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भारत और ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी बॉन्ड से दूरी बनाई, 2026 तक खत्म होगा अमेरिका का राज, भारत-रूस में 90% व्यापार डॉलर में नहीं

नई दिल्ली जहां विकसित देश अमरीकी बॉन्ड और डॉलर को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं, वहीं ब्रिक्स समेत उभरते देश अपनी वित्तीय स्वतंत्रता की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच विकसित देश अमरीकी सरकारी बॉन्ड्स और डॉलर खरीदते रहे। जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन इनमें पूंजी लगा रहे हैं। वहीं, भारत, चीन और ब्राजील जैसे ब्रिक्स देश इनसे दूरी बना रहे हैं। पिछले एक साल में भारत, चीन और ब्राजील ने अमरीकी बॉन्ड में निवेश 183 अरब डॉलर घटाया है। हर अमेरिकी पर 1 लाख डॉलर का कर्ज अमेरिकी कर्ज का जाल हाथ से निकल गया है। आहूजा का लिंक्डइन पोस्ट को लेकर वित्तीय हलकों में बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है-अमेरिका पर यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की कुल जीडीपी से भी ज्यादा कर्ज है। यह हर अमेरिकी पर एक लाख डॉलर से ज्‍यादा का कर्ज है। यह चेतावनी IMF की ओर से अमेरिका के 36 ट्रिलियन डॉलर के संघीय कर्ज पर हालिया आंकड़े के बाद आई है। IMF ने किस बात पर जताई है गंभीर चिंता आईएमएफ ने बीते साल अमेरिका के 36 ट्रिलियन डॉलर के संघीय ऋण पर चिंता जताई थी। यह कर्ज मुख्य रूप से 2008 के बाद के वित्तीय सहायता पैकेजों, रिकॉर्ड रक्षा खर्च और महामारी के दौरान दिए गए प्रोत्साहन पैकेजों के कारण बढ़ा है। अब अमेरिका के सबसे बड़े ऋणदाता अपना पैसा वापस चाहते हैं। चीन, जापान, ब्रिटेन और कनाडा ने चुपचाप अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बेचना शुरू कर दिया है। निवेशकों को बनाए रखने के लिए अमेरिका ब्याज दरें बढ़ा रहा है। लेकिन इससे संकट और गहरा रहा है। वार्षिक ब्याज भुगतान अब 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, जो पेंटागन के बजट से भी अधिक है दुनिया के कारोबार पर डॉलर का रहा है राज दशकों से अमेरिकी डॉलर ने दुनिया की अग्रणी आरक्षित मुद्रा के रूप में राज किया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अनुसार, 1999 से 2019 के बीच अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 96 प्रतिशत, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 74 प्रतिशत और बाकी दुनिया में 79 प्रतिशत डॉलर का उपयोग किया गया था। अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, अमेरिकी डॉलर का उपयोग लगभग 88 प्रतिशत मुद्रा विनिमय में किया जाता है और केंद्रीय बैंकों के रखे गए सभी विदेशी मुद्रा भंडार का 59 प्रतिशत उपयोग डॉलर में किया जाता है। भारत-रूस में 90 फीसदी कारोबार में गैर डॉलर मुद्रा में नवभारत टाइम्स के एक लेख के मुताबिक, रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने नवंबर, 2024 में कहा था कि भारत और रूस के बीच लगभग 90% व्यापार अब स्थानीय या वैकल्पिक मुद्राओं के माध्यम से हो रहा है, जबकि शेष व्यापार अभी भी अन्य मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्राओं में होता है। यानी इस कारोबार में डॉलर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने दिल्ली में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के 25वें सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में कहा-द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय और वैकल्पिक मुद्राओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। यह अब 90% के करीब पहुंच रही है। हम रूसी और भारतीय बैंकों के बीच संवाददाता संबंधों के विस्तार पर अपना काम जारी रखना आवश्यक समझते हैं। भारत ने कर दी थी बड़ी पहल, ब्रिक्स होगा मजबूत भारत ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान को सक्षम बनाने की दिशा में पहला कदम तब उठाया, जब जुलाई 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार लेनदेन के चालान और भुगतान को रुपये में अनुमति दे दी। यह कदम यूक्रेन युद्ध की शुरुआत और अंतर्राष्ट्रीय भुगतान एवं निपटान प्रणालियों से रूस को बाहर करने के बाद उठाया गया था। भारत में लगभग 20 प्राधिकृत डीलर (एडी) बैंकों को इस व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए 22 से अधिक देशों के साझेदार बैंकों के 92 विशेष रुपया वास्ट्रो खाते खोलने की अनुमति दी गई है। भारत के ब्रिक्स का अध्यक्ष बनने के बाद से इससमें और तेजी आ सकती है। भारतीय एक्सपर्ट ने भी बता दी हकीकत बीते साल जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मचेलानी ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा था कि प्रतिद्वंद्वी गुटों में बंटती दुनिया में पुतिन की 4-5 दिसंबर की नई दिल्ली यात्रा सिर्फ एक और कूटनीतिक पड़ाव नहीं है। यह एक शक्तिशाली भू-राजनीतिक बयान है। इस यात्रा से महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है, जिनमें स्विफ्ट प्रणाली को दरकिनार करने और अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करने के लिए डिजाइन किए गए नए भुगतान चैनल शामिल हैं।…भारत अपना एक स्पष्ट संदेश दे रहा है। ब्रिक्स मुद्रा के क्या फायदे हो सकते हैं एक नई मुद्रा से ब्रिक्स देशों को कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें अधिक कुशल सीमा-पार लेनदेन और बेहतर वित्तीय समावेशन शामिल हैं। ब्लॉकचेन तकनीक, डिजिटल मुद्राओं और स्मार्ट अनुबंधों का लाभ उठाकर, यह मुद्रा वैश्विक वित्तीय प्रणाली में क्रांति ला सकती है। निर्बाध सीमा-पार भुगतानों के माध्यम से, यह ब्रिक्स देशों और अन्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा दे सकती है। पुतिन ने डॉलर से अलग मुद्रा की बात की बीते साल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कजान के मंच से कहा था-हम डॉलर से इनकार नहीं कर रहे हैं, उससे लड़ नहीं रहे हैं, लेकिन अगर वे हमें इसके साथ काम करने नहीं देंगे, तो हम क्या कर सकते हैं? हमें तब अन्य विकल्पों की तलाश करनी होगी, जो हो भी रहा है। एक संभावित ब्रिक्स मुद्रा इन देशों को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए अपनी आर्थिक स्वतंत्रता का दावा करने में सक्षम बनाएगी। वर्तमान प्रणाली में अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व है, जो सभी मुद्रा व्यापार का लगभग 89 प्रतिशत है। परंपरागत रूप से, लगभग 100 प्रतिशत तेल व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता था। हालांकि, 2023 में तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गैर-अमेरिकी डॉलर मुद्राओं का उपयोग करके किया गया। ब्रिक्स देश इसलिए चाहते हैं डॉलर के मुकाबले नई मुद्रा ब्रिक्स देशों के समक्ष हाल की वैश्विक वित्तीय चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। आक्रामक अमेरिकी विदेश नीतियां भी इसके पीछे बड़ी वजह हैं। अपने आर्थिक हितों को बेहतर ढंग से पूरा करने का मकसद है। अमेरिकी डॉलर और यूरो पर वैश्विक निर्भरता कम करने का लक्ष्य है। अमेरिका-यूरोप की पाबंदियों … Read more

महतारी वंदन योजना: रायपुर में महिलाओं को आर्थिक संबल से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर : महतारी वंदन योजना : आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता तक महिलाओं के सशक्तिकरण की कहानी रायपुर छत्तीसगढ़ में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और समाज में उनकी निर्णायक भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई महतारी वंदन योजना आज महिला सशक्तिकरण की एक प्रभावी और दूरगामी पहल के रूप में उभर रही है। यह योजना न केवल महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हुए स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसरों से भी जोड़ रही है। आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता तक महिलाओं के सशक्तिकरण की कहानी     योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की निश्चित सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक राज्य की लाखों महिलाओं को 23 किश्तों में कुल 14,948 करोड़ 34 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। इस नियमित सहयोग से महिलाओं की घरेलू खर्चों की चिंता कम हुई है, आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगी हैं। स्वरोजगार की ओर बढ़ते कदम     महतारी वंदन योजना का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि महिलाएं इस सहायता राशि का सदुपयोग कर छोटे-छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर रही हैं। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा नगर के वार्ड क्रमांक 02 की निवासी श्रीमती उर्मिला यादव ने हर माह मिलने वाली राशि को बचाकर आर्टिफिशियल गहनों का व्यवसाय शुरू किया। आज वे घर से तथा साप्ताहिक हाट-बाजारों में गहनों का विक्रय कर प्रतिमाह लगभग 2,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं।     इसी तरह चांपा की श्रीमती ज्योति कसेर ने योजना की सहायता से पापड़ व्यवसाय प्रारंभ किया, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 5,000 रुपये का लाभ हो रहा है। इससे वे अपने परिवार की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को सहजता से पूरा कर पा रही हैं। ग्राम सरहर की श्रीमती सुमित्रा कर्ष ने श्रृंगार सामग्री की दुकान शुरू कर लगभग 1,000 रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय अर्जित की, जबकि श्रीमती कुसुम देवी पाण्डेय ने अपनी श्रृंगार दुकान का विस्तार कर अब हर महीने 2,000 रुपये का मुनाफा प्राप्त कर रही हैं। गरीब परिवारों के जीवन में स्थायित्व     यह योजना मजदूरी और सीमित आय पर निर्भर परिवारों के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का आधार बन रही है। कबीरधाम जिले के ग्राम मझगांव की निवासी श्रीमती सतरूपा गंधर्व, जो मजदूरी पर निर्भर परिवार से हैं, को अब तक योजना के तहत 23 किश्तों में 23,000 रुपये प्राप्त हो चुके हैं। वे बताती हैं कि इस राशि से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतें और व्यक्तिगत     आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो पा रही हैं। नियमित सहायता से अब वे कुछ बचत भी कर पा रही हैं, जिससे आकस्मिक खर्चों की चिंता समाप्त हो गई है।बलरामपुर जिले के ग्राम रघुनाथनगर की साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती ओमलता भी इस योजना से लाभान्वित होकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ी हैं।   महिलाओं के सम्मान और भागीदारी में वृद्धि     महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में स्थायित्व, सम्मान और आत्मविश्वास लाने वाली पहल है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।     महतारी वंदन योजना आज केवल एक आर्थिक सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। यह योजना प्रदेश की महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रही है और छत्तीसगढ़ को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला रही है।

भारत में अफगानिस्तान का पहला राजनयिक – नूर अहमद नूर कौन हैं और यह कदम क्यों है अहम?

नई दिल्ली अफगानिस्तान ने नूर अहमद को अपने भारत स्थित दूतावास में राजनयिक नियुक्त किया है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत में किसी अफगान राजनयिक की यह पहली नियुक्ति है। नूर अहमद इससे पहले अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में पहले राजनीतिक निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं। अब वह अपनी नई जिम्मेदारी के लिए भारत पहुंच चुके हैं। नूर अहमद नूर की नियुक्ति भारत-अफगानिस्तान के बीच कूटनीति के नए दौर की शुरुआत का संकेत देती है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश हो रही है। 20 दिसंबर को, अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री, मौलवी नूर जलाल जलाली ने कहा कि भारत अफगानिस्तान की दवा संबंधी जरूरतों के लिए प्रमुख वैकल्पिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। बता दें कि पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के संबंध काफी ज्यादा खराब हैं। जलाली ने कहा कि हमारा भारत के साथ मजबूत संबंध है, और हम सहयोग और साझेदारी का एक नया अध्याय खोलने के लिए यहां हैं। जब पाकिस्तान की बात आती है, तो संबंध बिगड़े हुए हैं। जलाली की यह टिप्पणियां उनके भारत दौरे के दौरान आईं। वह नई दिल्ली में आयोजित दूसरे विश्व स्वास्थ्य संगठन पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए आए थे। इस दौरे के दौरान, भारत ने अफगानिस्तान के लिए लगातार मानवीय सहायता जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें दवाओं और स्वास्थ्य सहायता की लंबी अवधि की आपूर्ति को द्विपक्षीय संवाद का एक प्रमुख स्तंभ बताया गया। अक्तूबर 2025 में, अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खां मुतक्की ने तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद पहली बार भारत का दौरा किया। तब मुतक्की ने कहा कि यात्रा अब तक बहुत अच्छी रही है। न केवल दारुल उलूम के लोग, बल्कि इलाके के सभी लोग यहां आए हैं। मैं उनके द्वारा मुझे दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभारी हूं। इससे पहले नवंबर 2024 में अफगानिस्तान के वाणिज्य और उद्योग मंत्री अल्हाज नूरुद्दीन अजीजी ने घोषणा की थी कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही वीजा समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। इससे अफगान नागरिक अब चिकित्सा उपचार और व्यापारिक उद्देश्यों के लिए भारतीय वीजा प्राप्त कर सकते हैं।

V2V टेक्नोलॉजी से सड़क पर आपस में बात करेंगी गाड़ियां, सरकार का हादसों को रोकने का प्लान

नई दिल्ली कल्पना कीजिए कि आप घने कोहरे में गाड़ी चला रहे हैं, सामने कुछ दिख नहीं रहा है, लेकिन आपकी कार आपको पहले ही बता दे कि आगे खड़ी गाड़ी कितनी दूर है. या पीछे से तेज रफ्तार वाहन आ रहा है और सिस्टम आपको अलर्ट कर दे. सरकार अब इसी तरह की एक ख़ास तकनीकी को वाहनों में देने की योजना पर काम कर रही है. भारत सरकार 2026 के अंत तक देश में व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने की तैयारी में है. इसका सीधा मकसद है सड़कों पर हादसों की संख्या को कम करना और यात्रियों की जान बचाना है. क्या है V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी V2V टेक्नोलॉजी के तहत गाड़ियां आपस में सीधे बातचीत करेंगी. इसके लिए किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी. जब दो वाहन एक-दूसरे के ज्यादा करीब आएंगे तो सिस्टम तुरंत सिग्नल भेजेगा और ड्राइवर को अलर्ट कर देगा. इससे किसी भी संभावित टक्कर की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी और आप सेफ ड्राइविंग का आनंद ले सकेंगे. यह तकनीक खास तौर पर उन हादसों को रोकने में मदद करेगी, जो सड़कों पर खड़ी गाड़ियों और पीछे से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों के बीच होते हैं. सर्दियों में घने कोहरे के कारण होने वाले बड़े हादसों और कई गाड़ियों की टक्कर को भी यह सिस्टम रोक सकता है. जब विजिबिलिटी लगभग जीरो हो जाती है, तब यह टेक्नोलॉजी ड्राइवर के लिए तीसरी आंख का काम करेगी. नितिन गडकरी ने क्या कहा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य परिवहन मंत्रियों के साथ हुई सालाना बैठक के बाद इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में इस टेक्नोलॉजी पर विस्तार से चर्चा हुई है और इसे जल्द लागू किया जाएगा. उनके मुताबिक यह सिस्टम खास तौर पर पार्क की गई गाड़ियों और कोहरे में होने वाले हादसों को रोकने में बेहद कारगर साबित होगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने इसे रोड सेफ्टी की दिशा में बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. भारत में इसे लागू करना एक बड़ी उपलब्धि होगी. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. कैसी होगी यह टेक्नोलॉजी यह सिस्टम एक खास डिवाइस के जरिए काम करेगा, जो सिम कार्ड जैसी होगी और गाड़ी में लगाई जाएगी. यह डिवाइस आसपास मौजूद अन्य वाहनों से सिग्नल लेकर जानकारी साझा करेगी. ताकि सड़क पर मौजूद सभी वाहनों में कम्युनिकेशन सिस्टम डेवलप हो सके. हालांकि इस सिस्टम के एक्टिव होने के बाद चालक को इससे मिलने वाले किसी भी तरह के अलर्ट पर तुरंत रिएक्ट करना जरूरी होगा. कैसे मददगार होगी यह तकनीक यह टेक्नोलॉजी सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करेगी. साथ ही सड़क किनारे खड़ी या रुकी हुई गाड़ियों के बारे में भी ड्राइवर को चेतावनी देगी. यह सिस्टम 360 डिग्री काम करेगा. यानी आगे, पीछे और दोनों तरफ से आने वाले वाहनों के सिग्नल ड्राइवर तक पहुंचेंगे. क्या देने होंगे पैसे इस परियोजना की कुल लागत लगभग 5000 करोड़ रुपये आंकी गई है. उपभोक्ताओं से भी इसके लिए शुल्क लिया जाएगा, लेकिन इसकी कीमत अभी तय नहीं की गई है. इसके बारे में अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा भी नहीं की गई है. कब से लागू होगी तकनीक परिवहन मंत्रालय 2026 के अंत तक इस टेक्नोलॉजी को नोटिफाई करने की तैयारी में है. इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से इसे सभी वाहनों में लागू किया जाएगा. शुरुआत में यह सिस्टम सिर्फ नई गाड़ियों में लगाया जाएगा. V2V सिस्टम एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS के साथ मिलकर काम करेगा. अभी कुछ महंगी एसयूवी में इस तरह की तकनीक मौजूद है, लेकिन वह सेंसर पर आधारित है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन गाड़ियों को भी नए सिस्टम के हिसाब से अपडेट किया जाएगा. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि V2V टेक्नोलॉजी आने वाले समय में सड़क हादसों को कम करने और ट्रैफिक सेफ्टी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2026 के बाद भारतीय सड़कों पर गाड़ियां सिर्फ चलेंगी नहीं, बल्कि एक-दूसरे से बात भी करेंगी.  

ISRO का PSLV रॉकेट: 63 में से 60 सफल मिशन, अब नई उड़ान की ओर बढ़ेगा

 नई दिल्ली PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का वर्कहॉर्स (मुख्य काम करने वाला रॉकेट) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बहुत विश्वसनीय और बार-बार इस्तेमाल होने वाला रॉकेट है. यह 1993 से लगातार काम कर रहा है. विभिन्न प्रकार के सैटेलाइट्स (छोटे से बड़े, भारतीय और विदेशी) को सटीक ऑर्बिट में पहुंचाने में माहिर है. अगली लॉन्चिंग कौन सी और कब? अगली PSLV लॉन्च PSLV-C62 है, जो 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे IST श्रीहरिकोटा के फर्स्ट लॉन्च पैड से होगी. यह इसरो की 2026 की पहली ऑर्बिटल लॉन्च होगी. मुख्य पेलोड EOS-N1 (Anvesha) नामक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (DRDO द्वारा विकसित) है. साथ में 18 अन्य को-पैसेंजर सैटेलाइट्स (भारतीय और अंतरराष्ट्रीय) जाएंगे. यह PSLV की 64वीं उड़ान होगी. यह लॉन्च PSLV-C61 की 2025 वाली असफलता के बाद वापसी का प्रतीक है. विश्वसनीयताः 94% से ज्यादा सफलता दर (कई दशकों में सिर्फ 2-3 असफलताएं). लचीलापनः अलग-अलग वेरिएंट (XL, QL, DL, CA) से 100 ग्राम से 1700 किग्रा तक पेलोड ले जा सकता है. मल्टी-सैटेलाइट लॉन्चः एक ही उड़ान में 100+ सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है (2017 में 104 सैटेलाइट्स का विश्व रिकॉर्ड). महत्वपूर्ण मिशनः चंद्रयान-1, मंगलयान (Mangalyaan), आदित्य-L1, Astrosat जैसे बड़े मिशन इसी ने किए. यह ISRO की कॉमर्शियल लॉन्च सर्विस (NSIL के जरिए) का सबसे बड़ा आधार है, जिससे विदेशी सैटेलाइट्स लॉन्च करके भारत को कमाई और विश्वसनीयता मिलती है. PSLV की लॉन्चिंग कब शुरू हुई? PSLV की पहली लॉन्च 20 सितंबर 1993 को हुई थी (PSLV-D1). यह विकास चरण था. असफल रहा था. पहली सफल लॉन्च 15 अक्टूबर 1994 में हुई. अब तक कितनी सफल और असफल? जनवरी 2026 तक PSLV की कुल उड़ानें 63 (PSLV-C61 तक) हो चुकी हैं.       सफलः  60 (लगभग 95% सफलता दर).     असफलः 3 (पूर्ण या आंशिक). असफलताओं के कारण     1993 (PSLV-D1) — पहली विकास उड़ान, सॉफ्टवेयर और इंजन कंट्रोल में समस्या से रॉकेट नियंत्रण खो बैठा.     2017 (PSLV-C39/IRNSS-1H) — हीट शील्ड (फेयरिंग) अलग नहीं हुआ, सैटेलाइट ऑर्बिट में नहीं पहुंचा.     2025 (PSLV-C61/EOS-09) — तीसरे स्टेज में चैंबर प्रेशर गिरने से थ्रस्ट कम हुआ, सैटेलाइट ऑर्बिट में नहीं पहुंचा. संभावित कारण: नोजल या सॉलिड मोटर में तकनीकी खराबी (पूर्ण रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई). PSLV का भविष्य क्या है? PSLV का भविष्य बहुत उज्ज्वल है. यह अभी भी ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट है और आने वाले सालों में भी मुख्य रहेगा.       प्राइवेट सेक्टर का रोलः 2022 से PSLV का उत्पादन और ऑपरेशन प्राइवेट कंसोर्टियम (L&T, HAL आदि) को सौंपा जा रहा है. 2026 में पहली प्राइवेट PSLV लॉन्च संभावित है.     नई तकनीकः 3D प्रिंटेड पार्ट्स, बेहतर इंजन (जैसे PS4 में सुधार) से लागत कम और विश्वसनीयता बढ़ रही है.     भविष्य के मिशनः छोटे सैटेलाइट्स, कमर्शियल राइडशेयर, रिमोट सेंसिंग, नेविगेशन और अंतरिक्ष विज्ञान मिशन इसी पर निर्भर रहेंगे.     प्रतिस्पर्धाः SSLV और LVM3 जैसे नए रॉकेट्स आएंगे, लेकिन PSLV की सटीकता और कम लागत के कारण यह वर्कहॉर्स बना रहेगा. PSLV ने भारत को अंतरिक्ष में विश्वसनीयता दी है. आने वाले दशकों में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. PSLV-C62 की सफलता इसकी मजबूती को फिर साबित करेगी. 

बिहार DGP ने किया खुलासा, राज्य में 60% अपराध जमीन विवाद से जुड़े, अब मंत्री विजय सिन्हा क्या कदम उठाएंगे?

पटना   डिप्टी सीएम विजय सिन्हा एक तरफ जमीन विवादों को निपटाने के लिए लगातार एक्शन मोड में दिख रहे वहीं दूसरी तरफ बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने बड़ी बात कह दी है. डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि बिहार में बढ़ते अपराध का मुख्य कारण जमीन विवाद है. राज्य में लगभग 50 से 60 प्रतिशत आपराधिक घटनाएं जमीन विवाद के ही कारण हो रही है. समय पर विवाद नहीं निपटाना बड़ा कारण डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि राज्य में गोलीबारी या फिर हत्या जैसी घटनाओं के पीछे का कारण अक्सर जमीन विवाद ही होता है. कई बार ऐसा होता है कि समय पर जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा नहीं हो पाता है. ऐसे में ये मामले आपराधिक घटनाओं में बदल जाते हैं. हालांकि, जमीन विवाद से जुड़े मामले मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार से ही जुड़े होते हैं. पुलिस जमीन विवाद में नहीं करेगी हस्तक्षेप डीजीपी ने क्लियर किया कि वह इस मामले हस्तक्षेप नहीं करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस का हस्तक्षेप जमीन से जुड़े मामलों में सीमित होता है, क्योंकि पुलिस के पास राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा या फिर खतियान भी नहीं होता है, जिससे मामले को सुलझाया जा सके. लेकिन आगे डीजीपी ने यह भी कहा, अगर मामले आपराधिक घटना में बदलते हैं तो पुलिस हस्तक्षेप करेगी. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते जमीन से जुड़े मामले निपटा लिए जाए तो आपराधिक घटनाओं में कमी आ सकती है. क्या होगा मंत्री विजय सिन्हा का अगला स्टेप? दरअसल, डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा लगातार जमीन से जुड़े विवादों को सुन रहे हैं. किसी तरह की परेशानी होने पर विभाग के अधिकारियों की फटकार भी लगा रहे हैं. साथ ही वे जमीन के विवाद निपटाने के लिए अल्टीमेटम दे रहे हैं. ऐसे में डीजीपी के इस खुलासे के पास मंत्री विजय सिन्हा का अगला स्टेप क्या कुछ होता है, यह देखने वाली बात होगी. जमीन माफियाओं पर कड़ी नजर इधर, डीजीपी विनय कुमार जमीन माफियाओं के खिलाफ सख्त दिखे. उन्होंने स्पष्ट किया कि जबरन जमीन हड़पने, कब्जा करने वाले और माफियाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है. बिहार पुलिस की तरफ से इस संबंध में कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. जमीन संबंधी अपराध को लेकर डीजीपी के इस बड़े बयान के बाद बिहार में जल्द बदलाव दिख सकेगा, इस बात की बड़ी संभावना है.

नक्सलियों के कॉरिडोर वाले जंगल अब होंगे जंगली भैंसों का निवास, नई योजना शुरू

बालाघाट मध्य भारत के पूर्वी हिस्से में फैली घनी जंगल की एक विशाल पट्टी, जिसे पहले नक्सली समूह अपनी विस्तार योजना के लिए मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते थे, अब जंगली भैंसों (Wild Buffalo) का घर बनने जा रही है, जो मध्य प्रदेश में करीब 100 साल पहले विलुप्त हो चुकी थीं। यह जंगल कान्हा टाइगर रिज़र्व के सुपखर रेंज में स्थित है, जो बालाघाट और मंडला जिलों में फैला है। योजना के तहत असम से जंगली भैंसों का पहला दल फरवरी-मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पहुंच जाएगा।  दोनों भाजपा शासित राज्य, असम और मध्य प्रदेश, ने हाल ही में वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम पर सहमति जताई है। इस कार्यक्रम के तहत जंगली भैंसों के साथ-साथ गैंडा, नाग, बाघ और मगरमच्छ भी एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजे जाएंगे। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, हिमंता बिस्वा शर्मा और डॉ. मोहन यादव, के बीच हुई बैठक में तय हुआ कि 50 जंगली भैंसों को तीन वर्षों में असम से मध्य प्रदेश लाया जाएगा, जबकि गैंडे और तीन नाग भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में रहेंगे। असम को मध्य प्रदेश से एक बाघ जोड़ी और छह मगरमच्छ मिलेंगे। फरवरी-मार्च में 10 से 15 भैंस का पहला समूह  कान्हा टाइगर रिज़र्व में जंगली भैंसों के पुनर्वास का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि यह क्षेत्र लंबे घास के मैदान, जल स्रोतों की उपलब्धता और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप के लिहाज से सबसे उपयुक्त है। वन्यजीव संस्थान (WII) की विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट में भी सुपखर रेंज को जंगली भैंसों के लिए सबसे अनुकूल माना गया। कान्हा टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र जंगली भैंसों का प्राकृतिक आवास रहा है। सुपखर रेंज के जंगलों में सुरक्षित एन्क्लोजर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, ताकि फरवरी-मार्च में आने वाली पहली बैच (10-15 भैंस) को सुरक्षित रखा जा सके।  नक्सली समूह केबी डिवीजन के विस्तार के मार्ग था  राज्य पुलिस के एंटी-नक्सल विभाग के सूत्रों के अनुसार, “सुपखर रेंज का यह हिस्सा पहले नक्सली समूह KB डिवीजन के लिए मंडला, डिंडोरी, उमरिया और अनुपपुर जिलों तक विस्तार के लिए मार्ग था, लेकिन दिसंबर 2025 की पहली सप्ताह में एमएमसी जोन के सक्रिय नक्सलियों की मौत और आत्मसमर्पण के बाद खाली है। अब अब वन विभाग के प्रोजेक्ट्स जैसे जंगली भैंसों का पुनर्वास शुरू करने के लिए स्थिति अनुकूल है।   

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में होगी कड़ी सुरक्षा: एंट्री से पहले आइरिस और फिंगरप्रिंट जांच, AI से बनेगा प्रश्नपत्र

भोपाल मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की इस साल होने वाली परीक्षाओं में सुरक्षा के काफी प्रबंध रहेंगे। सभी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पहचान का सत्यापन आधार आधारित फेस (चेहरे), आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन और फिंगर (अंगुलियों की छाप) प्रणाली से किया जाएगा। इससे ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जो दूसरे के नाम पर परीक्षा देने बैठते हैं। इसके लिए ईएसबी परीक्षा केंद्रों पर आइरिस स्कैन और फेस रिकोग्निशन मशीनें लगाएगा। परीक्षा केंद्रों पर अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नकल रोकने के लिए जैमर भी लगाए जाएंगे। इस संबंध में ईएसबी ने दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इस बार ईएसबी प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भी सहायता लेगा। इस वर्ष विभिन्न सरकारी विभागों में करीब 15 हजार पदों के लिए 16 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ये भर्तियां पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य अहम विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए की जाएंगी। बता दें, कि ये कदम वर्ष 2023 की आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है, जब अभ्यर्थियों ने आधार के बायोमेट्रिक पहचान में धोखाधड़ी कर परीक्षा पास कर ली थी। शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान ऐसे कुछ अभ्यर्थी पकड़े गए थे। फर्जी अभ्यर्थी की पहचान हो सकेगी अधिकारियों ने बताया कि आइरिस स्कैन को अंगुलियों के निशान से कहीं अधिक सुरक्षित माना जाता है। यह एक ऐसी बायोमेट्रिक तकनीक है जो सटीक होती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हर व्यक्ति की आंख की पुतली का पैटर्न बेहद अनोखा और जटिल होता है, जिसे बदला नहीं जा सकता है। इसी तरह फेस रिकोग्निशन भी सुरक्षित माना जा रहा है। तीन एजेंसियां करेंगी काम एआई के माध्यम से पुलिस भर्ती परीक्षा को संपन्न कराया जाएगा। इसमें केंद्र के निर्धारण से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और परीक्षार्थियों की जांच सब कुछ एआई के माध्यम से होगा। एआई चार प्रकार से डाटा विश्लेषण कर ईएसबी को भेजेगा। इसमें परीक्षार्थियों द्वारा हल किए गए सवालों पर साफ्टवेयर के माध्यम से नजर रखी जाएगी कि एक विद्यार्थी एक प्रश्न कितने देर में हल कर रहा है। परीक्षार्थी किस प्रश्न पर कितनी देर रुका, प्रश्नों को हल करने में कितना समय लगा, कितनी देर वह खाली बैठा रहा। इसके आधार पर संदिग्ध की पहचान हो सकेगी। अगर अभ्यर्थी सिर्फ 15 से 20 मिनट में जवाब दे देता है तो एआइ मंडल को रेड अलर्ट भेजेगा। तीन एजेंसियां मिलकर परीक्षा संपन्न कराएंगी।

विद्युत जामवाल का विवादित वीडियो: पेड़ पर चढ़ने से लेकर आंखों पर मोम डालने तक

मुंबई   बॉलीवुड के एक्शन हीरो विद्युत जामवाल अब इंटरनेशनल स्टार बन गए हैं. उन्हें इस साल फिल्म 'स्ट्रीट फाइटर' में देखा जाने वाला है. इस बीच विद्युत असल जिंदगी में भी खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं. कभी वो अपनी आंखों पर गर्म-पिघलती मोम डालते हैं तो कभी पेड़ पर चढ़ जाते हैं. ट्विस्ट ये है कि वो न्यूड होकर पेड़ पर चढ़ रहे हैं. एक्टर की ये लेटेस्ट वीडियो वायरल हो गई है. कुछ दिन पहले विद्युत जामवाल ने अपनी एक वीडियो शेयर की थी. इसमें उन्हें एक इवेंट के दौरान डांस करते और अपनी आंखों पर मोम डालते देखा गया था. अब विद्युत ने अपने कपड़े त्याग दिए हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नई वीडियो शेयर की है, जिसमें उन्हें पेड़ पर चढ़ते देखा जा सकता है. इस वीडियो में विद्युत पूरी तरह न्यूड हैं. विद्युत ने शेयर की न्यूड वीडियो वीडियो में विद्युत पहले पेड़ पर चढ़ते हैं और फिर उतरते हैं. इसके अलावा उन्हें भालों तक बैलेंस करते, बर्फ में घुसकर तपस्या करते, खाई के ऊपर एक रस्सी पर चलते, आंखों पर मोम डालते भी देखा जा सकता है. ये सबकुछ उनकी कलरिपयट्टू कला का हिस्सा है. एक्टर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, 'एक कलरिपयट्टू प्रैक्टिस करने वाले के रूप में मैं हर साल योगिक साधना 'सहज' में डूबता हूं.    सहज का मतलब है प्राकृतिक सरलता और सहज प्रवृत्ति की उस अवस्था में वापस लौटना, जो हमें प्रकृति से गहरे जुड़ाव और आंतरिक जागरूकता की ओर ले जाता है. वैज्ञानिक दृष्टि से यह अभ्यास अनेक न्यूरोरिसेप्टर्स और प्रोप्रियोसेप्टर्स को सक्रिय करता है, जिससे सेंसरी फीडबैक में बढ़ोतरी होती है और संतुलन तथा समन्वय में सुधार आता है. इसकी वजह से शरीर के प्रति गहरी जागरूकता, मानसिक एकाग्रता में बढ़ोतरी और एक गहन ग्राउंडेडनेस का एहसास होता है.' विद्युत जामवाल भले ही अपने मन को एकाग्र करने के लिए न्यूड होकर पेड़ चढ़े हो, लेकिन यूजर्स उन्हें देख अशांत हो गए हैं. इंटरनेट पर ये वीडियो वायरल हो गई है और इसी के साथ तगड़ी हलचल भी मच गई है. कई यूजर्स के होश उड़े हुए हैं, तो वहीं कई एक्टर की चुटकी भी ले रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट लिखा, ' सर नेचर में इतना डीप भी नहीं जाना था.' दूसरे ने लिखा, 'टार्जन भी पत्ते पहनता था, मगर सर आप तो महान हो.' तीसरे ने कमेंट किया, 'वो ही असल में इंसानों की जिंदगी जी रहे हैं.' एक और ने लिखा, 'भाई नंगे होने वाली क्या बात थी?' हॉलीवुड में एंट्री कर रहे विद्युत विद्युत जामवाल सालों से कलरिपयट्टू को प्रैक्टिस कर रहे हैं. साथ ही वो नेचर से जुड़ने के लिए अक्सर कुछ न कुछ करते हैं. इससे पहले दिसंबर 2023 में एक्टर ने अपनी न्यूड फोटोज शेयर की थीं. उन्होंने बताया था कि हिमालयन रेंज में उन्होंने अपने साथ वक्त बिताया. यहां विद्युत को ठंडे पानी से भरी नदी में न्यूड खड़े होकर तपस्या करते देखा गया था. प्रोजेक्ट्स की बात करें तो एक्टर अपने हॉलीवुड डेब्यू के लिए तैयार हैं. उन्हें फिल्म 'स्ट्रीट फाइटर' में डालसिम का किरदार निभाते देखा जाएगा, जो एक योगी है. ये फिल्म, पॉपुलर वीडियो गेम स्ट्रीट फाइटर का लाइव एक्शन वर्जन है. 16 अक्टूबर 2026 को ये दुनियाभर में रिलीज होगी.

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट-2026 की शुरुआत रविवार से, रवीन्द्र भवन में होगा आयोजन

दो दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट-2026 रविवार से रवीन्द्र भवन में देश और प्रदेश का टेलेंट देगा विकसित भारत का संदेश, दो दिन होंगे अनेक सत्र प्रदर्शनी में दिखेगी मौजूदा और भविष्य के म.प्र. की उत्कृष्ट उद्यमशीलता की झांकी भोपाल  मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 का आयोजन 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में होगा। यह दो दिवसीय स्टार्टअप समिट शिखर सम्मेलन देशभर के स्टार्टअप्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, एफपीओ, एमएसएमई एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े साझेदारों को एक साझा मंच पर लाएगा। समिट के माध्यम से राज्य के तेज़ी से विकसित होते स्टार्टअप इकोसिस्टम, नीति-आधारित सुधारों, निवेश अवसरों एवं प्रेरक सफलता कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही नेटवर्किंग, सीखने एवं सहयोग के लिए उच्च प्रभाव वाला मंच प्रदान किया जाएगा। प्रथम दिवस : क्षमता निर्माण, एफपीओ एवं स्टार्टअप पिचिंग सत्र समिट के पहले दिन का फोकस ज्ञान-साझाकरण एवं स्टार्टअप सहभागिता के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने पर रहेगा। सत्र की दिन की शुरुआत “इन्क्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी” पर इन्क्यूबेटर मास्टर क्लास से होगी, जिसमें NSRCEL–IIM बैंगलोर, ISBA, IIM इंदौर तथा देश के अग्रणी इन्क्यूबेटर्स के विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। इसके बाद एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने एवं वैल्यू चेन परिवर्तन विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें नवाचार, इम्पैक्ट फंडिंग एवं स्केलेबल एग्री-उद्यमिता मॉडल्स पर विचार विमर्श होगा। दोपहर पश्चात स्टार्टअप पिचिंग सत्र (क्वालिफायर राउंड) आयोजित किया जाएगा, जिसमें चयनित स्टार्टअप्स निवेशकों एवं मेंटर्स के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। द्वितीय दिवस : पिचिंग फाइनल्स, उद्घाटन सत्र एवं सेक्टोरल संवाद सत्र समिट के दूसरे दिन की शुरुआत स्टार्टअप पिचिंग फाइनल्स से होगी, जिसमें उच्च संभावनाओं वाले स्टार्टअप्स का चयन किया जाएगा। इस दिन यानि 12 जनवरी सोमवार को उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। साथ ही देश के प्रतिष्ठित उद्यमियों एवं निवेशकों —अमन गुप्ता (को-फाउंडर बोट), अंकित अग्रवाल (फाउंडर एवं सीईओ इशयोरेंस देखो) एवं विनीत राय (फाउंडर आविष्कार ग्रुप) का संबोधन भी होगा। इस अवसर पर प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। इस अवसर पर स्टार्टअप अवॉर्ड्स, एमपी स्टार्टअप इंस्पायरिंग स्टोरीज़ संकलन का विमोचन, सिंगल-क्लिक इंसेंटिव पहल तथा राष्ट्रीय संस्थानों के साथ रणनीतिक एमओयू भी संपादित किए जाएंगे। दोपहर बाद सेक्टोरल सत्रों एवं फायरसाइड चैट्स के माध्यम से रियल ग्रोथ मैट्रिक्स, महिला उद्यमिता, स्टार्टअप्स एवं ओडीओपी एमएसएमई के लिए सोशल मीडिया व इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, तथा वैश्विक विस्तार रणनीतियों जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इच्छुक प्रतिभागी लिंक https://startup.mp.gov.in/event/ पर पंजीकरण कर सकते हैं।