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उत्तर भारत में शीतलहर और कोहरे का कहर! IMD ने जारी किया राहत नहीं मिलने का अलर्ट

लखनऊ  राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों समेत उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. आज के मौसम की बात करें तो देश के उत्तरी और कुछ दक्षिणी हिस्सों में घना कोहरा (Dense Fog) और निचले इलाकों में बादल छाए हुए हैं. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में अगले 2 दिनों तक कोल्ड डे (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी.  दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इस समय उत्तर भारत के कई इलाको में घना कोहरा है. दिल्ली में भी विजिबिलिटी बेहद कम है. पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई ऐसे इलाके भी हैं जहां विजिबिलिटी जीरो है. IMD का पूर्वानुमान है कि उत्तर भारत में अभी ऐसी ही ठंड और कोहरे का प्रकोप बना रह सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में अभी 2 दिन तक कोल्ड डे (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी. 16 और 17 जनवरी को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और ओडिशा के अलग-अलग इलाकों में शीतलहर का दौर जारी रहेगा. वहीं, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 16 जनवरी को भी यह स्थिति देखी जा सकती है. ठंड के कारण नोएडा के स्कूलों की बढ़ीं छुट्टियां घने कोहरे और भीषण सर्दी के कारण नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में 8वीं तक के स्कलों की छुट्टी बढ़ा दी गई है. कक्षा 1 से लेकर 8वीं कक्षा तक सभी स्कूल अब  17 जनवरी तक बंद रहेगै. कश्मीर घाटी में कड़ाके की सर्दी, माइनस में पारा! कश्मीर घाटी में इन दिनों बहुत ठंड पड़ रही है. तापमान लगातार गिर रहा है और शीत लहर (कोल्ड वेव) का असर पूरी तरह दिख रहा है. आज (शुक्रवार) सुबह श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे दर्ज किया गया. कई इलाकों में तापमान माइनस में चला गया है. वहीं, सुबह के समय घना कोहरा छाया रहने से दृश्यता कम हो गई.

मंत्री रामविचार नेताम ने कहा – तातापानी महोत्सव हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

रायपुर : तातापानी महोत्सव हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: मंत्री रामविचार नेताम स्थानीय कलाकारों ने वनांचल की समृद्ध संस्कृति की छटा बिखेरी पद्मअनुज शर्मा की सुरीली आवाज पर झूमे दर्शक स्कूली छात्र-छात्राओं ने लोक नृत्यों के माध्यम से प्रस्तुत की परम्परा की झलक रायपुर बलरामपुर-रामानुजगंज जिला अपनी अनूठी संस्कृति और लोक परंपराओं के लिए अपनी विशेष पहचान रखता है। इसी गौरवशाली विरासत को संजोने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को उत्साह से भर दिया। इस मौके पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।  मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि तातापानी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। प्रशासन और स्थानीय जनभागीदारी से यह आयोजन प्रतिवर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार और पद्मसे सम्मानित अनुज शर्मा रहे। उन्होंने अपनी टीम के साथ छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की ऐसी जादुई प्रस्तुति दी कि पंडाल में मौजूद हजारों दर्शक मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन कर वनांचल की समृद्ध संस्कृति की छटा बिखेरी। कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों ने न केवल पारंपरिक लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया, बल्कि जिले में हो रहे विकास कार्यों को भी रचनात्मक ढंग से मंच पर उतारा। अतिथियों ने बच्चों के इस हुनर की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, कलेक्टर राजेन्द्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर रमनलाल, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक मौजूद रहे। 

बहुत लकी लोग होते हैं ये! जिन्हें मिल जाएं जीवन की ये चीजें, तरक्की तय है

अक्सर हम किसी इंसान से मिलते हैं और हमारे मन में यही आता है कि ये इंसान वाकई कितना भाग्यशाली है। दरअसल हम सभी की भाग्यशाली होने की परिभाषा बड़ी अलग-अलग होती है। किसी को एक अच्छी नौकरी होना भाग्यशाली होने की निशानी लगता है तो किसी को पुश्तैनी धन-दौलत होना या शानदार लव लाइफ होना। खैर, ये लोगों के अपने-अपने पैमाने हैं। हालांकि महान विद्वान और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीति में कुछ ऐसे व्यक्तियों का जिक्र किया था, जो उनकी नजरों में वाकई बेहद भाग्यशाली होते हैं। आचार्य कहते हैं कि जिन लोगों के पास ये कुछ चीजें मौजूद हैं उन्हें तो खुद को किस्मत वाला ही समझना चाहिए क्योंकि हर इंसान के नसीब में यह नहीं होता। तो चलिए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को भाग्यवान बनाने वाली ये चीजें कौन सी हैं। जिसके पास हो दान-पुण्य करने का सामर्थ्य आचार्य चाणक्य अपने एक श्लोक में इस बात का जिक्र करते हैं कि जिस व्यक्ति में दान-पुण्य करने का सामर्थ्य है, वो भी बहुत किस्मतवाला ही होता है। दरअसल कोई भी व्यक्ति दान-पुण्य करने में सामर्थ्य तब होता है, जब उसके पास पर्याप्त धन होता है और उसे खर्च करते हुए, व्यक्ति को ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। आचार्य कहते हैं कि पिछले कई जन्मों के पुण्य के कारण ही मनुष्य को ये सौभाग्य प्राप्त होता है। जिसका साथ दे उसकी सेहत आचार्य चाणक्य के अनुसार जिन लोगों की सेहत उनका साथ देती है, उनसे ज्यादा भाग्यशाली भी दूसरा कोई नहीं। इस दुनिया में सबसे बड़ी दौलत इंसान की सेहत ही होती है। यदि व्यक्ति स्वास्थ्य ना हो और कोई ना कोई रोग उसे घेरे रहे, तो लाखों की धन संपदा भी बेकार ही जान पड़ती है। आचार्य कहते हैं कि अगर आप भरपेट भोजन कर पा रहे हैं और उसे पचाने में आपको कोई परेशानी भी हो रही है; तो आपको खुद को किस्मतवाला ही समझना चाहिए। अच्छे जीवनसाथी का होना है सौभाग्य की निशानी आचार्य चाणक्य के अनुसार एक अच्छे जीवनसाथी का मिलना भी सौभाग्य की निशानी है, जो हर किसी की किस्मत में नहीं होता। एक अच्छा जीवनसाथी आपके हर सुख-दुख में साथ खड़ा मिलता है और उसके साथ जीवनयात्रा थोड़ी आसान हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में एक अच्छा पार्टनर है और उसका दांपत्य जीवन सुखी है, तो वो इंसान यकीनन ही बेहद भाग्यशाली हैं। मेहनत से बना सकते हैं अपना भाग्य इन सभी बातों के साथ ही आचार्य चाणक्य का कहना यह भी है कि अगर किसी इंसान को किस्मत का साथ ना भी मिले, तो वो अपनी मेहनत के बल पर खुद को भाग्यवान बना सकते है। अपनी नीति में आचार्य कहते हैं कि मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है और जो व्यक्ति मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, वो अपनी किस्मत खुद चमका देता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में कुछ बहुत बड़ा करते हैं, जो शायद सिर्फ भगवशाली लोगों के बस की भी बात नहीं।  

सेना दिवस परेड में दिखा राजस्थान का रंग, विशाल कठपुतली ने बिखेरी लोक कलाओं की छटा

जयपुर सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में महल रोड पर आयोजित सेना परेड में राजस्थान पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से प्रस्तुत कलात्मक एवं भव्य झांकी को देखकर वहां उपस्थित दर्शकगण मन्त्रमुग्ध हो गए। राजस्थान की इस भव्य झांकी में ने हमारी गौरवशाली परंपराओं एवं आधुनिक पर्यटन का प्रतिनिधित्व किया। जिसमें राज्य की सदियों पुरानी वास्तुकला, पारंपरिक हस्तशिल्प और विश्व प्रसिद्ध लोक कलाओं की अनूठी झलक दिखी। भारत माँ की जयकार तथा वहां उपस्थित प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्रभक्ति की हिलोरों के बीच राजस्थान की लोक कलाओं का खूब जयगान एवं यशगान हुआ। ऐसी रही राजस्थान की झांकी झांकी के आगे की साइड में राजस्थान की सबसे लोकप्रिय लोक कलाओं में से एक, कठपुतली कला को उत्कृष्ट रूप में दर्शया गया। जिसमें एक विशाल कठपुतली (पपेट) राजस्थान की लोक कला एवं संस्कृति की अगुवाई करते नज़र आई। राजस्थान की झांकी में कठपुतली कलाकार राजू भाट की अंगुलियों पर नाचती हुई कठपुतलियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। आर्मी डे परेड में राजस्थान की समस्त लोक कलाओं का नेतृत्व कर रही यह विशाल कठपुतली जैसे आगंतुकों का स्वागत करने की राजस्थान की विशिष्ट परम्परा का निर्वहन कर रही हो। झांकी के वाहन के मध्य भाग पार्ट पर राजस्थान के क्राफ्ट & स्किल्स को दिखाया गया। जिसमें राजस्थान के प्रसिद्ध मोलेला की टेराकोटा में उकेरी गई मूर्तियों का धार्मिक व सांस्कृतिक आकृतियों का कलाकारों द्वारा प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी के बर्तनों का प्रमुखता से प्रदर्शन किया गया है। झांकी में फड़चित्रण दिखाया गया। राज्य के कुटीर उद्योगों की जीवटता को दिखाते हुए झांकी में हस्तशित्य कलाकारों को पारंपरिक पेशभूषा में कार्य करते हुए दिखाया गया है। झांकी के ऊपरी भाग पर राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध फूलों की होली नृत्य की लोक कलाकारों द्वारा मनुहारी प्रस्तुति दी गई। इसके साथ ही बम रसिया नृत्य प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से नई दिल्ली में की सौजन्य मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में की सौजन्य भेंट गाडरवारा के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन के क्षमता विस्तार के भूमि-पूजन के लिये किया आमंत्रित प्रदेश की उपलब्धियों और नवाचारों की दी जानकारी भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौजन्य भेंट कर नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन के विस्तार की परियोजना के भूमि-पूजन के लिये अनुरोध किया। प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के आयोजन, प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड-साँची सहकारिता अनुबंध की प्रगति रिपोर्ट के साथ प्रदेश में एनटी नक्सल अभियान की प्रगति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में एनटीपीसी  लिमिटेड का सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन स्थित है। ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 1600 मेगावॉट (स्टेज II, 2×800 MW) क्षमता के विस्तार की अनुमति प्रदान की गई है। इसकी कुल लागत 20 हजार 446 करोड़ रूपये है। परियोजना को वर्ष 2029-30 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। यह परियोजना अत्याधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसमें एयर कूल्ड कंडेंसर टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया है, जो पारंपरिक वॉटर कूल्ड कंडेंसर (कूलिंग टॉवरों के साथ) की तुलना में पानी की खपत को 1/3 कम करता है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष-2026 में "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" के लक्ष्य को साकार करने के लिए 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को मध्यप्रदेश में 'उद्योग एवं रोजगार वर्ष' के रूप में मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 के आयोजन के लिये जनवरी, 2026 से नवम्बर 2026 तक विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का विस्तृत कैलेंडर तैयार किया गया है। सभी गतिविधियां 3 साल का लक्ष्य निर्धारित कर संचालित की जाएंगी। इसमें 16 से अधिक विभागों की सहभागिता रहेगी। कृषक कल्याण वर्ष-2026 में सरकार के 10 संकल्प प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना, शीघ्रनाशी फसलों वाले स्थानों पर फूड पार्क और फूड प्रोसेसिंग यूनिट बनाये जाना, कृषि उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये सब्सिडी उपलब्ध कराना, कृषि उद्योगों में किसानों की भागीदारी को बढ़ाना के लिये कार्य करेगी। प्रदेश सरकार अगले 3 साल में 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप की स्थापना के लक्ष्य प्राप्ति के लिये कार्य करेगी। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अवगत कराया कि 25 दिसम्बर, 2025 को ग्वालियर में भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के विशेष अवसर पर "अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट" का आयोजन किया गया। समिट का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। इस अवसर पर 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत से औद्योगिक/निर्माण इकाइयों का सामूहिक भूमि-पूजन एवं 5,810 करोड़ रुपए लागत से औद्योगिक विकास परियोजनाओं एवं सड़क विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 860 वृहद औद्योगिक इकाइयों को 725 करोड़ रुपए की निवेश प्रोत्साहन सहायता राशि भी सिंगल क्लिक से वितरित की गई। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड एवं सांची के मध्य सहकार्यता अनुबंध के पश्चात दुग्ध संघो द्वारा दूध खरीद मूल्यों में  2.50रुपये से 8.50 रुपये. प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है। प्रदेश में 1394 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन तथा 661 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी सम्मिलित है। उन्होंने बताया कि 22 दिसम्बर, 2025 को दुग्ध संघों द्वारा 12 लाख कि.ग्रा. प्रतिदिन दुग्ध संकलन का स्तर प्राप्त किया गया, जो कि गत वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। हमारा लक्ष्य 50 लाख कि.ग्रा. प्रतिदिन दुग्ध संकलन का स्तर प्राप्त करना तथा प्रदेश के 26 हजार ग्रामों को दुग्ध सहकारी समितियों के कार्य क्षेत्र में लाना है, जिसके लिए हम दृढ़ संकल्पित होकर कार्यरत हैं। नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आपके द्वारा मार्च 2026 तक नक्सल समस्या के खात्मे के निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण करते हुए प्रदेश ने 'नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश' का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। अब न सिर्फ मध्यप्रदेश में बल्कि मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन में भी कोई भी सशस्त्र और सक्रिय नक्सली नहीं बचा है। वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में 10 सशस्त्र नक्सलियों को धराशायी किया है, जिन पर 1.46 करोड़ रुपए का ईनाम थाऔर 13 नक्सलियों ने हथियारों सहित आत्म-समर्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आत्म-समर्पित नक्सलियों से सघन पूछताछ कर समर्थक व्यक्तियों, संगठनों व वित्त पोषण के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। उनके द्वारा जंगल में छुपाई गई नगद राशि, हथियारों आदि को बरामद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे पुनः नक्सली विचारधारा की तरफ न लौट पायें। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में त्वरित विकास के लिए चिन्हित 100 अत्यंत नक्सल प्रभावित गाँवों का माइक्रो डेवलपमेंट प्लान तैयार किया गया है। इसमें गाँवों के सर्वांगीण विकास, आजीविका वृद्धि, मूलभूत सुविधाओं में सुधार आदि को शामिल किया गया है। नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 'बस्तर ओलम्पिक' की तरह बालाघाट में वृहद स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है।  

CM यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा से की मुलाकात, मध्यप्रदेश आने का किया निमंत्रण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा से मिले मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश आने का दिया आमंत्रण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से नई दिल्ली में भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नड्डा को मध्यप्रदेश आने का आमंत्रण दिया है। इसके साथ ही उनसे अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा 23 जनवरी को मध्यप्रदेश आएंगे और 24 जनवरी को कटनी में मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के पास रसायन और उर्वरक मंत्रालय भी है। उन्होंने मध्यप्रदेश के किसानों की समृद्धि के लिए प्रदेश में यूरिया सहित सभी प्रकार की खादों की उपलब्धता बनाए रखने में सहयोग दिया है। इसके लिए उनको धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष उन्होंने निरंतर सहयोग किया जिसके फलस्वरुप किसानों को खाद पहुंचाने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से लगातार नए-नए मेडिकल कॉलेज खोलते हुए तेजी से आगे बढ़ रही है। इस कार्य में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने में मध्यप्रदेश देश में नम्बर वन राज्य है। शासकीय अस्पतालों को जोड़कर प्राईवेट कॉलेज को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा हे। ऐसे में हमारे दो मेडिकल कॉलेज के भूमिपूजन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा से भेंट कर उन्हें आमंत्रित किया गया। इन मेडिकल कॉलेज के भूमिपूजन से राज्य में 41 जिलों में मेडिकल कॉलेजों की सुविधा मिलेगी।  

मौनी अमावस्या की सही तिथि क्या है? जानें स्नान-दान का शुभ समय और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है। वैदिक पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन पितरों को समर्पित माना जाता है। यह दिन पितरों की पूजा और तर्पण के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और स्नान-दान का विशेष महत्व है। इससे पुण्य लाभ मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या का स्नान सबसे बड़ा शाही स्नान माना जाता है। माना जाता है कि माघ मास पर हरिद्वार और प्रयागराज में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन लोग मौन व्रत रहकर भगवान की भक्ति में लीन हो जाते हैं। आइए, जानते हैं कि इस साल मौनी अमावस्या की तिथि, दान-स्नान का महत्व और शुभ मुहूर्त क्या है? मौनी अमावस्या 2026 कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 17 जनवरी की रात 12 बजकर 4 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन 18 जनवरी की रात 1 बजकर 22 मिनट पर इसका समापन होगा। ऐसे में, उदयातिथि के अनुसार, मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार के दिन मनाई जाएगी। मौनी अमावस्या पर दान-स्नान का शुभ मुहूर्त मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक का समय सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसे में, सुबह 04 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। अगर गंगा स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्य फलदायी होता है। मौनी अमावस्या पर स्नान का महत्व अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। मान्यता है कि माघ मास की अमावस्या पर पवित्र नदियों का जल अमृत के समान फल देता है। इसलिए मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोग गंगा में डुबकी लगाते हैं और संगम किनारे ही दान करते हैं। इस दिन स्नान करने और दान देने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। साथ ही, मोक्ष की प्राप्ति होती है। मौन व्रत रखने के नियम अगर आप इस व्रत को रखना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी उठकर साफ पानी से स्नान कर लें और उसके बाद भगवान की पूजा करें और दिनभर मौन रहने का संकल्प भी लें। इसके साथ ही आप जिस भी भगवान इष्ट देव को मानते हैं, उनका मंत्र का जाप करें। लेकिन यह मंत्र मन ही मन में करें और मंत्र जाप करने के लिए बिल्कुल शांत जगह का ही चयन करें। मौनी अमावस्या पर दान मौनी अमावस्या वाले दिन स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल मिलता है। साथ ही, जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस अन्न, धन और वस्त्र के साथ-साथ जरूरत की चीजों का भी दान करना चाहिए। इसके अलावा, आप पशु व पक्षियों को चारा भी दे सकते हैं। इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

बेंगलुरु के ‘बार कैपिटल’ में छाया नया ट्रेंड, दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पीछे छोड़ा

बेंगलुरु  शाम ढलते ही जब शहर की बत्तियां जगमगाती हैं, तो अक्सर मन में दिल्ली की चकाचौंध या मुंबई की नाइटलाइफ़ का ख्याल आता है. लेकिन अगर आप अब भी यही सोच रहे हैं कि देश का सबसे बेहतरीन कॉकटेल या बार इन्हीं दो बड़े शहरों में मिलेगा, तो अब अपनी ट्रैवल लिस्ट अपडेट करने का समय आ गया है. भारत की बार संस्कृति ने एक ऐसी करवट ली है जिसने बरसों पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ दिया है. गोवा में सजे एक शानदार अवॉर्ड समारोह ने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली के रुतबे और मुंबई की रफ्तार को पछाड़कर बेंगलुरु ने बाजी मार ली है. तो चलिए जानते हैं, देश के उस नए 'बार कैपिटल' के बारे में जहां के दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पछाड़ते हुए शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा कर लिया है. बेंगलुरु का जलवा और दिल्ली-मुंबई की विदाई  '30 बेस्ट बार्स इंडिया' के ताजा नतीजों ने इस बार सबको हैरान कर दिया. यह इन पुरस्कारों के छह साल के इतिहास में पहली बार हुआ है जब टॉप-4 की लिस्ट से दिल्ली और मुंबई पूरी तरह गायब हैं. इस बार की पूरी महफिल बेंगलुरु के नाम रही, जहां के 'स्पिरिट फॉरवर्ड' (Spirit Forward) ने नंबर-1 और 'सोका' (Soka) ने नंबर-2 स्थान हासिल कर पूरे देश में अपनी धाक जमा दी. बेंगलुरु अब सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर का शहर नहीं रहा, बल्कि यह भारत का नया अड्डा बनकर उभरा है. टॉप-30 की लिस्ट में इस शहर के 6 बार शामिल हैं, जिनमें से 4 तो सीधे टॉप-10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं. गोवा का स्टाइल और नए शहरों की एंट्री घूमने-फिरने वालों के लिए गोवा हमेशा से पहली पसंद रहा है और इस बार गोवा ने भी अपनी ताकत दिखाई है. 'आउट्रिगर' और 'बॉइलरमेकर' जैसे बार्स ने तीसरा और चौथा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि गोवा सिर्फ समंदर किनारे मस्ती के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन ड्रिंक्स के लिए भी जाना जाता है. इस रेस में दिल्ली का 'लेयर' पांचवें स्थान पर रहकर किसी तरह टॉप-5 में अपनी जगह बचाने में कामयाब रहा. सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि अब इस रेस में कोलकाता जैसे शहर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. दो साल पहले तक जहां बार कल्चर की इतनी चर्चा नहीं थी, आज वो शहर बड़े-बड़े केंद्रों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. आजकल के मुसाफिर सिर्फ एक गिलास जाम नहीं चाहते, उन्हें चाहिए एक अच्छा माहौल और नया अनुभव. यही वजह है कि अब बार्स में पुराने घिसे-पिटे मेनू की जगह देश की अपनी चीजों और स्थानीय मसालों का इस्तेमाल बढ़ गया है. छिपे हुए छोटे कॉकटेल बार से लेकर छतों पर बने शानदार रूफटॉप बार तक, हर जगह अब मेहमानों को कुछ नया देने की कोशिश की जा रही है. इस साल 1,200 से ज्यादा नामांकन यह बताते हैं कि भारतीय बार मालिक अब दुनिया भर के बार्स के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. इस तरक्की की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है. पिछले साल एशिया के 50 सबसे अच्छे बारों में पांच भारतीय नाम शामिल थे. दिल्ली के 'लेयर' ने तो दुनिया के 100 बेहतरीन बारों में अपनी जगह बनाकर भारत का मान बढ़ाया है. तो अगली बार जब आप घूमने का प्लान बनाएं, तो इन शहरों की उन गलियों का भी रुख करें जहां कुछ नया और खास पक रहा है.  

यूपी सरकार का बड़ा कदम, यूरिया के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री पर प्रतिबंध, कंपनियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

लखनऊ   उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देते हुए यूरिया के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री (टैगिंग) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब प्रदेश में केवल अनुदानित उर्वरकों की ही आपूर्ति और बिक्री की अनुमति होगी। यह आदेश 1 जनवरी से लागू हो गया है। दरअसल, यूरिया आपूर्ति करने वाली कुछ कंपनियों द्वारा अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स के माध्यम से किसानों को यूरिया के साथ महंगे और गैर-जरूरी उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। टैगिंग की बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आईं खासतौर पर रबी सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी और टैगिंग की बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आईं।इस समस्या को लेकर शासन स्तर पर अब तक सात बार उर्वरक कंपनियों, होलसेलरों और रिटेलरों के साथ बैठकें कर टैगिंग न करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद शिकायतें बंद नहीं हुईं। इसके बाद सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है। बिक्री पर 1 जनवरी से पूर्ण प्रतिबंध है कृषि विभाग के अनुसार, प्रदेश में यूरिया आपूर्ति करने वाली सभी संस्थाओं को अब केवल अनुदानित उर्वरकों की आपूर्ति और बिक्री की ही अनुमति होगी। कंपनियों के उर्वरक विक्रय लाइसेंस में दर्ज सभी गैर-अनुदानित उत्पादों की आपूर्ति और बिक्री पर 1 जनवरी से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी कंपनी यूरिया की आड़ में अपने अन्य व्यावसायिक उत्पाद प्रदेश की सीमा में नहीं बेच सकेगी। आदेश का उल्लंघन करने या यूरिया के साथ किसी भी प्रकार की टैगिंग करने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस फैसले से किसानों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है।  

छतरपुर में दो युवतियों ने की शादी, सोनी और मोनी के 5 सालों का प्यार अब बना कानूनी संबंध

 छतरपुर छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दो बालिग युवतियों के आपस में विवाह करने का एक मामला सामने आया है जिसके कारण थाने में काफी हंगामा हुआ। सोनी और मोनी (परिवर्तित नाम) पिछले 5 साल से प्रेम संबंध में थीं। उन्होंने 12 तारीख को एक-दूसरे से शादी कर ली। जब जानकारी परिजनों को मिली तो उन्होंने विरोध किया। एक परिवार ने अपनी लड़की मोनी को जबरन साथ ले जाने की कोशिश की जिससे थाने में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए अधिकारियों से सलाह ले रही है। 5 साल से प्रेम संबंध प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनी रैकवार और मोनी कुशवाहा के बीच पिछले करीब 5 साल से प्रेम संबंध था। ये दोनों लंबे समय से एक-दूसरे के साथ रहने और शादी करने का मन बना रही थीं। सोनी ने पुलिस को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे दोनों बालिग हैं और पूरी समझ-बूझ के साथ अपना जीवन एक-दूसरे के साथ बिताना चाहती हैं। परिजनों का विरोध सोनी के अनुसार, 12 तारीख को दोनों युवतियां एक धाम पहुंचीं जहां उन्होंने अपनी आपसी सहमति से विवाह कर लिया। शादी करने के बाद वे दोनों साथ रहने लगीं लेकिन जैसे ही इस विवाह की जानकारी मोनी के परिवार वालों को मिली तो उन्होंने रिश्ते का कड़ा विरोध किया। मोनी को घर ले जाने पर अड़े थे परिजन सोनी का आरोप है कि मोनी के परिवार वाले उसे जबरन घर ले जाने के इरादे से सिविल लाइन थाने पहुंचे थे। इसी बात को लेकर थाने के अंदर ही दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इसने देखते ही देखते हंगामे का रूप ले लिया। युवतियां साथ रहने पर अड़ीं सूत्रों के अनुसार, परिजन रिश्ते को सामाजिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं जबकि दोनों युवतियां अपनी मर्जी से साथ रहने की बात पर अड़ी हुई हैं। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए दोनों युवतियों को थाने में बैठाया और उनके परिवार वालों को समझाने की कोशिश की। मोनी को ले गए परिजन, मार्गदर्शन ले रही पुलिस पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। पुलिस का कहना है कि दोनों युवतियां बालिग हैं और अपनी मर्जी से एक-दूसरे के साथ रहने की बात कह रही हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष ने कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पुलिस ने लड़की मोनी को उसके परिजनों के साथ भेजा है। वहीं समलैंगिक विवाह से जुड़े कानूनी पहलुओं पर पूरी स्पष्टता नहीं होने के कारण पुलिस उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन ले रही है ताकि कानून सम्मत निर्णय लिया जा सके।