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मोहम्मद शमी से SIR फॉर्म भरने में चूक, चुनाव आयोग ने जांच के लिए कोलकाता बुलाया

नई दिल्ली क्रिकेटर मोहम्मद शमी को सोमवार को कोलकाता के जादवपुर में स्थित एक स्कूल में SIR सत्यापन सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया था, लेकिन वह राजकोट में विजय हजारे ट्रॉफी में बंगाल का प्रतिनिधित्व करने के कारण उपस्थित नहीं हो सके। अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। मगर, शमी ने निर्वाचन आयोग से नई तारीखों के लिए अपील की, जिसे स्वीकार करते हुए उनकी सुनवाई अब 9 जनवरी से 11 जनवरी के बीच दोबारा होगी।   मोहम्मद शमी कोलकाता नगर निगम के वार्ड 93 के मतदाता हैं, जो रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र में आता है। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के एक अफसर ने कहा, 'शमी और उनके भाई की ओर से भरे गए नामांकन फॉर्म में गलती थी, जिसके कारण उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया था।' उत्तर प्रदेश के निवासी शमी कई वर्षों से अपने क्रिकेट करियर के चलते कोलकाता में रह रहे हैं। वह बहुत कम उम्र में इस शहर में रहने लगे थे। बाद में उन्होंने बंगाल के पूर्व रणजी कप्तान समबारन बनर्जी के मार्गदर्शन में राज्य की अंडर-22 टीम में जगह बनाई थी। SIR को लेकर अदालत जाएंगी ममता बनर्जी इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य में SIR के दौरान किए गए अमानवीय आचरण के खिलाफ अदालत का रुख करेंगी। दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से जुड़े भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हुई है। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने कहा कि वह अदालत जा सकती हैं लेकिन उन घुसपैठियों की रक्षा नहीं कर पाएंगी जो टीएमसी का मुख्य वोट बैंक हैं। बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास हो रहा है।  

आठ भ्रष्ट अधिकारियों की 4.14 करोड़ की संपत्ति होगी राजसात

पटना. राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। ब्यूरो ने आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लगभग 4.14 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों को राजसात करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को बताया कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राजसात करने की प्रक्रिया लगातार तेज की जा रही है। वर्ष 2025 में आठ मामलों में प्रस्ताव भेजे गए हैं, और प्रस्ताव पारित होते ही कार्रवाई की जाएगी। 8 लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा ब्यूरो के अनुसार, जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक अधीक्षण अभियंता, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), एक टैक्स दारोगा और एक सीडीपीओ शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज किए गए थे। इनमें लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ 2012 में मामला दर्ज हुआ था, जिनकी 88.25 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। हथुआ (गोपालगंज) के तत्कालीन एसडीओ विजय प्रताप सिंह के खिलाफ 2015 में तीन भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए थे, जिनकी 62.35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव में तत्कालीन अधिकारियों के नाम पटना ग्रामीण की तत्कालीन एसडीपीओ फूलपरी देवी की 12.76 लाख रुपए की संपत्ति, मोतिहारी नगर परिषद के तत्कालीन टैक्स दरोगा अजय कुमार गुप्ता की 34.62 लाख रुपए की संपत्ति और समस्तीपुर की जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय की 3.71 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी की 90.75 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है, जिन्हें पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। पश्चिम चंपारण की राज मारहिया पकड़ी पंचायत, लौरिया के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव की 1.70 करोड़ रुपए की संपत्ति राजसात करने की अनुशंसा की गई है। दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के खिलाफ 2019 में मामला दर्ज हुआ था, जिनकी 41.12 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है।

SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, यूपी में 2.89 करोड़ नाम कटे, छंटनी बिहार से भी ज्यादा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. इस ड्राफ्ट में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. आयोग के अनुसार, यह सूची 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत तैयार की गई है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से हुई थी.  यूपी में ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन तीन बार टलने के बाद आजा जारी किया गया. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई है. उन्होंने बताया कि लगभग 18 प्रतिशत लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किए. मंगलवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पहले कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। जिन 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं उनमें 46.23 लाख मृत, 2.17 करोड़ स्थानांतरित और 25.47 लाख डुप्लीकेट, 79.52 लाख वोटर शामिल हैं। प्रतिशत की बात करें तो करीब 18 फीसदी वोटरों के नाम इस लिस्ट कट गए हैं। उन्होंने बताया, सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया है। मंगलवार से छह फरवरी तक मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां की जाएंगी। वहीं मंगलवार से लेकर 27 फरवरी तक इन दावे व आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन छह मार्च को किया जाएगा। UP SIR में नाम न मिलने पर करें ये काम ड्राफ्ट सूची में अगर किसी मतदाता का नाम नहीं है तो वह 6 फरवरी तक अपना दावा और आपत्ति दर्ज करवा सकता है. नए व नाम कटने वाले मतदाता को फॉर्म-6 भरना होगा, गलत नाम वालों के लिए फॉर्म-7, संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरना होगा. इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों mod में जमा किया जा सकता है. इसके साथ जन्म प्रमाण पत्र, पते और पहचान प्रमाण पत्र जरुर आवश्यक होगा. अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क करें. जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं वह 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. सबसे बड़ा वोटर लिस्ट सफाई अभियान नवदीप रिणवा के मुताबिक वोटर लिस्ट का यह अब तक सबसे बड़ा सफाई अभियान है. अब तक राज्य में 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे, SIR प्रक्रिया के बाद 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.सबसे ज्यादा नाम ट्रासफर से कटे हैं इनकी संख्या 1.26 करोड़ है. 46 लाख मृतक, डुप्लीकेट 23.70 लाख और जो पते पर नहीं मिले उनकी संख्या 83.73 लाख है, इसके अलावा भी अन्य श्रेणी में शमिल हैं. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटे मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया, सबसे ज्यादा 12 लाख मतदाताओं के नाम लखनऊ में कटेंगे। वहीं प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में नौ लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख, बरेली में 7.14 लाख, मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने बताया कि 12.55 करोड़ में से 91 प्रतिशत की मैपिंग हो गई है। अब 1.04 करोड़ को नोटिस जाएगी। यह 8 प्रतिशत हैं। सीईओ ने कहा कि फ़ार्म 6 भरें नए मतदाता बनने को। करेक्शन व शिफ्ट होने वाले फॉर्म 8 भरें । अगर किसी सदस्य जो अब जीवित नहीं है या दूसरी जगह चले गए हैं तो नाम हटाने को फॉर्म 7 भरें। अभी तक नए मतदाता बनने को 15.78 करोड़ ने फॉर्म भरा है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में करीब 15 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से 12.55 करोड़ मतदाताओं (81.30%) ने खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए गणना प्रपत्र (enumeration form) पर हस्ताक्षर कर उसे जमा किया. उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए, उनके पीछे कई कारण रहे-  46.23 लाख मतदाता (2.99 प्रतिशत)) मृत पाए गए. – 2.17 करोड़ मतदाता या अनुपस्थित (14.06 प्रतिशत)) मिले या वो शिफ्ट कर गए. – 25.47 लाख मतदाता (1.65 प्रतिशत) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए. इन्हीं कारणों से 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं. फिलहाल यूपी में ड्राफ्ट सूची के अनुसार मतदाताओं की संख्या करीब 12 करोड़ रह गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार अब एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे, जबकि पहले यह संख्या करीब 1500 थी. इसी वजह से नए पोलिंग स्टेशन भी बनाए गए, जिसमें अतिरिक्त समय लगा. निर्वाचन आयोग ने 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया है. जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे इस अवधि में आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा, और 6 मार्च 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी. चुनाव आयोग ने 18 साल पूरे कर चुके सभी नए मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांचें. नाम न होने पर फॉर्म-6, और नाम या पते में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरने की सुविधा उपलब्ध है

नितिन गडकरी की बड़ी घोषणा, MP में 60 हजार करोड़ की परियोजनाएं, भोपाल से जबलपुर तक ग्रीन फील्ड हाईवे

भोपाल भोपाल से जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनाया जाएगा, जिसकी लागत 15 हजार करोड़ रुपए होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर अप्रैल-मई 2026 से हाईवे निर्माण शुरू हो जाएगा। लखनादौन से रायपुर के बीच 220 किमी लंबा 4 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा, यह रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर से जुड़ेगा। मध्यप्रदेश सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ेगा। इंदौर से भोपाल 160 किमी ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी जा रही है, जिसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए होगी। मध्यप्रदेश के लिए 4250 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 174 किमी लंबी 9 सड़क परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही। कार्यक्रम में गडकरी ने मध्यप्रदेश के लिए 60 हजार करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की घोषणाएं भी की। इनके पूरे होने से जहां कई क्षेत्र आपस में जुड़ेंगे, वहीं यात्रा समय में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने महाकौशल सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों के निवासियों की रोड नेटवर्क संबंधी आकांक्षा व अपेक्षा को पूर्ण किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिए प्रदेशवासियों की ओर से गडकरी का आभार माना। सबकी समृद्धि के लिए हमारी सरकार सक्रिय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुगम संपर्क, तेज विकास, बेहतर सुरक्षा और सबकी समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रण को पूरा करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ अद्यतन अधोसंरचना निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय है।

पंजाब के CBSE स्कूलों के प्रिंसीपल्स करेंगे प्रतिष्ठित संस्थानों का शैक्षणिक एक्सपोजर दौरा

लुधियाना. सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) से संबद्ध स्कूलों के प्रिंसीपल्स को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कौशल, अनुभव आधारित शिक्षा और उभरते शैक्षणिक ट्रैंड्स से रू-ब-रू होने का अवसर मिलेगा। इसके लिए सी.बी.एस.ई. देश के चुनिंदा संस्थानों में प्रिंसीपल्स का एक्सपोजर दौरा कराएगा। यह दौरा 22 जनवरी से 30 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा जिसमें भाग लेने के लिए प्रिंसीपल्स को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सी.बी.एस.ई .राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अपने संबद्ध स्कूलों में कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इसी दिशा में बोर्ड ने 2 वर्ष पहले प्रिंसीपल्स के लिए एक्सपोजर विजिट योजना शुरू की थी जिसके तहत समय-समय पर देश के नामचीन संस्थानों का चयन किया जाता है। देशभर से चुने गए ये 5 संस्थान इस बार बोर्ड द्वारा देशभर से 5 प्रमुख संस्थानों को चुना गया है। चयनित संस्थानों में मुमबई की एटलस स्किल टैक यूनिवर्सिटी, पंजाब की लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी, असम स्थित टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, झारखंड का बिरला इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी और पश्चिम बंगाल स्थित फुटवियर डिजाइन एंड डिवैल्पमैंट इंस्टीच्यूट शामिल हैं। इन दौरों के माध्यम से प्रिंसीपल्स को आधुनिक शिक्षा पद्धतियों को समझने और उन्हें अपने स्कूलों में लागू करने का मौका मिलेगा। नई तकनीकों को देखने का अवसर डॉ. सत्वंत कौर भुल्लर, प्रिं. डीएवी स्कूल, पक्खोवाल रोड ने कहा कि “सी.बी.एस.ई. की यह योजना बेहद सराहनीय है, क्योंकि इससे प्रिंसीपल्स को नई और उभरती तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित संस्थानों का यह दौरा न केवल शैक्षणिक ज्ञान को बढ़ाएगा बल्कि स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के नए आयाम स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।”

जयपुर मैराथन की तैयारियां तेज, कैलेंडर जारी; ड्रीम रन में उमड़ेगा एक लाख का सैलाब

जयपुर जयपुर गुलाबी नगर एक बार फिर फिटनेस, स्वास्थ्य और सामूहिक ऊर्जा के उत्सव के लिए तैयार है। जयपुर मैराथन 2026 के 17वें संस्करण का आधिकारिक इवेंट कैलेंडर लॉन्च कर दिया गया है। इस आयोजन को राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान खेल परिषद और राजस्थान युवा बोर्ड का सहयोग प्राप्त है। कैलेंडर लॉन्च कार्यक्रम में मैराथन से पहले आयोजित होने वाली एक माह की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी रहे। उनके साथ संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा, एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा, एयू स्मॉल फाइनेंस से धर्मेंद्र सिंह शेखावत सहित आयोजन से जुड़े कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि जयपुर मैराथन अब ऐसा आयोजन बन चुका है, जिसका शहर हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करता है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऐसा मंच है जो पूरे शहर को स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूक करता है। जयपुर मैराथन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। चार अलग-अलग जोन में बांटा गया शहर संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य मैराथन को जयपुर की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है, ताकि फिटनेस आदत बने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिले। प्रतिभागियों की बेहतर तैयारी के लिए जयपुर रनर्स क्लब द्वारा शहर को चार अलग-अलग ज़ोन में विभाजित किया गया है, जहां प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। हर वर्ग के लोगों को एक मंच पर जोड़ रही मैराथन वहीं एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा ने कहा कि जयपुर मैराथन 2026 अब केवल एक दिन की दौड़ तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक समग्र फिटनेस मूवमेंट का रूप ले चुकी है, जो युवाओं, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, रनर्स और आम नागरिकों को एक मंच पर जोड़ रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। खासतौर पर ड्रीम रन में लगभग एक लाख लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी का अनुमान लगाया जा रहा है।

BSF की नई रणनीति, भारत-बांग्लादेश सीमा पर 12 फीट ऊंची स्मार्ट फेंसिंग का निर्माण

सिलीगुड़ी पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी अशांति के बीच भारत–बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट है। इसी कड़ी में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र में सीमा सुरक्षा को मजबूत करते हुए लगभग 75 प्रतिशत इलाके में नई डिजाइन की सीमा बाड़ (NDF) स्थापित कर दी है। ट्रिब्यून ने बीएसएफ अधिकारियों के हवाले से लिखा कि 12 फीट ऊंची नई डिजाइन फेंसिंग को विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में लगाया गया है। इस बाड़ की खासियत यह है कि इसे काटने में कई मिनट लगते हैं और इसकी ऊंचाई व संरचना के कारण इसे पार करना भी बेहद मुश्किल है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था घुसपैठ की कोशिशों और मवेशी तस्करी जैसी घटनाओं में प्रभावी कमी लाने में मदद करेगी। एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि चिकन नेक क्षेत्र भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की लाइफलाइन है, क्योंकि यही गलियारा शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। इसी कारण यहां तकनीक और मानव संसाधन- दोनों के जरिए सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। नई फेंसिंग के साथ-साथ सीमा पर पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाए गए हैं, जो रियल-टाइम लाइव फीड प्रदान करते हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं। बीएसएफ इसे ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एरिया डोमिनेशन प्लान में भी अहम बदलाव किए गए हैं। नए प्लान के तहत बीएसएफ उन इलाकों को निशाना बना रही है, जहां से मवेशियों को इकट्ठा कर सीमा के पास तस्करी के लिए लाया जाता है। इसके लिए बीएसएफ की टीमें आवश्यकता पड़ने पर भारतीय क्षेत्र के भीतर कई किलोमीटर तक जाकर छापेमारी करती हैं, ताकि तस्करी की कड़ी को जड़ से तोड़ा जा सके। सीमा पर अपराध रोकने के लिए बीएसएफ ने एक समुदाय-केंद्रित पहल भी शुरू की है। इसके तहत संदिग्ध तस्करों और ‘टाउट्स’ के घर जाकर उनके परिवारों को अवैध गतिविधियों के गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे विश्वास-निर्माण उपायों से पिछले एक वर्ष में मवेशी तस्करी और मानव तस्करी की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई है। हाल के महीनों में बीएसएफ ने अनजाने में भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले कई बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा और पूरा बैकग्राउंड जांचने के बाद उन्हें बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को सौंपा। इस प्रक्रिया में उनके फिंगरप्रिंट और व्यक्तिगत विवरण साझा किए गए, ताकि किसी भी आपराधिक या राष्ट्र-विरोधी रिकॉर्ड की पुष्टि की जा सके। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक बीएसएफ ने करीब 8.5 करोड़ रुपये मूल्य के मवेशी, सोना, चांदी, वन्यजीव उत्पाद, हथियार, गोला-बारूद और अन्य तस्करी के सामान जब्त किए हैं। इसी अवधि में 440 बांग्लादेशी (जिनमें तस्कर और टाउट्स शामिल हैं), 152 भारतीय, तथा 11 अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 187 बांग्लादेशी नागरिकों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद BGB को सौंप दिया गया। बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी फेंसिंग कवरेज बढ़ाने, तकनीकी निगरानी को और सशक्त करने तथा स्थानीय समुदाय के सहयोग से सीमा पर अपराधों के खिलाफ अभियान जारी रखा जाएगा, ताकि चिकन नेक क्षेत्र की सुरक्षा किसी भी सूरत में कमजोर न पड़े।

कहानी सुनते ही 17 एक्टर्स ने कहा था ‘ना’, क्लाइमैक्स ने बदली किस्मत, बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका

मुंबई अगर आप सीरियल किलिंग और साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो यहां ऐसी ही एक फिल्म के बारे में बता रहे हैं, जो साल 2018 में आई थी। इस फिल्म को 17 एक्टर्स ने ठुकरा दिया था और 21 प्रोड्यूसर्स ने हाथ खींच लिए थे। इस फिल्म को उन्होंने सबसे रिस्की बताया था और कोई भी पैसे लगाने को तैयार नहीं था। इसका नाम 'रत्सासन' है। बाद में यह इतनी बड़ी हिट हुई कि साल 2022 में अक्षय कुमार ने इसका हिंदी रीमेक किया था। जानते हैं कि यह कौन सी फिल्म है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म का बजट 7-15 करोड़ रुपये था, और इसने तब 20 करोड़ के आसपास कमाई की थी। 'रतसासन' को राम कुमार ने डायरेक्ट किया था। फिल्म में विष्णु विशाल और अमला पॉल लीड रोल में थीं। वहीं फिल्म में काली वेंकट, अभिरामी, राधा रवि, सुजैन जॉर्ज और विनोदिनी वैद्यनाथन भी नजर आए थे। विष्णु विशाल ने फिल्म में एक ऐसे पुलिस अफसर का रोल प्ले किया था, जो फिल्म डायरेक्टर बनना चाहता है, पर पिता की मौत के बाद पुलिस लाइन में आ जाता है। वह हर किसी को अपनी लिखी कहानी सुनाने लगता है, पर तब पासा पलट जाता है, जब एक सीरियल किलर का आतंक फैलता है। 'रतसासन' 17 एक्टर्स और 21 प्रोड्यूसर्स ने की थी रिजेक्ट इस फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसका बैकग्राउंड स्कोर भी दमदार था और हिट रहा था। आज भी इसे सुनने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। विष्णु विशाल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'रतसासन' को 17 एक्टर्स ने रिजेक्ट कर दिया था। एक्टर के मुताबिक, उन सभी ने फिल्म की कहानी तो सुनी पर इसे करने से मना कर दिया। इसी तरह 21 प्रोड्यूसर्स ने भी 'रतसासन' की कहानी सुनकर फिल्म छोड़ दी थी। आखिरकार एक्सिस फिल्म फैक्ट्री के मालिक दिल्ली बाबू ने आगे आकर 'रतसासन' को प्रोड्यूस करने का फैसला किया था। 'रतसासन' की कहानी, सीरियल किलर और निर्वस्त्र लाशें 'रतसासन' की कहानी एक सीरियल किलर के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया जाता है कि एक अनजान शख्स स्कूल जाने वाली लड़कियों को गिफ्ट देकर झांसे में फंसाता है और फिर उनका अपहरण करने के बाद तड़पा-तड़पाकर मार डालता है। इसके बाद लड़कियों की लाश को निर्वस्त्र करके पॉलीथीन में बांधकर फेंक देता है। इस सीरियल किलर को पकड़ने में पुलिस के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन विष्णु विशाल का किरदार अपने जासूसी दिमाग और कहानी पिरोने के अंदाज का इस्तेमाल कर उस सीरियल किलर को पकड़ने में कामयाब हो जाता है। पर आखिर में जो ट्विस्ट आता है, वो दिमाग के पुर्जे खोल देता है। रियल लाइफ साइको किलर पर बनी थी 'रतसासन' 'रतसासन' को जियो हॉटस्टार पर देखा जा सकता है। मूल रूप से तमिल भाषा में बनी इस फिल्म को हिंदी और तेलुगू भाषा में भी देखा जा सकता है। फिल्म के डायरेक्टर राम कुमार ने एक बार 'द न्यूज मिनट' को दिए इंटरव्यू में बताया था कि 'रतसासन' की कहानी सच्ची घटना पर आधारित है। उन्होंने बताया था, 'मैंने अखबार में दो लोगों के बारे में एक दिलचस्प आर्टिकल पढ़ा था। वो भारतीय नहीं थे। एक साइको किलर था और दूसरी एक महिला। इससे मुझे कहानी का बेसिक स्ट्रक्चर मिला। उस मेन कैरेक्टर ने मेरे मन में एक कहानी का विचार जगा दिया। मेरी कहानी का किरदार एक असल व्यक्ति पर आधारित है, जो एक साइको किलर है।

राजस्थान में शीतलहर और कोहरे का असर, 20 जिलों में स्कूलों की छुट्टी

जयपुर राजस्थान में कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश में घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते शीतलहर का असर तेज हो गया है। हालात को देखते हुए राज्य के 20 जिलों में कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को 18 जिलों में कोहरा और शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की है। राजधानी जयपुर में मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे सीजन में पहली बार विजिबिलिटी शून्य (0 मीटर) दर्ज की गई। इसके साथ ही शहर की हवा की गुणवत्ता भी खराब रही और अधिकांश इलाकों में AQI 200 से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। जयपुर के अलावा सीमावर्ती जिलों, अजमेर और कोटा सहित कई क्षेत्रों में भी घने कोहरे का असर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 7 जनवरी तक कोहरे और 9 जनवरी तक शीतलहर का प्रभाव बना रह सकता है। इस दौरान तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की संभावना है। नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश में ठंड लगातार बढ़ रही है। बीते पांच दिनों में तीन दिन माउंट आबू और शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 1 डिग्री या उससे नीचे दर्ज किया गया। घने कोहरे और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह भी शीतलहर के चलते कड़ाके की ठंड महसूस की गई। इससे पहले सोमवार को जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा सहित कई जिलों में दोपहर तक कोहरा छाया रहा। प्रदेश के 19 शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, जबकि गंगानगर सबसे ठंडा जिला रहा। मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

स्कूल में पीटी करते समय गिरी छठी की छात्रा, 13 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत की आशंका

धार   धार जिले के बदनावर इलाके में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसका दुष्प्रभाव बच्चों पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में आज सुबह यहां नवोदय विद्यालय मुलथान में छात्रा की स्कूल के मैदान में खड़े-खड़े हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। बच्ची का नाम निशा पिता राहुल सूर्यवंशी निवासी ग्राम मुलथान बताया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि, जिस छात्रा की साइलेंट अटैक से मौत हुई है, उसकी उम्र महज 13 साल थी और वो स्कूल की 6वीं कक्षा में पढ़ती थी। मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा रोजाना की तरह सुबह पीटी के लिए मैदान में अन्य बच्चों के साथ गई थी। तभी 7:15 बजे वो अचानक गिरी तो बच्चों के साथ-साथ मैदान में मौजूद शिक्षकों ने उसे संभाला लेकिन बच्ची में कोई हलचल मेहसूस न होने से उसे तत्काल बदनावर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। निशा रोज की तरह सुबह पीटी के लिए बाकी बच्चों के साथ ग्राउंड पर गई थी। सुबह करीब सवा 7 बजे वह पीटी करते-करते अचानक गिर पड़ी। ग्राउंड पर मौजूद बच्चों और टीचर्स ने उसे संभाला। शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसे फौरन सिविल अस्पताल, बदनावर ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने चेकअप के बाद निशा को मृत घोषित कर दिया। तहसीलदार सुरेश नागर भी सिविल अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। अस्पताल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया।   पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज बाद में अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, अभी मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन कड़ाके की ठंड में अल सुबह खुले मैदान में खेलने से उसकी मौत होने का शक है। इस असामयिक घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। फिलहाल, स्कूल में शोक की लहर है। बच्चों को लेकर माता-पिता रखें ये ध्यान ठंड में बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों की तरह बच्चों को भी गर्म कपड़ों में रखें। घर के अंदर खेलने या हल्की-फुल्की कसरत (जैसे योग) कराएं। भरपूर तरल पदार्थ (गुनगुना पानी, सूप) पिलाएं। पौष्टिक आहार दें और ज्यादा ठंड में बाहर निकलने से रोकें, ताकि रक्त वाहिकाएं सिकुड़ें नहीं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, खासकर अगर बच्चे को पहले से कोई हृदय संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय -गर्म और परतदार कपड़े पहने : बच्चे को हमेशा गर्म, ऊनी कपड़े, मोज़े, दस्ताने और टोपी पहनाएं, खासकर बाहर जाते समय। -घर के अंदर रखें : बहुत ज़्यादा ठंड या कोहरे के दौरान बच्चों को घर के अंदर ही खेलने दें। बाहर की गतिविधियां (जैसे मॉर्निंग वॉक) बहुत अधिक ठंड में टालें। -हाइड्रेटेड रखें : ठंड में भी शरीर को पानी की ज़रूरत होती है। उन्हें गुनगुना पानी, सूप, हर्बल चाय पिलाएं। -पौष्टिक आहार : फल, सब्जियां, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन दें। तैलीये और ज़्यादा नमक/चीनी वाले खाने से बचाएं। -शारीरिक गतिविधि (घर के अंदर) : हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग या योग कराएं, जो घर के अंदर किए जा सकें। -तनाव से बचाएं : बच्चों को तनावमुक्त रखें। उनका मनपसंद काम करने दें और सकारात्मक माहौल दें। -बीमारियों से बचाव : सर्दी-खांसी-जुकाम होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. फ्लू और अन्य संक्रमणों से बचाने के लिए टीका लगवाएं। किन लक्षणों पर ध्यान दें (अगर बच्चा बीमार हो) -सांस लेने में तकलीफ -सीने में दर्द या बेचैनी -बहुत ज़्यादा थकान -होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना -तेज़ धड़कन नोट- अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। माता-पिता के लिए अतिरिक्त सलाह -बच्चों को समय पर दवा दें (यदि कोई दवा चल रही है)। -ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं, खासकर अगर जोखिम हो।