samacharsecretary.com

जानें 11 जनवरी का राशिफल, इस दिन के लिए आपके सितारे क्या कहते हैं

मेष राशि आज का दिन उत्साह और ऊर्जा से भरा रहेगा। ऑफिस में आपके प्रयास रंग लाएंगे और कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल्दबाजी में खर्च ना करें। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। वृषभ राशि आज आप लोगों को धैर्य और समझदारी से काम लेने की जरूरत है। नौकरी या बिजनेस में स्थिरता बनी रहेगी। किसी पुराने इन्वेस्टमेंट से लाभ मिल सकता है। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। रात में जल्दी सोने की कोशिश करें। मिथुन राशि आज बातचीत और संपर्क आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। ऑफिस में आपकी बातों को महत्व मिलेगा। दोस्तों या रिश्तेदारों से मुलाकात हो सकती है। लव लाइफ में मधुरता बनी रहेगी और मन प्रसन्न रहेगा। स्क्रीन टाइमिंग पर लगाम लगाएं। खाना घर का ही खाएंगे तो बेहतर होगा। कर्क राशि आज इमोशनल तौर पर आप मजबूत रहेंगे। पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा। कामकाज में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छे से निभाएंगे। आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी। परिवार का सहयोग आपको आत्मविश्वास देगा। सिंह राशि आज मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में बढ़ोत्तरी होगी। ऑफिस में आपकी लीडरशिप क्वालिटी सामने आएगी। कोई अच्छी खबर मिल सकती है। ईगो से बचें, तभी रिश्ते मजबूत बने रहेंगे। अपना खाना-पीना सही समय पर करें। कन्या राशि आज का दिन प्लानिंग के साथ काम करने का है। नौकरी में ग्रोथ के संकेत हैं। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें। सेहत को लेकर लापरवाही ना करें और आराम के लिए समय निकालें। तुला राशि आज हर चीज में बैलेंस बनाकर चलना फायदेमंद रहेगा। रिश्तों में समझ बढ़ेगी और पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। धन से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसले लें। क्रिएटिव काम में आपका मन लगेगा। हालांकि जल्दी निराश भी हो सकते हैं। वृश्चिक राशि आज आपकी मेहनत और आत्मविश्वास आपको सफलता दिलाएगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। लव लाइफ में गहराई और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। आज अपने लिए भी समय निकालें। धनु राशि आज आपको नए मौके और एक्सपीरियंस मिल सकते हैं। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिलने की संभावना है। यात्रा के योग बन रहे हैं। सेहत अच्छी रहेगी और मन उत्साहित रहेगा। नए काम में मन लगेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। मकर राशि आज आप लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें बखूबी संभाल लेंगे। ऑफिस में लगातार आपकी ग्रोथ होती रहेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। भोजन में फाइबर और प्रोटीन एड करें। पानी पर्याप्त मात्रा में पीना शुरू कर दें। कुंभ राशि आज सुबह की शुरुआत वॉक के साथ करें। आज हो सकता है कि नए विचार और योजनाएं आपके दिमाग में आएं। सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ सकती है। दोस्तों से सपोर्ट मिलेगा। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। अपने खर्चे पर कंट्रोल करना शुरू कर दें। मीन राशि आज आप मेंटल और इमोशनल तौर पर बैलेंस्ड महसूस करने वाले हैं। आज क्रिएटिव काम में आपका खूब मन लगने वाला है। प्रोफेशनल लाइफ में धीरे-धीरे ग्रोथ होगी। परिवार और करीबी लोगों का सपोर्ट मिलेगा। खानपान का ध्यान रखें। रूटीन फॉलो करें। फालतू की ओवरथिकिंग से बचें।

सुधांशु त्रिवेदी का खुलासा, जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण पर दिखाया था असहमति

नई दिल्ली   भाजपा के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और सोमनाथ मंदिर को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया है, जिसके बाद से सियासत गर्मा गई है। सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट कर आरोप लगाया कि आजाद भारत में सोमनाथ मंदिर के प्रति सबसे अधिक नकारात्मक रवैया खुद पंडित नेहरू का था। उन्होंने कहा कि जहां इतिहास में सोमनाथ को विदेशी आक्रमणकारियों ने लूटा, वहीं स्वतंत्र भारत में नेहरू ने इसके पुनर्निर्माण और प्रतीकात्मक महत्व को कमजोर करने की कोशिश की। अपने पहले पोस्ट में सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने सोमनाथ मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक कथाओं को “पूरी तरह झूठा” बताया। त्रिवेदी के अनुसार, नेहरू ने इस पत्र में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से इनकार करते हुए पाकिस्तान को आश्वस्त करने की कोशिश की और भारत की सभ्यतागत स्मृतियों के बचाव के बजाय “बाहरी तुष्टीकरण” को प्राथमिकता दी। दूसरे पोस्ट में भाजपा सांसद ने कहा कि पंडित नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ-साथ तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी पत्र लिखकर न सिर्फ पुनर्निर्माण पर सवाल उठाए, बल्कि उद्घाटन समारोह में शामिल न होने की सलाह दी। त्रिवेदी के मुताबिक, नेहरू ने सभी मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखकर कहा था कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण से विदेशों में भारत की छवि खराब हो रही है। साथ ही उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्री को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की मीडिया कवरेज कम करने का निर्देश दिया था। तीसरे पोस्ट में सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि नेहरू ने भारतीय दूतावासों को सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी तरह की सहायता देने से मना कर दिया था, यहां तक कि पवित्र नदियों से जल मंगाने की मांग भी ठुकरा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने राष्ट्रपति के सोमनाथ दौरे के “प्रभाव को कम करने” की कोशिश की और विदेश मंत्रालय के माध्यम से मंदिर से जुड़े प्रतीकात्मक आयोजनों को जानबूझकर सीमित किया। इन सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर नेहरू की धर्मनिरपेक्षता, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उस दौर की नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ईरानी महिलाओं का अनोखा प्रदर्शन: खामेनेई की फोटो जलाकर सिगरेट से लगाई आग

तेहरान  ईरान में हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन के दौरान नया रूप देखने को मिला है, जहां महिलाएं सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीरों को जलाकर उसकी आग से सिगरेट सुलगा रही हैं। यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जो देश में जारी आर्थिक संकट, महंगाई, कमजोर मुद्रा और सरकारी दमन के खिलाफ जनता के गुस्से को दर्शाता है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब खामेनेई के शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर नारे लगाए, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और इंटरनेट-टेलीफोन ब्लैकआउट के बावजूद अपना विरोध जारी रखा। महिलाओं की ओर से सिगरेट जलाने वाला कदम प्रतीकात्मक है, क्योंकि ईरान में सुप्रीम लीडर की तस्वीर जलाना गंभीर अपराध माना जाता है। महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना भी सामाजिक-धार्मिक नियमों के तहत प्रतिबंधित है। यह कदम 2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए 'महिला, जीवन, आजादी' आंदोलन की निरंतरता भी दर्शाता है। तब महिलाओं ने हिजाब जलाकर और बाल काटकर विरोध जताया था, लेकिन अब यह और ज्यादा सत्ता को चुनौती दे रहा है। खामेनेई की तस्वीर पर सिगरेट जलाती महिलाएं  इंटरनेट पर वायरल वीडियो में कई महिलाओं को खामेनेई की तस्वीरों को जलाकर सिगरेट जलाते हुए देखा जा सकता है. इसे ईरान की राजनीतिक और धार्मिक सत्ता के लिए एक खुली चुनौती बताया जा रहा है. इंस्टाग्राम, X, टेलीग्राम और रेडिट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके वीडियो क्लिप और फोटो कई बार शेयर और रीपोस्ट किए जा रहे हैं. ईरान की ओर से असहमति पर कंट्रोल सख्त करने के बावजूद अधिकारियों के लिए इसे रोकना मुश्किल होता जा रहा है.  विरोध का प्रतीक  ईरानी कानून के तहत सुप्रीम लीडर की तस्वीर जलाना एक गंभीर अपराध है. इसके बावजूद महिलाएं जानबूझकर इसे सीगरेट के साथ जला रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान में महिलाओं के लिए सामाजिक नियम सख्त कर दिए गए हैं, जिसमें हिजाब का पालन और महिलाओं की व्यक्तिगत आजादी पर प्रतिबंध शामिल हैं. ऐसे में महिलाएं इस हरकत के जरिए ईरान में लागू इन नियमों को अस्वीकार कर रही हैं. यह विरोध का प्रतीक माना जा रहा है.  ईरान में बढ़ता विरोध  यह वायरल ट्रेंड ऐसे वक्त पर सामने आया है जब ईरान बढ़ते आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है. यहां की जनता करेंसी का तेजी से कमजोर होना और फूड प्रोडक्ट्स की महंगी कीमतों को लेकर गुस्से में है. इसके चलते देशभर के शहरों में तेजी से विरोध प्रदर्शन बढ़ गया है. प्रदर्शनकारियों ने सीनियर लीडर्स की तस्वीरें जलाने और सत्ताधारी दल से जुड़ी मूर्तियों को नुकसान पहुंचाना भी शुरु कर दिया है. बता दें कि तेहरान में विरोध का यह रूप साल 2022 में पुलिस हिरासत में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए आंदोलन पर आधारित है. एक ओर जहां प्रशासन की ओर से सड़क प्रदर्शन को बलपूर्क दबा दिया गया है तो वहीं अब यह विरोध ऑनलाइन फैल गया है.    प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों का एजेंट बताया अयातुल्लाह अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों का एजेंट करार दिया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। सुरक्षा बलों की गोलीबारी से अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं। ये प्रतीकात्मक कृत्य महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, हिजाब नियमों और पूरे धार्मिक शासन के खिलाफ खुली बगावत का प्रतीक बन गए हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ईरान में यह नया विरोध रूप आर्थिक संकट और सामाजिक प्रतिबंधों के बीच जनता की बढ़ती बेचैनी को उजागर करता है। आर्थिक संकट के बीच भड़का जनाक्रोश बता दें कि ईरान इस वक्त गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, तेजी से कमजोर होती मुद्रा और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। देश के कई शहरों में फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नेताओं की तस्वीरें और मूर्तियां निशाने पर रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सीनियर नेताओं की तस्वीरें जलाने और सरकार से जुड़ी मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया है। यह साफ संकेत है कि जनता का गुस्सा अब सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रह गया है। महसा अमिनी आंदोलन से जुड़ी विरोध की जड़ें यह विरोध ट्रेंड 2022 में पुलिस हिरासत में महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए आंदोलन से जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया ने विरोध को नया रूप दे दिया है। छोटे-छोटे वीडियो अब मिनटों में ग्लोबल लेवल पर पहुंच रहे हैं। सरकारी चेतावनियों के बावजूद जारी विरोध ईरानी अधिकारियों की चेतावनियों और कड़े नियंत्रण के बावजूद इन वीडियो का लगातार बढ़ता सर्कुलेशन दिखाता है कि यह ट्रेंड अब एक ग्लोबल डिजिटल आंदोलन बन चुका है। इसके चलते ईरानी महिलाओं का विरोध अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक मंचों पर लगातार चर्चा में बना हुआ है।

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से छुटकारा दिलाएंगे खास फूल

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या जीवन की सबसे कठिन अवधियां मानी जाती हैं। इन दौरान आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक तनाव, रिश्तों में कलह और करियर में रुकावटें आती हैं। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में बताया गया है कि कुछ विशेष फूलों की पूजा और अर्पण से शनिदेव का अशुभ प्रभाव कम होता है और साढ़ेसाती-ढैय्या का कष्ट जल्दी खत्म हो जाता है। ये फूल हैं – आक का फूल, गुड़हल का फूल, शमी का फूल और अपराजिता का फूल। इन फूलों से शनिवार को पूजा करने से शनि प्रसन्न होते हैं और बुरा प्रभाव कम हो जाता है। आइए जानते हैं इन फूलों से जुड़े उपाय और नियम। आक का फूल आक का फूल भगवान शिव और शनिदेव दोनों को अत्यंत प्रिय है। शनिवार को आक के फूल शनिदेव को चढ़ाने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव बहुत तेजी से कम होता है। उपाय: शनिवार की शाम शुद्ध होकर हनुमान मंदिर या शनि मंदिर में जाकर 7 या 11 आक के फूल चढ़ाएं। साथ में 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। आक के फूल काले कपड़े में लपेटकर बहते पानी में प्रवाहित करें। यह उपाय करने से शनि की क्रूर दृष्टि शांत होती है, कर्ज और मुकदमे की बाधाएं दूर होती हैं। कई भक्तों ने अनुभव किया है कि आक के फूल से साढ़ेसाती का अंतिम चरण बहुत जल्दी खत्म हो जाता है। गुड़हल (हिबिस्कस) का फूल गुड़हल का लाल फूल शनिदेव को बहुत प्रिय है। शनिवार को गुड़हल के फूल चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। उपाय: शनिवार को सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल पर गुड़हल के 7 फूल रखकर शनि चालीसा का पाठ करें। फिर इन फूलों को शनिदेव की तस्वीर पर चढ़ाएं। इसके बाद 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें। यह उपाय स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और रिश्तों में सुधार लाता है। गुड़हल का फूल शनि की क्रोधाग्नि को शांत करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। शमी का फूल शमी का फूल शनिदेव की पूजा में बहुत महत्वपूर्ण है। शमी वृक्ष को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है। शनिवार को शमी के फूल चढ़ाने से शनि का अशुभ प्रभाव कम होता है। उपाय: शनिवार को शमी वृक्ष के नीचे जाकर शमी के फूल इकट्ठा करें। इन्हें शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर पर चढ़ाएं। साथ में शनि मंत्र जपें और तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय कोर्ट-कचहरी, दुर्घटना और नौकरी की रुकावटों को दूर करता है। शमी का फूल शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण में विशेष लाभ देता है। अपराजिता का फूल अपराजिता का फूल (क्लाइंबिंग शो पीस) शनि की पूजा में विजय और सफलता का प्रतीक है। शनिवार को अपराजिता के फूल चढ़ाने से शनि का प्रभाव कम होता है और जीवन में विजय मिलती है। उपाय: शनिवार को अपराजिता के नीले फूल इकट्ठा करके शनि मंदिर में चढ़ाएं। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें और फूलों को बहते पानी में प्रवाहित करें। यह उपाय शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से छुटकारा दिलाता है। अपराजिता का फूल व्यक्ति को हर संकट में विजयी बनाता है। इन चार फूलों से शनिवार को पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती-ढैय्या का प्रभाव कम हो जाता है। नियमितता, श्रद्धा और सात्विकता रखें। फूल ताजे और साफ होने चाहिए। शनिदेव की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आएगी।

महिलाएं बंजर भूमि पर गाजर उगाकर बनीं आत्मनिर्भर

गिरिडीह. गिरिडीह स्थित बेंगाबाद प्रखंड की महिलाएं, जो कभी घरों तक सीमित थीं, अब बंजर भूमि पर गाजर की फसल उगाकर अपनी पहचान बना रही हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। बेंगाबाद प्रखंड के मोतीलेदा पंचायत में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिला कृष मोतीलेदा में पहली बार लगभग 4 से 5 एकड़ भूमि पर महिला कृषकों द्वारा गाजर की खेती की जा रही है। इस कार्य में गांव की लगभग दो दर्जन महिलाएं शामिल हैं, जो अपने-अपने खेतों में आधुनिक तकनीक और जैविक विधि से खेती कर रही हैं। महिलाओं की मेहनत से कभी बंजर पड़ी जमीन आज गाजर की हरी-भरी फसल से आच्छादित हो गई है। बड़े पैमाने पर गाजर की खेती करने का लक्ष्य बेंगाबाद जेएसएलपीएस द्वारा इन महिलाओं को गाजर की उन्नत खेती का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण से पहले भी महिलाएं गाजर उगाती थीं, लेकिन पारंपरिक तरीकों से उत्पादन सीमित रहता था। प्रशिक्षण के बाद इस वर्ष क्यारी और बेड पद्धति अपनाकर खेती की गई, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अगले वर्ष और भी बड़े पैमाने पर गाजर की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। महिला कृषक पवनती देवी ने बताया कि अब जैविक विधि से खेती की जा रही है, जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता। इससे उत्पादन बढ़ा है और सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। 10 डिसमिल में गाजर की खेती से 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन महिला कृषकों के अनुसार, प्रत्येक महिला लगभग 15 से 20 डिसमिल भूमि पर खेती करती है। 10 डिसमिल में गाजर की खेती से 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन होता है, जिससे करीब 15 से 20 हजार रुपए तक की आमदनी हो जाती है। वहीं, एसएचजी से जुड़े किसान कोलेश्वर वर्मा और बिनोद वर्मा ने बताया कि इस वर्ष कुल मिलाकर करीब 5 एकड़ भूमि पर गाजर की खेती की जा रही है। प्रति एकड़ लगभग 65 क्विंटल उत्पादन होता है, जिससे करीब 2 लाख रुपए तक की आय होती है। गाजर की खेती में प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आता है। खेती में जुटी महिला कृषक आशा वर्मा, कविता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, पवनती देवी और सुनीता देवी ने बताया कि वे पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। गाजर के साथ-साथ मटर, गोभी सहित अन्य सब्जियों की भी खेती करती हैं। हालांकि, किसानों ने सिंचाई की समस्या को लेकर चिंता भी जताई। उनका कहना है कि खेतों तक बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण डीजल पंप से सिंचाई करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। यदि खेतों तक बिजली की सुविधा मिल जाए तो कम खर्च में खेती संभव हो सकेगी। कुल मिलाकर मोतीलेदा की महिला कृषक अपनी मेहनत, प्रशिक्षण और नए तकनीकों के सहारे न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल भी कायम कर रही हैं।

अयोध्या में राम मंदिर के 15 किमी दायरे में मांस बिक्री पर रोक, नॉन-वेज डिलीवरी पर भी लगी पाबंदी

अयोध्या  यूपी की राम नगरी अयोध्या में अब 15 किलोमीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. धार्मिक मर्यादाओं के पालन को सख्ती से लागू करते हुए जिला प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है.  न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन ने राम मंदिर के 15 किलोमीटर के दायरे में गैर-शाकाहारी भोजन की होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. यह निर्णय ‘पंचकोसी परिक्रमा’ क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के जरिए नॉन-वेज भोजन की आपूर्ति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है. 15 किमी दायरे में नॉन-वेज डिलीवरी पर रोक  प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में यह सामने आया था कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां प्रतिबंधित क्षेत्र में भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों तक नॉन-वेज भोजन पहुंचा रही थीं. इसके अलावा कुछ होटल और होमस्टे द्वारा मेहमानों को न सिर्फ मांसाहारी भोजन बल्कि शराब परोसने की शिकायतें भी मिली थीं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को सख्त चेतावनी जारी की है. मई 2025 में अयोध्या नगर निगम ने अयोध्या और फैजाबाद को जोड़ने वाले 14 किलोमीटर लंबे राम पथ पर मांस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते नौ महीनों में शराब बिक्री पर रोक का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो पाया. राम पथ पर अब भी दो दर्जन से अधिक शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं. इस देरी पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि राम पथ और फैजाबाद क्षेत्र में मांस की दुकानों को हटा दिया गया है, लेकिन शराब की दुकानों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है. इसी वजह से शराब बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई है. विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि अयोध्या में यह फैसला बहुत अच्छा है. पहले से भी तीर्थ स्थलों पर इस तरह की पाबंदी लगाई गई है, जिसमें हरिद्वार, तिरुपति भी शामिल है. यहां पर मांस और शराब की बिक्री बंद है. अयोध्या वैसा ही पवित्र शहर है, इसलिए यहां पर शाकाहारी लोग रहें, यही उचित है. पर्यटन नहीं, धार्मिक नगरी है अयोध्या विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि अयोध्या एक पवित्र धार्मिक नगरी है और विश्व की सांस्कृतिक राजधानी है. मुझे लगता है कि इस धार्मिक नगरी में लोग पर्यटन की दृष्टि से नहीं आते हैं, बल्कि धार्मिकता की दृष्टि से आते हैं. अयोध्या में अनेक मठ मंदिर हैं. सभी मठ-मंदिरों में श्रद्धालु बड़े श्रद्धा भाव से दर्शन करते हैं. इस भाव और श्रद्धा को जब दुख पहुंचाया जाता है, तो बहुत गलत बात है. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जो यह कदम उठाया है, इस कदम का हम स्वागत करते हैं. अयोध्या को मांस और मदिरा रहित करना चाहिए. इसका निर्णय पूर्व में ही लेना चाहिए, लेकिन पूर्व की सरकारें नहीं ले पाई. अयोध्या को धार्मिकता के आधार पर ही देखना चाहिए, ना कि पर्यटन की दृष्टि से देखना चाहिए. हम सब पहले भी मांग करते थे कि धार्मिक नगरी में इस तरह के कार्य को बंद किया जाए. बिक्री वालों को डालें जेल के अंदर संत विष्णु दास ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी अयोध्या में मांस पर प्रतिबंध लगाया गया है, यह बहुत अच्छी बात है. यहां पर जितने भी श्रद्धालु प्रभु राम और बजरंगबली के दर्शन कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में जो रोक लगाया गया है, यह बहुत अच्छा फैसला है. साथ ही सभी तीर्थ स्थलों में मांस की बिक्री बंद होनी चाहिए. अगर कोई ऐसा करता हुआ पाया गया, तो उसको जेल की सलाखों के पीछे बंद कर देना चाहिए. अयोध्या मर्यादा और संस्कृति की नगरी संत देवेशाचार्य ने बताया कि यह बहुत अच्छी बात है. अयोध्या के अंदर मांस पर प्रतिबंध करना बहुत अच्छी पहल है. अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी है. यहां पर संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु आते हैं, उनको इस तरीके का दृश्य देखने को मिलता था, तो उनके हृदय को भी पीड़ा होती थी. यह मर्यादा की नगरी है, संस्कृति की नगरी है. अब यहां पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो शासन-प्रशासन को बहुत बड़ा साधुवाद है, क्योंकि हम लोग बहुत दिनों से इसके लिए प्रयास भी करते थे. पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र में ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर शिकंजा इस बीच सहायक खाद्य आयुक्त मानिक चंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माध्यम से नॉन-वेज फूड डिलीवरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं. उन्होंने कहा, 'शिकायतों के बाद ऑनलाइन नॉन-वेज फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध लगाया गया है. सभी होटल, दुकानदारों और डिलीवरी कंपनियों को इसकी सूचना दे दी गई है. नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी.' प्रशासन का कहना है कि अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम जरूरी हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.  

मकर संक्रांति पर ग्रह दोषों से छुटकारा पाने काले तिल के करें 6 उपाय!

आमतौर पर मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म के बड़े पर्वों में से एक है। ज्योतिष गणना के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देवगुरु बृहस्पति की धनु राशि से निकल कर अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इस दिन के बाद से उनकी चाल उत्तर की तरफ हो जाती है। इसे ही सूर्य का उत्तरायण कहते हैं। यह दिन दान, पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खास माना जाता है। खासकर इस दिन काले तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन काले तिल का दान और इसका सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन तिल से जुड़े उपाय करने से व्यक्ति की किस्मत भी बदल सकती है। मकर संक्रांति के दिन अगर तिल से जुड़ा कुछ खास उपाय किया जाए तो शनि दोष, सूर्य दोष और पितृ दोष के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। चलिए इन उपायों के बारे में जानते हैं। शनि मंदिर में तिल का दीया जलाएं मकर संक्रांति के दिन शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष में राहत मिलती है। इस दिन स्नान करने के बाद तिल का दान भी अच्छा माना जाता है। गंगाजल में मिलाकर स्नान करें मकर संक्रांति के दिन भिगोए हुए काले तिल को गंगा जल में मिलाएं। इसके बाद इस जल से स्नान करना चाहिए। इस उपाय से रोग-दोष दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है व आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। सूर्य को अर्घ्य दें मकर संक्रांति के दिन सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसे में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में काले तिल और फूलों के साथ अक्षत डालकर भगवान सूर्य के मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें। पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं मकर संक्रांति के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं और पूर्वजों का स्मरण करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और दोष का प्रभाव भी कम होता है। मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न मकर संक्रांति के दिन काला तिल और गुड़ का दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगों को ठंड कपड़े देने से भी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन आगमन होता है।

US कंपनियों की ट्रंप को चेतावनी, वेनेजुएला में निवेश पर सवाल, ‘कैसे निकालेगा तेल?’

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कंपनियों के सामने वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने का प्रस्‍ताव रखा है, जिसे लेकर शुक्रवार को व्‍हाइट हाउस में एक मीटिंग हुई. इस बैठक के दौरान एक्सॉनमोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स समेत कई कंपनियों ने यहां निवेश को लेकर समस्‍याओं के बारे में बताया. डैरेन वुड्स ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान में यह लैटिन अमेरिकी देश निवेश के लिहाज से लायक नहीं है.  एक्सॉनमोबिल के सीईओ ने कहा कि वेनेजुएला की अस्थिर कानूनी व्यवस्था, निवेश सुरक्षा की कमी और पुराने हाइड्रोकार्बन कानूनों के कारण पर्याप्त सुधारों के बिना अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए यह क्षेत्र सही नहीं होगा. वुड्स ने कहा कि अगर आप वेनेजुएला में आज मौजूद व्यावसायिक संरचनाओं और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को देखें, तो वहां निवेश करना संभव नहीं है.  उन्‍होंने आगे कहा कि इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और कानून व्‍यवस्‍था में महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे. निवेश के लिए स्‍थायी सुरक्षा उपाय और हाइड्रोजन कानूनों में बदलाव की आवश्‍यकता है. उन्होंने कहा कि एक्सॉनमोबिल ने पहली बार 1940 में वेनेजुएला में प्रवेश किया था और उसकी संपत्ति दो बार जब्त किया जा चुका है, जिस कारण कंपनी सोच समझकर कदम रखना चाहती है.   वेनेजुएला में बड़े बदलाव की जरूरत कंपनी के सीईओ ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि तीसरी बार फिर से प्रवेश करने के लिए यहां पर कई तरह के बदलाव की आवश्‍यकता होगी. खासकर ऐतिहासिक स्‍वरूप और वर्तमान स्थिति को देखते हुए कई बदलाव जरूरी हैं. हालांकि इसके बाद भी वुड्स ने कहा कि उन्‍हें विश्‍वास है कि अमेरिका आवश्‍यक बदलाव लाने में मदद कर सकता है.   जांच के लिए जाएगी एक टीम  वुड्स ने कहा कि उन्‍हें उम्‍मीद है कि एक्‍सॉन जल्‍द ही वेनेजुएला में तेल अवसंरचना की स्थिति का आकलन करने के लिए एक तकनीकी टीम भेजेगी. डैरेन वुड्स ने कहा कि कंपनियों को किसी भी निवेश से पहले संभावित लाभ के बारे में जानकारी हासिल करनी होगी.  एक्सॉनमोबिल के सीईओ ने कहा कि आखिरी सवाल यह होगा कि वित्तीय नजरिए से सुरक्षा उपाय कितने टिकाऊ हैं? इसका लाभ कैसा दिखता है? वाणिज्यिक व्यवस्थाएं और कानूनी ढांचे क्या हैं? वेनेजुएला में निवेश पर निर्णय लेने से पहले इन सभी चीजों को व्यवस्थित करना होगा.  मधुमक्‍खी के छत्ते की तरह खड़ी हैं कंपनियां: ट्रंप  ट्रंप का दावा है कि तेल कंपनियों के अधिकारी इस अवसर का लाभ उठाने के लिए मधुमक्खी के छत्ते की तरह कतार में खड़े हैं. अगर आप अंदर तक नहीं जाना चाहते हैं तो बस मुझे बता दीजिए. बैठक के दौरान उन्‍होंने कंपनियों से कहा कि यहां पर 25 लोग अभी नहीं हैं, जो आपकी जगह लेने के लिए लाइन में खड़े हैं. उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें सुझाव दिया गया था कि प्रशासन एक जोखिम भरे निवेश का समर्थन करने के लिए वित्तीय गारंटी दे रहा है.    ट्रंप ने कहा कि मुझे उम्‍मीद है कि मुझे कोई बचाव पेश नहीं करना पड़ेगा. दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां यहां पर हैं और वे रिस्‍क को समझती हैं. बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला में निवेश करने वाली कंपनियों को अमेरिकी सरकार द्वारा टैक्‍सपेयर्स के पैसे खर्च किए बिना या जमीन पर सेना तैनात किए बिना 'पूर्ण सुरक्षा' का आश्वासन दिया जाएगा. ट्रंप ने संकेत दिया कि वेनेजुएला अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करेगा और कंपनियां भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था स्वयं करेंगी.

चित्तौड़गढ़ में 11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी, गोकुल जैसी गोशाला का निर्माण

चित्तौड़गढ़   राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और गोसेवा के संस्कार सात समंदर पार भी फीके नहीं पड़े हैं। क्षेत्र के नपानिया गांव के युवाओं ने साबित कर दिया है कि इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे, अपनी जड़ों को नहीं भूलता। दुबई, अमरीका, लंदन और जापान जैसे 11 देशों में सफल करियर बना चुके इन युवाओं ने अपनी जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य निभाते हुए करीब 20 लाख रुपए की लागत से एक विशाल नंदेश्वर गोशाला का निर्माण करवाया है। इस सामूहिक संकल्प की सिद्धि का उत्सव रविवार से नानी बाई के मायरा के साथ मनाया जाएगा। टीस से जन्मा संकल्प: 11 हजार से शुरू हुआ कारवां नपानिया गांव के युवा रोजगार के सिलसिले में केन्या, चीन और मुंबई जैसे शहरों में बसे हैं। अक्सर त्योहारों पर जब ये युवा गांव लौटते थे, तो सड़कों पर बेसहारा और चोटिल गोवंश को देखकर उनके मन में गहरी टीस उठती थी। यही दर्द पिछले वर्ष एक ठोस संकल्प में बदला। शुरुआत महज 11-11 हजार रुपए के अंशदान से हुई, लेकिन देखते ही देखते कारवां बढ़ता गया। प्रवासियों के साथ स्थानीय भामाशाहों ने भी दिल खोलकर सहयोग किया। 11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी इस गोशाला का शुभारंभ एक ऐतिहासिक उत्सव की तरह होगा। 11 जनवरी से चित्तौड़गढ़ के हरे कृष्णा प्रभु राकेश पुरोहित के सानिध्य में नानी बाई का मायरा कथा शुरू होगी। दुबई, अमरीका, यूके, केन्या, जापान और मस्कट सहित 11 देशों से प्रवासी भारतीय मायरा लेकर पहुंचेंगे। मकर संक्रांति को करीब 151 गांवों के श्रद्धालु इस आयोजन में सम्मिलित होंगे। 20 बीघा जमीन पर गोकुल' जैसा आशियाना सांवलियाजी मार्ग पर करीब 20 बीघा भूमि पर इस गोशाला का निर्माण किया गया है। 15 लाख की लागत से विशाल शेड बनाया गया है ताकि गोवंश को हर मौसम से सुरक्षा मिले। किसी ने पशु खेळ (नांद) बनवाई, तो किसी ने बिजली कनेक्शन और समतलीकरण में श्रमदान किया। क्या कहते हैं जिम्मेदार? सड़कों पर चोटिल गोवंश को देख मन दुखी होता था। हमने तय किया कि अपनी कमाई का एक हिस्सा माटी और गोमाता को अर्पित करेंगे। गांव की एकता से ही यह संभव हुआ। – उदयलाल मेनारिया, प्रेम मेनारिया, संजय जाट और नपानिया के युवा 700 वर्ष पहले नरसीजी के भरोसे पर द्वारिकाधीश आए थे, आज उसी अटूट विश्वास के साथ नपानिया के युवा गोमाता के लिए भरोसे की कथा कर रहे हैं। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए मिसाल है। – पं. राकेश पुरोहित, प्रशासनिक संत

अखिल भारतीय गुलाब प्रदर्शनी में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल के कृषि विभाग ने लगाए स्टॉल, आधुनिक तकनीक, नवाचारों के बारे में दी जानकारी

भोपाल. भोपाल स्‍थ‍ित गुलाब उद्यान में अखिल भारतीय गुलाब प्रदर्शनी एवं गुलाब महोत्सव प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (IEHE), भोपाल के कृषि विभाग द्वारा स्थापित कृषि कंसल्टेंसी टीम के स्टॉल ने नवाचार, तकनीक और जनसेवा का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत किया। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (IEHE), भोपाल के कृषि विभाग द्वारा विकसित विभिन्न कृषि उत्पादों के स्‍टाल लगाकर किसानों, विद्यार्थियों सहित महोत्‍सव में आए लोगों को आधुनिक, वैज्ञानिक तथा व्यवहारिक कृषि तकनीकों से परिचित कराया गया। इसमें सिंदूर, शहद सरसों (हनी मस्टर्ड), जीवामृत, बीजामृत, रीसायकल कागज़ से बने बुकमार्क, जैविक लड्डू, शुभकामना पत्र तथा बी.एस-सी. कृषि के विद्यार्थियों द्वारा तैयार मोबाइल एप्लिकेशन शामिल है। आकर्षण का केंद्र रहा AI आधारित मोबाइल एप्लिकेशन “फसल केयर” प्रदर्शनी में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (IEHE), भोपाल के कृषि विभाग द्वारा विकसित AI आधारित मोबाइल एप्लिकेशन “फसल केयर” आकर्षण का केंद्र बना रहा। यह ऐप किसानों को फसल की पत्ती का फोटो लेकर रोग की पहचान करने तथा सटीक कृषि परामर्श प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है। ऐप विशेष रूप से मध्यप्रदेश की प्रमुख फसलों पर केंद्रित है। साथ ही समय पर एवं सही कृषि प्रबंधन के माध्यम से फसल क्षति को न्यूनतम करने की दिशा में एक प्रभावी डिजिटल समाधान प्रस्तुत करता है। ऐप की महोत्‍सव में आए व‍िशेषज्ञों, अधिकारियों एवं आमजन द्वारा प्रसंशा की गई। साथ ही उत्साहजनक फीडबैक भी प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग ने कट फ्लावर (Cut Flower) श्रेणी में अन्तर्राष्ट्रीय गुलाब महोत्सव प्रतियोगिता में भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिससे संस्थान की उद्यानिकी एवं पुष्प उत्पादन में दक्षता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ। यह सहभागिता शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और विस्तार के त्रिसूत्री मॉडल का सजीव उदाहरण बनी, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि IEHE, भोपाल का कृषि विभाग तकनीक-संचालित, किसानोन्मुख एवं भविष्य-उन्मुख कृषि विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आयोजन में संस्थान की सक्रिय भागीदारी ने न केवल अकादमिक उत्कृष्टता को जनसरोकारों से जोड़ा, बल्कि डिजिटल कृषि एवं स्मार्ट फार्मिंग की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दिया। इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार भारद्वाज, विभागाध्यक्ष, डॉ. स्मिता राजन, डॉ. शुभम मिश्रा तथा डॉ. प्रियंका गुर्जर, संकाय सदस्यों तथा अनिकेत तिवारी, टीम लीड-साहिल रघुवंशी एवं टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन विंग कंसल्टेंसी टीम का विशेष योगदान रहा।