार का औसत न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी पटना में न्यूनतम तापमान गिरकर 11 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कई जिलों में दिन का तापमान भी 9 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इसी कारण ‘शीत दिवस' की स्थिति लोगों के लिए अधिक परेशानी का कारण बन रही है।   29 दिसंबर तक शीत दिवस की स्थिति बने रहने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तक हवाओं की दिशा में बदलाव नहीं होता और पहाड़ी इलाकों से आने वाली बर्फीली हवाओं की तीव्रता कम नहीं होती, तब तक बिहार को इस कंपकंपाती ठंड से राहत मिलना मुश्किल है। विभाग ने बताया कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का सीधा प्रभाव बिहार पर पड़ रहा है। 29 दिसंबर तक शीत दिवस की स्थिति बने रहने और न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है। इसके अलावा अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता काफी कम रह सकती है।

Green Tea पर कानून की चाय! अब ‘चाय’ कहना होगा गलत

नई दिल्ली  FSSAI ने ग्रीनटी को लेकर नई परिभाषा दी है। नए नियमों के मुताबिक अब हर उस पेय पदार्थ को चाय कहना गलत और गैरकानूनी माना जाएगा, जो असली चाय के पौधे से नहीं बना है। आइए जानते हैं कि क्या है FASSI द्वारा दी गई नई परिभाषा क्या है असली चाय की परिभाषा? FSSAI ने स्पष्ट किया है कि केवल वही उत्पाद 'चाय' कहलाने के हकदार हैं, जो Camellia sinensis (कैमेलिया साइनेंसिस) नामक पौधे की पत्तियों या कलियों से तैयार किए गए हों। इसमें ग्रीन टी, कांगड़ा टी और इंस्टेंट टी शामिल हैं, क्योंकि ये इसी पौधे से बनती हैं। इनके अलावा जड़ी-बूटियों, फूलों या अन्य पौधों से तैयार किए गए किसी भी पेय को 'चाय' के नाम से बेचना अब 'मिसब्रांडिंग' (गलत लेबलिंग) माना जाएगा। हर्बल और फ्लावर टी का क्या होगा? बाजार में बिकने वाली हर्बल टी, रूइबोस टी, डिटॉक्स टी और फ्लावर टी वास्तव में 'चाय' नहीं बल्कि 'इन्फ्यूजन' हैं। FSSAI ने निर्माताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इन उत्पादों के पैकेट पर से 'Tea/चाय' शब्द तुरंत हटाएं। अब इन पेयों को 'प्रोप्राइटरी फूड' या उनके वास्तविक अवयवों के नाम से बेचना होगा। भ्रामक विज्ञापनों पर गिरेगी गाज प्राधिकरण ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं को भ्रम में रखना कानूनन अपराध है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं और विक्रेताओं पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ई-कॉमर्स साइट्स और रिटेल स्टोर्स पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए गए हैं।

‘न्यूड न्यू ईयर’ ईव पार्टी: नया साल मनाने का अनोखा अंदाज

बर्मिंघम दुनिया भर में नए साल के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। कहीं आतिशबाजी होगी, तो कहीं म्यूजिक कंसर्ट लेकिन ब्रिटेन के बर्मिंघम में एक ऐसा होटल है जो अपनी अनोखी 'न्यूड न्यू ईयर ईव पार्टी' के लिए चर्चा में है। यहां आने वाले मेहमान कपड़ों का त्याग कर पूरी तरह प्राकृतिक रूप में नए साल का स्वागत करते हैं। क्लोवर स्पा एंड होटल: प्रकृतिवादियों का पसंदीदा ठिकाना बर्मिंघम स्थित 'द क्लोवर स्पा एंड होटल' एक छोटा लेकिन मशहूर सात कमरों वाला बुटीक होटल है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो प्रकृतिवाद (Naturism) में विश्वास रखते हैं और बिना कपड़ों के स्वच्छंद रहना पसंद करते हैं। होटल ने दिसंबर की शुरुआत से ही कई 'क्रिसमस इवेंट्स' आयोजित किए। मेहमानों को मसाज, टर्की डिनर और मिन्स पाई जैसे पारंपरिक पकवान परोसे गए। कपल्स के लिए विशेष वीकेंड पार्टियों का आयोजन किया गया जिसकी सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है।   कैसी होगी 'न्यू इयर्स ईव' पार्टी? 31 दिसंबर की शाम को होने वाले इस मुख्य आयोजन के लिए होटल ने खास तैयारियां की हैं। जश्न की शुरुआत शाम 6 बजे से होगी और देर रात 1 बजे तक चलेगा। डीजे लियाम के डिस्को म्यूजिक पर मेहमान बिना कपड़ों के डांस और मस्ती करेंगे। मेहमानों के लिए ड्रिंक्स, स्पा सुविधाएं और लजीज खान-पान की व्यवस्था रहेगी। नियम और माहौल: यौन गतिविधियों पर सख्त पाबंदी अक्सर ऐसी पार्टियों को लेकर गलतफहमी हो जाती है लेकिन होटल के मालिक टिम हिग्स ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की है:     सिर्फ एडल्ट्स: यहां केवल 18 साल से ऊपर के लोगों को ही प्रवेश मिलता है।     नो सेक्सुअल एक्टिविटी: होटल में किसी भी तरह की यौन गतिविधियों की सख्त मनाही है। यह पूरी तरह से एक सामाजिक और फ्रैंडली माहौल होता है।     मकसद: इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी बॉडी के प्रति सहज महसूस कराना और प्रकृति के करीब रहकर नए दोस्त बनाना है। क्यों लोकप्रिय हो रहा है यह ट्रेंड? होटल प्रबंधन के अनुसार यहां आने वाले लोग इसे 'मानसिक आजादी' के रूप में देखते हैं। बुकिंग्स पहले से ही फुल हो चुकी हैं और मेहमानों को अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए पार्टी सरचार्ज भी देना पड़ता है।  

चुनावी नियम सख्त: दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार होंगे अयोग्य

रांची झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार नगर निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चे वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन के समय शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह घोषणा करनी होगी कि निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हैं। इस प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि इस संबंध में नगर विकास विभाग द्वारा पूर्व में जारी पत्र को आधार मानते हुए जिलों को कारर्वाई करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांकन के दौरान शपथ पत्र की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है। चुनावी तैयारियों की जानकारी देते हुए आयोग के सचिव ने बताया कि सभी जिलों में वाडरं के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस संबंध में आयोग को लगातार रिपोर्ट प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही चुनाव की अद्यतन तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए। इस बीच वाडर् आरक्षण को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद आयोग ने एक अहम स्पष्टीकरण भी जारी किया है। यदि किसी प्रत्याशी को आरक्षण के कारण अपने वाडर् से चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। वह नगर निकाय के किसी अन्य वाडर् से भी चुनाव लड़ सकता है, बशर्ते उस वाडर् में लागू आरक्षण नियमों का पालन किया जाए। प्रसाद ने बताया कि महापौर, नगर परिषद अध्यक्ष और वाडर् सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए योग्यता संबंधी दिशा-निर्देश तय कर दिए गए हैं। इसके तहत प्रत्याशी का संबंधित नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य होगा। हालांकि, नगर निकाय की मतदाता सूची में शामिल कोई भी व्यक्ति उस निकाय के किसी भी वाडर् से चुनाव लड़ सकता है, लेकिन आरक्षण नियमों का अनुपालन जरूरी होगा। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नगर निकाय चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लक्ष्य फरवरी महीने में शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा भी की जा सकती है।  

भारत की नजरें निर्णायक मुकाबले पर, श्रीलंका के खिलाफ तीसरा टी20 बना सीरीज़ फाइनल

तिरूवनंतपुरम  आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय टीम अपनी लय को कायम रखते हुए खराब फॉर्म से जूझ रही श्रीलंकाई टीम के खिलाफ शुक्रवार को तीसरा टी20 मैच और पांच मैचों की श्रृंखला जीतने के इरादे से उतरेगी। भारत ने विशाखापत्तनम में पहले दो टी20 मैचों में क्रमश: आठ और सात विकेट से जीत दर्ज की है। भारत की यह पिछले 11 टी20 मैचों में नौवीं जीत थी।  श्रीलंका ने आखिरी बार भारत को जुलाई 2024 में दाम्बुला में हराया था। मेजबान टीम के पास शानदार बल्लेबाजी क्रम है और पिछले दोनों मैचों में अलग अलग खिलाड़ियों ने जीत दिलाई है। पहले मैच में जहां जेमिमा रौड्रिग्स चली तो दूसरे में शेफाली वर्मा जीत की सूत्रधार रहीं। भारत की गेंदबाजी ईकाई भी उतनी ही दमदार है और स्पिनरों ने पहले मैच में श्रीलंका को छह विकेट पर 121 और दूसरे में नौ विकेट पर 128 रन पर रोक दिया। युवा एन श्रीचरणी, वैष्णवी शर्मा और क्रांति गौड़ ने अनुशासित, नियंत्रित और प्रभावी गेंदबाजी की है।  हरफनमौला दीप्ति शर्मा बुखार के कारण दूसरा टी20 नहीं खेल पाई लेकिन उनकी जगह आई स्नेह राणा ने चार ओवर में 11 रन देकर एक विकेट लिया। भारतीय टीम को हालांकि क्षेत्ररक्षण पर काम करना होगा चूंकि पहले मैच में पांच कैच छूटे थे हालांकि दूसरे मैच में तीन रन आउट किए। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम यहां अगले तीन मैचों में प्रदर्शन में सुधार करना चाहेगी।  दूसरी ओर श्रीलंका को उम्मीद है कि जगह बदलने से उसकी किस्मत भी बदलेगी हालांकि दोनों टीमों के प्रदर्शन में जमीन आसमान का अंतर है। श्रीलंका को दोनों मैचों में उसके बल्लेबाजों ने निराश किया। पहले मैच में विष्मी गुणरत्ने ने 43 गेंद में 39 रन बनाये जबकि हसिनी परेरा और हर्षिता समरविक्रमा आक्रामक पारियां नहीं खेल सके। दूसरे मैच में चामरी अटापट्टू के आउट होने के बाद श्रीलंका ने 26 रन के भीतर छह विकेट गंवा दिए।  टीमें :  भारत : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उपकप्तान), दीप्ति शर्मा, स्नेह राणा, जेमिमा रोड्रिग्स, शैफाली वर्मा, हरलीन देयोल, अमनजोत कौर, अरुंधति रेड्डी, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह ठाकुर, ऋचा घोष (विकेटकीपर), जी कमलिनी (विकेटकीपर), श्री चरणी, वैष्णवी शर्मा।  श्रीलंका : चामरी अटापट्टू (कप्तान), हसिनी परेरा, विष्मी गुणरत्ने, हर्षिता समरविक्रमा, नीलाक्षिका डी सिल्वा, कविशा दिलहारी, इमेशा दुलानी, कौशिनी नुथ्यांगना, मालशा शेहानी, इनोका राणावीरा, शशिनी गिम्हानी, निमेश मदुशानी, काव्या कविंदी, रश्मिका सेववंडी, मल्की मदारा।  समय : शाम 7 बजे।   

पानी में चलकर होते हैं दर्शन! 300 मीटर गुफा में छिपी है नरसिंह मंदिर की रहस्यमयी दुनिया

देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी रहस्यमयी कहानियां हैं. उन्हीं में से एक है झरणी नरसिंह मंदिर. ये कर्नाटक के बीदर जिले में स्थित है. यहां भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बताया गया है कि इस मंदिर में भगवान नरसिम्हा विष्णु के चौथे अवतार के रूप में विराजमान हैं, जोकि आधे मनुष्य और आधे सिंह के स्वरूप में हैं. मंदिर सुबह आठ बजे भक्तों के लिए खुल जाता है और शाम 6 बजे तक दर्शन होते हैं. बीदर शहर इस मंदिर से एक किलोमीटर दूर है. ये 300 मीटर लंबी गुफा में बना हुआ है, जिसमें श्रद्धालु दर्शन के लिए प्राकृतिक झरने वाले पानी से होकर गुजरते हैं, जो इसे एक अद्भुत और पवित्र स्थान बनाता है. मंदिर मणिचूला पहाड़ी के नीचे स्थित है, यही वजह है कि यहां से पानी का प्रवाह कभी रुकता नहीं है. नरसिंह मंदिर के रहस्यलोक की कहानी शास्त्रों के मुताबिक, नरसिंह भगवानने हिरण्यकशिपु नामक असुरका वध किया था, जिसने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को मारने की कोशिश की थी और देवताओं को भी परेशान किया था. नरसिंह भगवान ने ब्रह्मा के वरदान की शर्तों का पालन किया था. असुर को वरदान था कि न दिन, न रात, न घर के अंदर, न बाहर, न अस्त्र से, न शस्त्र से, न मनुष्य, न पशु से उसका वध हो. भगवान ने अपनी जांघों पर लिटाकर अपने नाखूनों से उसका वध किया था. पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद भगवान नरसिंह ने झारासुर (जलासुरा) नामक एक और असुर का वध किया. ये असुर भगवान शिव का परम भक्त था. जिस समय वह मृत्यु की शैया पर लेटा हुआ था और अंतिम सांस ले रहा था उस समय उसने नरसिंह भगवान से विनती की कि वे उसी गुफा में रहें जहां वह निवास कर रहा था और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करें. नरसिंह भगवान ने असुर की अंतिम इच्छा पूरी की और उसके गुफा में निवास करने लगे. झारासुर जल में बदल गया और वह झरना बन गया, जो आज तक बह रहा है. श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में आधुनिक सुविधाएं मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान नरसिंह की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई है, जो बहुत शक्तिशाली है. यहां श्रद्धालुओं को गुफा के अंदर कोई परेशानी न हो इसके लिए लाइटिंग से लेकर AC तक का इंतजाम किया गया है. साथ ही साथ श्रद्धालुओं के लिए स्नान और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.

रंगपुर डिविजन के अलग होने से चिकन नेक की समस्या हल, 23 लाख हिंदुओं के लिए राहत

नई दिल्ली /ढाका   बांग्लादेश से शेख हसीना की सरकार को हटाए जाने के बाद से वहां की सत्ता कट्टरपंथी ताकतों के हाथ में है. खुद मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इन कट्टरपंथी ताकतों के हाथों खिलौना बन गए हैं. ऐसे में इस वक्त वहां भारत विरोधी भावनाएं काफी मुखर हैं. कट्टरपंथी हर बात पर भारत को धमकी दे रहे हैं. हालांकि भारत के सामने बांग्लादेश और वहां की कट्टरपंथी ताकतों की औकात बहुत मामूली है. भौगोलिक रूप से पूरी तरह से भारत की गोद में बैठा इस मुल्क के मौजूदा हुक्मरान इस बात को भूल गए हैं कि उनको भारत ने ही पैदा किया है. वे अब उलटे भारत को ही धमकी दे रहे हैं. वे पूर्वोत्तर इलाके को भारत से अलग करने बात करते हैं. वे भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक कहा जाता है, को काटने की धमकी देते हैं. लेकिन, उनको नहीं पता है कि भारत के शह मात्र से उनका एक बड़ा इलाका आजाद हो सकता है. वह इलाका है रंगपुर डिविजन. इसी डिविजन के बराबर चिकन नेक है और बांग्लादेश के इस डिविजन का करीब-करीब 90 फीसदी बॉर्डर भारत के पश्चिम बंगाल राज्य से जुड़ता है. अब सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब चर्चा चल रही है. तमाम लोग कह रहे हैं कि अब बहुत हो गया. भारत को राष्ट्र हित को महत्व देते हुए बांग्लादेश से इस डिविजन को आजाद कराने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए. इस डिविजन के आजाद होने भर से भारत का सिलिगुड़ी कॉरिडोर करीब 120 से 150 किमी चौड़ा हो जाएगा. इससे भारत की एक बहुत बड़ी समस्या दूर हो जाएगी. क्या ऐसा करना संभव है? देखिए, सैद्धांतिक तौर पर ऐसा करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है. भारत एक जिम्मेदार मुल्क है. वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है. लेकिन, कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि खुद को बचाने के लिए पड़ोसी मुल्क में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करना मजबूरी हो जाती है. ऐसी स्थिति में कोई भी मुल्क हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा रह सकता है. क्योंकि अंततः बांग्लादेश हमारी गोद में बैठा मुल्क है और उसकी किसी भी हरकत से सीधे तौर पर भारत पर असर पड़ना तय है.     रूस-यूक्रेन जंग है उदाहरण     इस बात को समझने के लिए हम मौजूदा रूस-यूक्रेन जंग को उदाहरण बना सकते हैं. ऐतिहासिक रूप से यूक्रेन सोवियत रूस का हिस्सा था. विभाजन के बाद वह अलग मुल्क बना. फिर वह तेजी से पश्चिम के प्रभाव में आने लगा. दूसरी और रूस को यह बात पसंद नहीं थी. फिर भी वह शांत रहा. लेकिन, यूक्रेन ने एक संप्रभु मुल्क होने के नाते रूस विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाते रहा. वह रूस विरोधी सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो का हिस्सा बनने के लिए झटपटाने लगा. इस कारण रूस का धैर्य जवाब दे दिया. रूस किसी भी कीमत पर अपनी सीमा पर नाटो की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं कर सकता था. इसी कारण उसने यूक्रेन पर हमला किया. रूस के पास सैन्य ताकत है और वह ऐसा करने का दम रखता है. आज स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका और तमाम पश्चिमी देश रूस को संघर्ष विराम कराने के लिए जो प्रस्ताव दे रहे हैं उसमें यूक्रेन को नाटो से अलग रखने और रूस द्वारा यूक्रेन के कब्जाए गए हिस्से को मान्यता देने की बात कह रहे हैं. यानी रूस की जो चिंता थी उसे अब पश्चिमी देश भी मानने लगे हैं. इस तरह यह बात तो स्पष्ट है कि अगर किसी देश की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है तो वह मजबूरन इस तर्क को आधार बनाकर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. बांग्लादेश के मौजूदा हुक्मरान ऐसी परिस्थिति बनाने में लगे हैं. वे भारत विरोधी ताकतों को लगातार शह दे रहे हैं. ऐसे में भारत सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन, यह सैन्य हस्तक्षेप भी रूस-यूक्रेन जंग की तरह काफी व्यापक और बड़ा आर्थिक नुकसान वाला हो सकता है. अब आते हैं रंगपुर डिविजन पर वैसे तो 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के वक्त भारत के पास सुनहरा मौका था कि वह अपने सिलिगुड़ी कॉरिडोर को चौड़ा करने के लिए बांग्लादेश के इस डिविजन को भारत में मिला ले या फिर उसको एक आजाद मुल्क बनवा दे. उस वक्त भारत के लिए ऐसा करना बहुत आसान था क्योंकि भारत ने इस मुल्क की आजादी के लिए जंग लड़ी थी. पूरी दुनिया से टकराव मोल लिया था. खुद दुनिया का अंकल सैम अमेरिका भारत के खिलाफ था लेकिन दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शानदार नेतृत्व का परिचय दिया और बांग्लादेश का निर्माण करवाया. करीब 23 लाख हिंदू रंगपुर डिविजन पूरी तरह पश्चिम बंगाल की गोद बैठा इलाका है. यह एक बड़ा डिविजन है और इसका क्षेत्रफल 16,185 वर्ग किमी है. यहां की कुल आबादी करीब 1.9 करोड़ है. यह एक बहुत ही गहन आबादी वाला इलाका है. यहां प्रति किमी 1200 लोग रहते हैं. इस इलाके में करीब 23 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी में करीब 13 फीसदी हैं. मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 86 फीसदी है. बांग्लादेश में डिविजन की बात करें तो प्रतिशत में यह रंगपुर डिविजन दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला इलाका है. इस देश के सिलहट डिविजन में सबसे अधिक 13.51 फीसदी हिंदू हैं. संख्या के आधार पर देखें तो राजधानी ढाका डिविजन में सबसे अधिक करीब 28 लाख हिंदू रहते हैं. हालांकि ढाका डिविजन की कुल आबादी 4.42 करोड़ है और प्रतिशत में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 6.26 फीसदी है. कैसे अलग हो सकता है रंगपुर देखिए, सीधे तर सैन्य कार्रवाई कर इस डिविजन को बांग्लादेश से अलग करना बहुत मुश्किल कार्य है. इसके लिए वहां के लोगों को आगे आना पड़ेगा. सबसे पहले तो बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं को इस इलाके में बसना पड़ेगा. उनको यहां की डेमोग्राफी में बदलाव करना पड़ेगा. जब वह एकजुट और किसी खास इलाके में मजबूत होंगे तो आंतरिक रूप से भी उनके लिए खतरा कम हो जाएगा. फिर अगर उनको कोई बाहरी जरूरत पड़ेगी तो भारत के लिए परोक्ष तौर पर सहायता देना आसान होगा. इसके अलावा उनके खिलाफ अत्याचार या जुर्म होता है, या उनका उत्पीड़न किया जाता है या उनके साथ दोयम दर्जे का … Read more

मध्यप्रदेश बना फिल्मियों का पसंदीदा डेस्टिनेशन, तीन साल में 200 से अधिक साउथ फिल्में शूट

 भोपाल  बदलते दौर में सिनेमा में कई बदलाव आए हैं। न केवल फिल्मों की समय अवधि कम हुई है, बल्कि बड़ी स्क्रीन से निकलकर सिनेमा ओटीटी (OTT) के रूप में दर्शकों के पास पहुंच गया है। फिल्मों की करिश्माई दुनिया के बजाय दर्शकों ने असल जिंदगी को चुना और पसंद किया। इन सबके बीच सिनेमा फिर भी एक चीज तलाश करता रहा, वह है वास्तविक सेट। फिल्म निर्माता-निर्देशकों की यह तलाश खत्म हुई मध्य प्रदेश में। यहां के नदी, पहाड़, जंगल, ऐतिहासिक स्थल और खासतौर पर सिनेमा फ्रेंडली लोग, सिनेमा को मध्य प्रदेश खींच लाए। अब छोटे कस्बों में भी फिल्मों की हो रही शूटिंग कुछ दशकों पहले जो फिल्में मध्य प्रदेश के बड़े शहरों जैसे भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर में शूट हुआ करती थीं, वो अब छोटे कस्बों जैसे महेश्वर, चंदेरी, ओरछा से होती हुई सीहोर जिले के महोदिया, बमुलिया और धमनखेड़ा, छिंदवाड़ा जिले के चिमटीपुर जैसे गांवों तक पहुंच गई हैं। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर मप्र के इन गंतव्यों ने दक्षिण भारत की फिल्मों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। इससे शूटिंग के दिन भी बढ़े हैं और सिनेमा पूरे प्रदेश में फैल गया है। तीन सालों में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए शूटिंग हब बन चुके मध्य प्रदेश में पिछले तीन सालों (वर्ष 2023 से 2025) में दो सौ से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट शूट हुए हैं, जिनमें 20 से भी ज्यादा साउथ की बड़े बजट की फिल्में हैं। राज्य ने अपनी विविध भौगोलिक स्थिति, ऐतिहासिक विरासत और फिल्म अनुकूल प्रशासनिक नीतियों के कारण दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग (तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम) को अपनी ओर आकर्षित किया है। सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने काम आसान किया मप्र सरकार की फिल्म पर्यटन नीति 2020 ने निर्माताओं का काम आसान किया। फरवरी 2025 में अनुमोदित नई फिल्म पर्यटन संवर्धन नीति ने वित्तीय प्रोत्साहनों की सीमा को बढ़ाकर दस करोड़ रुपये तक कर दिया है। इस नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों के लिए दस प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रस्तावित किया गया है। फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की छूट वहीं सिगंल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि निर्माताओं को 15 कार्य दिवस के भीतर सभी आवश्यक अनमुतियां प्राप्त हो जाएं। इसके अतिरिक्त मप्र पर्यटन के होटल में फिल्म क्रू के ठहरने पर 40 प्रतिशत की सीधी छूट प्रदान की जाती है। यह प्रविधान दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उनकी निर्माण इकाईयां बहुत बड़ी होती हैं, जिनमें तीन सौ से अधिक सदस्य शामिल होते हैं। पिछले तीन सालों में शूट हुए साउथ के प्रमुख प्रोजक्ट     पेन्नियन सेल्वन (1 और 2)     इंडियन- 2     तमिलरावणन     कन्नप्पा     अखंडा     नरकासुर     कल्लू कंपाउंडर     भार्गवी     गंन्स एंड गैंग     माई हीरो इन फिल्मों की शूटिंग जारी     भैरवी     टारगेट     ललिता     आणु बुलेट रा     मध्य प्रदेश एक प्रो-एक्टिव स्टेट है फिल्म के लिए। यहां आने वाले फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग खुद यह मानते हैं कि हम जो बोलते हैं, वह करके दिखाते भी हैं। मप्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी न केवल फिल्म की लागत कम करती है, बल्कि निर्माताओं को राज्य के अनछुए स्थानों पर शूटिंग करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। इससे राज्य के पर्यटन स्थलों को भी बढ़ावा मिल रहा है।     – डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड।  

Bakri Palan Yojana: MP सरकार ने पेश की योजना, बकरी पालन से मिलेगी अच्छी आमदनी

भोपाल  बकरी पालन योजना: मध्य प्रदेश के गांवों में खेती के साथ-साथ पशुपालन हमेशा से कमाई का मजबूत जरिया रहा है. इनमें भी बकरी पालन सबसे आसान, कम खर्चीला और जल्दी मुनाफा देने वाला काम माना जाता है. यही वजह है कि आज प्रदेश के हजारों परिवार बकरी पालन से अच्छी आमदनी कर रहे हैं. अब राज्य सरकार की बकरी पालन योजना ने इस काम को और आसान बना दिया है. क्या है MP सरकार की बकरी पालन योजना? मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की इस योजना का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. योजना के तहत 10 मादा + 1 नर बकरी (10+1 यूनिट) लगाने पर सरकार वित्तीय सहायता देती है. इस यूनिट की कुल लागत करीब ₹77,000 से ₹77,456 तय की गई है. सामान्य वर्ग को 40% तक सब्सिडी SC/ST वर्ग को 60% तक सब्सिडी, बाकी राशि बैंक लोन से पूरी की जाती है. दो तरह की योजनाएं, किसानों को सीधा फायदा पशुपालन विभाग के अतिरिक्त उपसंचालक डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता के मुताबिक सरकार दो अलग-अलग योजनाएं चला रही है. नर बकरी आपूर्ति योजना इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में बकरी की नस्ल सुधार करना है. इसके तहत जमुनापारी, बारबरी और सिरोही जैसी उन्नत नस्लों के नर बकरे दिए जाते हैं, जिससे दूध और मांस उत्पादन बढ़ता है. बकरी इकाई स्थापना योजना इस योजना में 10 मादा और 1 नर बकरी की यूनिट पर सब्सिडी और बैंक लोन दोनों की सुविधा मिलती है. यह योजना खास तौर पर दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए है. आवेदन कैसे करें? योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी पशुपालन एवं डेयरी विभाग या पशु चिकित्सा संस्था से संपर्क कर सकते हैं. आवेदन के बाद बैंक से लोन स्वीकृत होता है और सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाती है. ग्राम सभा और जनपद पंचायत की स्वीकृति जरूरी होती है. कई मामलों में विभाग की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है. क्यों फायदेमंद है बकरी पालन? विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन कम पूंजी में शुरू होने वाला ऐसा व्यवसाय है, जो नियमित आमदनी देता है. सरकार की इस योजना से गांव के किसान और युवा अब नौकरी के बजाय स्वरोजगार की राह पर तेजी से बढ़ रहे हैं.