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दिल्ली में भाजपा मुख्यालय: नितिन नबीन बने नए अध्यक्ष, मोदी का समर्थन

नई दिल्ली भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पदभार संभाला।इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जे.पी. नड्डा मौजूद हैं।भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है। मंगलवार को औपचारिक रूप से नितिन नबीन के नाम का ऐलान हुआ। नए अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम वरिष्ठ नेता, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ लोग शामिल हुए । खास बात यह भी है कि भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को भी 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है। भाजपा के इतिहास में यह संयोग संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद की जा रही है। आईए नितिन नबीन के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं। 23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई। दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से उन्होंने सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की। बिहार की राजनीति में नितिन नबीन का नाम नया नहीं है। राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली, लेकिन पहचान अपने दम पर बनाई। उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती थी, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे थे। पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई।पिता के निधन के बाद 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार सदन पहुंचे। परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट से उनकी राजनीतिक जमीन और मजबूत हुई। 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने। बिहार विधानसभा में वे उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी जीत की निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का आधार रही है।बिहार की एनडीए सरकार में नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे अहम विभाग संभाले। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल ही उन्हें पार्टी के भीतर अलग पहचान देता है। हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।नितिन नबीन की असली ताकत संगठन में दिखी। 2016 से 2019 तक बिहार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। इसके बाद वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने। संगठन में पहचान बनी तो पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर जिम्मेदारियां सौंपीं। सिक्किम में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के तौर पर उन्होंने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली।छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है। जिस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था और ज्यादातर सर्वे कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहे थे, उस वक्त भाजपा ने नबीन पर भरोसा जताया। संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का नतीजा रहा कि भाजपा ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की।संगठन के भीतर उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ जनों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पांच बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद के अनुभव ने नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाया।

अब बिना नली के जांच: 2040 में पिल एंडोस्कोपी से हार्ट व फैटी लिवर मरीजों को राहत

इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल द्वारा राष्ट्रीय स्तर की इंदौर जीआई कान्क्लेव का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के लिवर और एंडोस्कोपी विशेषज्ञों ने गैस्ट्रोएंट्रोलाजी में हो रहे आधुनिक शोध और इलाज की नई तकनीकों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने चर्चा की कि वर्ष 2040 तक आज की जटिल एंडोस्कोपी जांच एक साधारण पिल (कैप्सूल) से संभव हो जाएगी। यह कैप्सूल न सिर्फ पाचन तंत्र की जांच करेगा, बल्कि फैटी लिवर, हार्ट की बीमारी और लकवे जैसी गंभीर समस्याओं की पहचान और इलाज में भी मददगार होगा। इसके अलावा शराब के बढ़ते सेवन और उससे जुड़ी लिवर बीमारियों पर विशेष चिंता जताई गई।   विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है। कान्क्लेव में पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित वरिष्ठ लिवर विशेषज्ञ शिव सरिन की पुस्तक ओन योर बाडी का विमोचन किया गया। साथ ही पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित एंडोस्कोपी विशेषज्ञ डी नागेश्वर रेड्डी का सम्मान किया गया। इंदौर के वरिष्ठ चिकित्सक सुनील जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कांफ्रेंस के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अमित अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस के पहले दिन सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) पर आधारित 16 जटिल केस किए गए। इनमें गालब्लैडर कैंसर, पैंक्रियाज कैंसर, पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट में प्लास्टिक और मेटैलिक स्टेंट डालना, गैस्ट्रिक वैरिक्स में ग्लू और काइल से इलाज जैसे मामले शामिल रहे। लंबे समय से खून की उल्टी से पीड़ित मरीजों का ईयूएस के माध्यम से सफल उपचार भी किया गया। लाइव डेमो के जरिए ईयूएस एनाटामी को समझाया गया और बायोप्सी व स्टेंट डालने की प्रक्रिया बताई गई। इसके अलावा कांफ्रेंस में एल्कोहालिक लिवर डिजीज, मेटाबालिक एल्कोहालिक लिवर डिजीज (मेट-एएलडी), फैटी लिवर और एसाइटिस यानी पेट में पानी भरने की समस्या पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश लिवर रोग शराब, फैटी लिवर और गलत खानपान से होते हैं। इस दौरान नई दिल्ली के आदर्श चौधरी, अमित महदेव, मुंबई के अनिल अरोरा, हैदराबाद के प्रमोद गर्ग आदि को सम्मानित किया गया।

फर्ग्यूसन का बयान: भारत के खिलाफ टी20 सीरीज से वर्ल्ड कप प्लान होगा मजबूत

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन ने कहा कि भारत के खिलाफ बुधवार से शुरू होने वाली पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप से पहले उनकी टीम को तैयारी के लिए उचित मंच प्रदान करेगी। भारत के खिलाफ हाल ही में 2-1 से वनडे श्रृंखला जीतने से उत्साहित न्यूजीलैंड की टीम नागपुर में पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में विश्व कप के सह-मेजबान भारत से भिड़ेगी। भारत में कीवी टीम के साथ जुड़ने वाले फर्ग्यूसन ने रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, ‘यह सचमुच बहुत अच्छी तैयारी होगी। मैं जानता हूं कि यह वह मैदान नहीं होंगे जहां हम विश्व कप में खेलेंगे लेकिन वहां खेलने का अनुभव, उसका प्रभाव और मैदानों की स्थिति का आकलन विश्व कप से पहले शानदार तैयारी होगी।’ उन्होंने कहा, ‘भारत दुनिया की शीर्ष टीमों में से एक है और घरेलू परिस्थितियों में उसका कोई सानी नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे खिलाड़ी वनडे श्रृंखला की तरह ही अच्छा प्रदर्शन करेंगे।’ आईपीएल 2026 के लिए पंजाब किंग्स की टीम में शामिल फर्ग्यूसन ने कहा कि वह यूएई में इस महीने की शुरुआत में आईएलटी20 मैच के दौरान पिंडली में चोट से उबर गए हैं और पिछले एक सप्ताह से पूरी ताकत से गेंदबाजी कर रहे हैं। न्यूजीलैंड ने हालांकि पहले मैच के लिए जो टीम घोषित की है उसमें फर्ग्यूसन का नाम नहीं है। वह टी20 विश्व कप के दौरान कुछ दिनों के लिए पितृत्व अवकाश भी ले सकते हैं क्योंकि उनके बच्चे का जन्म 20 फरवरी को होने की उम्मीद है। इस तेज गेंदबाज ने कहा कि उनका फिलहाल संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं अब भी फिट महसूस करता हूं। मुझे अब भी लगता है कि मैं टीम में योगदान दे सकता हूं। अगर कभी ऐसा दिन आए जब मैं सुबह उठूं और देखूं कि मैं जीत में योगदान नहीं दे रहा हूं या मुझे लगे कि मैं टीम के लिए खेलने के लायक नहीं हूं तो मैं संन्यास ले लूंगा।’ भारत के खिलाफ 2023 वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में अपना आखिरी वनडे मैच खेलने वाले इस 34 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि वह अब भी 50 ओवर का क्रिकेट खेलने के लिए प्रयासरत हैं। फर्ग्यूसन ने कहा, ‘मुझे 50 ओवर का क्रिकेट बहुत पसंद है। टी20 की तुलना में इसी से मुझे थोड़ी ज़्यादा पहचान मिली।’  

रांची के स्कूल में बच्चों ने बनाए 10000 सीड बॉल

रांची. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल करने के लिए उत्क्रमित मध्य विद्यालय महावीर नगर ऊपर टोला के प्रधानाचार्य रंथु साहु के नेतृत्व में शून्य से सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को हरित विद्यालय की राह दिखाई जा रही है। बच्चों को सीड बॉल बनाने के गुर सिखाए जा रहे हैं ताकि उन्हें सामाजिक सरोकार से जोड़ा जा सके। यह आइडिया स्कूल के प्राचार्य का था तो बच्चों ने भी जमकर पसीना बहाया और सीड बाल बनाकर अपने आसपास के क्षेत्रों में उसे फेंककर हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया। इस बार अच्छी वर्षा होने के कारण अपेक्षित सफलता भी मिली। प्राचार्य ने उत्साहित होकर कहा कि जिन जिन जगहों पर सीड बाल बच्चों के द्वारा फेंके गए थे वहां नई पौध निकल आई है। 10 हजार सीड बॉल किए तैयार प्राचार्य ने बताया कि बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से सीड बाल तैयार किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। बीज विद्यालय के पोषक क्षेत्र से विभिन्न प्रकार के बीज जैसे कटहल, आम, जामुन, महुआ, बढ़हर, करंज, इमली, कुसुम, डोरी, खजूर, केंद, शरीफा के अलावे विभिन्न प्रकार के बीज बच्चों के द्वारा विद्यालय में इकट्ठा किया गया। दस हजार सीड बाल बनाने के लिए विद्यालय के चार हाउस, इको क्लब, बाल संसद अन्य बच्चे एवं शिक्षक के सहयोग से तैयार किया गया। बताया कि सीड बाल वहां फेका गया जहां जमीन खाली थी और जहां झाड़ियों का झुंड था ताकि नई पौध निकालने पर उसका कोई नुकसान न हो। स्कूल प्रबंधन ने खलारी सीसीएल कर्मी को दिए तीन हजार सीड बॉल स्कूल प्रबंधन ने खलारी सीसीएल कर्मी को भी लगभग तीन हजार सीड बाल दिए। जहां कोयला निकालकर मिट्टी भरी गई, जहां खाली जमीन पड़ी थी, वहां सीड बाल लगाने के लिए दिए ताकि पर्यावरण को हरा भरा बनाया जा सके। इस कार्य में अपेक्षित सफलता मिली है और क्षेत्र के लोग इस कार्य की सराहना भी कर रहे हैं।

ईरान में तनाव बढ़ा, प्रदर्शनकारियों पर शुरू हुई सख्त कार्रवाई

ईरान ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए व्यापक जनप्रदर्शन  के बीच सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान के पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने ‘दंगाइयों’ को तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम जारी किया है। पुलिस प्रमुख ने सरकारी टीवी पर कहा कि जो युवा “भ्रमित होकर” प्रदर्शनों में शामिल हुए, वे यदि सरेंडर कर दें तो उनके साथ नरमी बरती जाएगी। लेकिन चेतावनी दी गई है कि तय समय में आत्मसमर्पण न करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।   बीते साल के अंत में शुरू हुए ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और ईरानी मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन के खिलाफ थे। लेकिन जल्द ही ये आंदोलन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाली मांगों में बदल गए। इसे हाल के वर्षों में ईरानी शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गए और इसके पीछे अमेरिका व इजरायल जैसे ईरान-विरोधी देशों की साजिश थी। इसी बीच, ईरान ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर भी रोक लगा दी, जिससे वास्तविक हालात की जानकारी बाहर नहीं आ सकी।   अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट धीरे-धीरे बहाल किया जाएगा। सोमवार को कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के प्रमुखों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे “जीविका और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात काम करेंगे।” राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और न्यायपालिका प्रमुख घोलामहुसैन मोहसिनी एजई ने हिंसा भड़काने वालों को कड़ी सजा देने की बात दोहराई। इस बीच, मानवाधिकार संगठनों ने हालात पर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ईरान मौत की सजा को डराने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। UN के मुताबिक, चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है और पिछले साल करीब 1,500 लोगों को फांसी दी गई। ईरान ह्यूमन राइट्स नामक एनजीओ का दावा है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। वहीं, सरकार ने करीब 3,000 गिरफ्तारियों की बात कही है, लेकिन मानवाधिकार समूहों के अनुसार यह आंकड़ा 20,000 तक पहुंच सकता है।

भारत दौरे से बौखलाया पाकिस्तान, UAE और सऊदी में चालें तेज

इस्लामाबाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के दिल्ली दौरे के बाद पाकिस्तान में हलचल तेज हो गई है। भारत–यूएई के संयुक्त बयान में सीमा-पार आतंकवाद की आलोचना को इस्लामाबाद के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान में इस पर व्यापक चर्चा हो रही है। MBZ का यह संक्षिप्त, लगभग तीन घंटे का दिल्ली दौरा रणनीतिक रूप से अहम बताया जा रहा है। इसी दौरान भारत और यूएई ने रक्षा सहयोग, डिफेंस टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के संकेत दिए। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इसी पृष्ठभूमि में, यूएई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान को फोन किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बातचीत की पुष्टि करते हुए ‘ताजा घटनाक्रम और आपसी हितों’ पर चर्चा की बात कही, हालांकि विवरण साझा नहीं किया। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत–यूएई की बढ़ती नजदीकी पाकिस्तान को असहज कर रही है।   अमेरिका स्थित विश्लेषक डेरेक जे. ग्रॉसमैन के मुताबिक, इस फोन कॉल को भारत–यूएई रिश्तों से उपजी पाकिस्तान की चिंता के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। विशेषज्ञ यह भी इंगित करते हैं कि क्षेत्र में सऊदी अरब और यूएई के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच यूएई भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, जहां भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरता दिख रहा है। इसी कारण दिल्ली–आबूधाबी रक्षा सहयोग को पाकिस्तान अपनी रणनीति के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।

हिंदू धर्म से था लगाव, बालाघाट में जगद्गुरु शंकराचार्य के सान्निध्य में मोहसिन ने अपनाया सनातन

बालाघाट जात-पात में बंटे सकल सनातनी हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए हिंदू एकता परिचय देने के लिए बालाघाट जिला मुख्यालय के इतवारी कृषि उपज मंडी के प्रागंण में मंगलवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन अनंत श्री धर्म सम्राट श्रीमद जगत स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज के मुख्य आतिथ्या में किया गया। आयोजित इस हिंदू सम्मेलन में जगत गुरु शंकराचार्य की मौजूदगी में बालाघाट के मोहसिन ने सनातन धर्म से प्रेरित होकर हिंदू धर्म को अपनाया है, उनके इस घर वापस पर जगत गुरु ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी जन सनातनी है, बस उनकी घर वापसी का इंतजार सभी को है। चार साल से इंतजार कर रहा था मोहसिन     सनातन धर्म अपनाने को लेकर पूर्व में वार्ड क्रमांक 19 आजाद चौक व वर्तमान में वार्ड क्रमांक 13 गर्रा निवासी ने बताया कि वे बचपन से ही हिंदू धर्म व विचार के प्रति आकर्षित रहे हैं।     हिंदू धर्म सभी को एक साथ मिलकर रहने का संदेश दिया जाता है, यहां गाय को माता मानकर पूजा जाता है।     इस कारण से वे सदैव से ही हिंदू धर्म के प्रति लालायित रहे है। उन्होंने बताया कि विगत चार वर्षाें से सनातन धर्म अपनाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन उचित मंच नहीं मिल पा रहा था।     जब पता चला कि हिंदू सम्मेलन हो रहा है, और जगत गुरु भी यहां मौजूद तो इससे बेहतर मौका उन्हें दूसरा ओर नहीं मिलना था।     बता दें कि मोहसिन शेख के घर पर उनकी मां और मौसी है उन्होंने वर्तमान में अकेले ही सनातन धर्म को अपनाया है। हिंदू सम्मेलन बनेगा घर वापसी का माध्यम हिंदू सम्मेलन के दौरान विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष यज्ञेश लालु चावड़ा ने कहा कि ये बड़े ही हर्ष का विषय है कि एक मुस्लिम भाई ने आज घर वापसी की है, और सनातन धर्म को अपनाया है, जो भी मुस्लिम भाई या अन्य जो भटक गए है और दूसरा धर्म अपना लिए है उनके लिए भी हिंदू सम्मेलन वापसी का माध्यम है, जो भी भाई घर वापस आना चाहते है वे बिना किसी झिझक के घर वापसी कर सकते है, आगामी समय में भी ऐसे हिंदू सम्मेलन पूरे देशभर में आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जिला संयोजक शुभम श्रीवास सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

आलेख – छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क विभाग) रायपुर, बसंत पंचमी 23 जनवरी से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होने जा रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव से छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य विमर्श खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साहित्य महोत्सव को लेकर आम-लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आज जब सोशल मीडिया के कोलाहल मंे ज्ञान की धारा अक्सर सूचनाओं के शोर में दब जाती है। ऐसे समय में साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जहां विचार-विमर्श के बीच संवाद की संस्कृति जीवित रहती है। सृजन वही जन्म लेता है, जहां मन खुला हो और कथा वही आकार लेती हैं जहां मनुष्य अपने सत्य से संवाद करने का साहस रखता है। साहित्य महोत्सव के लोगो (डिजाइन) में अंकित ‘‘आदि से अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा हैै। तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है क्योंकि इसमें राज्य की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़े, जनजातीय परंपराएं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सभी का सुंदर सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा आदि से अनादि तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है, और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियां लिखती रहेंगी। साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे, इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र और 3 संवाद सत्र आयोजित किये जाएंगे जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है, इसमें युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता रहेगी। नई पीढ़ी को साहित्य विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है। उत्सव के दौरान पुस्तक मेला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 स्टॉल लगाएं जाएंगे जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जाएगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से चाणक्य नाटक का मंचन किया जाएगा जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्य कला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शको को राज्य की जीवंत लोक संस्कृति से रू-ब-रू कराया जाएगा। विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगी, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा और लोक स्मृति में बसे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की एक रचना – हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था, मैं व्यक्ति को नहीं, हताशा को जानता था, हम दोनों साथ चले, साथ चलने को जानते थें यही वह साहित्य है जो मनुष्य को धैर्य देता और साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।

पहली बार इस्लामिक स्टेट के रडार पर चीन, जानिए आतंकियों की खुली चेतावनी का कारण

नई दिल्ली अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकी हमले की इस्लामिक स्टेट ने जिम्मेदारी ली है। आतंकी संगठन के इस हमले में एक चीनी नागरिक समेत 7 लोगों की मौत हुई है। इस घटना की फिलहाल जांच हो रही है, लेकिन इस्लामिक स्टेट ने चीनी रेस्तरां को ही टारगेट करने की वजह बताई है। आतंकी संगठन ने अपनी ऑनलाइन दावा किया है कि उसने चीन में उइगुर मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों के चलते यह हमला किया है। इसी कारण उसने चीनी रेस्तरां को ही टारगेट किया ताकि किसी चीनी को भी नुकसान हो। यही नहीं इस्लामिक स्टेट ने दावा किया है कि इस हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं।   इस्लामिक स्टेट का कहना है कि इस हमले में तालिबान के कई कमांडर भी मारे गए हैं। हालांकि उसके इस दावे की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं की जा सकती। अफगानिस्तान के प्रशासन ने अब तक इस धमाके की वजह नहीं बताई और अब तक इसे आतंकी हमला भी नहीं कहा है। तालिबान के होम मिनिस्टर मुफ्ती अब्दुल मतीन कानी ने कहा कि अभी इस धमाके की जांच की जा रही है। वहीं इस्लामिक स्टेट का जो दावा है, उसे चीनी नागरिकों के लिए भविष्य में भी एक खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। अफगानिस्तान में चीन के भी कुछ लोगों की मौजूदगी है। ऐसे में उइगुर मुसलमानों के नाम पर इस्लामिक स्टेट का यह बयान उसे धमकाने वाला लग रहा है। बता दें कि उइगुर मुसलमानों पर अत्याचार के नाम पर पाकिस्तान समेत ज्यादातर मुसलमान देशों की चुप्पी रहती है। वहीं इस्लामिक स्टेट ने इसे चीनी नागरिकों पर हमले की वजह बताया है। उसका यह कबूलनामा निश्चित तौर पर चीन के लिए चिंता की बात है। 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान की वापसी हुई थी। तभी दुनिया के तमाम देशों ने अफगानिस्तान से एग्जिट कर लिया था। लेकिन चीन के अब भी कई आर्थिक प्रोजेक्ट अफगानिस्तान में चल रहे हैं। यह हमला काबुल के शहर-ए-नाव जिले के एक चीनी रेस्तरां में हुआ। पुलिस के प्रवक्ता खालिद जदरान ने कहा कि यह रेस्तरां एक अफगानी नागरिक द्वारा ही चल रहा था, जिसमें चीन का एक शख्स और उसकी पत्नी पार्टनर हैं। किसने कही 20 लोगों के मारे जाने की बात आमतौर पर इस रेस्तरां में चीनी लोगों की मौजूदगी रहती है। इसी को देखते हुए इस्लामिक स्टेट ने रेस्तरां को टारगेट कर दिया। जदरान का कहना है कि इस धमाके में कुल 7 लोग मारे गए हैं, जिनमें एक चीनी नागरिक भी है। यह धमाका रेस्तरां के किचन में हुआ। हमले वाली जगह के पास ही एक सर्जिकल सेंटर चलाने वाली इटालियन चैरिटी का कहना है कि उसके पास 20 लोगों के मरने की जानकारी है। इनमें से 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं चीनी सरकारी मीडिया CCTV की रिपोर्ट के अनुसार हमले में दो चीनी नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा एक सिक्योरिटी गार्ड मारा गया है। वहीं टोलो न्यूज की एक फुटेज में दिखाया गया है कि धमाके के बाद लोग यहां-वहां भाग रहे हैं।  

उत्तराखंड: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले 68 जोड़े हुए रजिस्टर्ड, सामने आए नवीनतम आंकड़े

उत्तराखंड उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हुए एक साल पूरे होने को हैं. 27 जनवरी को यूसीसी लागू हुए एक साल पूरे हो जाएंगे. उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है. यूसीसी लागू होने के बाद से सूबे में 4 लाख 74 हजार 447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है. उत्तराखंड सरकार ने यह जानकारी दी है. यूसीसी लागू होने के बाद अब दंपति कहीं से भी ऑनलाइन विवाह का पंजीकरण करा सकते हैं. पुराने कानून के तहत शादी का पंजीकरण कराने के लिए दंपति को तय तारीख पर दो गवाहों के साथ उप निबंधक कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ता था. यूसीसी लागू होने से पहले सूबे में शादियों का पंजीकरण ‘उत्तराखंड अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत किया जाता था. पुराने कानून के तहत शादियों के रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी. उत्तराखंड सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक सूबे में हर रोज औसतन 1400 शादियों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है. पुराने कानून से रजिस्ट्रेशन का औसत प्रतिदिन 67 शादियों का था. यूसीसी लागू होने के बाद से सूबे में 316 लोगों ने ऑनलाइन तलाक प्रमाणपत्र भी प्राप्त किए हैं.   लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए भी 68 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं. दो लोगों ने लिव इन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाण पत्र भी लिया है. उत्तराखंड सरकार का दावा है कि विवाह पंजीकरण के आवेदन औसतन पांच दिन के भीतर जारी कर दिए जा रहे हैं. हालांकि, इसके लिए समय सीमा 15 दिन की निर्धारित की गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड ने यूसीसी लागू कर अन्य राज्यों को रास्ता दिखाया है. उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में जिस पारदर्शिता और सरलता के साथ यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे पूरी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ा है. सीएम धामी ने कहा कि इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अब यूसीसी के तहत पंजीकरण करा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड की यूसीसी हर दृष्टि से एक आदर्श कानून साबित हुआ है.