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ओरछा में मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बेतवा नदी में डुबकी लगाई, रामराजा के दर्शन

निवाड़ी  देशभर में आज यानि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है. मध्य प्रदेश में लोग नर्मदा, शिप्रा, बेतवा नदी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. इसी क्रम में रामराजा नगरी ओरछा में भी आस्था का सैलाब उमड़ा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु बेतवा नदी में डुबकी लगाने पहुंचे. साथ ही बेतवा नदी के किनारे लगे मेले का लोग आनंद ले रहे हैं. पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए. ओरछा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब मकर संक्रांति के अवसर पर मध्य प्रदेश के धार्मिक व पर्यटन नगरी ओरछा में आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा. पर्व के शुभ मुहूर्त के साथ ही भक्तों ने बेतवा नदी में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई. मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है. स्नान के बाद श्रद्धालु सीधे ओरछा के प्रसिद्ध रामराजा सरकार मंदिर पहुंचे. जहां दर्शन करने वालों की भीड़ देखने लायक थी. श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में दान, तिल-गुड़ वितरण और ब्राह्मण सेवा जैसे पुण्य कार्य करते नजर आए. सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ टीम रही मौजूद कई परिवारों ने इस अवसर पर गरीबों को वस्त्र और अन्नदान कर मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व और बढ़ा दिया. दूसरी तरफ प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह सक्रिय दिखे. भीड़ नियंत्रण से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक हर कदम पर सतर्कता देखने को मिली. घाटों पर सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस बल हर एक आवाजाही पर नजर रखे हुए हैं. संवेदनशील घाटों पर एसडीआरएफ की टीमें लगातार मौजूद रहीं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए साजो-सामान के साथ तैयार रही. स्थानीय प्रशासन ने भी चिकित्सा सहायता, लाइटिंग, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को संभाल रखा था. जिससे भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. देवभूमि ओरछा में मकर संक्रांति का यह दृश्य भक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा का सुंदर संगम बन गया.

डेरा सच्चा सौदा बधियाकरण केस में वीसी के जरिए होगी गवाही

पंचकूला. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ चल रहे कथित बधियाकरण (नपुंसक बनाने) मामले में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क में रह रहे मुख्य गवाह की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से दर्ज की जाएगी, लेकिन गवाही के दौरान गवाह के निजी वकील को दूरस्थ वीसी कक्ष में मौजूद रहने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, अदालत ने मुख्य गवाह को उसकी स्वास्थ्य स्थिति से अवगत कराने के लिए एक माह का समय दिया है। गवाह की फिटनेस रिपोर्ट मिलने के बाद ही फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में उसकी गवाही की तिथि तय की जाएगी। बता दें कि मुख्य गवाह ने आंखों के इलाज का हवाला देते हुए पहले से तय गवाही की तिथियों को स्थगित करने का अनुरोध किया था। गवाह ने अदालत को बताया कि वह रेटिनल वेन ऑक्लूजन बीमारी से पीड़ित है और डाक्टरों ने उसे लंबे समय तक आंखों पर दबाव न डालने की सलाह दी है। मुख्य गवाह वर्तमान में न्यूयार्क में रह रहा है और उसकी गवाही भारतीय वाणिज्य दूतावास/महावाणिज्य दूतावास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज की जानी है। इससे पहले, अगस्त 2025 में सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उसे अमेरिका से वीसी के जरिए जिरह की अनुमति दी थी। इसके लिए सीबीआई द्वारा विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त की जा चुकी है। गवाह ने यह भी दलील दी कि गुरमीत राम रहीम सिंह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके कई राजनीतिक संपर्क बताए जाते हैं, जिससे उसे भय और दबाव की आशंका है। इसी आधार पर उसने गवाही के दौरान अपने वकील को वीसी कक्ष में साथ बैठने की अनुमति मांगी। हालांकि, आरोपियों के बचाव पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का हवाला देते हुए इस मांग का कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि वीसी के दौरान दूरस्थ स्थल पर केवल अधिकृत समन्वयक की मौजूदगी की अनुमति है। गवाह का वकील गवाही शुरू होने से पहले वीसी कक्ष के बाहर परामर्श कर सकता है, लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान उसकी मौजूदगी नहीं होगी। स्वास्थ्य संबंधी आवेदन पर निर्णय देते हुए अदालत ने कहा कि फिलहाल गवाह का इलाज जारी है, इसलिए उसे एक माह का समय दिया जाता है। गवाह को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपनी फिटनेस की जानकारी अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत को दे, जिसके बाद फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में गवाही की अगली तिथि तय की जाएगी। गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2014 का है, जिसमें राम रहीम पर अपने कथित निर्देश पर अनुयायियों के सामूहिक बधियाकरण के आरोप लगे हैं।

मायावती ने अपने जन्मदिन पर खेला ब्राह्मण कार्ड, सरकार में मिलेगा पूरा मान-सम्मान

लखनऊ  बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बड़ा सियासी दांव चला. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों 2025 में शीतकालीन सत्र में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की. ब्राह्मण विधायकों ने बीजेपी सरकार में उपेक्षा का मुद्दा उठाया है.  इसी तरह क्षत्रिय समाज के विधायकों की बैठक हुई थी. हाल के ही दिनों में सवर्ण समाज के साथ जो कुछ हुआ है वह किसी से छिपा नहीं है. बसपा सरकार बनने पर पार्टी उन्हें पूरा सम्मान देगी. मायावती ने कहा कि ‘हमने ब्राह्मण समाज को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया. ब्राह्मणों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. ब्राह्मणों को किसी का बाटी चोखा नहीं खाना चाहिए. ब्राह्मणों पर किसी तरह का अत्याचार न हो इसलिए बीएसपी की सरकार जरूरी है.’ मायावती ने क्षत्रिय विधायकों का भी जिक्र कर कहा कि उनका भी पार्टी में पूरा सम्मान होगा. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण हुआ. किसी को भी जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए. बसपा सरकार में नहीं हुआ दंगा मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में कभी मंदिर-मस्जिद का मुद्दा नहीं उठा. हमारी सरकार में कभी कोई दंगा नहीं हुआ. हमारी सरकार ने सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय के मूल सिद्धांत पर काम करती रही है. इतना ही नहीं हमारी सरकार में कानून व्यवस्था भी मजबूत रही है.मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में जो योजनाएं लाई गईं उन्हीं को आगे के सरकारों ने नाम बदलकर आगे बढ़ाया है. एक्सप्रेसवे को लेकर उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे बनाने का रोडमैप उनकी सरकार में ही बन गया था.  एक आध तो बन भी गए थे. उन्होंने बहुजन समाज को भी चेताते हुए कहा कि जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना है. अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान मायावती ने कहा, “हमारी पार्टी पूरी तरह हर स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और EVM में धांधली और बेइमानी नहीं की जाती है तो परिणाम बेहतर होंगे. हम स्तर पर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं और क्या पता बाद में EVM को हटा दिया जाए जैसे अन्य कई देशों में हुआ है. हमारी पार्टी का गठबंधन करके चुनाव लड़ने का अनुभव ये रहा है कि इससे पार्टी को नुकसान होता है और गठबन्धन करके चुनाव लड़ने वाली पार्टी को लाभ मिल जाता है. क्योंकि दलित वोटबैंक तो दूसरी पार्टी को मिल जाता है, लेकिन उनकी पार्टी का वोट हमारी पार्टी को नहीं मिलता है.  हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान सभा और लोक सभा चुनाव अकेले लड़ना बेहतर समझा है, और हम कोई भी चुनाव गठबंधन करके नहीं लड़ेंगे. आगे चलकर जब पूरा भरोसा हो जाएगा कि बसपा से गठबंधन करके वो हमारी पार्टी में भी अपना वोट ट्रासंफर करा सकती है तो सोचा जा सकता, लेकिन उसमें वर्षों लगेंगे.

एमपी में कड़ाके की सर्दी, तापमान 5 डिग्री से नीचे, ग्वालियर और भोपाल में ठिठुरन, मावठा गिरने की आशंका

भोपाल   मध्य प्रदेश में तापमान लगातार लुढ़कता जा रहा है, जिससे ठंड की रफ्तार और तेज होती जा रही है. सुबह के वक्त घना कोहरा होने से विजिविलिटी अभी भी कम बनी हुई है. वहीं मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की वजह से मावठा गिरने की भी संभावना जताई है. ग्वालियर से भोपाल तक भीषण ठंड का दौर जारी है, जबकि जबलपुर संभाग में भी कड़ाके की ठंड की पड़ रही है. शहडोल जिले का कल्याणपुर एमपी में सबसे ज्यादा ठंडा बना हुआ है, जिसके चलते यहां लोग घरों में दुबके नजर आ रहे हैं. मध्य प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार को भी पारा 5 डिग्री से नीचे चला गया है. मौसम विभाग की माने तो 16 जनवरी से हिमालयी क्षेत्र में एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव हो रहा है। इसके असर से 3-4 दिन बाद एमपी में मावठा यानी, बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, वर्तमान में पश्चिमी हिस्से के पास से एक ट्रफ गुजर रही है, लेकिन इसका असर प्रदेश में नहीं है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस को स्ट्रॉन्ग बताया जा रहा है इसलिए कई जिलों में बारिश या बादल की स्थिति बनने के आसार है। दूसरी ओर, पूर्व-उत्तर भारत के ऊपर समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम हवाएं 204 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार को भोपाल समेत कई जिलों में दिन में भी सर्द हवाएं चली। हालांकि, तेज धूप खिलने की वजह से ठंड से राहत भी मिलती रही।  सूबे के ग्वालियर से लेकर भोपाल संभाग के जिलों में इस सय तेज ठंड का दौर ठंड का दौर जारी है, जबकि जबलपुर संभाग में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शहडोल के कल्याणपुर में प्रदेश में सबसे अधिक ठंड पड़ रही है। प्रदेश में गुरुवार तड़के के हालातों पर गौर करें तो पारा 5 डिग्री से नीचे चला गया है। मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों के लिए कड़ाके की ठंड होने की संभावना जताई है। कई जगहों पर शीतलहर का दौर भी जारी है। मौसम विभाग की मानें तो सर्द हवाओं के चलते शीतलहर का प्रकोप आने वाले कुछ दिनों तक लगातार इसी तरह से जारी रहने की संभावना है, जिससे सर्दी का सितम और बढ़ेगा। उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर प्रदेश के उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में कोहरे का असर बरकरार है। गुरुवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, सतना, गुना, राजगढ़, रतलाम, मंडला समेत कई जिलों में हल्का कोहरा रहा। कोहरे की वजह से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनें निर्धारित समय से लेट हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा असर मालवा, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस में हो रहा है। इसके अलावा पंजाब मेल, जन शताब्दी समेत एक दर्जन ट्रेनें भी प्रभावित हो रही है। कल्याणपुर-करौंदी सबसे ठंडे, ग्वालियर में 7.1 डिग्री दर्ज प्रदेश के उत्तरी हिस्से में ठंड और कोहरे का असर है। मंगलवार-बुधवार की रात शहडोल के कल्याणपुर में 4.8 डिग्री और कटनी के करौंदी में 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा में 5.8 डिग्री, मंदसौर-चित्रकूट में 6.1 डिग्री, खजुराहो में 6.2 डिग्री, उमरिया में 6.8 डिग्री, दतिया-मंडला में 7 डिग्री, राजगढ़-नौगांव में 7.2 डिग्री, पचमढ़ी में 7.8 डिग्री, शिवपुरी में 8 डिग्री, दमोह-सीधी में 9 डिग्री, रायसेन-श्योपुर में 9.4 डिग्री रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7.1 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 9.8 डिग्री, इंदौर में 10.2 डिग्री, उज्जैन में 11.2 डिग्री और जबलपुर में तापमान 10 डिग्री दर्ज किया गया। कोल्ड वेव या कोल्ड डे का अलर्ट भी नहीं मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश में कहीं भी कोल्ड वेव यानी, शीतलहर का अलर्ट नहीं है। न ही कहीं कोल्ड डे रहेगा। इस बार कड़ाके की ठंड का दौर इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। मावठ (बारिश) गिरने की संभावना वहीं मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में मावठ (बारिश) गिरने की पूरी संभावना है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है, जिसके चलते एमपी में भी स्ट्रॉन्ग सिस्टम बन सकता है, ऐसे में उत्तर मध्य प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जो किसानों की फसलों के लिए अमृत के समान होगी। यहां तापमान में आई गिरावट भोपाल, ग्वालियर, पचमढ़ी, शहडोल, दतिया, मुरैना, रायसेन समेत कई जिलों में तापमान 5 डिग्री तक पहुंच गया है, जबकि मध्य प्रदेश में रातें भी सर्द हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 4 दिनों में तापमान में और भी गिरावट हो सकती है, क्योंकि यहां सर्द हवाओं का रुख तेज बना हुआ है।

सूर्यास्त के बाद मकर संक्रांति का महत्व: ये काम करें शुभ, इन गलतियों से बचें

मकर संक्रांति का पर्व हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है. आज मकर संंक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं. उत्तरायण का काल देवताओं का माना जाता है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान का बहुत विशेष महत्व माना गया है. इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ और जप-तप करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होते हैं. मकर संक्रांति के दिन उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में खिचड़ी खाई जाती है, इसलिए इसे खिचड़ी भी कहा जाता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद का समय भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. धर्म शास्त्रों में बताया गया है मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के समय कुछ काम करने बहुत शुभ होते हैं. साथ ही कुछ गलतियों से बचने के लिए भी कहा गया है. आइए इसके बारे में जानते हैं. मकर संक्रांति पर सूर्यास्त के बाद क्या करना होता है शुभ? मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन शाम के समय मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए. इस दिन सूर्यास्त के बाद शाम को लड्डू गोपाल के सामने घी का एक अखंड दापक जलाना चाहिए. ऐसा करने से परिवार में सुख-शांति आती है. इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन शाम को तुलसी के पास भी दीपक अवश्य जलाएं. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. मकर संक्रांति पर न करें ये गलतियां मकर संक्रांति के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए. इस दिन भूलकर भी बड़ों का अपमान नहीं करना चाहिए. इस दिन मांस-मछली, शराब और लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन के सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन झूठ, क्रोध और कटु वाणी बोलने से बचना चाहिए. व्यवहार में सयंम रखना चाहिए.

इंदौर: आबकारी विभाग ने 1.75 करोड़ रुपये की बीयर की 2.23 लाख लीटर नष्ट की, तीन दिन तक चला अभियान

इंदौर  इंदौर जिले के सिमरोल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेमदीग्राम में आबकारी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग द्वारा निर्धारित नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए विभिन्न ब्रांडों की एक्सपायर हो चुकी बीयर को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जन स्वास्थ्य की रक्षा करना और बाजार में असुरक्षित सामग्री की आपूर्ति को रोकना था। यहां स्थित माउण्ट एवरेस्ट ब्रेवरीज लिमिटेड में यह सभी विभिन्न ब्रांड्स की बीयर बनाई गई थी। लाखों लीटर बीयर और करोड़ों का नुकसान नष्ट की गई बीयर की मात्रा और उसकी कीमत काफी अधिक है। जानकारी के अनुसार कुल 23154 पेटियों में भरी हुई 2 लाख 23 हजार 316 लीटर बीयर को नष्ट किया गया है। यदि इसके डिस्टलरी मूल्य की बात करें तो इसकी कीमत लगभग पौने 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह पूरी प्रक्रिया उपायुक्त आबकारी संजय तिवारी की अध्यक्षता में गठित एक विशेष समिति की देखरेख में पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो। समय पर डिमांड न मिलने से खराब हुआ स्टॉक सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी ने इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि माउण्ट एवरेस्ट ब्रेवरीज द्वारा यह बीयर मध्य प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, असम और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सप्लाई करने के लिए तैयार की गई थी। हालांकि, संबंधित राज्यों से समय पर मांग प्राप्त नहीं होने के कारण इस स्टॉक को निश्चित समय सीमा के भीतर भेजा या निर्यात नहीं किया जा सका। निर्माण तिथि से 6 माह की अवधि बीत जाने के बाद इकाई प्रभारी ने स्वयं आबकारी विभाग को इसकी सूचना दी थी। तीन दिन तक चली नष्टीकरण की प्रक्रिया आबकारी विभाग ने इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत स्टॉक के सत्यापन और गणना की प्रक्रिया शुरू की। जन स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पिछले तीन दिनों से लगातार नष्टीकरण की कार्यवाही की जा रही थी। बीयर को नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया गया। बोतलों में भरी बीयर को बहाकर नष्ट किया गया, जबकि केन में भरी बीयर को बुलडोजर और जेसीबी मशीनों की मदद से कुचल दिया गया। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की गई। 

पंजाब की जीएनडीयू में आज राष्ट्रपति मुर्मू देंगी 463 विद्यार्थियों को डिग्री

चंडीगढ़. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह अमृतसर की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में 50वीं गोल्डन जुबली कान्वोकेशन में हिस्सा लेंगी। पूरे अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज पंजाब दाैरे पर हैं। वे अमृतसर में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) की 50वीं गोल्डन जुबली कान्वोकेशन में हिस्सा लेंगीं। उनके आगमन को लेकर पुलिस और प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। जीएनडीयू मैनेजमेंट, जिला प्रशासन और राज्य पुलिस ने संयुक्त रूप से सुरक्षा रिहर्सल पूरी कर कार्यक्रम को यादगार बनाने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। एसएस परमार की अध्यक्षता में एडीजीपी स्तर की सुरक्षा टीम ने कन्वेंशन हाल में सुरक्षा मानकों और रूट प्लान का विस्तार से रिव्यू किया। वीसी प्रो. डा. करमजीत सिंह, डीसी दलविंदरजीत सिंह, पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर, एआईजी परमिंदर सिंह भंडाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विद्यार्थियों को पहचान दस्तावेज और पास जारी किए गए। मेडल और डिग्री पाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एडमिशन डाॅक्यूमेंट और टैग नंबर भी तय किए गए। परिसर और आसपास के इलाके को बैरिकेडिंग के साथ सील किया गया और तलाशी के बाद ही लोगों को एरिया में प्रवेश दिया जा रहा है। इस कान्वोकेशन में कुल 463 विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल दिए जाएंगे, जिनमें 74 अंडरग्रेजुएट, 102 पोस्टग्रेजुएट, 270 पीएचडी डिग्री और 7 मेमोरियल मेडल शामिल हैं। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी दो मशहूर हस्तियों को ऑनरेरी डॉक्टरेट प्रदान करेगी। राज्यपाल भी पहुंचेंगे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और गवर्नर गुलाबचंद कटारिया भी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, मुख्यमंत्री गुरुवार को हरमिंदर साहिब व अकाल तख्त में विशेष स्पष्टीकरण देंगे, जिसके चलते वहां भी सख्त सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। संपूर्ण व्यवस्था में पुलिस और प्रशासन सतर्क हैं, जिससे आम जनता और प्रतिभागियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पीसी के दौरान शॉर्ट सर्किट, मची अफरातफरी; मायावती को तुरंत सुरक्षा में निकाला गया बाहर

लखनऊ राजधानी लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन के मौके पर बड़ा हादसा टल गया। मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) के दौरान ही अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। बिजली को बोर्ड से चिंगारी के साथ ही धुआं निकलने लगा। घटना उस वक्त हुई जब मायावती की प्रेसवार्ता समाप्त होने ही वाली थी। देखते ही देखते पूरे हॉल में धुआं भर गया। इससे वहां मौजूद पत्रकारों और नेताओं में हड़कंप मच गया।   तत्परता से टला बड़ा हादसा प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में जैसे ही शॉर्ट सर्किट हुआ, बिजली के बोर्ड से चिंगारियां निकलने लगीं और धुएं का गुबार छा गया। हालांकि, मायावती की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गजब की फुर्ती दिखाई। खतरे को भांपते हुए सुरक्षा घेरे ने तत्काल पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को लेकर सुरक्षित तरीके से हॉल से बाहर निकाला और उनके आवास की ओर ले गए। अग्नि सुरक्षा उपकरणों का हुआ उपयोग शॉर्ट सर्किट की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा टीम और बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों ने बिना समय गंवाए वहां रखे अग्नि सुरक्षा उपकरणों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल किया। इससे आग फैलने से पहले ही काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। अग्नि सुरक्षा उपकरणों का हुआ उपयोग शॉर्ट सर्किट की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा टीम और बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों ने बिना समय गंवाए वहां रखे अग्नि सुरक्षा उपकरणों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल किया। इससे आग फैलने से पहले ही काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा पर उठे सवाल? बसपा प्रमुख की सुरक्षा को देखते हुए इस तरह की तकनीकी खामी पर सवाल उठने लगे हैं। जन्मदिन के बड़े आयोजन और मीडिया के भारी जमावड़े के बीच हुए इस शॉर्ट सर्किट ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और तकनीकी टीम सर्किट की जांच कर रही है।  

बिहार विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति खतरे में, सभी 6 विधायक JDU में शामिल होने की संभावना

पटना  बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलबदल के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के सभी छह विधायक पाला बदलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, आबिदुर रहमान, मोहम्मद कामरुल होदा और मनोज बिस्वान जदयू नेतृत्व के संपर्क में हैं। हाल ही में पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज से सभी छह विधायकों ने दूरी बनाए रखी। 8 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम द्वारा बुलाई गई 'मनरेगा बचाओ' अभियान की बैठक में भी विधायक शामिल नहीं हुए। जदयू के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि कांग्रेस विधायक अपनी पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं और उनके जदयू में शामिल होना बस कुछ ही दिनों की बात है। विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि जदयू को 85 सीटें मिली थीं। यदि कांग्रेस के 6 विधायक जदयू में आते हैं, तो जदयू की संख्या 91 हो जाएगी, जिससे वह भाजपा को पछाड़कर सदन में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। दूसरी ओर, भाजपा भी पीछे नहीं है। वह उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' (RLM) के असंतुष्ट विधायकों पर नजर गड़ाए हुए है ताकि अपना शीर्ष स्थान बरकरार रख सके। कुशवाहा की पार्टी में फूट के आसार एनडीए के घटक दल RLM के 4 में से 3 विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक को कैबिनेट मंत्री बनाने से पार्टी के विधायक नाराज हैं। हाल ही में इन विधायकों ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की, जिससे पार्टी टूटने की अटकलें तेज हो गई हैं। RCP की घर वापसी की चर्चा जदयू के पूर्व कद्दावर नेता आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से अलग होकर प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' में शामिल हो गए थे। उनके भी दोबारा जदयू में आने की अटकलें हैं। हाल ही में एक 'कुर्मी सम्मेलन' में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कांकेर में टैक्सी नाले में गिरने से दो लोगों की मौत

कांकेर. शहर से सटे ग्राम कुलगांव में बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे में यात्रियों से भरी एक टैक्सी (ओमनी बस) अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे नाले में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में एक पुरुष और एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन में सवार कुल 18 लोगों में से 16 लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ओडिशा के नवरंगपुर जिले से पखांजूर मेला देखने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी ओमनी बस क्रमांक CG 17 KJ 8609 बुधवार को कुलगांव के पास अचानक अनियंत्रित हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन की रफ्तार काफी तेज थी और मोड़ पर नियंत्रण खोते ही टैक्सी सीधे सड़क से नीचे नाले में जा समाई। हादसा इतना भयावह था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में वाहन चालक एवं मालिक ओमप्रकाश कार्ला, निवासी बोरगांव, केशकाल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरी मृतक महिला की पहचान मिताली मजूमदार, पति निर्मल मजूमदार, निवासी भामा कुंदई, जिला नवरंगपुर (ओडिशा) के रूप में हुई है। दोनों की मौत से उनके परिवारों में कोहराम मच गया है। हादसे की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस एवं यातायात पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के माध्यम से जिला कोमलदेव मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में कई को सिर, हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। तीन घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया गया है। हादसे की खबर लगते ही शहर के नामचीन समाजसेवी संस्था प्रमुख अजय पप्पू मोटवानी अपनी टीम के साथ पहुंचकर घायलों को हरसंभव इलाज मदद कर मानवता का मिशाल पेश किया गया है। घायलों में शामिल प्रमुख नाम इस प्रकार हैं— मनोरोग पारबिल, उम्र 40 वर्ष, निवासी कुंदई, जिला नवरंगपुर (ओडिशा);दीनबंधु विश्वास, पिता रसभेत्र विश्वास, उम्र 27 वर्ष; पराजय रेजिलराय, उम्र 14 वर्ष; लग हुनुन विश्वास, उम्र 15 वर्ष, निवासी पारबिल; अशिम अधिकारी, निवासी उदयपुर, थाना रायघर, जिला नवरंगपुर (ओडिशा); रजिया, पत्नी अजगर अली, उम्र 35 वर्ष, निवासी केशकाल; रिफल, पिता अजगर अली, उम्र 15 वर्ष, निवासी केशकाल। इसके अलावा अन्य घायलों का भी अस्पताल में उपचार जारी है। क्षमता से अधिक सवारी बैठाई – बताया जा रहा है कि वाहन में क्षमता से अधिक सवारी बैठाई गई थी, जिससे संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस द्वारा हादसे के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।इस हादसे ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा, यात्री वाहनों की फिटनेस और ओवरलोडिंग जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। स्थानीय नागरिकों ने भी हादसे पर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि कुलगांव क्षेत्र में सड़क की स्थिति और यातायात नियंत्रण पहले से ही खराब है। तेज रफ्तार वाहनों पर न तो नियमित निगरानी होती है और न ही क्षमता से अधिक सवारी ढोने वालों पर प्रभावी कार्रवाई। यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते, तो शायद आज दो परिवारों को अपनों की अर्थी नहीं उठानी पड़ती। फिलहाल पुलिस ने मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। वहीं अस्पताल में भर्ती घायलों के इलाज पर प्रशासन द्वारा नजर रखी जा रही है। यह हादसा न सिर्फ दो मौतों की कहानी है, बल्कि सिस्टम की उस चूक का आईना भी है, जो बार-बार सामने आने के बावजूद सुधरने का नाम नहीं ले रही। पूरे मामले पर यातायात प्रभारी दीपक साव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ओडिशा नौवरंगपुर जिले से टैक्सी पखांजूर मेला देखने जा रही थी जिसमें लगभग अठारह लोग सवार थे हादसे में टैक्सी चालक और एक महिला सवार की मौत हो गई वहीं टैक्सी में सवार सोलह लोग घायल हो गए जिसमें तीन गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें रायपुर रेफर किया गया है फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।