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Aaj Ka Rashifal 21 January 2026: भाग्य देगा साथ या बढ़ेंगी चुनौतियाँ? पढ़ें सभी राशियों का हाल

मेष राशि: मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन प्रभावशाली रहने वाला है. कामकाज उम्मीद से बेहतर रहेगा. साख और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. आधुनिक विषयों में रुचि बढ़ेगी और आर्थिक मामलों में गति आएगी. लक्ष्य को साधने की कोशिश सफल होगी. प्रशासन और शासन से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे. परिवार से मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी. वृष राशि: वृष राशि वालों के लिए कामकाज अनुकूल रहेगा. व्यापार में तेजी आएगी और अपनों से करीबी बढ़ेगी. प्रतिभा प्रदर्शन के मौके मिलेंगे. पद और प्रतिष्ठा मजबूत होगी. अधिकारी वर्ग प्रसन्न रहेगा. विरोधियों में हताशा दिखेगी. साहस और आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा. मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों को आज भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा. कामकाज में सकारात्मकता रहेगी. उच्च शिक्षा और नई योजनाओं पर फोकस बढ़ेगा. प्रभाव और लाभ में वृद्धि होगी. आकर्षक प्रस्ताव मिल सकते हैं. आस्था और अध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा. कर्क राशि: कर्क राशि के लिए समय मिश्रित प्रभाव वाला है. अपनों की सलाह मानकर आगे बढ़ना लाभकारी रहेगा. व्यक्तिगत मामलों में सजगता रखें. अप्रत्याशित घटनाक्रम संभव है. परिवार का सहयोग मिलेगा. शोध और गहन विषयों में रुचि बढ़ेगी. सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए साझा कार्य और व्यापार में सुधार होगा. नेतृत्व क्षमता निखरेगी. रिश्ते मजबूत होंगे और दांपत्य जीवन में खुशियां रहेंगी. उद्योग और प्रबंधन से जुड़े लोगों को खास सफलता मिल सकती है. कन्या राशि: कन्या राशि के जातकों को आज मेहनत पर भरोसा रखना होगा. विरोधियों की सक्रियता रह सकती है. धोखेबाजी से बचें. नए लोगों पर तुरंत भरोसा न करें. विनम्रता और तार्किक सोच से सफलता मिलेगी. तुला राशि: तुला राशि वालों के लिए दिन आनंददायक रहेगा. मित्रों के साथ यात्रा या मनोरंजन संभव है. रिश्तों में तालमेल बेहतर होगा. पढ़ाई और प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा. वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों को आज जिद और उतावलेपन से बचना चाहिए. पारिवारिक मामलों में सहजता रहेगी. बड़ों का सानिध्य लाभ देगा. धैर्य और विनम्रता से काम लें. धनु राशि: धनु राशि वालों के लिए सामाजिक और पेशेवर प्रयास सफल रहेंगे. करियर में नए अवसर मिल सकते हैं. आत्मविश्वास बढ़ेगा. भाई-बंधुओं से नजदीकियां बढ़ेंगी. यात्रा के योग बन सकते हैं.   मकर राशि: मकर राशि के लिए घर-परिवार में सुख और सामंजस्य बना रहेगा. धन-संपत्ति से जुड़े मामलों में तेजी आएगी. बचत पर जोर रहेगा. महत्वपूर्ण प्रस्ताव मिल सकते हैं. कुंभ राशि: कुंभ राशि वालों की सोच आज आधुनिक और रचनात्मक रहेगी. नई योजनाएं गति लेंगी. आत्मविश्वास बढ़ेगा. वाणी और व्यवहार से लोग प्रभावित होंगे. मीन राशि: मीन राशि के लिए खर्च अधिक रहने के संकेत हैं. बजट और अनुशासन बनाए रखें. विरोधियों से सतर्क रहें. निवेश सोच-समझकर करें. बड़ों का सहयोग मिलेगा.  

साधु पर हमला हिमाचल में: जटाएं और दाढ़ी काटने के आरोप में 3 के खिलाफ FIR

हिमाचल हिमाचल के संगड़ाह क्षेत्र में धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव लगनू में रहने वाले नागा साधु प्रवेश गिरी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पंचायत उप-प्रधान और अन्य ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी धार्मिक पहचान (जटाएं और दाढ़ी) को जबरन काट दिया। घटना का मुख्य विवरणतारीख: यह घटना 15 जनवरी की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब वायरल हुआ है।आरोपी: पंचायत उप-प्रधान सत्तपाल तोमर, स्थानीय निवासी लेखराम और सुरेश के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गई है।आरोपियों का तर्क: ग्रामीणों का आरोप है कि साधु शराब पीकर गांव में हंगामा करता था, हालांकि कानूनन किसी की धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाना अपराध है। पुलिस की कार्रवाई और धाराएं पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:धारा 299: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।धारा 122(2): आपराधिक धमकी और बल प्रयोग।धारा 392(2): शारीरिक हिंसा और गंभीर आपराधिक कृत्य।धारा 3(5): सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम देना। साधु का नया बयान: "धमकियां मिल रही हैं" पीड़ित नागा साधु ने एक नया वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उन पर FIR वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उप-प्रधान ने उन पर झूठा केस दर्ज करवाया है और उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने इसे 'सनातन धर्म का अपमान' करार दिया है। मामले के प्रमुख बिंदुपक्षविवरणपीड़ितनागा साधु प्रवेश गिरी (पिछले 4-5 साल से गांव में रह रहे थे) मुख्य आरोपीसत्तपाल तोमर (पंचायत उप-प्रधान)विवाद का कारणग्रामीणों द्वारा साधु के व्यवहार पर आपत्ति, साधु द्वारा धार्मिक प्रताड़ना का आरोप कानूनी स्थितिसंगड़ाह थाना में FIR दर्ज, पुलिस साक्ष्य (वीडियो) की जांच कर रही है। धार्मिक महत्व: नागा साधुओं के लिए उनकी जटाएं और दाढ़ी केवल बाल नहीं, बल्कि उनके संन्यास और साधना का प्रतीक होती हैं। इस कृत्य को कानून और समाज दोनों में धार्मिक असहिष्णुता के रूप में देखा जा रहा है।

विधायिका तभी मजबूत जब जनता भरोसा करे और जवाबदेह हो– वासुदेव देवनानी

जयपुर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में मंगलवार को जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही विषय पर विधायिका को स्वयं का आत्म मूल्यांकन करने लोक और तंत्र के सेतु को सतत और सशक्त बनाने, नई चुनौतियों से मुकाबले के साथ भविष्य को प्रभावशाली बनाने के लिए दूरदर्शी उद्‌बोधन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव जनता का अडिग विश्वास होता है। यह विश्वास जनता से निरंतर संवाद, पारदर्शिता और उत्तरदायित्वपूर्ण आचरण से ही कायम रह सकता है। देवनानी ने विधायिका को भारतीय लोकतंत्र की धडकन बताया है। विधायी जनता को आकांक्षाओं का दर्पण:- देवनानी ने कहा कि विधायिका कोई स्वतंत्र सता-केंद्र नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का दर्पण है। सदन में बैठने वाला प्रत्येक सदस्य केवल स्वयं का नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की कसौटी यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि सदन के प्रत्येक सत्र, प्रत्येक बहस, प्रत्येक प्रश्न और प्रत्येक विधायी हस्तक्षेप में दिखाई देनी चाहिए। एक जीवंत लोकतंत्र वही है जिसमें विधायिका जनता की समस्याओं को केवल सुनती ही नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस कर समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहती है। श्री देवनानी ने कहा कि संवैधानिक नैतिकता केवल कोगों पर अंकित शब्द नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के विधायी कार्यों का हिस्सा होनी चाहिए। जब हम सदन में बैठते हैं, तो हमें संविधान के ट्रस्टी के रूप में व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि हमारे हाथ में जो शक्ति है, वह जनता द्वारा दी गई पवित्र धरोहर है। अल्पमत की आवाज को दिया सम्मान, सदन की श्रेष्ठता का पैमाना:- विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सदन की श्रेष्ठता बहुमत की शक्ति से नहीं, बल्कि अल्पमत की आवाज को दिए गए सम्मान से तय होती है। असहमति और स्वस्थ आलोचना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संवाद और वाद-विवाद ही विधायिका की जवाबदेही के मजबूत स्तंभ हैं। देवनानी ने कार्यपालिका पर प्रभावी नियंत्रण को विधायिका का प्रमुख संवैधानिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि जनता के कर से एकत्रित प्रत्येक रुपये का उपयोग जनकल्याण में हो, यह सुनिश्चित करना विधायिका का परम कर्तव्य है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल को उन्होंने जनता की आवाज का सशक्त माध्यम बताया। विधायी समितियां लघु सदन है:- देवनानी ने कहा कि विधायी समितियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समितियां 'लघु सदन" के रूप में कार्य करती हैं, जहां गहन, निष्पक्ष और तकनीकी समीक्षा संभव होती है। समिति प्रतिवेदन केवल फाड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि उन पर सदन में चर्चा हो और सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने बताया कि राजस्थान विधानसभा ने लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति के माध्यम से वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ किया है तथा यह सुनिश्चित किया है कि समितियों की रिपोर्ट पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई हो। साथ ही सदस्यों के प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण कार्यक्रम, बाल विधानसभा और यूथ पार्लियामेंट जैसी पहलों से भविष्य की पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ा जा रहा है। आज डिजिटल जवाबदेही का युग:- राजस्थान विधानसभा ‌द्वारा उठाए गए डिजिटल नवाचारों के ऐतिहासिक कदर्मों का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि आज डिजिटल जवाबदेही का युग है। ऑनलाइन प्रक्रियाओं, पेपरलेस व्यवस्था, यूट्यूब पर कार्यवाही के सजीव प्रसारण और राजस्थान विधानसभा के डिजिटल म्यूजियम के माध्यम से पारदर्शिता को नई ऊँचाइयों पर ले जाया गया है। यह एक प्रकार का 'सोशल ऑडिट है, जो सदन को निरंतर सजग बनाए रखता है। विधायी प्रभाव मूल्याकंन:- देवनानी ने लेजिस्लेटिव इम्पैक्ट असेसमेंट और पोस्ट-लेजिस्लेटिव ऑडिट की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि कानून बनने के बाद उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनता को नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बनाना ही सच्ची जवाबदेही का उच्चतम रूप है। आसन की भूमिका महत्वपूर्ण:- पीठासीन अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का आसन केवल एक रेफरी का नहीं, बल्कि संविधान के संरक्षक का होता है। नियर्मा की व्याख्या इस प्रकार होनी चाहिए कि वह चर्चा को रोकने वाली नहीं, बल्कि उसे विस्तार देने वाली हो। विधायिका को स्वयं का आत्म मूल्यांकन करना होगा, इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने सदनों में सदस्यों की उपस्थिति विधेयकों के विविध पहलुओं पर चर्चा और सदन के भीतर संसदीय मर्यादाओं के पालन को विचारणीय बताया। विधायिका वह पथ है जो राष्ट्र को सशक्त बनाता है:- देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है और इस यात्रा में विधायिका जनता के विश्वास के ईंधन से चलती है। राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक मूल्यों, विधायी मर्यादाओं और जनता के विश्वास की रक्षा के अपने संकल्प पर सदैव दृढ़ रहेगी। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को बधाई दी और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

दूषित पानी से प्रभावित इंदौर, जांच में जुटी राज्य समिति

भोपाल/इंदौर मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में दूषित जल पीने से हुई त्रासदी की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति बनाई गई है, जिसमें अध्यक्ष के अलावा तीन सदस्य होगें। आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि इंदौर नगर में प्रदूषित जल आपूर्ति के घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा कर निष्कर्ष, सुझाव एवं अनुशंसाएं प्रस्तुत करने के लिए राज्य शासन ने अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक समिति में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोडवे को सदस्य बनाया गया है। आयुक्त इंदौर संभाग, इंदौर सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। राज्य स्तरीय यह समिति इंदौर के भागीरथपुरा में घटित घटना के वास्तविक कारणों एवं आवश्यक तथ्यों का परीक्षण करना एवं घटना से संबंधित प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रबंधनगत कमियों का विश्लेषण करेगी। समिति घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना, भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आवश्यक सुझाव देना और अन्य मसलों को भी जांच में शामिल कर सकेगी। समिति संबंधित विभागों से आवश्यक अभिलेख, प्रतिवेदन एवं जानकारी प्राप्त कर सकेगी तथा आवश्यकता होने पर स्थल निरीक्षण भी करेगी। समिति द्वारा जांच प्रतिवेदन यथाशीघ्र किन्तु अधिकतम एक माह के भीतर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। दरअसल पिछले दिनों इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग बीमार हुए थे। इसके बाद सरकार ने कई अधिकारियों के तबादले किए और निलंबन भी किया। इस पर राजनीति भी खूब हो रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं।

याचिकाकर्ता पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया, असामान्य तर्क पर उठाए सवाल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लावारिस कुत्तों के मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके इलाके में बहुत सारे लावारिस कुत्ते हैं, जो पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं, भौंकते हैं, जिससे उन्हें नींद नहीं आती और उनके बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। याचिकाकर्ता ने इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनका कहना कि वे केवल वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन कर सकते हैं। एनएचआरसी को भी भी पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स (एबीसी नियम) केवल एक खास दायरे में काम करते हैं। कुत्तों को स्टरलाइजेशन या वैक्सीनेशन के बाद फिर से छोड़ दिया जाता है। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि दुनियाभर में यह स्वीकार किया जाता है कि लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी नसबंदी व्यवस्था जरूरी है। जयपुर और गोवा जैसी जगहों में यह सिस्टम सफल रहा है, लेकिन ज्यादातर शहरों में स्टरलाइजेशन प्रभावी नहीं हो पा रहा। स्टरलाइजेशन से कुत्तों की आक्रामकता कम होती है, लेकिन समस्या यह है कि कई शहरों में सही ढंग से यह नहीं हो रहा। इसे बेहतर बनाने के लिए पारदर्शिता लानी होगी और लोगों को जवाबदेह बनाना होगा। एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन लावारिस कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जिनका स्टरलाइजेशन नहीं हुआ है। इसे किसी वेबसाइट पर दर्ज किया जाए और कोई विशेष अथॉरिटी हो जो ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करे। प्रशांत भूषण के इस सुझाव पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने को क्यों नहीं कह सकते। प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत संदेश दे सकती हैं। उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाए, जो शायद व्यंग्य था। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि यह व्यंग्य में नहीं कहा गया था, बल्कि बहुत गंभीरता से कहा गया था। इसके अलावा, एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट और पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा इस मामले पर किए गए पॉडकास्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूर्व मंत्री की तरफ से पेश हुए वकील राजू रामचंद्रन से कहा कि थोड़ी देर पहले आप कोर्ट से टिप्पणियों को लेकर सावधान रहने की बात कर रहे थे। क्या आपको पता है कि आपके क्लाइंट किस तरह की बातें कर रही हैं? आपके क्लाइंट ने कोर्ट की अवमानना की है। हम उस पर ध्यान नहीं दे रहे, यह हमारी दरियादिली है। क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है? वह क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं। आपने टिप्पणी की कि कोर्ट को सावधान रहना चाहिए, लेकिन दूसरी ओर आपकी क्लाइंट जिसे चाहे और जिसके बारे में चाहे, हर तरह की टिप्पणियां कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मानव सुरक्षा, एबीसी नियमों के क्रियान्वयन और जानवरों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने पर विचार कर रहा है। सुनवाई आगे जारी रहेगी।

शंकराचार्य का दर्जा नहीं, समाज के साथ छल: स्वामी जितेंद्रानंद ने उठाया आरोप

वाराणसी प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर विवादों में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कभी शंकराचार्य नहीं थे। वे सिर्फ नकारात्मक प्रचार के जरिए समाज के साथ छल करने का काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 2020 में 2013-14 की वसीयत लेकर आए थे। 2020 में उनके अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गुरु (शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती) ने अपना उत्तराधिकारी बनाने से साफ इनकार किया था। उन्होंने वसीयत लिखने से भी साफ इनकार किया था।" उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी योग्यता को आधार बनाया और परंपरा को नकारकर कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। वे परंपरा को स्वीकार नहीं कर सकते थे और इसीलिए वसीयत नहीं लिख सकते थे। हाईकोर्ट ने गलत ठहराया था और सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद के पट्टाभिषेक पर पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के शपथपत्र के कारण प्रतिबंध लगा। आजीवन अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक नहीं हो सकता है।" अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से पट्टाभिषेक के दावों पर भी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पट्टाभिषेक सिंहासन पर बैठाकर होता है। अविमुक्तेश्वरानंद अपने गुरु की 13वीं करके पहुंचे थे और उस समय किसी शंकराचार्य ने दूर से जल छिड़क दिया था, लेकिन आप कह रहे हैं कि अभिषेक हो गया। यह गलत बयानबाजी है।" स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद पर कानून के साथ खिलवाड़ करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने पूछा, "देश के अखाड़ों, संन्यासियों या किसी प्रतिष्ठित संत ने अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं माना। उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।" इसी बीच, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के 'तिरंगे' वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के विभाजन का आधार सिर्फ धर्म था। अखंड भारत में सिर्फ 23 प्रतिशत मुसलमान थे, तब उन्होंने अलग देश बना लिया। आज भी 'गजबा-ए-हिंद' पर वे काम कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में धीरेंद्र शास्त्री का बयान बिल्कुल सही है।

ग्रीन स्टील तकनीक पर झारखंड सरकार और टाटा के बीच करार

रांची. वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड ने विश्व आर्थिक मंच में एक ऐतिहासिक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी न्यू एज ग्रीन स्टील प्रौद्योगिकियों में 11,000 करोड़ से अधिक के भारी निवेश की रूपरेखा तैयार करती है, जो एक स्थायी और कार्बन न्यूट्रल भविष्य और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की ओर एक ऊंची और लम्बी छलांग है। नीदरलैंड और जर्मनी के अत्याधुनिक नवाचारों को राज्य में लाकर यह पहल सुनिश्चित करती है कि झारखंड प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य बनाए रखते हुए हरित विनिर्माण के वैश्विक बदलाव में अग्रणी बना रहे। इस मौके पर टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन एवं प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। इस निवेश का मुख्य आधार हिसारना और ईजीमेल्ट जैसी क्रांतिकारी आयरनमेकिंग तकनीकियों की उपयोगिता है, जिसमें कुल 7,000 करोड़ का निवेश शामिल है। क्या है हिसारना परियोजना? हिसारना परियोजना एक ऐसी सफल तकनीक है, जिसमें स्वदेशी कोयले और निम्न श्रेणी के अयस्क का उपयोग करने की क्षमता है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्टील उत्पादन अधिक किफायती बनेगा। यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए एक गेमचेंजर है, जिसमें कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के साथ कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 80 प्रतिशत तक की कमी लाने की क्षमता है। नीदरलैंड में सफल पायलट परीक्षणों के बाद, टाटा स्टील 2030 तक जमशेदपुर में लगभग एक मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला एक वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, ईजीमेल्ट (इलेक्ट्रिकली असिस्टेड सिनगैस मेल्टर) तकनीक पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया की स्थिरता को बढ़ाएगी। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला समाधान है, जो सिनगैस का उपयोग करके कोक की खपत को कम करता है और कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है। औद्योगिक बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण आयरनमेकिंग के इन नवाचारों के अलावा इस निवेश पैकेज में एक अत्याधुनिक काम्बी मिल के लिए 1,500 करोड़ और टिनप्लेट विस्तार के लिए 2,600 करोड़ का प्रविधान किया गया है। यह व्यापक औद्योगिक खाका आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने, उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा करने और डी-कार्बोनाइजिंग दुनिया में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये पहल टाटा स्टील और झारखंड को बड़े पैमाने पर हरित आयरनमेकिंग तकनीक में फर्स्ट मूवर के रूप में स्थापित करती हैं, जिससे घरेलू प्रतिस्पर्धा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। युवा झारखंड औद्योगिक विरासत से हरित नवाचार तक राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह ऐतिहासिक समझौता झारखंड के परिवर्तनशील औद्योगिक सफर का प्रतीक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड एक पारंपरिक खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से निकलकर हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में झारखंड में टाटा समूह से जुड़े खनन एवं विनिर्माण स्थलों पर औद्योगिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार और टाटा स्टील के बीच एक अलग एमओयू पर भी सहमति बनी है। बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन ने मुख्यमंत्री की दावोस में सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा राज्य को ऐसे वैश्विक बिजनेस मंचों पर नियमित रूप से भाग लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने राज्य की आइटीआइ संस्थाओं को रोजगार और बाजार उन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील द्वारा उन्हें गोद लेने का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें कंपनी ने अपने सहमति जताई। इस अवसर पर टाटा समूह द्वारा मुख्यमंत्री को दावोस स्थित टाटा डोम में रात्रिभोज का आमंत्रण भी दिया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।

रांची का फैशन डिजाइनर जाएगा राष्ट्रपति भवन

रांची. झारखंड के लिए यह गर्व का विषय है कि राज्य के प्रख्यात टेक्सटाइल डिजाइनर एवं उद्यमी आशीष सत्यव्रत साहु को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘एट होम’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण भारत के राष्ट्रपति की ओर से भेजा गया है। रांची निवासी आशीष सत्यव्रत साहु जोहारग्राम फैशन ब्रांड के संस्थापक हैं। यह ब्रांड झारखंड की आदिवासी टेक्सटाइल और हस्तशिल्प परंपरा को समकालीन डिजाइन के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का कार्य करता है। इसके साथ ही वे खादीवाला ब्रांड के भी संस्थापक हैं, जो खादी आधारित डिजाइन और नवाचार के जरिए स्वदेशी वस्त्र परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। स्थानीय कारीगरों को आजीविका के नए अवसर पिछले कई वर्षों से आशीष सत्यव्रत साहु टेक्सटाइल और क्राफ्ट क्षेत्र में डिजाइन नवाचार, परंपरागत कारीगरी के संरक्षण और कारीगरों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्यरत हैं। उनके प्रयासों से झारखंड के अनेक स्थानीय कारीगरों को आजीविका के नए अवसर मिले हैं और उनकी पारंपरिक कला को नई पहचान प्राप्त हुई है। आशीष सत्यव्रत साहु के योगदान की सराहना देश के प्रधानमंत्री तथा राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा भी विभिन्न अवसरों पर की जा चुकी है। उनके डिजाइन देश के कई प्रतिष्ठित फैशन और हैंडलूम मंचों पर प्रदर्शित हो चुके हैं, जिससे झारखंड की समृद्ध आदिवासी वस्त्र परंपरा को व्यापक पहचान मिली है। राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ कार्यक्रम में आमंत्रण उनके रचनात्मक योगदान, सामाजिक प्रतिबद्धता और स्वदेशी वस्त्र संस्कृति के प्रति समर्पित प्रयासों की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल आशीष सत्यव्रत साहु के लिए, बल्कि पूरे झारखंड राज्य के लिए गर्व की बात है।

रूस की कड़ी टिप्पणी: ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का दावा सही नहीं

मास्को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क का प्राकृतिक हिस्सा मानने से इनकार किया है। इसके साथ ही एक प्रेस वार्ता में लावरोव ने दावा किया कि रूस किसी के अधिकार को चुनौती नहीं देता लेकिन खुद को भी नजरअंदाज करने की अनुमति नहीं दे सकता। रूसी डिप्लोमेसी के 2025 के परिणामों पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में लावरोव ने पश्चिम के भीतर "संकट की प्रवृत्तियों" के बारे में बात की, जिसमें ग्रीनलैंड इसका नवीनतम उदाहरण है, क्योंकि यह नाटो के भीतर भी बहुत ज्यादा तनाव पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक से पश्चिमी देश अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल स्वरूप का सक्रिय रूप से विरोध कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि रूस ग्रीनलैंड के आसपास की "गंभीर भू-राजनीतिक स्थिति" पर नजर रख रहा है। लावरोव ने आगे कहा कि रूस, ग्रीनलैंड के मामलों में दखल देने में दिलचस्पी नहीं रखता है और वाशिंगटन जानता है कि रूस की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके विचार से ग्रीनलैंड डेनमार्क का प्राकृतिक हिस्सा नहीं है। लावरोव के अनुसार, "यह न तो नॉर्वे का प्राकृतिक हिस्सा था और न ही डेनमार्क का। यह एक औपनिवेशिक जीत का हिस्सा है। यह दूसरी बात है कि अब वहां के लोग इसके आदी हो गए हैं और सहज महसूस करते हैं।" इसके साथ ही उन्होंने रूस की ताकत पर बात की और चुनौती भरे अंदाज में कहा कि रूस किसी को भी अपने कानूनी अधिकारों की अनदेखी नहीं करने देगा। उन्होंने कहा, "रूस हमेशा अपने हितों की रक्षा करेगा, किसी के भी कानूनी अधिकारों को चुनौती नहीं देगा, लेकिन वह अपने कानूनी अधिकारों को भी हल्के में नहीं लेने देगा।" यूरोपीय देशों ने कहा है कि ट्रंप की 'ग्रीनलैंड टैरिफ' घोषणा पिछले साल उनके प्रशासन के साथ हुए ट्रेड डील का उल्लंघन होगी। ईयू नेता गुरुवार को ब्रसेल्स में एक आपातकालीन सम्मेलन में संभावित जवाबी कार्रवाई पर चर्चा करेंगे।

झारखंड के शहरी परिवहन में सहयोग करेगा स्वीडन

रांची. विश्व आर्थिक मंच दावोस के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने टाटा स्टील के शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के दौरान टाटा स्टील ने झारखंड में न्यू एज ग्रीन स्टील टेक्नोलॉजी के तहत कुल 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे लेकर आशय पत्र एवं सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस निवेश के अंतर्गत हिरसाना ईजी एंड मेल्ट टेक्नोलॉजी में 7,000 करोड़ रुपये, काम्बी मिल परियोजना में 1,500 करोड़ रुपये तथा टिनप्लेट विस्तार परियोजना में 2,600 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। ये सभी परियोजनाएं पर्यावरण अनुकूल ग्रीन स्टील तकनीक पर आधारित होंगी, जिनमें नीदरलैंड और जर्मनी की उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार टिकाऊ औद्योगिक विकास, स्वच्छ तकनीक और स्थानीय रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। टाटा स्टील के साथ यह साझेदारी राज्य की औद्योगिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साथ-साथ झारखंड को हरित औद्योगिक परिवर्तन का अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह निवेश न केवल राज्य के खनिज आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देगा, बल्कि ग्रीन एनर्जी और जलवायु-अनुकूल विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी गति प्रदान करेगा। हिताची कम्पनी ने विद्युत, उच्च स्तरीय ग्रिडिंग एवं उन्नत अवसंरचना के लिए निवेश पर अपना प्रस्ताव दिया है। मुख्यमंत्री को व्हाइट बैच से किया गया सम्मानित  विश्व आर्थिक मंच की तरफ से मुख्यमंत्री को व्हाइट बैज प्रदान किया गया तथा मुख्यमंत्री की ओर से सहयोग का औपचारिक पत्र सौंपा गया। यह सहयोग फोरम के उत्कृष्टता केंद्रों के अनुरूप तीन प्रमुख विषयों क्रिटिकल मिनरल्स एवं नई ऊर्जा, तथा जलवायु और जैव विविधता संरक्षण पर आधारित है। राज्य सरकार का विजन 2050 व्यापक रूप से फोरम की समावेशी समाज की अवधारणा के साथ पूर्णतः मेल खाती है। इस सहभागिता के माध्यम से सीख, ज्ञान-विनिमय और क्रियान्वयन आधारित सहयोग की दिशा में एक सार्थक और दीर्घकालिक साझेदारी की कोशिश की जाएगी। वहीं, पिछले वर्ष झारंड सरकार के स्वीडन के आधिकारिक यात्रा का प्रतिफल भी सामने आया है। स्वीडन ने अर्बन ट्रांसपोर्ट में निवेश को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाया है। इसको लेकर स्वीडन और भारत के बीच अप्रैल में संभावित सहयोग और निवेश के लिए राउंड टेबल मीटिंग आयोजित किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री की स्वीडन की उन कंपनियों से भी मुलाकात हुई, जिनसे स्वीडन की यात्रा के दौरान पिछले वर्ष बातचीत हुई थी। वर्ल्ड वुमन लीडर्स फोरम के प्रतिनिधियों से मुलाकात बैठक में महिला राजनीतिक नेतृत्व को सशक्त बनाने, विशेषकर हाशिये पर रहने वाले वर्गों से आने वाली महिलाओं के लिए झारखंड सरकार के साथ एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की गई। साथ ही भारत चैप्टर की स्थापना तथा सभी राजनीतिक दलों की महिला प्रतिनिधियों के लिए एक साझा और गैर-दलीय मंच के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसमें संवाद, क्षमता निर्माण और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन, स्वीडन इंडिया बिज़नेस काउंसिल की चीफ इंडिया रिप्रेजेंटेटिव सेसिलिया ओल्डने, वुमन पालिटिकल लीडर्स फोरम की अध्यक्ष सिलवाना कोच-मेहरिन, विश्व आर्थिक मंच से विराज मेहता, हिताची इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख भारत कौशल एवं टेक महिंद्रा के आइएमईए डिवीजन के प्रमुख एवं अध्यक्ष साहिल धवन शामिल हुए।