samacharsecretary.com

सड़क हादसे में मातम: तेज रफ्तार कार ने मजदूरों को रौंदा, दो की गई जान

जबलपुर एमपी के जबलपुर में रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहां एक अनियंत्रित तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे काम कर रहे 13 मजदूरों को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। डिवाइडर रेलिंग लगाने का काम कर रहे थे मजदूर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी शुक्ला के अनुसार, यह घटना बरेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिग्मा कॉलोनी के सामने एकता चौक के पास दोपहर करीब 2 बजे हुई। उस समय ये सभी मजदूर सड़क पर डिवाइडर रेलिंग लगाने के काम में लगे थे और काम के बीच में लंच कर रहे थे, तभी बेकाबू कार उन्हें रौंदते हुए निकल गई।   एक की हालत बेहद नाजुक, अन्य का इलाज जारी पुलिस ने बताया कि सभी हताहत मजदूर मंडला जिले के रहने वाले हैं। घायलों को इलाज के लिए तुरंत जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।

बीजापुर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, मुठभेड़ में छह नक्सलियों का सफाया

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली नेता दिलीप बेदजा समेत छह माओवादियों को मार गिराया। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से शवों के साथ दो एके-47 राइफलें व अन्य हथियार व गोला-बारूद बरामद किए  हैं। राज्य में जनवरी में अब तक 20 नक्सली मारे जा चुके हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में नक्सल कमांडर पापा राव और डिविजनल कमेटी सदस्य दिलीप बेदजा के होने की सूचना पर नक्सली विरोधी अभियान शुरू किया गया था। इसी दौरान शनिवार सुबह जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की जंगली पहाड़ियों में मुठभेड़ हुई। अभियान में पुलिस की विशेष टास्क फोर्स, जिला रिजर्व गार्ड व सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे। मारे गए अन्य नक्सलियों की पहचान के प्रयास जारी हैं। बेदजा नेशनल पार्क एरिया समिति में सक्रिय था और कई हमलों में शामिल था। इससे पहले तीन जनवरी को बीजापुर सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में दो मुठभेड़ों में 14 नक्सलियों को मार गिराया गया था। पिछले साल छत्तीसगढ़ में कुल 285 नक्सली मारे गए थे। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली नेता दिलीप बेदजा समेत छह माओवादियों को मार गिराया। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से शवों के साथ दो एके-47 राइफलें व अन्य हथियार व गोला-बारूद बरामद किए  हैं। राज्य में जनवरी में अब तक 20 नक्सली मारे जा चुके हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में नक्सल कमांडर पापा राव और डिविजनल कमेटी सदस्य दिलीप बेदजा के होने की सूचना पर नक्सली विरोधी अभियान शुरू किया गया था। इसी दौरान शनिवार सुबह जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की जंगली पहाड़ियों में मुठभेड़ हुई। अभियान में पुलिस की विशेष टास्क फोर्स, जिला रिजर्व गार्ड व सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे। मारे गए अन्य नक्सलियों की पहचान के प्रयास जारी हैं। बेदजा नेशनल पार्क एरिया समिति में सक्रिय था और कई हमलों में शामिल था। इससे पहले तीन जनवरी को बीजापुर सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में दो मुठभेड़ों में 14 नक्सलियों को मार गिराया गया था। पिछले साल छत्तीसगढ़ में कुल 285 नक्सली मारे गए थे।

उत्तर प्रदेश से बढ़ेगी मेडिकल टेक्नोलॉजी की दौड़, मुख्यमंत्री योगी का बड़ा ऐलान

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य ही नहीं, बल्कि देश व पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय तथा वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है, जिसके परिणाम आज ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का भार वहन करता है। उन्होंने कहा कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लागू होने से पहले किसी गरीब परिवार में यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता था, तो पूरा परिवार भय और आर्थिक संकट में घिर जाता था। इलाज अधूरा छूट जाता था, क्योंकि न सरकार का सहयोग होता था और न ही संसाधन। आज उत्तर प्रदेश में 5.5 करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रति परिवार ₹5 लाख तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जो पात्र परिवार किसी कारणवश आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से कवर किया गया है। आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है। कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी। वर्ष 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है। डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अगला लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ विजन को साकार करना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। स्क्रीनिंग की प्रक्रिया गांव स्तर से शुरू होनी चाहिए, ताकि मरीज को अनावश्यक रूप से 40-50 किलोमीटर दूर न जाना पड़े। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ही यह तय हो जाए कि मरीज को किस स्तर की चिकित्सा की आवश्यकता है। टेली कंसल्टेशन, टेलीमेडिसिन और एआई आधारित स्क्रीनिंग से यह संभव है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का विकास युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर भारत नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में आगे बढ़ना है। कोविड काल ने यह सिखाया कि संकट के समय दुनिया अपनी मोनोपोली दिखाती है। ऐसे में देश व प्रदेश को स्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही होगा। मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय और वैद्य जीवक की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा यह मानती रही है कि “नास्ति मूलमनौषधम्” यानि कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं, जिसमें औषधीय गुण न हों। उसी तरह “अयोग्य: पुरुषो नास्ति” यानि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, आवश्यकता केवल सही योजक की होती है। आज सरकार की नीतियां वही योग्य योजक हैं, जो युवाओं, स्टार्टअप्स व इनोवेटर्स को अवसर प्रदान कर रही हैं।

इंडिया एआई मिशन-देश को बना रहा है एआई अवसंरचना की वैश्विक शक्ति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंडिया एआई मिशन-भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एआई को उत्पादकता बढ़ाने तथा देश की आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साधन के रूप में अपनाया गया है। स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटर अवसंरचना और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क इंडिया एआई की प्रमुख विशेषताएँ हैं। एआई कोश और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर से स्टार्टअप को बढ़ावा उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट्स प्रभावी एआई प्रणालियों की नींव होते हैं। ‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी क्यूरेटेड डेटासेट्स उपलब्ध हैं, जिनके साथ सैंडबॉक्स टूल्स और निःशुल्क कंप्यूटर एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। सब्सिडाइज्ड दरों पर 38 हजार जीपीयू उपयोग में लाए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को गति मिली है। 'इनोवेशन सेंटर' के माध्यम से 12 स्टार्टअप को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में सहयोग दिया जा रहा है। स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के प्रभावी उदाहरण केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने छाती के एक्स-रे से एआई के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया विकसित की है। उदाहरण प्रस्तुत किया। इंडिया एआई के सहयोग से यह तकनीक 105 से अधिक देशों में लागू हो चुकी है और इसे एफडीए की स्वीकृति भी प्राप्त है। कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स के उपयोग पर काम कर रहा है। व्हाट्सएप आधारित संवाद प्रणाली, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एआई प्रतिभा निर्माण पर विशेष जोर इंडिया एआई मिशन के ‘एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन में जीआईएस और एआई का एकीकृत उपयोग ‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के माध्यम से जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता लाई जा रही है। भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन गये हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ाई जा सकती है। भाषाई समावेशन डिजिटल समानता का आधार है। नेतृत्व-आधारित परिवर्तन और क्षमता निर्माण एकीकृत बैक-एंड प्लेटफॉर्म्स के लिये आवश्यक हैं। आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए एआई एआई उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन गई है। एआई को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित और सामाजिक प्रभाव आधारित दृष्टिकोण के साथ अपनाये जाने की आवश्यकता है। कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियों को किसानों की निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाने वाला तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स रोग पहचान में तेजी लाने वाला प्रभावी उपकरण बन गया है। एमएसएमई और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिये तैयार डिजिटल एवं एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एआई अब आकांक्षात्मक तकनीक नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शासन की मूल आवश्यकता बन चुकी है। एआई अवसंरचना है भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी सॉवरेन डेटा और कंप्यूटर अवसंरचना के रणनीतिक महत्व की दृष्टि से उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत सप्लाई चेन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। गोपनीयता, अनुपालन, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।  

सौर ऊर्जा के बढ़ते क्षेत्र से दिनों-दिन कम हो रही है पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पारंपरिक ऊर्जा के संसाधनों पर अपनी निर्भरता दिनों दिन कम करता जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में वर्ष 2070 तक कार्बन फुट-प्रिंट को शून्य तक लाने और समाप्त होते जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाशने के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (अक्षय) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे रहा है। राज्य में पिछले 12 वर्षों में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 14 प्रतिशत अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे अब कुल ऊर्जा उत्पादन में सहभागिता 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गत वर्ष हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में सौर ऊर्जा के क्षेत्र देश में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य वर्तमान में लगभग 31 हजार मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है, जिसमें से 30% हरित ऊर्जा है। हमारे लिये गौरव की बात है कि मध्यप्रदेश के रीवा सोलर पार्क और देश के सबसे बड़े ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट का भी उल्लेख पूरे देश में हो रहा है। इससे अक्षय ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिली है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इस नीति में सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को अनुकूल और लचीले अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नया आयाम जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में से एक है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्म निर्भरता को प्राथमिकता देते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है। मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा हब के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य में 5 बड़ी सौर परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट (2,750 मेगावाट) है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) करने की है। नवकरणीय ऊर्जा में 5.72 लाख करोड़ से अधिक के निवेश से 1.4 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मध्यप्रदेश सरकार नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.21 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर रही है, जिससे 1.46 लाख रोजगार सृजित होंगे। राज्य सरकार की यह पहल भारत के 'नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य वर्ष-2070 को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश तेजी से नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का नेतृत्वकर्ता बन रहा है और आत्मनिर्भर भारत व स्वच्छ ऊर्जा मिशन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।  

मुंबई में सियासी सस्पेंस: ताज होटल को आर्थर रोड और यरवदा जेल बनाने का आरोप, राउत ने शिंदे को घेरा

ठाणे महाराष्ट्र में बीएमसी समेत नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। खासकर नवनिर्वाचित शिवसेना कॉर्पोरेटर्स को लेकर को राजनीति जोरों पर है। खबरों के मुताबिक शिवसेना के 29 कॉर्पोरेटर्स को ताज लैंड्स एंड होटल में बुलाया गया है और वहां रोक कर रखा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि शिंदे गुट ने ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल बना दिया है, जहां नए चुने गए पार्षदों को बंद कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह नाइंसाफी और अनुचित कार्रवाई बताया। राउत ने कहा कि यह लॉ एंड ऑर्डर का सवाल है। राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद नए चुने गए शिवसेना के पार्षदों के साथ गलत किया जा रहा है। उनका आरोप है कि शिवसेना को डर है कि उनके पार्षदों को तोड़ा जा सकता है। राउत ने कहा कि ताज होटल को एक तरह से जेल जैसा बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत आदेश देना चाहिए कि होटल में बंद किए गए पार्षदों को छोड़ दिया जाए। उनका कहना है कि किसी भी चुनावी या सियासी प्रक्रिया में ऐसे डर और दबाव का इस्तेमाल करना गलत है। सूत्रों की मानें तो नए कॉर्पोरेटर्स को होटल में बुलाने का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव के जरिए पार्षदों को अपने गुट में लाने की कोशिश रोकी जा सके। शिंदे गुट यह सुनिश्चित करना चाह रहा है कि नए चुने गए पार्षद उनके पक्ष में रहें। गौरतलब है कि शुक्रवार को महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने नगर निगम चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की। 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की गई, और बीएमसी चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि बहुमत (114) के लिए शिंदे सेना की मदद चाहिए। महायुति की जीत ने ठाकरे परिवार का तीन दशक का वर्चस्व खत्म कर दिया। वहीं, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी पूरी तरह विफल नहीं हुई। उनके गठबंधन ने 71 सीटें जीतकर मुंबई के मराठी बहुल इलाके में अपना दबदबा बनाए रखा।

ट्रेड डील पर चर्चा तेज, जयशंकर ने अमेरिका में सांसद स्टीव डैनिस से मुलाकात की

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी सांसद स्टीव डैनिस ने नई दिल्ली में रविवार को मुलाकात की है। ईएएम एस जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर जल्द ही कोई खुशखबरी मिलने की उम्मीद बढ़ रही है। एस जयशंकर ने बताया कि अमेरिकी सीनेटर के साथ भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों और रणनीति को लेकर चर्चा हुई। अमेरिकी राजदूत का यह कहना कि भारत अमेरिका के लिए सबसे जरूरी साझेदार है और फिर अमेरिकी सांसद का भारतीय विदेश मंत्री से मिलना इस बात का संकेत दे रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक्स पर तस्वीरों के साथ कैप्शन में एस जयशंकर ने लिखा, "आज सुबह दिल्ली में सीनेटर स्टीव डैनिस से मिलकर खुशी हुई। हमारे आपसी रिश्ते और इसके रणनीतिक महत्व पर खुलकर बातचीत हुई।" इससे पहले विदेश मंत्री ने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत का मुद्दा व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग था। इससे पहले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच ट्रेड वार्ता को लेकर कहा था कि दोनों पक्ष लगातार सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। असल में, ट्रेड पर अगली बातचीत मंगलवार को होगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, इसलिए बातचीत को अंतिम लाइन तक पहुंचाना आसान काम नहीं है, लेकिन हम वहां पहुंचने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। हालांकि, ट्रेड हमारे रिश्ते के लिए बहुत जरूरी है। हम सिक्योरिटी, काउंटर टेररिज्म, एनर्जी, तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे दूसरे बहुत जरूरी क्षेत्रों में भी मिलकर काम करते रहेंगे। अमेरिकी राजदूत ने भारत को यूएस का सबसे जरूरी साझेदार बताया और कहा था, "भारत से ज्यादा जरूरी कोई पार्टनर नहीं है। आने वाले महीनों और सालों में, राजदूत के तौर पर मेरा लक्ष्य एक बहुत बड़ा एजेंडा पूरा करना है। हम यह काम सच्चे रणनीतिक साझेदार के तौर पर करेंगे, जिसमें हर कोई ताकत, सम्मान और नेतृत्व लाएगा।" उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती को लेकर कहा कि मैं यह कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्र दोस्ती सच्ची है। अमेरिका और भारत सिर्फ अपने फायदों से ही नहीं, बल्कि सबसे ऊंचे स्तर पर बने रिश्तों से भी जुड़े हैं। सच्चे दोस्त अलग-अलग राय रख सकते हैं, लेकिन आखिर में हमेशा अपने मतभेद सुलझा लेते हैं।

रेगुलेटरी एक्शन का असर: ₹22.2 करोड़ जुर्माना और अफसरों पर कार्रवाई, इंडिगो शेयर पर निवेशकों की नजर

नई दिल्ली  बीते दिसंबर महीने में इंडिगो एयरलाइन की ओर से की गई मनमानी पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिसंबर में बड़े पैमाने पर हुई दिक्कतों के लिए इंडिगो एयरलाइन पर ₹22.2 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इस खबर के बाद अब सोमवार को इंडिगो के शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। बता दें कि डीजीसीए ने 68 दिनों के लिए हर दिन ₹3 लाख का जुर्माना और इसके अलावा ₹1.80 करोड़ का एक बार का सिस्टमैटिक पेनल्टी लगाया है। इस तरह, इंडिगो पर लगाया गया कुल जुर्माना ₹22.2 करोड़ हो गया है। शेयर का परफॉर्मेंस इंडिगो के शेयर की बात करें तो बीएसई पर 4738.70 रुपये पर है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर में मामूली तेजी आई थी। अब सोमवार को शेयर का कैसा परफॉर्मेंस रहेगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन सरकार की कार्रवाई से निवेशक सहमे हुए हैं। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 6,225.05 रुपये है। वहीं, शेयर के 52 हफ्ते का लो 3,946.40 रुपये है। इंडिगो पर सरकार की कार्रवाई दरअसल, डीजीसीए ने दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो संकट की उड़ानों में व्यवधान की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर उस पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही एक अधिकारी को कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। नियामक ने एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को भी इस मामले में आगाह किया है। बता दें कि 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द रही थीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई थी। इसके बाद भी कई दिन तक बड़े पैमाने पर व्यवधान था लेकिन डीजीसीए ने अपनी कार्रवाई के लिए सिर्फ इन्हीं तीन दिनों को आधार बनाया है। जांच समिति ने 26 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। अधिकारियों को किया आगाह नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को आगाह करके छोड़ दिया है जबकि मुख्य परिचालन अधिकारी इसिडर पोरक्रस को विंटर शिड्यूल और फ्लाइट ड्यूटी से संबंधित नये नियमों के असर के आकलन में विफल रहने के लिए चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर) जैसन हर्टर को मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई भी जिम्मेदारी का पद न देने का आदेश दिया गया है। इंडिगो से 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने के लिए भी कहा गया है। कंपनी जैसे-जैसे डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप लक्ष्यों को हासिल करती जाएगी, बैंक गारंटी की राशि उसे वापस मिलती जाएगी।

साई ने 26 खेलों में 323 सहायक कोच पद के लिए मांगे आवेदन

नई दिल्ली स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने कोचिंग और एथलीट सपोर्ट में भारत के मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए कई खेलों में नियमित तौर पर सहायक कोच की सीधी भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत की है। इसके तहत साई ने शुक्रवार को 26 खेलों में 323 सहायक कोच के पदों को भरने के लिए योग्य भारतीय नागरिकों से आवेदन मांगे। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर लिखा, "कोई भी कोच जो सबसे ऊंचे लेवल पर आगे बढ़ना, योगदान देना और बेहतरीन प्रदर्शन करना चाहता है, उसके लिए साई से बेहतर कोई संस्थान नहीं है।" उन्होंने लिखा, "यह एक बेमिसाल इकोसिस्टम देता है जहां कोचिंग को स्पोर्ट्स साइंस, हाई-परफॉर्मेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, लगातार कैपेसिटी बिल्डिंग, और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष एथलीटों के संपर्क से सपोर्ट मिलता है।" असिस्टेंट कोच का पद कोच कैडर के ग्रुप 'बी' में एंट्री-लेवल का रोल है। सहायक कोच को अलग-अलग क्षेत्रीय केंद्रों, नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, या पूरे भारत में प्रशिक्षण केंद्रों पर नियुक्त किया जाएगा। उन्हें लेवल 6 के अनुसार सैलरी और भत्ते मिलेंगे। साई ने जिन कैटेगरी में सहायक कोच पद के लिए आवेदन मांगे हैं, वे एथलेटिक्स (28), आर्चरी (12), बैडमिंटन (16), बास्केटबॉल (12), मुक्केबाजी (19), कैनोइंग (7), साइकिलिंग (12), फेंसिंग (11), फील्ड हॉकी (13), फुटबॉल (12), जिम्नास्टिक (12), हैंडबॉल (6), जूडो (6), कबड्डी (6), खो-खो (2), रोइंग (11), सेपक टकराव (3), निशानेबाजी (28), तैराकी (26), टेबल टेनिस (14), ताइक्वांडो (11), टेनिस (8), वॉलीबॉल (10), वेटलिफ्टिंग (10), रेसलिंग (22), और वुशु (6) हैं। पदों की नियुक्ति में भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। हर कैटेगरी में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शामिल है। जरूरी योग्यता या तो साई एनएसएनआईएस, पटियाला, या किसी दूसरी मान्यता प्राप्त भारतीय या विदेशी यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा या उसके बराबर का कोचिंग सर्टिफिकेट है। इसके अलावा, जिन कैंडिडेट ने ओलंपिक, पैरालिंपिक, एशियन गेम्स, या वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है, और जिनके पास संबंधित कोचिंग सर्टिफिकेट है, वे भी सक्षम हैं। कोच की चयन प्रक्रिया दो आधार पर होगी। पहली ऑनलाइन कंप्यूटर-आधारित लिखित परीक्षा होगी और इसके बाद एक कोचिंग दक्षता टेस्ट होगा। साई भर्ती नियमों के अनुसार, कैंडिडेट ग्रुप ए में अगले ग्रेड में प्रमोशन के लिए योग्य हैं। इसमें कोच, सीनियर कोच, मुख्य कोच और बाद में हाई-परफॉर्मेंस कोच शामिल हैं। चुने गए कैंडिडेट को पूरे भारत में कहीं भी नियुक्त किया जा सकता है। उनके अनुभव को पूरे भारत में मान्यता दी जाएगी।

AAP विधायक का इस्तीफा, पंजाब में पार्टी को बड़ा नुकसान

चंडीगढ़ बीते दिनों मुक्तसर माघी मेले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ये कहा था कि जो गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता पावन स्वरूपों का मामला चल रहा है उसमें से कुछ स्वरूप बंगा के पास गांव माजारा नौ आबाद में धार्मिक अस्थान रसोखाना श्री नाभ कंवल राजा साहिब से मिले हैं। इस बयान के बाद उक्त धार्मिक अस्थान से जुड़ी संगत ने सख्त प्रतिक्रिया दी और मान सरकार की कड़ी निंदा की। उसी दिन देर शाम इस इलाके के विधायक डॉ. सुखविंदर सुक्खी, जो अकाली दल बादल की टिकट से जीतकर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे और आम आदमी पार्टी ने उन्हें कैबिनेट रैंक दिया था। इसके साथ ही विभाग का चेयरमैन कन्वीनर लगाया गया था। उन्होंने उसी दिन देर रात श्री राजा साहिब अस्थान पर जाकर इस बयान की निंदा की था और इसे अपनी आस्था का केंद्र बताया था। इस मामले से अस्थान से श्रद्धा से जुड़ी संगत में सरकार के प्रति काफी रोष पैदा हुआ है। वहीं आज फिर करीब 12 बजे विधायक डॉ. सुखविंदर सुक्खी ने अस्थान पर जाकर अपना रोष जताते हुए चेयरमैन पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया और कहा कि इस मामले में उन्हें बहुत ठेस पहुंची है। उन्होंने सीधे शब्दों में आम आदमी सरकार के इस कदम से माहौल खराब होने के बारे में खुलासा करते हुए कहा कि वह कुछ लोग गलत प्रोपेगैंडा फैला रहे हैं, जिससे वे दुखी हैं।