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‘झाड़ू लगाते बीती जिंदगी, लेकिन नौकरी आज भी अस्थायी’ पर हाईकोर्ट सख्त

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 40 वर्षों से पार्ट टाइम सफाईकर्मी के रूप में सेवा दे रहे कर्मचारी के साथ हरियाणा सरकार के रवैये पर तीखा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक काम लेने के बाद भी कर्मचारी के नियमितीकरण से इनकार करना संविधान की आत्मा के विरुद्ध है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1986 से लगातार सेवाएं दे रहे करनाल निवासी बीर सिंह उर्फ भीरा को आज भी अस्थायी बनाए रखना राज्य द्वारा किया गया संस्थागत शोषण है, जिसे किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस संदीप मोद्गिल ने कहा कि राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वह एक मॉडल एंप्लायर की तरह व्यवहार करे, लेकिन तकनीकी वर्गीकरण का सहारा लेकर दशकों तक श्रम लेने के बाद जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेना इस अवधारणा को ही खोखला कर देता है। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक सेवा लेने के बाद कर्मचारी को अनियमित बनाए रखना न्याय और निष्पक्षता की बुनियादी भावना पर चोट है। अदालत के समक्ष यह भी आया कि याचिकाकर्ता का सेवा रिकार्ड पूरी तरह निष्कलंक रहा है और उसकी ईमानदारी या कार्यकुशलता पर कभी सवाल नहीं उठा। न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता द्वारा किया गया कार्य न तो अस्थायी प्रकृति का है और न ही कभी-कभार किया जाने वाला काम है, बल्कि संस्थान के दैनिक संचालन के लिए अनिवार्य और स्थायी काम वह कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कर्मचारी को वर्षों तक अस्थायी बनाए रखना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान केवल औपचारिक समानता की बात नहीं करता, बल्कि वह गरिमा, आजीविका और सामाजिक न्याय की ठोस गारंटी देता है। प्रस्तावना में निहित समाजवादी गणराज्य की भावना तब निरर्थक हो जाती है, जब प्रशासनिक ढांचे के सबसे निचले पायदान पर काम करने वालों को जीवन भर की सेवा के बाद भी सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही याचिकाकर्ता को नाममात्र का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कहा गया हो, लेकिन उसके द्वारा किया श्रम सार्वजनिक संस्थानों के सुचारू संचालन की रीढ़ है।

BPL पर बगावत की छाया, खिलाड़ियों के विरोध से मैच में हुई देरी

नई दिल्ली बांग्लादेश प्रीमियर लीग का 25वां मैच आज यानी गुरुवार, 15 जनवरी को चैटोग्राम रॉयल्स और नोआखली एक्सप्रेस के बीच दोपहर 1 बजे से खेला जाना था। मगर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ उन्हीं के खिलाड़ियों के प्रदर्शन के चलते यह मैच तय समय पर शुरू नहीं हो पाया है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार दोनों टीमों के खिलाफ मैच के लिए मैदान पर भी नहीं पहुंचे। बता दें, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की फाइनेंस कमिटी के चेयरमैन नजमुल इस्लाम के बयान से भड़के क्रिकेटरों ने उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो क्रिकेटर देश में हर तरह की क्रिकेट गतिविधियों को रोक देंगे। क्रिकेट खेलने का बहिष्कार करेंगे।   रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को पहला BPL मैच – चट्टोग्राम रॉयल्स और नोआखली एक्सप्रेस के बीच – देरी से शुरू होगा क्योंकि दोनों टीमें टॉस के लिए वेन्यू पर नहीं पहुंचीं, जो लोकल टाइम के अनुसार 12.30 बजे होना था। मैच लोकल टाइम के अनुसार 1 बजे शुरू होना था। चट्टोग्राम-नोआखली मैच के मैच रेफरी शिपर अहमद ने ESPNcricinfo को बताया: "हम ग्राउंड के बीच में खड़े हैं। हमें नहीं पता कि क्या हो रहा है। BPL टेक्निकल कमेटी आपको बेहतर बता सकती है।" नजमुल के किस बयान से भड़के बांग्लादेशी क्रिकेटर बांग्लादेशी क्रिकेटर नजमुल इस्लाम के उस बयान से भड़के हुए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलता है तो उससे बोर्ड को कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा। वित्तीय नुकसान सिर्फ खिलाड़ियों का होगा और बोर्ड उनकी कमाई को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं करेगा। नजमुल ने दलील दी कि बीसीबी खिलाड़ियों पर करोड़ों टका खर्च करता है लेकिन जब वे खराब प्रदर्शन करते हैं तो उनसे रकम लौटाने को तो नहीं कहता, इसलिए खिलाड़ियों को मुआवजा देने का कोई सवाल ही नहीं है। नजमुल इस्लाम के इस बयान के बाद CWAP ने चर्चा के बाद बुधवार रात को आनन-फानन में इमर्जेंसी ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। CWAB के अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन ने कहा कि नजमुल के शब्दों ने सीमा पार कर दी है।  

‘अच्छी हवा के लिए वोट जरूरी’—BMC इलेक्शन को लेकर हेमा मालिनी की अपील

मुंबई बृहनमुंबई म्युनिसिपल कार्पोरेशन (बीएमसी) चुनाव में वोट डालने पहुंचे नेता-अभिनेताओ के वीडियोज वायरल हो रहे हैं। इस बीच हेमा मालिनी का वीडियो भी सामने आया। हेमा ने लोगों को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित किया और बताया कि वह सुबह-सुबह ही अपना फर्ज निभाने आ गई हैं और लोगों को भी ऐसा करना चाहिए। हेमा ने यह भी बताया कि वोट देने की जिम्मेदारी पूरी करेंगे तो क्या-क्या फायदे होंगे। हेमा ने यह भी बताया कि मुंबई में क्या विकास देखना चाहेंगी।   हेमा को चाहिए ऐसा मुंबई बीएमसी इलेक्शन के लिए हेमा मालिनी ने गुरुवार सुबह अपना वोट डाला। इसके बाद वह मीडिया से मुखातिब हुईं। हेमा बोलीं, मैं सबसे यही विनती करती हूं कि आप सब लोगों को वोट देने के लिए आना चाहिए। जैसे अभी मैं सुबह-सुबह वोट देने आ गई हूं। मेरे पास आगे बहुत काम हैं, जिन्हें करूंगी। पर मुंबई के हर नागरिक के लिए यह बहुत अहम है। अगर आपको सुरक्षा चाहिए, प्रगति चाहिए, मुंबई में अच्छी हवा चाहिए, गड्ढा मुक्त रोड चाहिए तो हम सबको जिम्मेदारी लेना पड़ेगा। वैसे तो मुंबई दुनिया का सबसे अच्छा शहर है, वोट देने का अधिकार है अगर उसे जताएंगे तो यह और भी बढ़िया हो सकता है। मैं मुंबई के सारे नागरिकों से दरख्वास्त करती हूं कि आगे आकर वोट करें।   कौन-कौन पहुंचा वोट डालने हेमा मालिनी के अलावा अक्षय कुमार, ट्विंकल खन्ना, सलीम खान, पेरेंट्स के साथ जॉन अब्राहम, सुनील शेट्टी, गुलजार, तमन्ना भाटिया, पत्नी रीना और बेटी आइरा के साथ आमिर खान वोट्स डालने पहुंचे। अक्षय से मांगी लड़की ने मदद रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षय सबसे पहले वोट डालने पहुंची थीं। अक्षय को देखकर एक लड़की मदद मांगने पहुंची। उसने अक्षय से कहा कि उसके पापा कर्ज में हैं। अक्षय ने उससे बोला कि नंबर दे दे। लड़की अक्षय के पैरों पर गिरी तो अक्षय ने रोक दिया और खुद झुक गए।

रायपुर में निजी कंपनी के कर्मचारी ने 70 लाख का किया गबन

रायपुर. रायपुर। रांवाभाठा स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत कर्मचारी द्वारा साढ़े चार महीने में 70.41 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। खमतराई थाना पुलिस ने इस संबंध में आरोपी कर्मचारी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मेटल पार्क रोड स्थित रामा मोटू प्रालि में कार्यरत मुनीर अहमद (37) ने 21 मई से 25 अक्टूबर के बीच कंपनी के स्पेयर पार्ट्स इश्यू किए जाने का फर्जी रिकॉर्ड दर्शाकर करीब 70.41 लाख रुपये की राशि अपने खाते में ट्रांसफर कर ली। कंपनी संचालक केतन चौधरी (39) द्वारा स्टॉक वेरिफिकेशन और आय-व्यय की जांच कराए जाने पर इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद संचालक ने खमतराई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है और आरोपी कर्मचारी से पूछताछ सहित आगे की जांच की जा रही है।

डाबर इंडिया का नया लॉन्च: सोनम बाजवा के साथ सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक

डाबर इंडिया के ऑक्सीलाइफ सैलून प्रोफेशनल ने सोनम बाजवा के साथ लॉन्च किया सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक भोपाल  डाबर इंडिया के प्रीमियम सैलून स्किनकेयर ब्रांड, ऑक्सीलाइफ सैलून प्रोफेशनल ने अपने उन्नत सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक को लॉन्च करने की घोषणा की है। इस लॉन्च की शुरुआत उनके प्रमुख अभियान ‘स्किनश्योरेंस विद ऑक्सीलाइफ’ के साथ हुई है, जिसमें लोकप्रिय अभिनेत्री सोनम बाजवा के साथ-साथ कई प्रमुख ब्यूटी और लाइफस्टाइल इंफ्लुएंसर्स नजर आ रहे हैं। पेशेवर सैलून ट्रीटमेंट और घर पर मिलने वाली सुविधा के बीच के अंतर को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया यह नया सिंगल-यूज़ फॉर्मेट, तुरंत टैन हटाने और त्वचा में चमक लाने के लिए एक उच्च-प्रदर्शन, स्वच्छ और सटीक समाधान प्रदान करता है। ‘स्किनश्योरेंस विद ऑक्सीलाइफ’ अभियान इस सशक्त विश्वास पर आधारित है कि आपकी त्वचा अपना खुद का एक बीमा  पाने की हकदार है। यह त्वरित समाधानों से आगे बढ़कर सुरक्षा का एक दीर्घकालिक वादा प्रदान करता है। जैसे-जैसे आपकी त्वचा हर दिन धूप, तनाव और पर्यावरणीय कारकों के निरंतर प्रभाव का सामना करती है, ऑक्सीलाइफ सैलून प्रोफेशनल स्किनकेयर को "स्किनश्योरेंस" के रूप में फिर से परिभाषित करता है—एक उन्नत, सैलून-ग्रेड देखभाल जो प्राकृतिक चमक की रक्षा के लिए बनाई गई है। इस अभियान में, सोनम बाजवा सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक को अपनी दिनचर्या में सहजता से शामिल करके इस दर्शन को साकार करती हैं, और दिखाती हैं कि हर मौसम में स्वस्थ, चमकदार और आत्मविश्वासी त्वचा के लिए निवेश करना कितना आसान है। "ऑक्सीलाइफ सैलून प्रोफेशनल के सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक का लॉन्च हमारे सैलून स्किनकेयर पोर्टफोलियो के प्रीमियमकरण को गति देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। 'स्किनश्योरेंस विद ऑक्सीलाइफ' के साथ, हम एक विशिष्ट और स्केलेबल ब्रांड प्लेटफॉर्म बना रहे हैं जो उत्पाद के लाभों से परे जाकर सक्रिय त्वचा सुरक्षा के बारे में एक दीर्घकालिक विमर्श स्थापित करता है। सोनम बाजवा के नेतृत्व में डिजिटल स्टोरीटेलिंग और उच्च-प्रदर्शन वाले सिंगल-यूज़ फॉर्मेट को जोड़कर, हम ऑक्सीलाइफ को विकास की महत्वपूर्ण संभावनाओं वाले एक आधुनिक, प्रीमियम स्किनकेयर ब्रांड के रूप में मजबूत कर रहे हैं।" डाबर इंडिया लिमिटेड के मार्केटिंग डायरेक्टर,  अभिषेक जुगरान  ने कहा। घर पर की जाने वाली एक संपूर्ण वन-स्टेप रेडिएंस अनुष्ठान के रूप में पेश किया गया, ऑक्सीलाइफ सैलून प्रोफेशनल सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक जनरल ट्रेड और मॉडर्न ट्रेड स्टोर के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। इसे एक ही बार के उपयोग में तुरंत टैन हटाने और लंबे समय तक बनी रहने वाली चमक प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें शामिल प्रत्येक सामग्री एक लक्षित भूमिका निभाती है: अल्फा अर्बुटिन अतिरिक्त मेलेनिन को नियंत्रित करके सनटैन को कम करने में मदद करता है ताकि त्वचा अधिक चमकदार और एकसमान दिखे; कोजिक एसिड धूप के कारण खोई हुई स्पष्टता और चमक को वापस लाता है; दूध टैन हुई त्वचा को कोमलता से एक्सफोलिएट करता है, उसे शांति प्रदान करता है और हाइड्रेट करता है जिससे त्वचा नरम और तरोताजा महसूस होती है; वहीं शहद यूवी किरणों के संपर्क से प्रभावित हुई 'स्किन बैरियर' (त्वचा की सुरक्षात्मक परत) की मरम्मत करने में मदद करता है। अभियान का चेहरा, सोनम बाजवा ने कहा: "मुझे यह बहुत पसंद है कि ऑक्सीलाइफ सैलून प्रोफेशनल चमकदार और टैन-मुक्त त्वचा पाना कितना आसान बना देता है। सिंगल-यूज़ स्किन ब्राइटनिंग डिटैन पैक इस्तेमाल करने में सरल है और उन दिनों में भी तुरंत दिखने वाले परिणाम देता है जब मैं लगातार भागदौड़ में होती हूँ। मेरे लिए, आधुनिक सुंदरता का मतलब ऐसा स्किनकेयर है जो आपकी जीवनशैली में सहजता से फिट हो जाए—आसान, प्रभावी और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला।" डाबर इंडिया लिमिटेड के स्किन केयर मार्केटिंग हेड, विराट खन्ना ने कहा: "डिटैन, पेशेवर स्किनकेयर के भीतर सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट में से एक है, जिसका मुख्य कारण धूप का बढ़ता प्रभाव और तुरंत परिणामों की मांग है। ऑक्सीलाइफ के इस नए पैक के साथ, हम एक सटीक और स्वच्छता-आधारित फॉर्मेट के माध्यम से इस मांग को पूरा कर रहे हैं। इसका सिंगल-यूज़ डिज़ाइन सही मात्रा और निरंतर परिणाम सुनिश्चित करता है, साथ ही घर पर ही एक सरल वन-स्टेप प्रक्रिया में सैलून जैसा अनुभव प्रदान करता है।"

16 जनवरी 2026: लाड़ली बहनों के खाते में आएगी योजना की अगली किस्त, जानें राशि और पात्रता

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। ​वर्तमान में योजना के तहत 1 करोड़ 26 लाख पात्र महिलाओं को 1,500 रुपए प्रति माह (18000 रु सालाना) दिए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब जनवरी में 32वीं किस्त जारी होना है। मिली जानकारी के अनुसार, सीएम डॉ. मोहन यादव 16 जनवरी 2026 को पात्र महिलाओं के खाते में 32वीं किस्त के 1500-1500 रुपए माखन नगर, नर्मदापुरम से जारी करेंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण राज्य के सभी जिलों में किया जाएगा। हालांकि अब तक महिला एवं बाल विकास विभाग या मोहन सरकार द्वारा इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ध्यान रहें जिन महिलाओं ने इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करा रखा है और पात्रता की शर्तों को पूरा करती हैं, उन्हें अगली किस्त का लाभ मिलेगा। जिन महिलाओं ने ईकेवाईसी नहीं करवाई है, उनकी राशि अटक या रुक सकती है। कब शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरू की गई थी। योजना के उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनके निर्णय अधिकार को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सतत सुधार सुनिश्चित करना है।     10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना की शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः 250 रुपये की वृद्धि की गई।     इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, 2024 व 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर 250 रुपये की विशेष सहायता राशि भी बहनों को प्रदान की गई। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।     योजना की शुरुआत (जून 2023) से लेकर दिसंबर 2025 तक लगभग 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। योजना में किसे मिलता है लाभ पात्रता:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।     21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं। अपात्र:     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     ​जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।     स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/     संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।  

सेना दिवस पर जयपुर में अर्जुन टैंक और धनुष तोप का शानदार प्रदर्शन

जयपुर  आज भारतीय सेना दिवस पर भव्य परेड का आयोजन किया गया, जहां भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अनुशासन की झलक जयपुरवासियों को देखने को मिली. परेड में खासतौर पर भारतीय सेना के जवानों ने मार्च-पास्ट से लेकर आसमान में हेलीकॉप्टर की फ्लाई-पास्ट का भव्य प्रदर्शन किया, जिससे महला रोड पर पूरी तरह देशभक्ति का माहौल बना रहा. परेड के दौरान भारतीय सेना के भव्य हथियारों, जिनमें अर्जुन टैंक, के-9 वज्र, धनुष तोप, बीएमपी, सिलिका जैसे अत्याधुनिक हथियारों और बख्तरबंद वाहनों का प्रदर्शन किया गया. भारतीय सेना के भव्य हथियारों में शामिल उन स्वदेशी हथियारों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें भारतीय सेना की सबसे खास ताकत माना जाता है. ऐसे खास हथियारों को लेकर सेना की भव्य प्रदर्शनी में सेना के जवानों से बातचीत की गई. जवानों ने बताया कि भारतीय सेना के हथियारों में वैसे तो सभी हथियार बेहद खास हैं, लेकिन उनमें अर्जुन मार्क-1 टैंक और धनुष तोप विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो पूरी तरह भारत में बने हैं. अपनी खास खूबियों के चलते ये हथियार सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक माने जाते हैं. अर्जुन मार्क-1 टैंक अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच (आर्मर) से मिलने वाली सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. वहीं धनुष तोप भारतीय सेना की स्वदेशी आर्टिलरी ताकत है, जिसमें डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक गन लेइंग जैसी आधुनिक तकनीकों के चलते यह सेना के लिए बेहद खास मानी जाती है. जबरदस्त फायर पावर और मजबूत कवच के लिए फेमस है अर्जुन टैंक  भारतीय सेना के जवान बताते हैं कि अर्जुन मार्क-1 टैंक हाइड्रोलिक सिस्टम के कारण रेगिस्तान से लेकर सड़कों तक चलने में सक्षम है. अर्जुन मार्क-1 टैंक भारत का स्वदेशी मेन बैटल टैंक है, जिसे खासतौर पर भारतीय सेना के लिए तैयार किया गया है, जो युद्ध के समय सेना के लिए खासा मददगार साबित होता है. यह टैंक विशेष रूप से अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच से मिलने वाली सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. टैंक में ऐसा फायर कंट्रोल सिस्टम लगा है, जिसके चलते यह 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलते हुए भी दिन, रात या किसी भी मौसम में सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इसी टैंक का नया वर्जन अर्जुन मार्क-1A 72 नए फीचर्स और सुधारों के साथ सेना में शामिल किया गया है, जिससे इसकी परफॉर्मेंस और भरोसेमंद क्षमता पहले से बेहतर हुई है. जवान बताते हैं कि अगर इसकी बनावट और खासियत की बात करें तो अर्जुन टैंक को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है. इसमें 4 सैनिक बैठकर इसे संचालित करते हैं, इसकी लंबाई 10,640 मिमी और चौड़ाई 3,866 मिमी है, जबकि इसकी ऊंचाई 3,030 मिमी है. इसका वजन 62.5 टन है, जिसके चलते यह भारतीय सेना के सबसे भारी टैंकों के बेड़े में शामिल है. इसकी मुख्य तोप 120 मिमी की है, जो जबरदस्त फायर पावर प्रदान करती है. टैंक में खासतौर पर विमान-रोधी मशीन गन भी लगी है, जिसके चलते हवाई हमलों के समय भी टैंक से फायर किया जा सकता है, इस टैंक की मारक क्षमता 5 किलोमीटर तक है. भारतीय सेना की स्वदेशी आर्टिलरी ताकत है धनुष  सेना के जवान बताते हैं कि अर्जुन टैंक के अलावा भारतीय सेना के पास स्वदेशी आर्टिलरी ताकत के रूप में धनुष तोप भी है, जो डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक गन लेइंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है. जवान बताते हैं कि धनुष तोप मध्यम गन श्रेणी का हथियार है, जो कई किलोमीटर तक चलने में सक्षम है। इसका वजन 12.7 टन है. धनुष तोप खासतौर पर 30 डिग्री दाएं-बाएं और -3 डिग्री से 70 डिग्री तक ऊंचाई में फायर करने में सक्षम है. इसके अलावा धनुष तोप की मैन फायरिंग दर की बात करें तो यह 15 सेकंड में 3 राउंड और 60 मिनट में 60 राउंड की तीव्र गति से फायर करने में सक्षम है. धनुष में लगी तोप 155 मिमी/45 कैलिबर की है, जो 38 से 40 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है.

नितिन नवीन भाजपा आलाकमान का ‘संदेश’ लेकर दो दिन के दौरे पर आए पटना

पटना. पटना एयरपोर्ट पर गुरुवार को जो दृश्य दिखा, वह सिर्फ एक नेता का स्वागत नहीं था, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर बदले सियासी मिजाज और संगठनात्मक अनुशासन का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। बिहार मूल के युवा नेता और भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पटना आगमन पर जिस तरह दिग्गज नेताओं की कतार लगी, उसने साफ कर दिया कि अब संदेश ऊपर से आया है और उसका पालन जमीन पर दिख रहा है। दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे के कई मंत्री, वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह नजारा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिलता था। दरअसल, नितिन नवीन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जब वे पहले पटना आए थे, तब कई बड़े भाजपा नेता एयरपोर्ट पर नजर नहीं आए थे। इस पर पार्टी आलाकमान ने नाराजगी जताते हुए साफ निर्देश दिया था कि नितिन नवीन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हैं और उनके हर दौरे पर वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। गुरुवार को पटना एयरपोर्ट पर दिखी एकजुटता को उसी निर्देश का सीधा असर माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने इस मौके पर कहा कि भाजपा में युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है और इसे लेकर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि संगठन में अनुशासन और नेतृत्व के प्रति सम्मान ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उनके बयान को संगठनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। नितिन नवीन का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है। मकर संक्रांति के अवसर पर वे शुक्रवार को पटना में पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन करेंगे। खास बात यह है कि हर साल वे इस भोज का आयोजन करते रहे हैं, लेकिन कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मकर संक्रांति कार्यक्रम है, जिसे सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि अध्यक्ष चुने जाने से महज पांच दिन पहले नितिन नवीन अचानक पटना पहुंचे थे, जिसने पहले ही राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी थी। अब उनके स्वागत और आगामी भोज को संगठन में उनकी मजबूत होती स्थिति और आलाकमान के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का पटना आगमन भाजपा के भीतर नेतृत्व, अनुशासन और संदेश की राजनीति का स्पष्ट संकेत बनकर उभरा है- जहां अब स्वागत भी निर्देश के साथ होता है और संदेश भी पूरे दमखम के साथ जाता है।

झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बने आदित्य साहू

रांची. भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में संगठनात्मक नेतृत्व की कमान आदित्य साहू को सौंपकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब राज्य में अपेक्षाकृत युवा, ऊर्जावान और जमीनी नेतृत्व के सहारे अपनी राजनीतिक धार को तेज करना चाहती है। निचले स्तर से संगठन में काम करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचे साहू का सफर भाजपा की कैडर आधारित राजनीति का उदाहरण है। उनका चयन केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि झारखंड में भाजपा की भविष्य की रणनीति का संकेत भी है। वहीं, इस चयन से ओबीसी समाज को भी साधने का प्रयास किया गया है। झारखंड भाजपा का नेतृत्व लंबे समय तक अपेक्षाकृत वरिष्ठ और अनुभव आधारित चेहरों के हाथ में रहा है। ऐसे नेतृत्व ने संगठन को स्थिरता तो दी, लेकिन बदले हुए सामाजिक–राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप आक्रामक विस्तार की कमी भी महसूस की गई। इसके विपरीत आदित्य साहू का राजनीतिक विकास छात्र राजनीति, मंडल और जिला स्तर के संगठनात्मक कार्यों से होकर हुआ है। यह अनुभव उन्हें कार्यकर्ताओं की वास्तविक चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो साहू का नेतृत्व माडल अधिक सहभागी और संवाद आधारित प्रतीत होता है। कैडर आधारित ताकत पर फोकस आदित्य साहू बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भाजपा की असली ताकत उसका समर्पित कैडर है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भाजपा की सफलता का प्रमुख कारण मजबूत बूथ संरचना और प्रशिक्षित कार्यकर्ता माने जाते हैं। झारखंड में भाजपा संगठनात्मक रूप से मौजूद तो है, लेकिन कई क्षेत्रों में बूथ स्तर की सक्रियता कमजोर रही है। साहू की रणनीति अन्य राज्यों के सफल मॉडल से सीख लेते हुए झारखंड में कैडर को पुनः सक्रिय करने की है। साहू के नेतृत्व की सबसे अहम विशेषता युवा नेतृत्व को आगे लाने की मंशा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि झारखंड जैसे युवा आबादी वाले राज्य में संगठन का चेहरा अपेक्षाकृत उम्रदराज दिखता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भाजपा ने हाल के वर्षों में कई राज्यों में युवा प्रदेश अध्यक्षों और युवा मोर्चा से निकले नेताओं को आगे बढ़ाया है। आदित्य साहू भी इसी प्रयोग को झारखंड में लागू करना चाहते हैं, ताकि पार्टी नए कलेवर के साथ अधिकाधिक प्रभावी बन सके। सामाजिक समीकरणों की समझ झारखंड की राजनीति आदिवासी, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और शहरी–ग्रामीण विभाजन के जटिल सामाजिक ताने-बाने पर आधारित है। भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह आदिवासी और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं उठाती। साहू के सामने चुनौती है कि संगठन को सामाजिक रूप से अधिक समावेशी बनाया जाए। अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल अधिक प्रभावशाली है। यदि साहू इस पहलू को संगठनात्मक रणनीति में सही ढंग से शामिल कर पाते हैं तो भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ सकती है। तुलनात्मक विश्लेषण करें तो जिन राज्यों में भाजपा ने संगठन को सरकार से ऊपर रखा, वहां पार्टी का आधार मजबूत हुआ। झारखंड में फिलहाल भाजपा सत्ता में नहीं है, इसलिए संगठन की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साहू के सामने अवसर है कि वह विपक्ष में रहते हुए जन आंदोलनों, मुद्दा आधारित राजनीति और निरंतर जनसंपर्क के जरिए संगठन को सक्रिय रखें। चुनौतियां और संभावनाएं आदित्य साहू की राह आसान नहीं है। गुटबाजी, संसाधनों की कमी और सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूत पकड़ जैसी चुनौतियां उनके सामने हैं। लेकिन युवा टीम, स्पष्ट संगठनात्मक दृष्टि और कैडर आधारित कामकाज के जरिए वे इन चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। यदि वे अन्य राज्यों के सफल संगठनात्मक प्रयोगों को झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में सफल होते हैं तो भाजपा फिर से राज्य में एक मजबूत और भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है। आदित्य साहू के नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएं     निचले स्तर से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर, संगठन की जमीनी समझ     छात्र राजनीति और मंडल–जिला संगठन का व्यावहारिक अनुभव     कैडर आधारित राजनीति पर स्पष्ट फोकस     वरिष्ठता नहीं, सक्रियता और प्रदर्शन को प्राथमिकता पूर्व नेतृत्व बनाम नया नेतृत्व     पूर्व नेतृत्व में अनुभव आधारित, अपेक्षाकृत स्थिर संगठन     सीमित युवा भागीदारी     बूथ स्तर पर असमान सक्रियता आदित्य साहू का मॉडल     युवा और ऊर्जावान नेतृत्व     बूथ, मंडल और मीडिया प्रबंधन पर समान जोर     लगातार संवाद और फीडबैक आधारित संगठन संगठनात्मक रणनीति के प्रमुख बिंदु     बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की योजना     मंडल और जिला इकाइयों में युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी     प्रशिक्षण शिविरों और संगठनात्मक कार्यशालाओं पर जोर अन्य राज्यों से सीख     गुजरात, यूपी, एमपी में मजबूत कैडर माडल की सफलता     बंगाल में विपक्ष में रहते हुए संगठन विस्तार का उदाहरण     छत्तीसगढ़ में बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो प्लानिंग का प्रभाव झारखंड की विशेष चुनौतियां     आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भरोसे की कमी     क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का आरोप     सत्ता से बाहर होने के कारण सीमित संसाधन     संगठन के भीतर गुटीय संतुलन आदित्य साहू के सामने अवसर     युवा आबादी से सीधा जुड़ाव     संगठन को आंदोलनकारी स्वरूप देने की संभावना     सरकार बनाम संगठन की बहस में संगठन को केंद्र में लाने का मौका     भाजपा को मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर

चिराग के दही-चूड़ा भोज में चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश

पटना. मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का मंच बन गया। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर राजनीतिक संदेश दिए। कभी चिराग पासवान के ऑफिस पहुंचे, तो कभी बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के घर जाकर उपस्थिति दर्ज कराई। चिराग पासवान के भोज में पहुंचे CM, किया अभिवादन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी खास मानी जा रही है। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर मौजूद लोगों और मीडिया का अभिवादन किया। इस मुलाकात को NDA के भीतर बढ़ती सहजता और तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। चेतन आनंद के घर पहुंचे नीतीश, पांच मिनट की मुलाकात भी मायनेदार इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट रुके। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और PHED मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे। चेतन आनंद ने कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सीएम ने समय निकाला और आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि NDA के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था। मंत्रिमंडल विस्तार पर चेतन आनंद की सधी हुई प्रतिक्रिया विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह की अनर्गल इच्छा नहीं रखते और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे संतुलन साधने वाला बयान माना जा रहा है। आनंद मोहन की रिहाई से मजबूत हुई नजदीकी गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन की रिहाई में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने RJD को झटका देते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया था। तभी से आनंद मोहन परिवार और मुख्यमंत्री के रिश्ते और मजबूत माने जा रहे हैं। तेजप्रताप से रत्नेश सदा तक, 14 जनवरी का सियासी कैलेंडर 14 जनवरी को तेजप्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में लालू यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की मौजूदगी ने अलग सियासी संकेत दिए। लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। वहीं पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री, राज्यपाल और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। दही-चूड़ा के बहाने दिखी गठबंधन की तस्वीर कुल मिलाकर, इस मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज सिर्फ खान-पान का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए गठबंधन की मजबूती, रिश्तों की गर्माहट और भविष्य की राजनीति के संकेत भी साफ तौर पर नजर आए। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा एक बार फिर सियासी भाषा बोलता दिखा।