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उत्तर प्रदेश सरकार के एआईएफ फंड से मिली मजबूती, नेफेड के लिए करती हैं प्रोडक्ट तैयार

दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करके अपने गांव लौटीं और गांव की ही महिलाओं को दे रहीं रोजगार किसानों को प्रशिक्षण देकर करवाती हैं प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और प्रेरणा से उत्तर प्रदेश की बेटियां न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाने को तैयार हैं। मिलेट्स आधारित ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप के जरिए यूपी की दो बेटियों ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो प्रदेश की नई उद्यमशील शक्ति का प्रतीक बन रहा है। दिल्ली-एनसीआर में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब इनका लक्ष्य गल्फ कंट्रीज का बाजार है, जहां ऑर्गेनिक और मिलेट्स उत्पादों की धाक जमाने की पूरी तैयारी है। इसके लिए विशेष तौर पर किसानों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती करवाई जा रही है। डीयू से लौटीं बेटियां, अपने गांव की महिलाओं को दिया रोजगार दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद पारंपरिक करियर की राह छोड़कर गांव लौटने वाली शिखा सिंह चौहान और सोम्या सिंह ने सामाजिक उद्यमिता का रास्ता चुना। किसानों और ग्रामीण महिलाओं को साथ लेकर उन्होंने ऑर्गेनिक और मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखा। आज उनकी यूनिट में 15 से अधिक महिलाएं उत्पादन, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का जिम्मा संभाल रही हैं। शिखा सिंह चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी गांधीनगर, गुजरात से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। वहीं, सोम्या सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय से फूड टेक्नोलॉजी में बी.टेक हैं। महिला-नेतृत्व वाला एग्रीबिजनेस मॉडल हो रहा मजबूत सोम्या सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के सहयोग से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट का विस्तार हुआ। इससे न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ी, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले एग्रीबिजनेस मॉडल को भी मजबूती मिली। यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर में ऑर्गेनिक फूड के बाजार में इनका ब्रांड तेजी से उभरा है। खेत से थाली तक पारदर्शी मॉडल सोहा ऑर्गेनिक्स की को-फाउंडर शिखा सिंह चौहान नागली वाजिदपुर, सेक्टर 130, गौतम बुद्ध नगर की रहने वाली हैं। जबकि उनकी पार्टनर सोम्या सिंह बागपत जिले की निवासी हैं। रासायनिक खाद्य पदार्थों और उनसे होने वाली समस्याओं से लोगों को बचाने के लिए उन्होंने मिलेट्स-ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप की शुरुआत की। यह स्टार्टअप फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम करता है। छोटे किसानों से सीधे कच्चा माल खरीदा जाता है और उन्हें उचित मूल्य दिया जाता है। बिचौलियों के हटने से सप्लाई चेन पारदर्शी बनी है, वहीं उपभोक्ताओं को शुद्ध, रसायन-मुक्त और पोषण से भरपूर उत्पाद मिल रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर से नेफेड तक सप्लाई ऑर्गेनिक दालें, मसाले, घी, मिलेट पास्ता, मिलेट नूडल्स, मल्टीग्रेन और सत्तू चीला समेत तमाम तरह के उत्पाद यहां से सीधे मार्केट में जाते हैं। इसके बदले किसानों को उनका उचित मूल्य भी दिया जाता है। इसमें बड़े पैमाने पर बागपत से खांडसारी शुगर का उत्पाद लोगों के बीच पहुंचाया जाता है। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ नेफेड (NAFED) को भी उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा सरकारी पोषण कार्यक्रमों के लिए विशेष उत्पाद विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिससे कमजोर वर्गों तक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन पहुंच सके। गल्फ कंट्रीज पर नजर, ‘मेड इन यूपी’ की तैयारी शिखा सिंह चौहान ने बताया कि ऑर्गेनिक और मिलेट्स उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए अब अगला लक्ष्य गल्फ देशों का बाजार है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और क्वालिटी कंट्रोल पर खास फोकस किया जा रहा है, ताकि विदेशों में भी उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया जा सके। स्वास्थ्य, सततता और महिला सशक्तिकरण से निकली यूपी की बेटियों की सफलता की कहानी बताती है कि सही नीति, सरकारी सहयोग और दृढ़ संकल्प हो, तो हमारी बेटियां वैश्विक मंच पर भी परचम लहरा सकती हैं। मिलेट्स ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप के जरिए उभरती यह पहल न सिर्फ एक कारोबार है, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई पहचान भी है।

बिहार में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती, नए साल में दो नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत

पटना बिहार में नए साल के आगाज के साथ ही राज्य को दो नए अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मिलने जा रहे हैं, जिससे बिहार में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वैशाली जिले के महुआ में निर्मित मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और भोजपुर जिले के आरा में स्थापित वीर कुंवर सिंह मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का संचालन जनवरी, 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। दोनों संस्थानों में 500- 500 बेड की सुविधा होगी। 100-100 यूजी छात्रों को मिलेगा नामांकन इन दोनों के निर्माण में क्रमश: 500 करोड़ और 543 करोड़ रुपये की लागत आई है। इन मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 100-100 यूजी छात्रों को नामांकन दिया जाएगा। छात्रों के लिए आधुनिक छात्रावास भवन और डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। दोनों संस्थान नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानकों के अनुरूप संचालित होंगे। मेडिकल कॉलेजों में जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनेकोलॉजी, आईसीयू जैसी प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही मरीजों को इंडोर- आउटडोर इलाज, जांच, दवा वितरण, ऑप्टोसी ब्लॉक, डेमो रूम और म्यूजियम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। 10 वर्ष पहले केवल 6 राजकीय मेडिकल कॉलेज थे उल्लेखनीय है कि 10 वर्ष पहले बिहार में केवल 6 राजकीय मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन बीते एक दशक में यह संख्या बढ़कर 11 जिलों में 13 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गई है। वर्तमान में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, मधेपुरा, बेतिया, नालंदा, छपरा, पूर्णिया और समस्तीपुर समेत कई जिलों में मेडिकल कॉलेज सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आने वाले पांच वर्षों में शेष जिलों में भी एक-एक मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। सीवान और बेगूसराय में निर्माण कार्य लगभग 45 से 50 प्रतिशत, जबकि बक्सर, मधुबनी सहित अन्य जिलों में 60 से 80 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो चुका है।  

बस्तर पंडुम 2026 की तैयारियां शुरू: सीएम साय ने अधिकारियों के साथ की अहम बैठक

रायपुर  बस्तर अंचल की समृद्ध लोकपरंपराओं, जनजातीय संस्कृति, कला और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा. इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई. बैठक में आयोजन की विस्तृत तैयारियों की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है. इसके अंतर्गत 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 30 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस वर्ष बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है. जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं. मुख्यमंत्री साय ने तैयारियों के संबंध में विभागीय अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय तथा अधिक प्रभावी स्वरूप में संपन्न कराने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है. बैठक में यह बताया गया कि बस्तर पंडुम 2026 का लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में ही मुख्यमंत्री साय द्वारा किया जाएगा. इस अवसर पर वरिष्ठ मांझी–चालकी, गायता–पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार उपस्थित रहेंगे. इस बार विशेष रूप से भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके. साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया. प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों और समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके. उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खान-पान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुड़ियों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों के 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा. इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है. बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे.

ट्रैक्टर चोरों की दबंगई: रतलाम में ग्रामीणों पर की गोलीबारी, एक आरोपी पकड़ा गया

रतलाम, आलोट रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र में लगातार चोरी की वारदातें बढ़ती ही जा रही हैं। रविवार-सोमवार की मध्य रात्रि ग्राम अरवलिया सोलंकी में चार-पांच बदमाश एक किसान के घर के बाहर से ट्रैक्टर चुराकर ले जाने लगे। पता लगने पर ग्रामीणों ने चोरों का पीछा किया तो बदमाशों ने ग्रामीणों पर फायरिंग शुरू कर दी। ग्रामीणों ने एक बदमाश को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। उसके पांच साथी भागने में सफल हो गए। इस दौरान बदमाशों का एक देशी कट्टा और दो मोबाइल घटना स्थल पर ही गिर गए। ट्रैक्टर चुराकर ले जा रहा है बदमाश सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए हैं, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि किसान पुरसिंह पुत्र बालू सिंह सोलंकी के घर के बाहर बीती रात ट्रैक्टर खड़ा था। रात्रि 1 बजे 4 अज्ञात व्यक्ति गांव में पहुंचे और पुरसिंह के घर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। ट्रैक्टर को 500 मीटर धक्का देकर ले गए बदमाश इसके बाद बदमाश ट्रैक्टर को 500 मीटर दूर आगे धक्का देकर ले गए। इसके बाद जैसे तैसे ट्रैक्टर को स्टार्ट कर लिया। इसी बीच किसी ग्रामीण ने बदमाशों को ट्रेक्टर ले जाते देख अन्य लोगो को सूचना दी। करीब 2 किलोमीटर तक बदमाशों का पीछा कर ग्राम आंनदगढ़ में ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया तथा पकड़ने का प्रयास किया तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। इस दौरान 5 बदमाश भाग निकले। एक बदमाश को पकड़ लिया गया। ग्रामीणों ने पूछताछ की तो पकड़े गए बदमाश ने अपना नाम ईश्वर सिंह निवासी ग्राम लाखाखेड़ी राजस्थान बताया है। सूचना मिलने पर ताल और आलोट की पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने पकड़े बदमाश को पुलिस को सौंप दिया। सोमवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण आलोट थाने पर पहुंचे और शेष बदमाशों को भी गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। भागने के दौरान गिरने से पकड़े गए बदमाश को चोट आई है उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एसआई प्रमोद राठौड़ ने बताया कि ट्रैक्टर चला कर ले जा रहा है एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने पड़कर सौंपा है, साथ में एक देसी कट्टा और दो मोबाइल भी दिए हैं। उनके साथियों की भी तलाश की जा रही है।

चांदी में रिकॉर्ड उछाल: 24 घंटे में ₹19,700 महंगी हुई सिल्वर, कीमतों ने तोड़ा स्तर

नई दिल्ली  पिछले कुछ दिनों में चांदी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को चौंका दिया है। कीमतों में ऐसी ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है, जो अब तक दुर्लभ मानी जाती थी। शनिवार, 27 दिसंबर को इंदौर के सर्राफा बाजार में चांदी एक ही दिन में 19,700 रुपये उछलकर 2.53 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। MCX के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक चांदी 150 फीसदी से ज्यादा महंगी हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसका भाव 75 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है। खास बात यह है कि यह तेजी किसी डर या सट्टेबाजी की वजह से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी कारणों से आई है। सप्लाई से ज्यादा मांग चांदी लंबे समय से स्ट्रक्चरल डेफिसिट में है, यानी इसकी मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा है। उद्योग रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में वैश्विक बाजार में 100 मिलियन औंस से अधिक की कमी रह सकती है। चूंकि चांदी मुख्य रूप से कॉपर, जिंक और लेड की खदानों से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर निकलती है, इसलिए इसकी सप्लाई तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। गोदामों में घट रहा स्टॉक COMEX, लंदन और शंघाई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वॉल्ट्स में चांदी का स्टॉक लगातार घटता जा रहा है। जैसे-जैसे इन्वेंट्री कम हो रही है, वैसे-वैसे फिजिकल चांदी की उपलब्धता और तंग होती जा रही है। इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। इंडस्ट्रियल डिमांड ने बढ़ाया दबाव आज चांदी की 50-60 फीसदी मांग इंडस्ट्रियल सेक्टर से आती है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल सेक्टर में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है। ग्रीन एनर्जी पर बढ़ता फोकस इस मांग को और मजबूत बना रहा है। चीन फैक्टर से बाजार में हलचल चर्चा है कि चीन 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर सख्ती कर सकता है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस आशंका ने ही निवेशकों को फिजिकल चांदी खरीदने के लिए प्रेरित कर दिया है। आगे क्या करें निवेशक? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी ठोस आधार पर टिकी है। हालांकि चांदी स्वभाव से उतार-चढ़ाव वाली धातु है, इसलिए शॉर्ट टर्म में हल्की गिरावट संभव है। लंबी अवधि में, खासकर 2026 तक, इसके दाम 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच सकते हैं।

पीएम किसान योजना में सख्ती: किस्त पाने के लिए 5 जनवरी तक फार्मर रजिस्ट्री जरूरी, नहीं तो अटक सकता पैसा

कवर्धा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत लाभ लेने वाले किसानों की फार्मर रजिस्ट्री को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 5 जनवरी 2026 तक जिले के शत-प्रतिशत लाभांवित किसानों की एग्रीस्टेक परियोजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से पूर्ण कराई जाए। योजना का लाभ मिलने में हो सकती है दिक्कत तय समय-सीमा के बाद किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान कलेक्टर ने योजना से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा करते हुए यह साफ किया कि फार्मर रजिस्ट्री अधूरी रहने की स्थिति में किसानों को भविष्य में योजना का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के हितों से सीधे जुड़ा विषय है। ऐसे में किसी भी पात्र किसान का पंजीयन छूटना प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। एग्रीस्टेक परियोजना पर फोकस कलेक्टर ने कहा कि एग्रीस्टेक परियोजना के तहत किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना शासन की प्राथमिकता है। फार्मर रजिस्ट्री पूरी होने से न केवल योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिलेगा, बल्कि भविष्य में कृषि से जुड़ी अन्य योजनाओं और तकनीकी सुविधाओं का रास्ता भी खुलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को रजिस्ट्री के महत्व की जानकारी मौके पर जाकर दी जाए, ताकि भ्रम या तकनीकी कारणों से कोई किसान पीछे न रह जाए। बैठक में कलेक्टर ने कृषि, राजस्व और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। प्रगति रिपोर्ट की होगी निगरानी कलेक्टर ने संकेत दिए कि फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक अनुविभाग से अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट ली जाएगी और जहां लापरवाही सामने आएगी, वहां जवाबदेही तय की जाएगी। समीक्षा बैठक में डिप्टी कलेक्टर आरबी देवांगन, उपसंचालक कृषि अमित मोहंती, सभी अनुविभागीय अधिकारी कृषि, वर्कलोड एवं नजूल राजस्व निरीक्षक संतोष धुर्वे और लिपिक निखिल उपस्थित रहे।

खौफनाक हादसा: नशे की हालत में युवक ने खुद को किया आग के हवाले, मौके पर मचा कोहराम

सूरजपुर नगर के मानपुर गोंड़पारा में शुक्रवार शाम एक युवक ने नशे की हालत में आग लगाकर अपनी जान दे दी। घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। अत्यधिक शराब पी रखी थी जानकारी के अनुसार मानपुर गोंड़पारा निवासी आगरसाय गोंड़ (35 वर्ष) शुक्रवार शाम अपने घर पर परिवार के साथ था। स्वजनों के मुताबिक उसने अत्यधिक शराब पी रखी थी। उसने अपने छोटे बेटे टुकटुक से बाइक के लिए पेट्रोल मंगवाया और नशे की हालत में स्वयं के ऊपर पेट्रोल उड़ेल कर आग लगा ली। इससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना के वास्तविक कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है। स्वजनों का कहना है कि युवक नशे में था और इसी दौरान उसने यह कदम उठा लिया। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और शोक का माहौल व्याप्त है। सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है  

टेस्ट टीम ऑफ द ईयर 2025 में बड़ा उलटफेर: जडेजा-सिराज को मिली जगह, बुमराह बाहर, कप्तानी किसके हाथ?

नई दिल्ली  प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने साल 2025 के लिए अपनी पसंदीदा टेस्ट इलेवन का चयन किया है। उन्होंने इसे टेस्ट टीम ऑफ द ईयर नाम दिया है। हर्षा भोगले ने अपनी टीम में इस साल बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को शामिल किया है। उन्होंने 4 भारतीय खिलाड़ियों को भी जगह दी है। पैट कंमिंस को टीम का कप्तान बनाया है। खास बात यह है कि इस टीम में मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया है, लेकिन जसप्रीत बुमराह के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने अपनी टीम में ओपनर के तौर पर केएल राहुल और ट्रेविस हेड को चुना। तीसरे नंबर पर गिल, चौथे पर जो रूट, पांचवें पर स्टीव स्मिथ, छठे पर रवींद्र जडेजा और विकेटकीपिंग के लिए एलेक्स कैरी को रखा। बॉलिंग लाइनअप में मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस, मोहम्मद सिराज और साइमन हार्मर शामिल हैं। हर्षा भोगले ने अपनी टीम में पहले सलामी बल्लेबाज के रूप में लोकेश राहुल का चयन किया है। राहुल के लिए टेस्ट क्रिकेट में यह साल शानदार बीता है। वे इस साल टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं। हर्षा ने केएल राहुल के धैर्य और नितरंतरा की प्रशंसा की। राहुल के बल्ले से इस साल टेस्ट में तीन शतकों की मदद से 813 रन निकले हैं। हर्षा ने दूसरे सलामी बल्लेबाज के रूप में ट्रेविस हेड को जगह दी है। उनका मानना है कि ट्रेविस हेड में मैच जिताऊ पारी खेलने का हुनर है। वे अक्सर इंपैक्ट प्लेयर की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मध्य क्रम में शुभमन गिल, जो रूट और स्टीव स्मिथ के रूप में तीन मजबूत बल्लेबाजों को शामिल किया है। उन्होंने नंबर तीन के लिए शुभमन गिल को चुना है। शुभमन गिल 2025 में टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। गिल ने इस साल 9 टेस्ट मैचों की 16 पारियों में 5 शतक और 1 अर्धशतक के साथ 983 रन बनाए हैं। 4 पर बल्लेबाजी करने के लिए भोगले ने दुनिया के नंबर वन टेस्ट बल्लेबाज जो रूट को चुना है। वे इस साल सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शुभमन गिल और लोकेश राहुल के बाद तीसरे नंबर पर हैं। हर्षा ने अपनी टीम के बल्लेबाजी क्रम को और मजबूत करते हुए 5वें नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज स्टीव स्मिथ को जगह दी है। उन्होंने विकेट कीपर बल्लेबाज के रूप में ऋषभ पंत की जगह एलेक्स कैरी को शामिल किया है। उनका मानना है कि कैरी एक शानदार विकेटकीपर हैं और उन्होंने इस साल बल्लेबाजी भी बेहतरीन की है। स्पिन गेंदबाजी के लिए हर्षा ने रवींद्र जडेजा और साइमन हार्मर को टीम में रखा है। तेज गेंदबाजी क्रम में उन्होंने मिचेल स्टार्क, मोहम्मद सिराज और पैट कमिंस को शामिल किया है। स्टार्क साल 2025 में शानदार फॉर्म में रहे हैं और इस साल टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक (55) विकेट हासिल किए हैं। सिराज ने भी इस साल शानदार गेंदबाजी की है और 43 विकेटों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। हर्षा ने पैट कमिंस को साल 2025 की टेस्ट टीम का कप्तान बनाया है। उन्होंने कमिंस की सधी हुई गेंदबाजी (16.53 की औसत से 26 विकेट) और प्रभावशाली कप्तानी के लिए टीम में चयन किया है। हर्षा द्वारा चुनी गई टीम इस प्रकार है- केएल राहुल, ट्रेविस हेड, शुभमन गिल, स्टीव स्मिथ, जो रूट, रवींद्र जाडेजा, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस (कप्तान), मोहम्मद सिराज, साइमन हार्मर। हर्षा भोलगे द्वारा चुनी गई इस प्लेइंग इलेवन को लेकर फैंस दो समूहों में बंट गए हैं। एक तरफ जहां कई लोग टीम की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। फैंस में विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप ऋषभ पंत की जगह एलेक्स कैरी को चुने जाने को लेकर काफी असहमति देखी गई। हालांकि, टीम का कप्तान पैट कंमिंस को बनाए जाने को लेकर फैंस में आम सहमति भी देखी जा रही है। हर्षा ने अपने वीडियो में इस साल शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के रूप में न्यूजीलैंड के गेंदबाज जेकब डफी का विशेष उल्लेख किया है। डफी के लिए यह साल ब्रेकआउट ऑफ द ईयर के रूप में गुजरा है। उन्होंने 2025 में तीनों फॉर्मेट में सर्वाधिक 81 विकेट हासिल किए हैं। डफी के अलावा हर्षा ने जिम्बाब्वे के गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी और टेम्बा बवुमा का विशेष उल्लेख किया है। हर्षा ने साल 2025 का टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड मिचेल स्टार्क को दिया है। उन्होंने अपनी टीम में भारत के दिग्गज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का किसी भी तरह से जिक्र नहीं किया है।

जबलपुर–दमोह फोरलेन परियोजना का सर्वे पूरा, 150 फीट चौड़ी सड़क से बदलेगा क्षेत्र का ट्रैफिक नक्शा

जबलपुर जबलपुर से दमोह के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबी सड़क को दो लेन से फोर लेन करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस मार्ग का सर्वे कर चुका है। 150 फीट सड़क की चौड़ाई तय की गई है, जिसमें फोरलेन बनाया जाना है। इस सड़क को तीन फेज में बनाया जाएगा। अभी दो फेज के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। जहां से प्रक्रिया अंतिम दौर में आ गई है। जल्द ही इसकी निविदा जारी कर कार्य प्रारंभ होगा। पहले जबलपुर से कटंगी और जबेरा से दमोह के बीच सड़क का निर्माण होगा। इसके अलावा कटंगी से जबेरा तक का हिस्से में अभयारण्य की जमीन होने की वजह से इसका सर्वे किया जा रहा है। इसमें वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी स्वीकृति लेनी होगी। बता दें कि सड़क की चौडाई को लेकर कुछ परेशानी आ रही थी जिस वजह से प्रस्ताव को दोबारा भेजा गया है। अभी दमोह से जबेरा के बीच 350 करोड़ रुपये की लागत से बनाने की प्रकिया होगी। यह पैकेज 43 किलोमीटर लंबा होगा। वहीं दूसरा पैकेज 24 किलोमीटर लंबी सड़क जबेरा से कटंगी के बीच बनेगी।

विवाह बना वोट का संकट! पता बदलते ही 12 लाख महिलाएं वोटर लिस्ट से बाहर, रायपुर सबसे ज्यादा प्रभावित

रायपुर शादी के बाद घर बदला, नाम बदला, पहचान बदली… और नतीजा यह कि मतदाता सूची से नाम ही गायब हो गया। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने लोकतंत्र की जड़ में बैठे सबसे बड़े वर्ग महिलाओं को ही बाहर कर दिया है। प्रारंभिक सूची में 27 लाख से अधिक नाम कटे, जिनमें 12 लाख से ज्यादा महिलाएं हैं। अधिकारियों की भाषा में यह शिफ्टिंग है, लेकिन महिलाओं के लिए यह लोकतांत्रिक बेदखली बन गई। शहर में इसकी संख्या एक लाख 20 हजार के आसपास है। प्रदेश में महिलाओं के नाम कटने की सबसे बड़ी वजह शादी बताई जा रही है। मायके से ससुराल गई महिला ने वोटर आइडी में पता बदला, आधार कार्ड लगाया, फिर भी 2003 की सूची से नाम नहीं मिलने पर उसका मताधिकार छीन लिया गया। गुढ़ियारी की एक महिला ने एसआइआर फॉर्म में पति का नाम रिश्तेदार के रूप में भरा, लेकिन 2003 की सूची में पति की जानकारी डालते ही सिस्टम ने एंट्री खारिज कर दी। नतीजा नाम कट गया। एक नाम, दो महिलाएं, वोट अधर में बीएलओ ने बताया कि कई मामलों में महिला और उसके पति का नाम किसी दूसरी महिला और उसके पति से हू-ब-हू मिल गया। नाम और पति का नाम समान होने पर सिस्टम ने दोनों के नाम होल्ड कर दिए। अब इन महिलाओं को दावा-आपत्ति में अपनी पहचान साबित करनी होगी। गलती फॉर्म की, सजा महिलाओं को 19 लाख से अधिक नाम ऐसे कटे, जिनमें फॉर्म भरने की गलती, पुराने दस्तावेज और बीएलओ की लापरवाही सामने आई। कहीं आधार नया था, तो वोटर कार्ड पुराना। कहीं एड्रेस बदला था, तो प्रमाण नहीं मिला। इसका सीधा असर महिलाओं पर पड़ा, क्योंकि ज्यादातर ने शादी के बाद पता बदला था। एक मकान, 150 वोटर और असली महिलाएं बाहर जहां असली महिला मतदाताओं के नाम कट रहे हैं। वहीं बीरगांव के गाजी नगर में एक ही मकान में 150 वोटर दर्ज मिले। कई मकानों में 40-50 नाम पाए गए। गुढ़ियारी के महावीर स्कूल और सियान सदन में एसआइआर के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं नाम जुड़वाने पहुंचीं। कई महिलाओं को पहली बार पता चला कि उनका नाम वोटर लिस्ट में है ही नहीं।   अब फिर से साबित करनी होगी पहचान रायपुर जिले के उप निर्वाचन अधिकारी नवीन ठाकुर का कहना है कि अधिकतर नाम दोबारा जुड़ जाएंगे। लेकिन इसके लिए महिलाओं को फिर से आवेदन, दस्तावेज और दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे। लोकतंत्र में बराबरी की बात करने वाले सिस्टम में आज महिला मतदाता को यह साबित करना पड़ रहा है कि वह मौजूद हैं।