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घर वापसी अभियान: 200 लोगों ने अपनाया सनातन धर्म, समाज के वरिष्ठों ने किया अभिनंदन

कांकेर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मांतरण से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. कांकेर के पीढ़ापाल गांव में आज 50 से अधिक परिवारों के 200 धर्मांतरित लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सामूहिक रूप से घर वापसी की है. इस दौरान 25 गांवों के समाज प्रमुखों समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे. समाज के वरिष्ठों की मौजूदगी में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और फिर गंगाजल छिड़क कर, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सम्मान के साथ मूल धर्म में वापसी कराई गई.  25 गांवों के समाज प्रमुख हुए शामिल जानकारी के अनुसार, इस मुहिम में पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुलगांव के ग्रामीण शामिल थे. बताया जा रहा है कि इन परिवारों ने आपसी सहमति और समाज के साथ लंबे संवाद के बाद स्वेच्छा से अपने पारंपरिक धर्म और संस्कृति की ओर लौटने का फैसला किया. बाकी बचे परिवार भी जल्द लौटेंगे: सर्व समाज सर्व समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने मीडिया को बताया कि यह समाज की एकजुटता का परिणाम है. उन्होंने कहा, “आज 50 परिवारों के 200 से अधिक लोग वापस आ गए हैं. क्षेत्र में अभी 3 से 4 परिवार और शेष हैं, जिन्होंने भी वापसी की इच्छा जताई है और वे जल्द ही मूल धर्म में लौट आएंगे.” प्रशासन की पैनी नजर इतने बड़े पैमाने पर हुई इस घर वापसी को लेकर पूरे बस्तर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है. इस संवदेनशील विषय को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. फिलहाल, क्षेत्र में शांति का माहौल है और समाज के लोगों में इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.

कान्हा से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के लिये नर बाघ रवाना

भोपाल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक नर बाघ को 18 जनवरी को सुरक्षित रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) के लिए रवाना कर दिया गया है। नर बाघ को पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र, सिवनी से रेस्क्यू किया गया था। उस समय बाघ शावक की उम्र लगभग 4 से 5 माह थी। इसके पश्चात बाघ को कान्हा टाइगर रिज़र्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़ा में पालन-पोषण कर प्राकृतिक शिकार एवं स्वतंत्र विचरण के लिये प्रशिक्षित किया गया। वर्तमान में बाघ की उम्र लगभग 33 से 35 माह है तथा वह पूर्णतः स्वस्थ एवं जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम पाया गया है। विशेषज्ञ परामर्श के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि बाघ को ऐसे संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाए जहाँ बाघों का घनत्व कम हो और पर्याप्त आवास उपलब्ध हो। बाघ को वन्यप्राणी चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा निश्चेत कर उसके शरीर के आवश्यक जैविक मापदंडों को विधिवत रूप से अभिलेखित किया गया। विशेषज्ञों की सतत निगरानी में तथा निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के अनुरूप बाघ का सेटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) में सुरक्षित स्थानांतरण किया गया। टाइगर रिज़र्व में बाघ के दीर्घकालीन संरक्षण के लिये प्राकृतिक एवं अनुकूल आवास उपलब्ध है, जिससे वह स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र विचरण कर सकेगा। यह प्रक्रिया क्षेत्र संचालक, कान्हा टायगर रिजर्व श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सम्पन्न की गई। इस पूरे स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान उप संचालक (कोर) श्री पुनीत गोयल, उप संचालक (बफर) सुश्री अमीथा के.बी, वन्यप्राणी चिकित्सक, कान्हा टाइगर रिजर्व डॉ. संदीप अग्रवाल, राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार एवं अन्य विशेषज्ञ दल तथा अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध रहे।  

‘स्टार्ट इन यूपी’ को मिली संस्थागत मजबूती, 7 स्वीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी

ब्लॉकचेन, एआई, 5जी/6जी, हेल्थटेक, ड्रोन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस आईआईटी, आईआईएम और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से स्टार्टअप्स को मिल रहीं विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट से रोजगार के नए अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने में जुटी है। योगी सरकार ने 'स्टार्ट इन यूपी' नीति के अंतर्गत प्रदेश में 7 अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति प्रदान की है, जिन्हें अब तक कुल ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। इन केंद्रों की मदद से प्रदेश में नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिल रही है। इन सभी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट, नए रोजगार अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को बढ़ावा मिल रहा है। ब्लॉकचेन से ड्रोन टेक्नोलॉजी तक, भविष्य की तकनीकों पर फोकस प्रदेश में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी/6जी टेलीकॉम, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। ये सेंटर न केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम बने नवाचार के इंजन गौतम बुद्ध नगर, लखनऊ, कानपुर नगर, सहारनपुर और गाजियाबाद में स्थापित इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आईआईटी कानपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, एसटीपीआई लखनऊ और एकेजीईसी गाजियाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। इससे स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग) प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट मिल रहा है। 5 वर्षों में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, ₹10 करोड़ तक का संस्थागत सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत प्रत्येक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्थापना की तिथि से 5 वर्षों की अवधि में अधिकतम ₹10 करोड़ तक की ग्रांट-इन-एड (पूंजीगत एवं संचालन व्यय सहित) प्रदान किए जाने का प्रावधान है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि ये सेंटर पांच वर्षों के भीतर आत्मनिर्भर बनें और दीर्घकालिक रूप से प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करें। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा गौतम बुद्ध नगर में स्थापित ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईएम लखनऊ ईआईसी द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र 10,000 वर्ग फुट के अत्याधुनिक परिसर में अगले पांच वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करेगा। यहां स्टार्टअप्स को उच्च तकनीकी सुविधाओं के साथ ₹75 लाख तक की सीड फंडिंग, विशेषज्ञ मेंटरशिप और एंजेल व वेंचर कैपिटल नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश में एक सशक्त और टिकाऊ ब्लॉकचेन इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। मेडटेक और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स से आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था लखनऊ में स्थापित मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स (मेडटेक) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एसटीपीआई लखनऊ, एसजीपीजीआई, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग (उत्तर प्रदेश सरकार), एआईएमईडी, एएमटीजेड और केआईएचटी के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल डिवाइस और हेल्थ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना और मेक इन इंडिया व डिजिटल इंडिया को सशक्त करना है। यहां स्टार्टअप्स को तकनीकी विशेषज्ञों, डॉक्टरों, मेंटरशिप और वेंचर फंडिंग का सहयोग मिल रहा है। 5जी/6जी और एआई से भविष्य की तकनीकों पर फोकस कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित 5जी/6जी टेलीकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों पर अनुसंधान और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा दे रहा है। अत्याधुनिक आरएफ लैब्स, एआई/एमएल सर्वर, सुपरकंप्यूटिंग टूल्स और टेस्टिंग सुविधाओं से लैस यह केंद्र भारत को वैश्विक टेलीकॉम नवाचार में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में स्थापित एआई एवं इनोवेशन आधारित उद्यमिता (एआईआईडीई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईटी कानपुर और फिक्की के सहयोग से संचालित है, जहां हर वर्ष 50 एआई आधारित स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निवेश से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। सहारनपुर और गाजियाबाद से उभरता औद्योगिक नवाचार सहारनपुर में आईआईटी रुड़की द्वारा संचालित 5जी/6जी यूबिक्विटस वायरलेस कम्युनिकेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस 6जी विजन के अनुरूप कार्य कर रहा है। वहीं, गाजियाबाद में एकेजीईसी द्वारा स्थापित एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अत्याधुनिक थ्रीडी प्रिंटिंग और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के माध्यम से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है। ड्रोन और यूएवी तकनीक में यूपी को राष्ट्रीय हब बनाने की तैयारी कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित यूएवी डिजाइन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता, टेस्टिंग, डिजाइन वैलिडेशन और कंसल्टेंसी प्रदान कर रहा है। डीजीसीए अनुमोदित फ्लाइट टेस्टिंग जोन और उन्नत लैब्स के माध्यम से यह केंद्र प्रदेश को ड्रोन टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।

हर्री स्टेशन पर कांग्रेस का रेल रोको प्रदर्शन, कोरोना काल के बाद बंद ट्रेनों के ठहराव को लेकर उठी आवाज

गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में पेंड्रा रोड–अनूपपुर रेल मार्ग पर स्थित हर्री रेलवे स्टेशन में रेल रोको आंदोलन किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कोरोना काल के बाद कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र की जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि कोरोना काल से पहले जिन ट्रेनों का हर्री स्टेशन पर नियमित ठहराव था, उन्हें यथावत बहाल किया जाए। इस मांग को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गजमती भानू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हर्री स्टेशन पहुंचे और रेल रोको प्रदर्शन किया। आंदोलन को देखते हुए स्टेशन परिसर में RPF, GRPF सहित स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जानबूझकर हर्री स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज बंद किया गया है। इसके चलते स्टेशन से लगे लगभग 50 पंचायतों के हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि यात्रियों को मजबूरी में पेंड्रा रोड या अनूपपुर रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है, जो बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए बेहद तकलीफदेह है। इस संबंध में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने DRM बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पूर्व की तरह हर्री स्टेशन पर बिलासपुर–रीवा–बिलासपुर, बिलासपुर–इंदौर–बिलासपुर, बिलासपुर–भोपाल–बिलासपुर और बिलासपुर–चिरमिरी–बिलासपुर जैसी ट्रेनों का ठहराव बहाल किया जाए। कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि जनहित को देखते हुए यदि मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

किसानों की अगली पीढ़ी सड़क पर: पांगरी बांध मुआवजे को लेकर बुरहानपुर में बच्चों का आंदोलन

बुरहानपुर जिले की पांगरी बांध परियोजना के तहत भूमि डूब में जाने से प्रभावित किसानों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मुआवजे को लेकर सरकार और प्रशासन से संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण किसान लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते महीनों में किसान पत्थर खाओ आंदोलन, भैंस के आगे बीन बजाओ, अर्ध नग्न प्रदर्शन जैसे अनूठे तरीकों से अपना विरोध जता चुके हैं। आंदोलन में बच्चों की एंट्री रविवार को आंदोलन ने एक नया रूप ले लिया, जब प्रभावित किसानों के छोटे-छोटे बच्चों ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथ में ले ली। बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम पत्र लिखा और जमीन का दोगुना मुआवजा देने की मांग की। तख्तियों पर “हमें न्याय चाहिए” और “जय जवान जय किसान” जैसे नारे लिखे हुए थे।   प्रशासन पर कानून तोड़ने का आरोप आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन भूमि अधिग्रहण कानून को तोड़-मरोड़ कर किसानों के सामने प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को विधिवत दो गुना मुआवजा और सांत्वना राशि मिलनी चाहिए। प्रशासन की मौजूदा प्रक्रिया कानून के विपरीत है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 300 से अधिक परिवार प्रभावित पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत पांगरी, बसाली और नागझिरी गांवों के 300 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। इन गांवों की लगभग 287 हेक्टेयर भूमि बांध के डूब क्षेत्र में चली गई है। यह भूमि गन्ना, केला और कपास जैसी व्यावसायिक फसलों के लिए जानी जाती थी। विस्थापन योजना का अभाव किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने न तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और विस्थापन की कोई ठोस योजना बनाई है और न ही परियोजना से जुड़े आवश्यक सर्वे कराए गए हैं। जिला प्रशासन कलेक्टर दर से भूमि का मूल्य और उतनी ही पारितोषिक राशि दे रहा है, जिसे किसान अपर्याप्त बता रहे हैं। दो बार हो चुकी बैठकें, समाधान नहीं डॉ. रवि पटेल के अनुसार मुआवजे को लेकर जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ दो बार बैठक हो चुकी है। किसान जल संसाधन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट से भी मुलाकात कर चुके हैं। मंत्री ने अधिकारियों को समस्या सुलझाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निर्माण कार्य भी प्रभावित मुआवजा विवाद के चलते बांध के बाद नहरों और अन्य निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें कानून के अनुसार पूरा मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान नंदू पटेल, राहुल राठौर, संजय चौकसे, माधो नाटो, कालू चौकसे, ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

घर के मंदिर में न रखें ये मूर्तियां, धन हानि का संकेत

घर का मंदिर वह पवित्र कोना होता है जहां से पूरे परिवार को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। हम अपनी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ ईश्वर की मूर्तियां स्थापित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत स्वरूप या दोषपूर्ण मूर्तियों का चुनाव आपके जीवन में अशांति और आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हर मूर्ति की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है और घर के भीतर केवल सौम्य और आशीर्वाद देने वाली ऊर्जा का ही वास होना चाहिए। अक्सर हम अनजाने में या केवल सुंदरता देखकर ऐसी मूर्तियां घर ले आते हैं जो गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। शास्त्रों का स्पष्ट मानना है कि यदि मंदिर में रखी गई मूर्तियों की ऊर्जा घर के वातावरण से मेल नहीं खाती, तो यह तरक्की में बाधा, स्वास्थ्य हानि और आपसी कलह का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। तो आइए जानते हैं कि पूजा घर में भूलकर भी कैसी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। खंडित या टूटी हुई मूर्तियां वास्तु शास्त्र का सबसे पहला नियम है कि पूजाघर में कभी भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। चाहे वह थोड़ी सी ही क्यों न चटक गई हो, ऐसी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव और कार्यों में बाधा का कारण बनती है। ऐसी मूर्तियों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। देवी-देवताओं का रौद्र रूप घर के मंदिर में हमेशा शांत और सौम्य मुद्रा वाली मूर्तियां रखनी चाहिए। देवी काली का विकराल रूप, भगवान शिव का तांडव करते हुए स्वरूप या भगवान हनुमान का लंका दहन वाला चित्र घर में नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि रौद्र रूप वाली मूर्तियां घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ाती हैं। एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां अक्सर लोग श्रद्धावश एक ही भगवान की कई मूर्तियां रख लेते हैं। वास्तु के अनुसार, एक ही देवी-देवता की तीन या उससे अधिक मूर्तियां या चित्र एक ही जगह पर नहीं होने चाहिए। इससे घर में गृह-क्लेश की स्थिति पैदा हो सकती है और धन का आगमन रुक सकता है। आमने-सामने न हों मूर्तियां मंदिर में मूर्तियों को इस तरह न रखें कि वे एक-दूसरे के आमने-सामने हों। विशेष रूप से गणेश जी की पीठ कभी भी दिखाई नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उनकी पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। मूर्तियों का मुख हमेशा सामने की ओर या साधक की ओर होना चाहिए। पूर्वजों की तस्वीरें कई लोग भगवान के साथ ही अपने मृत पूर्वजों की तस्वीरें भी रख देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवता और पितर दोनों पूजनीय हैं लेकिन उनके स्थान अलग होने चाहिए। भगवान के मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से देव-दोष लगता है, जिससे घर की उन्नति रुक सकती है। युद्ध या विनाश दर्शाने वाली तस्वीरें महाभारत के युद्ध का दृश्य या किसी असुर का वध करते हुए उग्र तस्वीरें पूजाघर में रखने से बचें। ऐसी तस्वीरें परिवार में कलह और अशांति का माहौल पैदा करती हैं।

लातेहार में बड़ा सड़क हादसा: अनियंत्रित बस घाटी में गिरी, 5 की जान गई

रांची   झारखंड के लातेहार जिले से एक बड़ा हादसा हो गया, जहां महुआडांड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत ओरसा घाटी में एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में अब तक 5 महिलाओं के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य यात्रियों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ से पिकनिक मनाने जा रहे थे लोग प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त बस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर स्थित ज्ञान गंगा हाई स्कूल की है। अपुष्ट सूत्रों की मानें तो बस में क्षमता से अधिक लगभग 80 लोग सवार थे, जो छत्तीसगढ़ से लोध फॉल (Lodhi Fall) घूमने जा रहे थे। ओरसा घाटी के खतरनाक मोड़ पर चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस पलट गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई।   बचाव कार्य और चिकित्सा सहायता घटना की सूचना मिलते ही महुआडांड़ थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे। बस के नीचे अभी भी कुछ घायलों और शवों के दबे होने का अनुमान है, जिन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं। अस्पताल में मची अफरा-तफरी महुआडांड़ का सरकारी अस्पताल घायलों से पूरी तरह भर गया है। घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि स्थानीय प्रखंड के निजी क्लीनिकों के प्रैक्टिसनर भी स्वेच्छा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं और डॉक्टरों की मदद कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता वर्तमान में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तुरंत इलाज प्रदान करना है। चिकित्सा सहायता: घटना की गंभीरता को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टरों की टीम जुटी हुई है। स्थानीय क्लीनिकों के प्राइवेट प्रैक्टिसनर्स भी घायलों की जान बचाने के लिए स्वेच्छा से डॉक्टरों की मदद कर रहे हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी जानकारी: 8वें वेतन आयोग के दौर में DA का पैटर्न समझना जरूरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। यह इंतजार अभी 18 महीने या उससे ज्यादा दिन रहेगा। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वेतन आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सैलरी स्ट्रक्चर समेत अन्य सुविधाओं पर मंथन के लिए 18 महीने का वक्त मिला है। इस बीच, कुछ केंद्रीय कर्मचारी ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि क्या 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले महंगाई भत्ता (DA) मिलेगा? अगर मिलेगा तो इसका पैटर्न क्या होगा? क्यों हो रही चर्चा दरअसल, 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है और जनवरी-जून 2026 का डीए संशोधन 7वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर का पहला संशोधन होगा। हालांकि दिसंबर 2025 में संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में सरकार ने साफ कहा कि मौजूदा महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का कहना है कि एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू (महंगाई सूचकांक) के आधार पर हर छह महीने में डीए/डीआर में होने वाली बढ़ोतरी महंगाई के असर की भरपाई के लिए पर्याप्त है। डीए में कितना इजाफे की उम्मीद? श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नवंबर 2025 के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) 148.2 पर प्रकाशित किया है। यह एक ऐसा डेटा पॉइंट है जो सीधे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत (DR) की गणना में इस्तेमाल होता है। महंगाई सूचकांक का उपयोग वेतन और पेंशन को वास्तविक मूल्य में गिरावट से बचाने के लिए किया जाता है और यह हर छह महीने में DA रिवीजन तय करता है, जिसका अगला रिवीजन 8वें वेतन आयोग के तहत 1 जनवरी, 2026 से होना है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के तहत स्टैंडर्ड कैलकुलेशन के आधार पर, नवंबर 2025 तक DA पहले ही 59.93% तक पहुंच गया है, जो इसे 60% के निशान से थोड़ा ही कम रखता है। दिसंबर 2025 के इन्फ्लेशन डेटा का इंतजार है, लेकिन सिनेरियो-बेस्ड कैलकुलेशन से पता चलता है कि नतीजा काफी हद तक तय है। अगर दिसंबर इंडेक्स एक सही रेंज में भी ऊपर-नीचे होता है, तो भी कैलकुलेटेड DA 60% से ऊपर ही रहेगा।

भैरवनाथ मंदिर में उप मुख्यमंत्री की भव्य पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दौरे की तैयारियों का लिया जायजा भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के गुढ़ स्थित नवनिर्मित भैरवनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने गजमाला अर्पित करके भगवान भैरवनाथ की पूजा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसका धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन के रूप में विकास किया जा रहा है। यहाँ दिनोंदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से मंदिर का महत्व अपने आप स्पष्ट हो जाता है। वर्षों से भैरवनाथ की खुले में रखी प्रतिमा पर अब भव्य मंदिर तैयार हो गया है। इसका इसी महीने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकार्पण करेंगे। भैरवनाथ मंदिर रीवा के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दौरे की तैयारियों का लिया जायजा उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड, मुख्य कार्यक्रम स्थल तथा मंदिर का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आमजन शामिल होंगे। वाहनों की पार्किंग, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था तथा कार्यक्रम से जुड़े अन्य प्रबंधों पर विशेष ध्यान दें। मुख्यमंत्री डॉ यादव के दौरे की तैयारियों में किसी तरह की कोरकसर बाकी न रखें। मंदिर से जुड़े निर्माण कार्य 25 जनवरी तक हर हाल में पूरे कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके विकास से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। विधायक गुढ़ ने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मेहताब सिंह गुर्जर, स्थानीय जन प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

2026 में हरियाणा के सरकारी स्कूलों का कायाकल्प, करोड़ों की योजना लागू

कुरुक्षेत्र नए वर्ष पर प्रदेशभर के 1019 राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन चमचमाते दिखेंगे। इन भवनों के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक की ओर से 20 करोड़ 10 लाख 42 हजार रुपये जारी किए हैं। इस राशि से इन विद्यालयों के भवनों पर नए सिरे से रंग-रोगन किया जाएगा। विद्यालय भवनों की साफ-सफाई होगी और यह नए लुक में नजर आएंगे। इनमें सबसे अधिक नूंह जिला के 340 विद्यालय और सबसे कम महेंद्रगढ़ जिला का एक विद्यालय शामिल हैं। इसमें कुरुक्षेत्र के भी 11 और करनाल के 58 प्राथमिक विद्यालय भवन शामिल हैं। गौरतलब है कि प्रदेशभर के विद्यालयों की ओर से विद्यालय भवनों की मरम्मत, रख-रखाव और अन्य जरूरतों को लेकर अपनी मांग भेजी थी। इसी को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा विभाग महानिदेशालय की ओर से वार्षिक बजट में से 20.10 करोड़ रुपये की राशि विद्यालय भवनों पर सफेदी के लिए जारी की गई है।   सबसे अधिक नूंह के 340 और महेंद्रगढ़ का एक स्कूल शामिल इस सूची में सबसे अधिक नूंह जिला के 340 विद्यालयों को शामिल किया है, जबकि महेंद्रगढ़ जिला का एक ही विद्यालय शामिल किया है। इस सूची में अंबाला के आठ, फरीदाबाद के 72, गुरुग्राम के 92, करनाल के 58, पलवल के 78 और पानीपत के 64 विद्यालय शामिल हैं।