samacharsecretary.com

सिगरेट-बीड़ी पैकेट पर दिखता है ये नंबर, 1 करोड़ लोग कर चुके हैं कॉल, जानिए क्विट-लाइन का क्या काम है

नई दिल्ली Tobacco Quitline Number: अगर आपने ध्यान से सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू और इससे बने उत्पादों के पैकेट देखा हो तो मालूम होगा कि इन सभी पैकेट्स पर एक नंबर लिखा होता है और इसके पास लिखा होता है क्विट लाइन नंबर. क्या कभी आपने सोचा है कि यह नंबर इन पैकेट्स पर क्यों लिखा होता है और क्या कभी कोई व्यक्ति इस नंबर पर कॉल भी करता है, और अगर कॉल करता भी है तो उसका क्या फायदा होता है? नहीं! तो आइए जानते हैं.. दिल्ली के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI) के डायरेक्टर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर दर्ज यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नेशनल टोबैको क्विट हेल्पलाइन (1800-112-356) नंबर है जो तंबाकू छोड़ने में लोगों की मदद करता है. यह टोल फ्री नंबर है, जिस पर अगर कोई व्यक्ति कॉल करता है तो वह कॉल तुरंत काउंसलर्स के पास जाती है और फिर आगे का काम ये काउंसलर्स करते हैं. ये लोग तंबाकू छोड़ने का मन बना चुके लोगों की लगातार काउंसलिंग करते हैं और 9 महीने तक फॉलोअप करते हैं. वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट डे के मौके पर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि अस्पताल की इस हेल्पलाइन पर अभी तक 1 करोड़ लोग फोन कर चुके हैं. इनमें से 6 लाख लोग ऐसे थे, जिन्हें तंबाकू छोड़ने के लिए काउंसलिंग दी गई और इनमें से करीब 35 फीसदी लोग तंबाकू छोड़ पाए. तंबाकू छोड़ने वाले लोगों में बीड़ी-सिगरेट या बिना धुएं वाला तंबाकू छोड़ने वाले सभी लोग शामिल हैं. वे कहते हैं कि यह देश की सबसे प्रभावी तंबाकू क्विट हेल्पलाइन है लेकिन लोगों को इसके बारे में नहीं पता. सबसे बड़ी बात है कि यह हर उस उत्पाद पर मौजूद है जिसमें तंबाकू है. शुरुआत में यह सेवा VPCI से शुरू की गई थी, लेकिन इसकी सफलता के बाद इसके तीन आउटरीच सेंटर बेंगलुरु के निमहांस, मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट और गुवाहाटी के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में खोले गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को और कई भाषाओं में मदद मिल सके. कब से कब तक काम करता है यह क्विट लाइन नंबर यह हेल्पलाइन नंबर सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक काम करता है. सोमवार को यह बंद रहता है. फिलहाल यह 15 भारतीय भाषाओं में काउंसलिंग की सुविधा देती है.इसकी पहचान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हेल्पलाइन नंबर सभी तंबाकू उत्पादों पर छापा जाए. ऐसे में जब भी कोई व्यक्ति तंबाकू का पैकेट उठाता है और छोड़ने के बारे में सोचता है, तो मदद का नंबर उसे वहीं मिल जाता है. कब शुरू हुई क्विटलाइन प्रोफेसर कुमार ने बताया कि यह क्विटलाइन 2016 में शुरू की गई थी. इसमें सिर्फ फोन पर काउंसलिंग ही नहीं दी जाती बल्कि बल्कि यह व्यक्ति के तंबाकू छोड़ने के पूरे सफर में उसके साथ रहती है और लगातार 7 दिन, 1 महीना, 3 महीने और 9 महीने तक फॉलोअप करती है और यही चीज इसे सफल बनाती है.

मध्य प्रदेश में 165 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू, 324 किमी का निर्माण करेगी मुंबई की कंपनी

 छतरपुर  छतरपुर शहर के तालाबों को स्वच्छ और साफ रखने के लिए वर्ष 2022 में स्वीकृत सीवर प्रोजेक्ट बीते चार साल से अटका हुआ था। तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो पाया था लेकिन अब नगर पालिका छतरपुर और मुंबई की कंपनी आरएनबी इंफ्रा के बीच अनुबंध होने के बाद परियोजना को नई दिशा मिली है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से अंतिम सर्वे शुरू कर दिया है, जिसे 90 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 165 करोड़ रुपए है। सर्वे के बाद ठेकेदार फाइल का वेरिफिकेशन किसी इंजीनियरिंग कॉलेज से कराएगा और इसके बाद इसे अंतिम अनुमोदन के लिए भोपाल भेजा जाएगा। अनुमोदन मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा। कार्य शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट के अंतर्गत होने वाले कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।  तीन साल पहले पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं हो पाया। गुजरात की कंपनी द्वारा डीपीआर समय पर तैयार न करने और बार-बार टेंडर निरस्त होने के कारण कार्य रुक गया था। इस कारण शहर के प्रमुख तालाबों प्रताप सागर, संकट मोचन, ग्वाल मंगरा और किशोर सागर में गंदगी, जलकुंभी और जलकुमा डेमली जैसी वनस्पतियां पनप गई हैं। इससे पानी दुर्गंधपूर्ण और अनुपयोगी हो गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में होगा सर्वे का कार्य नगर पालिका के उपयंत्री अंकित अरजरिया ने बताया, निर्माण एजेंसी और नगर पालिका के बीच अनुबंध हो गया है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है। निर्माण जल्द शुरू करने के लिए ठेकेदार को अलग-अलग क्षेत्र का सर्वे करने कहा गया है, ताकि ड्राइंग जल्दी तैयार हो और अनुमोदन मिल सके। अनुमोदन मिलने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शहर में तालाबों को स्वच्छ बनाने की योजना… प्रारंभ में नरायणपुरा और राजनगर रोड पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा। इस चरण में आधुनिक तकनीक और उच्च क्षमता वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे शहर के गंदे पानी को प्रभावी ढंग से साफ किया जा सके। इसके बाद फ्लौठा और सौरा तालाब में इंटरमीडिएटर पंपिंग सिस्टम (आईपीएस) लगाया जाएगा। यह सिस्टम तालाबों में जमा गंदे पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का काम करेगा। 3 फेज में होगा प्रोजेक्ट फेज-1- शहर में 5 पानी की टंकियों का निर्माण। फेज-2- शहर के तालाबों का सौंदर्गीकरण और सफाई। फेज-3- 324 किलोमीटर सीवर लाइन बिछेगी, 3 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 पंपिंग स्टेशन बनेंगे। ये पंपिंग स्टेशन पानी को एक से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।

ग्वालियर में स्थापित होगा नया सेटेलाइट स्टेशन, निर्माण के लिए लोगों से ली जाएगी ज़मीन

ग्वालियर   ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों की बढ़ रही भीड़ का बोझ हल्का किया जाएगा। इसके लिए बिरलानगर रेलवे स्टेशन को सेटेलाइट स्टेशन (Satellite Station) के तौर पर तैयार करने की पहल शुरू हो रही है। इसके अलावा सिथौली और बिरला नगर के रेलवे स्टेशन का विकास का प्रस्ताव भी रेल मुख्यालय को भेजा गया है। रेल अधिकारियों का कहना है बिरलानगर रेलवे स्टेशन (Birla Nagar Railway Station) को आने वाले दिनों में ग्वालियर का सहायक स्टेशन बनाया जाएगा। इसका ब्लू प्रिंट लगभग तैयार है। इसमें प्लेटफार्म की गिनती, ट्रैक को सुधारने, सिग्लन और रेलों के परिचालन की क्षमता बढ़ाने के साथ मुसाफिरों को जरुरी सुविधाओं का विस्तार का प्लान शामिल किया गया है। इस प्रस्ताव को रेल मुख्यालय में परखा जाएगा। इसमें सबसे अहम कड़ी जगह है। मुख्यालय यह तय करेगा कि भविष्य को देखते हुए कितनी भूमि की जरुरत होगी। यहां पड़ेगी भूमि अधिग्रहण की जरूरत रेल अधिकारियों की नजर में पूरे प्रोजेक्ट में बिरलानगर रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए जमीन की जरुरत होगी इसके लिए प्रदेश शासन के सहयोग लिया जाएगा। सिथौली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म की गिनती और मुसाफिरों की सुविधाओं को बढ़ाने का खाका खींचा गया है। इन दोनों रेलवे स्टेशन का दायरा बढने से ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों दवाब काफी कम होगा। मंजूरी का इंतजार बिरलानगर और सिथौली रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जाए इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में इन दोनों स्टेशन को ग्वालियर स्टेशन का वैकल्पिक और मददगार बनाने की योजना है। रेल मुख्यालय से प्रस्ताव की मंजूरी का इंतजार है।- अनिरुद्ध कुमार, मंडल रेल प्रबंधक 

भोपाल मेट्रो का सफर होगा और भी स्मार्ट, स्मार्ट कार्ड और क्यूआर कोड से मिलेगा सुविधा

भोपाल  नागरिकों के लिए मेट्रो का सफर अब और भी आधुनिक और सुगम होने जा रहा है। आरेंज लाइन प्रायोरिटी कारिडोर के मेट्रो स्टेशन पर आटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) सिस्टम इंस्टाल करने का काम शुरू हो चुका है। इस प्रणाली के लागू होने से यात्रियों को टिकट काउंटर पर लाइन लगने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय की बचत और यात्रा का अनुभव बेहतर होगा। ज्ञात हो कि इस सिस्टम को इंस्टाल करने के लिए पहले तुर्किये की एक कंपनी को टेंडर दिया था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद वह समझौता रद होने के बाद से यह सिस्टम इंस्टाल नहीं हो पाए थे। अब दिल्ली मेट्रो की तकनीकी और परिचालन भागीदारी से इस प्रोजेक्ट को नई गति मिली है। दिल्ली मेट्रो के विशेषज्ञों की निगरानी में मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) और दिल्ली मेट्रो (डीएमआरसी) के बीच हुए एमओयू के तहत, दिल्ली मेट्रो के अनुभवी इंजीनियर भोपाल मेट्रो के लिए इस एडवांस सिस्टम को स्थापित कर रहे हैं। वर्तमान में यह काम सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन पर चल रहा है। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार आरेंज लाइन के आठ मेट्रो स्टेशनों पर इस सिस्टम को इंस्टाल व टेस्ट करने में लगभग दो महीने का समय लगेगा। इंस्टालेशन के बाद फंक्शन ऑपरेटिंग की होगी जांच एएफसी सिस्टम के इंस्टाल होने के बाद इसके फंक्शन आपरेटिंग की जांच की जाएगी, ताकि यात्रियों को तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े। वहीं, ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण में बनाए जा रहे मेट्रो स्टेशनों पर भी दिल्ली मेट्रो द्वारा ही एएफसी सिस्टम लगाया जाएगा। यात्री संख्या में गिरावट 21 दिसंबर से आम लोगों के लिए मेट्रो को एम्स से लेकर सुभाष नगर तक चलाया गया। पहले सप्ताह हजारों की संख्या में यात्रियों ने यात्रा की, दूसरे सप्ताह भी यात्रियों की संख्या ठीक रही, लेकिन तीसरे सप्ताह से इसमें गिरावट होना शुरू हो गई। अब रोजाना ढाई-तीन सौ यात्री सफर कर रहे हैं। एएफसी सिस्टम से यात्रियों को होने वाले खास फायदे डिजिटल पेमेंट : यात्री क्यूआर कोड और स्मार्ट कार्ड के माध्यम से सीधे भुगतान कर सकेंगे। भीड़ से मुक्ति : स्टेशनों पर फिजिकल टिकट काउंटरों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पीक आवर्स में भीड़ नहीं लगेगी। बेहतर राजस्व प्रबंधन : इस सिस्टम से मेट्रो प्रशासन को सटीक राजस्व डेटा और यात्रियों की संख्या का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी ।

किसानों के लिए सरकार का बड़ा कदम, 2024-25 वित्त वर्ष में 834.64 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता

नई दिल्ली   सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की जरूरत लगभग 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) आंकी गई थी, जिसके मुकाबले सरकार ने करीब 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए।  सरकार ने कहा कि किसानों की खेती से जुड़ी जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए 2024-25 में रिकॉर्ड मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों की मदद करने और देशभर में खेती का काम बिना रुकावट चलाने के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है। सरकार के मुताबिक, यह सफलता रेलवे, बंदरगाह प्राधिकरण, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के आपसी तालमेल से संभव हो पाई।सरकारी बयान में कहा गया कि भारतीय रेलवे ने उर्वरक ढुलाई को प्राथमिकता दी, जिससे उर्वरक तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सके। वहीं, बंदरगाहों पर आयात किए गए उर्वरकों को जल्दी उतारा गया और आगे भेजने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही सरकार ने भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया, ताकि उर्वरक सही समय पर किसानों तक पहुंच सकें।सरकार ने उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कीं, मांग और आपूर्ति पर लगातार नजर रखी और जहां भी समस्या आई, उसे तुरंत दूर किया। इन पहले से की गई तैयारियों की वजह से देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं हुई। सरकार के अनुसार, इसी निरंतर और मिलकर किए गए प्रयासों से पूरे देश में 2024-25 के दौरान रिकॉर्ड उर्वरक उपलब्धता हासिल हुई। इसी बीच, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सर्दी के मौसम में रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल इसी समय 626.64 लाख हेक्टेयर था। इस तरह रबी फसलों की बुवाई में 17.65 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुवाई क्षेत्र बढ़ने से फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार, दलहनी फसलों का क्षेत्र 3.74 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि चना की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आम जनता के लिए खुला रहेगा, भ्रमण का समय 11 बजे से 2 बजे तक

लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खुलेगा 26 जनवरी को प्रात: 11 से दोपहर 2 बजे तक कर सकेंगे भ्रमण भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोकभवन को तीन दिनों के लिए आम नागरिकों के भ्रमण हेतु खोला जा रहा है। नागरिकों के भ्रमण के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। आमजनों के लिए चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आमजन को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना तथा गणतंत्र दिवस के महत्व को और अधिक सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समय में लोकभवन का अवलोकन कर सकेंगे।  25 जनवरी और 27 जनवरी  2026 को लोकभवन अपरान्ह 2 बजे से सायं 8 बजे तक खुला रहेगा। वहीं 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस को लोकभवन भ्रमण प्रातः  11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही किया जा सकेगा। आम नागरिकों के लिए लोकभवन में प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था गेट क्रमांक- 1 से ही सुनिश्चित की गई है।  

दावोस में CM मोहन के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शुरू करेगा वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम-2026 में निवेश अभियान

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश एक बार फिर वैश्विक निवेश केंद्र वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 के मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। निवेश, उद्योग और रोजगार सृजन को राज्य की विकास नीति का केंद्र बनाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीते एक वर्ष में देश-विदेश में निरंतर निवेश संवाद किया है। अब जनवरी में दावोस दौरे के माध्यम से मध्यप्रदेश मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, रसायन उद्योग और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक उद्योग जगत से संवाद कर म.प्र. आमंत्रित किया जायेगा। इस वर्ष वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की थीम “A Spirit of Dialogue” रखी गई है, जो सहयोग और साझेदारी पर आधारित विकास मॉडल को रेखांकित करती है। इसी भावना के अनुरूप मध्यप्रदेश अपनी सहभागिता के साथ दावोस में निवेश-केंद्रित संवाद, नीति प्रस्तुतिकरण और रणनीतिक साझेदारियों पर फोकस करेगा। लगभग पांच वर्षों बाद राज्य सरकार की औपचारिक भागीदारी को वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की नई आर्थिक ऊर्जा और प्रशासनिक तत्परता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने निवेश नीतियों को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया है। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, त्वरित निर्णय प्रणाली और भूमि-आवंटन की सरल प्रक्रिया को दावोस में वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा। राज्य का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित करना है। दावोस में मध्यप्रदेश की सहभागिता के दौरान एमपीआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, पर्यटन विभाग और नीति सलाहकार सक्रिय रूप से वन-टू-वन मीटिंग्स, सेक्टोरल राउंडटेबल्स और कॉर्पोरेट सत्रों में भाग लेंगे। वैश्विक सीईओ और अध्यक्षों के साथ बैठकों में औद्योगिक विस्तार, निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन पर चर्चा होगी। मीडिया इंटरैक्शन के माध्यम से मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्राथमिकताओं और निवेश-अनुकूल वातावरण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। मध्यप्रदेश विशेष रूप से कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, बायोटेक-फार्मा-हेल्थकेयर, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, रसायन उद्योग, टेक्सटाइल एवं गारमेंट, रियल एस्टेट, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, होल्डिंग कंपनियों, शिक्षा और खेल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश संवाद करेगा। “लोकल टू ग्लोबल” रणनीति के तहत मध्यप्रदेश अपने संसाधनों और कुशल मानव-शक्ति को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ेगा। दावोस एजेंडे में ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में अडानी समूह के साथ मुरैना विद्युत वितरण से जुड़े एमओयू, अडानी डिफेंस के साथ रक्षा उत्पादन में सहयोग, स्विट्ज़रलैंड की शिवाग एजी को औद्योगिक भूमि आवंटन, डीपी वर्ल्ड (यूएई) के साथ स्ट्रेटेजिक लॉजिस्टिक्स हब और फ्रांस की सानोफी द्वारा भोपाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके साथ ही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सहयोग से मध्यप्रदेश में सेंटर फॉर फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन (C4IR) की स्थापना का प्रस्ताव भी इस दौरे का प्रमुख आकर्षण है। कृषि-प्रौद्योगिकी, फूड प्रोसेसिंग, जलवायु अनुकूलन और सतत विकास पर केंद्रित इस केंद्र को लेकर 19 जनवरी को एमपीआईडीसी और वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के बीच एमओयू हस्ताक्षर प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश की दावोस सहभागिता का केंद्र बिंदु राज्य के प्राथमिक फोकस सेक्टर्स को वैश्विक निवेश मानचित्र से जोड़ना है। कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, रसायन उद्योग, हेल्थकेयर, रियल एस्टेट और निर्यात उन्मुख उद्योगों में निवेश के अवसरों को रणनीतिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे निवेश को आकर्षित करना है जो तकनीक, कौशल विकास और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे। दावोस में यह सहभागिता मध्यप्रदेश को एक भरोसेमंद, नीति-स्थिर और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इंदौर का होलकर स्टेडियम: 20 साल में 7 मैचों में 7 जीत, न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया की अपराजेय फॉर्म

इंदौर  साल 2006 से लेकर 2023 के बीच इंदौर के होलकर स्टेड‍ियम में कुल 7 वनडे मुकाबले हुए हैं. अब एक और मुकाबला होना है, जो रव‍िवार (18 जनवरी 2026) को है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह मुकाबला 'ड‍िसाइडर वनडे' है. क्योंकि जो भी टीम जीती वो सीरीज अपने नाम करेगी. लेकिन इंदौर का यह मैदान भारतीय टीम के ल‍िए 20 सालों के दरम्यान सुपरलकी रहा है. वजह यह है कि भारतीय टीम कभी भी यहां कोई वनडे मुकाबला नहीं हारी है. यानी यहां टीम इंड‍िया का क‍िला अभेद्य है. कुल मिलाकर यहां हमारी टीम का राज चलता है. 3 वनडे मैचों की सीरीज में वडोदरा में भारतीय टीम 4 विकेट से जीती, इसके बाद राजकोट में न्यूजीलैंड की टीम ने 7 विकेट से जीत दर्ज की. अब सीरीज 1-1 से बराबर है. यानी अब अब सब कुछ रव‍िवार को तय हो जाएगा.  इत‍िहास के पन्ने खंगाले जाएं तो इंदौर का होलकर क्रिकेट स्टेडियम भारतीय क्रिकेट टीम के लिए हमेशा से लकी वेन्यू साबित हुआ है. यहां खेले गए वनडे मुकाबलों में भारत ने अब तक एक भी मैच नहीं हारा है. साल 2006 से लेकर 2023 तक यहां कुल 7 वनडे मैच खेले गए, और सभी में टीम इंडिया को जीत मिली. इस शानदार सिलसिले की शुरुआत 15 अप्रैल 2006 को इंग्लैंड के खिलाफ हुई, जब भारत ने 7 विकेट से मुकाबला अपने नाम किया. इसके बाद 2008 में इंग्लैंड को ही 54 रन से हराया गया. साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत ने 153 रन की बड़ी जीत दर्ज की, जो इस मैदान पर अब तक की सबसे बड़ी जीतों (रनों के ल‍िहाज) से एक है. 2015 में साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीम को भी भारत ने 22 रन से शिकस्त दी. 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 विकेट से जीत दर्ज की गई, जबकि 2023 में न्यूजीलैंड को 90 रन से हराकर भारतीय टीम ने अपनी दबदबा कायम रखा. इस मैदान पर सबसे हालिया मुकाबला भारतीय टीम ने 24 सितंबर 2023 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था, जिसमें भारत ने 99 रन से शानदार जीत हासिल की. इस मैच में भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों ने दमदार प्रदर्शन किया. भारत ने यहां 5 मुकाबले पहले बल्लेबाजी करते हुए तो 2 मुकाबले रनचेज करते हुए जीते हैं. यही वजह है कि इंदौर का यह मैदान टीम इंडिया के लिए एक “अटूट क‍िला” बन चुका है. इंदौर में हुए वनडे मुकाबलों में भारतीय टीम कप प्रदर्शन      24 सितंबर 2023 : भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 99 रन से हराया (ODI -4654)     24 जनवरी 2023 : भारत ने न्यूज़ीलैंड को 90 रन से हराया (ODI -4511)     24 सितंबर 2017 : भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से रौंदा (ODI -3914)     14 अक्टूबर 2015 : भारत ने साउथ अफ्रीका को 22 रन से हराया (ODI -3692)     8 दिसंबर 2011 : भारत ने वेस्टइंडीज को 153 रन से रौंदा (ODI -3223)     17 नवंबर 2008 : भारत ने इंग्लैंड को 54 रन से दी श‍िकस्त (ODI -2777)     15 अप्रैल 2006 : भारत ने इंग्लैंड को 7 विकेट से हराया (ODI -2362) इंदौर में वनडे में सबसे ज्यादा रन किसने बनाए?  इंदौर के होलकर स्टेड‍ियम में वनडे में सबसे ज्यादा रन वीरेंद्र सहवाग के नाम है. उन्होंने 2 मैचों में 220 रन बनाए हैं, इसमें उनका रिकॉर्ड 219 रन वाला दोहरा शतक भी शामिल हैं. मौजूदा वनडे कप्तान शुभमन गिल का बल्ला भी यहां गरजा है और उन्होंने 2 मैचों में 216 रन बनाए हैं, दोनों ही बार उनका शतक आया है. रोहित शर्मा ने यहां 5 मैचों की 5 पार‍ियों में 205 रन बनाए हैं, इसमें उनका एक शतक शामिल है. वहीं न्यूजीलैंड के डेवॉन कॉन्वे ने यहां एक मुकाबला खेला है, जिसमें उन्होंने 138 रन बनाए हैं.  श्रेयस अय्यर ने भी यहां एक मैच खेला है और शतक जड़ते हुए 105 रन बनाए हैं. विराट कोहली के आंकड़ें यहां चिंताजनक हैं, उन्होंने यहां 4 मुकाबलों में महज 99 रन बनाए हैं, ऐसे में वो इस रिकॉर्ड को सही करना चाहेंगे.  इंदौर के होलकर स्टेड‍ियम से जुड़े द‍िलचस्प आंकड़े  -एस श्रीसंत का सर्वश्रेष्ठ वनडे गेंदबाजी प्रदर्शन 6/55 यहीं आया था.  -इस मैदान पर एक पारी में सबसे बड़ा स्कोर 418/5 है. जो साल 2011 में भारत ने वेस्टइंडीज के ख‍िलाफ बनाया. यही भारत का वनडे में सर्वश्रेष्ठ टीम स्कोर है.  – इस मैदान पर किसी टीम का सबसे कम स्कोर 217 है, जो ऑस्ट्रेल‍िया ने साल 2023 में बनाया था.  भारत vs न्यूजीलैंड H2H कुल ODI मैच: 122      भारत ने जीते: 63     न्यूजीलैंड ने जीते: 51  बेनतीजा: 7 टाई: 1 भारत vs न्यूजीलैंड H2H (भारत में)  कुल ODI मैच: 42 भारत ने जीते: 32     न्यूजीलैंड ने जीते: 9     बेनतीजा: 1 भारत vs न्यूजीलैंड ODI सीरीज का शेड्यूल  11 जनवरी: पहला वनडे, वडोदरा (भारत 4 विकेट से जीता)  14 जनवरी: दूसरा वनडे, राजकोट (न्यूजीलैंड 7 विकेट से जीता) 18 जनवरी: तीसरा वनडे, इंदौर 

8वां वेतन आयोग: जानें, लेवल 1 से 18 तक कर्मचारियों की सैलरी में क्या बढ़ोतरी हो सकती है

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग की मंजरी मिलने के बाद कमर्चारी यह जानने की उत्‍सुक हैं कि उनकी सैलरी कितनी बढ़ जाएगी. हालांकि अभी तक 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी स्‍ट्रक्चर या सैलरी बढ़ोतरी के बारे में कोई अधिकार‍िक जानकारी सामने नहीं आई है, सिर्फ एक्‍सपर्ट्स कैलकुलेशन के माध्‍यम से अनुमान लगाया जा रहा है कि कि 8वां वेतन आयोग के तहत कितनी सैलरी बढ़ सकती है. आइए जानते हैं ग्रुप A, B, C और D लेवल के कर्मचारियों की कितनी सैलरी बढ़ सकती है .  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति इसे तय करेगी. इसे बाद केंद्र सरकार इसकी समीक्षा करेगी और यह पूरी प्रक्रिया 2027 की दूसरी छमाही तक पूरा होने की उम्‍मीद है.  कितनी रह सकता है फिटमेंट फैक्‍टर?  एक्‍सपर्ट्स की राय है कि 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्‍टर 1.70 से 2.86 के बीच रह सकता है और इसे सभी लेवल के कर्मचारियों पर एक समान तौर पर लागू किया जा सकता है. उनका कहना है कि समान फिटमेंट फैक्टर से सभी कर्मचारियों को बराबर लाभ मिलता है, लेकिन उच्च पदों पर रुपये में बढ़ोतरी अधिक होती है.  किसकी कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?  2.15 फिटमेंट फैक्टर पर सैलरी बढ़ोतरी      लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए ₹18,000 से ₹38,700 यानी कि कुल ₹20,700 की बढ़ोतरी हो सकती है.     लेवल 10 के कर्मचारियों के लिए ₹56,100 से  ₹1,20,615 यानी कि ₹64,515 की बढ़ोतरी हो सकती है.      लेवल 18 के कर्मचारियों के लिए ₹2,50,000 से ₹5,37,500  यानी कि ₹2,87,500 की बढ़ोतरी हो सकती है.  2.86 फिटमेंट फैक्टर पर संभावित सैलरी      लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए ₹18,000 से ₹51,480 यानी ₹33,480 का इजाफा होगा.      लेवल 3 के कर्मचारियों के लिए ₹21,700 से बढ़कर ₹62,062 यानी ₹40,362 का इजाफा होगा.      लेवल 6 के कर्मचारियों के लिए ₹35,400 से बढ़कर  ₹1,01,244 यानी ₹65,844 का इजाफा होगा.      लेवल 10 के कर्मचारियों के लिए ₹65,844 से बढ़कर ₹1,60,446 यानी ₹1,04,346 का इजाफा होगा.  1.7 फिटमेंट फैक्टर पर निचले कर्मचारियों की सैलरी     लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹30,600      लेवल 3 के कर्मचारियों के लिए सैलरी ₹21,700 से बढ़कर ₹36,890     लेवल 6 के कर्मचारियों के लिए सैलरी ₹35,400 से बढ़कर ₹60,000  

मध्य प्रदेश में ओवररेटिंग और कर चोरी पर शिकंजा, शराब की हर बोतल पर लगेगा स्मार्ट होलोग्राम

भोपाल  मध्य प्रदेश में शराब के कारोबार को माफिया के चंगुल और अनियमितताओं से मुक्त करने के लिए आबकारी नीति में डिजिटल का समावेश कर ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली को अनिवार्य कर रहे है। इसके तहत शराब की हर बोतल पर एक ऐसा स्मार्ट यूनिक होलोग्राम लगाया जाएगा, जिससे बोतल की डिस्टिलरी से निकलने से लेकर ग्राहक के हाथ में पहुंचने तक की पूरी यात्रा को ट्रैक (Liqour Bottle Tracking) किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से न केवल नकली शराब और कर चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि सालों से जारी 'ओवररेटिंग' के खेल को भी खत्म किया जा सकेगा। हालांकि क्यूआर कोड और ट्रैकिंग सिस्टम की बातें पिछले साल भी हुई थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर सिस्टम वैसा ही पुराना और मैनुअल बना रहा, जिसका फायदा उठाकर ठेकेदार मनमानी करते रहे। डिस्टिलरी से दुकान तक काम करेगा सिस्टम नई व्यवस्था के तहत वितरण, भंडारण और बिरी की पूरी प्रक्रिया को एक ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। हर बोतल पर लगा होलोग्राम (Smart Hologram), क्यूआर कोड स्कैन करते ही विभाग के सर्वर पर डेटा फ्लैश होगा कि शराब किस डिस्टिलरी में बनी, किस वेयरहाउस से सप्लाई हुई. और किस दुकान से किस समय बेची गई। 18 हजार करोड़ के राजस्व पर नजर प्रदेश में वर्तमान में करीब 3,500 शराब दुकानें संचालित हैं। विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में 18,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सफल रही, तो राजस्व में भारी उछाल आएगा और लीकेज पूरी तरह बंद हो जाएगा। इनका पालन सख्ती से नहीं आबकारी विभाग का पिछला रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी कहता है। वर्ष 2025-26 की नीति में हर दुकान पर पॉइंट ऑफ सेल मशीन अनिवार्य की गई थी ताकि हर बोतल का बिल कटे और डिजिटल रिकॉर्ड रहे। लेकिन एक साल बाद भी यह नियम कागजों से बाहर नहीं निकल सका।  अवैध बिक्री पर लगेगी रोक आबकारी विभाग का फोकस अब पूरी तरह पारदर्शिता पर है। नई व्यवस्था में हर बोतल पर यूनिक होलोग्राम रहेगा, जिससे उसकी पूरी मूवमेंट ट्रैक होगी। इससे अवैध बिक्री, ओवररेटिंग और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण होगा। उड़नदस्तों को तकनीकी रूप से मजबूत किया जा रहा है। – संदीप शर्मा, उपायुक्त, संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी, आबकारी विभाग