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रहमान की सीख और जमीनी हकीकत: कानून-व्यवस्था पर सवाल, हिंदू की लिंचिंग से मचा हड़कंप

ढाका  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान 24 दिसंबर को जब अपना मुल्क लौटने की तैयारी कर रहे थे. तो उनके मन में बांग्लादेश को लेकर एक सपना था. सेकुलर बांग्लादेश का, लोकतांत्रिक बांग्लादेश का. उस बांग्लादेश का जहां कानून का राज होगा. बांगलादेश को लेकर उनका सपना उनके भाषणों में साफ दिखता है. लेकिन ठीक उसी समय बांग्लादेश में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही थी.  24 दिसंबर की रात को बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में होसेंडांगा पुराने बाजार क्षेत्र में रात करीब 11 बजे एक भीड़ ने हिन्दू युवक अमृत मंडल की हत्या कर दी. भीड़ ने सबसे पहले अमृत मंडल पर हमला किया और उसकी खूब पिटाई कर दी. पुलिस ने उन्हें गंभीर हालत में उन्हें बचाया और अस्पताल पहुंचाया, जहां रात करीब 2 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.  25 दिसंबर को अमृत मंडल की मौत हो गई और 25 दिसंबर को ही तारिक रहमान 17 सालों बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे.  पहले दीपू, अब अमृत, 6 दिन में 2 हिन्दुओं की लिंचिंग दीपू चंद्र दास की हत्या के 6 दिन बाद हुए इस कत्ल से बांग्लादेश का हिन्दू समुदाय सदमे में है. बांग्लादेश की पुलिस और अंतरिम सरकार इस घटना पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है.  पुलिस का कहना है कि यह सांप्रदायिक हमला नहीं था, बल्कि स्थानीय अपराधी गतिविधियों से जुड़ा मामला था. पुलिस का दावा है कि अमृत मंडल के खिलाफ हत्या सहित कई आपराधिक मामले दर्ज थे. और उसे एक स्थानीय गिरोह का सरगना माना जाता था. अगर बांग्लादेश पुलिस का दावा सच भी है तो भी एक भीड़ को किसी की हत्या की इजाजत नहीं दी जा सकती है. 25 दिसंबर को तारिक रहमान जब ढाका में अपनी पहली सभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने बांग्लादेश में हर कीमत पर कानून-व्यवस्था की मर्यादा कायम रखने की सलाह चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को दी थी.  तारिक रहमान ने बुधवार को  कहा, “देश की शांति और अनुशासन को किसी भी कीमत पर बनाए रखना होगा. साजिशों का मुकाबला करने के लिए सभी को धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा.” ये बांग्लादेश मुसलमानों-हिन्दुओं का है BNP के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि, "लोग लोकतंत्र वापस चाहते हैं. साथ मिलकर, हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाएंगे."  तारिक रहमान ने भले ही लोकतांत्रिक और सुरक्षित बांग्लादेश का सपना देखा हो लेकिन मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाला बांग्लादेश में हिन्दुओं के लिए न तो लोकतंत्र है और न ही वे यहां सुरक्षित दिख रहे हैं.  पहले 18 दिंसबर को दीपू चंद्र की हत्या इसके बाद 24 दिसंबर को अमृत मंडल की हत्या इसी का सबूत है.  तारिक रहमान के सपनों का बांग्लादेश अबतक सेकुलर दिखता है. 25 दिसंबर को अपने भाषण में उन्होंने इस बात पर जोर दिया.  तारिक रहमान ने ढाका के बाहरी इलाके पूर्बांचल में लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, "आज बांग्लादेश के लोग बोलने का अपना अधिकार वापस पाना चाहते हैं. वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार वापस पाना चाहते हैं." "अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश बनाएं. यह देश पहाड़ों और मैदानों के लोगों, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का है. हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर महिला, पुरुष और बच्चा घर से निकलकर सुरक्षित घर लौट सके." यूनुस के राज में चटगांव में हिन्दुओं पर हमले बढ़े बांग्लादेश के चट्टगांव में भी हिन्दू परिवारों पर हमले हुए हैं और मोहम्मद यूनुस की पुलिस रस्मी कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं कर पा रही है. चटगांव के राउज़ान के तीन इलाकों में पांच दिनों में अल्पसंख्यक समुदायों के चार घरों पर आगजनी की घटनाओं की एक सीरीज़ ने उपज़िला के निवासियों में डर फैला दिया है.  पीड़ितों और पुलिस के अनुसार हमले देर रात किए गए हमलावरों ने घरों में आग लगाने से पहले उनके मुख्य दरवाजों को बाहर से बंद कर दिया था.  हमले से बचते हुए ये हिन्दू परिवार बांस या टिन की दीवारों को काटकर भागने में कामयाब रहे.  ताज़ा घटना मंगलवार को सुबह करीब 3:45 बजे राउज़ान नगर पालिका के पश्चिम सुल्तानपुर के शिल्पारा में हुई, जिसमें सुलाल शिल और अनिल शिल के घरों को निशाना बनाया गया.  पुलिस ने घटनास्थल के पास से एक संदिग्ध हाथ से लिखा बैनर ज़ब्त किया. इसमें 43 मोबाइल फोन नंबर भी थे. दोनों परिवारों के आठ सदस्य घरों के अंदर सो रहे थे, वे घने धुएं और आग की लपटों से जागे.  सुलाल के बेटे मिथुन शिल, जो दुबई में रहते हैं और तीन महीने पहले अपनी शादी के लिए घर लौटे थे, ने कहा, "हम घबरा गए और बाहर भागने की कोशिश की, लेकिन हमने पाया कि दोनों दरवाजों पर बाहर से कुंडी लगी हुई थी." "आखिरकार, हमें अपनी जान बचाने के लिए बांस और टिन की दीवारों को काटना पड़ा." मिथुन ने बताया कि उनका पासपोर्ट, फर्नीचर और एक महीने पहले शादी में मिले करीब 10 लाख रुपये के शादी के तोहफे आग में जलकर खाक हो गए.  

अफेयर के शक ने ली जान, बच्चों के सामने पेट्रोल डालकर पत्नी को जिंदा जलाया, आरोपी फरार

हैदराबाद  हैदराबाद में एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने अपनी पत्नी को बच्चों के सामने ही आग लगाकर मार डाला। इतना ही नहीं उसने भागने से पहले अपनी बेटी को भी आग में धक्का दे दिया। घटना हैदराबाद के नालाकुंटा इलाके की है। पुलिस ने बताया कि पति को पत्नी पर अफेयर का शक रहता था औऱ इसको लेकर दोनों में झगड़ा होता रहता था। जानकारी के मुताबिक 24 दिसंबर को आरोपी अपनी पत्नी त्रिवेणी को बच्चों के सामने ही परेशान करने लगा। इसके बाद उसने त्रिवेणी पर पेट्रोल डाला और आग लगा दी। जब बेटी ने मां को बचाने की कोशिश की तो आरोपी ने उसे भी आग में धक्का दे दिया। इसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। जानकारी के मुताबिक आरोपी वेंकटेश और त्रिवेणी ने लवे मैरिज की थी। उनका एक बेटा और एक बेटी है। वेंकटेश को शक था कि पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है। इसके बाद वह अकसर पत्नी को प्रताड़ित करता था। हाल ही में त्रेवेणी भी अपने मायके गई थी। त्रिवेणी के वापस लौटने के बाद फिर झगड़ा शुरू हो गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। वहीं वेंकटेश अब भी फरार है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दोनों बच्चों को फिलहाल ननिहाल भेज दिया गया है। आसपास के लोगों का कहना है कि शादी के कुछ दिनों के बाद से ही उनमें अनबन रहने लगी थी। वहीं बीते कुछ दिनों से झगड़ा ज्यादा होने लगा था। इसीलिए त्रिवेणी कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई थी।  

धर्मांतरण कानून पर कांग्रेस का सवाल: पूर्ण बहुमत के बाद भी BJP नाकाम, अराजक तत्वों को मिल रहा संरक्षण

रायपुर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने आज कानून व्यवस्था और सर्व समाज द्वारा किए गए बंद को लेकर जिला कांग्रेस भवन प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान रायपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार मेनन, ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. प्रेस वार्ता में नेताओं ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जब बहुमत में नहीं थे तब धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की बात करते थे. अब जब बहुमत में हैं तो धर्मांतरण को लेकर कानून क्यों नहीं बना रहे हैं ? भाजपा जानबूझकर कानून नहीं बना रही है, ताकि धर्मांतरण का मुद्दा जारी रहे. उन्होंने सरकार पर अशांति फैलाने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में लोगों के साथ मारपीट हो रही. जो लोग बंद के नाम पर तोड़फोड़ कर रहे ,उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है. पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने भी राज्य की कानून व्यवस्था पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सर्व समाज के नाम पर बंद का आह्वान किया गया, लेकिन किसी समाज का मुखिया नजर नहीं आया. चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा बंद को समर्थन देने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वह पिट्ठू की तरह काम कर रहा है. प्रमोद दुबे ने मॉल में हुई घटना की निंदा करते हुए पूछा कि “बंद कराने वाले कौन थे, भाजपा नेता और उनके साथ विश्व हिंदू परिषद के लोग !” उन्होंने कहा कि जब हर जगह भाजपा की सरकार है तो धर्मांतरण को लेकर स्पष्ट कानून क्यों नहीं बना पा रहे हैं. पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने आगे कहा कि कभी शांति का टापू कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अराजकता का माहौल बन गया है. उन्होंने इसे पहला ऐसा बंद बताया, जिसमें कहीं भी ज्ञापन नहीं सौंपा गया. कांग्रेस ने सरकार से धर्मांतरण से जुड़े मामलों के आंकड़े सार्वजनिक करने और इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग दोहराई. साथ ही सवाल उठाया कि क्या अब समाज के लोग स्वतंत्र रूप से अपने त्योहार भी नहीं मना सकते. वहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री कुमार मेनन ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश में जिस तरह की व्यवस्था देखने को मिल रही है, वह तालिबान शासन जैसी प्रतीत होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का अपने अनुषांगिक संगठनों पर कोई नियंत्रण नहीं है. कांकेर की घटना और उसके बाद क्रिसमस मनाने वाले लोगों के साथ किया गया व्यवहार शर्मनाक है. मेनन ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मजदूर जब मजदूरी करने बाहर जाता है तो उसे मॉब लिंचिंग का शिकार बनाया जाता है, और इस पर भाजपा व आरएसएस के लोग चुप रहते हैं. उन्होंने भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दुर्ग में धर्मांतरण के आरोप में नन की गिरफ्तारी हुई, उसके बाद जो हुआ , तो यही बीजेपी के लोग छुड़ाने आए थे. अब फिर से यही सब हो रहा है.

पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी DGP Award से सम्मानित

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों को उनके क्षेत्र में ड्रग डिटेक्शन किट्स के प्रभावी उपयोग के लिए पंजाब के निदेशक जनरल पुलिस (डीजीपी) द्वारा कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित किया गया है। एसएसपी बर्नाला मोहम्मद सरफराज आलम (IPS) और एसएसपी मलेरकोटला गगन अजीत सिंह (PPS, DR) को यह सम्मान 17 जुलाई 2009 की अधिसूचना के तहत पुलिस विभाग के आदेश संख्या 10698 के अंतर्गत दिया गया है।   डीजीपी गौरव यादव ने इन दोनों अधिकारियों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने मादक पदार्थों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाने वाले ड्रग डिटेक्शन किट्स के बेहतर और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित किया है। इस सम्मान के आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और पंजाब पुलिस के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई हैं, ताकि आवश्यक कार्यवाही समयबद्ध तरीके से की जा सके।

विदेश से चल रहा था मदरसा नेटवर्क? लंदन में बसे आजमगढ़ के मौलाना पर ED का शिकंजा

आजमगढ़  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ब्रिटेन में रह रहे आजमगढ़ के इस्लामिक उपदेशक मौलाना शम्सुल हुदा खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। ईडी ने मौलाना के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, शम्सुल हुदा खान पर कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और धार्मिक शिक्षा की आड़ में अवैध फंडिंग करने के गंभीर आरोप हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान की नियुक्ति वर्ष 1984 में आजमगढ़ के एक सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। हालांकि 2013 में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली, इसके बावजूद आरोप है कि वे 2013 से 2017 तक भारत में वेतन लेते रहे थे। इस समय वे न तो भारतीय नागरिक थे और न ही शिक्षण कार्य कर रहे थे। इस दौरान वे ब्रिटेन में रहकर धार्मिक प्रवचन देते रहे और भारत की सरकारी व्यवस्था उनकी अनुपस्थिति पर दस वर्षों तक आंख मूंदे रही। जांच में सामने आया है कि बीते दो दशकों में शम्सुल हुदा खान ने कई देशों की यात्राएं कीं और भारत में संचालित 7 से 8 बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये प्राप्त किए। ईडी के अनुसार, उन्होंने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की एक दर्जन से ज्यादा अचल संपत्तियां भी खरीदीं। बताया गया है कि उन्होंने राजा फाउंडेशन नामक एनजीओ और अपने निजी खातों के माध्यम से विभिन्न मदरसों को धन मुहैया कराया। कहां-कहां स्थापित किए मदरसे शम्सुल हुदा खान ने आजमगढ़ और संत कबीर नगर में दो मदरसे स्थापित किए थे, जिनकी मान्यता बाद में अधिकारियों द्वारा रद्द कर दी गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन संस्थानों के जरिए विदेशी धन के उपयोग और कट्टरपंथी गतिविधियों की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान के ब्रिटेन स्थित कट्टरपंथी संगठनों से संबंधों की जांच की जा रही है। इसके अलावा, उनके पाकिस्तान दौरे और वहां के चरमपंथी संगठनों से कथित संपर्क भी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तानी कट्टरपंथी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ से जुड़ा हो सकता है। अवैध वेतन में कई अधिकारी 25 दिसंबर को इस मामले में बड़ा खुलासा भी हुआ। जांच में सामने आया कि शम्सुल हुदा खान को अवैध रूप से वेतन, मेडिकल लीव और अंततः स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के सभी लाभ दिलाने में कई अधिकारी शामिल थे। इसके बाद यूपी सरकार ने चार वरिष्ठ अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकाश सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित कर दिया। शम्सुल हुदा खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब ईडी उनके फंडिंग नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।  

आज बांग्लादेश में स्टार एंट्री, 17 साल पहले बेल लेकर लंदन फरार थे तारिक रहमान

ढाका  बांग्लादेश में तारिक रहमान ने हीरो जैसी एंट्री की है। गुरुवार को उनके समर्थन में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी। उन्होंने भी मां, माटी और मानुष वाला संदेश देने की कोशिश की। बांग्लादेश की जमीन पर पहुंचकर वह नंगे पैर खड़े हुए, मां खालिदा जिया से मुलाकात की और बांग्ला मानुष के लिए भविष्य की योजनाओं को लेकर बात की। तारिक रहमान का बांग्लादेश के उन दो परिवारों में से एक से नाता रहा है, जो देश की राजनीति की धुरी रहे हैं। उनमें से एक परिवार की नेता शेख हसीना इन दिनों भारत में शरण लिए हुए हैं। वहीं दूसरा परिवार बेगम खालिदा जिया का है, जो फिलहाल बीमार चल रही हैं। तारिक रहमान उनके ही बेटे हैं। तारिक के पिता जिया उर रहमान भी पीएम रह चुके हैं। रहमान की कहानी भी कम रोचक नहीं है। वह 2008 में उस वक्त लंदन निकल गए थे, जब उन्हें जेल से बेल पर रिहाई मिली थी। इसी दौरान वह मौका देखकर लंदन के लिए निकल गए थे। वह जिया उर रहमान और खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। खालिदा जिया 1991 में देश की पहली महिला पीएम बनी थीं। लेकिन तारिक रहमान के राजनीति में चर्चे तब शुरू हुए, जब 2001 से 2006 के बेगम खालिदा जिया के दौर में उन पर भ्रष्टाचार, हिंसा जैसे आरोप लगे थे। इसी बीच उनकी मां की सत्ता से 2006 में विदाई हो गई थी और सैन्य समर्थन वाली केयरटेकर सरकार आई थी, जिसने उनके खिलाफ जांच की। आर्मी ने देर रात को किया था तारिक रहमान को अरेस्ट मार्च 2007 में तारिक रहमान को आर्मी यूनिट्स ने अरेस्ट कर लिया था। उन्हें उनके ढाका स्थित लग्जरी घर से निकालकर देर रात में ले जाया गया था। कई महीनों के बाद वह बेल पर रिहा हुए थे और फिर इलाज कराने के नाम पर लंदन चले गए और वहां से लौटे ही नहीं। फिर वह सीधे गुरुवार को ही ठीक 17 साल के बाद वापस लौटे। रहमान और बीएनपी की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि उनके ऊपर आरोप राजनीतिक थे, लेकिन विपक्ष से अलग भी ऐसे लग रहे हैं, जो उन पर संदेह करते रहे हैं।   विकिलीक्स के खुलासों में तारिक रहमान पर क्या कहा गया था यहां तक कि 2011 में आए विकिलीक्स के खुलासों में भी तारिक रहमान को लेकर दावा किया गया था कि वह हिंसा को बढ़ावा देने वाले और मनमाने ढंग से सत्ता चलाने वाले शख्स हैं। हालांकि अब उन्हें बांग्लादेश में नए तेवरों के साथ पेश किया जा रहा है। उनकी हीरो जैसी एंट्री हुई है और आने वाले पीएम के तौर पर उन्हें देखा जा रहा है। तारिक रहमान ने भी इस मौके को खूब भुनाया है। उन्होंने आते ही इमोशनल बातें की हैं और बांग्लादेश में हिंसा को खत्म करने की बात कही है। हालांकि यह देखना होगा कि सत्ता हासिल करने के बाद उनका रुख क्या होगा।  

करोड़ों की ठगी का बड़ा खुलासा: वर्धमान ग्रुप चेयरमैन मामला, ED ने 5 राज्यों में मारा छापा

लुधियाना  वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एस.पी. ओसवाल से 7 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। देश के चर्चित साइबर ठगी मामलों में शामिल वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एस.पी. ओसवाल से 7 करोड़ रुपए की ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने अंतर्राज्यीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम में एकसाथ छापेमारी की। दिसंबर 2025 में हुई इस कार्रवाई के तहत ED ने कुल 11 ठिकानों पर तलाशी ली, जहां से कई डिजिटल उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े अहम रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को तुरंत अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स में भेजकर उसे कई स्तरों में घुमाया जाता था, ताकि उसका स्रोत छिपाया जा सके। ED ने इस नेटवर्क से जुड़ी अहम आरोपी रूमी कलिता को असम से हिरासत में लिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक वह कमीशन के बदले म्यूल अकाउंट्स के संचालन और अवैध धन को इधर-उधर ट्रांसफर कराने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। फिलहाल आरोपी को पूछताछ के लिए ED रिमांड पर लिया गया है। जानें पूरा मामला:  इस मामले की जड़ें अगस्त 2024 से जुड़ी हैं, जब 82 वर्षीय उद्योगपति एस.पी. ओसवाल को खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले साइबर ठगों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय अपराध में नाम जुड़ने का डर दिखाकर उन्हें तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखने का दावा किया। वीडियो कॉल के जरिए फर्जी अदालत, नकली सरकारी प्रतीक चिन्ह और वरिष्ठ अधिकारियों की डिजिटल नकल दिखाकर ठगों ने मानसिक दबाव बनाया। करीब 48 घंटे तक वर्चुअल निगरानी में रखकर मनी लॉन्ड्रिंग जांच और जमानत के नाम पर उनसे 7 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। यह राशि असम और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग खातों में भेजी गई थी ताकि बैंकिंग सिस्टम की निगरानी से बचा जा सके। घटना के सामने आते ही लुधियाना पुलिस ने साइबर क्राइम यूनिट और I4C के सहयोग से त्वरित कार्रवाई करते हुए कई खातों को फ्रीज कराया, जिससे 5.25 करोड़ रुपए की रकम वापस हासिल की जा सकी। इसे अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी रिकवरी में गिना जा रहा है। ED की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि ठगी की रकम को रियल एस्टेट, शेल कंपनियों और डिजिटल करेंसी के माध्यम से खपाने की कोशिश की गई। एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है और इसी तरह के अन्य साइबर फ्रॉड मामलों में भी इसकी संलिप्तता हो सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर गूंजा आक्रोश, उन्नाव रेप मामले में कुलदीप सेंगर को जमानत न देने की मांग

नई दिल्ली  उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ने लगा है। उन्नाव रेप केस की पीड़िता के परिवार और अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर सेंगर की जमानत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अपनी नाराजगी जाहिर की। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वहां विरोध-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की। इसके साथ ही चेतावनी देते हुए कहा, “यहां प्रदर्शन करना मना है और गैर-कानूनी है। पांच मिनट बाद आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अगर आप विरोध करना चाहते हैं, तो जंतर-मंतर जाएं।” रेप पीड़िता की मां ने कहा कि जमानत खारिज की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगी, उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले पर अविश्वास जताया। उन्होंने बताया, "उसकी जमानत खारिज होनी चाहिए। हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हमें हाईकोर्ट पर भरोसा नहीं रहा। अगर हमें सुप्रीम कोर्ट में न्याय नहीं मिला, तो हम दूसरे देश जाएंगे, मेरे पति के हत्यारे को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए।" महिला एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने कहा कि उन्होंने उन्नाव रेप पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए शांतिपूर्वक ढंग से दिल्ली हाईकोर्ट आए हैं। हमारी कोर्ट से अपील है कि उनकी याचिका पर सुनवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। योगिता भयाना ने कहा, "आज, हम शांतिपूर्वक ढंग हाईकोर्ट आए हैं ताकि हमारी बेटी के साथ हुए अन्याय को खत्म किया जाए और जो याचिका हम दायर करने वाले हैं, उसे सुना जाए। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम विरोध करेंगे, और यह हमारा अधिकार है।" कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए इसे "बहुत बड़ा झटका" बताया और कहा कि यह फैसला देशभर की महिलाओं का आत्मविश्वास कम करता है। मुमताज पटेल ने कहा, ''हाईकोर्ट जिस तरह से एक टेक्निकल वजह से सेंगर को क्लीन चिट दे दी है, यह एक बहुत बड़ा झटका है। यह देश में एक बहुत गलत मिसाल कायम कर रहा है। इस फैसले से सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का भी आत्मविश्वास कितना टूट गया होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत (सजा पर रोक) दे दी है। दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने सेंगर को एक नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहराया था। वो फिलहाल उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उन्हें इस शर्त पर राहत दी गई है कि वे 15 लाख रुपये का बेल बॉन्ड जमा करें। हालांकि, वह जेल में ही रहेंगे क्योंकि पीड़ित के पिता की कस्टडी में मौत के मामले में उन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट में अपील और सजा निलंबित करने की अर्जी पेंडिंग है। उस मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई थी। जमानत देते समय, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंगर उस 5 किलोमीटर के इलाके में नहीं जाएंगे जहां पीड़ित दिल्ली में रहता है। यह भी निर्देश दिया गया है कि सेंगर दिल्ली में ही रहेंगे। वह पीड़ित के परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं करेंगे।  

बिहार बॉक्सिंग एसोसिएशन को नया उपाध्यक्ष मिला, भारतेन्दु शांडिल्य की नियुक्ति से मुजफ्फरपुर गौरवान्वित

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले के जूरन छपरा निवासी भारतेन्दु शांडिल्य को बिहार राज्य बॉक्सिंग एसोसिएशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके इस उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद पूरे जिले और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस उपलब्धि से बिहार को भी बॉक्सिंग के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।भारतेन्दु शांडिल्य 48 वर्ष के हैं और उन्होंने हैदराबाद की इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के अलावा लंदन की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और एमआईटी से इंटरप्रेन्योर बिजनेस की सर्टिफिकेट भी प्राप्त की है। इसके अलावा, उनके कार्यों को विश्वभर की चर्चित पत्रिकाओं जैसे आउटलुक और फोर्ब्स ने भी सराहा है। इंडियन एमेच्योर बॉक्सिंग एसोसिएशन के महासचिव राकेश ठाकुर ने भारतेन्दु शांडिल्य को बिहार बॉक्सिंग एसोसिएशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया और उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का पदभार सौंपा। इस अवसर पर उनके परिवार, मित्र और शुभचिंतक उन्हें बधाई देने पहुंचे। परिवार ने भी गर्व जताया। उनके पिता, मुजफ्फरपुर के जिला कोर्ट के अधिवक्ता अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि उनका बेटा एक बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर बिहार के लिए गौरव का क्षण ला रहा है। भारतेन्दु बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहे हैं और अब वह बिहार और मुजफ्फरपुर जिले में बॉक्सिंग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उनके उपाध्यक्ष बनने पर पंकज कुमार, आचार्य डॉ. रंजीत नारायण तिवारी, पंडित विनय पाठक, डॉ. शिप्रा आनंद, अनिमेष कुमार, साकेत कुमार, उत्कर्ष नितेश और डॉ. रवि कुमार सहित कई लोगों ने उन्हें बधाई दी। भारतेन्दु शांडिल्य का यह पद बिहार में खेल और विशेषकर बॉक्सिंग के विकास की संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है और उम्मीद जताई जा रही है कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे।  

99 पर रुके विराट कोहली, लेकिन मैदान पर रच दिया ऐसा कारनामा जो कोई और नहीं कर सका

नई दिल्ली  विराट कोहली के लिए विजय हजारे टूर्नामेंट क्या घट रहा है। पहले मैच में 131 रनों की शतकीय पारी खेलने वाले किंग कोहली ने गुजरात के खिलाफ दूसरे मुकाबले में भी तूफानी अंदाज में 77 रन बनाए, हालांकि वह अपने लगातार दूसरे शतक से चूक गए। कोहली ने शतक से चूकने के बावजूद इतिहास रच दिया। वह अब लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे ज्यादा औसत से रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। जी हां, इस लिस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज माइकल बेवन को पछाड़ा है। गुजरात के खिलाफ 77 रनों की इस पारी के बाद विराट कोहली का लिस्ट ए में औसत 57.87 का हो गया है, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है।   यह रिकॉर्ड विराट कोहली से पहले ऑस्ट्रेलिया के माइकल बेवन के नाम था। इस दिग्गज बल्लेबाज ने अपने लिस्ट ए करियर में 15103 रन 57.86 के औसत के साथ बनाए थे। विराट कोहली उनसे बस 0.01 की औसत के साथ आगे हैं। टॉप-5 बल्लेबाजों की इस लिस्ट में चेतेश्वर पुजारा 57.01 की औसत के साथ और ऋतुराज गायकवाड़ 56.68 की औसत के साथ मौजूद हैं। विराट कोहली की अगर गुजरात के खिलाफ पारी की बात करें तो, उन्होंने महज 29 गेंदों पर तूफानी अर्धशतक जड़ा। वहीं 61 गेंदों पर 13 चौकों और एक छक्के की मदद से 77 रनों की पारी खेली। कोहली को दूसरे छोर से लंबा साथ नहीं मिल रहा था, जिस वजह से रनों की गति बढ़ाने के प्रयास में वह स्टंप आउट हो गए। खबर लिखे जाने तक दिल्ली ने गुजरात के खिलाफ 5 विकेट के नुकसान पर 150 रन बोर्ड पर लगा दिए हैं, जिसमें से 77 रन तो अकेले विराट कोहली के ही है। पहले राउंड में जिस तरह टीमों ने बड़े-बड़े स्कोर का पीछा किया था उसको देखकर अगर अंदाजा लगाया जाए तो दिल्ली को जीत के लिए कम से कम 300 रन बोर्ड पर लगाने होंगे।