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इंदौर में चेहरा ढंककर आए ग्राहकों को अब ज्वेलरी की दुकानों में एंट्री नहीं

इंदौर. शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों में अब मास्क, हिजाब या कपड़े से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि गहने खरीदना है तो चेहरा खुला रखना होगा। इंदौर चांदी-सोना व्यापारी एसोसिएशन ने शहर की सभी ज्वेलरी दुकानों को निर्देश जारी किए हैं कि मास्क, हिजाब या किसी भी तरह से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को गहने न दिखाए जाएं। यह आदेश एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने व्यापारियों के नाम लिखित पत्र जारी कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि देश के कई शहरों में पिछले कुछ महीनों में चेहरा ढंककर बदमाशों ने सराफा दुकानों में लूट की वारदातें अंजाम दी हैं। अपराधी सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए मास्क या कपड़ों से चेहरा छिपाकर दुकान में घुसते हैं और वारदात के बाद फरार हो जाते हैं। इसी खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया है। बिहार में लागू, यूपी-झारखंड में तैयारी इसी तरह का नियम बिहार में लागू किया जा चुका है। झारखंड में भी तैयारी है, जबकि उत्तर प्रदेश के वाराणसी और झांसी के सराफा बाजारों में बुर्का, मास्क वाले ग्राहकों के प्रवेश पर रोक के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। बिहार में इस फैसले के बाद तीखा विवाद खड़ा हो गया था। मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक भेदभाव बताया। बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग भी की, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया। फैसले से होने वाले फायदे अपराध पर अंकुश अपराधियों की पहचान आसान होगी सीसीटीवी फुटेज से जांच में तेजी आएगी लूट और ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगेगा व्यापारियों की सुरक्षा स्टाफ का आत्मविश्वास बढ़ेगा हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में डर कम होगा दुकानों में सतर्कता बढ़ेगी ग्राहकों में भरोसा शोरूम में सुरक्षित माहौल बनेगा परिवार के साथ खरीदारी करने में भरोसा बढ़ेगा विरोध करने वालों की अपनी दलील यह फैसला भारत के संविधान और उसकी संवैधानिक परंपराओं के पूरी तरह खिलाफ है। ऐसी कार्रवाई के जरिए नागरिकों को संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा के नाम पर हिजाब और नकाब को निशाना बनाना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि यह सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

एमपी में निगम-मंडल और एल्डरमैन की नियुक्तियां जल्द होंगी

भोपाल. मध्यप्रदेश में बीजेपी की विभिन्न राजनीति पदों पर जिम्मेदारियां जल्द सौंपी जाएगी। मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को जल्द सत्ता के विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव और पार्टी नेतृत्व ने मिलकर फैसला लिया है। जिससे प्रदेश के निगम-मंडलों और नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। नाम और पद तय कर सूची तैयार कर ली मीडिया से चर्चा के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि नियुक्तियों को लेकर सरकार और संगठन के बीच गहन मंथन हो चुका है। पार्टी को जिस कार्यकर्ता को जहां जिम्मेदारी देना है, वह तय कर लिया गया है। नामों की सूची लगभग तैयार है। जल्द अधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। क्षेत्रीय समीकरण, जातिगत संतुलन पर फोकस लंबे समय से खाली पड़े निगम-मंडलों और एल्डरमैन के पदों पर नियुक्ति के संकेत से जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह जगा दिया है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय समीकरणों, जातिगत संतुलन और आगामी चुनावों की राणनीति का विशेष ध्यान रखा गया है।

ग्वालियर में बिजली कनेक्शन काटने पर कर्मचारियों और ग्रामीणों में चले लाठी-डंडे

ग्वालियर. लाल टिपारा गांव में बिजली बिल की बकाया राशि वसूली को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला फायरिंग और मारपीट तक पहुंच गया। घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए। मुरार थाना पुलिस ने एक-दूसरे की शिकायत पर दोनों पक्षों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वसूली के लिए पहुंचे थे मुरार थाना पुलिस के अनुसार बिजली कंपनी के कर्मचारी धीरज यादव और अन्य स्टाफ लाल टिपारा गांव में बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए पहुंचे थे। इस दौरान बकायादारों से कर्मचारियों की कहासुनी हो गई। विवाद के बाद कर्मचारी धीरज यादव मौके से चले गए। कहासुनी की सूचना मिलने पर धीरज यादव का बेटा सुमित यादव, भतीजा नीतेश यादव और साथी आशिक खान मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने स्थानीय रहवासी रवि शर्मा, अंकुश शर्मा और दिनेश पाल पर हमला कर दिया। इस दौरान कट्टे से फायरिंग की गई और मारपीट में तीनों लोग घायल हो गए। रवि शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने सुमित यादव, नीतेश यादव और आशिक खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं सुमित यादव की रिपोर्ट पर भी पुलिस ने अलग से प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि हमला करने वाले युवकों का संबंध बदमाश कपिल यादव से भी है। कर्मचारियों पर भी जानलेवा हमले की शिकायत सहायक प्रबंधक आनंद चौरसिया ने थाने में आवेदन दिया कि स्टाफ धीरज यादव और रमाकांत मुदगल के साथ लाल टिपारा गांव में बकाया राशि वसूली के लिए गए थे। वसूली के दौरान राजकुमार शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, फकीर चंद और लखन तोमर के बिजली कनेक्शन बकाया राशि के चलते काटे गए। इससे नाराज होकर इन लोगों ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों पर पत्थर और लाठियों से हमला कर दिया। सहायक प्रबंधक आनंद चौरसिया ने आरोपितों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और शासकीय कर्मचारियों से मारपीट करने की शिकायत दर्ज कराई है। गोली चलाई फिर सिर पर बट से मारा विवाद की स्थिति बनते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जिन युवकों से मुंहवाद हुआ उनके साथ जमकर मारपीट की गई। सुमित यादव और उसके साथियों ने पहले कट्टे से फायर किया और फिर उसी कट्टे के बट से युवक के सिर पर एक के बाद एक कई वार किए, जिससे युवक घायल हो गया। इस पूरी घटना का वीडियो भी बहुप्रसारित हुआ है, जिसमें हमलावर कट्टे से वार करते और स्थानीय लोग बीच बचाव करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला कर गाड़ी पर बरसाईं लाठियां

पश्चिम मेदिनीपुर. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर शनिवार रात पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना में हमला हुआ। भाजपा नेता ने इसे लेकर तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए पुलिस चौकी के अंदर धरना दिया। अधिकारी के अनुसार, यह घटना रात करीब 8:20-8:30 बजे गरबेटा पुलिस थाना क्षेत्र के चंद्रकोना रोड बाजार इलाके के पास हुई, जब वह पुरुलिया में जनसभा को संबोधित करने के बाद नंदीग्राम लौट रहे थे। भाजपा कार्यकर्ता उन्हें लेने के लिए रास्ते में जमा हुए थे, तभी आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक समूह ने अचानक चौराहे पर काफिले को रोक दिया। भाजपा ने आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी की गाड़ी पर बांस की लाठियों और डंडों से हमला किया गया और दोनों पक्षों की ओर से नारे लगाए गए। बताया जा रहा है कि यह झड़प आम रास्ते पर करीब एक घंटे तक चली। अधिकारी का दावा है कि लंबे समय तक चले इस हंगामे के बावजूद पुलिसकर्मियों ने मौके पर हस्तक्षेप नहीं किया। अधिकारी ने अपने फेसबुक हैंडल पर लिखा, 'रात करीब 8:20 बजे, जब मैं पुरुलिया से लौट रहा था, चंद्रकोना रोड, पश्चिम मेदिनीपुर जिले में टीएमसी के गुंडों ने मुझ पर बेरहमी से हमला किया। ममता बनर्जी सरकार की हिंसा और दंडमुक्ति की संस्कृति से उत्साहित इन कायरों ने ममता पुलिस की मौजूदगी में मुझ पर हमला किया। कानून के रखवाले मूक दर्शक बनकर खड़े रहे।' जमीन पर बैठकर दिया धरना शुभेंदु अधिकारी चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी में घुस गए और जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने घोषणा की कि जब तक हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे परिसर नहीं छोड़ेंगे। पुलिस चौकी पर अधिकारी ने एक वकील की मदद से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त बल को इलाके में भेजा गया है और घटना की जांच की जाएगी ताकि पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ था। भाजपा की आई कड़ी प्रतिक्रिया इस घटना पर केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और एक्स पर एक कड़ा बयान पोस्ट किया। मजूमदार ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, 'पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पूर्ण पतन अब बहस का विषय नहीं रहा, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विफल और निरंकुश शासन में, उनकी पूरी तरह से पक्षपाती, अक्षम और रीढ़विहीन पुलिस प्रशासन की मदद से यह हर दिन खुलेआम प्रदर्शित हो रहा है।' उन्होंने कहा कि नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के माननीय नेता सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर हिंसक और सुनियोजित हमले का शिकार हुए।

सीरिया में ऑपरेशन चलकर ISIS के ठिकानों पर US ने बरपाया कहर

न्यूयार्क. अमेरिका शनिवार की रात ईरान में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के ठिकानों पर कहर बनकर टूट पड़ा। इसे तीम अमेरिकी नागरिकों की मौत के बदले के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका के विदेश विभाग और सेंट्रल कमांड ने वीडियो जारी कर पूरी तस्वीर दुनिया के सामने रखी है। आपको बता दें कि यह कार्रवाई "ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक" का हिस्सा है, जिसे पिछले महीने अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले का बदला लेने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शुरू किया गया था। सेंट्रल कमांड द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को बेस से उड़ान भरते और सीरिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो फुटेज में कई ठिकानों को हवाई हमलों में ध्वस्त होते दिखाया गया है। पलमायरा हमले का प्रतिशोध अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि ये हमले 13 दिसंबर 2025 को पलमायरा में हुए उस हमले का जवाब हैं, जिसमें एक ISIS आतंकवादी ने घात लगाकर हमला किया था। इस दुखद घटना में आयोवा नेशनल गार्ड के दो बहादुर सैनिक, एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार (25) और विलियम नथानिएल हॉवर्ड (29) शहीद हुए थे। एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की भी जान गई थी। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद से सीरिया में अमेरिकी बलों पर यह पहला प्राणघातक हमला था। हम तुम्हें ढूंढ लेंगे और मार देंगे सेंट्रल कमांड ने वीडियो के साथ जारी बयान में आतंकियों को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। सेना ने कहा, "हमारा संदेश बहुत मजबूत है। यदि आप हमारे योद्धाओं को नुकसान पहुंचाएंगे, तो हम आपको दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढ निकालेंगे और खत्म कर देंगे। आप न्याय से बचने के लिए कितनी भी कोशिश कर लें, सफल नहीं होंगे।" क्या है ऑपरेशन हॉकआई यह ऑपरेशन 19 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब पहले चरण में मध्य सीरिया में करीब 70 ठिकानों को नष्ट किया गया था। इस अभियान में अमेरिका के साथ जॉर्डन की सेना भी सक्रिय रूप से शामिल है। शनिवार के इन हवाई हमलों से ठीक एक दिन पहले सीरियाई सुरक्षा बलों ने 'लेवेंट' क्षेत्र में ISIS के मुख्य सैन्य कमांडर को गिरफ्तार करने का दावा किया था। 2010 के दशक के मध्य में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर ISIS के कब्जे के बाद से ही अमेरिकी सेना वहां मौजूद है। वर्तमान में भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक सीरिया में तैनात हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से खत्म करना और भविष्य के हमलों को रोकना है।

लश्कर के नंबर 2 आतंकी ने पाकिस्तान के स्कूल में भाषण देकर करवाई थू-थू

इस्लामाबाद. लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है। सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, 'पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?' यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था। आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।

ईरान के राष्ट्रपति ने अल्लाह के खिलाफ युद्ध बताकर दी सजा-ए-मौत की चेतावनी

तेहरान. ईरान में आर्थिक तंगी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब अपने दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं। इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल ने प्रदर्शनकारियों को 'अल्लाह का शत्रु' घोषित करते हुए उन्हें फांसी की सजा देने की धमकी दी है। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर बयान देते हुए कहा कि जो कोई भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या दंगाइयों की मदद कर रहा है, उसे 'मोहारेबेह' (अल्लाह के खिलाफ युद्ध) का दोषी माना जाएगा। ईरानी कानून के तहत इस अपराध की सजा सिर्फ मौत है। उन्होंने निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और दया के इन लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी संकेत दिए हैं कि देशव्यापी स्तर पर अब बड़ा क्रैकडाउन शुरू किया जा सकता है। ईरान ने बाहरी दुनिया से संपर्क काटने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद, मानवाधिकार संस्थाओं से मिली जानकारी के अनुसार हालात बेहद चिंताजनक हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के अनुसार, अब तक कम से कम 72 लोग मारे गए हैं। प्रदर्शनों के दौरान 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, गचसरन में बासिज बल के 3 सदस्य मारे गए हैं और हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा अधिकारियों की मौत की खबरें हैं। ट्रंप सरकार की ईरान को सख्त चेतावनी अमेरिका ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, "अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है।" वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खेल न खेलें। जब वे कुछ कहते हैं, तो उसका मतलब होता है। क्या है इस गुस्से की वजह? प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था के कारण हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल अब तक के सबसे निचले स्तर 1.4 मिलियन (14 लाख) प्रति डॉलर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम की वजह से आम जनता दाने-दाने को मोहताज है। अब यह आर्थिक गुस्सा सीधे तौर पर देश की धार्मिक सत्ता को चुनौती देने वाले राजनीतिक विद्रोह में बदल गया है।

ओवैसी बोले-हिजाब वाली को अपना पार्टी अध्यक्ष बनाओ

मुंबई. 10 जनवरी को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कुछ ऐसा बोल दिया जिसने राजनीतिक गलियारों में तूफान मचा दिया। ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है, चाहे वह हिजाब पहनने वाली महिला हो। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संविधान की तुलना की और कहा कि पाकिस्तान में केवल एक खास धर्म के व्यक्ति ही शीर्ष पदों पर पहुंच सकते हैं, जबकि भारत का संविधान सभी को समान अवसर देता है। इस पर भाजपा ने तीखा पलटवार करते हुए ओवैसी से कहा कि व पहले अपनी पार्टी की अध्यक्ष को हिजाब पहनने वाली महिला को बनाएं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले महाराष्ट्र के सोलापुर में शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "पाकिस्तान के संविधान के अनुसार, वहां केवल एक धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है, लेकिन डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी नागरिक महापौर, राज्य का मुख्यमंत्री, या यहां तक कि देश का प्रधानमंत्री भी बन सकता है। उन्होंने कहा, "इंशाअल्लाह, वह दिन आएगा जब न तो मैं और न ही वर्तमान पीढ़ी जीवित रहेगी लेकिन हिजाब पहनने वाली एक बेटी भारत की प्रधानमंत्री जरूर बनेगी।" ओवैसी ने सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि वह दिन जरूर आएगा… मुसलमानों के खिलाफ जो नफरत फैलायी जा रही है, वह ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।" BJP का तीखा पलटवार ओवैसी के बयान पर भाजपा ने तुरंत करारा जवाब दिया। विभिन्न नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और विभाजनकारी बताया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा- संविधान के अनुसार कोई रोक नहीं है, कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है। लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र और हिंदू सभ्यता वाला देश है। हमें पूरा भरोसा है कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही रहेगा। BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ओवैसी को खुली चुनौती देते हुए कहा- संविधान किसी को नहीं रोकता, लेकिन ओवैसी मियां, पहले आप अपनी पार्टी AIMIM का अध्यक्ष किसी पसमांदा मुस्लिम या हिजाब/बुर्का पहनने वाली महिला को बनाकर दिखाएं। बड़े सपने देखने से पहले अपनी पार्टी में समावेशिता दिखाइए। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी तीखा हमला बोला- यह हिंदू राष्ट्र है, जहां 90% आबादी हिंदू है। हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिलाएं प्रधानमंत्री या मुंबई की मेयर नहीं बनेंगी। ऐसे लोगों के लिए यहां कोई जगह नहीं है। अगर इतना ही शौक है तो इस्लामिक देशों (जैसे इस्लामाबाद या कराची) में जाकर सपने पूरे करें। यह पूरा विवाद महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के बीच उठा है, जहां BJP और सहयोगी दलों ने मुंबई महापौर को हिंदू-मराठी बनाने पर जोर दिया है। ओवैसी ने इसे चुनावी राजनीति करार दिया और अल्पसंख्यकों व युवाओं से लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी की अपील की। भाजपा के सांसद अनिल बोंदे ने ओवैसी के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि हैदराबाद के सांसद आधा सच पेश कर रहे हैं। बोंदे ने दावा किया कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब नहीं पहनना चाहतीं। बोंदे ने ईरान में महिलाओं द्वारा हिजाब के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए दावा किया कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब नहीं चाहतीं क्योंकि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

अजीत डोभाल आज भी फोन और इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करते

नई दिल्ली. आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं। डोभाल ने कहा, "फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए। उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से। कौन हैं अजीत डोभाल? अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में 'कीर्ति चक्र' पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। पाकिस्तान में 7 साल 'अंडरकवर' अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक 'अंडरकवर' एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

मेयर ममदानी के न्यूयॉर्क की सड़कों पर हमास के समर्थन में नारेबाजी

न्यूयॉर्क. अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान "हम हमास का समर्थन करते हैं" के नारों ने राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। यह नारेबाजी क्वींस के एक प्रमुख यहूदी बहुल इलाके में की गई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेयर जोहरान ममदानी सहित कई शीर्ष नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को फिलिस्तीनी झंडे लहराते और हमास के समर्थन में नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि हमास को अमेरिकी सरकार द्वारा एक आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। यह घटना तब हुई जब प्रदर्शनकारी एक ऐसे पड़ोस से गुजर रहे थे जहां यहूदी आबादी अधिक है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इन नारों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए कहा कि आतंकवादी संगठनों का समर्थन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने एक्स पर लिखा, "आतंकवादी संगठन के समर्थन में नारों के लिए हमारे शहर में कोई जगह नहीं है। हम यह सुनिश्चित करना जारी रखेंगे कि न्यूयॉर्क के लोग बिना किसी डर के अपने इबादतगाहों में आ-जा सकें, साथ ही हम विरोध करने के संवैधानिक अधिकार की भी रक्षा करेंगे।" दिग्गज नेताओं ने जताई नाराजगी इस घटना पर न्यूयॉर्क की गवर्नर और कांग्रेस की वरिष्ठ सदस्य ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। गवर्नर कैथी होचुल ने कहा, "हमास एक आतंकी संगठन है जो यहूदियों के नरसंहार का आह्वान करता है। आपकी राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, इस तरह की बयानबाजी घृणित और खतरनाक है। न्यूयॉर्क में इसके लिए कोई जगह नहीं है।" कांग्रेस महिला ओकासियो-कोर्टेज ने इसे यहूदी विरोधी हरकत बताया। उन्होंने कहा, "एक यहूदी बहुल इलाके में जाकर 'हम हमास का समर्थन करते हैं' के नारे लगाना बेहद घृणित है।" मेयर के पुराने बयानों पर उठे सवाल मेयर ममदानी द्वारा इस बार हमास की निंदा करने पर उनके पुराने बयानों की भी चर्चा शुरू हो गई है। पिछले साल अक्टूबर में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान जब उनसे हमास की निंदा करने को कहा गया था, तब उन्होंने सीधे तौर पर ऐसा करने से इनकार कर दिया था और चर्चा को न्यूयॉर्क की महंगाई और खर्चों की ओर मोड़ दिया था। हालांकि, ताजा घटना के बाद उन्होंने अपने रुख में बदलाव दिखाया है।