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बेटी को मिलेगा माता-पिता की पेंशन में अधिकार, नए नियम जल्द होंगे लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब बेटी को माता-पिता पेंशन की पेंशन में अधिकार मिलेगा। ये नियम प्रदेशभर में 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। राज्य सरकार पेंशन नियमों में पहली बार बड़े संशोधन करने जा रही है। प्रस्ताव तैयार किए जाने के बाद कैबिनेट में आने का इंतजार है। दरअसल, प्रस्तावित नियमों गौर करें तो भले ही घर में बेटा हो, लेकिन अगर बेटी उससे बड़ी है तो वही परिवार पेंशन की पात्र होगी। अविवाहित पुत्री/विधवा और तलाकशुदा पुत्री को आजीवन पेंशन मिलती रहेगी। आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम दिव्यांग पुत्र/पुत्री/भाई को भी पेंशन की पात्रता होगी। ये नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। नए नियमों में दिव्यांगजनों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जो पुत्र, पुत्री या भाई आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम हैं, उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आश्रित को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में यह अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत होती है, जबकि एनपीएस में एन्युटी के आधार पर पेंशन तय होती है। वहीं यूपीएस में निश्चित पेंशन का प्रावधान है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन पहले पत्नी को और पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद अवयस्क बच्चों को मिलती है। नए पेंशन नियम लागू होने के बाद बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उन्हें परिवार में बराबरी का अधिकार मिलेगा। सरकार का यह फैसला महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल से होंगे लागू  इसके अलावा अविवाहित बेटी, विधवा या फिर तलाकशुदा बेटी को भी आजीवन पेंशन मिलने की योजना रहेगी. वहीं अपना जीवन यापन न कर पाने वाले अक्षम दिव्यांग बेटे-बेटी या भाई को भी पेंशन की पात्रता दी जाएगी. नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है. यानि यह योजना नए वित्त वर्ष में लागू होगी, बता दें कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर के लिए मिलती है, जबकि ओल्ड पेंशन स्कीम में आखिरी सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है जो कि अंतिम एन्युटी के आधार पर बनती है. जहां अगर कर्मचारी की मौत होती है तो फिर उसकी पेंशन उसकी पत्नी को दी जाती है, जो 30 प्रतिशत होती है. ऐसे में अब यह बदलाव होगा कि अगर पति-पत्नी दोनों की मौत होती है तो इस स्थिति में पेंशन पर उनकी बड़ी संतान का अधिकार होगा, जिसमें अव्यस्क बच्चा भी शामिल होगा.  यह भी होगा बदलाव  वहीं शादी के बाद भी बड़ी बेटी या फिर बड़े बेटे को पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. अगर कोई पति पत्नी दोनों पेंशन स्कीम के तहत आते हैं, यानि दोनों की सरकारी नौकरी होगी और उन्हें पेंशन मिलता है तो उनकी मौत के बाद इसका अधिकार दोनों की फैमिली को मिलेगा. वहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की बेटी या बेटे को हर साल यह भी बताना होगा कि वह अविवाहित या फिर विधवा है, यानि पूरी जानकारी के बाद ही वह पेंशन के नियमों में पात्रता रखेंगे.  कैबिनेट बैठक में पास होगा प्रस्ताव  बताया जा रहा है कि जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में भी पास होगा. सीएम मोहन यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट की बैठक में पेंशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पास होगा, जबकि इसे नए वित्त वर्ष में लागू किया जाएगा. इसके लिए वित्त विभाग की तरफ से काम शुरू हो गया है. जबकि नए बजट में इसका प्रावधान भी कर दिया जाएगा.   अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता बता दें कि, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है, जो ओल्ड पेंशन स्कीम में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत है। एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है। परिवार पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी को पति और पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता होती है।

PWD ने 40 हजार किमी सड़कों का सेफ्टी ऑडिट कराया, सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन की अहम शुरुआत

भोपाल  एमपी में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) पहली बार सड़कों का अनिवार्य रूप से रोड सेफ्टी ऑडिट करवाने जा रही है। एनएचएआइ के एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निर्मित स्टेट हाई-वे सहित अन्य जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। जिसमें सड़कों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से विभिन्न मापदंडों में परखा जाएगा। सुरक्षा के मापदंडों पर होगी परख प्री-डिजाइन स्टेज से लेकर कंस्ट्रक्शन तक सेफ्टी का ऑडिट विभिन्न चरणों में किया जाएगा। उसके बाद सड़क की शुरुआत होने के बाद भी उसे सुरक्षा के मापदंडों पर फिर परखा जाएगा। जहां कमी सामने आएगी उसको दोबारा दुरुस्त किया जाएगा। ऑडिट के दौरान जो सड़कें विभाग द्वारा बनाई गई हैं उनकी खामियों को सुरक्षा कारणों के तहत चिह्नित किया जा रहा है।  40 हजार किमी सड़कों का कराया ऑडिट PWD विभाग द्वारा बनाई गई प्रमुख मौजूदा सड़कों का भी विभाग द्वारा सेफ्टी ऑडिट करवाया गया। जिसमें प्रमुख रूप से 441 खामियां पाई गई हैं। इनमें से करीब 200 खामियां ऐसी थीं, जिनमें थोड़े बहुत सुधार की आवश्यकता रही। जिन्हें ठीक कर दिया गया। वहीं 200 से ज्यादा ऐसी भी गलतियां चिह्नित की गईं जिनमें कंस्ट्रक्शन से जुड़ा काम करना था। जैसे अंधा मोड़, क्यूकल अंडर पास और सेफ क्रॉसिंग का निर्माण करना, जिस पर भी विभाग द्वारा लगभग काम पूरा कर लिया गया है। सड़क हादसों को रोकने की दिशा में यह बड़ी पहल साबित होगी। तकनीकी खामी के कारण नहीं होगी दुर्घटना इसलिए रोड सेफ्टी ऑडिट पर विभाग का जोर रोड सेफ्टी ऑडिट से सड़क पर किसी तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसमें सड़क की डिजाइन, साइन बोर्ड, रोशनी, गति नियंत्रण, पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों की सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट्स का आकलन किया जाता है।  कई बार सड़कें बनने के बाद छोटी-छोटी खामियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं, जिन्हें ऑडिट के जरिए सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया नई सड़कों के निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और उपयोग में आने के बाद भी की जाती है। तीन चरणों में ऐसे होगा सेफ्टी ऑडिट 1. प्री-डिजाइन स्टेज -सड़क की आवश्यकता और स्थान का अवलोकन – ट्रैफिक वॉल्यूम-वाहन के प्रकार – स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसे प्वॉइंट का चयन। 2. डिजाइन स्टेज -रोड चौड़ाई, -कर्व, ग्रेड और जंक्शन डिजाइन -फुटपाथ, स्टॉप और अन्य ट्रैक -ड्रेनेज, लाइटिंग, साइन बोर्ड और मार्किंग -कंस्ट्रक्शन स्टेज वर्क जोन सेफ्टी – बैरिकेडिंग और डायवर्जन – रात की विजिबिलिटी और चेतावनी संकेत प्री-ओपनिंग – सड़क खोलने से पहले निरीक्षण – सभी साइन, मार्किंग और स्पीड ब्रेकर की जांच – ब्लैक स्पॉट की पहचान पोस्ट-ओपनिंग – दुर्घटना डेटा का विश्लेषण – ट्रैफिक का अध्ययन – सुधारात्मक उपाय

PF के पैसे अब ATM से होंगे निकाले, AI करेगी सुविधा प्रदान, 8 करोड़ लाभार्थियों के लिए बड़ा ऐलान

 नई दिल्ली अधिकतर लोगों की ये शिकायतें होती हैं कि PF निकालना सबसे कठिन काम है. अभी भी देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जो केवल जटिल प्रक्रिया की वजह से पीएफ अमाउंट निकाल नहीं पाते. लेकिन अब सबकुछ आसान होने वाला है इसी साल से, सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है, और भविष्य निधि संगठन यानी EPFO अब अपने सिस्टम को पूरी तरह से बदलने जा रहा है. EPFO 3.0 के तहत ये बदलाव हो रहा है.  वैसे तो पिछले कुछ महीनों से PF निकासी से जुड़े नियम आसान हुए हैं, जिससे क्लेम सेटलमेंट में तेज उछाल आया है, क्योंकि क्लेम दौरान पहले Error के आने पर लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब ऑनलाइन गलती सुधारने की सुविधा दी गई है, जिससे सिस्टम बेहतर हुआ है, लेकिन EPFO 3.0 को अब बेहद हाईटेक माना जा रहा है, यानी सबकुछ डिजिटल होगा, और यूजर फ्रेंडली.  EPFO 3.0 में क्या-क्या बदलाव होंगे? सबसे बड़ा बदलाव यह है कि EPFO अब बैंक की तरह काम करेगा. अभी तक अगर किसी कर्मचारी को PF से जुड़ी कोई समस्या होती थी, तो उसे उसी क्षेत्रीय EPFO का दफ्तर जाना पड़ता था, जहां उसका अकाउंट जुड़ा होता था. लेकिन EPFO 3.0 लागू होने के बाद देश के किसी भी EPFO दफ्तर से अपना काम कराया जा सकेगा. यह सुविधा खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए बहुत फायदेमंद होगी, जो नौकरी के लिए बार-बार शहर बदलते हैं. बड़ा बदलाव EPFO की वेबसाइट में भी देखने को मिलेगा, वेबसाइट और पोर्टल को पूरी तरह से यूजर-फ्रेंडली बनाया जा रहा है, इसमें AI आधारित भाषा अनुवाद टूल जोड़ा जाएगा, जिससे कि EPFO से जुड़ी जानकारियां और दूसरी भारतीय भाषाओं में भी आसानी से उपलब्ध होगी. अंग्रेजी के अलावा हिन्दी, मराठी, तमिल समेत अन्य तमाम भाषाओं में इससे जुड़ी जानकारियों मिलेंगी.  UPI से PF निकालने की सुविधा EPFO 3.0 के तहत एक बहुत बड़ा बदलाव यह है कि अब PF का पैसा UPI के जरिए निकाला जा सकेगा. इसके लिए BHIM ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा. यह सुविधा अप्रैल-2026 तक शुरू होने की संभावना है. यानी आप PF खाते में जमा राशि ATM से भी निकाल सकेंगे.    बता दें, पहले PF से पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग कारण और नियम थे, जो काफी उलझन भरे थे. अब इन्हें सिर्फ 3 कैटेगरी में बांट दिया गया है.  1. Essential Needs: यह कैटेगरी जीवन से जुड़ी अहम जरूरतों के लिए PF निकासी की जा सकती है, जिसमें गंभीर बीमारी, शिक्षा और शादी शामिल हैं.   2. Housing Needs: यह कैटेगरी घर के सपने को पूरा करने के लिए है. घर खरीदने के लिए, या घर बनवाने के लिए, या फिर होम लोन चुकाने के लिए PF अमाउंट को निकाल सकते हैं.  3. Special Situations: यह उन हालात के लिए है, जब नौकरी चली जाए.  पहले, शिक्षा, विवाह या इलाज जैसे कारणों से निकालने के लिए सदस्य को कई वर्षों की सेवा पूरी करनी पड़ती थी. लेकिन EPFO 3.0 में सेवा अवधि सभी कैटेगरी के लिए एक समान 12 महीने कर दी गई है. शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार निकासी कर सकते हैं.  सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब PF सदस्य 75% तक फंड तुरंत निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25% राशि खाते में बनी रहती है, जिससे भविष्य में मिलने वाले ब्याज और सेवानिवृत्ति सुरक्षा को नुकसान न पहुंचे. अगर कोई सदस्य बेरोजगार हो जाता है और एक साल तक नौकरी नहीं पाता, तो फिर वे पूरे PF बैलेंस यानी 100% फंड को निकाल सकते हैं. खुद सुधार सकते हैं ये गलतियां  पिछले साल जनवरी में यानी जनवरी- 2025 में EPFO ने बड़े फैसले लिए थे. जिसके तहत कर्मचारी अपना नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति, जॉइनिंग और लीविंग डेट जैसी सामान्य गलतियों को खुद ऑनलाइन सुधार सकते हैं, इसके लिए न तो नियोक्ता की मंजूरी चाहिए और न ही EPFO की.  गौरतलब है कि EPFO में करीब 8 करोड़ एक्टिव सदस्य हैं और इसका कुल फंड लगभग 28 लाख करोड़ रुपये है. आने वाले समय में लेबर कोड लागू होने के बाद EPFO को असंगठित क्षेत्र के कामगारों का फंड भी संभालने की जिम्मेदारी मिल सकती है. EPFO 3.0 का पूरा डिजिटल सिस्टम अभी टेस्टिंग और रोलआउट स्टेज में है.

प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों की शुद्धता जांचने के लिए बनाई गई हाईटेक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

भोपाल  दूध और दूध से जुड़े डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता जांचने के लिए प्रदेश में पहली बार हाईटेक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना द्वारा स्वीकृत यह लैब राज्य की पहली प्रयोगशाला होगी, जहां दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच हो सकेगी। भारत सरकार ने दिया 12.40 करोड़ का अनुदान प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 12.40 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, शेष की खरीदी प्रक्रिया जारी है। MP की इस हाइटेक प्रयोगशाला में दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटि‚स, हेवी मेटल्स जैसी कई जांच हो सकेंगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। देशभर की संस्थाओं को मिलेगा लाभ मिलावट की आशंका पर शुद्धता जांचने के लिए लैब का इस्तेमाल आम आदमी से लेकर देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं कर सकेंगी। यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के वियीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी।

मुंबई मेयर की कुर्सी की दौड़ में लॉटरी के बाद 5 महिलाएं, जानें कौन है सबसे आगे?

मुंबई देश के सबसे अमीर नगर निगम मुंबई की बीएमसी में अब वर्चस्व की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. आरक्षण लॉटरी के बाद यह आधिकारिक से तय हो गया है कि मुंबई का अगला मेयर 'ओपन कैटेगरी महिला' से होगा.इस फैसले ने मुंबई में राजनीतिक महिला चेहरों के लिए मेयर बनने का रास्ता खोल दिया है, लेकिन अब सवाल यही है कि किस महिला पार्षद की किस्मत का सितारा बुलंद होगा?  मुंबई की मेयर महिला बनेगी, यह बात पक्की हो गई है. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के पास बीएमसी में बहुमत का नंबर गेम भी है, जिसके चलते आसानी से वो अपना मेयर बना सकते हैं. इसके बावजूद बीएमसी का मेयर कौन बनेगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है. बीएमसी के मेयर पद का पद लॉटरी सिस्टम के जरिए महिला कोटे में गया है. ऐसे में अब बीजेपी अपनी किस महिला पार्षद को मुंबई का मेयर पद देगी ये सवाल अब उठने लगा है. ऐसे में कई नाम सियासी चर्चाओं में है, जिन्हें लेकर कयास लगाए जा रहे हैं?  बीजेपी के पक्ष में बीएमसी का नंबर गेम मुंबई नगर नगिम की 227 सीटों में से बीजेपी ने 89 और उसकी सहयोगी शिंदे की शिवसेना ने 29 पार्षद सीटों पर जीत दर्ज किए हैं. इस तरह बीजेपी-शिवसेना के पास राज्य के कुल 227 में से 118 पार्षद है, जो बहुमत के 114 से 4 पार्षद ज्यादा हैं. इस तरह महायुति आपसी सहमति से मुंबई के बीएमसी में अपना मेयर चुन सकते हैं, क्योंकि नंबर गेम उनके पक्ष में है.  उद्धव ठाकरे के अगुवाई शिवसेना (यूबीटी)के पास 65 पार्षद हैं तो कांग्रेस के 24 पार्षद हैं. इस तरह से महाविकास अघाड़ी बहुमत के नंबर से बहुत ही पीछे हैं. ऐसे में बिना शिंदे के समर्थन से उद्धव किसी भी सूरत में अपना मेयर नहीं बना सकते हैं. शिंदे फिलहाल बीजेपी के साथ है और मेयर पद को लेकर बार्गेनिंग कर रहे हैं.  मुंबई मेयर की कमान फिर महिला के हाथ महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग के द्वारा बीएमसी सहित सभी 29 नगर निगम के मेयर पद के आरक्षण का फैसला लॉटरी ड्रॉ के जरिए तय किया गया है. पिछली बार बीएमसी में विशिष्ट आरक्षित श्रेणी के पास होने के कारण, नियमानुसार इस बार इसे अनारक्षित (Open Category) रखने का निर्णय लिया गया है. इस तरह से मुंबई के मेयर का पद महिला के लिए तो रिजर्व है, लेकिन किसी जाति के लिए नहीं है. ऐसे में कोई महिला निर्वाचित पार्षद, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से आता हो, मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकती है.  बीएमसी में मेयर पद महिला के लिए रिजर्व किए जाने के बाद सभी प्रमुख पार्टियों शिवसेना (दोनों गुट), भाजपा, कांग्रेस और राकांपा के पास अपने सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारने की छूट होगी. लेकिन मुकाबला संख्या बल और समर्थन के जरिए तय होगा.मेयर पद के ओपन महिला होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब पार्टियों को किसी खास वर्ग के उम्मीदवार की तलाश नहीं करनी होगी. कौन महिला पार्षद बनेगी मुंबई की मेयर?  बीएमसी का मेयर कौन बनेगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है. ऐसे में सवाल उठने लगा कि बीजेपी अपनी किस महिला पार्षद को मेयर पद की कुर्सी सौंपने का फैसला करेगी. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना में से किसी का मेयर बनना है लेकिन इन दोनों के सामने जीती गईं महिलाओं में से किसी के एक चुनना है. बीजेपी अपने महिला पार्षदों में से किसी एक को मेयर बना सकती है. बीजेपी वार्ड नंबर 2 से जीतीं तेजस्वी घोसालकर को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. इसके अलावा वार्ड 13 से राणी द्विवेदी, वार्ड 14 से सीमा शिंदे, वार्ड 15से जिज्ञासा शाह, वार्ड 16 से श्वेता कोरगावकर और वार्ड 17 से चुनाव जीतने वाली शिल्पा सांगुरे भी मेयर की रेस में है. रानी द्विवेदी वार्ड नंबर 13 से चुनाव जीती हैं. राणा बीजेपी महाराष्ट्र की सचिव और प्रवक्ता है. बीजेपी की उपाध्यक्ष रह चुकी और  पूर्व में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी थी. इसके अलावा श्वेता कोरगावकर का नाम आता है जो वार्ड नंबर 16 से चुनाव जीती हैं. वार्ड नंबर 14 से जीतने वाली सीमा शिंदे का भी नाम इस लिस्ट में शामिल है. इनके अलावा वार्ड नंबर 15 से जीतने वाली जिज्ञासा शाह और वार्ड 17 से जीतने वाली शिल्पा सांगुरे भी हैं. तेजस्वी घोसालकर सबसे प्रबल दावेदार बीजेपी की जीती महिला पार्षदों में मेयर पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में से तेजस्वी घोसालकर का नाम है. तेजस्वी दिवंगत शिवसेना (यूबीटी) पार्षद अभिषेक घोसालकर की पत्नी हैं.तेजस्वी घोसालकर के पति फरवरी 2022 में फेसबुक लाइव के दौरान कारोबारी मॉरिस नोरोन्हा ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. तेजस्वी घोसालकर शिवसेना ठाकरे गुट की पूर्व कॉर्पोरेटर हैं. तेजस्वी घोसालकर 2017 के मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में शिवसेना ठाकरे गुट से वार्ड नंबर 1 से जीती थीं. इस बार बीएमसी चुनाव ऐलान से ठीक पहले तेजस्वी घोसालकर बीजेपी में शामिल हो गईं थी. उन्होंने बीजेपी ने वार्ड नंबर 1 से उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद से मेयर पद के प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा है. उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की है और माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें मेयर बना सकती है. बीएमसी में बीजेपी के कुल 49 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं, वहीं शिंदे गुट के पास 19 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं. ऐसे में किस महिला को बीएमसी की कमान मिलेगी, तस्वीर दिलचस्प हो गई है.

25 जनवरी से लोकभवन होगा आमजनों के लिए खोल दिया गया

लोकभवन 25 जनवरी से आमजनों के लिए खुलेगा कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में होगी पार्किंग, प्रवेश गेट नंबर 1 से भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार लोकतंत्र के महापर्व गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर 25 जनवरी से लोकभवन आमजनों के लिए खोला जा रहा है। नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समयावधि में लोकभवन का भ्रमण कर सकेंगे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि लोकभवन 25 जनवरी एवं 27 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से सायं 8 बजे तक आम नागरिकों के लिए खुला रहेगा। 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस के दिन, लोकभवन भ्रमण का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले नागरिक कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में वाहन पार्किंग कर सकेंगे। लोकभवन में प्रवेश गेट क्रमांक-1 से होगा और निकास गेट क्रमांक- 4 से होगा। भ्रमण के समस्त रूट में आमजन लोकभवन की ऐतिहासिकता, सजावट और प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस अवसर पर केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना तथा वंदे भारत थीम” पर आधारित विशेष आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। तीनों दिन केन्द्रीय संचार ब्यूरों के सांस्कृतिक दलों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसी प्रकार मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोकभवन की ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक और प्रशासनिक यात्रा को रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।  

होली और वसंत पंचमी के त्योहार का रंगों से है गहरा नाता

नई दिल्ली. भारत त्योहारों का देश है और यहां हर मौसम का अपना एक उत्सव है। साल 2026 में 23 जनवरी को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन न केवल विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए खास है, बल्कि यह उस उमंग की भी शुरुआत है, जिसका इंतजार हर सनातनी को होता है- यानी 'होली'। ब्रज में होली की दस्तक आमतौर पर लोग समझते हैं कि होली फाल्गुन मास में खेली जाती है, लेकिन मथुरा और वृंदावन में इसकी तैयारी बहुत पहले शुरू हो जाती है। ब्रज की प्राचीन स्थानीय परंपराओं के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन ही मंदिरों में 'होली का डांढा' गाड़ा जाता है। यह एक धार्मिक संकेत है कि अब अगले 40 दिनों तक ब्रज की गलियों में गुलाल उड़ेगा। बांके बिहारी मंदिर में इस दिन ठाकुर जी को विशेष रूप से गुलाल अर्पित किया जाता है और वहीं से होली के उत्सव का आधिकारिक आगाज माना जाता है। मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में वर्णित है कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही ब्रह्मा जी ने अपनी मानस पुत्री सरस्वती को प्रकट किया था। जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब चारों ओर मौन व्याप्त था। देवी के प्रकट होने और उनकी वीणा बजने के साथ ही संसार को वाणी, संगीत और बुद्धि प्राप्त हुई। यही कारण है कि विद्यारंभ संस्कार के लिए इस दिन को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के जानकार बताते हैं कि इस दिन छोटे बच्चों को पहला अक्षर सिखाना उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभ होता है। पीले रंग का मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। आयुर्वेद और रंग विज्ञान के अनुसार, पीला रंग स्फूर्ति, मानसिक शांति और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। वसंत ऋतु में प्रकृति भी सरसों के खेतों के माध्यम से पीले रंग की चादर ओढ़ लेती है। इस दिन मां सरस्वती को पीले पुष्प और पीले मीठे चावल अर्पित करने की परंपरा है, जो जीवन में सात्विकता और समृद्धि का संचार करती है।