samacharsecretary.com

‘खेती की बात खेत पर’ थीम के साथ हुई ‘किसान पाठशाला-8.0’

12 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी से किया था शुभारंभ 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को योजनाओं, तकनीक, नवाचार आदि से किया गया प्रशिक्षित लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसान पाठशाला लगाकर किसानों को आधुनिक खेती, सरकार की योजनाओं व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष भी किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘खेती की बात खेत पर’ थीम के साथ किसान पाठशाला 8.0 रबीः (2025-26) हुई। इसमें 20.15 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर, बाराबंकी से किसान पाठशाला का शुभारंभ किया था। 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को नवाचार का दिया गया प्रशिक्षण कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी सीजन में कृषि विज्ञान केंद्र, पैक्स सोसाइटी, ग्राम पंचायत सचिवालय, प्रगतिशील किसानों के साथ ही प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के कुल 20.15 लाख किसानों ने हिस्सा लिया। इसमें 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं के साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 2017-18 से अब तक दो करोड़ से अधिक किसान किए जा चुके प्रशिक्षित कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी भी दी जाती है।

कांग्रेस ने तोड़ी चुप्पी: भाजपा से गठबंधन पर स्थिति साफ, शिंदे गुट को घेरने की तैयारी

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव लड़ने के दावों का कांग्रेस ने खंडन किया है। खबरें थीं कि महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव में दोनों दल गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं। साथ ही इसके जरिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को साइडलाइन कर दिया है। इसपर शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई थी। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाए कि शिवसेना नेतृत्व ने कभी गठबंधन की बात पर जवाब नहीं दिया। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने एक्स पर बताया है कि भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन नहीं किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के भ्रष्टाचार के खिलाफ कई दल एकजुट हुए हैं। कहा जा रहा था कि भाजपा और कांग्रेस ने अंबरनाथ नगर परिषद के लिए हाथ मिला लिया है। उन्होंने लिखा, 'अंबरनाथ में पार्टी से संबद्धता और चिह्नों को दरकिनार करते हुए अलग-अलग पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अंबरनाथ डेवलपमेंट फ्रंट बनाया है। स्थानीय स्तर पर शिंदे सेना के भ्रष्टाचार के खिलाफ साथ आए हैं। इसमें निर्दलीय भी शामिल हैं। कांग्रेस और भाजपा के साथ आने की खबरें गलत हैं। इस बात का ध्यान रखें।' शिवसेना भड़की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना इस गठबंधन से खासी नाराज नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिंदे सेना के विधायक बालाजी किनिकर ने कहा, 'जो पार्टी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है, अब वह कांग्रेस के साथ शासन करेगी। यह कुछ नहीं, बल्कि शिवसेना की पीठ में छुरा मारने जैसा है।' भाजपा नेता गुलाबराव करनजुले पाटिल ने कहा कि शिवसेना के साथ गठबंधन अपवित्र होता। उन्होंने शिवसेना पर बीते 25 सालों से भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए हैं। पाटिल का दावा है कि भाजपा ने अमंबरनाथ में शिवसेना से गठबंधन के कई प्रयास किए, लेकिन उसके नेतृत्व की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिला।  

आतिशी पर सिख भावनाएं आहत करने का आरोप, BJP ने जारी किया वीडियो, कार्रवाई की उठी मांग

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी की सदस्यता रद्द करने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर करने की मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भी लिखा है। इस बारे में दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने बुधवार को मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कल मंगलवार को विधानसभा में सिखों के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी की शहादत पर चर्चा की गई थी, जिसमें विपक्ष की नेता आतिशी ने भाग नहीं लिया, इसके साथ ही वर्मा ने आतिशी पर इस दौरान गुरु तेग बहादुर का अपमान करने का आरोप भी लगाया।   प्रवेश वर्मा ने कहा कि आतिशी द्वारा किए गए अपमान के मुद्दे को सभी भाजपा विधायकों ने उठाया, जिसके बाद स्पीकर ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि सभी भाजपा विधायकों ने स्पीकर को पत्र देकर आतिशी की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की है और हमें उम्मीद है कि उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने इसे टाइम बाउंड करने की बात भी कही। प्रवेश वर्मा बोले- हम गुरुजी के अपमान से आहत मंत्री वर्मा ने कहा कि देश का हर नागरिक गुरु तेग बहादुर जी के हुए अपमान से आहत है और इस बात से हमें भी चोट लगी है। इसके साथ ही वर्मा ने बताया कि कल जो सदन में आतिशी ने कहा है उसकी कॉपी हमने स्पीकर को दे दी है। उधर मंगलवार को आतिशी ने सदन में जो कुछ भी कहा उसका वीडियो दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। कपिल मिश्रा ने शेयर किया विधानसभा में हुई घटना का वीडियो कपिल मिश्रा ने वीडियो को शेयर करते हुए बताया कि 'कल (मंगलवार) जब दिल्ली विधानसभा में हो रहा था गुरुओं का सम्मान, तब नेता विपक्ष आतिशी ने बहुत भद्दी और शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया। खुद सुनिए …क्या ऐसे व्यक्ति को पवित्र सदन में रहने का अधिकार है?'

माननीय मुख्यमंत्री जी ने अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया यह आदेश

माननीय मुख्यमंत्री प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध   लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों/चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप नकल माफियाओं के विरुद्ध अभिसूचना संकलन करते हुए एस.टी.एफ. उ०प्र० को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद हेतु अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के संबंध में अनियमितताओं/धांधली एवं अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएँ प्राप्त हुईं। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा मामले की गोपनीय जाँच के आदेश दिए गए। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्यवाही करते हुए दिनांक 20-04-2025 को एस०टी०एफ० उ०प्र० को उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग प्रयागराज द्वारा दिनांक 16-04-2025 व 17-04-2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों- महबूब अली, बैजनाथ पाल एवं विनय पाल-को परीक्षा में धांधली एवं अवैध धन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उक्त संबंध में एस०टी०एफ० उ०प्र० द्वारा थाना विभूतिखंड, जनपद लखनऊ पर मु.अ.सं. 144/25, धारा 112, 308(5), 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.), 2023, अभियोग पंजीकृत कराया गया। जाँच की निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया गया था चूँकि अभियुक्त महबूब अली निवर्तमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। पूछताछ के दौरान अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसके द्वारा मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए गए थे, जिन्हें उसने कई अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से धन लेकर उपलब्ध कराया। अभियुक्त महबूब अली की स्वीकारोक्ति की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डेटा एनालिसिस से पुष्टि हुई है। जाँच के क्रम में गिरफ्तार अभियुक्तों तथा उनसे संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डाटा विश्लेषण एवं मुखबिर तंत्र से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम एवं मोबाइल नंबर प्रकाश में आए। इस संबंध में आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा माँगा गया। प्राप्त डाटा के मिलान में यह तथ्य सामने आया कि उक्त परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उक्त परीक्षा को निरस्त किए जाने के आदेश दिये गए हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया है कि उपरोक्त परीक्षा का आयोजन शीघ्रातिशीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

जगदलपुर में पुर्नवासितों ने देखा बस्तर का सांस्कृतिक-ऐतिहासिक वैभव

जगदलपुर. हिंसा का अंधेरा छोड़कर शांति और विकास की ‘नुवा बाट’ (नई राह) चुनने वाले पुर्नवासितों के लिए मंगलवार का दिन नई उमंग और सकारात्मक अनुभवों से भरा रहा। जिला प्रशासन की एक सराहनीय पहल के तहत जगदलपुर स्थित पुनर्वास केंद्र में निवासरत पुर्नवासितों को बस्तर के प्रमुख दर्शनीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया गया। इस विशेष भ्रमण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि मुख्यधारा में लौटे इन सदस्यों को भयमुक्त वातावरण का अनुभव कराना, क्षेत्र के विकास कार्यों से जोड़ना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः परिचित कराना रहा। भ्रमण की शुरुआत बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के दर्शन से हुई। मंदिर में पूजा-अर्चना कर सभी ने अपने उज्ज्वल और शांतिपूर्ण भविष्य की कामना की। इसके पश्चात दलपत सागर और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के केंद्र ‘दशहरा पसरा’ का अवलोकन कराया गया, जहाँ उन्हें बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अगले चरण में सदस्यों ने कलेक्टोरेट का दौरा किया, जहाँ उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था और शासन की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा। दिन का सबसे रोमांचक पड़ाव विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात रहा। प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य, गिरते झरनों की गर्जना और खुले वातावरण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘नुवा बाट’ के तहत आयोजित यह भ्रमण कार्यक्रम एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पुनर्वास का भी महत्वपूर्ण प्रयास रहा। इससे पुर्नवासितों के मन में यह विश्वास और मजबूत हुआ कि हिंसा छोड़कर समाज के साथ कदमताल करने में ही जीवन की वास्तविक खुशी और उन्नति निहित है। खुली हवा में सांस लेते हुए और बस्तर की बदलती, विकासोन्मुख तस्वीर को अपनी आंखों से देखकर पुर्नवासितों ने महसूस किया कि शांति का मार्ग ही सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाता है। प्रशासन का यह प्रयास पुर्नवासितों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाने और उन्हें अपनी माटी, संस्कृति और परंपराओं से पुनः जोड़ने की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी कदम साबित हो रहा है।

सशक्त मानसिकता से आत्मनिर्भरता की ओर- पोषण निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं सूरजपुर की महिलाएं

रायपुर, आर्थिक रूप से सशक्तिकरण की नींव सशक्त मानसिकता पर आधारित होती है। दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास व्यक्ति को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। सूरजपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने इस सोच को व्यवहार में उतारते हुए आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत की है। ये महिलाएं न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि जिले की महिलाओं एवं बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों होता है पोषण आहार (रेडी-टू-ईट या RTE) निर्माण संयंत्र सरकार द्वारा संचालित ऐसी इकाइयाँ हैं, जो आंगनवाड़ियों और अन्य योजनाओं के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के लिए पौष्टिक, पहले से तैयार भोजन बनाती हैं, जिसे महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा चलाया जाता है, जिससे पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों होता है, जिसमें गेहूं, दालें, और दूध जैसे घटक शामिल होते हैं, जो प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया तथा मीठा शक्ति आहार का निर्माण जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्काल उपभोग हेतु तैयार पोषण आहार (रेडी टू ईट) निर्माण संयंत्र का शुभारंभ किया गया है। इन संयंत्रों में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया तथा मीठा शक्ति आहार का निर्माण किया जा रहा है, जो विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, पाइरीडॉक्सिन, फोलिक अम्ल, कोबालामिन, लोह तत्व (आयरन), कैल्शियम एवं जिंक जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है। तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न जिले प्रशासन द्वारा जिले में कुल 07 पोषण आहार निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए है। यहां वर्तमान में भैयाथान, प्रतापपुर एवं सूरजपुर विकासखंड में तीन संयंत्रों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इन तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न हैं। निर्मित पोषण आहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण में अप्रत्यक्ष किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बात है कि पोषण आहार के निर्माण के साथ-साथ उसके वितरण की भी जिम्मेदारी भी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई है। भैयाथान विकासखंड में 15 स्व-सहायता समूह सूरजपुर विकासखंड में 15 स्व-सहायता समूह तथा प्रतापपुर विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से वितरण कार्य में अपनी भूमिका निभा रही है। इन समूहों के माध्यम से कुल 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार वितरण कार्य में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इस योजना से महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। मानसिक रूप से सशक्त ये महिलाएं अब घरेलू कार्यों के साथ-साथ आजीविका से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल न केवल निश्चित रूप से जिले में पोषण स्तर सुधारने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

सरकार की प्रभावी नीतियों से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट में 53% की वृद्धि

यूपी में बढ़ा निवेशकों का भरोसा, एक साल में 309 परियोजनाएं पंजीकृत बेहतर हुई टाउनशिप नीति तो पूंजी निवेश 44 हजार करोड़ से बढ़कर 68 हजार करोड़ तक पहुंचा धार्मिक पर्यटन के विकास से रियल एस्टेट को मिली गति, छोटे शहरों की ओर भी रुख कर रहे हैं निवेशक लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उप्र सरकार द्वारा प्रदेश की टाउनशिप नीति को बेहतर करने का नतीजा यहां रियल एस्टेट के क्षेत्र में अद्वितीय वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश के रियल एस्टेट में 68 हजार 328 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है जो 2024 में 44 हजार 526 करोड़ रुपये था। यानी निवेश में 53.5% की प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज हुई है। प्रदेश में बीते एक वर्ष में रिकॉर्ड 309 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं जो उप्र सरकार की नीतियों के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाती हैं। सरकार ने बीते वर्ष टाउनशिप नीति में परिवर्तन करके बिल्डरों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ में टाउनशिप बनाने की बाध्यता समाप्त की थी और ये छूट दी गई थी कि वे न्यूनतम 12.5 एकड़ पर टाउनशिप बना सकेंगे। इसके अलावा नई टाउनशिप नीति में आवंटियों के हितों का ध्यान भी रखा गया। 25 एकड़ की टाउनशिप को तीन साल में और इससे ज्यादा की टाउनशिप को अधिकतम 5 साल में पूरा करने के नियम बनाए गए। जबकि पहले की नीतियों के चलते कई परियोजनाएं 8 से 12 साल की अवधि में भी पूरी नहीं हो पाईं और आवंटियों का पैसा फंस गया। टाउनशिप नीति में बदलाव निवेशकों के साथ-साथ आवंटियों के लिए राहत देने वाला सिद्ध हो रहा है। एनसीआर ही नहीं, छोटे शहर भी कर रहे आकर्षित कुछ समय पहले तक एनसीआर यानी नेशनल कैपिटल रीजन उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था, लेकिन वर्ष 2025 के आंकड़े ये बताते हैं अब निवेशकों का रुझान गैर-एनसीआर जिलों और उप्र के छोटे जनपदों की ओर भी बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में पंजीकृत हुई कुल 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर में और 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर क्षेत्रों में स्वीकृत हुईं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उप्र सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और टियर-2 शहरों के विस्तार का रियल एस्टेट के क्षेत्र में सकारात्मक असर पड़ा है। राजधानी लखनऊ बनी केन्द्र उप्र की राजधानी लखनऊ बीते वर्ष में 67 परियोजनाओं के साथ एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। वहीं अन्य शहरों की बात करें तो बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाएं रजिस्टर्ड हुई हैं। इसके अलावा बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, उन्नाव, गोंडा, मऊ, मिर्जापुर जैसे शहरों तक बिल्डर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन से मिल रहा है विस्तार उत्तर प्रदेश में बढ़ते धार्मिक पर्यटन के चलते भी इन शहरों में रियल एस्टेट निवेश बढ़ा है। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में साल 2025 में 23 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में 5, बाबा काशी विश्वनाथ के धाम वाराणसी में 9, संगमनगरी प्रयागराज में 7 परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ है। उप्र सरकार के प्रयासों से ये शहर बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी पुनर्विकास योजनाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि के साथ रियल एस्टेट विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा की सियासत गरमाई, कांग्रेस को झटका देने की तैयारी में भाजपा

चंडीगढ़ हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने दिसंबर 2024 में बड़ा खेल किया था। उसके पास एक ही सीट जीतने के लिए विधायकों की संख्या थी, लेकिन उसने अपने समर्थन वाले एक निर्दलीय कैंडिडेट को जिता दिया था और इस तरह कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। अब मार्च 2026 में एक बार फिर से दो सीटों पर राज्यसभा का चुनाव होने वाला है और यहां भी भाजपा पहले की तरह ही खेल कर सकती है। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल को खाली हो रही हैं। भाजपा की किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधायकों की मौजूदा संख्या के अनुसार हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-एक सीट जीतने की स्थिति में हैं।   एक सीट पर जीत के लिए 31 विधायकों की संख्या चाहिए। भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 37 की संख्या है। इसके अलावा इनेलो के पास भी दो विधायक हैं और तीन निर्दलीय हैं, जो भाजपा को ही समर्थन करते रहे हैं। इस तरह भाजपा की ताकत 51 हो जाती है। ऐसे में दो सीटों को जीतने के लिए यदि 62 विधायक चाहिए तो भाजपा की ओर से कोशिश हो सकती है कि 9 और विधायकों का जुगाड़ करके कांग्रेस को जीरो पर रोक दिया जाए। फिलहाल हरियाणा की पांचों राज्यसभा सीटें भाजपा के पास ही हैं। इनमें से दो किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा तीन अन्य सांसद रेखा शर्मा, कार्तिकेय शर्मा और सुभाष बराला है। कार्तिकेय भाजपा समर्थित सांसद हैं। हरियाणा की राजनीति समझने वाले नेताओं का कहना है कि इस बार भाजपा किसी जाट नेता अथवा किसी अन्य ओबीसी या दलित को ही भेजेगी। फिलहाल दो ब्राह्मण नेता पहले ही राज्यसभा में हैं। इसके अलावा सुभाष बराला जाट हैं। राज्य में जाट केंद्रित राजनीति होने के चलते एक चेहरा जाट हो सकता है और किसी अन्य पिछड़ी या दलित बिरादरी के नेता को भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा एक और चर्चा राजीव जेटली के नाम की भी है। वह सीएम नायब सिंह सैनी के मीडिया सलाहकार हैं और राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं।   ओपी धनखड़ और जेपी दलाल के नाम भी हैं चर्चा में जाट चेहरे के तौर पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ और पूर्व मंत्री जेपी दलाल का नाम भी चर्चा में है। फिलहाल यह भी कहा जा रहा है कि किरण चौधरी खुद भी अपने लिए एक कार्यकाल चाहती हैं। उन्हें दो साल ही हुए हैं और वह एक पूरा कार्यकाल चाहती हैं। चर्चा तो मोहन लाल बड़ौली और रामविलास शर्मा के नाम की भी है, लेकिन दोनों ब्राह्मण नेता हैं। पहले से ही दो ब्राह्मण नेता राज्यसभा सांसद हैं। इसलिए शायद ही इन लोगों का नंबर लग पाए। किसी दलित नेता के नाम की भी चर्चा चल रही है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि दलित चेहरों के नाम पर किस पर विचार चल रहा है।  

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के मजबूत केंद्र के रूप में उभर रहा है उत्तर प्रदेश

ईसीएमएस के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश को मिली अहम हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को मिल रही है नई गति डिस्प्ले मॉड्यूल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से देश के अग्रणी औद्योगिक प्रदेशों में अपनी पहचान सशक्त बनाता जा रहा है। केंद्र सरकार की “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस)” के तीसरे चरण के अंतर्गत हाल ही में 22 प्रस्तावों की स्वीकृति में उत्तर प्रदेश का नाम सम्मिलित होना इसी बदले हुए औद्योगिक परिदृश्य की तस्वीर है। ईसीएमएस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 04 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश उन 11 राज्यों में शामिल है जहां इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र की ओर से 41,863  करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश और 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और युवाओं को भी मिलेगा। योगी सरकार ने पिछले वर्षों में निवेश अनुकूल वातावरण को मजबूती देने का काम किया है। वर्ष 2017 में अधिसूचित “उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति” और “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पालिसी 2025” के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल रहा है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण उत्तर प्रदेश आज इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग के मामले में पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी मोबाइल विनिर्माण केंद्र बन गया है, जो देश के 55% से अधिक स्मार्टफोन और 50-60% मोबाइल कंपोनेंट्स का उत्पादन करता है। ईसीएमएस के अंतर्गत प्रदेश में स्थापित होने वाली इकाइयां इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में भी विशेष भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं के जरिये पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल, लीथियम आयन सेल और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल मोबाइल और आईटी हार्डवेयर इंडस्ट्री को दृढ़ता मिलेगी, प्रदेश में हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार भी होगा। योगी सरकार की मंशा है कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाला अग्रणी प्रदेश बनाया जाए। इसी सोच को लेकर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग देने का एक इकोसिस्टम बनाया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांड निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। ईसीएमएस के तहत जो स्वीकृति मिली है वह इस भरोसे को और मजबूती प्रदान करती है। ईएसडीएम सेक्टर से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) क्षेत्र से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं। इनमें वीवो, ओप्पो, सैमसंग, लावा, हायर और एलजी जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ-साथ होलिटेक, ट्रांसशन, जाह्वा, सनवोडा और सैमक्वांग जैसे कंपोनेंट आपूर्तिकर्ताओं ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित की हैं।

चार्जशीट नहीं मानेंगे—हादी संगठन की खुली चेतावनी, हिंसा की धमकी के साथ भारत का जिक्र

ढाका बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में नया राजनीतिक घमासान खड़ा हो गया है। उनके संगठन इंकलाब मंच ने ढाका पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि इस हत्या में केवल स्थानीय राजनीतिक तत्व नहीं, बल्कि पूरी आपराधिक साठगांठ और राज्य तंत्र शामिल है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो जनआंदोलन और तेज होगा।   पुलिस की चार्जशीट पर संगठन का कड़ा ऐतराज ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने मंगलवार को इस हत्याकांड में 17 लोगों के खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस के अनुसार, हादी की हत्या राजनीतिक प्रतिशोध में की गई और इसके पीछे सत्तारूढ़ आवामी लीग से जुड़े वार्ड पार्षद तैजुल इस्लाम चौधरी उर्फ बप्पी का हाथ था। मुख्य आरोपी के तौर पर फैसल करीम मसूद का नाम शामिल किया गया है। हालांकि, इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं मानेगा कि एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की हत्या केवल एक वार्ड पार्षद के निर्देश पर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार्जशीट में असली साजिशकर्ताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। ‘मार्च फॉर जस्टिस’ के बाद तीखी चेतावनी ढाका में ‘मार्च फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के समापन के बाद जाबेर ने कहा कि संगठन ने अब तक शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग की, लेकिन सरकार जनता की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो जिन लोगों ने खून बहाया है, जरूरत पड़ी तो उनसे खून लिया भी जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि हादी की हत्या के पीछे 'भारतीय प्रभुत्व' से जुड़ा बड़ा राजनीतिक संदर्भ है। हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए। कौन थे शरीफ उस्मान हादी? 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी जुलाई–अगस्त 2024 के जनआंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए थे, जिसने तत्कालीन हसीना-नेतृत्व वाली सरकार के पतन की राह बनाई। वे आगामी 12 फरवरी के चुनाव के लिए संसदीय उम्मीदवार भी थे। 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उनके सिर में गोली मार दी गई थी। हालत गंभीर होने पर उन्हें सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा और राजनीतिक कड़ियां पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी मसूद सीधे तौर पर आवामी लीग की छात्र शाखा छत्र लीग से जुड़ा था। आरोप है कि वार्ड पार्षद बप्पी ने हत्या के बाद मसूद और एक अन्य आरोपी आलमगीर शेख को फरार होने में मदद की। बप्पी पहले पल्लबी थाना छत्र लीग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गौरतलब है कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरका ने पिछले साल आवामी लीग और उसकी छात्र इकाई पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर हादी की हत्या ने बांग्लादेश में नया राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है और भारत-बांग्लादेश संबंध भी इसकी चपेट में आए हैं। कुछ समूहों ने हत्या में भारतीय कड़ी होने का आरोप लगाया, जिसे नई दिल्ली ने सिरे से खारिज किया। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था वहां की सरकार की जिम्मेदारी है और भारत को गलत तरीके से घसीटने वाली झूठी कहानी को नकारा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश में शांति और स्थिरता का समर्थक है। सीमा पार भागने के दावे पर विवाद 28 दिसंबर को ढाका पुलिस ने दावा किया कि आरोपी मसूद और शेख हल्लुआघाट सीमा से मेघालय में घुस गए। हालांकि भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को भ्रामक और निराधार बताया। बीएसएफ और मेघालय पुलिस- दोनों ने कहा कि सीमा पार करने या गारो हिल्स क्षेत्र में आरोपियों की मौजूदगी के कोई सबूत नहीं मिले हैं। फिलहाल इंकलाब मंच ने साफ कर दिया है कि जब तक कथित राज्य तंत्र और बड़े साजिशकर्ताओं को कटघरे में नहीं लाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।