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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: शादी के बाद MP में रहने वाली महिलाओं को मिलेगा आरक्षण का फायदा

इंदौर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक बड़े और महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अन्य राज्य से शादी कर मध्य प्रदेश में स्थायी रूप से निवास करने वाली महिलाओं को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि महिला के पास मध्य प्रदेश का डोमिसाइल (निवास प्रमाण पत्र) है, तो वह आरक्षण की हकदार मानी जाएगी। कोर्ट ने तय की शर्तें जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरक्षण का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जो निम्न शर्तों को पूरा करती हों- महिला अभ्यर्थी के पास मध्य प्रदेश का वैध डोमिसाइल प्रमाण पत्र हो। उसकी जाति या समुदाय उसके मूल राज्य और मध्य प्रदेश, दोनों में आरक्षित श्रेणी में शामिल हो। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि विज्ञापन और नियमों के दायरे से बाहर जाकर कोई नई शर्त नहीं जोड़ी जा सकती। अदालत ने पात्र उम्मीदवारों को तत्काल नियुक्ति देने, पिछला वेतन, वरिष्ठता और अन्य सभी वैधानिक लाभ प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं। क्या था मामला यह विवाद उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ा था। कई महिला अभ्यर्थियों ने आरक्षित वर्ग के अंतर्गत आवेदन कर लिखित परीक्षा पास की थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनकी उम्मीदवारी यह कहकर रद्द कर दी गई कि उनके जाति प्रमाण पत्र उनके मूल राज्य से जारी हैं, न कि मध्य प्रदेश से। इस निर्णय को महिलाओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उत्तराखंड हाई कोर्ट से अलग रुख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला उत्तराखंड हाई कोर्ट के हालिया फैसले से अलग है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण का अधिकार जन्म के आधार पर तय होता है और विवाह से नहीं मिलता। वहीं मप्र हाई कोर्ट ने डोमिसाइल और दोनों राज्यों में जाति की समानता को आधार मानते हुए महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया है। इस फैसले को प्रवासी बहुओं के संवैधानिक अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि महिला सभी वैधानिक शर्तें पूरी करती है, तो केवल विवाह के आधार पर उसे आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता।

पीएम सूर्य घर योजना में अब तक 29 हजार 174 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 227 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

पीएम सूर्य घर योजना में अब तक 29 हजार 174 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 227 करोड़ से अधिक की सब्सिडी योजना में 3 किलोवॉट के सौर संयन्त्र लगाने पर 78 हजार की मिलेगी सब्सिडी भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्य घर योजना में अब तक कुल 29 हजार 174 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इनके खातों में 227 करोड़ 39 लाख रूपये से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना में एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, 2 किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा 3 किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय ऐप, वॉट्सऐप चेटबॉट व टोल फ्री नं 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है। कंपनी ने कहा कि जिन रूफटॉप सोलर प्लांट में नेट मीटर के साथ मोडेम व सिम लगे होने के बाद भी अगर डाटा कम्युनिकेशन का अभाव है, तो संबंधित सोलर वेंडर को नोटिस जारी किए गए हैं। कम्युनिकेशन फिर भी स्थापित नहीं होने की अवस्था में वेंडर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

कूनो से ग्वालियर तक हाईवे पर चीतों की बढ़ी चहलकदमी, सुरक्षा बढ़ाने का लिया गया फैसला

ग्वालियर  श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीते बढ़ती संख्या के बाद अब वहां से 150 से 200 किमी दूर ग्वालियर-मुरैना तक चहलकदमी कर रहे हैं, कुछ चीते काफी दिनों से ग्वालियर-मुरैना में ही डेरा डाले हैं। ये चीते हाईवे पार करते हुए भी देखे गए हैं। हाईवे पार करते समय एक चीते की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में वन विभाग ने चिंता जताते हुए हाईवे को पूरी तरह चीतों के लिए सुरक्षित करने की कवायद शुरू कर दी है। वन विभाग एनएचएआइ को प्रस्ताव भेजकर ग्वालियर से शिवपुरी तक हाईवे पर रेलिंग, तेज गति में चलने वाले वाहनों की गति नियंत्रण के लिए स्पीड कंट्रोलर व आटोमेटिक कैमरे लगाने का आग्रह करेगा। इसके अलावा वन विभाग वाहन चालकों को अलर्ट करते हुए चीतों के आवागमन संबंधी बोर्ड भी लगाने जा रहा है। हो रहे दुर्घटना का शिकार गौरतलब है कि 7 दिसंबर 2025 को घाटीगांव के सिमरिया टांका क्षेत्र में सड़क पार कर रहे चीते को एक कार ने टक्कर मार दी थी। यह चीता गामिनी का शावक था, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरा चीता बाल-बाल बच गया। इसी इलाके में आशा चीता का शावक भी काफी समय से देखा जा रहा है। वहीं मुरैना जिले में भी एक चीते की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग का मानना है कि कूनो से बाहर निकलकर चीते नए और उपयुक्त जंगली क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में हाईवे और आसपास के इलाकों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। सात दिसंबर 2025 को ग्वालियर के घाटीगांव सिमरिया टांका पर रविवार सुबह कार ने सड़क पार कर रहे चीते को टक्कर मार दी थी। यह चीता गामिनी का शावक था। टक्कर लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। शावक के साथ दूसरा चीता बाल- बाल बच गया था। आशा चीता का शावक भी इसी इलाके में लंबे समय से मौजूद है। मुरैना जिले में भी एक चीता है, जिससे वन विभाग का मानना है कि कूनो से दूर भी चीता उपयुक्त जंगली माहौल तलाश रहे हैं, इसलिए यहां भी इनकी सुरक्षा बढ़ाना जरूरी है।  

टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद, 1 अप्रैल से FASTag और UPI से ही होगी एंट्री

 नई दिल्ली FASTag Toll Payment: देश के हाइवे पर यात्रा का तरीका बदलने जा रहा है. हाईवे जर्नी को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है. 1 अप्रैल से देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. अब टोल टैक्स सिर्फ FASTag या UPI के जरिए ही चुकाया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि समय, फ्यूल और पैसे की भी बचत होगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि, भारत तेजी से डिजिटल इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है. पहले UPI से टोल भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. अब सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश भुगतान (Cash Payment) पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है. 1 अप्रैल के बाद टोल पर सिर्फ FASTag या UPI ही मान्य होंगे. टोल प्लाजा से खत्म होगा कैश लेन इस फैसले के बाद देशभर के टोल प्लाजा पर कैश लेन पूरी तरह बंद हो जाएंगे. इससे मैन्युअल वसूली के कारण लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी. सरकार का कहना है कि कैशलेस टोलिंग से सिस्टम ज्यादा फास्ट, ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनेगा. अब भी कई लोग FASTag होने के बावजूद कैश लेन का इस्तेमाल करते थे, जिससे खासकर त्योहारों और पीक आवर्स में जाम की स्थिति बनती थी. फ्यूल और टाइम की बचत टोल प्लाजा पर बार-बार रुकने से गाड़ियों का फ्यूल ज्यादा खर्च होता है और ड्राइवरों को भी थकान होती है. वी. उमाशंकर के मुताबिक हर बार रुकने और फिर गाड़ी चलाने में समय और डीजल दोनों की बर्बादी होती है. लंबी दूरी की यात्रा में यह नुकसान और बढ़ जाता है. कैशलेस सिस्टम से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी. बैरियर-फ्री टोलिंग की तैयारी कैशलेस टोल का यह फैसला भविष्य की एक बड़ी योजना की तैयारी भी माना जा रहा है. सरकार जल्द ही मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोलिंग सिस्टम लागू करने जा रही है. इस सिस्टम में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होगा और वाहन बिना रुके हाईवे पर फर्राटा भरते हुए निकल सकेंगे. टोल शुल्क अपने आप FASTag और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए कट जाएगा. 25 टोल प्लाजाओं पर पायलट प्रोजेक्ट सरकार ने MLFF सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट के लिए देशभर में 25 टोल प्लाजाओं को चिन्हित किया है. यहां इस नई तकनीक को लागू करने से पहले नियमों  और यात्रियों के अनुभवों की जांच की जाएगी. इसके बाद इस सिस्टम को पूरे देश में लागू करने की योजना है. इससे जाम खत्म होगा, ट्रैवेल टाइम घटेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी. सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे 1 अप्रैल से पहले अपना FASTag एक्टिव रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें, या UPI भुगतान के लिए तैयार रहें. कैशलेस टोलिंग और बैरियर-फ्री हाईवे का यह कदम भारत की सड़क यात्रा को पूरी तरह बदलने वाला है. आने वाले समय में टोल प्लाजाओं पर किसी तरह का कोई जाम नहीं लगेगा और सफर ज्यादा बेहतर और आसान होगा.

न पुतिन न ट्रंप, इस बार कौन होगा रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट? PM मोदी ने किसे दिया न्योता और क्यों

नई दिल्ली एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यही दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. इस बार न रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ रहे हैं, न अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इसके बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा न्योता दिया है, जो भारत के कूटनीतिक इतिहास में पहली बार हो रहा है. पहली बार किसी एक देश के नेता को नहीं बल्कि यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट बनाया गया है. यह फैसला सिर्फ परंपरा तोड़ने वाला नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की रणनीतिक सोच को भी दिखाता है. रिपोर्ट के अनुसार यह न्योता ऐसे समय दिया गया है जब दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है. अमेरिका और ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में खटास बढ़ी है. अमेरिका और यूरोप के बीच भरोसे की दरार खुलकर सामने आ रही है. इसी बीच भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के और करीब आ रहे हैं. भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत निर्णायक मोड़ पर है. रक्षा, सुरक्षा, क्लीन एनर्जी और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर साझेदारी गहरी हो रही है. ऐसे में EU के दोनों शीर्ष नेताओं को एक साथ न्योता देना भारत का बड़ा कूटनीतिक दांव माना जा रहा है. कौन हैं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन? एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं. ये दोनों पद EU की सबसे ताकतवर संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं. 27 देशों के इस समूह में नीतिगत फैसलों से लेकर वैश्विक रणनीति तक, इन दोनों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. क्यों खास है यह न्योता? पहली बार हुआ ऐसा भारत के इतिहास में अब तक रिपब्लिक डे पर किसी एक देश के नेता को ही मुख्य अतिथि बनाया गया है. इस बार तस्वीर बदली है. EU को एक इकाई के रूप में मान्यता देना, अपने आप में बड़ा संकेत है. यह दिखाता है कि भारत अब द्विपक्षीय रिश्तों से आगे बढ़कर ब्लॉक-लेवल डिप्लोमेसी को भी उतनी ही अहमियत दे रहा है. ट्रंप फैक्टर और बदलते वैश्विक समीकरण डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए तबसे अमेरिका-यूरोप रिश्ते फिर तनाव में हैं. NATO, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं. EU ऐसे समय में भारत को एक भरोसेमंद, स्थिर और उभरते वैश्विक साझेदार के तौर पर देख रहा है. भारत भी पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है. इस दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है?     25 जनवरी को दोनों नेता भारत पहुंचेंगे.     राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे.     26 जनवरी को रिपब्लिक डे परेड में चीफ गेस्ट होंगे.     27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी.     भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित होगा. भारत-EU FTA क्यों बना सबसे बड़ा एजेंडा? भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत 2007 से चल रही है. दिसंबर 2025 में इसे नई रफ्तार मिली. अब इसे अंतिम चरण में माना जा रहा है. EU भारत को चीन पर निर्भरता कम करने के विकल्प के तौर पर देखता है, जबकि भारत को यूरोपीय बाजार, टेक्नोलॉजी और निवेश की ज़रूरत है. इस दौरे से क्या-क्या निकल सकता है?     भारत-EU FTA पर बड़ा ब्रेकथ्रू.     डिफेंस और सिक्योरिटी पार्टनरशिप का औपचारिक ऐलान.     ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी में सहयोग.     सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में भारत की भूमिका मजबूत.     वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था की संयुक्त पैरवी. क्यों कहा जा रहा है इसे बड़ा कूटनीतिक दांव? EU ने हाल ही में भारत के लिए नई स्ट्रैटेजिक एजेंडा तैयार की है. वहीं भारत भी EU को सिर्फ देशों के समूह के तौर पर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक शक्ति के रूप में देखने लगा है. इस दौर में यह न्योता बताता है कि भारत वैश्विक राजनीति में सिर्फ संतुलन नहीं, बल्कि दिशा तय करने की भूमिका में आ चुका है.

MP में AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का गठन, 90 दिन में जानेंगी बीमारियां – बड़ी तकनीकी सौगात

भोपाल  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को शासन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा देशभर में प्रस्तावित 58 एआइ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI Centers of Excellence) में से दो सेंटर मप्र में स्थापित होंगे। प्रत्येक सेंटर करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित होगा, जहां शासकीय कार्यों में एआइ के नवाचार और समाधान विकसित किए जाएंगे। साथ ही चैट-जीपीटी (ChatGPT) जैसा स्वदेशी एआइ प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है, जिसे फरवरी में नेशनल एआइ समिट से पहले लॉन्च किया जाएगा। रिसर्च फैलोशिप शुरू- सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 (MP Regional AI Impact Conference-2026) में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह ने बताया कि एआइ से प्रदेश में लिए रिसर्च फैलोशिप शुरू की गई है, जिसका लाभ अब सभी विषयों के विद्यार्थी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत एआइ के क्रियान्वयन में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। अनुवाद के लिए 'भाषिणी' पोर्टल और देशभर में एआइ डेटा लैब्स विकसित की जा रही है। मप्र में 30 एआइ डेटा लैब्स बनने से लाखों युवाओं को डेटा एनालिस्ट के रूप में प्रशिक्षण मिलेगा। हैकाथॉन विजेताओं को मिले पुरस्कार कॉन्फ्रेंस में सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभहैकाथॉन और मप्र इनोटेक स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कृत किया। भोपाल स्मार्ट सिटी के बीनेस्ट इंक्यूबेशन सेंटर से निकले स्टार्टअप स्टारब्रू टेकसिस्टम्स के आशुतोष राय को पहला स्थान मिला है। इसमें देशभर से 1726 कंपनियों ने भाग लिया था। वेक्टर बॉर्न बीमारियों का हो सकेगा फोरकास्ट एमपी इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) के एमडी आशीष वशिष्ठ ने बताया कि एआइ के उपयोग से शासन में पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार होगा। एआई आधारित मॉडल से डेंगू, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर बॉर्न बीमारियों और कुपोषणकी तीन महीने पहले ही भविष्यवाणी की जा रही है। डब्ल्यूएचओ मानकों के आधार पर कुपोषण फोरकास्टिंग से संभावित कुपोषित बच्चों की पहचान पहले ही हो सकेगी। एआई से फसल गिरदावरी और रोग प्रकोप की सटीक जानकारी भी मिलेगी। (MP News)  

F-35 और Su-57 के बिना भी सुपर पावर बनेगा IAF, ₹325000 करोड़ की डील से चीन-पाक को आया पसीना

बेंगलुरु   तमाम रिपोर्ट्स में फ्रांस की डसॉल्ट डिफेंस एविएशन कंपनी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राफेल फाइटर जेट डील पर आगे बढ़ने की बात कही जा रही है. अभी तक के सबसे बड़े लड़ाकू विमान खरीद करार के तहत 114 राफेल जेट खरीदने की बात कही जा रही है. इसके तहत 12 से 18 एयरक्राफ्ट फ्लाई-अवे यानी पूरी तरह से डेवलप कंडीशन में मिलेंगे, जबकि अन्‍य जेट का को-प्रोडक्‍शन भारत में होगा. रिपोर्टस की मानें तो यह डील ₹325000 करोड़ की है. तकरीबन डेढ़ दशक पहले भी सौ से ज्‍यादा राफेल जेट खरीदने को लेकर फ्रांस के साथ समझौता हुआ था, जिसे साल 2015 में रद्द कर दिया गया था. बाद में गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के तहत 36 राफेल जेट खरीदे गए थे. इसकी डिलीवरी पूरी हो चुकी है. राफेल फाइटर जेट भारत के संवेदनशील एयरबेस पर तैनात हैं. इस जेट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं और उपयोगिता का प्रदर्शन किया था. इसके बाद भारत अब 114 अतिरिक्‍त राफेल फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है. बता दें कि इंडियन नेवी के लिए 26 राफेल-M फाइटर जेट अलग से खरीदने का करार हुआ है, जो एडवांस स्‍टेज में है. अब सवाल उठता है कि 114 राफेल जेट को खरीदने का फैसला क्‍यों किया गया और यह डील पहले के खरीद समझौते से कैसे अलग होने वाला है. मौजूदा डील में दो सीक्रेट प्रोविजन किए गए हैं. इससे इंडियन एयरफोर्स साउथ एशिया रीजन में काफी शक्तिशाली हो जाएगी. एयर पावर कैलकुलस भी बदल जाएगा. चीन-पाकिस्‍तान जैसे देश भारत की तरफ आंख उठाकर देखने से पहले हजार बार सोचेंगे. इंडियन एयरफोर्स के लिए फिलहाल 42 स्‍क्‍वाड्रन तय किया गया है, पर यह संख्‍या चिंताजनक तरीके से 30 से नीचे आ चुका है. इस गैप न केवल भरने कोशिश की जा रही है, बल्कि सैंक्‍शन्‍ड स्‍क्‍वाड्रन को 42 से बढ़ाकर 50 तक करने की प्‍लानिंग है, ताकि पश्चिमी और उत्‍तरी सीमा को अभेद्य बनाया जा सके. इन सबके बीच फ्रांस के रक्षा विमानन पोर्टल avionslegendaires.net की एक रिपोर्ट सामने आई है. इसमें दावा किया गया है कि भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित राफेल लड़ाकू विमान सौदा केवल 114 नए राफेल F4 फाइटर जेट की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कहीं बड़ा और व्यापक हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इस पैकेज में भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में पहले से शामिल 36 राफेल F3R (3FR) स्‍टैंडर्ड के जेट्स को भी अत्याधुनिक F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जा सकता है. इससे भारतीय वायुसेना के अधिकांश राफेल विमान एक ही उन्नत तकनीकी स्तर पर आ जाएंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित 114 नए राफेल विमानों में से कम से कम 24 विमान भविष्य के राफेल F5 स्टैंडर्ड के हो सकते हैं, जिनका उत्पादन 2030 के बाद शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, इन 24 राफेल F5 विमानों का निर्माण पूरी तरह फ्रांस में ही किया जा सकता है, न कि भारत में प्रस्तावित लोकर प्रोडक्‍शन लाइन के तहत. राफेल F4 vs राफेल F5 राफेल F4 राफेल F5 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): मिशन को आसान बनाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल, जिससे पायलट पर काम का बोझ कम होगा और आसपास की स्थिति बेहतर समझ में आएगी. नया फाइटर जेट अब बिना पायलट वाले ड्रोन (UCAV) के साथ मिलकर काम करेगा. यह ड्रोन ‘लॉयल विंगमैन’ की तरह जेट के साथ उड़ान भरकर दुश्‍मन पर हमला करेगा. एडवांस एवियोनिक्स: कॉकपिट में बड़े डिस्प्ले, आधुनिक होलोग्राफिक HUD और बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम, जिससे जानकारी तेजी से साझा होगी. इसमें हाइपरसोनिक मिसाइल ASN4G लगाने की तैयारी है, जो बहुत तेज रफ्तार से गहराई तक हमला (डीप अटैक) करने में सक्षम होगी. नई और ताकतवर हथियार क्षमता: MICA NG मिसाइल (नई पीढ़ी) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसके अलावा AASM हैमर बम भी होगा. इस जेट में 1,000 किलो तक का बम ले जाने की क्षमता के साथ दूर से सटीक हमला करना संभव होगा. जेट में अब और ताकतवर रडार (RBE2XG) और खास इन्फ्रारेड सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे दुश्‍मन के छिपे हुए विमान या स्‍टील्‍थ फाइटर जेट भी पकड़े जा सकेंगे. TALIOS पॉड: AI से लैस उन्नत टारगेटिंग सिस्टम, जिससे निशाना ज्यादा सटीक होगा. TALIOS पॉड को बेहतर बनाया गया है, जिससे निगरानी, जानकारी जुटाने और टारगेट को पहचानने की क्षमता बढ़ेगी. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: SPECTRA सिस्टम को और मजबूत किया गया है, जो दुश्मन के खतरों और मिसाइलों को जल्दी पहचानकर बचाव करेगा. नए डाटा लिंक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पायलट को युद्ध के दौरान फैसले लेने में आसानी होगी. कनेक्टेड कॉम्बैट: रियल टाइम में सेना की अन्य इकाइयों के साथ डेटा शेयर करने की सुविधा. SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्‍टम को और मजबूत किया गया है, ताकि दुश्‍मन के रडार और मिसाइल से बेहतर बचाव हो सके. साइबर सुरक्षा: डेटा को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर साइबर प्रोटेक्शन. इसमें नई मिसाइलें और हथियार जोड़े जाएंगे, जो दुश्‍मन के एयर डिफेंस को नष्‍ट करने में मदद करेंगे. ट्रेनिंग सुविधा: विमान में ही एडवांस ट्रेनिंग के लिए सिमुलेशन सिस्टम. जेट में अब ज्‍यादा ताकतवर इंजन लगाए जाने की उम्‍मीद है, जिससे इसकी रफ्तार और ताकत बढ़ेगी. अपग्रेड में आसानी: पुराने राफेल F3 वर्जन को आसानी से F4 में बदला जा सकता है. यह विमान पूरी तरह पांचवीं पीढ़ी का स्‍टील्‍थ जेट नहीं है, लेकिन पुराने मॉडल की तुलना में इसे इंटरसेप्‍ट करना आसान नहीं होगा, जिससे दुश्‍मन के लिए इसे पकड़ना मुश्किल होगा.  राफेल F4 अपग्रेड: मौजूदा फ्लीट में बड़ा बदलाव मीडिया रिपोर्ट में किया गया यह दावा यदि सही साबित होता है तो भारतीय वायुसेना के पास तब राफेल के तीन अलग-अलग वर्जन (F3R, F4 और भविष्य में F5) एक साथ सेवा में होंगे, जो इसकी लड़ाकू क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के 36 राफेल F3R विमानों को F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाना एक साधारण सुधार नहीं, बल्कि एक गहरा और व्यापक आधुनिकीकरण होगा. इस अपग्रेड में एवियोनिक्स, सेंसर, हथियारों का इंटीग्रेशन, कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम और रखरखाव ढांचे में बड़े बदलाव शामिल होंगे. F4 अपग्रेड का सबसे अहम हिस्सा उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम है. इसमें पहले से लगे RBE2 AESA रडार … Read more