samacharsecretary.com

लालकिला विस्फोट चार्जशीट: ED का दावा, डॉक्टरों की भूमिका सामने आई

नई दिल्ली फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 260 पेज की चार्जशीट दाखिल की है. जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इसमें डॉक्टर्स की भर्ती मामले में भी बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के ही नवंबर 2025 के 'लाल किला ब्लास्ट' से जुड़े संदिग्ध डॉक्टरों की भर्ती की थी. इनको रखने से पहले अल फलाह ने पुलिस वेरिफिकेशन ही नहीं करवाई थी। बता दें कि इन तीन डॉक्टरों में से दो को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा डॉक्टर वही सुसाइड बॉम्बर था, जिसने धमाके को अंजाम दिया था।    चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि अल फलाह ने मेडिकल इंस्पेक्टर को बेवकूफ बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीजों को भर्ती किया, ताकि उनको ऐसा लगे कि बहुत मरीज और जरूरी सुविधाएं हैं,जिससे कि कॉलेज की डिग्री की मान्यता बनी रहे। ED ने यूनिवर्सिटी के 61 साल के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ PMLA के तहत दिल्ली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. ईडी ने इस मामले में पहले ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी।जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी से जुड़े फंड्स को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और इनके असली स्रोत को छुपाया गया।

भाजपा की पहचान पर जोर, काजीरंगा परियोजना में विकास और संरक्षण का संदेश

कालियाबोर (असम) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के काजीरंगा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के कालियाबोर–नुमालीगढ़ सेक्शन की 4-लेनिंग परियोजना, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने काजीरंगा से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए असम की सांस्कृतिक विरासत, विकास कार्यों और भाजपा सरकार की नीतियों पर विस्तार से बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दो वर्ष पहले काजीरंगा में बिताए गए पल उनके जीवन के सबसे खास अनुभवों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि काजीरंगा नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम और अगली सुबह एलिफेंट सफारी के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बेहद करीब से महसूस किया। उन्होंने कहा कि असम आकर उन्हें हमेशा एक अलग तरह की खुशी मिलती है। यह धरती वीरों की धरती है और हर क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने वाले बेटे-बेटियों की भूमि है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष वे झुमोइर महोत्सव में शामिल हुए थे और इस बार माघ बिहू के अवसर पर असम आने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए लगातार यहां आने से भाजपा सरकार के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र को और मजबूती मिली है। राजनीतिक संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भाजपा पूरे देश में लोगों की पहली पसंद बन चुकी है। बीते एक-डेढ़ वर्षों में पार्टी पर देश का भरोसा लगातार बढ़ा है। उन्होंने बिहार चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 वर्षों बाद भी वहां जनता ने भाजपा को रिकॉर्ड वोट और सीटें दी हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे देश के सबसे बड़े नगर निगम में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड जनादेश मिला है। उन्होंने कहा, “जीत मुंबई में हो रही है और जश्न काजीरंगा में मनाया जा रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के सभी चुनाव परिणामों का संदेश साफ है—देश का मतदाता आज गुड गवर्नेंस और विकास चाहता है। वह विकास के साथ-साथ विरासत पर भी फोकस करता है, इसलिए भाजपा को चुनता है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को लगातार नकार रहा है। जिस मुंबई शहर में कांग्रेस का जन्म हुआ, वहां आज वह चौथे या पांचवें नंबर की पार्टी बनकर रह गई है। पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब प्रकृति सुरक्षित होती है, तो उसके साथ अवसर भी पैदा होते हैं। काजीरंगा में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे होम स्टे, गाइड सेवाओं, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को नए रोजगार के अवसर मिले हैं। उन्होंने असम सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक समय काजीरंगा में राइनो के शिकार की घटनाएं बड़ी चिंता थीं। 2013-14 में दर्जनों एक सींग वाले राइनो मारे गए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, वन विभाग को आधुनिक संसाधन दिए और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई। इसका परिणाम यह रहा कि 2025 में राइनो के शिकार की एक भी घटना सामने नहीं आई। नॉर्थ ईस्ट के विकास पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की सबसे बड़ी पीड़ा दूरी की रही है—दिलों की दूरी और स्थानों की दूरी। दशकों तक यहां के लोगों को लगता रहा कि देश का विकास कहीं और हो रहा है। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने इस भावना को बदला और नॉर्थ ईस्ट के विकास को प्राथमिकता दी। रोडवेज, रेलवे, एयरवेज और वाटरवेज के जरिए असम को देश से जोड़ने का काम तेज़ी से किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में असम को जहां लगभग 2000 करोड़ रुपये का रेल बजट मिलता था, वहीं भाजपा सरकार ने इसे बढ़ाकर लगभग 10,000 करोड़ रुपये सालाना कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं न केवल यातायात को सुगम बनाएंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देंगी।

पानीपत के मरीज के लिए आर्टिफिशियल अंग: HC ने मेडिकल कॉर्पोरेशन को टेंडर जारी करने कहा

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड पंचकूला को निर्देश दिए है कि वह रमन के लिए आर्टिफिशियल अंग खरीदने के लिए टेंडर आदि जारी करें। जानकारी के मुताबिक पानीपत के सनोली खुर्द गांव का रहने वाला रमन स्वामी 3 नवंबर 2011 को अपने घर की छत पर लटक रहे हाई-टेंशन बिजली के तार के संपर्क में आ गया था। जिसमें उसने अपने दोनों हाथ और बायां पैर गवां दिया। तब वह सिर्फ पांच साल का था। कोर्ट ने अगस्त 2025 में अंतरिम आदेश में हरियाणा के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज को निर्देश दिया था कि लड़के के लिए ट्रांसप्लांट सर्जरी सहित सभी विकल्पों का पता लगाने के लिए ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की एक टीम बनाई जाए। जस्टिस सुवीर सहगल ने आदेश में कहा कि अंतरिम आदेश के बाद याचिकाकर्ता की 6 अगस्त 2025 को जांच की गई और DGHS की ओर से 24 नवंबर, 2025 की तारीख का एक हलफनामा के साथ रिपोर्ट जमा की गई, जिसमें कहा गया है कि 17 साल के रमन की जांच मेडिकल बोर्ड के सदस्यों ने PGIMS रोहतक में क्लिनिकली और रेडियोलॉजिकली की। हाईकोर्ट ने कहा कि उपरोक्त पृष्ठभूमि और कोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों को देखते हुए हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड पंचकूला को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ता के लिए आर्टिफिशियल अंग खरीदने के लिए टेंडर आदि जारी करके कदम उठाए, जैसा कि 6 अगस्त, 2025 की रिपोर्ट में सलाह दी गई है, छह सप्ताह का समय दिया गया है।

पहाड़ों में अलर्ट: बद्रीनाथ-केदारनाथ की चोटियों पर बर्फ नहीं, 40 साल में ऐसा पहली बार

उत्तराखंड उत्तराखंड में इस सर्दी में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी  लगभग नहीं हुई है। अक्टूबर से जनवरी तक हिमपात का रिकॉर्ड लगभग शून्य रहा है। रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध क्षेत्र तुंगनाथ में जनवरी में बर्फ नहीं जमी, जो 1985 के बाद पहली बार हुआ है। इसी तरह बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचे पर्वतीय इलाकों में भी बर्फ नहीं पड़ी है, जबकि आम तौर पर जनवरी में यहां बर्फ की मोटी चादर फैल जाती है। गूंजी क्षेत्र में भी नहीं हुई बर्फबारी पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ लोकप्रिय हिल स्टेशन जैसे नैनीताल, मसूरी और मुक्तेश्वर में भी इस बार बर्फ दिखाई नहीं दी। यहां तक कि 15,000 फीट ऊंचाई वाले गूंजी क्षेत्र में भी बर्फबारी नहीं हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तराखंड में बर्फबारी के न होने का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है। तापमान में बढ़ोतरी और जलवायु परिवर्तन के कारण पूरा प्रदेश अब एक “स्नोलेस एरिया” की ओर बढ़ता जा रहा है।   पहाड़ों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ रही बर्फ के अभाव का एक और प्रभाव यह भी है कि पहाड़ों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो सामान्यतया गर्मियों में ही होती थीं। मौसम के अनियंत्रित बदलाव से हिमालय के पारिस्थितिक तंत्र, जल स्रोत, कृषि और पर्यटन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में केदारनाथ की पहाड़ियां सूखी दिखाई दे रही हैं, जो जनवरी में असामान्य है। बद्रीनाथ की पहाड़ियों में भी अभी तक बर्फ नहीं पड़ी है। वैज्ञानिक इसे “स्नो ड्राउट (बर्फ का अकाल)” कह रहे हैं, और यह पैटर्न उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ता जा रहा है।   इस सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहा एक प्रमुख वजह यह भी रही कि इस सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ (वेदर सिस्टम) कमजोर रहा। सामान्यत: सर्दियों में चार-पांच पश्चिमी विक्षोभ उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश लाते हैं, लेकिन इस बार जो सिस्टम बना वह कमजोर होकर राज्य से पहले ही दक्षिण की ओर मुड़ गया। इसके कारण पहाड़ों को बर्फ नहीं मिली। मौसम विभाग के मुताबिक, कश्मीर के दक्षिण-पूर्व में एक पश्चिमी विक्षोभ 21 जनवरी तक उत्तराखंड तक पहुँच सकता है। अगर यह सिस्टम सक्रिय होता है तो राज्य में बर्फबारी होने की संभावना बन सकती है।  

धुएँ के गुबार में लिपटा कराची, मॉल में भीषण आग से हड़कंप

करांची पाकिस्तान के आर्थिक केंद्र कराची में शनिवार रात एक बहुमंजिला शॉपिंग मॉल में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक कम से कम 3 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। आग इतनी भयानक थी कि इसने मॉल की दर्जनों दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और करोड़ों के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। रात 10 बजे का मंजर: गुल प्लाजा में मची चीख-पुकार यह हादसा कराची के व्यस्त इलाके में स्थित प्रसिद्ध गुल प्लाजा (Gul Plaza) में हुआ। आग रात करीब 10 बजे लगी जब अधिकांश दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर घर जाने की तैयारी कर रहे थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार अगर यह आग दिन के व्यस्त समय में लगी होती तो हताहतों की संख्या सैकड़ों में हो सकती थी।   आग की वजह: ज्वलनशील सामानों का भंडार प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार मॉल के उस हिस्से में आग सबसे पहले भड़की जहां आयातित कपड़ों (Imported Clothes), गारमेंट्स और प्लास्टिक के घरेलू सामानों का बड़ा स्टॉक रखा था। प्लास्टिक और कपड़े जैसे ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी के कारण आग ने देखते ही देखते कई मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। फिलहाल आग लगने की सटीक वजह (जैसे शॉर्ट सर्किट या लापरवाही) स्पष्ट नहीं है। पुलिस का कहना है कि पूरी तरह कूलिंग होने के बाद ही फॉरेंसिक जांच शुरू होगी।   घने धुएं के बीच दमकलकर्मियों की जद्दोजहद घटनास्थल पर दमकल की कई गाड़ियां और बचाव दल तुरंत पहुंच गए। टीवी फुटेज में दमकलकर्मी सीढ़ियों और पानी की तोपों (Water Cannons) के जरिए आग बुझाने की कोशिश करते दिखे। मॉल से निकलने वाला काला धुआं इतना घना था कि कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी परेशानी आई। कराची में मॉल में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। नवंबर 2023 में भी एक मॉल अग्निकांड में 10 लोगों की मौत हुई थी जिससे सुरक्षा इंतजामों पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।  

सीरिया में अमेरिकी स्ट्राइक: अल-कायदा के बड़े आतंकी का सफाया

वाशिंगटन अमेरिका ने सीरिया में जवाबी हमलों के तीसरे दौर में अल-कायदा से जुड़े एक शीर्ष आतंकवादी नेता को मार गिराया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह आतंकी उस इस्लामिक स्टेट (आईएस) सदस्य से सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसने पिछले महीने सीरिया में घात लगाकर हमला किया था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक असैन्य दुभाषिए की मौत हो गई थी। ‘यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम)’ ने बताया कि शुक्रवार को उत्तर-पश्चिमी सीरिया में किए गए सटीक हमले में बिलाल हसन अल-जासिम मारा गया। सेंटकॉम के अनुसार, वह एक शीर्ष आतंकी साजिशकर्ता था और 13 दिसंबर को हुए उस हमले से सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसमें सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार, सार्जेंट विलियम नथानियल हॉवर्ड और अमेरिकी असैन्य दुभाषिया अयाद मंसूर सकात की जान गई थी। अमेरिकी कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “तीन अमेरिकियों की मौत से जुड़े आतंकी का सफाया यह साफ करता है कि हमारे बलों पर हमला करने वालों का पीछा करने का हमारा संकल्प अडिग है। जो लोग अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों पर हमले करते हैं, उनकी योजना बनाते हैं या उकसाते हैं उनके लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं। हम आपको खोज निकालेंगे।” यह कार्रवाई उस व्यापक अमेरिकी अभियान का हिस्सा है, जिसका आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकियों पर हुए घातक हमले के बाद दिया था। इस अभियान का मकसद उन ‘आईएसआईएस के गुंडों’ को निशाना बनाना है, जो तानाशाह बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। सेंटकॉम ने बताया कि ‘हॉकी स्ट्राइक’ नामक इस अभियान के तहत अमेरिका और उसके साझेदार जॉर्डन और सीरिया ने अब तक आईएस के बुनियादी ढांचे और हथियारों से जुड़े 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

सैन्य और मीडिया में रहस्योद्घाटन: ताइवान में जासूसी रैकेट पकड़ाया

ताइवान ताइवान में एक पत्रकार को मुख्यभूमि चीन के लोगों को सैन्य जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सेना के अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोपों में शनिवार को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब स्वशासित द्वीप ताइवान चीन की संभावित घुसपैठ के खिलाफ सख्ती बढ़ा रहा है। ताइवान के कियाओतौ जिला अभियोजक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि एक जिला अदालत ने लिन उपनाम वाले एक टेलीविजन रिपोर्टर और सेना के पांच वर्तमान व सेवानिवृत्त अधिकारियों की हिरासत का आदेश दिया है। बयान में पत्रकार की पहचान उजागर नहीं की गई, लेकिन सीटीआई टीवी ने अपने रिपोर्टर लिन चेन-यू की हिरासत की पुष्टि की। चैनल ने कहा कि उसे मामले के विवरण की जानकारी नहीं है, लेकिन उसने निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया की मांग करते की है। ताइवान में सरकार और सेना के भीतर जासूसी मामलों की जांच आम है लेकिन पत्रकारों पर इस तरह के आरोप दुर्लभ माने जाते हैं। अभियोजकों का आरोप है कि लिन ने ‘‘चीनी व्यक्तियों'' को जानकारी देने के बदले वर्तमान सैन्य अधिकारियों को कुछ हजार से लेकर दस हजार ताइवानी डॉलर तक के कई भुगतान किये। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे चीनी व्यक्ति कौन थे या उनका चीनी सरकार से कोई संबंध था या नहीं।  

माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कल से: गुप्त साधना का महापर्व, पूजा मुहूर्त और महत्व जानिए

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। शक्ति की साधना के बगैर बाकी देवी-देवताओं की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। ऐसे में नवरात्रि अलग-अलग रूप में साल में चार बार आती है। शारदीय और चैत्र के अलावा साल में दो बार गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में माता रानी की पूजा पूरे 9 दिन धूमधाम के साथ होती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में उनकी साधना गुप्त रूप से की जाती है। जानिए इस साल माघ महीने वाली गुप्त नवरात्रि कब है और इसके महत्व से लेकर जानें पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में… पूजा का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के गुप्त नवरात्रि की शुरुआत कल यानी 19 जनवरी से होने वाली है। इसका समापन 27 जनवरी को है। इस दौरान घट स्थापना के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 19 जनवरी की सुबह 6 बजकर 43 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो ये सुबह 11 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 36 मिनट तक रहने वाला है। गुप्त नवरात्रि का महत्व गुप्त नवरात्रि का संबंध 10 महाविद्या की साधना से जुड़ा है। माघ के महीने में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि ठंड के दिनों में होती है। बसंत ऋतु के आगमन के दौरान ही ये पूजा होती है। ये तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनकी 10 महाविद्याओं को पूजने से जिंदगी की बाधाएं खत्म होती हैं और हर मनोकामना की पूर्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान की गई पूजा जितनी गुप्त रखी जाए, वो उतनी ही सफल होती है। गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि गुप्त नवरात्रि के पहले दिन स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद पूजा घर की सफाई करें। मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के आगे दीया जलाएं। फूल और अक्षत अर्पित करें। इस दौरान मां दुर्गा के सभी मत्रों का जाप मन ही मन करें। माना जाता है कि इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी होता है। पाठ के बाद आरती करें और किसी भी भूलचूक के लिए मां से माफी मांगकर उनका आशीर्वाद लें।

श्रद्धालुओं पर हुई पुष्पवर्षा, संगम में तैरती रही भक्ति की लहर

प्रयागराज उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के माघ मेले में आज मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर हेलीकॉप्टर के द्वारा श्रद्धालुओं के ऊपर और साधु संतों के ऊपर पुष्प वर्षा कराई गई। यह पुष्प वर्षा सनातन की आस्था को सम्मान के तौर पर कराई जा रही है। माघ महीने में मौनी अमावस्या पर करोड़ों की भीड़ को मैनेज करके स्नान कराया जा रहा है उसे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। रात 12:00 बजे से अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई हुई है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे चप्पे पर पुलिस के जवान और पीएसी के जवान के साथ आर ए एफ के साथ यूपी एटीएस की टीम भी स्नान घाटों पर मुस्तैदी से श्रद्धालुओं का सहयोग कर रही है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार खुद रात्रि 12:00 बजे से मेला क्षेत्र में स्नान घाट पर भ्रमण कर रहे हैं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टीम को लाउड स्पीकर के माध्यम से दिशा निर्देश दे रहे हैं। ठंड पर भारी पड़ रही आस्था श्रद्धालु ठंड और कोहरे के बाद भी संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु बड़ी तादाद में संगम पहुच रहे है। संगम क्षेत्र में स्नान करने के लिए लोगो के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। त्रिवेणी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाकर हर कोई पुण्य अर्जित करना चाहता है। मान्यता यह है कि… माघ के महीने को हिंदू धर्म ग्रंथों में बहुत पवित्र माना जाता है लेकिन माघ मास के ठीक मध्य में अमावस्या के दिन का तो बहुत विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता यह है कि इस दिन पवित्र नदी और मां का दर्जा रखने वाली गंगा मैया का जल अमृत बन जाता है। इस लिये माघ स्नान के लिये अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास बताया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन की तरफ से भी चाक चौबंद प्रबंध किये गए है।

अहम एयर बेस अब इराकियों के हाथ, अमेरिकी सेना ने छोड़ा क्षेत्र

इराक इराकी अधिकारियों ने शनिवार को पुष्टि की कि अमेरिकी बल पश्चिमी इराक स्थित एक अहम ‘एयर बेस’ से पूरी तरह हट गए हैं और अब उसका पूरा नियंत्रण इराकी सेना ने अपने हाथ में ले लिया है। यह कदम इराक और अमेरिका के बीच हुए उस समझौते के तहत उठाया गया है, जिसके अनुसार अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना को चरणबद्ध तरीके से इराक से बाहर जाना था। वाशिंगटन और बगदाद ने वर्ष 2024 में इस बात पर सहमति जताई थी कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ अभियान में शामिल गठबंधन सेना को सितंबर 2025 तक इराक से हटा लिया जाएगा। इसी योजना के तहत अमेरिकी बल उन सभी ठिकानों से निकलने वाले थे, जहां वे लंबे समय से तैनात थे। हालांकि, समझौते के बावजूद कुछ समय तक अमेरिकी सैन्य सलाहकारों और सुरक्षा कर्मियों की एक छोटी टुकड़ी पश्चिमी इराक के ऐन अल-असद एयर बेस में मौजूद रही। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अक्टूबर में कहा था कि मूल समझौते के अनुसार सितंबर तक पूरी वापसी होनी थी, लेकिन “सीरिया में हुए घटनाक्रम” के कारण 250 से 350 अमेरिकी कर्मियों को अस्थायी रूप से वहां बनाए रखना पड़ा।   अब इराकी सेना ने स्पष्ट किया है कि सभी अमेरिकी कर्मी एयर बेस से जा चुके हैं। सेना के बयान के मुताबिक, अमेरिकी बलों की वापसी के बाद इराकी थलसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अब्दुल अमीर राशिद याराल्लाह ने मौके पर पहुंचकर विभिन्न सैन्य इकाइयों को नई जिम्मेदारियां सौंपीं।रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर इस वापसी की पुष्टि की है। वहीं, अमेरिकी सेना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।हालांकि, यह भी साफ किया गया है कि अमेरिकी बल उत्तरी इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र और पड़ोसी सीरिया में अब भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं।