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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से इंदौर का पर्यटन प्रभावित, टूर कैंसल, अंतरराष्ट्रीय छवि और व्यवसाय को नुकसान

 इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई 18 मौतों की चर्चा अब देश के साथ-साथ विदेशों में भी होने लगी है। विदेशी मीडिया में सुर्खियां बनने के कारण इसका सीधा असर इंदौर के पर्यटन क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। हाल ही में इंदौर के दो बड़े टूर निरस्त हो गए हैं और जो पर्यटक शहर आ रहे हैं, वे भी यहां के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित नजर आते हैं। आमतौर पर महेश्वर और ओंकारेश्वर जाने वाले पर्यटक इंदौर भी घूमने आया करते हैं, लेकिन  उनकी संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही कांग्रेस ने भी इंदौर के स्वच्छता अवार्डों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भागीरथपुरा में 26 दिसंबर से मरीजों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था, जिसके बाद मौतों की खबरें सामने आईं। इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन दूषित पानी की इस घटना ने शहर की छवि को प्रभावित किया है। कांग्रेस ने इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इंदौर ट्रेवल्स एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन के अनुसार, मॉरीशस से अधिकारियों का एक दल जनवरी के पहले सप्ताह में इंदौर आने वाला था, जिसे रद्द कर दिया गया। इसी तरह बेंगलुरु से मध्य प्रदेश भ्रमण पर आने वाले एक समूह ने भी अपनी बुकिंग निरस्त करा दी है। दिसंबर और जनवरी के महीने पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इस बार पर्यटकों की आमद कम है। भागीरथपुरा मुद्दे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि गंदे पानी के कारण हुई ये मौतें एक बड़ा सबक हैं। उन्होंने बताया कि बस्ती में पेयजल लाइन बिछाने के प्रस्ताव लंबे समय से लंबित थे, जिन्हें समय पर लागू करने में विफलता हाथ लगी। विजयवर्गीय के अनुसार, वर्षों की मेहनत से शहर ने जो पहचान बनाई थी, इस घटना से उस पर दाग लगा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर इस दुखद घटना को लेकर बैठा नहीं रह सकता। इंदौर की प्रगति हमेशा सामूहिकता से हुई है और इस हादसे के बाद शहर का गौरव वापस लौटाने के लिए नए सिरे से संकल्प लिया जाएगा।    

महाकाल की नगरी में 14-18 जनवरी तक होगा सांस्कृतिक समागम, शिव-भक्ति और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी में 14 से 18 जनवरी तक सांस्कृतिक समागम, शिव-भक्ति और वैश्विक कलाकारों के संगम का केंद्र बनेगी। श्रीमहाकाल महोत्सव देश और दुनिया में उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देगा और लोक एवं शास्त्रीय कला के बीच अनूठा संवाद स्थापित करेगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। पहले दिन पार्श्व गायक शंकर महादेवन (Singer Shankar Mahadevan) अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ प्रस्तुति देंगे। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महाकाल की नगरी में आयोजित महोत्सव देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर उज्जैन को नई ऊंचाई देगा। महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें शास्त्रीय और लोक, परंपरा और आधुनिकता, देशज और वैश्विक सभी धाराएं एक साथ प्रवाहित होंगी। महोत्सव में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आने की संभावना है। सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के साथ उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, आंध्रप्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात के भूपेन्द्र पटेल, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, झारखंड के हेमंत सोरेन और तमिलनाडु के एमके स्टालिन को आमंत्रित किया गया है।  अंतरराष्ट्रीय सहभागिता महोत्सव की विशेषता यह रहेगी कि इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दल सहभागिता करेंगे। इससे भारत की प्राचीन सांस्कृतिक कड़ियों का पुनस्मरण होगा और यह सिद्ध होगा कि भारत की सभ्यता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक भूभाग में सांस्कृतिक सेतु निर्मित किए हैं। संगीत और प्रस्तुति पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम् की त्रयी शिव-भक्ति और भारतीय संगीत की ऊंचाइयों को स्वर देगी। सोना महापात्रा की भावपूर्ण प्रस्तुति, द ग्रेट इंडियन क्वायर, विपिन अनेजा और श्रेयस शुक्ला जैसे कलाकार महोत्सव को समकालीन सृजन का सशक्त स्वर देंगे। लोक कला का महत्वपूर्ण आयाम तिवारी ने बताया कि महोत्सव का विशेष आयाम है जनजातीय लोक कला। प्रतिदिन उज्जैन के विभिन्न स्थलों से कला यात्राएं निकलेंगी, जो रंगों, वाद्यों और नृत्य की लय के साथ श्रीमहाकाल महालोक परिसर तक पहुंचेगी। यह केवल मार्ग की यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संचित परंपराओं को वर्तमान से जोड़ने का माध्यम होगी। महोत्सव वीर भारत न्यास, श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, संस्कृति संचालनालय, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, त्रिवेणी संग्रहालय, कृषि उद्योग विकास परिषद, उज्जैन विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और नगर निगम की सहभागिता में आयोजित किया जा रहा है।

रविवार को एमपी में 1100 ट्रैक्टरों के साथ सीएम मोहन यादव का किसान मेगा शो, जंबूरी मैदान में होगा सम्मेलन

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज  11 जनवरी को सीएम मोहन यादव किसानों के बीच मेगा शो करेंगे। इस आयोजन में भोपाल और आसपास के एक दर्जन जिलों से करीब 1100 ट्रैक्टरों के साथ किसान राजधानी पहुंचेंगे। पहले चरण में भोपाल- इंदौर बायपास पर किसानों की विशाल रैली निकाली जाएगी, जिसमें सीएम मोहन यादव शामिल होंगे। इसके बाद जम्बूरी मैदान में किसान सम्मेलन आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री कृषि वर्ष 2026 की औपचारिक घोषणा करेंगे। जंबूरी मैदान पर होगा किसानों का जुटान मप्र की मोहन सरकार इस साल 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है। भोपाल के जंबूरी मैदान पर 11 जनवरी को एक बड़ा किसान सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन में सीएम डॉ मोहन यादव कृषि कल्याण वर्ष 2026 की औपचारिक शुरुआत करेंगे। सीएम मोहन यादव का मेगा शो कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से भोपाल-इंदौर बायपास स्थित एक निजी कॉलेज परिसर में उतरेंगे। यहां से वे सीधे किसानों की रैली में शामिल होंगे और ट्रैक्टर रैली के साथ जम्बूरी मैदान तक पहुंचेंगे। आयोजन स्थल तक मुख्यमंत्री का किसानों के साथ सड़कों पर उतरना सरकार की किसान केंद्रित नीति का बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है। यह इसलिए भी किया जा रहा है कि इस वर्ष किसानों और कृषि पर सरकार को पूर्व से ज्यादा फोकस होगा। रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ हिस्सा लेंगे। ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर प्रशासन विशेष इंतजाम कर रहा है ताकि शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। सीएम बताएंगे कृषि वर्ष 2026 का रोडमैप जम्बूरी मैदान में होने वाले किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषि वर्ष 2026 को लेकर सरकार की रूपरेखा प्रस्तुत कर सकते हैं। सम्मेलन में मुख्यमंत्री सरकार के आगामी तीन वर्षों के कृषि और कृषकों पर आधारित लक्ष्य भी सार्वजनिक कर सकते हैं। इन लक्ष्यों का मुख्य फोकस किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर रहेगा। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर भी सरकार की योजनाओं का खाका रखा जा सकता। इस मौके पर मुख्यमंत्री किसानों से सीधा संवाद भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि लक्ष्य सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार सृजन और कृषि को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना है। इसके लिए 3 साल का रोडमैप तय कर गतिविधियां चलाई जाएंगी। खेती से जुड़े सभी विभाग कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य और ऊर्जा आपसी समन्वय से काम करेंगे। ब्राजील-इजराइल तक ट्रेनिंग लेने जाएंगे किसान किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य और संभाग स्तर पर प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट कराई जाएंगी। सरकार किसानों को देश के उन्नत कृषि राज्यों के साथ-साथ इजराइल और ब्राजील जैसे देशों में आधुनिक खेती, पशुपालन और तकनीकी नवाचार देखने भेजेगी। किसानों की आय बढ़ाने का सीधा प्लान सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष घोषित करते हुए साफ किया है कि हर योजना का अंतिम लक्ष्य किसानों की आमदनी बढ़ाना होगा। इसके लिए कृषि गतिविधियों को तीन साल के लक्ष्य के साथ संचालित किया जाएगा। खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर बाजार, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाएगा, ताकि किसान को उपज का बेहतर दाम मिल सके। मशीन, तकनीक और सिंचाई पर फोकस खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को प्रोत्साहित कर पानी की बचत के साथ उपज बढ़ाने की योजना है। किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए एग्री स्टेक और डिजिटल कृषि को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 के प्रमुख उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि: खेती को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार मॉडल में बदलना। कृषि आधारित उद्योगों का विकास: खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को बढ़ावा देना। नवाचार और आधुनिक तकनीक: ड्रोन सेवाएं, हाइड्रोपोनिक्स, एग्री-स्टेक, किसान उत्पादक संगठन (FPO) प्रबंधन से युवाओं को जोड़कर रोजगार सृजन। प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग: मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, पर्यावरण अनुकूल खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को प्रोत्साहन। 

इंडियन नेवी ने हल्दिया में शुरू किया अपना नया बेस, बांग्लादेश-चीन पर रहेगी निगाह

 हल्दिया भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक बेस स्थापित करने का काम शुरू कर रही है. यह बेस उत्तरी बंगाल की खाड़ी (Northern Bay of Bengal) में भारत की समुद्री मौजूदगी को काफी मजबूत करेगा. खासकर चीन की नौसेना की बढ़ती गतिविधियों, बांग्लादेश से समुद्री घुसपैठ और पाकिस्तान के साथ बदलते क्षेत्रीय हालात के बीच यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं यह बेस क्यों बन रहा है, इसमें क्या होगा, कौन से जहाज तैनात होंगे और इसका रणनीतिक महत्व क्या है. हल्दिया बेस का प्लान क्या है? स्थान और प्रकार: हल्दिया, कोलकाता से करीब 100 किमी दूर हुगली नदी पर स्थित है, जहां से बंगाल की खाड़ी में सीधा पहुंच है. यह बेस अभी तक नामित नहीं हुआ है. इसे नौसैनिक डिटैचमेंट (नौसैनिक चौकी) कहा जा रहा है. आकार: यह बड़ा कमांड नहीं होगा, बल्कि छोटा बेस होगा. इसमें करीब 100 अधिकारी और नाविक तैनात रहेंगे. निर्माण: मौजूदा हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (1970 से चल रहा) का इस्तेमाल किया जाएगा. शुरुआत में एक विशेष जेट्टी (जहाज बांधने की जगह) और शोर सपोर्ट सुविधाएं बनाई जाएंगी. इससे बेस जल्दी तैयार हो जाएगा, ज्यादा नई इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं पड़ेगी. लाभ: हुगली नदी से कोलकाता तक लंबा सफर बच जाएगा. बेस बंगाल की खाड़ी में तेजी से पहुंच सकेगा. कौन से जहाज तैनात होंगे? बेस मुख्य रूप से छोटे और तेज जहाजों के लिए होगा…  फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स (FICs): ये छोटे, तेज (45 नॉट्स तक स्पीड) जहाज हैं, जो मशीन गन से लैस हैं. ये 100 टन के करीब होते हैं और 10-12 लोग चला सकते हैं. न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट्स (NWJFACs): ये 300 टन के जहाज हैं, जो 40-45 नॉट्स की स्पीड से चलते हैं. CRN-91 गन से लैस होंगे और नागास्त्र जैसे लूटरिंग मुनिशन (ड्रोन जैसी स्मार्ट मिसाइलें) से भी तैनात हो सकते हैं. ये निगरानी, हमला और सटीक स्ट्राइक के लिए हैं. खरीद: 2024 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 120 FICs और 31 NWJFACs की खरीद को मंजूरी दी थी. ये जहाज तटीय सुरक्षा, घुसपैठ रोकने, बंदरगाह सुरक्षा और स्पेशल ऑपरेशंस के लिए हैं. क्यों बन रहा है यह बेस? मुख्य कारण भारतीय नौसेना ने पूर्वी तट पर पहले से ही विशाखापत्तनम (ईस्टर्न नेवल कमांड) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बड़े बेस हैं. लेकिन उत्तरी बंगाल की खाड़ी में मजबूत मौजूदगी की जरूरत इसलिए है… चीन की बढ़ती गतिविधियां: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) हिंद महासागर में ज्यादा सक्रिय हो रही है. बंगाल की खाड़ी में चीनी जहाजों की निगरानी जरूरी है. बांग्लादेश से समुद्री घुसपैठ: भारत-बांग्लादेश सीमा पर पानी के रास्ते से अवैध घुसपैठ बढ़ रही है. उथले पानी और घने समुद्री यातायात में तेज जहाज बहुत उपयोगी हैं. पाकिस्तान-बांग्लादेश रिश्ते: हाल के समय में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं. चीन बांग्लादेश को सबमरीन और बेस दे रहा है. यह बेस भारत के पूर्वी इलाके की सुरक्षा के लिए जरूरी है. समुद्री मार्गों की सुरक्षा: हल्दिया से मलक्का स्ट्रेट तक निगरानी आसान होगी, जो वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है. रणनीतिक महत्व     यह बेस भारत को बंगाल की खाड़ी में तेज प्रतिक्रिया (क्विक रिस्पॉन्स) देने की क्षमता देगा.     घुसपैठ, तस्करी, समुद्री डकैती और आपदा राहत में मदद मिलेगी.     क्षेत्र में भारत की प्रमुख सुरक्षा प्रदाता भूमिका मजबूत होगी.     पुरानी जमीन पहले से आवंटित थी, जो अब उपलब्ध हो गई है. इससे काम तेजी से शुरू हो सकेगा. हल्दिया बेस भारतीय नौसेना की पूर्वी तट पर विस्तार की योजना का हिस्सा है. छोटे लेकिन तेज जहाजों से यह बेस घुसपैठ रोकने, निगरानी बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े चुनौतियों के बीच यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ताकत देगा. 

625 KM लंबा ‘टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर’ बनेगा MP में, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को जोड़ने वाली सड़कें

 भोपाल टाइगर स्टेट' मध्यप्रदेश अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए दुनिया का सबसे केंद्र बनेगा. राज्य सरकार पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना को जोड़ने के लिए 625 किलोमीटर लंबे मार्गों को अपग्रेड करेगी. इस प्रोजेक्ट पर 5000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली-एनसीआर से मध्यप्रदेश की दूरी कम करने और औद्योगिक विकास के लिए कई मेगा प्रोजेक्ट्स का रोडमैप शेयर किया है. इसके तहत ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए 12 हजार करोड़ रुपए की अटल पथ योजना उत्तरप्रदेश और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ेगी. इससे मध्यप्रदेश से दिल्ली की दूरी घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रह जाएगी. इसके अलावा, 9 हजार 716 करोड़ की लागत से बनने वाला भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे प्रदेश के दो बड़े केंद्रों को जोड़ेगा. इन सड़कों के विकास से मध्यप्रदेश की पहुंच बंदरगाहों तक आसान होगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को रफ्तार मिलेगी. मुख्यमंत्री ने बताया कि विकास कार्यों में क्वालिटी और रफ्तार के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ रोडमैप तैयार किया गया है. सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए अधिकांश सड़क परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है. खंडवा बायपास, जबलपुर रिंग रोड, इंदौर-हरदा और रीवा बायपास के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. पड़ोसी राज्यों को सौगात श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल बसाहट के बाद अब राजस्थान और उत्तरप्रदेश के पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है. मुख्यमंत्री के अनुसार, भौगोलिक स्थिति के कारण यह टाइगर कॉरिडोर पड़ोसी राज्यों के पर्यटकों के लिए भी एक बड़ी सौगात साबित होगा.

मध्य प्रदेश में अधिकारियों के तबादले: कलेक्टर से लेकर सचिव स्तर तक के अधिकारियों को मिलेगा पदोन्नति और रिपोर्ट कार्ड

 भोपाल  मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक के अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग तैयार कर रहा है। एक जनवरी को कई अधिकारी पदोन्नत किए गए लेकिन इनकी पदस्थापना यथावत रखी गई है। 15 जनवरी को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर, कमिश्नर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत और स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की कांफ्रेंस बुलाई है। इसमें मैदानी अधिकारियों के कामकाज का आकलन होगा। इसके बाद तबादलों का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि, कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी 21 फरवरी तक नहीं बदले जाएंगे, क्योंकि प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम चल रहा है। कई अधिकारियों को दो साल से ज्यादा हो गए मध्य प्रदेश में कलेक्टर से लेकर सचिव स्तर के अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। सभी को पदोन्नति अभी वर्तमान पदों को उच्च पद के समकक्ष घोषित कर दे दी गई है। कई अधिकारियों को एक स्थान पर पदस्थ रहते दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं। इनके स्थान पर नए अधिकारी पदस्थ किए जाएंगे। वहीं, मंत्रालय में कुछ अपर सचिव को सचिव बनाया गया है। इनकी पदस्थापना भी होनी है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग अपने-अपने स्तर पर तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि 15 जनवरी को कलेक्टर कांफ्रेंस होगी। कुछ अधिकारियों की पदस्थापना में परिवर्तन होगा इसके लिए 85 बिंदुओं पर जिलेवार रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। इससे कलेक्टरों के कामकाज का आकलन होगा। यही आगामी पदस्थापना का आधार भी बनेगा। चूंकि, 21 फरवरी तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चलेगा। इस अवधि में कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को हटाने के लिए चुनाव आयोग की अनुमति लगेगी और तीन नामों का पैनल भेजना होगा, इसलिए जल्दबाजी नहीं की जाएगी। मंत्रालय स्तर पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना में परिवर्तन अवश्य किया जाएगा। इसमें अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और अपर सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।