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रांची नगर निगम 6 साल बाद भी पाइप लाइन से नहीं कर पाया पानी और गैस की सप्लाई

रांची. रांची नगर निगम के अंतर्गत वार्ड नंबर 51 देवीनगर हेसाग हटिया में जल संकट को लेकर आयोजित जागरण आपके द्वार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वार्डवासियों ने एक स्वर में वर्षों से लंबित बुनियादी सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई और प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों ने बताया कि हेसाग क्षेत्र में करीब छह साल पहले पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आजतक नल में एक बूंद पानी नहीं पहुंचा। पानी की यह समस्या सालों से बनी हुई है, लेकिन गर्मी के मौसम में यह विकराल रूप ले लेती है। लोगों को मजबूरी में कुएं और बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ता है। कई परिवारों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के इलाकों तक जाना पड़ता है। गर्मी के दिनों में प्रशासन द्वारा टैंकर के माध्यम से पानी आपूर्ति करने का दावा किया जाता है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी साबित होती है। टैंकर से मिलने वाला पानी जरूरत के हिसाब से बेहद कम होता है, जिससे अक्सर लोगों के बीच विवाद की स्थिति भी बन जाती है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। गैस पाइपलाइन बिछा, लेकिन कनेक्शन का सालों से इंतजार पेयजल के साथ-साथ गैस पाइपलाइन का मुद्दा भी लोगों के गुस्से की बड़ी वजह है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में गैस पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन अब तक गैस कनेक्शन चालू नहीं किया गया। आज भी लोग गैस कनेक्शन का इंतजार कर रहें है। आज भी लोग रसोई गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। कई बार पूरा दिन सिलेंडर के इंतजार में निकल जाता है। वार्ड में बुनियादी ढांचे की हालत भी बेहद खराब है। कई गलियों में सड़कें टूटी हुई हैं, बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है। नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात में अंधेरा छाया रहता है और असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है। इसके अलावा बिजली के जर्जर खंभे और झूलते तार किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। डोर-टू-डोर कचरा उठाव की व्यवस्था भी नियमित नहीं है, जिससे जगह-जगह कचरे का ढेर लगा रहता है और बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। वृद्धा पेंशन व विधवा पेंशन दोंनों ही बनना बंद सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में भी वार्ड पिछड़ा हुआ है। पिछले कई वर्षों से वार्ड की कई महिलाओं का वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन कार्ड नहीं बन पाया है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे गरीब और जरूरतमंद महिलाएं आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि निकाय चुनाव नहीं होने के कारण वार्ड की समस्याओं को उठाने और समाधान कराने वाला कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता।     छह साल से पानी की पाइपलाइन पड़ी है, लेकिन आज तक नल से पानी नहीं आया। गर्मी में हालत बद से बदतर हो जाती है। प्रशासन सिर्फ कागजों पर काम दिखा रहा है। -पूजा देवी     गैस पाइपलाइन बिछने के बाद भी कनेक्शन नहीं मिला। आज भी सिलेंडर के लिए लाइन में लगना पड़ता है। महिलाओं का समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहा है। – रीना गुप्ता     टैंकर से पानी मिलता है, लेकिन वह बहुत कम होता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए पानी जुटाना सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। लोग पाइपलाइन सेवा शुरू करने की मांग कर रहें है। – सीता शर्मा     सड़क और नाली की हालत खराब है। बरसात में घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। शिकायत करने पर कोई सुनने वाला नहीं है। मुख्य सड़क पर वर्षेा से स्ट्रीट लाइट खराब है। -सुनील गुप्ता     स्ट्रीट लाइट खराब रहने से रात में डर लगा रहता है। महिलाएं और बच्चियां बाहर निकलने से डरती हैं। शिकायत करने पर भी कोई सुनने वाला नहीं है। लोग सिर्फ टैक्स भर रहें है। – रामचंद्र शर्मा     बिजली के झूलते तार कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं, लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। कई नए मोहल्ले में बिजली के खंभे नही है। आवेदन के बाद भी खंभा नहीं लग रहा है। – मुन्नी देवी     डोर-टू-डोर कचरा उठाव सही से नहीं होता। गंदगी की वजह से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। स्मार्ट सिटी में चौ-चौराहों पर कचरे फेंकने को मजबूर है। सुनने वाला मौन है। – प्रीति देवी     गरीबों की कोई सुनवाई नहीं है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द जलापूर्ति, गैस कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की मांग करती हूं। ताकि वार्डवासियों को राहत मिल सके। -साधु कुमार

संन्यास का ऐलान: भारतीय दौरा बनेगा ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के करियर का आखिरी अध्याय

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम की कप्तान एलिसा हीली ने अपने फैसले से चौंका दिया है. इस दिग्गज विकेटकीपर ने साफ कर दिया है कि वह 2026 महिला टी20 विश्व कप में हिस्सा नहीं लेंगी. एलिसा हीली ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का एलान कर दिया है. हीली महिला टी20 विश्व कप का हिस्सा नहीं होंगी. वह भारत के खिलाफ फरवरी-मार्च में होने वाली घरेलू सीरीज के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह देंगी. एलिसा हीली ने साफ किया है कि वह इस साल होने वाले महिला टी20 विश्व कप के लिए टीम की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी हिस्सा नहीं लेंगी. पर्थ में होने वाली वनडे सीरीज और एक डे-नाइट टेस्ट में वह ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी करेंगी. यह उनके करियर की आखिरी सीरीज होगी. एलिसा हीली ने कहा, "अपने देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए हमेशा सबसे बड़ा सम्मान रहा है. भारत के खिलाफ आने वाली सीरीज उनके करियर की आखिरी सीरीज होगी." क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ टॉड ग्रीनबर्ग ने उन्हें क्रिकेट की ऑल-टाइम ग्रेट खिलाड़ियों में से एक बताया और ऑस्ट्रेलियन महिला क्रिकेट में उनके योगदान की सराहना की. बता दें कि एलिसा हीली ने 2010 में 19 साल की उम्र में न्यूजीलैंड के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था. उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे खतरनाक बल्लेबाजों और बेहतरीन विकेटकीपरों में गिना जाता है. वह आठ आईसीसी विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीमों का हिस्सा रहीं, जिसमें छह टी20 और दो वनडे विश्व कप शामिल हैं. वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम की भी सदस्य थीं. मेग लैनिंग के संन्यास के बाद 2023 में हीली को ऑस्ट्रेलिया की फुल-टाइम कप्तान बनाया गया था. कप्तान के तौर पर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड के खिलाफ 16-0 से मल्टी-फॉर्मेट एशेज वाइटवॉश रही. उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 2024 महिला टी20 विश्व कप और 2025 महिला वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में भी जगह बनाई. उनके नाम विश्व कप फाइनल में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने और अंतरराष्ट्रीय टी20 में उनके नाम रिकॉर्ड 126 डिसमिसल हैं. ऑस्ट्रेलिया के लिए हीली ने अब तक 162 टी20, 126 वनडे और 11 टेस्ट मैच खेले हैं. बीबीएल में सिडनी सिक्सर्स के लिए खेलते हुए 11 सीजन में उन्होंने 3,000 से अधिक रन बनाए हैं. हीली के नाम दो बीबीएल खिताब हैं. वीमेंस प्रीमियर लीग में वह यूपी वॉरियर्स की कप्तान भी रह चुकी हैं.

SC में कानून पर तीखी नाराज़गी: ‘यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है’, CJI तक पहुंचा विवाद

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भ्रष्टाचार रोधी कानून पर एक लंबी और दिलचस्प बहस देखने को मिली। इस दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 17ए को रद्द करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह धारा असंवैधानिक है, इसे निरस्त किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी करप्शन के मामले में अथॉरिटी से मंजूरी लेने की बाध्यता भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने वाली है। ऐसी स्थिति में इस सेक्शन को रद्द किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने में देरी होती है। ऐसी स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि इस मामले की सुनवाई में बेंच ही बंटी नजर आई।   बेंच में शामिल दूसरे जज केवी विश्वनाथन ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट की धारा 17A जरूरी है। इससे ईमानदार अधिकारियों को बचाने में मदद मिलती है। इस तरह बेंच का फैसला बंटा हुआ आया। अब इस मामले को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखा जाएगा। वह इस केस की सुनवाई के लिए एक बड़ी बेंच का गठन करेंगे। उस बेंच की ओर से आने वाला फैसला ही इस केस में अंतिम होगा। यह बेंच दो ही जजों की थी और उनकी राय अलग होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका। ऐसी स्थिति में अब बड़ी बेंच का गठन होना है। कब जोड़ी गई थी करप्शन ऐक्ट में यह धारा, जिस पर सवाल दरअसल भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 में नई धारा 17A को 2018 में जोड़ा गया था। तब यह बताया गया था कि इसका उद्देश्य है कि अनावश्यक मामलों को रोका जाए और ईमानदार अधिकारियों को बेवजह कानूनी मसलों में फंसने से बचाया जाए। इसे ईमानदार अधिकारियों के लिए एक सुरक्षा कवच बताया गया था। हालांकि अब इस धारा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस केस में अंतिम फैसला क्या आता है। इस पर सभी की नजर रहेगी। बता दें कि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त लहजे में कहा कि यह सेक्शन ही असंवैधानिक है और इसे निरस्त किए जाने की जरूरत है।  

सूर्य का मकर राशि में गोचर आज रात 9:19 बजे, जानें संक्रांति की सही तिथि

इस साल मकर संक्रांति 2026 को लेकर कंफ्यूजन है क्योंकि कहा जा रहा है कि 14 की जगह 15 जनवरी को ये त्योहार मनाना ज्यादा शुभ रहेगा. इसको लेकर सबसे बड़े दो तर्क दिए जा रहे हैं कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते अन्न दान नहीं किया जा सकता है और दूसरा सूर्य देव मकर राशि में रात 9 बजकर 13 मिनट पर प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में उदया तिथि यानी 15 जनवरी को ही स्नान, ध्यान, दान करना उचित माना जा रहा है. इन सब के पीछे ज्योतिषाचार्यों ने तर्क दिए हैं. हालांकि द्रिक पंचांग के मुताबिक, मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. ये अवधि 2 घंटे 32 मिनट तक की है. इसके अलावा महापुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसकी अवधि 1 घंटा 45 मिनट है. पंचांग के अनुसार, ‘मकर संक्राति के शुरू होने के बाद 40 घटी तक का समय मकर संक्रांति से संबंधित शुभ कार्य करने के लिए उत्तम माना गया है. 1 घटी की अवधि 24 मिनट होती है, ऐसे में 40 घटी का समय 16 घंटे होते हैं. 40 घटी का समयपुण्य काल के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु व्रत रख पवित्र स्नान कर भगवान सूर्य को नैवेद्य अर्पण करते हैं. साथ ही साथ दान-दक्षिणा, श्राद्ध कर्म और व्रत का पारण करते हैं. ये सभी गतिविधियां पुण्यकाल के समय ही की जानी जरूरी होती हैं.’ कब मनाएं मकर संक्रांति? द्रिक पंचांग के मुताबिक, ‘यदि मकर संक्रांति सूर्यास्त के बात होती है, तो ऐसी स्थिति में पुण्यकाल की सभी गतिविधियां अगले दिन सूर्योदय काल तक स्थगित कर दी जाती हैं, ऐसे में पुण्य काल की सभी गतिविधियां दिन के समय ही संपन्न करनी चाहिए.’ अगर, द्रिक पंचांग की मानें तो मकर संक्रांति मनाने का सही दिन 14 जनवरी है. 15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति मकर संक्रांति को लेकर प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने TV9 डिजिटल से बात करते हुए कहा कि कोई भी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में कूदकर नहीं जाता है. वह संचरण करते हुए जाता है. सूर्य एक दिन में एक डिग्री प्रवेश करता है और उसे दूसरे ग्रह में जाने के लिए 30 दिन लग जाते हैं इसलिए संक्रांति की काल 12 से 16 घंटे माना गया है. हमें मकर की संक्रांति चाहिए न कि धनु की. संक्रांति धनु में भी रहेगी तो भी पुण्यकाल रहेगा क्योंकि इसे 12 घंटे पहले और 16 घंटे बाद तक माना जाता है. उन्होंने कहा कि हमें सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे उस समय मकर की संक्रांति चाहिए. काशी के पंचांगों के मुताबिक, रात में सूर्य 9 बजकर 19 पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. नारद पुराण के 123वें पेज में कहा गया है कि मकर की संक्रांति होने पर 30 घटी पहले और 40 घटी बाद तक पुण्यकाल होता है. इसी तरह धर्म सिंधु में जिक्र किया गया है. ये पुण्यकाल 15 जनवरी के मध्यान तक पड़ेगा इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी. मकर संक्रांति पर क्या करें दान? मकर संक्रांति पर दान देना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है. इस दिन कन्याओं और गरीबों को दान दिया जाता है. श्रद्धालु तिल-गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल, अनाज घी और शहद दान देते हैं. दरअसल, तिल का दान करने से पाप का विनाश होता है और गुड़ दान करने से सूर्य भगवान खुश होते हैं. खिचड़ी दान करने से शनि और चंद्रमा के पड़ने वाले अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं. वहीं, गर्म कपड़े दान करने से गरीबों का आशीर्वाद मिलता हैं और काले व नीले कंबल दान करने से शनि देव की कृपा बरसती है. इसके अलावा अनाज और घी-शहद भी जीवन में मधुरता लाते हैं.

ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट

योगी सरकार की पहल से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनेगा देश का सबसे ‘ग्रीन’ एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट टर्मिनल भवन को खास तरह से किया गया है डिजाइन, ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत रहेगी न्यूनतम 20% पार्किंग क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट और स्टैंडर्ड चार्जिंग की सुविधा 82.94 एकड़ में सोलर फार्म, 51,966 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से होगा संचालन आरएनजी प्लांट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई दिशा लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) न सिर्फ हवाई कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित करेगा। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जेवर एयरपोर्ट को भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है, जो बड़ी उपलब्धि है। यह एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से विकसित किए गए नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर आधारित है। स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग की सुविधा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशों के तहत एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन इस तरह डिजाइन किया गया है कि ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत न्यूनतम हो। एयरपोर्ट पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई है।एयरसाइड संचालन के लिए उपयोग होने वाले सभी वाहन 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होंगे और इनके चार्जिंग प्वाइंट्स कई स्थानों पर लगाए जाएंगे। 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म योगी सरकार के ग्रीन एनर्जी विजन के अनुरूप  परिसर में 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म विकसित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 51,966 मेगावाट-घंटा होगी। इससे एयरपोर्ट को बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त होगी। साथ ही दो स्थानों पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग पौंड टिकाऊ जल स्रोत उपलब्ध कराएंगे। एयरपोर्ट में आरएनजी प्लांट लगाने की भी योजना है, जिससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और अन्य प्रणालियां ग्रीन फ्यूल पर संचालित हो सकेंगी। वहीं एक व्यापक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली कचरे के पृथक्करण, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक उपचार को बढ़ावा देगी। एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से हर महीने वायु, पानी, मिट्टी, कचरा और सीवेज के मानकों की निगरानी की जाएगी। जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के साथ ही न सिर्फ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि योगी सरकार के ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास के संकल्प को भी नई उड़ान देगा।

राहुल गांधी राम मंदिर करेंगे दर्शन! तनुज पुनिया ने बताया यात्रा का कार्यक्रम

बाराबंकी   राहुल गांधी जल्‍द ही राम मंदिर जाएंगे और वहां रामलला के दर्शन करेंगे. बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने इसकी घोषणा की. एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने इस बात का ऐलान किया. पुनिया ने अभी तक राहुल के राम मंदिर ना आने के सवाल का भी जवाब दिया. उन्‍होंने कहा क‍ि जल्द ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी राम मंदिर जाएंगे. अब मंदिर का ध्वज भी लग गया. अब राम मंदिर कंप्लीट हो गया है. अधूरे राम मंदिर में कोई पूजा करने नहीं जाता. अब राहुल गांधी अयोध्या राम मंदिर दर्शन करेंगे. दरअसल, 23 जनवरी को 32 सदस्यीय संसदीय समिति अयोध्या के दौरे पर पहुंचेगी. इस समिति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी शामिल हैं. समिति के अयोध्या आगमन और राहुल गांधी के रामलला के दर्शन को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. कांग्रेस नेता तनुज पुनिया ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा है कि अब जब राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो चुका है और मंदिर में ध्वजारोहण भी हो गया है, ऐसे में राहुल गांधी रामलला के दर्शन कर सकते हैं. बता दें कि बीते वर्षों में जब राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था, तब मंदिर पूरी तरह तैयार नहीं था. अब निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद राहुल गांधी के अयोध्या आगमन और रामलला दर्शन की संभावना जताई जा रही है. इससे पहले वर्ष 2016 में भी राहुल गांधी अयोध्या आए थे, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन किए थे और संतों से आशीर्वाद लिया था, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए थे. इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी राहुल गांधी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रण दिया गया था. अब एक बार फिर उनके अयोध्या आने को लेकर संत समाज की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने राहुल गांधी के संभावित दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कालनेमियों को चलो अब सद्बुद्धि आई है. जो लोग भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताते थे, जिन्होंने राम मंदिर के विरोध में बड़े बड़े वकील खड़े किए, आज वही लोग रामलला के दर्शन की बात कर रहे हैं. राम के शरण में सभी का स्वागत है, हम भी माला पहनाकर स्वागत करेंगे. महंत राजू दास ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को अपने उन सहयोगी दलों से भी जवाब मांगना चाहिए, जो सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं और सनातन की तुलना कोरोना, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हैं. उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में भी राहुल गांधी के अयोध्या आगमन पर संतों ने उनका स्वागत किया था और उनसे विपक्ष में रहते हुए राम मंदिर के पक्ष में आवाज उठाने का आग्रह किया था. वहीं जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी के रामलला दर्शन को लेकर स्वागत के साथ-साथ सवाल भी खड़े किए. उन्होंने कहा कि राम जी की शरण में कभी भी, कोई भी आ सकता है. यदि राहुल गांधी रामलला के दर्शन के लिए आ रहे हैं तो उनका स्वागत है. हालांकि इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ज्योतिषीय दृष्टि से यह दौरा दिखावे जैसा प्रतीत होता है. परमहंस आचार्य ने कहा कि राहुल गांधी इसलिए अयोध्या आ रहे हैं क्योंकि उनके नफरत के हथियार खत्म हो चुके हैं. जनता ने उन्हें तवज्जो नहीं दी, तो कांग्रेस को जीवित रखने के लिए राम के शरण में आने का दिखावा किया जा रहा है.

इंदौर पुलिस का निर्देश: संक्रांति पर बिना मांझा पतंग उड़ाने की अपील

इंदौर  इंदौर में चीनी मांझे की वजह से तीन लोगों की जान जा चुकी है। परेशान पुलिस और प्रशासन ने अब एक अजीब फरमान निकाल दिया है जिससे संक्रांति के पहले व्यापारी और पतंग उड़ाने वाले दोनों अजीब स्थिति में आ गए हैं। फरमान यह है कि आप पतंग तो बेच सकते हैं पर मांझा नहीं बेचना है। शहर के प्रमुख बाजारों में पतंग तो है पर मांझा नहीं है। मांझे की चरखी तो है पर उसमें मांझा नहीं है। इन सबके बीच व्यापारियों का कहना है कि एक दिन की कमाई से ही पूरा घर चलता है पर यह आदेश सालभर की कमाई बर्बाद कर देगा।  क्या है आदेश पुलिस ने प्रमुख पतंग बाजारों में पोस्टर और बैनर लगवाए हैं। इन पर लिखा है कि यहां पर किसी भी तरह का मांझा या धागा नहीं मिलेगा। सिर्फ पतंग ही उपलब्ध है। दुकानदारों को यह आदेश हर दुकान पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ में पुलिस थानों के नंबरों के बैनर और पोस्टर भी लगाए गए हैं। इन पर लिखा है कि कोई भी दुकानदार यदि चाइनीज मांझा बेचते हुए दिखे तो आप तुरंत सूचना दें। आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा।  क्यों आया यह फरमान पुलिस और व्यापारियों ने बताया कि कुछ बाजारों में लगातार चाइनीज मांझे के बिकने की जानकारी मिल रही थी। पुलिस के छापे में भी कई बाजारों में चाइनीज मांझे मिले। इसके बाद पुलिस ने इन सभी बाजारों में हर दुकान पर मांझे के बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया।  व्यापारी बोले, धंधा चौपट हो गया व्यापारियों ने कहा कि सालभर का धंधा एक ही दिन में होता है। हम इंदौर से पूरे मप्र में पतंग और धागा भेजते हैं। अचानक से आए इस आदेश ने हमारा धंधा ही चौपट कर दिया है। इसकी वजह से हम बड़ा नुकसान होगा।  कुछ बाजारों में बेचने की अनुमति  पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर के कुछ बाजारों में मांझा बेचने की अनुमति दी गई है। यहां पर पूरे समय पुलिसकर्मी मौजद हैं। उनकी देखरेख में ही मांझा बेचने की अनुमति दी गई है। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने यह निर्णय लिया है।  एक महीने में तीन की जान गई, कई घायल इंदौर में एक महीने के दौरान ही चाइनीज मांझे से तीन लोगों की जान जा चुकी है। इसके साथ में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार पक्षियों के मरने की भी सूचना मिल रही है। इन सब वजहों से चाइनीज मांझे के उपयोग पर सजा तय की गई है।  बेचने और उपयोग करने वाले दोनों पर पुलिस कार्ऱवाई होगी कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि चाइनीज मांझा बेचने और उपयोग करने वाले दोनों ही लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि दोनों पर ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।    

हरियाणा में घायलों का तुरंत इलाज करवाने डायल 112 से जुड़ेगी निजी एंबुलेंस

चंडीगढ़. सड़क दुर्घटना में घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अब निजी अस्पतालों की एंबुलेंस को 112 प्रणाली से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में पार्क हास्पिटल ग्रुप की पांच एंबुलेंस इस पायलट माडल में शामिल होकर सफलतापूर्वक सेवाएं दे रही हैं। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि प्रदेश में डायल 112 के माध्यम से पुलिस, स्वास्थ्य और अग्निशमन सेवाओं तक पहुंच और आसान होगी। पंचकूला जिले में शुरू किया गया आटो डिस्पैच पायलट सफल रहा है, जिसके बाद इसे अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। कोई भी काल प्राप्त होते ही मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वत: ईआरवी (इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल) भेज दिया जाएगा। इसके अलावा जीपीएस आधारित ईआरवी परफारमेंस आडिट माडयूल को भी लागू किया गया है, जो प्रत्येक घटना के बाद वाहन की गति, प्रतिक्रिया और घटना स्थल से दूरी जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का स्वत: विश्लेषण करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सुधारों का यही क्रम जारी रहा, तो हरियाणा 112 देश के सबसे श्रेष्ठ आपातकालीन सेवा माडल के रूप में स्थापित होगा। एडीजीपी हरदीप दून ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक इस प्रणाली पर 2.75 करोड़ से अधिक काल दर्ज हुई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि नागरिक अब हर आपातकालीन स्थिति में सबसे पहले ‘112’ को ही सहायता के लिए याद करते हैं। औसत रिस्पांस टाइम अब 16 मिनट 14 सेकंड से घटाकर 9 मिनट 33 सेकंड तक आ गया है। 92.60 प्रतिशत कालर्स ने सेवाओं पर संतुष्टि जताई है। डायल-112 को जल्द ही पूरी तरह आटो डिस्पैच आधारित, एआइ संचालित और रियल-टाइम मानिटरिंग से सुसज्जित किया जाएगा, जिसमें निजी एंबुलेंस और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से पहुंचने के लिए उन्नत रूटिंग सिस्टम को शामिल किया जाएगा। तेजी से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्यभर में ईआरवी की तैनाती, जीपीएस ट्रैकिंग और डिस्पैच सिस्टम को निरंतर अपग्रेड किया गया है, जिसके उत्कृष्ट परिणाम सामने आये हैं।

अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, गैंगस्टर एक्ट मामले में मिली कानूनी राहत

लखनऊ सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में नियमित जमानत दे दी है। अब्बास अंसारी गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे हैं और मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस जमानत में अब्बास अंसारी यूपी से बाहर तो जा सकते हैं, लेकिन उन्हें इससे पहले ट्रायल कोर्ट को जानकारी देनी होगी। इस जानकारी में उन्हें अपना मोबाइल नंबर और कहां जा रहे हैं इसकी पूरी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही वह कहीं जा सकते हैं। नियमित जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अंसारी को अंतरिम राहत देते समय पहले लगाई गई सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। अब्बास अंसारी कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन अन्य मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस फैसले से अब वे सभी मामलों में जमानत पर हैं। राज्य की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पेश किया, लेकिन कोर्ट ने उनके तर्कों को ध्यान में रखते हुए भी जमानत को नियमित कर दिया। यह फैसला अब्बास अंसारी और उनके परिवार के लिए बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है। इससे पहले, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों में ढील दी थी। अंसारी को लखनऊ में उन्हें अलॉट किए गए सरकारी आवास में रहना था। इसके अलावा, पिछले साल सितंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा मामले में उनकी जेल की सजा पर रोक लगाने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब्बास अंसारी की सदस्यता भी बहाल कर दी गई थी। अब्बास अंसारी पर 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान नफरत फैलाने वाला भाषण देने का आरोप था। आरोप है कि उन्होंने एक पब्लिक मीटिंग में भड़काऊ बातें कही थीं और सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद वह उनसे हिसाब बराबर करेंगे और उन्हें सबक सिखाएंगे। मुख्तार अंसारी का दशकों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी राजनीतिक प्रभाव रहा था। उन्होंने कई बार मऊ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। मुख्तार अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे अब्बास अंसारी ने राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने मऊ सदर सीट जीती थी।

रांची विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में परिचय पत्र न बनने से अभी और होगी देरी

रांची. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में वोटर लिस्टर तैयार होने के बावजूद छात्र संघ चुनाव 2025-26 में देरी होगी। इसका कारण यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के परिचय पत्र नहीं बनवा सका। परिचय पत्र बनवाने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। कई एजेंसियों से कोटेशन मांगे गए। जिसमें एक एजेंसी ने सबसे कम 82 रुपये प्रति आईकार्ड बनाने का प्रस्ताव दिया। मगर विवि के वित्त विभाग ने आईकार्ड के लिए पैसा नहीं दिया। पैसे के अभाव में विवि प्रशासन आईकार्ड नहीं बनवा सका। आईकार्ड नहीं बनने की वजह से चुनावी प्रक्रिया अधर में लटक गई है। जबकि स्टूडेंट इलेक्शन फीस के नाम पर प्रति छात्र 70 रुपये और स्टूडेंट यूनियन फीस के नाम पर प्रति छात्र 30 रुपये छात्रों से वसूले गए है। डीएसपीएमयू में करीब 14,000 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनसे गत सात साल में करीब 98 लाख रुपये वसूले गए हैं। डीएसपीएमयू प्रशासन छात्रों से राशि वसूलने के बाद भी समय पर आईकार्ड नहीं बनवा सका। जबकि विवि प्रशासन द्वारा छात्र संघ चुनाव को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। वोटर लिस्ट (इलेक्ट्रोल रोल) तैयार कर लिया गया है, जिसमें यूजी- पीजी और बीएड कोर्स के वोटर शामिल हैं। वोटर लिस्ट एप्रूवल के लिए सभी विभागों को भेजा गया। सबकुछ समय पर चल रहा था, मगर आईकार्ड नहीं बनने की वजह से चुनाव में विलंब होगा। वर्ष 2019 में 8,706 छात्रों ने जिन 5 पदों के लिए मतदान किया था, वही चुनाव अब 2025-26 में 16,774 मतदाताओं के साथ दोबारा होना है। इस बार मतदाताओं की संख्या दोगुनी हो चुकी है। ऐसे में इस बार का चुनाव सिर्फ छात्र प्रतिनिधियों के चयन का माध्यम नहीं, बल्कि यह विश्वविद्यालय की प्रशासनिक क्षमता, शैक्षणिक व्यवस्था और छात्र राजनीति की दिशा पर सीधा जनमत बन चुका है। छात्राओं के हाथ में जीत-हार डीएसपीएमयू में कुल मतदाताओं में 8,454 छात्राएं (50.4%) और 8,320 छात्र (49.6%) हैं। डीएसपीएमयू छात्र संघ चुनाव के इतिहास में यह पहला मौका है, जब छात्राएं निर्णायक बहुमत में हैं। यानी छात्र संघ की सत्ता की चाबी छात्राओं के हाथ में है। उनकी संख्या 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण उनकी सुरक्षा सहित अन्य मुद्दे छाए रहेंगे। इसमें गर्ल्स हास्टल, सुरक्षा, समय पर परीक्षा व रिजल्ट, क्वालिटी एजुकेशन, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। ओबीसी कैटेगरी का सबसे अधिक वोट है। इसी प्रकार यूजी छात्रों का दबदबा पहले से ज्यादा है। पांच पद के लिए होगा मतदान छात्र संघ चुनाव लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार होगा। कुल पांच पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और उप सचिव के पद के लिए मतदान होगा। चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जाएगा।