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इमिग्रेशन और कस्टम की सुविधा के बावजूद Raja Bhoj Airport पर इंटरनेशनल उड़ानें नहीं, घरेलू उड़ानें सीमित

भोपाल  राजा भोज एयरपोर्ट (Raja Bhoj Airport) पर इमिग्रेशन जांच पोस्ट की स्थापना के एक साल बाद भी किसी भी रूट पर इंटरनेशनल उड़ान (International flights) शुरू नहीं हो सकी है। हमारे एयरपोर्ट को कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिल चुका है पर वर्ष 2025 में किसी भी एयरलाइंस कंपनी ने विदेशी रूट पर स्लॉट लेने में रुचि नहीं दिखाई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी (Airport Authority) को उम्मीद है कि वर्ष 2026 में कम से कम एक इंटरनेशनल उड़ान जरूर शुरू होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने करीब एक साल पहले ग्रीन एवं रेड चैनल तथा इमिग्रेशन ई-गेट की स्थापना की थी। इसका उपयोग इंटरनेशनल रूट से आने वाले यात्री कर सकते हैं। अभी तक इसका उपयोग हज यात्रा के समय हुआ है। भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं पिछले कुछ समय से भोपाल में नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ानें आने लगी हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के समय भी विदेशी उड़ानें आई थीं, तब इसका उपयोग हुआ, लेकिन नियमित उड़ान नहीं होने से इसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। हाल ही में कस्टम एयरपोर्ट का दर्जा भी मिला है। इससे इंटरनेशनल उड़ानें शुरू होने की बाधाएं दूर हो चुकी हैं। सरकार ने इमिग्रेशन एयरपोर्ट बनाने संबंधी गजट नोटिफिकेशन पहले ही जारी कर दिया था। अब यहां अमला तैनात होना बाकी है। फिलहाल कस्टम अमला उसी समय आता है जब यहां कोई विदेशी उड़ान आती है। इंटरनेशनल विंग तैयार, उपयोग सीमित एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इंटरनेशनल विंग भी विकसित कर लिया गया है। आगमन क्षेत्र में पांच एवं प्रस्थान क्षेत्र में चार काउंटर बनाए गए हैं। इंटरनेशनल मापदंडों के अनुरूप यहां ग्रीन एवं रेड चैनल बनाए गए हैं। कस्टम काउंटर भी बनाए जा चुके हैं। इंटरनेशनल स्तर के एयरपोर्ट के लिए सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। अथॉरिटी इसके लिए जवानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस विंग का उपयोग फिलहाल नॉन शेड्यूल इंटरनेशनल उड़ान के आवागमन के दौरान ही हो रहा है। तीन साल से दुबई उड़ान का इंतजार राजधानी में नया एकीकृत टर्मिनल बनने के बाद से इंटरनेशनल उड़ान की मांग की जा रही है। पिछले तीन साल से अथॉरिटी दुबई उड़ान शुरू करने के प्रयास कर कर रही है। इसके लिए जरूरी सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं। अब नए साल में उड़ान शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। समिति की बैठकों में कई बार मुद्दा उठा हवाई अड्डा सलाहकार समिति की बैठक में भी इंटरनेशनल उड़ानें शुरू करने पर जोर दिया गया। समिति की बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठा। सांसद आलोक शर्मा ने नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात कर घरेलू उड़ानों के साथ कम से कम एक दुबई-शारजाह उड़ान शुरू करने का आग्रह किया था, लेकिन वर्ष 2025 में भोपाल के हवाई यात्रियों को निराशा ही हाथ लगी। घरेलू ट्रैफिक बढ़ा पर उड़ानें सीमित भोपाल से घरेलू मोर्चे पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्री औसत पांच हजार से अधिक हो चुका है पर इस मान से उड़ानें कम हैं। इंदौर की अपेक्षा भोपाल में कम उड़ानें होने के कारण गोवा, पुणे एवं बेंगलुरु जैसे शहरों के लिए वाया इंदौर जाते हैं। पिछले साल से एयरपोर्ट 24 घंटे खुलने लगा है पर लेटनाइट उड़ान केवल एक है। वर्तमान में भोपाल से दिल्ली, मुंबई के अलावा, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, गोवा, रायपुर एवं अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान है। चैन्नई, सूरत, शिर्डी, जयपुर, देहरादून जैसे शहरों तक सीधी उड़ान की मांग लंबे से हो रही है पर उड़ानें शुरू नहीं हो पा रही हैं।     वर्ष 2026 में कम से एक इंटरनेशनल उड़ान शुरू हो सकती है। पिछले तीन साल में घरेलू उड़ानों की संख्या बढ़ी है। यात्री संख्या का लगातार नया रिकॉर्ड बन रहा है। नए साल में नए एयरलाइंस ऑपरेटर भी दस्तक देंगे। हमारे प्रयास जारी हैं।     – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डॉयरेक्टर  

Egg Price रिकॉर्ड हाई: सर्दियों में 25–50% तक महंगे हुए अंडे, जनवरी में और बढ़ोतरी संभव

 नई दिल्ली दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत, लखनऊ, वाराणसी, पटना, रांची जैसे कई बड़े शहरों में इस बार अंडे की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ रही हैं. कोई भी शहर ऐसा नहीं है, जहां दुकानों में रिटेल में एक अंडा 8 रुपये से कम बिक रहा हो. आमतौर पर हर साल 7-9 रुपये में मिलने वाला अंडा इस सर्दी में बहुत महंगा हो गया है. दुकानदार और खरीदार दोनों हैरान हैं कि अंडे को इस बार क्या हुआ? अभी दिसंबर चल रहा है और जनवरी बाकी है, तो क्या कीमतें और बढ़ेंगी? पोल्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस साल अंडा ऊंचे दाम पर नहीं बिका तो बीते साल के दाम तो छोड़िए अंडा खरीदने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती.अंडों के बाजार रेट पर नजर दौड़ाएं तो अगस्त-सितंबर के मुकाबले 25 से 50 फीसद तक महंगे हो चुके हैं. अभी जनवरी का पूरा महीना बाकी है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि दाम और बढ़ सकते हैं. डिमांड बढ़ने से महंगा हुआ अंडा यूपी पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अकबर अली ने बताया कि दिसंबर आते ही पूरे देश में अंडों की मांग बहुत बढ़ गई है. यह सिर्फ एक शहर या राज्य में नहीं, हर जगह की अंडों की मांग बढ़ी है. उत्तर प्रदेश को ही रोज 5.5 से 6 करोड़ अंडों की जरूरत होती है, जिसमें से 3.5 से 4 करोड़ दूसरे राज्यों से आते हैं. यूपी में दुकानों पर रिटेल में एक अंडा 8 से 10 रुपये तक बिक रहा है. जबकि होलसेल यानी थोक में कीमत 7.5 रुपये तक पहुंच गई है. ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़ें तो कीमत और बढ़ जाती है. बाजार को देखकर ऐसा लग रहा है कि होलसेल में 15.20 पैसे प्रति अंडा और महंगा हो सकता है. ऐसे में  जनवरी में अगर अंडा 8.5 रुपये का हो जाए तो हैरानी नहीं. फरवरी से ही कीमतें कम होने की उम्मीद है. अगर सही दाम नहीं मिले तो अंडा ढूंढना पड़ेगा! पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रनपाल ढांढा ने कहा कि अंडा अगर 8 रुपये का बिक रहा है तो उसे महंगा नहीं कह सकते. इस पोल्ट्री फार्मर को अंडे के सही कीमत मिल रही है. दरअसल, बीते कई साल से पोल्ट्री फीड महंगा हो रहा है लेकिन अंडे के दाम नहीं बढ़े थे. हर साल बड़ी संख्या में फार्मर अपने पोल्ट्री फार्म बंद कर रहे हैं. जिससे अंडा उत्पादन कम हो रहा है. अगर इस बार भी अच्छे दाम नहीं मिलते, तो आगे अंडा मिलना मुश्किल हो जाता. बता दें कि पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाली मक्का और सोयाबीन की सरकारी कीमत हर साल बढ़ जाती है, लेकिन अंडे की नहीं. दुनिया में सबसे सस्ता अंडा भारत में ही बिकता है. सबसे सस्ता अंडा नमक्कल-होसपेट में  नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमिटी (NECC) के रोज के रेट देखें तो थोक में सबसे सस्ता अंडा नमक्कल और होसपेट में बिक रहा है. जहां 640-645 रुपये प्रति 100 अंडे का रेट है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ये दोनों भारत की सबसे बड़ी अंडा मार्केट हैं. नमक्कल से सबसे ज्यादा अंडा दूसरे देशों में निर्यात होता है.

500 रुपए में घर पर बार खोलने का मौका, भोपाल में नए साल के लिए जारी होम बार लाइसेंस

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस बार नए साल का स्वागत बेहद खास और 'नशे' की कानूनी अड़चनों से मुक्त होने जा रहा है। आबकारी विभाग ने शौकीनों के लिए एक शानदार सौगात पेश की है। इसकी मदद से मात्र 500 रुपये की मामूली फीस चुकाकर अपने घर को ही एक दिन के लिए वैध 'बार' में तब्दील कर सकते हैं। न्यू ईयर से पहले आबकारी की यह गाइडलाइन आई है। गाइडलाइन के बाद 31 दिसंबर की रात दोस्तों के साथ जाम छलकाने की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। अब घर की छत या ड्राइंग रूम में होने वाली पार्टी पर पुलिस या आबकारी विभाग का छापा पड़ने का डर खत्म हो जाएगा। सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ द्वारा जारी यह नई गाइडलाइन न केवल निजी पार्टियों को कानूनी कवच दे रही है, बल्कि बड़े आयोजनों के लिए भी इसमें स्पष्ट रास्ते खोले गए हैं। इतनी आसान है लाइसेंस प्रक्रिया विभाग ने लाइसेंस लेने की पूरी प्रक्रिया को इतना आधुनिक और सरल बना दिया है। इससे आपको सरकारी दफ्तरों की धूल फांकने की कतई जरूरत नहीं पड़ेगी। बस अपने मोबाइल से 'Eaabkari' पोर्टल या ऐप पर जाइए। ओटीपी के जरिए लॉग-इन कीजिए और पलक झपकते ही आपका 'वन-डे लाइसेंस' आपके हाथ में होगा। इतनी कीमत पर मिलेगा लाइसेंस दरअसल, घर की निजी महफिल के लिए महज 500 रुपये का शुल्क है। वहीं, मैरिज गार्डन या सामुदायिक भवनों में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए यह फीस 5 हजार रुपये है। इसके अलावा लॉजिंग सुविधा वाले होटलों के लिए 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है। पार्टी के लिए अलग है नियम हालांकि, अगर आप इस जश्न को बड़े व्यावसायिक स्तर पर ले जाने की सोच रहे हैं, तो नियमों का दायरा थोड़ा बढ़ जाता है। यदि पार्टी में एंट्री टिकट के जरिए दी जा रही है, तो 500 लोगों की भीड़ तक आपको 25 हजार रुपये देने होंगे। वहीं, 5 हजार से ज्यादा की भीड़ होने पर 2 लाख रुपये तक का लाइसेंस शुल्क चुकाना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिस स्थान के लिए अनुमति ली गई है, शराब का सेवन केवल वहीं तक सीमित रहना चाहिए। सामान्य तौर पर परिवहन के लिए बोतलों की संख्या सीमित है, लेकिन इस ऑनलाइन आवेदन में आप अपनी डिमांड के अनुसार स्टॉक की जानकारी पहले ही दे सकते हैं। भोपाल में करीब 350 से अधिक होटल और ढाबा संचालकों के साथ-साथ हजारों आम नागरिकों के लिए यह व्यवस्था नए साल के जश्न को और भी बेखौफ और यादगार बनाने वाली है।  

7वां वेतन आयोग खत्म, 8वें की तैयारी: नए साल से पहले जानें आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी

नई दिल्ली सातवें वेतन आयोग की समय सीमा 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है यानी 8 दिन बाद आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है। देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। क्योंकि, इसका सीधा असर 1.19 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ने वाला है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उम्मीदें भी तेज हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी और पेंशन में असल बढ़ोतरी कितनी होगी? सैलरी में इजाफा पूरी तरह फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा, क्योंकि यही फैक्टर नई बेसिक सैलरी तय करता है। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर लेवल-1 से लेवल-18 तक यानी चपरासी से लेकर आईएएस तक के कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी? नया वेतन 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है, लेकिन सरकार को रिपोर्ट मंजूर करने में करीब दो साल लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर जरूर मिलेगा, पर बढ़ी हुई सैलरी थोड़ा इंतजार कराने के बाद ही हाथ आएगी। फिटमेंट फैक्टर दरअसल वह गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई सैलरी तय की जाती है। Nexdigm के डायरेक्टर रामचंद्रन कृष्णमूर्ति के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर तय करते समय महंगाई, जीवन-यापन की लागत, CPI इंडेक्स, सरकार की वित्तीय स्थिति और प्राइवेट सेक्टर से तुलना जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है। आमतौर पर बेसिक पे और ग्रेड पे को आधार बनाकर यह तय किया जाता है कि कर्मचारियों को कितना इंक्रीमेंट दिया जा सकता है। महंगाई जितनी ज्यादा होती है, फिटमेंट फैक्टर उतना ही ऊंचा रखने की जरूरत महसूस होती है। दोगुने से ज्यादा का असर दिखेगा अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी में सीधा दोगुने से ज्यादा का असर दिखेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो 2.15 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से नई बेसिक सैलरी ₹38,700 हो सकती है। वहीं, ₹50,000 बेसिक पाने वाले कर्मचारी की सैलरी बढ़कर करीब ₹1,07,500 तक पहुंच सकती है। यही नहीं, चूंकि DA, HRA और पेंशन जैसी सुविधाएं बेसिक सैलरी पर ही निर्भर करती हैं, इसलिए कुल मासिक आय और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में भी बड़ा उछाल आएगा। अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की सैलरी अगर अलग-अलग लेवल की बात करें, तो लेवल-1 में ₹18,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹38,700, लेवल-6 में ₹35,400 से ₹76,110 और लेवल-10 में ₹56,100 से बढ़कर करीब ₹1.20 लाख हो सकती है। वहीं, सीनियर अधिकारियों के लिए यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा होगी। लेवल-15 में ₹1.82 लाख की बेसिक सैलरी ₹3.91 लाख, जबकि लेवल-18 में ₹2.50 लाख से बढ़कर करीब ₹5.37 लाख तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर, अगर 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत और मजबूत बढ़ोतरी लेकर आ सकता है। चपरासी से IAS तक, कितनी कितनी बढ़ेगी सैलरी?  ग्रेड वर्तमान बेसिक पे अनुमानित बेसिक पे Level 1 ₹ 18,000 ₹ 38,700.00 Level 2 ₹ 19,900 ₹ 42,785.00 Level 3 ₹ 21,700 ₹ 46,655.00 Level 4 ₹ 25,500 ₹ 54,825.00 Level 5 ₹ 29,200 ₹ 62,780.00 Level 6 ₹ 35,400 ₹ 76,110.00 Level 7 ₹ 44,900 ₹ 96,535.00 Level 8 ₹ 47,600 ₹ 102,340.00 Level 9 ₹ 53,100 ₹ 114,165.00 Level 10 ₹ 56,100 ₹ 120,615.00 Level 11 ₹ 67,700 ₹ 145,555.00 Level 12 ₹ 78,800 ₹ 169,420.00 Level 13 ₹ 118,500 ₹ 254,775.00 Level 13 ₹ 131,100 ₹ 281,865.00 Level 14 ₹ 144,200 ₹ 310,030.00 Level 15 ₹ 182,200 ₹ 391,730.00 Level 16 ₹ 205,400 ₹ 441,610.00 Level 17 ₹ 225,000 ₹ 483,750.00 Level 18 ₹ 250,000 ₹ 537,500.00  8वां वेतन आयोग कब से लागू होगा? 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है। ऐसे में नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। हालांकि, सरकार को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें मंजूर करने में करीब दो साल लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर मिलने की उम्मीद भी है। फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?  फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर, उतनी ज्यादा सैलरी और पेंशन। फिटमेंट फैक्टर कैसे तय होता है? एक्सपर्ट बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर तय करते समय कई आर्थिक और संस्थागत पहलुओं को देखा जाता है। आमतौर पर इसमें बेसिक पे + ग्रेड पे को आधार बनाकर जरूरी बढ़ोतरी का आकलन किया जाता है।  

वीर बाल दिवस आज: प्रदेशभर के स्कूलों में आयोजित होंगे विशेष कार्यक्रम

प्रदेश के स्कूलों में आज 26 दिसम्बर को मनाया जायेगा वीर बाल दिवस स्कूलों में होंगी चित्रकला एवं लेखन प्रतियोगिताएँ मंत्री सिंह ने की प्रतियोगिता में बच्चों की अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण भोपाल  प्रदेश के स्कूलों में 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जायेगा। इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल के बच्चों से इस दिन होने वाली गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह द्वारा दिये गये सर्वोच्च बलिदान के संबंध में प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के भविष्य की नींव माने जाने वाले बच्चों को सम्मानित करने के लिये समर्पित एक राष्ट्रीय उत्सव है। इस पहल का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं का पोषण करना, रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें विकसित भारत के सपने में योगदान देने के लिये प्रेरित करना है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 26 दिसम्बर, 2025 को दोपहर 12:30 बजे भारत मण्डपम नई दिल्ली में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (लाइव वेबकास्ट) http://pmindiawebcast.nic.in/ पर किया जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि इस लिंक की सूचना सभी सरकारी और प्रायवेट स्कूलों में दी जाये, जिससे स्कूल के विद्यार्थी इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकें। जिला शिक्षा अधिकारियों को दिये गये निर्देश में कहा गया है कि इससे जुड़ी जानकारी dpividhya admin और ramsa admin Whats App Group पर भी साझा की गई है। वीर बाल दिवस पर होने वाली प्रतियोगिताएँ स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में आयु समूह के अनुसार विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का निर्णय लिया है। आयु वर्ग 3-6 वर्ष के लिये चित्रकारी, पेंटिंग, खेल गतिविधियाँ एवं कहानी सुनाना और आयु वर्ग 6-10 वर्ष के लिये चित्रकला, निबंध लेखन एवं कहानी सुनाना प्रमुख हैं। इसके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें मेरे सपनों का भारत, वह भारत जो मैं देखना चाहता हूँ, दूसरों की मदद करना मेरी महाशक्ति है, मेरी संस्कृति के रंग और मेरे आसपास के नायक, जिनमें शिक्षक, देखभालकर्ता और मित्र शामिल हैं। स्कूलों में आयु वर्ग 11-18 वर्ष के लिये निबंध, कविताएँ, वाद-विवाद और डिजिटल प्रतियोगिता शामिल हैं। इनके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें 'राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका', 'विकसित भारत के लिये मेरा दृष्टिकोण', 'विकसित भारत बनाने में बच्चों की भूमिका', 'विकासशील भारत को आकार देने में बच्चों की भूमिका', 'साहस और करुणा, एक नायक क्या बनाता है', 'भारत के इतिहास में वीरता की कहानियाँ', 'डिजिटल इण्डिया में युवाओं के लिये अवसर', 'स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत', 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ', 'प्रत्येक बालिका को सशक्त बनाना' शामिल हैं। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत-नवाचार में युवाओं की अग्रणी भूमिका, 'वोकल फॉर लोकल', 'भारत की पारम्परिक शिल्प-कलाओं का उत्सव मनाना', 'स्किल इण्डिया मिशन' और 'अमृतकाल में कल के भारत निर्माण में युवाओं की भूमिका' को शामिल किया गया है। शिक्षकों को इन प्रतियोगिताओं मे  

MP सरकार का बड़ा कदम: 15 लाख कर्मचारियों को साल 2026 से आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा

 भोपाल  प्रदेश सरकार राज्य के 15 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल 2026 में आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य सुविधा योजना देने की तैयारी कर रही है।प्रस्ताव बना लिया गया है। इसमें कर्मचारियों को हरियाणा और राजस्थान की तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कुछ राशि उनके वेतन से अंशदान के तौर पर काटी जाएगी, शेष राशि सरकार जमा कराएगी। कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई योजना मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से प्रस्तावित यह योजना राज्य सरकार ने कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई है। इसके लिए भी आयुष्मान भारत की तरह प्रदेश और प्रदेश के बाहर के निजी अस्पतालों से अनुबंध किया जाएगा। कर्मचारी संगठन लंबे समय से कैशलेस उपचार सुविधा की मांग कर रहे हैं, जो जल्द ही उन्हें मिल सकती है। 10 लाख रुपये तक फ्री इलाज का प्रस्ताव प्रस्तावित योजना में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सेवानिवृत्त कर्मियों के परिवारों को सामान्य इलाज के लिए पांच लाख रुपये और गंभीर बीमारी होने पर दस लाख रुपये तक की निश्शुल्क चिकित्सा और ओपीडी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वेतन और पेंशन से कितना देना होगा अंशदान इसमें कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक मासिक अंशदान लिया जाएगा। शेष राशि सरकार मिलाएगी। बता दें कि सरकार ने फरवरी 2020 में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए फ्री इलाज की घोषणा की थी। इसका आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन योजना शुरू नहीं की जा सकी। उत्तराखंड सरकार इसी तरह की योजना संचालित कर रही है। इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ स्थायी, अस्थायी, संविदा, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, कार्यभारित, राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं उषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और कोटवार और आउटसोर्स स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले पाएंगे। इन कर्मचारियों की संख्या 15 लाख से अधिक है। अभी खुद कराते हैं इलाज प्रदेश में अभी कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज का सारा खर्च खुद उठाते हैं और बाद में विभाग के माध्यम से खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करते हैं। यह प्रस्ताव कैबिनेट तक जाता है और सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों के अनुसार भुगतान करती है, लेकिन कई बार गंभीर बीमारी पर अधिक व्यय होने के कारण पूरा खर्च कवर नहीं होता, जिसके चलते कर्मचारियों को स्वयं ही इलाज का खर्च वहन करना होता है।     हम तो लंबे समय से कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। कई पेंशनर ऐसे हैं जो अपना जीवन यापन भी ठीक तरह से नहीं कर पाते, इलाज कराना तो बहुत दूर की बात है। सरकार को शीघ्र निर्णय लेकर इसे लागू करना होगा। सभी को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।     -सुधीर नायक, मंत्रालय सेवा अधिकारी, कर्मचारी संघ  

ब्रह्मोस की रेंज बढ़ी, ER Version से दिल्ली से निशाना सिर्फ एक क्लिक में

नई दिल्ली किसी भी देश के डिफेंस पावर की मजबूती को समझने और उसका आकलन करने के लिए मिसाइल सिस्‍टम के बारे में जानना जरूरी होता है. जिस देश के पास जितनी ताकतवर मिसाइल्‍स हैं, उसकी अटैकिंग क्षमता भी उतनी ही बेहतर मानी जाती है. भारत दुनिया के उन गिनेचुने देशों में शामिल है, जिसके पास अल्‍ट्रा मॉडर्न मिसाइल सिस्‍टम है. एक तरफ ब्रह्मोस जैसी अचूक क्रूज मिसाइल है तो दूसरी तरफ अग्नि-5 जैसी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल है, जो दुश्‍मन की मांद में घुसकर उसे नेस्‍तनाबूद कर सकती है. अग्नि-5 मिसाइल ऐसी ICBM है जो MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस और न्‍यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. मतलब यह मिसाइल तबाही का दूसरा नाम है. भारत के पास एक और ऐसी ही मिसाइल है, जिससे दुश्‍मन खौफ खाते हैं और जिसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने उसका अचूक निशाना और प्रचंड प्राक्रम भी देखा. जी हां…बात ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की हो रही है. भारत और रूस ने मिलकर इसे डेवलप किया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान ने इसकी प्रंडता देखी थी. ब्रह्मोस के वार से पाकिस्‍तान चारों खाने चित्‍त हो हो गया था और शांति की गुहार लगाने लगा था. अब वही ब्रह्मोस नए अवतार में सामने आने वाला है. भारतीय वैज्ञानियों के इसका रेंज इतना बढ़ा दिया है कि अब दिल्‍ली से एक बटन दबाते ही लाहौल और इस्‍लामाबाद के चीथड़े उड़ जाएंगे. ब्रह्मोस के नए अवतार को ब्रह्मोस- ER का नाम दिया गया है. दरअसल, भारत अपनी सामरिक और सैन्य क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. देश 2028 से लगभग 800 किलोमीटर मारक क्षमता वाली विस्तारित रेंज की ब्रह्मोस-ईआर (BrahMos-ER) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को सेना में शामिल करने की योजना बना रहा है. इस समय इस मिसाइल के लंबी दूरी वाली फ्लाइट प्रोफाइल को परखने के लिए परीक्षण चल रहे हैं. ब्रह्मोस-ER कार्यक्रम को ब्रह्मोस मिसाइल परिवार का अगला बड़ा चरण माना जा रहा है, जो आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों के लिए भारत की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को काफी मजबूत करेगा. ब्रह्मोस एयरोस्पेस पहले ही 450 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन की शुरुआत कर चुका है. यह वर्जन शुरुआती 300 किलोमीटर से कम रेंज वाली मिसाइलों की तुलना में एक बड़ा सुधार था. अब ब्रह्मोस-ER के जरिए इसकी मारक क्षमता को लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है. खास बात यह है कि रेंज बढ़ने के बावजूद इस मिसाइल की सुपरसोनिक गति, उच्च सटीकता और मल्‍टी-प्लेटफॉर्म से दागे जाने की क्षमता बरकरार रखी जाएगी. यह मिसाइल जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्‍लेटफॉर्म से दागी जा सकेगी. फोर्स मल्‍टीप्‍लायर भारतीय नौसेना और इंडियन आर्मी दोनों ही ब्रह्मोस-ER प्रोजेक्‍ट के मजबूत समर्थक हैं. नौसेना के लिए यह मिसाइल समुद्री क्षेत्र में ‘सी-डिनायल’ यानी दुश्मन की गतिविधियों को रोकने और लंबी दूरी से समुद्री हमले करने की क्षमता को काफी बढ़ाएगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे युद्धपोतों और तटीय बैटरियों को यह ताकत मिलेगी कि वे दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को विवादित समुद्री इलाकों के काफी भीतर तक निशाना बना सकें. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और मजबूत होगी. आर्मी के लिए ब्रह्मोस-ईआर एक अहम ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित हो सकती है. इसकी 800 किलोमीटर तक की रेंज सेना को यह क्षमता देगी कि वह सामरिक क्षेत्र से काफी दूर स्थित हाई वैल्‍यू एसेट्स पर सटीक हमला कर सके. इससे न केवल भारत की प्रतिरोधक क्षमता (डेटरेंस) मजबूत होगी, बल्कि गहरे प्रहार (डीप स्ट्राइक) की रणनीति को भी नई धार मिलेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल सीमावर्ती इलाकों से दूर बैठे विरोधियों के लिए भी एक मजबूत संदेश होगी. ब्रह्मोस-ER क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस-ER मिसाइल की रेंज    800 किलोमीटर दिल्‍ली से लाहौर की दूरी    502 किलोमीटर दिल्‍ली से इस्‍लामाबाद की दूरी    740 से 800 किलोमीटर एयरफोर्स के लिए खास ब्रह्मोस-ER इसी के साथ भारतीय वायुसेना के लिए ब्रह्मोस-ER का हल्का संस्करण विकसित करने की योजना भी चल रही है. इस एयर-लॉन्च्ड वर्जन का वजन करीब 2.5 टन रखने का लक्ष्य है, ताकि इसे लड़ाकू विमानों से आसानी से दागा जा सके. हल्का वजन होने से विमानों पर इसके एकीकरण (इंटीग्रेशन) में आने वाली तकनीकी चुनौतियां कम होंगी और मिशन के अनुसार पेलोड और रेंज के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे. इससे वायुसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और बढ़ेगी. भारतीय वायुसेना को ब्रह्मोस मिसाइल के इस्तेमाल का वास्तविक युद्ध अनुभव भी है. हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान वायुसेना ने ब्रह्मोस-ए (एयर-लॉन्च्ड) क्रूज मिसाइल के पुराने संस्करणों का इस्तेमाल किया था, जिनकी रेंज लगभग 290 किलोमीटर थी. इन मिसाइलों के सफल उपयोग ने सिस्टम की विश्वसनीयता को साबित किया और वायुसेना का भरोसा और मजबूत किया. इसी अनुभव के आधार पर अब ज्यादा रेंज और क्षमता वाली ब्रह्मोस-ER की जरूरत को और अधिक गंभीरता से देखा जा रहा है. मल्‍टी-रेंज क्रूज मिसाइल फिलहाल ब्रह्मोस-ER का परीक्षण अहम चरण में है. इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिसाइल लंबी दूरी पर भी अपनी गति, सटीकता और मारक क्षमता बनाए रखे. यदि तय समय-सीमा के अनुसार सब कुछ आगे बढ़ता है, तो 2028 से इसकी तैनाती भारत की सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगी. इससे भारत को जमीन और समुद्र दोनों क्षेत्रों में गहरे, तेज और ज्यादा सुरक्षित सटीक हमले करने की क्षमता मिलेगी. कुल मिलाकर, 450 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस के मौजूदा उत्पादन और भविष्य में 800 किलोमीटर रेंज की ब्रह्मोस-ER की तैनाती यह दर्शाती है कि भारत एक मजबूत, मल्‍टी-रेंज क्रूज मिसाइल शस्त्रागार की ओर तेजी से बढ़ रहा है. यह कदम बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और उभरती चुनौतियों के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी को नई मजबूती देगा.

अटल बिहारी वाजपेयी का सपना साकार: बुंदेलखंड में शुरू हुआ देश का पहला केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट

 छतरपुर  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की नदियों को जोड़ने का जो सपना देखा था, वह बुंदेलखंड की धरती पर देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना के रूप में साकार हो रहा है। 44 हजार 605 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण में छतरपुर जिले में करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध बनाया जा रहा है। एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटलजी की जयंती पर खजुराहो में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। हैदराबाद की नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। प्रस्तावित बांध 77 फीट ऊंचा और 2031 मीटर लंबा होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों तक नहरों का जाल बिछाया जाएगा। बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर मानी जा रही इस परियोजना को पूरा करने के लिए आठ साल का समय तय किया गया है। छतरपुर और पन्ना जिलों के 14 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो चुका है। अभी यह है स्थिति पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से ढोड़न, पलकुआं सहित भरकुआं, कुपी, मैनारी, गहदरा, कटहरी बिलहटा, मझौली आदि गांवों के कई परिवार सरकार से मुआवजा मिलने के बाद बमीठा और छतरपुर में बस गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में अब निर्माण कार्य तेज हो गया है। बदहाल रास्तों पर सड़कें बना दी गई हैं और बांध का बेस तैयार किया जा रहा है। पन्ना-दमोह में रकबा बढ़ाने की रिपोर्ट हो रही तैयार परियोजना के तहत पन्ना और दमोह जिलों में सिंचाई रकबा बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए मैपिंग और डीपीआर तैयार की जा रही है। अभी करीब 90 हजार हेक्टेयर सिंचाई रकबा तय था, जिसे बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर करने की तैयारी है। केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 218 किलोमीटर लंबी कैनाल बनाई जाएगी। इससे छोटी नहरों को जोड़ा जाएगा। माइनर नहरें पाइपलाइन के रूप में जमीन के अंदर बनाई जाएंगी। बांध में 2853 अरब लीटर जल का भंडारण किया जाएगा। मध्य प्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी। 12 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर भूमि का मुआवजा दिया गया है। करीब 4800 परिवार डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। काम लगभग पूरा पार्थ जैसवाल, कलेक्टर, छतरपुर का कहना है कि "भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो गया है। ढोड़न बांध का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही परिवारों का विस्थापन कराया जाएगा। यह परियोजना पूरे बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगी।"