samacharsecretary.com

पलक्कड़ में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का अनोखा अंदाज: कुर्सी नहीं, जमीन पर बैठक

जयपुर सत्ता या शक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पद, कुर्सी या औपचारिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं होता—यह बात केरल के पलक्कड़ में आयोजित तपस्या गोल्डन जुबली इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल में उस समय स्पष्ट रूप से देखने को मिली, जब केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने परंपरागत औपचारिकताओं से अलग सादगी का मार्ग चुना।  अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त इस संगीत महोत्सव में, जहां आमतौर पर विशिष्ट अतिथियों के लिए मंच, विशेष आसन और कड़े प्रोटोकॉल की व्यवस्था होती है, वहीं मंत्री शेखावत ने इन सबसे दूरी बनाते हुए श्रोताओं के बीच जमीन पर बैठकर भारत के कालजयी भक्ति संगीत का रसास्वादन किया। उनके इस सहज और शांत व्यवहार ने न केवल उपस्थित श्रोताओं बल्कि कलाकारों का भी ध्यान आकर्षित किया।   महोत्सव में प्रस्तुत भक्ति संगीत भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की आत्मा को दर्शाता है—जहां सुर, साधना और समर्पण का संगम होता है। ऐसे वातावरण में मंत्री का जमीन पर बैठना केवल एक व्यक्तिगत चयन नहीं था, बल्कि यह एक गहरा सांस्कृतिक संदेश भी था। यह संकेत था कि संस्कृति को जीने के लिए पद या शक्ति की ऊंचाई आवश्यक नहीं, बल्कि विनम्रता और श्रद्धा ही उसका वास्तविक आधार है। गजेंद्र सिंह शेखावत का यह व्यवहार उस विचार को मजबूत करता है कि संस्कृति केवल मंच से प्रदर्शित करने की वस्तु नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करने की प्रक्रिया है। बिना किसी चकाचौंध, बिना सुरक्षा घेरों और विशेष प्रोटोकॉल के, उन्होंने यह दिखाया कि नेतृत्व का वास्तविक स्वरूप सादगी, सम्मान और सहभागिता में निहित होता है। पलक्कड़ का यह दृश्य सोशल मीडिया और सांस्कृतिक हलकों में चर्चा का विषय बना, जहां कई लोगों ने इसे भारतीय परंपराओं के अनुरूप एक प्रेरक उदाहरण बताया। यह क्षण इस बात की याद दिलाता है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं संस्कृति के साथ समान स्तर पर जुड़ते हैं, तभी उसका संरक्षण और संवर्धन वास्तव में संभव होता है।  

राजनीति में शोक की लहर, महाराष्ट्र के पूर्व BJP नेता ने तोड़ा दम

मुंबई    महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता राज पुरोहित का 71 वर्ष की आयु में निधन मुंबई, 18 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री राज के. पुरोहित का बीमारी के कारण रविवार को 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह मुंबई में उत्तर भारतीय समुदायों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने के लिए जाने जाते थे। सूत्रों ने बताया कि शनिवार को मुंबई के एक निजी अस्पताल में पुरोहित ने अंतिम सांस ली। मुंबई भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक पुरोहित पार्टी की मुंबई इकाई के अध्यक्ष रह चुके थे और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रहे थे। इसके अलावा, वह 2014 से 2019 तक विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक थे। पुरोहित को एक समय मुंबई भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता था, उनका दक्षिण मुंबई में खासा प्रभाव था। पुरोहित को 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था।   पार्टी नेताओं ने कहा कि उनके निधन के कारण महाराष्ट्र ने एक दिग्गज राजनीतिक और सामाजिक विद्वान खो दिया है, जिनका जमीनी स्तर पर लोगों से गहरा जुड़ाव था। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्हें पुरोहित के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। तावड़े ने ‘एक्स' पर लिखा, “मुंबई नगर निगम के पार्षद, विधानसभा सदस्य और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे मेरे दोस्त राज पुरोहित एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि थे, जिनका लोगों से गहरा जुड़ाव था।” उन्होंने कहा कि पुरोहित को मुंबई में रहने वाले प्रवासी किरायेदारों का सबसे बड़ा "मसीहा" माना जाता था और उन्होंने उनके उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।   तावड़े ने कहा, “उनका निधन महाराष्ट्र भाजपा के साथ-साथ मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से एक अपूरणीय क्षति है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वह उनकी आत्मा को शांति और शोक संतप्त परिवार व समर्थकों को संबल प्रदान करें।” हाल ही में संपन्न हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में, राज पुरोहित के बेटे और भाजपा नेता आकाश पुरोहित ने वार्ड संख्या 221 से जीत हासिल की। सूत्रों ने बताया कि विधायक और पूर्व मंत्री राज पुरोहित के पार्थिव शरीर को रविवार को पूर्वाह्न 11 बजे से एक बजे तक मुंबई के मरीन ड्राइव पर स्थित राजहंस बिल्डिंग में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए रखा जाएगा।  

भूकंप का कहर: दो देशों में महसूस हुए तेज झटके, अफगानिस्तान और म्यांमार में दहशत

अफगानिस्तान एशिया के दो संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों अफगानिस्तान और म्यांमार में एक बार फिर धरती कांप उठी है। हाल के दिनों में दोनों देशों में कई भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिससे पहले से संकटग्रस्त आबादी के लिए खतरा और बढ़ गया है। अफगानिस्तान में भूकंप रविवार को अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया, जिससे आफ्टरशॉक्स और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। भूकंप का केंद्र 33.74° उत्तरी अक्षांश और 65.70° पूर्वी देशांतर पर स्थित था। इससे पहले 15 जनवरी को 4.2 तीव्रता का भूकंप 96 किमी गहराई पर और 14 जनवरी को 3.8 तीव्रता का भूकंप 90 किमी गहराई पर दर्ज किया गया था। रेड क्रॉस के अनुसाaर, अफगानिस्तान विशेष रूप से हिंदूकुश क्षेत्र में स्थित होने के कारण बार-बार भूकंप झेलता है। यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टकराहट की सीमा पर है। UNOCHA ने चेतावनी दी है कि दशकों के संघर्ष और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। म्यांमार में लगातार झटके इसी तरह, म्यांमार में भी रविवार को 3.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 65 किलोमीटर थी। NCS के अनुसार, इसका केंद्र 23.70° उत्तरी अक्षांश और 93.79° पूर्वी देशांतर पर था। विशेषज्ञों के अनुसार, उथले भूकंप अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी तरंगें सीधे सतह तक पहुंचती हैं और ज्यादा तबाही मचा सकती हैं।   म्यांमार चार टेक्टोनिक प्लेटों भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट के संगम पर स्थित है। यहां से गुजरने वाला 1,400 किमी लंबा सागाइंग फॉल्ट देश के प्रमुख शहरों सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है, जहां लगभग 46% आबादी रहती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि बड़े भूकंपों के बाद विस्थापित लोगों में टीबी, एचआईवी और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है।

आज से अगले 5 महीने तक रोहित और कोहली नहीं खेलेंगे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, वजह खुली

नई दिल्ली इंदौर में आज यानी रविवार 18 जनवरी को जब भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज का आखिरी मुकाबला खेलने उतरेगी तो सभी की निगाहें एक बार फिर से रोहित शर्मा और विराट कोहली पर टिकी होंगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अगले 5 महीने तक रो-को यानी रोहित और कोहली एक साथ एक टीम के लिए क्रिकेट खेलते हुए आपको मैदान पर नजर नहीं आएंगे। अगर आप भी इन दो महान खिलाड़ियों के फैन हैं तो इसके पीछे की वजह भी जान लीजिए कि आखिर क्यों दोनों 5 महीने तक इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर रहने वाले हैं। दरअसल, रोहित शर्मा और विराट कोहली इस समय सिर्फ वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में एक्टिव हैं। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट वे जून 2024 में टी20 वर्ल्ड कप फाइनल जीतने के बाद अलविदा कह चुके हैं, जबकि टेस्ट क्रिकेट को उन्होंने आईपीएल 2025 के दौरान अलविदा कह दिया था। ऐसे में सिर्फ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ही विराट कोहली और रोहित शर्मा साथ में खेल रहे हैं। चूंकि, आज यानी 18 जनवरी को न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाला मैच भारतीय क्रिकेट टीम का वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में जून के मध्य तक आखिरी वनडे इंटरनेशनल मैच है तो विराट और रोहित का भी ये अगले 5 महीने के लिए आखिरी इंटरनेशनल मैच होगा। टीम इंडिया इसके बाद टी20 सीरीज खेलेगी और फिर टी20 वर्ल्ड कप खेलेगी, जहां दोनों खेल नहीं सकते हैं। वहीं, इसके बाद टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी आईपीएल 2026 में व्यस्त हो जाएंगे, जो मई के आखिर तक चलेगा। आईपीएल में विराट कोहली और रोहित शर्मा खेलेंगे, लेकिन दोनों अलग-अलग टीमों का हिस्सा हैं तो साथ में एक टीम में नजर नहीं आएंगे। हालांकि, जब मुंबई इंडियंस वर्सेस रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु मैच होगा तो साथ में एक ही मैदान पर आपको जरूर मिल सकते हैं। टीम इंडिया की अगली वनडे सीरीज अब जून के तीसरे सप्ताह में शुरू होगी, जो अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज है। उस सीरीज में फिर से इन दोनों दिग्गजों को हम साथ में देखेंगे। इसके बाद फिर वनडे विश्व कप 2027 तक ये दोनों खिलाड़ी करीब दो दर्जन इंटरनेशनल मैच खेल सकते हैं।  

यात्रियों के लिए राहत या नई पाबंदी? चारधाम यात्रा में मोबाइल संबंधी नया निर्देश

उत्तराखंड उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा की पवित्रता और अनुशासन को सुनिश्चित करने के लिए इस साल एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के भीतर मोबाइल फोन का प्रवेश वर्जित होगा। हाल के वर्षों में रील और ब्लॉग बनाने को लेकर बढ़ते विवादों और श्रद्धालुओं की एकाग्रता में पड़ने वाले खलल को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। मंदिर की मर्यादा पहली प्राथमिकता गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। आयुक्त ने बताया कि बदरीनाथ में 'सिंहद्वार' से आगे मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित रहेगा, जबकि केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के मंदिर परिसरों में भी फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं के फोन सुरक्षित रखने के लिए मंदिर समिति और प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की जाएगी। पंजीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं पर अपडेट यात्रा के लिए पंजीकरण की पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी, जिसमें 60% ऑफलाइन और 40% ऑनलाइन कोटा निर्धारित है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डॉक्टरों की 15-15 दिन की रोटेशन ड्यूटी और एयर एंबुलेंस की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सभी संबंधित विभागों को 31 मार्च तक सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। रिकॉर्ड श्रद्धालुओं की उम्मीद छले साल 50 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए थे। इस वर्ष भी भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन "सुगम और सुरक्षित यात्रा" के लक्ष्य पर काम कर रहा है।  

शेयर बाजार की चाल: बजट 2026 से पहले निवेशकों की चिंता या उम्मीदें? Q3 रिपोर्ट देगी दिशा

नई दिल्ली   घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों के सपाट रहने के बाद आने वाले सप्ताह में कंपनियों के तिमाही परिणामों से बाजार की दिशा तय होगी। आईटी कंपनियों के अच्छे तिमाही परिणामों से इस सेक्टर में तेजी बनी हुई है जो आने वाले सप्ताह में जारी रहने की संभावना है। अगले सप्ताह सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट के वित्तीय परिणाम जारी होने हैं। संसद में 01 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले निवेशक सतर्कता बरत सकते हैं। पिछले सप्ताह मुंबई नगर निगम चुनाव को कारण गुरुवार को बाजार में अवकाश रहा था। सोमवार और शुक्रवार को प्रमुख सूचकांकों में तेजी रही जबकि मंगलवार और बुधवार को गिरावट देखी गई। पिछले सप्ताह शेयर बाजार में दिखा था हाहाकार बीएसई का सेंसेक्स 5.89 अंक की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 83,570.35 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 11.05 अंक की बढ़त के साथ सप्ताहांत पर 25,694.35 अंक पर रहा। प्रमुख सूचकांकों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों के लिए बीता सप्ताह अच्छा रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक में 0.29 प्रतिशत की तेजी रही। निफ्टी स्मॉलकैप-100 सूचकांक भी 0.46 अंक ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 में से 19 के शेयर पिछले सप्ताह टूट गये जबकि अन्य 11 में साप्ताहिक तेजी दर्ज की गयी। एलएंडटी का शेयर सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी लुढ़का। मारुति सुजुकी में 3.91 प्रतिशत, सन फार्मा में 3.51, एशियन पेंट्स में 2.39, आईटीसी में 2.33, इंडिगो में 2.19 और बीईएल में 2.08 प्रतिशत की गिरावट रही। टाटा के इस शेयर का भी रहा बुरा हाल ट्रेंट का शेयर 1.86 प्रतिशत, कोटक महिंद्रा बैंक का 1.67, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 1.20, बजाज फाइनेंस का 1.05 और अडानी पोर्ट्स का 0.99 प्रतिशत फिसल गया। एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनीलिवर, भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा और पावर ग्रिड के शेयर भी साप्ताहिक गिरावट में रहे। टेक महिंद्रा में सबसे अधिक 5.65 प्रतिशत की तेजी रही। टाटा स्टील का शेयर भी 5.50 प्रतिशत, इंफोसिस 4.62, भारतीय स्टेट बैंक 4.23, अल्ट्राटेक सीमेंट 3.52 और एनटीपीसी 3.04 प्रतिशत मजबूत हुआ। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर 2.20 फीसदी, एक्सिस बैंक के 1.78 और इटरनल के 1.11 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त में रहे। आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर भी हरे निशान में रहे।

पाकिस्तान के खिलाड़ियों और अधिकारियों के भारत वीजा मामले में नई जानकारी, टी20 वर्ल्ड कप में होगी भागीदारी तय?

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भारत में होने वाले T20 वर्ल्ड कप में भाग लेने वाले पाकिस्तान मूल के सभी 42 खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए वीजा संबंधी औपचारिकताओं को सुविधाजनक बनाने के लिए कदम उठाया है। इंग्लैंड की टीम में पाकिस्तानी मूल के क्रिकेटरों में स्पिनर आदिल राशिद, रेहान अहमद और तेज गेंदबाज साकिब महमूद शामिल हैं। अमेरिका की टीम में अली खान और शायन जहांगीर तथा नीदरलैंड की टीम में जुल्फिकार साकिब जैसे पाकिस्तानी मूल के कुछ खिलाड़ी शामिल हैं।   पीटीआई को पता चला है कि इंग्लैंड के खिलाड़ियों राशिद, रेहान और साकिब के वीजा आवेदन पहले ही मंजूर किए जा चुके हैं। नीदरलैंड की टीम के सदस्यों और कनाडा के सहयोगी स्टाफ के सदस्य शाह सलीम जफर को भी वीजा मिल चुका है। संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, इटली, बांग्लादेश और कनाडा की टीम में शामिल पाकिस्तानी राष्ट्रीयता या पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए वीजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। इन टीमों के लिए वीजा उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कार्यवाही के लिए अगले सप्ताह की तिथि नियत कर दी गई है जिससे संकेत मिलता है कि प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रतिभागियों के लिए वीजा जारी करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी है। सहयोगी और पूर्ण सदस्य देशों में पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व को देखते हुए इस प्रक्रिया में तेजी को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आईसीसी की इस प्रक्रिया में कई टीमों के क्रिकेटर, अधिकारी और स्टैंडबाय खिलाड़ी शामिल हैं, जिससे पता चलता है कि वर्ल्ड क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था अंतिम समय में होने वाली किसी तरह की जटिलता से बचना चाहती है। आईसीसी इसके लिए विभिन्न देशों के कई शहरों में स्थित भारतीय उच्चायोगों के साथ लगातार संपर्क में है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों के वीजा आवेदनों को बिना किसी अड़चन के निपटाया जाए। आईसीसी को आश्वासन मिला है कि लंबित मामलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुचारू रूप से निपटाया जाएगा। टी20 विश्व कप सात फरवरी से शुरू होगा और आईसीसी को विश्वास है कि तब तक सभी तरह की प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी। पाकिस्तान मूल के भारतीय वीजा आवेदकों की गहन जांच की जा रही है और इसलिए प्रक्रिया में सामान्य से अधिक समय लग रहा है।  

सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू की चल रही कवायद, अति गंभीर बीमारियों पर होगा रिसर्च

कैंसर, डायबबिटीज समेत अन्य बीमारियों पर होगा रिसर्च, अस्पतालों को रिसर्च-ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन   – रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर तैयार किया जाएगा स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल, इसे देश-विदेश में अपनाया जा सकेगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। प्रदेश के आयुष अस्पताल अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें रिसर्च सेंटर हब के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए सेंट्रल रिसर्च सेंटर (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान) के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया जाएगा। इस पहल के तहत कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग समेत कई अति गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर आयुष चिकित्सा पद्धतियों से शोध किया जाएगा। आयुष आधारित इलाज की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ किया जाएगा स्थापित प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग, यूनानी व होम्योपैथी को स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुष पद्धतियों का समन्वय न केवल इलाज को अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि रोगों की रोकथाम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में भी मददगार होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इच्छा के अनुरूप प्रदेश के चयनित आयुष अस्पतालों को रिसर्च-ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन चल रहा है। यहां उपचार के साथ-साथ रोगों के कारण, प्रभाव, जीवनशैली, खानपान और आयुष आधारित उपचार पद्धतियों पर डाटा आधारित शोध किया जाएगा। इसका मुख्य उद्​देश्य आयुष आधारित उपचारों की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करना है। सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू के बाद आयुष चिकित्सकों को रिसर्च ट्रेनिंग, आधुनिक लैब सुविधाएं और तकनीकी सहयोग मिलेगा। इस रिसर्च का फोकस उन बीमारियों पर होगा, जिनका बोझ तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर और डायबिटीज के अलावा उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉइड, हृदय रोग, जोड़ों के रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी रिसर्च के दायरे में रहेंगी। रिसर्च प्रोजेक्ट्स से आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का मिलेगा मंच प्रमुख सचिव ने बताया कि सेंट्रल रिसर्च सेंटर से होने वाले एमओयू के बाद उत्तर प्रदेश आयुष रिसर्च के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनने की ओर बढ़ेगा। इससे न केवल प्रदेश के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नई पहचान मिलेगी, बल्कि आयुष आधारित उपचारों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य है कि रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं, जिन्हें देश-विदेश में अपनाया जा सके। इससे आयुष चिकित्सा की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। इससे आयुष क्षेत्र में रोजगार और शोध के नए अवसर भी पैदा होंगे। रिसर्च प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का मंच मिलेगा। साथ ही, आयुष कॉलेजों के छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च का अवसर मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। योगी सरकार की यह पहल प्रदेश को समग्र स्वास्थ्य मॉडल स्थापित करने दिशा में बड़ा कदम साबित होगा, जहां आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान का संतुलित उपयोग होगा।

कक्षा 1 में प्रवेश पर उम्र की नई सीमा लागू, 6 साल से छोटे बच्चों का दाखिला अब बंद

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक दूरगामी बदलाव करते हुए पहली कक्षा (Class 1) में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु सीमा को लेकर नए आदेश जारी किए हैं। शिक्षा विभाग की अधिसूचना के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा में प्रवेश पाने के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष पूरी होना अनिवार्य होगी।   यह निर्णय 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP 2020) के प्रावधानों और 'पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट' के हालिया निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। इस नए नियम के लागू होने के बाद अब 5.5 साल के बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला नहीं मिल सकेगा। क्यों बदला गया आयु का नियम? अब तक हरियाणा शिक्षा नियमावली 2011 के तहत, 5 साल 6 महीने की उम्र वाले बच्चों को भी पहली कक्षा में प्रवेश की अनुमति मिल जाती थी। हालांकि, केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने लंबे समय से सभी राज्यों को इसे 6 वर्ष करने का निर्देश दिया था। मानसिक और शारीरिक परिपक्वता: विशेषज्ञों का मानना है कि 6 वर्ष की आयु में बच्चा औपचारिक स्कूली शिक्षा के दबाव और पाठ्यक्रम को समझने के लिए मानसिक रूप से अधिक तैयार होता है। NEP 2020 का ढांचा: नई शिक्षा नीति का '5+3+3+4' मॉडल बुनियादी स्तर के पहले 3 साल प्री-स्कूल (आंगनवाड़ी/बालवाटिका) और अगले 2 साल कक्षा 1 व 2 के लिए निर्धारित करता है। कानूनी स्पष्टता: हाई कोर्ट ने 'दिविशा यादव बनाम हरियाणा राज्य' मामले में स्पष्ट किया था कि राज्य के नियम केंद्रीय कानून के अनुरूप होने चाहिए ताकि दाखिले के समय कोई भ्रम न रहे। अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा? इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन अभिभावकों पर पड़ेगा जो अपने बच्चों का जल्दी स्कूल में दाखिला कराना चाहते थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि: बालवाटिका का विकल्प: जो बच्चे आयु सीमा पूरी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें बालवाटिका कक्षाओं में भेजा जाएगा। peer group का लाभ: एक ही उम्र के बच्चों के साथ पढ़ने से छात्रों पर अनावश्यक प्रतिस्पर्धा का दबाव कम होगा। कोई छूट नहीं: 2026-27 सत्र से उम्र के नियमों में दी जाने वाली सभी प्रकार की रियायतें आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी जाएंगी। प्रशासन की तैयारी हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और प्राइवेट स्कूलों को पत्र लिखकर इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे अपने प्रवेश नोटिस में इस बदलाव को प्रमुखता से दर्शाएं ताकि अभिभावक समय रहते अपने बच्चों के दाखिले की योजना बना सकें।  

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी; प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू कीं 2 अमृत भारत ट्रेनें, क्या होगा खास

असम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के नगांव जिले में 6,957 करोड़ रुपये की काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखी और 2 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। असम की अपनी दो दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में गुवाहाटी से कलियाबोर पहुंचे मोदी ने काजीरंगा परियोजना के भूमि पूजन में हिस्सा लिया। एक अधिकारी ने कहा कि यह कॉरिडोर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभ्यारण्य के निकट वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय राजमार्ग-715 पर सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया जाएगा, जबकि स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।   यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के कलियाबोर-नुमलिगढ़ खंड को चौड़ी करने के लिए जारी परियोजना का हिस्सा है। इसमें करीब 34.45 किलोमीटर मीटर लंबा एलिवेटेड और वन्यजीवों के अनुकूल कॉरिडोर होगा, साथ ही जखलाबंधा और बोकाखत में बाईपास भी बनाए जाएंगे। पीएम मोदी ने काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के एक मॉडल का भी निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री ने 2 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों (डिब्रूगढ़-गोमती नगर और कामाख्या-रोहतक) को भी डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। किन लोगों को होगी अधिक सुविधा सीनियर अधिकारी ने कहा कि ये ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे विभिन्न राज्यों के बीच लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार लाएंगी, यात्रा का समय कम होगा, और आधुनिक यात्री सुविधाएं मिलेंगी। प्रधानमंत्री ने इससे पहले एक पोस्ट में कहा कि वह असम के कलियाबोर में प्रमुख विकास कार्यों के भूमि पूजन के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज मैं कालियाबोर, असम के काजीरंगा में 35 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर समेत प्रमुख विकास कार्यों के भूमि पूजन को लेकर उत्सुक हूं। इससे विशेष रूप से मानसून के दौरान जानवरों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।'