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16 जनवरी 2026 का राशिफल: किस राशि के लिए होगी किस्मत की चमक, ग्रहों की चाल समझें

मेष राशि- आज आप खुद को पहले से ज्यादा ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। कामकाज में आपकी मेहनत साफ नजर आएगी और अधिकारी आपके काम से खुश हो सकते हैं। पैसों के मामले में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल्दबाज़ी में कोई बड़ा खर्च करने से बचें। घर का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस गुस्से और तनाव को खुद पर हावी न होने दें। वृषभ राशि- आज का दिन धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ने का है। नौकरी और व्यापार में काम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ेगा। खर्च थोड़े बढ़ सकते हैं, इसलिए फालतू खर्च से बचना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने से मन को सुकून मिलेगा। प्रेम संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। मिथुन राशि– आज आपकी बात करने की कला आपको फायदा दिला सकती है। नए लोगों से संपर्क बनेंगे, जो आने वाले समय में काम आ सकते हैं। करियर से जुड़े रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन ज्यादा काम करने से थकान महसूस हो सकती है। कर्क राशि- आज आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रह सकते हैं। कामकाज में धैर्य रखना ज़रूरी होगा। परिवार में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन बातचीत से समाधान निकल आएगा। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी। सेहत के लिहाज से आराम जरूरी है, खुद को ज्यादा थकाने से बचें। सिंह राशि– आज का दिन आपके लिए अच्छे संकेत लेकर आया है। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी और लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत होने के योग हैं। प्रेम जीवन में उत्साह और नयापन बना रहेगा। सेहत भी अच्छी रहेगी। कन्या राशि– आज जिम्मेदारियों का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन आप सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत रहेगी। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी ज़रूरी है। तुला राशि– आज आपको अपनी योजनाओं पर पूरा ध्यान बनाए रखना होगा। कामकाज में की गई मेहनत का पूरा लाभ मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। घर का माहौल सुखद रहेगा। सेहत में धीरे-धीरे सुधार महसूस होगा। वृश्चिक राशि– आज नए विचार और योजनाएं आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। प्रेम जीवन में समझ और तालमेल बना रहेगा। मानसिक रूप से आज खुद को हल्का और शांत महसूस करेंगे। धनु राशि– आज रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना जरूरी होगा। साझेदारी से जुड़े कामों में फायदा हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। मानसिक शांति के लिए खुद को थोड़ा समय देना फायदेमंद रहेगा। मकर राशि- आज मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन उसका नतीजा सकारात्मक रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। पैसों को लेकर कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। प्रेम संबंधों में भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। सेहत सामान्य रहेगी। कुंभ राशि– आज किस्मत आपका पूरा साथ देती नज़र आएगी। करियर और पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत संभव है। पैसों का लाभ होगा। मन खुश रहेगा और दिन भर ऊर्जा बनी रहेगी। मीन राशि– आज आपका मन रचनात्मक कामों में लगा रहेगा। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं। पैसों की स्थिति संतुलित बनी रहेगी। परिवार और रिश्तों में मिठास रहेगी। सेहत ठीक रहेगी और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी।

भजनलाल शर्मा का संदेश: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने फिर दिखाया राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति एवं साहित्य अद्भुत है। यहां वृक्षों, पेड़ों, पहाड़ों और नदियों को पूजा जाता है। हमें अपनी इस सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आगे बढ़ना है, ताकि आगामी पीढ़ी इससे प्रेरणा ले तथा गर्व की अनुभूति करे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और साहित्य के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी से साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की भी अपील की। शर्मा गुरुवार को जयपुर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती सदियों से ज्ञान, कला और संस्कृति की संवाहक रही है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विचारों का उत्सव एवं महासागर है। यह आयोजन साहित्य के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक उजागर करने में मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान साहित्य, संगीत और कला की पुण्य भूमि है। यहां आमेर के किले से लेकर हवा महल तक हर विरासत में संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पृथ्वीराज रासो राजस्थान की वीरगाथात्मक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मीरा की भक्ति, ढोला-मारू की कहानियां आज भी करोड़ों हृदयों को स्पर्श करती है। विजयदान देथा, कन्हैयालाल सेठिया, कोमल कोठारी जैसे साहित्यकार राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना की मशाल हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरा भक्ति और शक्ति की धरा है। महाराणा प्रताप, पन्नाधाय, अमृता देवी जैसे शूरवीरों ने अपने त्याग, बलिदान और समर्पण से प्रदेश की मिट्टी को गौरवान्वित किया है। पुस्तक पीढ़ियों तक फैलाती है ज्ञान का प्रकाश शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि हमें गुलदस्ते की जगह पुस्तक भेंट करनी चाहिए क्योंकि पुस्तक पीढ़ियों तक ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। श्री शर्मा ने कहा कि किताबें जीवन को समझने का नया दृष्टिकोण देती हैं। साथ ही साहित्य मनुष्य को संवेदना और करुणा से जोड़कर चिंतनशील और विनम्र बनाता है। हमारे पूर्वजों ने ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और जनकल्याण के ग्रंथ श्लोक में लिखे और इस ज्ञान को साहित्य के द्वारा लोगों तक पहुंचाकर लोकप्रिय बनाया। उन्होंने कहा कि मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध वीरों को प्रेरित करने, आजादी के आंदोलन में सेनानियों में जोश भरने, आपातकाल के दिनों में तानाशाही शासन को चुनौती देने से लेकर युद्ध में सेना का हौसला बढ़ाने तक हर समय साहित्य ने राष्ट्रनिर्माण का कार्य किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेम चंद बैरवा, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा, जेएलएफ डायरेक्टर सुश्री नमिता गोखले, श्री विलियम डेलरिंपल, टीमवर्क आटर््स के एमडी श्री संजय रॉय सहित ख्यातनाम लेखक, साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

जम्मू-कश्मीर: पुंछ पुलिस का आतंक पर प्रहार, पाक स्थित हैंडलर की संपत्ति जब्त

जम्मू जम्मू-कश्मीर की पुंछ पुलिस ने सीमा पार से सक्रिय आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना की अचल संपत्ति जब्त कर ली है। पुलिस जानकारी के अनुसार यह कुर्की मंडी पुलिस स्टेशन में ई एंड आईएमसीओ अधिनियम की धारा 2/3 के तहत दर्ज एफआईआर के संबंध में की गई है। जब्त की गई संपत्ति में खसरा संख्या 491 के अंतर्गत आने वाली 10 कनाल 14 मरला भूमि शामिल है। यह भूमि पुंछ की तहसील मंडी में स्थित है। जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 22.05 लाख रुपए है। पुलिस के अनुसार जब्त की गई संपत्ति पुंछ के मंडी निवासी अब्दुल अजीज की है, जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना के रूप में सक्रिय है। आरोपी पहले पाकिस्तान/पीओके भाग गया था और तब से देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हानिकारक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। कानूनी प्रक्रिया से लगातार बचने के कारण न्यायालय ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया। पुंछ पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के बावजूद, वह कानून की गिरफ्त से बाहर रहा। इसके कारण न्यायालय को उसकी अचल संपत्ति को कुर्क करने का आदेश देना पड़ा। इन निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए पुंछ पुलिस ने राजस्व विभाग के साथ घनिष्ठ समन्वय से सभी कानूनी प्रक्रियाओं, सत्यापन और दस्तावेजीकरण का पालन करते हुए कुर्की को क्रियान्वित किया। पुलिस के बयान में बताया गया कि यह कार्रवाई आतंकी नेटवर्क के वित्तीय और रसद संबंधी सहायता ढांचों को ध्वस्त करने और आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को उनके संसाधनों से वंचित करने की व्यापक और सतत रणनीति का हिस्सा है। जिला पुलिस पुंछ पाकिस्तान स्थित आतंकी संचालकों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल सभी तत्वों के खिलाफ दृढ़तापूर्वक और कानूनी रूप से कार्रवाई करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराती है और जनता को आश्वस्त करती है कि शांति, जन सुरक्षा और राष्ट्र की संप्रभुता के हित में ऐसे उपाय जारी रहेंगे।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले— ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने स्थापित किया नया सुरक्षा न्यू नॉर्मल

जयपुर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। सेना प्रमुख ने सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार लैस और ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, तत्पर एवं मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती हैं।'' सेना प्रमुख ने कहा, "हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है। इसकी झलक आपको परेड के दौरान 'मेड इन इंडिया' उपकरणों द्वारा देखने को मिली होगी। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे हथियार प्रणालियों और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। स्वदेशी अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। हम द्वि-उपयोगी संसाधनों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, ऐसे संसाधन जो सेना और सिविलियन दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेना के लिए विकसित हो, वह देश के समग्र विकास में भी योगदान दे।" सेना प्रमुख ने कहा कि वह सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी सैनिकों, हमारे सिविलियन कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने राजस्थान सरकार और जयपुर के नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया। सेना प्रमुख के मुताबिक, जयपुर में सेना दिवस का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने का प्रयास है। सेनाध्यक्ष का कहना है कि भारतीय सेना एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां बेहतरीन प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक सिस्टम और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद है। टेक्नोलॉजी का उपयोग जवानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, अगले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत: एकीकृत बल में रूपांतरित करना है। जयपुर में हुई सेना दिवस की परेड में परंपरा और ट्रांसफॉर्मेशन का सुंदर संगम देखने को मिला। नेपाल आर्मी बैंड ने हमारे पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाया, जबकि नई इकाइयों की भागीदारी ने सेना की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित किया।

थाईलैंड में भीषण रेल दुर्घटना, मृतकों की संख्या 32 हुई, भारत ने व्यक्त की संवेदना

नई दिल्ली भारत ने थाईलैंड में बुधवार को हुए ट्रेन हादसे में लोगों की मौत पर अपनी हजारी संवेदना व्यक्त की। ट्रेन कोच पर क्रेन गिरने से करीब 32 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 70 लोग घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "14 जनवरी, 2026 को थाईलैंड के नाखोन रत्चासिमा में हुए ट्रेन एक्सीडेंट से हम बहुत दुखी हैं। इस दुख की घड़ी में थाईलैंड के लोगों और सरकार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। हम प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त करते हैं और सभी घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना करते हैं।" स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, नाखोन रत्चासिमा प्रांत में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरने से कई कोच पटरी से उतर गए। यह घटना सुबह करीब 9:05 बजे सिखियो जिले में हुई। जिस जगह पर यह घटना घटी, वह थाई राजधानी से करीब 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। जब यह हादसा हुआ, तब ट्रेन उबोन रत्वथानी प्रांत जा रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार क्रेन का इस्तेमाल मौजूदा रेल लाइन के पैरेलल चल रहे एक हाई-स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन साइट पर किया जा रहा था। जब ट्रेन उस इलाके से गुजर रही थी, तो क्रेन का बैलेंस बिगड़ गया और वह गिरकर एक चलती हुई ट्रेन की बोगी से टकरा गई। क्रेन के टकराने के बाद ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। इसके अलावा ट्रेन के कुछ हिस्सों में आग लग गई। इससे मौके पर और अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर हादसे के कई वीडियो सामने आए हैं। रेस्क्यू टीम के लोग पटरी से उतरे डिब्बों के अंदर फंसे यात्रियों तक पहुंचने के लिए मुड़े हुए मेटल को काट रहे थे। बचाव और राहत काम करने के लिए फायरफाइटर्स, मेडिकल टीमों और डिजास्टर रिस्पॉन्स यूनिट्स सहित इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स को मौके पर भेजा गया। थाई सरकार के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के तुरंत बाद कई बचाव टीमों को तैनात किया गया था। हादसे के समय कई यात्री डिब्बों के अंदर फंसे हुए थे।

‘फर्जी विकास की तस्वीर’— जयराम रमेश का आरोप, महंगाई-समायोजित जीडीपी आंकड़े गुमराह करने वाले

नई दिल्ली कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना है कि महंगाई समायोजित (इन्फ्लेशन-एडजस्टेड) जीडीपी ग्रोथ रेट के जो बड़े-बड़े आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, वे देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर नहीं दिखाते और आम लोगों को गुमराह करते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि महंगाई को ध्यान में रखकर जो जीडीपी ग्रोथ दर बताई जा रही है, वह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर इसलिए दिखाया जा रहा है क्योंकि जिन प्राइस डिफ्लेटर्स (कीमतों के समायोजन के आधार) का इस्तेमाल किया गया है, वे असामान्य रूप से बहुत कम हैं। जयराम रमेश ने कहा, "महंगाई समायोजित जीडीपी वृद्धि दर के हेडलाइन आंकड़े धोखा देने वाले हैं। जब प्राइस डिफ्लेटर्स बहुत कम रखे जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से वृद्धि दर ज्यादा दिखाई देती है।" उनके मुताबिक सरकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकती है, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है।उन्होंने दावा किया कि कम प्राइस डिफ्लेटर्स दरअसल कमजोर उपभोक्ता मांग का संकेत हैं। रमेश ने कहा, "कम कीमतों का आंकड़ा सरकार के लिए खुशी की बात हो सकता है, लेकिन इसकी असली वजह यह है कि आम लोगों की आय नहीं बढ़ी है। आय में बढ़ोतरी केवल समाज के सबसे ऊपरी तबके तक सीमित है, जबकि बाकी आबादी की आमदनी ठहरी हुई है।" कांग्रेस नेता ने कॉरपोरेट सेक्टर की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी कंपनियों के पास इस समय भारी मात्रा में नकदी मौजूद है। कॉरपोरेट इंडिया के पास रिकॉर्ड स्तर का कैश है। मुनाफा भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और कर्ज ऐतिहासिक रूप से सबसे कम है। इसके बावजूद कंपनियां नए निवेश और क्षमता विस्तार में रुचि नहीं दिखा रही हैं। जयराम रमेश ने कहा कि आने वाले केंद्रीय बजट को इस सवाल का सीधा जवाब देना चाहिए कि कंपनियां उत्पादन बढ़ाने में निवेश करने के बजाय वित्तीय बाजारों में संपत्ति प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान क्यों दे रही हैं। उनके मुताबिक देश के निवेश माहौल को एक बड़े 'बूस्टर डोज' की जरूरत है। उन्होंने सरकार की नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि कॉरपोरेट टैक्स में लगातार की गई कटौतियां भी मांग बढ़ाने में नाकाम रही हैं। टैक्स कट्स की पूरी श्रृंखला मांग को बढ़ाने में पूरी तरह विफल रही है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि समस्या सिर्फ बजट या कर नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार के पूरे राजनीतिक-आर्थिक मॉडल से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि बढ़ता बाजार एकाधिकार और सरकार का संरक्षण निजी निवेश और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को हतोत्साहित कर रहा है, जिसका असर सीधे अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

युवा लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) R (रामविलास) की मध्य प्रदेश प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा

भोपाल 11 जनवरी 2026 केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री एवं लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चिराग पासवान के मार्गदर्शन में आज मध्य प्रदेश में युवा लोक जनशक्ति पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा की गई। भोजपुर क्लब में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जय कुमार ठाकुर जी की गरिमामय उपस्थिति रही, इस अवसर पर श्री यश तिवारी को युवा लोक जनशक्ति पार्टी, मध्य प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया, उनके साथ ही प्रदेश उपाध्याय अक़बर भूखारी, प्रदेश महासचिव विजय तिवारी, प्रदेश सचिव निशिता सिंह, को नियुक्त किया l कार्यक्रम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जय कुमार ठाकुर,की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने उद्बोधन में श्री ठाकुर ने कहा कि पार्टी के संस्थापक, सामाजिक न्याय की राजनीति के बड़े स्तंभ है, स्वर्गीय श्री रामविलास पासवान की विचारधारा को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रदेश में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पार्टी मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ……….. ऐसे क्षेत्रों पर फोकस करेगी जोआने वाले समय में प्रदेश की तस्वीर बदलेंगे।प्रदेश अध्यक्ष श्री यश तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि युवा लोक जनशक्ति पार्टी का स्पष्ट विज़न है। मध्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को राज्य में एक सशक्त माध्यम के रूप में विकसित करना,तथा गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना।उन्होंने कहा कि यह संगठन केवल राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, हुनर और आत्मसम्मान की लड़ाई है। पार्टी आने वाले समय में जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक संगठन का विस्तार करेगी। इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय युवाओ ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की, पार्टी पदाधिकारियों ने अपने संगठनात्मक ढांचे, कार्यप्रणाली और आगामी जनहितकारी गतिविधियों को प्रेस से साझा किया।

अन्नदाता बने सशक्त: योगी सरकार के 9 वर्षों में बदली उत्तर प्रदेश की खेती की तस्वीर

लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर यकीन किया तो 2017 से पहले के खाद्यान्न संकट, कालाबाजारी और अराजकता से मुक्ति मिली और किसान पौने नौ वर्ष में ही समृद्धि के पथ पर अग्रसर हो गए। योगी मॉडल का ही असर है कि देश की कुल कृषि भूमि का महज 10 फीसदी हिस्सा रखने वाले उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में योगदान 21 फीसदी हो चुका है। 2017 से पहले कृषि क्षेत्र में विकास दर सिंगल डिजिट पर टिकी थी, लेकिन योगी सरकार में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में यह विकास दर पिछले तीन सालों में 14 फीसदी से अधिक रही। यूपी के किसान ‘खेत से खुशहाली’ तक पहुंचे हैं। डबल इंजन सरकार की नीतियों से उत्तर प्रदेश की खेती उत्पादकता के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार की सोच और नीतियों ने उस तस्वीर को बदला, जिसमें किसान खुद को हाशिये पर महसूस करता था। 2017 में सत्ता संभालते ही योगी सरकार द्वारा सबसे पहले किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ करने की बात हो या पहली बार वैज्ञानिकों द्वारा ‘लैब से निकल कर लैंड’ तक पहुंच कर विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए उत्तर प्रदेश के 14170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से संवाद साधने की, योगी युग में खेती सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि विकास की धुरी बन गई है। खेती-किसानी को प्राथमिकता और पारदर्शी व्यवस्था के कारण पौने नौ वर्ष में यूपी की तस्वीर बदली। कृषि व्यवस्था सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी बदलाव का माध्यम बनी। कभी कर्ज़, सिंचाई और भुगतान की परेशानियों से जूझने वाला किसान सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस सोच के साथ कृषि क्षेत्र में अनेक सुधार शुरू हुए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शिता से फसल खरीद होने लगी। भुगतान व्यवस्था को समयबद्ध किया गया। किसान को उपज का उचित मूल्य मिलने लगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया। नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या में वृद्धि और मुफ्त/रियायती सिंचाई योजनाओं ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई। सूखे और जल संकट वाले इलाकों में भी खेती सांस लेने लगी। 2017 के पहले जिस उत्तर प्रदेश में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर था, वहां 2017 के बाद किसानों का सम्मान होने लगा। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में एक क्लिक पर किसानों को सम्मान निधि मिलने लगी, जिसमें यूपी अग्रणी भूमिका में रहा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की जारी 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों को 94,668.58 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। दो करोड़ से अधिक किसानों को किसान पाठशाला के जरिए नवीन तकनीक व उन्नत खेती से जोड़ा गया। 16 लाख निजी ट्यूबवेल से जुड़े किसानों का ऋण माफ किया गया। सहकारिता के माध्यम से संचालित एलडीबी द्वारा किसानों को साढ़े 11 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मिलता था, अब यह छह फीसदी पर मिलेगा। लखनऊ के अटारी में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की स्मृति में सीड पार्क, बाराबंकी में टिश्यू कल्चर लैब के लिए 31 एकड़ भूमि तथा पीलीभीत में बासमती उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए सात एकड़ जगह चिह्नित की गई। योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपए प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा। 2017 के पहले तक किसानों का असंतोष अब विश्वास में बदला है। 2017 से अब तक 2.96 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया।

अमेरिका का सख्त संदेश: हमास ने हथियार नहीं डाले तो होंगे गंभीर परिणाम, बंधकों को लेकर बढ़ा दबाव

वॉशिंगटन अमेरिका ने गाजा संघर्ष को जड़ से खत्म करने के लिए पीस प्लान का दूसरा चरण लॉन्च कर दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात पर अब भी यह संदेह है कि पीस प्लान के तहत हमास हथियार डालने के लिए तैयार भी होगा या नहीं। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हमास आखिरी मरे हुए बंधक के अवशेष वापस नहीं करता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दो सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शांति योजना के दूसरे चरण में एक ट्रांजिशनल टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी संस्था, नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (एनसीएजी) का गठन किया जाएगा। इसका मकसद सीजफायर के प्रबंधन से आगे बढ़ते हुए गाजा में विसैन्यीकरण, टेक्नोक्रेटिक शासन और पुनर्निर्माण की दिशा में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करना है। ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि हमास समझौते के तहत अपनी बाकी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। इसमें आखिरी मरे हुए होस्टेज की वापसी भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि ऐसा न करने पर गंभीर नतीजे होंगे। सीनियर अधिकारियों ने इस बात पर संदेह भी जताया है कि हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ेगा या नहीं। समूह ने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सालों लगाए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गाजा के भविष्य के लिए टेरर क्षमता को हटाना जरूरी है। अगर एक और लड़ाई की संभावना बनी रहती है तो पुनर्निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता। अधिकारियों ने बताया कि एनसीएजी को क्षेत्रीय मीडिएटर्स और फिलिस्तीनी समूह के साथ कंसल्टेशन के जरिए सावधानी से चुना गया था और इसका मकसद एक नॉन-पॉलिटिकल, सर्विस-ओरिएंटेड एडमिनिस्ट्रेशन के तौर पर काम करना है। इसके तहत गाजा को फिर से बनाने और वहां रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने पर फोकस किया करेगा। उन्होंने कहा कि सालों में पहली बार गाजा पर हमास या फिलिस्तीनी अथॉरिटी का राज नहीं होगा। अधिकारियों ने कहा कि दूसरे फेज में जाने का फैसला तब लिया गया, जब होस्टेज के अनसुलझे मामलों पर काम जारी था। सभी जिंदा बंधक वापस आ गए हैं और 28 मरे हुए होस्टेज में से 27 के अवशेष भी मिल गए हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि सीजफायर जारी रखते हुए आखिरी अवशेष को ढूंढने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों ने कहा कि टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करना और भारी हथियार हटाना मुख्य लक्ष्य हैं। गाजा को युद्ध के चक्र में वापस जाने से रोकने के लिए ये कदम जरूरी हैं। इसका मकसद ऐसे हालात बनाना है जहां रिकंस्ट्रक्शन की कोशिशें लंबे समय तक चल सकें और रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर हो सके। अधिकारियों ने पहले चरण के दौरान हुई बड़ी मानवीय उपलब्धियों की ओर इशारा किया और कहा कि सीजफायर के बाद मदद के 53,000 से ज्यादा ट्रक गाजा में दाखिल हुए। 20 लाख से ज्यादा पैलेट सामान पहुंचाया गया। हजारों बच्चों तक वैक्सीनेशन ड्राइव पहुंची और मलबे के बड़े हिस्से साफ किए गए। विटकॉफ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्षेत्रीय बिचौलियों की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि अमेरिका मिस्र, तुर्किए और कतर का उनके जरूरी बिचौलिए प्रयासों के लिए बहुत आभारी है, जिनकी वजह से अब तक डेवलपमेंट मुमकिन हुई है। जैसे-जैसे प्लान आगे बढ़ेगा, ये देश अहम भूमिका निभाते रहेंगे।

सर्द हवाओं के बीच भी आस्था अडिग, माघ मेला में संगम स्नान को उमड़े लाखों श्रद्धालु

प्रयागराज मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। दूर-दराज के राज्यों से लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए संगम पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। सुबह से ही संगम तट पर 'हर-हर गंगे' और 'जय श्रीराम' के जयघोष गूंज रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। सुबह 10 बजे तक करीब 36 लाख श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, रोशनी, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को स्नान या दर्शन में कोई परेशानी न हो। मकर संक्रांति के अवसर पर अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वतमानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को पवित्र संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माघ मास का विशेष महत्व है और इस माह में किए गए व्रत, पूजा और अनुष्ठान पूरे वर्ष शुभ फल देते हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अटल एरिना के आचार्य इस पावन अवसर पर प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने सभी देशवासियों को माघ मास की पवित्रता का आनंद लेने और शुभकामनाएं दीं। वहीं, काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने भी मकर संक्रांति के अवसर पर संगम में पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान का मकर राशि में प्रवेश एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक क्षण है, जिसका इंतजार भीष्म पितामह ने हजारों वर्षों तक किया था। उन्होंने भागीरथ के 60 हजार पूर्वजों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन आस्था और मोक्ष से जुड़ा हुआ है। शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि संगम आस्था और भक्ति का सर्वोच्च केंद्र है। जो भी यहां जिस भावना से आता है, उसे उसी अनुरूप फल मिलता है। उन्होंने कहा कि यह समय सनातन धर्म के पुनरुत्थान का है और यह दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि सनातन संस्कृति आज भी जीवंत और सशक्त है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कहीं स्थायी शांति संभव है, तो वह सनातन मूल्यों, आदर्शों और मान्यताओं से ही आ सकती है। सनातन ही नफरत, हिंसा और युद्ध के माहौल को समाप्त कर सकता है। इस दौरान छह वर्षीय बाल संत श्री बाहुबली महाराज ने कहा कि यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि अगर धर्म की रक्षा होगी तो देश की रक्षा अपने आप होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। माघ मेले के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या को लेकर सुरक्षा, यातायात और अन्य तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का स्नान सुचारू रूप से चल रहा है और अगले कुछ घंटों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। सभी घाटों पर व्यवस्थाएं योजना के अनुसार काम कर रही हैं और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने भी कहा कि मेला क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं ठीक से चल रही हैं। रोशनी, सुरक्षा और स्नान से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। श्रद्धालुओं ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की। एक श्रद्धालु ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद स्नान करने में कोई परेशानी नहीं हुई। कानपुर से आए श्रद्धालुओं ने पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बताया। झारखंड से आए श्रद्धालुओं ने टिकट, ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद किया। उत्तर मध्य रेलवे ने भी रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे सिस्टम, अस्थायी टिकट काउंटर, अलाव, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि रेलवे की व्यवस्थाएं कुंभ मेले जैसी हैं और यात्रा पूरी तरह सुरक्षित व सुविधाजनक है।