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एक एजेंसी के भरोसे जबलपुर संभाग के हजारों वाहनों की फिटनेस का जिम्मा

जबलपुर. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के हालिया आदेश ने संभाग भर के वाहन संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। नए निर्देशों के तहत अब व्यावसायिक व सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर नहीं, बल्कि संभागीय स्तर पर की जाएगी। इसके तहत जबलपुर संभाग के जबलपुर सहित नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के वाहनों को फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पहुंचना होगा। परेशानी की बात ये है कि शहर में फिलहाल एक ही एटीएस कार्यशील है ऐसे में संभागीय स्तर पर हजारों वाहनों की फिटनेस जांच करने में व्यावहारिक परेशानियां आना तय है। वाहन चालकों का कहना है कि 200 से 210 किलोमीटर दूर जबलपुर तक वाहन लाना बेहद खर्चीला होगा। फिटनेस प्रमाण पत्र की निर्धारित फीस भले ही करीब एक हजार रुपये हो, लेकिन आवागमन, ईंधन, चालक-खलासी, ठहराव और अन्य खर्चों को जोड़ दिया जाए तो कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। अवैध वसूली बढ़ने का डर परिवहन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि सीमित केंद्र और अधिक दबाव की स्थिति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। पहले भी जबलपुर एटीएस में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में नए आदेश से अवैध वसूली और बिचौलियों की भूमिका बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिला स्तर पर प्रतिमाह औसतन 200 वाहनों की फिटनेस जांच होती थी, जिसमें प्रतिदिन 10 से 12 वाहनों को प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे। नए आदेश के बाद जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी से मिलाकर हर माह करीब 1600 से अधिक वाहन जबलपुर पहुंच सकते हैं। जबकि निलंबित एटीएस कब चालू होगा, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वर्तमान में जो क्रियाशील एटीएस में हर दिन 35 से ज्यादा वाहन फिटनेस के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकारियों का पक्ष इस संबंध में जबलपुर आरटीओ संतोष पाल का कहना है कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से नया आदेश जारी हुआ है। संभागीय स्तर पर पर निर्देश जारी हुए है। वाहन मालिक अब फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए जबलपुर आएंगे। ये समस्या भी ऑटो से लेकर कार, ट्रक सभी निजी और कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जारी होना है। ऐसे में छिंदवाड़ा या बालाघाट जिले से ऑटो चालक को जबलपुर आना बेहद खर्चीला साबित होगा। एक पूरा दिन वह जबलपुर आने के लिए हजारों रुपये का डीजल फूंकेगा। इसके बाद एक दिन के लिए शहर से बाहर जाने के लिए परमिट बनवाएंगा। इसके बाद यदि एक दिन में जांच पूरी नहीं हुई तो यहां रूकना पड़ेगा। ऐसे में फिटनेस प्रमाणीकरण करना काफी महंगा साबित होगा। जिला परिवहन विभाग को फिटनेस से हटाया गया मोर्थ द्वारा प्रदेश के 42 जिलों के लिए जारी पत्र में जिला परिवहन कार्यालयों को व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक अब फिटनेस जांच केवल नजदीकी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में ही होगी। इसके लिए वाहन मालिकों को ऑनलाइन बुकिंग करानी अनिवार्य होगी। जिला परिवहन विभाग अब फिटनेस से संबंधित कोई भी कार्य नहीं करेगा। शहर में फिलहाल फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए केवल कटंगी रोड़ पर स्थित एक निजी एजेंसियां कार्यशील हैं। जानकारों का कहना है कि जबलपुर संभाग के सभी जिलों के वाहन यदि एक ही केंद्र पर जांच के लिए आएंगे तो क्षमता से कहीं अधिक दबाव बनेगा। इससे जांच में देरी, लंबी प्रतीक्षा सूची और अव्यवस्था की आशंका है। पहले से बंद एटीएस फिर भी निर्भरता सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जबलपुर एटीएस पर पूरे संभाग के वाहनों की निर्भरता तय की गई है, वह स्वयं अनियमितताओं के चलते सस्पेंड है। कुछ समय पहले परिवहन विभाग ने गड़बड़ियों के आरोपों के बाद जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।

महाकाल मंदिर हुआ डिजिटल, दर्शन, भस्म आरती और दान सभी सेवाएं अब एक वेबसाइट पर उपलब्ध

उज्जैन  देशभर में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर भी इससे अछूता नहीं है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भीड़, लंबी कतारें, जानकारी की कमी और बुकिंग को लेकर भ्रम ये सभी समस्याएं लंबे समय से श्रद्धालुओं के सामने रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। मंदिर की नई आधिकारिक वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in लॉन्च कर दी गई है। इस एक प्लेटफॉर्म के जरिए अब दर्शन, पूजन, भस्म आरती, अतिथि निवास बुकिंग और ऑनलाइन दान जैसी सभी सेवाएं उपलब्ध होंगी। यह पहल न सिर्फ श्रद्धालुओं के अनुभव को आसान बनाएगी, बल्कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ाएगी। नई सरकारी वेबसाइट से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी महाकाल मंदिर की इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि श्रद्धालुओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म या दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक ही वेबसाइट पर सभी जरूरी सेवाएं एक जगह मिलेंगी। इस वेबसाइट पर होम पेज पर जाते ही श्रद्धालुओं को साफ तौर पर ये विकल्प दिखाई देंगे शीघ्र दर्शन, भस्म आरती बुकिंग, विशेष पूजन, अतिथि निवास बुकिंग, ऑनलाइन दान, सरकारी डोमेन gov.in पर बनी यह वेबसाइट साइबर सुरक्षा के लिहाज से भी मजबूत मानी जा रही है। इससे फर्जी वेबसाइट और ठगी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी। शीघ्र दर्शन बुकिंग का आसान प्रोसेस महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन की मांग सबसे ज्यादा रहती है। नई वेबसाइट पर इसका प्रोसेस बेहद सरल रखा गया है, ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। शीघ्र दर्शन बुक करने के लिए श्रद्धालु को सबसे पहले वेबसाइट के होम पेज पर जाना होगा। वहां शीघ्र दर्शन के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद मोबाइल नंबर दर्ज कर सबमिट करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी को वेरीफाई करने के बाद श्रद्धालु अपनी जरूरी जानकारी भरकर उपलब्ध स्लॉट में से अपना समय चुन सकते हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही बुकिंग कन्फर्म हो जाती है। श्रद्धालु को न तो लाइन में लगने की चिंता रहेगी और न ही किसी तरह की अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। भस्म आरती और पूजन बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसे देखने और इसमें शामिल होने की इच्छा हर श्रद्धालु की होती है, लेकिन सीमित संख्या के कारण यह हमेशा आसान नहीं होता। नई वेबसाइट के जरिए भस्म आरती बुकिंग को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बना दिया गया है। श्रद्धालु अब पहले से उपलब्ध तारीख और स्लॉट देखकर बुकिंग कर सकते हैं। इसी तरह विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी भी वेबसाइट पर साफ शब्दों में दी गई है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि मंदिर प्रशासन को भी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी। भक्त निवास परियोजना: 672 करोड़ की बड़ी योजना महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की सुविधा हमेशा एक बड़ा सवाल रही है। इसे ध्यान में रखते हुए श्री महाकालेश्वर भक्त निवास परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यह परियोजना लगभग 672 करोड़ रुपये की लागत से 18.65 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है। इस विशाल परियोजना में करीब 3,000 कमरे, भोजनालय, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। नई वेबसाइट के जरिए श्रद्धालु न सिर्फ अतिथि निवास की बुकिंग कर सकेंगे, बल्कि इस परियोजना के लिए दान भी दे सकेंगे। जो लोग कमरों के निर्माण या अन्य सुविधाओं में सहयोग करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह पोर्टल एक आसान माध्यम बनेगा। दान और CSR गतिविधियों के लिए पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म महाकाल मंदिर में दान देने की परंपरा सदियों पुरानी है। अब इसे डिजिटल रूप देकर और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालु ऑनलाइन दान कर सकेंगे और यह जान सकेंगे कि उनका योगदान किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा। CSR गतिविधियों के लिए भी यह पोर्टल एक नया और भरोसेमंद डिजिटल चैनल साबित होगा। इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी और दानदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से हर रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की नगर पंचायत भटगांव के विकास के लिए एक करोड़ रुपए की घोषणा

रायपुर कर्मा महोत्सव को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोक पर्वों को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कर्मा पर्व प्रकृति से जुड़ाव, आपसी भाईचारा और सामूहिक आनंद का उत्सव है। उक्त आशय के विचार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सूरजपुर जिले के चुनगुड़ी में आयोजित कर्मा महोत्सव में व्यक्त किए।  मुख्यमंत्री ने इस मौके पर 172.51 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने चुनगुड़ी के स्कूल मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने तथा नगर पंचायत भटगांव के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की घोषणा की। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और सांसद चिंतामणि महाराज ने भी सम्बोधित किया। परंपरा, संस्कृति और उल्लास से परिपूर्ण कर्मा महोत्सव में मांदर की थाप और घुंघरुओं की झंकार के बीच पूरा क्षेत्र कर्मा नृत्य की लय में थिरक उठा। सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया एवं मनेंद्रगढ़ जिलों से आए 33 कर्मा दलों के लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में कर्मा नृत्य प्रस्तुत कर सबको लोक संस्कृति के रंगों से भर दिया।  मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगायी गई प्रदर्शनी के स्टॉलों का निरीक्षण कर नाव-जाल एवं आइस बॉक्स, आयुष्मान कार्ड, छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण वितरण और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित छह रेडी-टू-ईट ईकाइयों का शुभारंभ किया और पोषण वितरण कार्य से जुड़ी महिलाओं को शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। इसके अलावा महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मुद्रा लोन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत बीमा क्लेम तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खुशियों की चाबी प्रदान की। कार्यक्रम में विधायक भूलन सिंह मरावी, वन विकास निगम के अध्यक्ष राम सेवक पैकरा, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष रेखा राजलाल रजवाड़े सहित अनेक जनप्रतिनिधि सहित समस्त जिलास्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

SEBI ने 12 लोगों को 5 साल के लिए बैन किया, 90 लाख का जुर्माना, यह थे उनके कृत्य

मुंबई  भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े फ्रंट-रनिंग गिरोह पर एक्‍शन लेते हुए 12 संस्थाओं को पांच साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. शुक्रवार को अपने आदेश में कैपिटल मार्केट नियामक ने नोटिस प्राप्‍त करने वालों पर 90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और 1.07 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के अवैध लाभ को वापस करने का भी आदेश दिया है.  यह मामला मंगल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलपी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर परेश एन भगत नामक एक बड़े कस्‍टमर्स से संबंधित डील में एडवांस पेमेंट लेने से संबंधित है.  एमकेएफएस में कार्यरत और भगत के लिए लेन-देन संभालने वाले डीलर आशीष एस. पारेख और राजेश जोशी थे. सेबी की जांच के अनुसार, इन डीलर्स ने महत्वपूर्ण आगामी ऑर्डरों से संबंधित गैर-सार्वजनिक जानकारी शेयर करके अपने पद का दुरुपयोग किया.  कैसे पैसा बनाती थीं ये संस्‍थाएं?  यह गोपनीय जानकारी परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं समेत कुछ लोगों के एक नेटवर्क तक लीक हो गई. सेबी ने पाया कि इस जानकारी की मदद से इन लोगों ने ट्रेडिंग की और अवैध पैसा बनाया. सेबी  ने कहा कि ये संस्‍थाएं समन्वित तरीके से ट्रेड करती थीं. आमतौर पर बॉय और सेल या सेल-सेल-बॉय पैटर्न पर काम करती थीं. वे बड़े ग्राहकों के बड़े सौदों से ठीक पहले अपने ऑर्डर देती थीं और थोक ऑर्डरों के कारण होने वाले प्राइस में उतार-चढ़ाव से लाभ कमाती थीं.  धोखाधड़ी का काम  SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वर्शनी ने अपने आदेश में क‍हा कि नोटिस प्राप्तकर्ताओं ने ऐसी जानकारी का उपयोग किया जो आम जनता के पास उपलब्ध नहीं थी, और इसका लाभ उठाकर उन्होंने अवैध रूप से पैसा कमाया. यह काम धोखाधड़ी का है. नियामक ने SEBI अधिनियम की धारा 15HA के तहत कठोर जुर्माना लगाया है.  कितना का लगा जुर्माना आशीष एस पारेख और राजेश जोशी नामक प्राथमिक डीलरों पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. नागेंद्र एस. दुबे और चिराग अतुल पिथड़िया पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिन्होंने बिचौलियों और डीलरों के रूप में काम करते हुए अग्रिम लेन-देन को आसान बनाया. 5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना, दीपा आशीष पारेख, कश्मीरा जोशी और इस योजना के लिए उपयोग किए गए विभिन्न हफ़ाइल परिवार खातों समेत आठ अन्य संस्थाओं पर भी लगाया गया है.  ब्‍याज के साथ पैसा वापस करने का भी आदेश प्रतिबंध और जुर्माने के अलावा, संस्थाओं को अवैध रूप से कमाए गए पैसे 1,07,61,609 रुपये की राशि, साथ ही लाभ अर्जित होने के समय से गणना किए गए 12% ब्याज को वापस करने का आदेश दिया गया है. नियामक ने इन बकाया राशियों के निपटान के लिए पिछले अंतरिम आदेश के तहत एस्क्रो खातों में पहले से ही जब्त किए गए लगभग 1.25 करोड़ रुपये के उपयोग की अनुमति दी है.  5 साल के लिए शेयर बाजार से बैन इस आदेश के तहत आशीष पारेख और नागेंद्र दुबे समेत दस संस्थाओं को 26 दिसंबर, 2022 के अंतरिम आदेश की तारीख से शुरू होकर पांच साल के लिए बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. दो अन्य कश्मीरा जोशी और राजेश जोशी पर इस अंतिम आदेश की तारीख से पांच साल का नया प्रतिबंध लगाया गया है. सुषमा नागेंद्र दुबे के खिलाफ कार्यवाही उनकी मृत्यु के बाद समाप्त कर दी गई, हालांकि धन वापसी की देनदारी उनके कानूनी वारिसों को भेजा गया है. 

यूपी में न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कार्य पूरा होने में देर नहीं लगतीः मुख्यमंत्री

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने चंदौली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन छह जिलों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) के एकीकृत न्यायालय परिसर का किया गया शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्तः सरकार के पास पैसे की कमी नहीं, पूरा सहयोग भी मिलेगा अब टूटे चैंबर नहीं, अधिवक्ताओं के लिए हाईराइज बिल्डिंग में होगी चैंबर की व्यवस्थाः मुख्यमंत्री चंदौली देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शनिवार को चंदौली में छह जिलों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) के एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। सीएम योगी ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न प्रदान किया और सभी न्यायमूर्तियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है कि न्यायपालिका भी उतनी ही सशक्त हो। आम आदमी को जितनी सहजता-सरलता से न्याय प्राप्त हो, उतना ही अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर होना भी आवश्यक है। यूपी सरकार के पास न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कोई भी कार्य आते हैं तो उसे पूरा होने में देर नहीं लगती। हमारा मानना है कि सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है तो न्यायिक सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और यूपी इसे लेकर बेहतरीन दिशा में आगे बढ़ चुका है।  न्यायपालिका के इतिहास के नए पृष्ठ का हो रहा सृजन मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी की दृष्टि से आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज यहां न्यायपालिका के इतिहास के नए पृष्ठ का सृजन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पुरानी बातों का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने अपनी एक यात्रा के दौरान उल्लेख किया था कि न्याय सहजता के साथ प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध हो सके, इसके लिए आवश्यक है कि कुछ ऐसे मॉडल बनने चाहिए, जो इंटीग्रेटेड (एक छत के नीचे) हों। मुख्य न्यायाधीश की प्रेरणा से यूपी के छह जनपदों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) में यह सुविधा उपलब्ध हो रही है। अगले कुछ महीने में चार अन्य जनपदों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। भारत के न्यायिक इतिहास में यह पृष्ठ नए स्वर्ण अक्षर के रूप में जुड़ेगा। यूपी में इसकी शुरुआत मुख्य न्यायमूर्ति के करकमलों से हो रही है।  2014 के बाद से इंफ्रास्ट्रक्चर को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में बढ़ाए गए कदम  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में आने के बाद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' व 'ईज ऑफ लिविंग' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तमाम सुधार किए। इंफ्रास्ट्रक्चर को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। पीएम से हमें भी प्रेरणा मिली। प्रयागराज के एक कार्यक्रम में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि कोर्ट कॉम्प्लेक्स भी इंटीग्रेटेड होना चाहिए, इस पर हम लोगों ने यूपी के अंदर कार्य प्रारंभ किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में बिंदल जी ने सकारात्मक सहयोग किया और यूपी सरकार ने एक साथ 10 जनपदों में (जहां स्वयं के जनपद न्यायालय नहीं थे) इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए स्वीकृति दी।  अब टूटे चैंबर नहीं, अधिवक्ताओं के लिए हाईराइज बिल्डिंग में होगी चैंबर की व्यवस्था सीएम ने कहा कि पहले चरण में चंदौली समेत छह जनपदों के लिए धनराशि अवमुक्त हो गई है। डिजाइन अप्रूव होने के साथ ही सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। एलएंडटी जैसी विश्व विख्यात संस्थाओं के द्वारा अब निर्माण कार्य होगा। यहां एक ही छत के नीचे कोर्ट कॉम्प्लेक्स, अधिवक्ताओं के लिए अच्छे चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास, कैंटीन, पार्किंग, खेल आदि की सुविधाएं रहेंगी। सीएम ने कहा कि न्याय के लिए जूझने वाले अधिवक्ता के चैंबर में जब वादकारी जाता था तो उसे सूर्य के दर्शन होते थे, लेकिन अब टूटे चैंबर्स नहीं, बल्कि हाईराइज बिल्डिंग में चैंबर की व्यवस्था होगी।   सरकार के पास पैसे की कमी नहीं, पूरा सहयोग भी मिलेगा सीएम योगी ने कहा कि हम चाहते हैं कि हर जनपद में ऐसे कोर्ट कॉम्प्लेक्स हों। अभी छह जनपदों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर रहे हैं। सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है, आपको सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। चंदौली के जनप्रतिनिधि व अधिवक्ता लगातार आंदोलन करते थे, मैंने बार एसोसिएशन को लखनऊ बुलाकर कहा कि यह स्वीकृत हो गया है। आप न्यायिक कार्य में योगदान दीजिए। अब उच्च न्यायालय के साथ मिलकर यह कार्य शीघ्र आगे बढ़ेगा।  शिलान्यास व भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

BMC चुनाव में हार के बावजूद उद्धव ठाकरे ने कैसे बचाई अपनी साख, 30 साल बाद ढहा ठाकरे का गढ़

मुंबई मुंबई की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीएमसी मेंं अब ठाकरे की बादशाहत खत्म हो गई. भाजपा ने अपने 25 साल का वनवास खत्म कर बीएमसी चुनाव में विजय पताका लहरा दिया. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. देवेंद्र फडणवीस की रणनीति के आगे उद्धव ठाकरे पानी भरते नजर आए. महायुति ने बीएमसी की कुल 227 सीटों में से 118 सीटें जीतीं. यह बीएमसी में बहुमत के 114 के आंकड़े से ज्यादा है. BJP ने अकेले 89 सीटें हासिल कीं, जबकि शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. यह जीत BJP के लिए बड़ी कामयाबी है, क्योंकि उन्होंने मुंबई की सबसे अमीर निकाय पर कब्जा कर लिया, जहां सालाना बजट हजारों करोड़ का होता है. मगर उद्धव ठाकरे का प्रदर्शन भी उतना बुरा नहीं है, जितना शुरू में लगा था. यह सच है कि इस चुनाव की कहानी उद्धव ठाकरे के लिए दुखद है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बीएमसी में 65 सीटों से संतोष करना पड़ा. उद्धव की शिवसेना को 2017 में 84 सीटें मिली थीं. उद्धव ठाकरे ने इस चुनाव में अपने भाई राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाया था. हालांकि, उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन का उतना फायदा नहीं मिला, क्योंकि मनसे ने महज 6 सीटें जीतीं. इस तरह उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन महज 71 सीटों पर समिट गया. हालांकि, उद्धव ठाकरे चाहते तो यह कहानी कुछ और हो सकती थी. अगर वह विधानसभा वाली रणनीति ही अपनाते तो शायद नतीजे कुछ और हो सकते थे. हार में भी उद्धव ने कैसे बचाई साख मराठी अस्मिता और राज-उद्धव की जोड़ी का क्या रहा असर? इस चुनाव में ठाकरे भाइयों के गठबंधन ने ‘मराठी अस्मिता’ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. 1980 के दशक के बाद यह पहली बार था जब ठाकरे की सेना केवल मराठी मानूस के नाम पर लड़ी. भाजपा ने इस काट के लिए एकनाथ शिंदे को साथ रखा, जिनके पास शिवसेना का मूल चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ था. राज ठाकरे की मनसे भले ही खुद ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने उद्धव गुट के साथ मिलकर जमीन पर एक मजबूत चुनावी विमर्श खड़ा किया. इसने भाजपा को मुंबई में पूर्ण बहुमत से रोक दिया. बीएमसी चुनाव के नतीजों से भविष्य के लिए क्या हैं बड़े सबक? इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब महाराष्ट्र में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में है. लेकिन मुंबई जीतने के लिए उसे अभी भी क्षेत्रीय सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी. एकनाथ शिंदे की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है, क्योंकि भाजपा उनके बिना बीएमसी का मेयर नहीं बना सकती. वहीं, विपक्ष के लिए यह संदेश है कि केवल भावनात्मक मुद्दों से काम नहीं चलेगा. जनता को विकास का ठोस मॉडल चाहिए. उद्धव से हो गई एक चूक अब सवाल है कि आखिर उद्धव ठाकरे से कौन सी चूक हो गई, जिसने बीएमसी की गद्दी छीन ली? अगर उद्धव ठाकरे वह चूक नहीं करते तो क्या उनकी बादशाहत कायम रहती? अगर मौजूदा रिजल्ट को देखेंगे तो यह लगेगा कि उद्धव ठाकरे ही नहीं, कांग्रेस से भी चूक हुई है. जी हां, अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ गठबंधन करते तो नतीजे अलग हो सकते थे. कांग्रेस ने इस चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया और 24 सीटें जीतीं. अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस को मनाने में कामयाब रहते और एमवीए यानी महा विकास अघाड़ी को फिर से एकजुट करते, तो शायद वोटों का बंटवारा कम होता और बीएमसी में सीटें ज्यादा मिल सकती थीं.   डेटा से समझिए कैसे बदल सकता था खेल आइए बीएमसी चुनाव 2026 के फाइनल रिजल्ट्स के डेटा से इसे समझते हैं. बीएमसी कुल वोटों की बात करें तो भाजपा को 1,179,273 वोट मिले, जो 45.22% हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 717,736 वोट (27.52%) और कांग्रेस को 242,646 वोट (4.44 फीसदी) मिले. अगर उद्धव ठाकरे और कांग्रेस साथ होते तो उनके वोट कुल 960,382 हो जाते, जो भाजपा के करीब पहुंचते. नतीजों से पता चलता है कि कई वार्डों में जहां महायुति जीती, वहां उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वोट अलग-अलग पड़ने से फायदा महायुति को हुआ. अगर उद्धव ठाकरे अपने भाई राज ठाकरे के साथ भी कांग्रेस को मिला लेते तो भी स्थिति मौजूदा से बेहतर हो सकती थी. बीएमसी चुनाव रिजल्ट में सीटों की संख्या से भी इसे समझ सकते हैं.     भाजपा-89     शिवसेना (उद्धव)-65     शिवसेना (शिंदे)-29     कांग्रेस-24     मनसे-6     एनसीपी (अजित)-3     एआईएमआईएम-8 तो बदल सकती थी हार-जीत की तस्वीर इसे एक उदाहरण से भी समझ सकते हैं. मुंबई में कांग्रेस हो या उद्धव की शिवसेना, सबके दबदबा वाले अलग-अलग जोन-वार्ड रहे हैं. अंधेरी ईस्ट और गोरेगांव जैसे इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा. यहां पर उद्धव के उम्मीदवारों को हार मिली क्योंकि वोट बंट गए. अगर गठबंधन होता तो शायद तस्वीर कुछ और होती और हो सकता था कि 20-30 अतिरिक्त सीटें मिल जातीं. साल 2019 के चुनावों में एमवीए ने साथ लड़ा तो बेहतर प्रदर्शन दिखा था. मगर अब टूटने से सब कमजोर हो गए. उद्धव ठाकरे ने मनसे के साथ गठबंधन करके मराठी वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की, क्योंकि राज ठाकरे मराठी अस्मिता की बात करते हैं. मगर उद्धव को इससे फायदा नहीं हुआ, कारण कि मनसे का वोट शेयर केवल 5% के आसपास रहा और उसे केवल 6 सीटें मिलीं. वहीं, कांग्रेस के 24 सीटें और 4.44 फीसदी वोट उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा मौका थे. अगर वे साथ होते तो बीएमसी चुनाव कुल सीटें उद्धव ठाकरे की 65 + कांग्रेस की 24 + मनसे की 6 से ज्यादा होतीं, क्योंकि वोट ट्रांसफर से क्लोज फाइट वाले 40-50 वार्डों में जीत मिल सकती थी. बीएमसी चुनाव परिणाम: उद्धव ठाकरे को मनसे से गठबंधन का फायता नहीं मिला. उद्धव के साथ कांग्रेस की भी गलती इसलिए उद्धव ठाकरे की गलती बस यही है कि वे कांग्रेस को मनाने में नाकाम रहे. हालांकि, फैक्ट यह है कि कांग्रेस ने ही पहले एकला चलो रे नीति का ऐलान किया था. कांग्रेस की भी यह … Read more

एलन मस्क का बड़ा कदम: धोखाधड़ी के आरोप में ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट से 134 अरब डॉलर हर्जाना

नई दिल्ली   टेस्ला के सीईओ और एआई कंपनी एक्सएआई के फाउंडर एलन मस्क ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया है। मस्क ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने गैर-लाभकारी उद्देश्य को छोड़ दिया और माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी करके उनके साथ धोखा किया। एलन मस्क ने इस मामले में 79 अरब डॉलर से लेकर 134 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग की है। मस्क के वकील ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में इस हर्जाने की जानकारी दी। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब एक संघीय न्यायाधीश ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें वे अप्रैल के अंत में होने वाले जूरी ट्रायल से बचना चाहते थे। यह मुकदमा अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के ऑकलैंड शहर में चलेगा। अदालत में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, मस्क ने साल 2015 में ओपनएआई की स्थापना में मदद की थी और उस समय 38 लाख डॉलर की शुरुआती राशि दी थी। मस्क का कहना है कि आज ओपनएआई की कीमत करीब 500 अरब डॉलर हो चुकी है और उन्हें इस मूल्य का हिस्सा मिलना चाहिए। मस्क के वकील स्टीवन मोलो ने कहा कि जैसे किसी स्टार्टअप में शुरुआती निवेश करने वाला व्यक्ति बाद में बहुत बड़ा मुनाफा कमा सकता है, उसी तरह ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने जो गलत फायदा कमाया है, उस पर अब एलन मस्क का भी हक बनता है। एलन मस्क ने साल 2018 में ओपनएआई के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी शुरू की। साल 2024 में उन्होंने ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की। मस्क का आरोप है कि सैम ऑल्टमैन ने ओपनएआई को गैर-लाभकारी संस्था से मुनाफे वाली कंपनी में बदलने की योजना बनाई, जो गलत है। हालांकि, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने एलन मस्क के सभी आरोपों को गलत बताया है। ओपनएआई ने अपने बयान में कहा कि एलन मस्क का मुकदमा बेबुनियाद है और यह सिर्फ कंपनी को परेशान करने की कोशिश है। कंपनी ने कहा कि वह अदालत में सच साबित करने के लिए तैयार है। ओपनएआई ने निवेशकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, एलन मस्क इस तरह के चौंकाने वाले दावे करते रहेंगे। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। चैटजीपीटी निर्माता ओपनएआई ने अक्टूबर में अपनी कंपनी की संरचना में बदलाव की घोषणा की थी। इसके तहत माइक्रोसॉफ्ट को कंपनी में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई, लेकिन गैर-लाभकारी संस्था का नियंत्रण अभी भी बना रहेगा। सैम ऑल्टमैन ने एलन मस्क के मुकदमे को कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बताया और कहा कि इसका मकसद सिर्फ एक प्रतिस्पर्धी कंपनी की रफ्तार को धीमा करना है। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई ने गलत तरीके से 65.50 अरब से 109.43 अरब डॉलर तक का फायदा कमाया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट को 13.30 अरब से 25.06 अरब डॉलर तक का लाभ हुआ। एलन मस्क ने यह भी कहा है कि वे सिर्फ नुकसान की भरपाई ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त जुर्माने की मांग भी करेंगे।

कानपुर में खेती के साथ मोती उत्पादन, एक सीप से ₹200 तक का लाभ, 50% सब्सिडी का फायदा

कानपुर  कानपुर के किसानों के लिए नीली क्रांति अब एक नया मोड़ ले रही है। मत्स्य विभाग ने पारंपरिक मछली पालन को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए 'मोती की खेती' (Pearl Farming) को बढ़ावा देने की अनूठी पहल शुरू की है। अब किसान एक ही तालाब में मछलियों के साथ-साथ सीप पालकर लाखों की अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। एक तालाब, दोहरा मुनाफा कानपुर के शंभुआ गांव के किसान देवेंद्र वर्मा ने इस दिशा में मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने तालाब में मछली और सीप पालन का एकीकृत मॉडल अपनाया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अलग से किसी बड़े संसाधन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। लागत और कमाई मत्स्य विभाग के अनुसार, मोती उत्पादन मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में होता है: हाफ ब्राउन, डिजाइनर और राउंड मोती। कानपुर में फिलहाल डिजाइनर मोतियों पर फोकस किया जा रहा है जिनकी बाजार में भारी मांग है।     उत्पादन क्षमता: एक सीप से औसतन 3 मोती तैयार होते हैं।     अनुमानित आय: एक सीप से किसान लगभग 200 रुपये तक कमा सकते हैं।     समय सीमा: सीप के भीतर मोती तैयार होने की प्रक्रिया में लगभग 18 महीने का समय लगता है। 50% सरकारी मदद किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार इस प्रोजेक्ट पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है।     उदाहरण: यदि कोई किसान 10 लाख रुपये का प्रोजेक्ट शुरू करता है, जिसमें लगभग 15 हजार सीप डाले जाएंगे, तो उसे सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।     नोडल एजेंसी: उत्तर प्रदेश में 'मणी एग्रो' को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के सीईओ डॉ. अय्यूब के मुताबिक, कानपुर से अब तक 9 किसानों ने इस अनुदान के लिए आवेदन किया है। डिजाइनर मोतियों का बढ़ता बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि राउंड मोती की तुलना में डिजाइनर मोतियों को तैयार करना थोड़ा आसान है और आभूषण उद्योग में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। एक सीप की खरीद लागत लगभग 62.14 रुपये आती है, जबकि तैयार होने के बाद इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है। बुंदेलखंड में मिली सफलता के बाद अब कानपुर मंडल के किसानों के लिए यह 'श्वेत क्रांति' आमदनी दोगुनी करने का सबसे ठोस जरिया साबित होने वाली है।     विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। आने वाले समय में और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है, ताकि मोती उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके- सुनील कुमार, मत्स्य निरीक्षक।  

मंदिरों को तोड़ने का सफेद झूठ फैला रही है कांग्रेस: मुख्यमंत्री योगी

काशी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेसवार्ता निशाने पर कांग्रेस, सीएम बोले: मंदिरों को तोड़ने के एआई जेनरेटेड वीडियो दिखाकर फैलाया जा रहा है झूठ कहा, कांग्रेस ने कभी नहीं किया विरासत का सम्मान, विकास में भी बन रही है बाधा पौराणिक महत्व, धार्मिक प्रक्रिया को छेड़े बिना किया जाएगा मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास काशी "जब काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो रहा था, तब भी कुछ लोगों ने साजिशें रची थीं। यहां तक कि जिन वर्कशॉप में मूर्तियां बनती हैं, वहां से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष लाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए और सफेद झूठ फैलाया गया कि मंदिर तोड़े जा रहे हैं।" कांग्रेस पर यह सीधा हमला बोला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। मुख्यमंत्री शनिवार को वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे।  दरअसल पिछले एक-दो दिनों से सोशल मीडिया पर काशी के मंदिर व मणिकर्णिका घाट को तोड़ने के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन्हीं आरोपों का जवाब देने के लिए सीएम खुद मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने इन वीडियो की सत्यता को सिरे से खारिज करते हुए कहा, यहां पर पिछले 11 वर्षों में हुए समग्र विकास की परियोजना को बाधित करने के लिए जो साजिशें रची जा रही हैं और जिस प्रकार का दुष्प्रचार किया जा रहा है, इसके बारे में सही तथ्य जनता के सामने आ सकें, इसीलिए मुझे आज यहां पर आना पड़ा। उन्होंने कहा कि काशी के प्रति हर सनातन धर्मावलम्बी व हर भारतवासी अपार श्रद्धा का भाव रखता है, लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था, काशी का जो विकास होना चाहिए था, वो नहीं हुआ। पिछले 11 वर्षों में काशी एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक व सांकृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उनका संवर्धन कर रही है और भौतिक विकास के माध्यम से नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त कर रही है। पीएम कहते हैं 'मेरी काशी' सीएम योगी ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि देश की संसद में काशी का प्रतिनिधित्व स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं और वह अक्सर अपने भाषणों में कहते हैं, 'मेरी काशी'। प्रारम्भ से ही उन्होंने कहा है कि काशी की पुरानी काया को संरक्षित करते हुए उसे नए कलेवर के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए और उसी के अनुरूप काशी की परियोजनाएं तैयार हुईं।  देश की जीडीपी में काशी का योगदान 1.3 लाख करोड़ कॉरिडोर बनने के बाद काशी में आए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले यहां प्रतिदिन औसतन पांच हजार से 25 हजार श्रद्धालु आते थे। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन सवा लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालु यहां दर्शन कर रहे हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या 6 से 10 लाख तक पहुंचती है। गतवर्ष 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ धाम में दर्शन किए। बाबा विश्वनाथ धाम बनने के बाद से अब तक अकेले काशी ने देश की जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ रुपए का योगदान किया है।  मंदिर तोड़े नहीं गए, पुनरुद्धार हुआ सीएम ने सीधे-सीधे कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब काशी विश्वनाथ धाम बन रहा था, तब भी कांग्रेस ने सफेद झूठ फैलाया कि मंदिर तोड़े गए, जो कि सरासर गलत है। उन मंदिरों का पुनरुद्धार हुआ है, वे आज भी वैसे ही हैं। फर्क इतना है कि पहले जीर्णशीण हालत में थे, अब उनका पुनरुद्धार हो चुका है।  कांग्रेस क्यों वापस नहीं लाई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति मुख्यमंत्री ने कहा कि सौ वर्ष पहले माता अन्नपूर्णा की मूर्ति यहां से चोरी कर यूरोप पहुंचा दी गई थी। प्रधानमंत्री के प्रयास से वह मूर्ति वापस आई और काशी विश्वनाथ में उसकी स्थापना की गई। सीएम योगी ने कांग्रेस से सवाल किया कि 1947 से लेकर 2014 तक ज्यादातर समय केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं, आखिर उन्होंने यह प्रयास क्यों नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकारों में भारत की विरासत के प्रति सम्मान का भाव ही नहीं था। तुष्टीकरण की राह पर चलकर भारत की आस्था का अपमान करने वाली कांग्रेस कभी भी भारत की विरासत का सम्मान नहीं कर सकती।  सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली सीएम योगी ने कहा कि विरासत का सम्मान कैसे होता है, यह हमें कांग्रेस से पूछने की आवश्यकता नहीं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर 500 वर्षों के बाद मंदिर निर्माण का कार्य, काशी हो या अयोध्या, मां विंध्यवासिनी धाम हो या प्रयागराज, बौद्ध तीर्थस्थल हो या फिर भारत की विरासत से जुड़े सभी तीर्थस्थल, विरासत के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के सभी कार्य प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सकुशल संपन्न हो रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा इस प्रकार की अनर्गल टिप्पणी और उसके नेताओं के इस प्रकार के बचकाने बयान और बचकानी हरकतों को देखकर उन पर हंसी भी आती है और दया भी। इनका यह कृत्य वैसे ही है जैसे 'सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली'। जिन लोगों ने विरासत का सदैव अपमान किया, वो आज भी विकास के कार्यों में बाधा पैदा कर रहे हैं। यह स्थिति केवल मणिकर्णिका में ही नहीं है, सच्चाई तो यह है कि ये लोग विकास के हर उस कार्यक्रम में बाधा पैदा करेंगे, जो प्रदेश या देश के विकास से और लोक कल्याण से जुड़ा हो।

नई Volvo EX60 21 जनवरी को होगी लॉन्च, इंटीरियर डिजाइन का हुआ पर्दाफाश

मुंबई  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Volvo आगामी 21 जनवरी, 2026 को दुनिया भर में अपनी Volvo EX60 को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे पहले स्वीडिश कार निर्माता कंपनी इसके कुछ टीजर भी जारी कर रही है, और फ्रेश टीजर इमेज में इसके इंटीयर क जिनसे इसकी कुछ झलक सामने आ रही हैं. बता दें कि नई Volvo EX60 पॉपुलर Volvo XC60 SUV का इलेक्ट्रिक वर्जन है, और यह कंपनी का पहला मॉडल है, जिसे EVs के लिए बनाए गए अपने नए प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है. इसकी लॉन्च के साथ, Volvo कॉम्पैक्ट EX30 और फ्लैगशिप EX90 के बीच की कमी को पूरा करेगी. नई Volvo EX60 का इंटीरियर नए लेटेस्ट टीज़र में कार के इंटीरियर की एक झलक दिखाई गई है, जिसमें एक बड़ी, फ्लोटिंग टैबलेट इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन देखी जा सकती है, जो डैशबोर्ड के बीच में लगी है. डिस्प्ले के नीचे एक फिजिकल वॉल्यूम नॉब दिया गया है, लेकिन हमेशा की तरह Volvo के डिज़ाइन में फिजिकल बटनों का इस्तेमाल कम किया गया है. इसके अलावा, ड्राइवर को टच-कैपेसिटिव कंट्रोल वाला मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील और स्टीयरिंग कॉलम पर सीधे लगा एक पतला डिस्प्ले भी दिया जा सकता है, जो पारंपरिक डिजिटल क्लस्टर की जगह लेगा. कंपनी का उद्देश्य कार में मिलने वाले ज़्यादातर फिजिकल कंट्रोल्स को वॉयस कमांड से बदलना है, और इसी वजह से आने वाली इस मिड-साइज़ SUV में AI-पावर्ड टेक्नोलॉजी दी जाएगी. नई EX60 में Google के Gemini AI असिस्टेंट को इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे यूज़र्स SUV से बातचीत कर पाएंगे. Gemini की मदद से, कंपनी का मकसद 'सड़क पर ज़रूरी हर चीज़ के लिए हैंड्स-फ्री कंट्रोल' देना है. नई Volvo EX60 का डिजाइन कार के डिजाइन की बात करें तो पहले सामने आए टीज़र तस्वीरों से डिजाइन के बारे में काफी कुछ जानकारी मिलती है. नई EX60 में ICE-पावर्ड XC60 जैसा ही ओवरऑल सिल्हूट दिया जाएगा, जिसमें थॉर-हैमर LED वाली लंबी फ्रंट-एंड डिज़ाइन होगी. इसका जनरल डिज़ाइन हाल ही में लॉन्च हुई Volvo EX30 जैसा ही होने वाला है, जिसमें बोल्ड, मिनिमलिस्ट लुक होगा, साथ ही क्लोज्ड-ऑफ फ्रंट ग्रिल, बोनट लूवर्स और उभरे हुए फेंडर्स होंगे. Volvo EX60 की बैटरी और चार्जिंग Volvo EX60 को ऑप्टिमल कंडीशन में 400kW DC फास्ट चार्जर से कनेक्ट करके 10 मिनट में लगभग 340 km की रेंज तक चार्ज किया जा सकता है. Volvo इस हाई-परफॉर्मेंस हार्डवेयर को लंबे समय तक सपोर्ट करने के लिए इसकी बैटरी पर 10 साल की वारंटी देगी. खास बात यह है कि कंपनी ने ब्रीद बैटरी टेक्नोलॉजीज के साथ पार्टनरशिप में थर्मल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया है. जानकारी के अनुसार, Volvo EX60, स्केलेबल प्रोडक्ट आर्किटेक्चर 3 (SPA3) का ग्लोबल डेब्यू है, जो कंपनी द्वारा खास तौर पर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्लेटफॉर्म है. पुराने आर्किटेक्चर में इंटरनल कम्बशन इंजन को एडजस्ट करना पड़ता था, लेकिन SPA3 सेल-टू-बॉडी टेक्नोलॉजी के साथ आता है, जिसमें बैटरी पैक सीधे गाड़ी के चेसिस में इंटीग्रेट होता है. Volvo EX60 की रेंज नई Volvo EX60 का उद्देश्य एफिशिएंसी और लंबी दूरी की यात्रा के लिए एक हाई स्टैंडर्ड सेट करना है. कंपनी इसे ऑल-व्हील-ड्राइव कॉन्फ़िगरेशन में पेश करने वाली है, और Volvo को उम्मीद है कि यह SUV यूरोपियन WLTP साइकिल के तहत 810km तक की बेस्ट-इन-क्लास रेंज देने वाली है. नॉर्थ अमेरिकन मार्केट के लिए, EPA स्टैंडर्ड के अनुसार, इसी सेटअप से 400-मील की रेंज (लगभग 644km) मिलने का अनुमान है.