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EU के दो प्रमुख नेता 25 जनवरी को भारत दौरे पर, FTA वार्ता होगी महत्वपूर्ण

नई दिल्ली   यूरोपीय संघ (ईयू) के दो बड़े नेता चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचने वाले हैं। ईयू नेताओं का यह दौरा ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से लेकर 28 जनवरी तक भारत में रहेंगे। इस मौके पर हैदराबाद हाउस में आयोजित कार्यक्रमों के लिए एक्सपी डिवीजन आधिकारिक स्वीकृति प्रक्रिया संचालित करेगा। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ज्यादा डिमांड की वजह से, एक्सपी डिवीजन हैदराबाद हाउस के अंदर लोगों की संख्या कम रखेगा और वायर सर्विस को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि सभी आउटलेट को विजुअल्स मिल सकें। हैदराबाद हाउस की तस्वीरें और वीडियो विदेश मंत्रालय के सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध होंगी और मंत्रालय को क्रेडिट देकर रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। बता दें, इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने सभी मीडिया आउटलेट्स से अनुरोध किया है कि हैदराबाद हाउस में होने वाले कार्यक्रम के लिए 23 जनवरी, 2026 को 10 बजे तक गूगल शीट भर दें।इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इसके अलावा, दोनों नेता 27 जनवरी को आयोजित होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। भारत दौरे पर उनकी मुलाकात देश की राष्ट्रपति और प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू से होगी। इसके साथ ही दोनों नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी करेंगे।भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। ऐसे में ईयू नेताओं के भारत दौरे से कयास लगाए जा रहे हैं कि एफटीए का ऐलान हो सकता है।

सेक्टर-29 में आकार ले रहा अपैरल पार्क, महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

गारमेंट इंडस्ट्री का नया केंद्र यमुना एक्सप्रेस-वे सेक्टर-29 में आकार ले रहा अपैरल पार्क, महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर 175 एकड़ में विकसित हो रहा पार्क, करीब सौ निर्यात आधारित इकाइयों का होगा ठिकाना यमुना एक्सप्रेस-वे और एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी से निर्यात और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनेगा उद्योग की रीढ़, डिजाइन से ट्रेनिंग तक एक ही छत के नीचे लखनऊ,  उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को निर्यात आधारित औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-29 में 175 एकड़ में अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना प्रदेश को गारमेंट इंडस्ट्री के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। अपैरल पार्क के विकास से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उनके सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा। यह परियोजना प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। राज्य सरकार के ‘मेक इन यूपी’ और भारत सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।  सेक्टर-29 का अपैरल पार्क विशेष रूप से रेडीमेड गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी निर्यात इकाइयों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां लगभग 100 उत्पादन आधारित इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी परिधान तैयार करेंगी। अपैरल पार्क को क्लस्टर मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिससे कि उद्योगों को साझा सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सके। अपैरल पार्क की लोकेशन को रणनीतिक रूप से अत्यंत  महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ा हुआ है और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित है। एयरपोर्ट के संचालन के बाद गारमेंट उत्पादों के निर्यात को नई गति मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर से निकटता के कारण लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत कम होगी और निर्यातकों को समय पर डिलीवरी की सुविधा मिलेगी, जो निर्यातकों के लिए बहुत जरुरी है।  परियोजना के अंतर्गत अपैरल पार्क में ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ विकसित किया जाएगा। इसमें डिजाइन सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, यूनिट टेस्टिंग लैब और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सेंटर, मार्केटिंग सपोर्ट सिस्टम आदि की भी सुविधाएं निर्यातक इकाइयों को दी जाएंगी। सरकार का यह उद्देश्य और प्रयास है कि छोटे और मध्यम उद्यमों को अलग-अलग महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश न करना पड़े और वे साझा संसाधनों का उपयोग कर इसका लाभ उठा सकें। इससे उत्पादन लागत घटेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। अपैरल पार्क रोजगार सृजन के मामले में भी अपनी बड़ी भूमिका निभाएगा। इस परियोजना के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सिलाई, डिजाइन पैटर्न मेकिंग, पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के मौके मिलेंगे। यह परियोजना प्रदेश की नीति के अनुरूप है। योगी सरकार का फोकस कच्चे माल आधारित उत्पादन से आगे बढ़कर वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग पर है। अपैरल पार्क के जरिए प्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है। इससे किसानों, हथकरघा कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश अब निवेश और उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण वाला प्रदेश बन गया है। यह परियोजना जब अपने पूर्ण रूप में आएगी तो यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा प्राप्त होगी।

WhatsApp Web वर्ज़न पर वॉइस और वीडियो कॉल फीचर की शुरुआत, डेस्कटॉप ऐप की अब कोई जरूरत नहीं

मुंबई   मेटा की मैसेंजिंग कंपनी व्हाट्सएप अपने वेब यूज़र्स के लिए एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है. एक लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाट्सएप वेब पर जल्द ही वॉइस कॉल और वीडियो कॉल की सुविधा दी जा सकती है. इसका मतलब यह होगा कि यूजर्स को कॉल करने के लिए अलग से Windows या Mac के लिए व्हाट्सएप का डेस्कटॉप ऐप इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नए अपडेट के बाद यूज़र्स सीधा व्हाट्सएप वेब के ब्राउज़र से ही कॉल कर पाएंगे, जिससे यूज़र्स के लिए व्हाट्सएप वेब से कॉलिंग करना आसान हो जाएगा. व्हाट्सएप से जुड़े फीचर्स पर नज़र रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo ने इस डेवलपमेंट की जानकारी दी है. रिपोर्ट के अनुसार, यह फीचर अभी डेवलपमेंट स्टेज में है और फिलहाल बीटा टेस्टिंग के लिए भी उपलब्ध नहीं कराया गया है. ऐसे में इस फीचर को व्हाट्सएप के सभी यूज़र्स तक पहुंचने में टाइम लग सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp Web पर आने वाला यह कॉलिंग फीचर सिर्फ पर्सनल चैट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आप ग्रुप चैट में भी वॉइस और वीडियो कॉल कर सकेंगे. हालांकि, ग्रुप कॉल में कुछ सीमाएं रखी जा सकती हैं, ताकि कॉल की क्वालिटी खराब न हो और किसी तरह की रुकावट न आए. ऐसा माना जा रहा है कि एक ग्रुप कॉल में अधिकतम 32 लोग जुड़ सकेंगे, लेकिन कंपनी की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. यह भी संभव है कि शुरुआत में यह लिमिट 8 या 16 लोगों तक रखी जाए. व्हाट्सएप कॉल लिंक फीचर यूज़र्स एक्सपीरियंस को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए व्हाट्सएप कॉल लिंक फीचर भी पेश कर सकता है. इस फीचर के जरिए यूज़र्स एक शेयर करने लायक लिंक क्रिएट कर सकेगा, जिस पर क्लिक करके दूसरे लोग सीधे वॉइस या वीडियो कॉल जॉइन कर पाएंगे. इससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म जैसे मोबाइल, डेस्कटॉप और वेब पर कॉल जॉइन करना काफी आसान हो जाएगा. इसके अलावा, WhatsApp शेड्यूल्ड कॉल फीचर पर भी काम कर रहा है. इसमें यूजर पहले से वॉइस या वीडियो कॉल शेड्यूल कर सकेगा. इस शेड्यूल्ड कॉल में नाम और डिस्क्रिप्शन जोड़ने का ऑप्शन होगा, ताकि बाकी लोगों को कॉल का मकसद समझ आ सके. यूजर कॉल का अनुमानित स्टार्ट और एंड टाइम भी सेट कर पाएंगे. WABetaInfo के मुताबिक, शेड्यूल्ड कॉल अपने आप शुरू या खत्म नहीं होगी, बल्कि यह एक तरह का इवेंट होगा, जिसकी जानकारी पहले से सभी पार्टिसिपेंट्स को मिल जाएगी. इसका इंटरफेस Zoom या गूगल मीट जैसे मीटिंग प्लेटफॉर्म से मिलता-जुलता हो सकता है. कुल मिलाकर, WhatsApp Web के लिए यह अपडेट ऑनलाइन मीटिंग और ग्रुप कॉलिंग को और आसान बना सकता है.

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद चुनावी सियासी जंग शुरू, पार्टियां मैदान में उतरीं

ढाका  बांग्लादेश में 2024 के जन आंदोलन और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद पहले राष्ट्रीय चुनाव के लिए गुरुवार से प्रचार शुरू हो गया है. बड़े राजनीतिक दलों ने 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले ढाका और दूसरे शहरों में रैलियां की हैं. इस चुनाव को बांग्लादेश के इतिहास में बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह शेख हसीना के हटने के बाद अंतरिम सरकार के तहत हो रहा है और इसमें लोग प्रस्तावित राजनीतिक सुधारों पर भी फैसला करेंगे. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया है, लेकिन उनकी सरकार ने हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन लगाया है, जिससे सवाल उठे हैं. अवामी लीग और बीएनपी लंबे समय से देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. देश में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता है, लेकिन सरकार का कहना है कि वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से होगी. सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और लोगों की मौत के बाद हुए हिंसक कार्रवाई के बीच हसीना के 5 अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत जाने के तीन दिन बाद यूनुस ने पद संभाला था. जमात-ए-इस्लामी ने बनाया गठबंधन अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 10 दलों का गठबंधन अपना असर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. जमात-ए-इस्लामी को धर्मनिरपेक्ष समूहों की आलोचना झेलनी पड़ती है, जो कहते हैं कि उसकी नीतियां बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता को चुनौती देती हैं. जन आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (एनसीपी) भी इस गठबंधन में शामिल है. बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है. उनकी पार्टी को उनकी मां की राजनीतिक विरासत की वजह से मजबूत समर्थन मिला है. खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हो गया था. रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद पिछले महीने ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे हैं. तारिक रहमान करेंगे अभियान की शुरुआत रहमान गुरुवार को सिलहट शहर में एक रैली से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कई जिलों का दौरा करेंगे. जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी भी ढाका में अपने प्रचार की शुरुआत करने वाले हैं. इस चुनाव में एक राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह भी शामिल है, जिसके समर्थन में अंतरिम सरकार वोटरों से अपील कर रही है. सरकार का कहना है कि यह चार्टर सुधारों पर आधारित नई राजनीतिक दिशा दिखाता है. इस चार्टर पर पिछले साल देश के 52 पंजीकृत दलों में से 25 ने हस्ताक्षर किए थे. अवामी लीग ने इसका विरोध किया था, जबकि कई दलों ने दस्तावेज पर साइन करने से मना कर दिया था. ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर’ का नाम जुलाई 2024 में शुरू हुए उस जन आंदोलन के नाम पर रखा गया है, जिसने हसीना सरकार के गिरने का रास्ता बनाया. अभी यह चार्टर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन समर्थकों का कहना है कि इसे कानूनी रूप से लागू और संविधान का हिस्सा बनाने के लिए जनमत संग्रह जरूरी है. बांग्लादेश में संविधान में बदलाव सिर्फ संसद ही कर सकती है. अंतरिम सरकार का कहना है कि यह चार्टर सत्तावादी शासन से बचने के लिए ज्यादा नियंत्रण और संतुलन लाएगा, जिसमें राष्ट्रपति को ज्यादा अधिकार देकर अब तक ताकतवर रहे प्रधानमंत्री पद का संतुलन किया जाएगा. इसमें सांसदों के कार्यकाल की सीमा तय करने और हितों के टकराव, धनशोधन और भ्रष्टाचार रोकने के उपाय भी शामिल हैं.

बिहार में बनेगा पहला शिव कॉरिडोर, गंगा की धारा मोड़ने की योजना, उज्जैन-वाराणसी मॉडल पर आधारित

भागलपुर.  सुल्तानगंज में बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का मार्ग अब पूरी तरह से साफ हो गया है. लंबे समय से अटकी यह योजना अब भूमि समस्याओं से मुक्त होने के बाद आगे बढ़ने वाली है. भूमि विवाद के कारण लंबे समय से अटकी शिव कॉरिडोर योजना को प्रशासन और रेलवे के बीच जमीन एक्सचेंज के फैसले ने नई गति दी है. गंगा तट पर प्रस्तावित कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन रेलवे की थी. अब जिला प्रशासन ने बदले में रेलवे को तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे निर्माण का रास्ता पूरी तरह खुल गया है. जानकार कहते हैं कि श्रावणी मेले में कांवरियों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था मिलेगी. यह परियोजना सुल्तानगंज की पहचान को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है. पुराने विवाद का ऐसे हुआ समाधान प्रशासन और रेलवे के बीच भूमि आदान-प्रदान का निर्णय होने से अब कॉरिडोर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. गंगा किनारे सुल्तानगंज के प्रसिद्ध अजगैवीनाथ मंदिर के पास बनना प्रस्तावित शिव कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए चिन्हित जमीन रेलवे की थी. इसी वजह से प्रशासन लंबे समय से कॉरिडोर निर्माण के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब जिला प्रशासन ने भूमि एक्सचेंज नीति के तहत रेलवे को उनकी जमीन के बदले अन्य जगह की जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे भूमि प्राप्ति की बाधा दूर हो जाएगी. प्रशासन की योजना है कि यह जमीन देने का प्रस्ताव जल्द ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया जाए और विभागीय मंजूरी के बाद औपचारिक भूमिस्थानांतरण (लैंड एक्सचेंज) शुरू किया जाएगा. रेलवे को कौन-सी जमीन मिलेगी? भारतीय रेलवे की लगभग 17 एकड़ 47.625 डिसमिल जमीन के बदले में प्रशासन तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने वाला है. जगदीशपुर हॉल्ट के पास 18.98 एकड़, बरारी के निकट 0.6 डिसमिल और सुल्तानगंज में एनएच के आईबी के पास 0.7 एकड़. इन तीन स्थानों की जमीन देकर रेलवे से मूल जगह की जमीन खाली करवाई जाएगी, ताकि कॉरिडोर और उसके आसपास की सुविधाओं का निर्माण संभव हो सके. विभागीय मंजूरी के बाद निर्माण शुरू शिव कॉरिडोर के निर्माण को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए जिला समाहर्ता ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को नि:शुल्क भू-स्थानांतरण का पत्र भेज दिया है. इसके बाद विभाग की मंजूरी मिलेगी और फिर भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सुल्तानगंज में भी उज्जैन और वाराणसी की तरह शिव कॉरिडोर का निर्माण संभव हो जाएगा, जिसका लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को इंतजार था. गंगा की धारा मोड़ने का काम भी जारी शिव कॉरिडोर के साथ-साथ सुल्तानगंज में गंगा नदी की पुरानी धारा को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है. जल संसाधन विभाग बड़ी परियोजना के तहत अरबों रुपये की लागत से इस कार्य को आगे बढ़ा रहा है. इस योजना के पूरा होने पर गंगा नदी का बहाव पुराने रास्ते की ओर हो जाएगा और श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों को उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान का सुरक्षित स्थान सीधे पुरानी सीढ़ी घाट के पास मिलेगा. यह बदलाव श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात माना जा रहा है. सुल्तानगंज की बदलती पहचान जानकारों का मानना है कि शिव कॉरिडोर सिर्फ एक धार्मिक स्थल का विस्तार नहीं होगा, बल्कि यह सुल्तानगंज की पहचान को बदलने वाली परियोजना साबित होगी. उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर विकसित यह कॉरिडोर यहां के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा. इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. कॉरिडोर के बनने से श्रद्धालुओं को और सुविधाएं, बेहतर प्रबंध और सुरक्षा मिलेगी जिससे सुल्तानगंज धार्मिक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई हासिल कर सकता है. क्या आगे का काम होगा? अब सिर्फ विभागीय मंजूरी और भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही भूमि की अदला-बदली और कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठेंगे. स्थानीय प्रशासन और योजना प्राधिकरण के अनुसार यह परियोजना सुल्तानगंज को धार्मिक पर्यटन और संस्कृति के केंद्र के रूप में एक नया चेहरा देगा. शिव कॉरिडोर के निर्माण और गंगा की धारा मोड़ने की योजना के पूरा होने से सुल्तानगंज सिर्फ एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनेगा.

राजस्थान पुलिस ने लिया कड़ा कदम, अपराधियों की फोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने पर रोक

 जयपुर  राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निजता और उनके मानवीय अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभियुक्त की फोटो या वीडियो अब सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह निर्णय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा  दिए गए एक आदेश की अनुपालना में लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। पुलिस के अनुसार, "अभियुक्त केवल आरोपित होता है, दोषी नहीं", इसलिए गिरफ्तारी के बाद उसकी निजता को भंग करना कानून सम्मत नहीं है। नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें : सोशल मीडिया पर पाबंदी : पुलिस अब किसी भी आरोपी की फोटो या वीडियो अपने आधिकारिक या अनौपचारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड नहीं कर सकेगी। मीडिया ट्रायल पर रोक : प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को अपमानजनक स्थिति में पेश नहीं किया जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा न दें जिससे 'मीडिया ट्रायल' की स्थिति पैदा हो। मर्यादित शब्दावली : पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अभियुक्तों के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्दों में गरिमा और सावधानी बरतनी होगी। विशेष संवेदनशीलता : महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के आरोपितों के साथ व्यवहार के दौरान विशेष संवेदनशीलता रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षित हिरासत और सभ्य व्यवहार SOP में यह भी कहा गया है कि अभियुक्त को बैठाने, ले जाने और हिरासत में रखने की व्यवस्था सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। पुलिस अब किसी भी आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या अपराधी की तरह प्रदर्शित नहीं कर पाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतियां महानिदेशक पुलिस (DGP) सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों को भेज दी गई हैं ताकि इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI का बड़ा फैसला, 9.7 अरब डॉलर की बिक्री

नई दिल्ली डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में आक्रामक हस्तक्षेप किया है. केंद्रीय बैंक ने नवंबर महीने के दौरान कुल 9.7 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की. आरबीआई के मासिक बुलेटिन के अनुसार, नवंबर में उसने 14.35 अरब डॉलर की खरीद की, जबकि 24.06 अरब डॉलर की बिक्री की गई. इससे पहले अक्टूबर में भी रिज़र्व बैंक ने बाजार में 11.88 अरब डॉलर बेचे थे. नवंबर के दौरान रुपये पर दबाव लगातार बना रहा. 21 नवंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 89.49 के स्तर तक फिसल गया था, जो उस समय का ऐतिहासिक निचला स्तर माना गया. इसकी प्रमुख वजह अमेरिका से जुड़े व्यापारिक मोर्चे पर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी रही. पूरे महीने में रुपये में करीब 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हालात और बिगड़ते हुए बुधवार को रुपया 91.7425 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. यह पिछले दो महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही. वैश्विक बाजारों में “रिस्क-ऑफ” माहौल, यानी निवेशकों का जोखिम से बचना, और घरेलू शेयर बाजार से पूंजी की निरंतर निकासी ने दक्षिण एशियाई मुद्राओं, खासकर रुपये, पर अतिरिक्त दबाव डाला. रुपये पर दबाव के कारण विशेषज्ञों के अनुसार, मेटल इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण है. इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी निकालना भी मुद्रा पर नकारात्मक असर डाल रहा है. एक अन्य अहम वजह अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड है. जैसे-जैसे अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा रिटर्न देने लगते हैं, वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका जैसे सुरक्षित और अधिक यील्ड वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं कमजोर पड़ती हैं. आम लोगों पर असर रुपये में गिरावट का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है. कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जिससे ईंधन, खाद्य तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं. इसका नतीजा महंगाई के रूप में सामने आता है. इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई करने की लागत भी बढ़ जाती है, क्योंकि ट्यूशन फीस और रहने का खर्च डॉलर में चुकाना पड़ता है. चूंकि कच्चा तेल और कई अन्य जरूरी वस्तुएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में खरीदी जाती हैं, इसलिए रुपये की कमजोरी देश की आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर सकती है.

स्टेट टाइगर सेल की बैठक में वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए साझा की जाएंगी जानकारी

 भोपाल  वन्यजीव अपराध पर सख्ती के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। स्टेट टाइगर सेल की तीन साल बाद हुई बैठक में तय किया गया कि अपराधियों को पकड़ने, मामलों के त्वरित निराकरण और डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। बैठक में तय हुआ कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न विभाग आपस में सूचनाएं साझा करेंगे। हॉट स्पॉट की जानकारी वन विभाग पुलिस को देगा, ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और वन विभाग के स्वान दस्ते की संयुक्त गश्त भी शुरू की जाएगी। न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने पर जोर न्यायालय में लंबित मामलों की समीक्षा कर उनके शीघ्र निपटारे के प्रयास किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर आरोपितों के खिलाफ आर्म्स एक्ट, आईटी एक्ट और बीएएनएस के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। फरार वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए भी सभी एजेंसियां सहयोग करेंगी। संयुक्त प्रशिक्षण और पुनर्गठन वन अमले की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य, संभागीय और जिला स्तर पर स्टेट टाइगर सेल को प्रभावी बनाने और पुनर्गठन के लिए राजस्व विभाग को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया। डिजिटल निगरानी और पर्यटन ठगी पर कार्रवाई वन्यजीव से जुड़े मामलों में डिजिटल निगरानी बढ़ाने, ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ी ठगी रोकने और टाइगर रिजर्व में पारदर्शिता लाने पर चर्चा हुई। सभी एजेंसियां अपना खुफिया तंत्र मजबूत करेंगी। बैठक में शामिल एजेंसियां यह बैठक विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव की अध्यक्षता में वन भवन में हुई। इसमें वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, साइबर पुलिस, डीआरआई, सीबीआई, कस्टम, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एनटीसीए, स्टेट फॉरेंसिक साइंस, ईडी सहित कई एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।

मध्यप्रदेश में नगर निकायों की संख्या बढ़ेगी, गांवों को शहर बनाने की योजना

धार  धार जिले में नगरीय क्षेत्रों की संख्या नगर निकाय (Urban Bodies Expansion) स्थापित करके बढ़ाई जाने की कवायद शुरू हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर जिले की अलग-अलग विधानसभाओं के बड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों को नगर पंचायत (Nagar Panchayat) बनाने के लिए जनपद कार्यालयों से 9 बिंदुओं पर आधारित जानकारी प्रस्ताव बनाकर देने के लिए कहा गया है। बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की मांग स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा उठाई गई है। यह सभी मांग पत्र सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को सौंपे गए थे। सीधे आवेदन सौंपने का असर यह हुआ कि इस मामले में जिला शहरी विकास अभिकरण द्वारा अलग अलग क्षेत्रों के राजस्व अधिकारियों को पत्र जारी करके जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करवाने के लिए लिखा गया है। जनपदों से प्राप्त प्रस्तावों पर स्पष्ट अभिमत स्वीकृति के लिए आता है तो ग्राम विकास को गति मिलेगी। नगर परिषदें में तब्दील होने के बाद उसके अनुरुप सुविधाएं और व्यवस्थाएं तय होगी। बदनावर को नगर पालिका बनाने की मांग बदनावर विधानसभा क्षेत्र में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बनने के बाद से तेजी से विकास मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां की नगर पंचायत को अब नगर पालिका बनाने की मांग उठी है। नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा सीएम डॉ. यादव को मांग पत्र सौंपा गया था। इस मामले में भी सीएमओ बदनावर को मप्र राजपत्र असाधारण 2011 में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार एवं मप्र नगर पालिका अधिनियम की धारा 5 के प्रावधानों के तहत जरूरी जानकारी जुटाकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है। सब कुछ ठीक रहा तो बदनावर नगर पंचायत से नगर पालिका में तब्दील होगी और विकास के लिए राशि सहित सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। सरदापुर में सर्वाधिक नगर पंचायत के प्रस्ताव सरदारपुर विधानसभा के बड़े ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की मांग भाजपा नेताओं द्वारा की गई थी। पूर्व विधायक मुकामसिंह निगवाल ने ग्राम पंचायत दसई, ग्राम पंचायत राजीद को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की मांग की थी। इस मामले में भी अनुविभागीय अधिकारियों को जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें ग्राम पंचायत को दर्शाते हुए प्रस्तावित नगर परिषद् का मानचित्र, आपस में दूरिया सहित राजस्व मानचित्र पर चिहिनत कर संपूर्ण जानकारी का प्रस्ताव स्पष्ट अभिमत के साथ तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें ग्राम पंचायत अमझेरा को स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा नगर पंचायत बनाने की मांग का प्रस्ताव भी शामिल है। मंत्री की मांग पर केसूर भी शामिल बदनावर विधानसभा की ग्राम पंचायत केसूर को नगर परिषद् बनाने की मांग केन्द्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा पत्र के माध्यम से सीएम से की गई थी। इस मामले में प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। इसी तरह सिंधाना और गंधवानी को भी नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव तैयार करने के साथ अभिमत देने के लिए स्थानीय जनपदों को निर्देशित किया गया है।  प्रस्ताव मांगे है… मुख्यमंत्री को सौंपे जनप्रतिनिधियों के मांग पत्र के आधार पर अनुविभागीय अधिकारियों को जनपदों के माध्यम से प्रस्ताव और अभिमत देने के लिए कहा है। यह रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया शुरू होगी।-विश्वनाथ सिंह, प्रभारी डूडा अधिकारी धार

CJI भड़के, Team India के नाम पर आपत्ति को BCCI के खिलाफ याचिका फालतू करार दी

नई दिल्ली BCCI यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के खिलाफ याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता को जजों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। एक ओर जहां याचिकाकर्ता की मांग थी कि नेशनल क्रिकेट टीम को भारतीय क्रिकेट टीम कहने से रोका जाए। याचिका पर सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने फटकार लगाई कि अदालतों पर बेकार का बोझ न डालें। साथ ही याचिका पर भी सवाल उठाए। याचिकाकर्ता क्या चाहता था याचिकाकर्ता रीपक कंसल इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल कर चुके हैं। वहां, भी जज ने उन्हें फटकार लगाई थी। कंसल का कहना था कि BCCI एक निजी संस्था है, जिसका रजिस्ट्रेशन तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत हुआ है। यह कोई सरकारी संस्था नहीं है। इसमें कहा गया कि कई बार RTI के जवाब में खेल मंत्रालय ने साफ किया है कि BCCI को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। साथ ही इसे सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती है। याचिका में कहा गया कि इसके बाद भी सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म BCCI की क्रिकेट टीम को 'टीम इंडिया' या 'इंडियन नेशनल टीम' कहते हैं। साथ ही सवाल उठाया गया कि तिरंगे जैसे भारतीय प्रतीकों का इस्तेमाल प्रसारणों में किया जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट भड़का बेंच में सीजेआई के साथ जस्टिस जॉयमाला बागची भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसी ही याचिका पहले खारिज कर दी थी। साथ ही कहा कि हाईकोर्ट को जुर्माना लगाना चाहिए था। सीजेआई ने कहा, 'आप घर पर बैठे हैं और याचिकाएं तैयार कर रहे हैं। इसमें समस्या क्या है। नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (National Sports Tribunal) के लिए भी एक नोटिफिकेशन आ गया है जिसमें बहुत ही काबिल सदस्य शामिल हैं। कोर्ट पर बोझ मत बढ़ाइए।' अदालत ने याचिका को फालतू करार दिया। उन्होंने कहा, 'हाईकोर्ट ने गलत दिया। मिसाल कायम करने वाला कोई जुर्माना नहीं लगाया गया। सुप्रीम कोर्ट में ऐसी फालतू याचिकाओं को आने से कैसे रोकेंगे।' बेंच ने कहा कि जुर्माना नहीं लगाए जाने के चलते ही याचिकाकर्ता को शीर्ष न्यायालय तक आने की हिम्मत मिली। दिल्ली हाईकोर्ट लगाने वाली थी जुर्माना अक्तूबर 2025 में यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। खबर है कि तब हाईकोर्ट 10 लाख रुपये जुर्माना लगाने वाला था, लेकिन वकील के अनुरोध के बाद इसे माफ कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा था, 'क्या आप कह रहे हैं कि टीम भारत को रिप्रेजेंट नहीं करती। यह टीम जो हर जगह जाकर भारत का नाम बढ़ा रही है, आप कह रहे हैं कि वे भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करते? क्या यह 'टीम इंडिया' नहीं है? अगर नहीं है, तो हमें बताइए कि यह 'टीम इंडिया' क्यों नहीं है।' चीफ जस्टिस उपाध्याय ने कहा कि यह याचिका कोर्ट के समय की सरासर बर्बादी है।