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भिलाई में सतनामी समाज के जैतखाम परिसर में लोहे के रॉड से मचाया उत्पात

दुर्ग. भिलाई में जैतखाम को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भिलाई-3 स्थित गुरु घासीदास नगर, वार्ड क्र. 7 के सार्वजनिक जय स्तंभ जैतखाम परिसर में नगर के ही रहने वाले एक शख्स ने घुसकर उत्पात मचाया। सतनामी समाज के अध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद कोसले ने कहा कि 10 जनवरी की सुबह करीब 7:30 बजे अजय जंगम अपनी मां के साथ पहुंचा था। रोजाना की तरह सामूहिक आरती हो रही थी, इसी दौरान उसने गेट पर लात मारी और लोहे का रॉड लेकर समाज के लोगों को धमकाने लगा। बताया जा रहा है कि गाली-गलौज करते हुए युवक जैतखाम को नुकसान पहुंचाने के नियत से आगे बढ़ रहा था, जिसे लोगों ने रोका। मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र का है। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। चंद्रिका प्रसाद कोसले के मुताबिक, जय स्तंभ जैतखाम की स्थापना लगभग 30 साल पहले नगरवासियों ने मिलकर की थी। हर साल 18 दिसंबर से 31 दिसंबर तक गुरु घासीदास जयंती का आयोजन भी इसी परिसर में होता है। रोजाना सामाजिक आरती में एक छोटा बॉक्स चलाया जाता है, जिसके लिए एसडीएम से विधिवत अनुमति ली गई है। आरती में किसी बड़े लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि छोटे साउंड बॉक्स से सीमित दूरी तक ही आवाज जाती है।

गौतम गंभीर ने उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती में भाग लिया, भारतीय क्रिकेट कोच ने किया दर्शन

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है। शुक्रवार को भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर बाबा के दरबार में पहुंचे। वे यहां सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में शामिल हुए। इस दौरान वे करीब 2 घंटे तक मंदिर प्रांगण में रहे और नंदी हाल में बैठकर बाबा महाकाल की भस्म आरती देखी। वे पूरी तरह शिव भक्ति में लीन दिखाई दिए। भस्म आरती के दौरान गौतम गंभीर ने नन्दी हाल में बैठकर ओम नमः शिवाय का जाप भी किया। वहीं, दूसरी ओर श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने बाबा महाकाल का प्रसाद व तस्वीर भेंटकर गौतम गंभीर का सम्मान किया। उन्होंने गर्भगृह की चौखट से बाबा महाकाल के दर्शन कर जल अर्पित किया। 18 जनवरी को होने वाले मुकाबले के लिए टीम इंडिया इंदौर में मौजूद है। मैच से पहले दोनों कोच सुबह करीब चार बजे महाकाल मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में बैठकर लगभग दो घंटे तक भस्म आरती में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भगवान महाकाल से टीम इंडिया की सफलता और जीत की कामना की। आरती के पश्चात गौतम गंभीर और शीतांशु कोटक ने गर्भगृह की देहरी से दर्शन किए और नंदी महाराज पर जल अर्पित किया। मंदिर समिति की ओर से सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने दोनों का सम्मान भी किया। बगलामुखी धाम में भी की विशेष पूजा गौतम गंभीर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी देवी के दर्शन किए। यहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर देश की सुख-शांति, समृद्धि और सफलता की कामना की। इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। केएल राहुल ने भी लिया बाबा का आशीर्वाद शुक्रवार को ही भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल भी उज्जैन पहुंचे थे। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल का जाप किया, नंदी महाराज के कान में मनोकामना कही और जल अर्पित किया। पूजन के दौरान केएल राहुल केसरिया दुपट्टा धारण किए हुए नजर आए। राहुल ने गर्भगृह की देहरी से विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक सिम्मी यादव ने उनका स्वागत और सम्मान किया। इंदौर वनडे से पहले टीम इंडिया के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की यह आध्यात्मिक यात्रा क्रिकेट प्रेमियों के बीच खास चर्चा का विषय बनी हुई है।

No-Cost EMI और एक्सचेंज ऑफर: क्या है असली कीमत, जानिए सब सच

नई दिल्ली इन दिनों शॉपिंग मॉल से लेकर Amazon Flipkart Jio Mart Myntra जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म तक हर जगह फेस्टिव सीजन की धूम मची हुई है। शॉपिंग प्लेटफॉर्म ग्राहकों को लुभाने के लिए बेहतरीन ऑफर दे रहे हैं। ग्राहकों को सबसे अधिक नो-कॉस्ट ईएमआई लुभा रहा होता है। इसमें ग्राहक महंगे प्रोडक्ट जैसे मोबाइल फोन, फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आसानी से किस्तों में खरीद सकते हैं। देखने में यह डील बहुत फायदेमंद लगती है क्योंकि इसमें ऐसा माना जाता है कि EMI पर कोई ब्याज नहीं लगता है। लेकिन सच क्या है, इसे समझना बेहद जरूरी है। फेस्टिव सेल हो या नया फोन लॉन्च, एक लाइन हर जगह कॉमन है. No-Cost EMI, सिर्फ 1,999 रुपये प्रति माह. या कहीं 0 रुपये डाउन पेमेंट. लेकिन क्या ये आपके लिए फायदेमंद है? ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लेकर मॉल तक यही ऑफर आज स्मार्टफोन खरीदने का सबसे बड़ा ट्रिगर बन चुका है. इंडस्ट्री इंसाइडर या स्टैट्स कहते हैं कि आज भारत में लगभग हर दूसरा प्रीमियम फोन EMI पर खरीदने का ट्रेंड बन गया है. आसान मासिक किश्तों ने फोन खरीदना आसान जरूर किया है, लेकिन इसके साथ एक नया पैटर्न भी आ गया है. ये है Upgrade Trap जिसे आप डार्क पैटर्न का ही एक हिस्सा मान सकते हैं. पहले यूजर्स स्मार्टफोन खरीद कर उसे 3-4 साल तक इस्तेमाल करते थे. अब वही फोन 6-12 महीनों में बदल दिया जाता है. इसके पीछे सिर्फ टेक्नॉलॉजी की तेज़ रफ्तार का हाथ नहीं है, बल्कि आसान EMI विकल्पों का बड़ा रोल है. फोन सिर्फ डिवाइस नहीं, सब्सक्रिप्शन जैसा बन रहा है अब मार्केट में फोन सिर्फ डिवाइस के तौर पर नहीं बेचा जा रहा है, बल्कि उसे लगातार बदलने वाले प्रोडक्ट की तरह पेश किया जा रहा है. ग्राहक पूरा पैसा नहीं देता, सिर्फ मासिक किश्त. एक साल बाद नया मॉडल आता है. पुराना फोन एक्सचेंज होता है. नई EMI शुरू. कई लोग तो 10 साल से स्मार्टफोन की EMI भर रहे हैं, क्योंकि हर दो साल में फोन EMI पर ले लिया और EMI पे कर रहे हैं. लेकिन 10 साल तक फोन की EMI भरना समझदारी है?  इसका सीधा असर यह है कि ग्राहक लगातार किश्तों में फंसा रहता है और कंपनियों को हर साल नया खरीदार मिल जाता है. No-Cost EMI : नाम सुनने में अच्छा, असलियत में महंगा EMI मॉडल के साथ No-Cost EMI भी बड़ी चालाकी से जुड़ा हुआ है. नाम से लगता है कि ब्याज कोई नहीं है. लेकिन अगर आप वही फोन अपफ्रंट खरीदते, तो आमतौर पर सीधा डिस्काउंट मिल सकता है. EMI चुनते ही वह छूट चली जाती है. इंडस्ट्री के रिटेल चैनल से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार एक ही फोन अपफ्रंट खरीदने पर 5% से 7% तक सस्ता पड़ता है, लेकिन EMI विकल्प चुनते ही वही फोन पहले जैसा ही महंगा दिखता है. ऊपर से प्रोसेसिंग फी, GST और लेट पेमेंट कंडीशन्स भी जुड़ जाते हैं, जो पहली नज़र में साफ नहीं दिखते. Exchange ऑफर भी EMI के साथ जुड़ा हुआ है Upgrade Trap का दूसरा हिस्सा है Exchange Offer. पुराना फोन दो, 15,000 रुपये का फायदा लो.. जैसा ऑफर ग्राहक को एक्स्ट्रा फायदा देने जैसा लगता है. लेकिन इंडस्ट्री में काम करने वाले कहते हैं कि पुराने फोन की बाजार कीमत अक्सर उतनी नहीं होती जितना दावा किया जाता है. बाकी राशि बोनस के नाम पर EMI प्लान से जुड़ जाती है. यही वजह है कि एक्स भी EMI मॉडल को अट्रैक्टिव बनाने का हिस्सा बन गया है. डेटा कह रहा है… हम तेजी से बदल रहे हैं संख्या भी यही कहानी बयां करती है. मार्केट एनालिसिस बताते हैं कि भारत में 2024 तक लगभग 48% स्मार्टफोन खरीदें EMI या क्रेडिट विकल्पों पर हुई हैं. यह आंकड़ा 2019 के मुकाबले करीब 22% अधिक है. यानी तेजी से लोग अपफ्रंट खरीद की बजाय किश्त पर सवारी कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि यूजर आज पुराने 30 महीनों की बजाय 6 से 12 महीनों के बीच फोन बदलते हैं. पहले फोन को लंबे समय तक रखना आम था, अब जल्दी-जल्दी अपग्रेड होना एक नया रिवाज बन चुका है. इसकी वजह सिर्फ लेटेस्ट फोन में दिए गए फीचर्स नहीं हैं, क्योंकि कई साल तक एक ही जैसे दिखने वाले फोन और एक जैसे ही फीचर्स आते रहते हैं. लेकिन यूजर्स को जब दिखता है कि पुराना फोन एक्स्चेंज करके EMI पर लेटेस्ट मॉडल को खरीदा जा सकता है, भले ही उसके लिए 2 साल तक EMI ही क्यों ना देना पड़े. इस चक्कर में यूजर कई बेसिक काम जो इंपॉर्टेंट होते हैं उसे स्किप करके फोन EMI पर खरीद लेता है.  असली कीमत… आपकी जेब पर फर्क आंकड़े यह भी बताते हैं कि अधिकांश No-Cost EMI योजनाओं में अपफ्रंट कीमत के मुकाबले ग्राहक 3% से 8% तक ज्यादा भुगतान कर रहे हैं, भले ही फॉर्मल इंट्रेस्ट चार्ज न किया गया हो. यह फर्क छोटा-सा लगता है, लेकिन जब इसे हजारों और लाखों लेन-देन में देखा जाता है, तो कस्टमर्स की जेब पर बड़ा असर होता है, खासकर मिड-रेंज सेगमेंट में, जहां यूजर हर रुपये की तुलना करते हैं. अगर किश्त चूक गई तो क्या? फाइनेंस सेक्टर के जानकार कहते हैं कि EMI अपने आप में गलत नहीं है. लेकिन जब कस्टमर टोटल कॉस्ट को समझे बिना सिर्फ मासिक किश्त देखकर फैसला करता है, तब समस्या शुरू होती है. अगर एक या दो किश्त चूक जाती हैं, तो लेट फी जुड़ जाती हैं और क्रेडिट स्कोर पर भी असर पड़ता है. इसका सीधा असर अगले लोन, क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग ऑफर्स पर पड़ सकता है. हर महीने हिडन कॉस्ट लगते हैं और अगर EMI लेट हुई तो हर दिन के हिसाब से एक्स्ट्रा पैसे देने होते हैं.  हम क्यों इतना आसान क्रेडिट चुन रहे हैं भारत में मिडिल क्लास एस्पिरेशन, ऑनलाइन सेल कल्चर और आसान क्रेडिट ने मिलकर एक नया उपभोक्ता पैटर्न बना दिया है. स्मार्टफोन आज सिर्फ एक तकनीकी डिवाइस नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बन चुका है जिसे बार-बार अपडेट किया जाता है. लोग EMI को आसान विकल्प मानते हैं क्योंकि उन्हें मंथली बर्डेन कम लगता है. लेकिन कई बार वही आसान राह, … Read more

भोपाल में 111 अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई, निगम ने पुलिस को सौंपा एफआईआर करने का आदेश

भोपाल  भोपाल जिले में 111 से अधिक अवैध कालोनियों को चिह्नित किया गया है, जिनकी सूची तैयार हो गई है। जिला प्रशासन ने यह सूची पुलिस को सौंप दी है, जिससे अब संबंधित थाना पुलिस इन अवैध कालोनियों को विकसित करने वाले भूमाफिया और जमीन मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही है। इसके बाद प्रशासन, नगर निगम के साथ मिलकर अवैध कब्जे तोड़ने की कार्रवाई करेगा। सूची के आधार पर अब तक परवलिया सड़क, सूखीसेवनिया सहित अन्य थाना क्षेत्र में प्रकरण दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि भूमाफिया ने किसानों के साथ मिलकर कृषि भूमि पर ही अवैध कॉलोनी काट प्लाटिंग कर दी है, जिनमें सुविधाओं के नाम पर लोगों को ठगा गया है। 90 प्रतिशत से ज्यादा कृषि भूमि पर कॉलोनियां बनीं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शहर के हुजूर, कोलार, बैरसिया और गोविंदपुरा तहसील व वृत्त क्षेत्र में भूमाफिया द्वारा पिछले एक साल में 111 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित की हैं। यहां 90 प्रतिशत से अधिक कृषि भूमि पर यह कॉलोनियां बनी हैं, जिनके पास किसी तरह की कोई अनुमति नहीं है। इसके बाद भी जमीन मालिक और भूमाफिया ने मिलकर लोगों को बिजली, पानी, सड़क, सीवेज, खेल मैदान, मंदिर आदि सुविधाओं का दावा कर प्लाट बेचे हैं। इसके बदले में उन्हें सिर्फ रजिस्ट्री दी गई हैं, जबकि अन्य सुविधाओं के लिए लोग तहसील, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद कलेक्टर ने सभी एसडीएम को अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर नोटिस जारी करने के आदेश दिए थे। जिस पर कार्रवाई करते हुए इन्हें सुनवाई का मौका दिया था लेकिन कॉलोनाइजर कोई ठोस दस्तावेज नहीं पेश नहीं कर पाए। यहां अवैध कॉलोनियां, अब तक 10 एफआईआर दर्ज शहर के सेवनियां ओंकारा, कोटरा, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, कालापानी, सुरैया नगर, छावनी पठार, कानासैया, खंडाबड़, सिंकदराबाद, शोभापुर जहेज, सिकंदराबाद, कोलुआ खुर्द, अरेड़ी, नरेला बाजयाफ्त, बंगरसिया, इब्राहिमपुरा, जगदीशपुर, हज्जामपुरा, अचारपुरा, बसई, अरवलिया, परेवाखेड़ा, ईंटखेड़ी सड़क, मुबारकपुर, बीनापुर, गोलखेड़ी, चौपड़ा कलां और बांसिया में करीब 111 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की गई हैं। इस सूची को पुलिस को दिया गया है, जिसमें भूमाफिया और जमीन मालिकों के नाम दर्ज हैं। इसी के आधार पर थानों में एफआईआर की जा रही हैं, अब तक सूखी सेवनियां, परवलिया सड़क सहित अन्य में करीब 10 एफआइआर दर्ज की चुकी हैं। मां की जमीन पर बेटों ने काटी अवैध कॉलोनी ईंटखेड़ी थाना पुलिस ने अवैध कॉलोनी काटने के मामले में दो एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार पटवारी शुभम श्रीवास्तव ने आवेदन देते हुए बताया कि हुजूर तहसील के ग्राम जगदीशपुर में भूमि स्वामी सीमा हफीज की जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी गई है। इसमें उनके बेटे शाहिद हफीज खां, आमिर हफीज ने बिना अनुमति के प्लाट बेचे हैं। दूसरे आवेदन में बताया कि ग्राम जगदीशपुर में तसनीम आसिफ ने अवैध कॉलोनी विकसित कर प्लाट बेचे हैं। अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई होगी     भोपाल जिले में अवैध कालोनियों के खिलाफ एक्शन शुरू हो गया है। पुलिस को 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों की सूची दे दी गई है। जिसके आधार पर इनमें प्लाट बेचने वाले लोगों व जमीन मालिकों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज कर रही है, फिर अवैध निर्माण व कब्जे तोड़ने की कार्रवाई होगी। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

रेसिंग की नई पहचान: रेड बुल ने F1 सीजन 2026 की नई लिवरी से उठाया पर्दा

नई दिल्ली रेड बुल रेसिंग ने फॉर्मूला 1 2026 सीजन के लिए अपनी नई कार की लिवरी का खुलासा किया है। यह कार्यक्रम मिशिगन सेंट्रल स्टेशन में आयोजित किया गया। मिल्टन कीन्स स्थित इस टीम ने डेट्रॉइट शहर में शानदार अंदाज में अपनी नई डिजाइन पेश की। डेट्रॉइट फ़ोर्ड का गृहनगर है और रेड बुल इसी कंपनी के साथ मिलकर अपना पहला फॉर्मूला वन पावर यूनिट तैयार कर रही है। रेड बुल के पायलट मार्टिन सोनका ने एक अनोखा कारनामा किया। उन्होंने हवाई जहाज से कार के ऊपर डली चादर को उड़ाकर हटाया और नई लिवरी को लोगों के सामने पेश किया। जब एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली इस कंपनी ने साल 2005 में फॉर्मूला वन में कदम रखा था, तब कार पर चमकदार फिनिश का इस्तेमाल किया गया था। नई लिवरी उसी पुराने अंदाज की याद दिलाती है। टीम का कहना है कि आरबी22 की 2026 डिजाइन में इस्तेमाल किया गया “हेरिटेज व्हाइट बेस” कार को ज़्यादा गहराई और साफ़ लुक देता है, जिससे ‘सन एंड बुल’ का मशहूर लोगो और भी उभरकर दिखता है। इस सीजन में इसैक हाज़ार चार बार के विश्व चैंपियन मैक्स वेरस्टैपेन के साथ टीम में शामिल होंगे। इसैक सिस्टर टीम रेसिंग बुल्स को छोड़ चुके हैं। रेड बुल ने आखिरी बार 2023 में टीम्स चैंपियनशिप जीती थी और अब टीम एक बार फिर विश्व खिताब जीतने की उम्मीद कर रही है। वेरस्टैपेन 2026 सीज़न के लिए नंबर 3 (उनका पसंदीदा नंबर) के साथ रेसिंग करेंगे। इससे पहले वह संख्या 33 के साथ उतरते थे, जो अब उनके पूर्व साथी डैनियल रिकियार्डो इस्तेमाल करते थे। पिछले सीजन में रेड बुल टीम्स चैंपियनशिप में तीसरे स्थान पर रही थी। वहीं वेरस्टैपेन ने शानदार वापसी करते हुए 2024 के अबू धाबी में होने वाली आखिरी से पहले की रेस तक ड्राइवर्स खिताब की दौड़ बनाए रखी। उनके टीममेट हडजार, रेसिंग बुल्स के साथ सिर्फ एक सीज़न के बाद रेड बुल में शामिल होने के बाद नंबर छह के साथ रेसिंग जारी रखेंगे। तकनीकी टीम की ज़िम्मेदारी पियरे वाशे संभालेंगे, जबकि पिछले सीज़न के बीच में क्रिश्चियन हॉर्नर की जगह टीम प्रिंसिपल बने लॉरेंट मेकीज टीम का नेतृत्व करेंगे।  

अगर सोई किस्मत जगानी है तो अपनाएं कपूर के ये वास्तु उपाय, शिव मंत्र से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली घर सिर्फ ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं होता, बल्कि वहां मौजूद ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों पर गहरा असर डालती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी-कभी घर में बिना किसी ठोस कारण के तनाव, भारीपन या कलह रहने लगती है। इसका मुख्य कारण घर में जमा 'नकारात्मक ऊर्जा' हो सकती है। इसे दूर करने के लिए कपूर और महादेव का एक सरल मंत्र अचूक उपाय माना जाता है। कपूर का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व वास्तु में कपूर को शुद्धता और सकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। इसकी खुशबू न केवल मन को शांत करती है, बल्कि वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और नकारात्मक तरंगों को भी नष्ट करती है। उपयोग करने का सही तरीका: प्रतिदिन आरती: सुबह और शाम पूजा के समय कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर का 'ऑरा' (Aura) साफ होता है। मुख्य द्वार पर प्रयोग: घर के मुख्य दरवाजे पर कपूर का धुआं दिखाने से बाहर की बुरी नजर और नकारात्मकता घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती। बेडरूम की शुद्धि: अगर सोते समय बुरे सपने आते हों, तो सोने से पहले कमरे में कपूर जलाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है और नींद अच्छी आती है। शिव मंत्र की असीम शक्ति भगवान शिव को 'नकारात्मकता का संहारक' माना जाता है। कपूर जलाते समय अगर "ॐ नमः शिवाय" का जाप किया जाए, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इस मंत्र की ध्वनि से निकलने वाले कंपन घर के कोने-कोने से डर, दरिद्रता और उदासी को बाहर निकाल देते हैं। घर की सुख-शांति के लिए छोटे बदलाव सफाई का ध्यान: घर में टूटा हुआ कांच या बंद घड़ियां न रखें, ये तरक्की रोकती हैं।

केंद्र सरकार का गिफ्ट: पहाड़ी राज्यों के इंजीनियरों को PSU में जॉब, जानें सैलरी

केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसले के तहत देश के पहाड़ी राज्यों के स्थानीय इंजीनियरों को सार्वजनिक उपक्रम में काम करने का अवसर देने का निर्णय लिया है। सरकारी उपक्रम में पहली बार अस्थायी नौकरी दी जाएगी। सरकार का मकसद युवा इंजीनियरों को पेशेवर रूप से दक्ष बनाना है, जिससे वह राज्य को नई ऊंचाई तक ले जा सकें। इससे युवाओं को रोजगार और आधुनिक तकनीक का अनुभव मिलेगा, जिससे वे अपने राज्यों का विकास कर सकेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लि. (एनएचएआईडीसीएल) प्रथम चरण में फरवरी में 64 सिविल इंजीनियरों के पदों पर भर्ती करेगा। यह भर्ती सिर्फ पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों के स्थानीय स्नातक के लिए आरक्षित होगी। एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय युवा इंजीनियर पहाड़ों में निर्माण के दौरान भौगोलिक चुनौतियों व स्थानीय पारिस्थितिकी को समझते हैं। उन्हें न केवल सरकार में रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अत्याधुनिक तकनीक और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का अनुभव भी हासिल कर सकेंगे। इसके बाद भविष्य में वे राज्य सरकारों के साथ मिलकर वहां का विकास कर सकेंगे। इससे स्थानीय प्रतिभाओं का बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन भी कम होगा। दुर्गम इलाकों में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों और पुलों के निर्माण में तेजी आएगी। 80 हजार तक मानदेय एनएचएआईडीसीएल स्थानीय सिविल इंजीनियर्स स्टेट स्पेसिफिक ग्रेजुएट स्कीम के तहत मानदेय के रूप में 70,000 रुपये से 80,000 रुपये प्रति माह भुगतान किया जाएगा। प्रति वर्ष वेतन में पांच फीसदी की वृद्धि होगी। शुरुआत में नियुक्ति दो साल के लिए होगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर एक साल और (कुल तीन वर्ष) बढ़ाया जा सकता है। अर्हता प्रदेश का डोमिसाइल (मूल निवास प्रमाण पत्र) होना अनिवार्य है। नए सिविल इंजीनियर स्नातक को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन कर सकते हैं। नियुक्ति के समय तक डिग्री पूरी होनी चाहिए। उम्मीदवार के पास सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक या समकक्ष विषय की डिग्री होनी चाहिए। यह डिग्री IITs, NITs या NIRF रैंकिंग (इंजीनियरिंग श्रेणी) में टॉप 100 में शामिल किसी अन्य संस्थान से प्राप्त होनी चाहिए। यदि उम्मीदवार अभी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहा/रही है, तो स्नातक वर्ष या उससे ठीक पिछले वर्ष की NIRF रैंकिंग मान्य होगी। पात्रता से संबंधित शर्तें I. इस योजना के अंतर्गत किसी विशेष राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (State/UT) के लिए विज्ञापित रिक्तियों में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का उसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का स्थायी निवासी (डोमिसाइल) होना अनिवार्य है। II. नए स्नातकों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जो छात्र अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते कि वे कार्यभार ग्रहण करने से पहले स्नातक डिग्री पूरी कर लें। III. कार्य अनुभव: आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के बाद 0 से 2 वर्ष का कार्य अनुभव मान्य होगा। क्या काम करने होंगे 1. डिटेल प्राजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और डिजाइन की समीक्षा करना। 2. भूमि अधिग्रहण, उपयोगिता स्थानांतरण में जिला अधिकारियों के साथ समन्वय। 3. निर्माण स्थल का दौरा और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता व सुरक्षा की निगरानी। 4. अनुबंध प्रबंधन और तकनीकी पत्राचार में सहयोग।  

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद बक्सर के हवलदार सुनील सिंह को मरणोपरांत सेना मेडल

चौसा/बक्सर. देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जिले के चौसा नगर पंचायत अंतर्गत नरबतपुर निवासी बलिदानी हवलदार सुनील कुमार सिंह (Martyr Sunil Kumar Singh) को भारतीय सेना ने मरणोपरांत 'सेना मेडल (वीरता)' से सम्मानित किया है। यह सम्मान राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित 78वें सेना दिवस समारोह में प्रदान किया गया। सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (operation sindoor)और आतंकवाद विरोधी अभियानों में असाधारण वीरता दिखाने वाले बलिदानियों के परिजनों को यह अलंकरण सौंपा। समारोह के दौरान जब बलिदानी सुनील सिंह के साहस और बलिदान का उल्लेख किया गया, तो उनकी पत्नी सुजाता देवी सम्मान ग्रहण करते समय भावुक हो उठीं। उनकी आंखों से छलकते आंसू हर उपस्थित व्यक्ति को गर्व और पीड़ा दोनों का अहसास करा रहे थे। सेना के अनुसार, हवलदार सुनील कुमार सिंह 237 फील्ड वर्कशाप कंपनी में तैनात थे। 9 मई 2025 की रात पाकिस्तान की ओर से वर्कशाप क्षेत्र पर भीषण गोलाबारी की गई। इसी दौरान उन्होंने छह दुश्मन ड्रोन को अपनी सेंट्री पोस्ट की ओर बढ़ते देखा। बिना देर किए उन्होंने खतरे की सूचना दी और खुले में आकर राइफल से ड्रोन पर फायरिंग शुरू कर दी। तभी शत्रु का गोला पास में फटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल अवस्था में भी उन्होंने अंतिम सांस तक ड्रोन की सटीक जानकारी साथियों को दी, जिससे कई जवानों की जान बच सकी। उनके इस अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल (वीरता)’ से सम्मानित किया गया। बलिदानी के सम्मान से पूरा जिला गौरवान्वित है।

परफेक्ट फिगर ही नहीं, ब्यूटी भी है उतनी ही जरूरी

वजन कम करने की ठान ली हो, तो अपनी फिगर के साथ-साथ ब्यूटी पर भी ध्यान दें, जिससे आगे चलकर परेशानी न हो। मोटी महिलाएं अगर छरहरी होने की ठान लें, तो उनके इस संकल्प के आड़े कोई नहीं आ सकती। मोटापे से नाता टूटे, उससे पहले ब्यूटी से अपना रिश्ता जोड़ें। वजन चाहे व्यायाम, डाइटिंग या किसी सर्जरी की सहायता से कम करें, हर सूरत में त्वचा प्रभावित होगी। वजन कम करने की इस पूरी प्रक्रिया में कई बार त्वचा इतनी लटक जाती है कि कसावट की स्थिति में लाने में काफी समय लगता है। त्वचा का लटकना आगे चलकर ठीक हो पाएगा कि नहीं यह महिला की उम्र, वह कितने लंबे समय तक मोटी रही और उसने कितनी मात्रा में वजन कम किया जैसी बातों पर भी खासतौर से निर्भर करता है। त्वचा की कोशिकाओं में प्रोटीन और प्रोटीन और फैट 2 तरह के मेट्रो एलिमेंट होते हैं, जिसे लाइपोप्रोटीन कहा जाता है। इससे त्वचा में लचक बनती है। जो महिलाएं वजन कंट्रोल की प्लानिंग कर रही है, वे अपनी कोशिकाओं में मौजूद फैट को नियंत्रित कर लेती हैं और पतली हो जाती हैं। लेकिन इससे शरीर में फैट और प्रोटीन का संतुलन बिगड़ जाता है। त्वचा की लचक कम हो जाती है, त्वचा में जल्दी झुर्रियां पड़ जाती हैं, त्वचा में जल्दी झुर्रियां पड़ जाती हैं। और त्वचा ढीली हो जाती है। इसलिए डॉक्टर बताते हैं कि जब भी वजन कम करें, तो अपनी डाइट पर पूरा ध्यान रखें। खाने में प्रोटीन कम न करें, लेकिन फैट और कार्बोहाइड्रेट पर नियंत्रण रख सकती हैं। किडनी में समस्या है, शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बन रहा है, तो उसे डॉक्टरी सलाह पर प्रोटीन की मात्रा कम लेनी चाहिए। वजन कम करनेवाली रही महिलाएं कुछ बातों पर गौर करें- -शरीर से चर्बी घटेगी, तो सबसे पहले गाल पिचकेंगे। -वक्ष, कूल्हे, बांहों और जांघों की त्वचा पर सफेद धारियां पड़ने लगेंगी और मांसपेशियां ढीली दिखने लगेंगी। -आंखों के आसपास की त्वचा पर झुर्रियां व काले घेरों की परेशानी होगी। इतना ही नहीं आंखों की रोशनी पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। -हाथों व पैरों का गुदगुदापन कम हो जाएगा और उंगलियां सिकुड़ी-सी दिखाई देंगी। -सिर के बाल तेजी से झड़ेंगे। -त्वचा चमकहीन दिखाई देगी। आंखों की देखभाल -सूर्योदय से पहले रोज सुबह उठकर अपने मुंह में ढेर सारा पानी भर कर बंद आंखों पर 15-2-बार ठंडे पानी के छींटे मारें। इससे आंखों के आसपास पड़ने वाली झुर्रियां कम होंगी या देरी से पड़ेंगी। -कभी भी देर तक व्यायाम करने के बाद या गर्मी में बाहर से आने के बाद तुरंत ठंडे पानी से चेहरा और आंखें न धोएं। जब शरीर का पसीना सूखे, तब चेहरे व आंखों पर ठंडे पानी का इस्तेमाल करें। -दूर की किसी चीज को देर तक न देखें। पलकें तनाव में रहेंगी और झुर्रियां जल्दी पड़ेगी। पलके झपकाएं, आंखों को आराम मिलेगा। -तेज धूप में सनग्लास का इस्तेमाल करें। -कम रोशनी में पढ़ने-लिखने का काम न करें। इससे आंखों थकी और सुस्त दिखाई देंगी। -वजन कम करने से आंखों के नीचे काले घेरों की शिकायत भी आम है, इसके लिए रात को सोने से पहले अंडर आई जैल का इस्तेमाल करें। आलू का रस या खीरे के स्लाइस 15 मिनट तक आंखों पर लगाकर रखेंगी तो भी लाभ मिलेगा। -आंखों की सूजन से बचने के लिए टी बैग्स, गुलाबजल में डूबे रुई के फाहे भी इस्तेमाल कर सकती हैं। गाल व गरदन की कसावट:- वजन कम होने का प्रभाव चेहरे पर पड़ता है। गालों और गरदन की कसावट बनी रहे इसके लिए 15 दिन के अंतराल पर फेशियल कराएं। -घर पर त्वचा के प्रकार के अनुसार पैक का प्रयोग कर सकती हैं। रूखी त्वचा वाली मोटी महिलाएं बादाम, दही और दूध से बने पैक का इस्तेमाल करें। सामान्य त्वचा वाली महिलाएं नीम व चंदनयुक्त फेस पैक इस्तेमाल कर सकती हैं। -हफ्ते में एक बार सरदियों के मौसम में ऑलिव ऑइल से गरदन से ऊपर की ओर ठोड़ी से कनपटी की ओर उंगलियों के ऊपर स्ट्रोक्स से चेहरे की मालिश करें। गर्मियों में तिल के तेल और बर्फ के पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर मालिश करें। बदन और झुर्रियां:- -बदन से चरबी छंटते ही झुर्रियों से बचने के लिए कंडीशनर का प्रयोग करें। एक बड़ा चम्मच शहद और 2 बड़े चम्मच क्रीम को मिलाकर 2-मिनट के लिए चेहरे या बदन पर लगाकर धो लें। -पतले होने के दौरान हो सकता है शरीर में कुछ हारमोन्स की गड़बड़ी भी हो और गालों पर पिगमेंटेशन हो। इसके लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। घर आलू या खीरे का पैक भी नियमित लगाएं, ताकि बाहरी तौर पर त्वचा को नमीयुक्त व लचकदार बनाए रखें। -जांघों, बांहों और वक्षों की कसावट के लिए अरंडी और जैतून के तेल के बराबर की मात्रा में गरम करें और मालिश करें। -ऑइल मसाज के बाद कुछ स्किन लिफ्टिंग बॉडी पैक भी लगा सकती हैं, जैसे बादाम का पाउडर, दही, अंडे की सफेदी, शहद और गुलाब के फूलों के पेस्ट से तैयार बॉडी पैक। -कूल्हे और जांघों पर सफेद धारियों से बचने के लिए जैतून के तेल में विटामिन ई के कैप्सूल को तोड़ कर मिलाएं। इससे 2-मिनट तक कूल्हे और जांघों की मालिश करें। बाल रहें खूबसूरत:- शरीर में पौष्टिकता की कमी होते ही बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। ऐसा हो, इसके लिए आयरन, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर फल-सब्जियां खाएं। चुकन्दर का सलाद, पालक, आंवला, मछली, चैलाई व बथुआ खाएं, जो स्वस्थ बालों के लिए जरूरी हैं। -महीने में 2 बार हेअर पैक का इस्तेमाल करें। मेंहदी के हेअर पैक में ऑलिव आइल और अंडे की सफेदी भी डालें। बाल मुलायम रहेंगे। -हमेशा शैंपू के बाद बालों को कंडीशन करें।  

ईरान-अमेरिका तनाव से MP में बढ़े ड्राई फ्रूट्स के दाम, केसर की कीमत पहुंची सोने से ऊपर

गुना  कड़ाके की ठंड के इस मौसम मैं जहां शरीर को गर्माहट और ऊर्जा देने के लिए सूखे मेवों (डाय फ्रूट्स) का सहारा लिया जाता है, वहीं इस बार इनकी कीमतों ने आम दमी के पसीने छुड़ा दिए हैं। गुना जिले के बाजारों में मेवों के दाम रॉकेट की रफ्तार से बढ़ यो हैं। आलम यह है कि जिस तरह सोना और चांदी अपनी कीमतों से लोगों को चौकाते हैं, ठीक उसी तरह अब केसर, पिस्ता, बादाम और अंजीर के भाव सुनकर ग्राहकों की नींद उड़ गई है। पिछले दो महीनों के भीतर इन खाद्य पदार्थों की कीमतों में जो जबरदस्त उछाल (Dry Fruits Price)आया है, उसने न केवल आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ा है, बल्कि कारोबारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खीच दी हैं।  केसर ने दिया सबसे बड़ा झटका बाजार में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली तेजी केसर में देखी गई है। ईरान से आने वाले केसर की कीमतों (Saffron Prices) में प्रति किली करीब एक लाख रुपए तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। डेढ़ माह पहले तक जो केसर जिस भाव पर था आज वह बाई लाख से पौने तीन लाख रुपए किलो के स्तर को छू रहा है। हालांकि औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग तो बनी हुई है. लेकिन आसमान छूते दामों की वजह से खरीददारों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पिस्ता भी पीछे नहीं है। जो पिस्ता पहले 1800 से 1900 रुपए किलो मिल रहा था, वह अब 2400 रुपए तक पहुंब गया है। यानी सीधे तौर पर 35 फीसदी की बढ़ोतरी। यह है कारण, जिससे बदले समीकरण चाजार विशेषज्ञों और स्थानीय व्यापारियों की मानें तो ड्राय फुट्स की कीमतों में लगी इस आग के पीछे घरेलू से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। वर्तमान में कई देशों के बीच बल रहा आपसी तनाव और सीमाओं पर सैन्य खींचतान ने 'सप्लाई चैन को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से ईरान और अमेरिका से जुड़े व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ नियमों और खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण आयात महंगा हो गया है। हालात इतने विकट हैं कि तुर्की से आने वाला 'गीला अंजीर तो अब स्थानीय बाजार से लगभग नदारद हो चुका है। बाजार में कहां से क्या आता है ईरान का केसर और पिस्ताः पिस्ता और केसर का मुख्य स्रोत ईरान है। वहां के हालात और परिवहन बाधाओं के कारण आपूर्ति उप जैसे है. जिससे ये सबसे महंगे बिक रहे हैं। अफगानिस्तान का अंजीरः अंजीर का प्रमुख उत्पादन केंद्र अफगानिस्तान है। सीमाई विवादों और राजनीतिक अस्थिरता ने अंजीर की सप्लाई लाइन काट दी है. जिससे इसके दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं। पाकिस्तान का छुआराः छुआरे की आवक पाकिस्तान से होती है। भारत पाक सीमाओं पर तनाव के चलते माल सीधे नहीं आ पा रहा है। चोरी-छिपे या घुमावदार रास्तों से माल पहुंबने से लागत 300 रु किलो तक पहुंगी है। कैलिफोर्निया बादामः अमेरिकी बादाम पर राष्ट्रपति के टैरिफ फैसलों का साया है, जिससे बादाम की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। क्या कह रहे हैं कारोबारी ड्राय फ्रूट्स के बड़े कारोबारी बटी जैन बजते हैं कि अपने व्यापारिक जीवन में पिछले दो महीनों जैसी अप्रत्याशित तेजी कभी नहीं देखी। माल की कमी और ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को पीछे धकेल दिया है। दुकानदार हुजैफा फारिग का कहना है कि लोग दुकान पर आते तो हैं, लेकिन केसर और पिस्ता के दाम सुनते ही बिना खरीदें लौट जाते हैं। वर्तमान में काजू 1000 रुपए मखाने 1300 रुपए और चिरौंजी 2200 रुपए किलो तक बिक रही है. जो आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है।