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भारत का वर्ल्ड कप में जीत का सिलसिला जारी, न्यूजीलैंड को 7 विकेट से रौंदा, वैभव-आयुष ने दिलाई जीत

 बुलावायो आईसीसी मेन्स अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में शनिवार को भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से पटखनी दी. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में हुआ. मुकाबले में भारतीय टीम को जीत के लिए डीएलएस नियम के तहत 37 ओवरों में 130 रनों का टारगेट मिला था. बारिश के चलते मैच को 37-37 ओवरों का कर दिया गया था. जिसे भारत ने 14वें ओवर में ही चेज कर लिया.  वर्ल्ड कप के पहले मैच में भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) को डीएलएस नियम के तहत 6 विकेट से हराया था. फिर उसने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में डीएलएस नियम के तहत 18 रनों से जीत हासिल की थी. अब भारत ने न्यूजीलैंड को पटखनी दी है. यानी वर्ल्ड कप में भारत का अजेय सफर जारी है. अंक तालिका में भी भारतीय टीम ग्रुप बी में 6 अंकों के साथ टॉप पर है. ऐसी रही भारत की बल्लेबाजी 130 रनों के जवाब में उतरी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही. वैभव सूर्यवंशी और एरॉन जॉर्ज ने पारी का आगाज किया लेकिन दूसरे ही ओवर में एरॉन अपना विकेट गंवा बैठे. लेकिन इसके बाद आयुष ने वैभव के साथ मिलकर पारी को संभाला. दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई. दूसरा झटका भारत को 87 के स्कोर पर लगा जब वैभव आउट हुए. वैभव ने 23 गेंद में 40 रन बनाए. अपनी पारी में सूर्यवंशी ने 3 छक्के और 2 चौके लगाए. वहीं, आयुष ने फिफ्टी जड़ी. 27 गेंदों में 53 रन बनाकर वो आउट हुए. आयुष ने 6 छक्के लगाए. 101 के स्कोर पर उनका विकेट गिरा. इसके बाद विहान मल्होत्रा और वेदांत ने पारी को संभाला. दोनों ने भारत को जीत दिलाई. ऐसी रही है न्यूजीलैंड की पारी न्यूजीलैंड ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 36.2 ओवरों में 135 रन बनाए. न्यूजीलैंड की शुरुआत काफी खराब रही और उसने 9 रनों के स्कोर तक ह्यूगो बोग (4 रन) और कप्तान टॉम जोन्स (2 रन) के विकेट गंवा दिए. दोनों ही बल्लेबाजों को आरएस अम्बरीश ने चलता किया. इसके बाद हेनिल पटेल ने आर्यन मान (5 रन) को आउट करके भारतीय टीम को तीसरी सफलता भी दिला दी. आरएस अम्बरीश की शानदार गेंदबाजी जारी रही और उन्होंने विकेटकीपर बैटर मार्को एल्पे को सिर्फ 1 रन के निजी स्कोर पर आउट किया. फिर खिलान पटेल ने स्नेहिथ रेड्डी (10 रन) को आउट करके भारत को पांचवीं कामयाबी दिलाई. जैकब कॉटर और जसकरन संधू ने छठे विकेट के लिए 37 रन जोड़कर कीवी टीम को संभालने की कोशिश की. जसकरन (18 रन) को कनिष्क चौहान ने पवेलियन रवाना किया. वहीं कॉटर 23 रन बनाकर मोहम्मद एनान की गेंद पर आउट हुए, 69 रनों के स्कोर पर सातवां विकेट गंवाने के बाद कैलम सैमसन और सेल्विन संजय ने मिलकर कीवी टीम को 100 रनों के पार पहुंचाया. दोनों के बीच आठवें विकेट के लिए 53 रनों की साझेदारी हुई. सैमसन ने एक चौके की मदद से 48 बॉल पर नाबाद 37 रन बनाए. वहीं संजय ने 30 गेंदों पर 28 रनों का योगदान दिया और वो आर. अम्बरीश की गेंद पर आउट हुए. कीवी टीम के आखिरी दो विकेट फ्लिन मोरे (1 रन) और मेसन क्लार्क (4 रन) के रूप में गिरे. भारत की ओर से अम्बरीश ने चार विकेट झटके. वहीं हेनिल पटेल को तीन सफलताएं हासिल हुईं. नामीबिया और जिम्बाब्वे की सहमेजबानी में इस बार अंडर-19 वर्ल्ड कप आयोजित हो रहा है. इसके मुकाबले हरारे, बुलावायो और विंडहोक में खेले जा रहे हैं. पांच बार की चैम्पियन टीम भारत को ग्रुप-ए में रखा गया है, जिसमें न्यूजीलैंड, बांग्लादेश और यूएसए की टीम्स भी शामिल हैं. अंडर-19 वर्ल्ड कप के मौजूदा संस्करण का खिताबी मुकाबला 6 फरवरी को हरारे में खेला जाना है. भारत की प्लेइंग-11: वैभव सूर्यवंशी, आयुष म्हात्रे (कप्तान), वेदांत त्रिवेदी, विहान मल्होत्रा, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), एरॉन जॉर्ज, कनिष्क चौहान, आरएस अम्बरीश, खिलान पटेल, हेनिल पटेल और मोहम्मद एनान. न्यूजीलैंड की प्लेइंग-11: आर्यन मान, ह्यूगो बोग, टॉम जोन्स (कप्तान), स्नेहिथ रेड्डी, मार्को एल्पे (विकेटकीपर), जैकब कॉटर, जसकरन संधू, कैलम सैमसन, फ्लिन मोरे, सेल्विन संजय और मेसन क्लार्क. भारत vs न्यूजीलैंड H2H (अंडर-19 क्रिकेट) कुल वनडे मैच: 22 भारत ने जीते: 19 न्यूजीलैंड ने जीते: 3 अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए भारत का फुल स्क्वॉड: आयुष म्हात्रे (कप्तान), विहान मल्होत्रा (उप-कप्ताान), वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), हरवंश पंगालिया, आरएस अम्बरीश, कनिष्क चौहान, हेनिल पटेल, दीपेश देवेंद्रन, खिलान पटेल, किशन कुमार सिंह, एरॉन जॉर्ज, उधव मोहन और मोहम्मद एनान. अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए न्यूजीलैंड का फुल स्क्वॉड: आर्यन मान, ह्यूगो बोग, टॉम जोन्स (कप्तान), स्नेहित रेड्डी, मार्को एल्पे (विकेटकीपर), जैकब कॉटर, जसकरण संधू, कैलम सैमसन, फ्लिन मोरे, सेल्विन संजय, मेसन क्लार्क, हैरी बर्न्स, ब्रैंडन मैट्जोपौलोस, हंटर शोर, हैरी वेट और ल्यूक हैरिसन.

दिल्ली ने आरसीबी के विजय रथ को रोका, 7 विकेट से रौंदा, अंक तालिका में बदलाव

 नई दिल्ली दिल्ली कैपिटल्स ने शनिवार को महिला प्रीमियर लीग (WPL) में शानदार प्रदर्शन करते हुए टेबल टॉपर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को सात विकेट से हराकर प्लेऑफ की दौड़ में खुद को बनाए रखा. टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स ने अनुशासित और प्रभावी प्रदर्शन करते हुए आरसीबी को 20 ओवर में सिर्फ 109 रन पर समेट दिया. इसके बाद दिल्ली ने 26 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया और आरसीबी को इस सीजन की पहली हार का स्वाद चखाया. दिल्ली ने आरसीबी को चटाई धूल दिल्ली की जीत में लॉरा वोलवार्ट ने अहम भूमिका निभाई. उन्होंने 38 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए, जबकि कप्तान जेमिमा रोड्रिग्स ने 24 रन की उपयोगी पारी खेली. दिल्ली कैपिटल्स ने 15.4 ओवर में 3 विकेट पर 111 रन बनाकर मैच अपने नाम किया.      हालांकि लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की शुरुआत अच्छी नहीं रही. टीम ने चौथे ओवर तक 24 रन पर दो विकेट गंवा दिए थे. सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा 16 रन बनाकर आउट हो गईं, जबकि लिज़ेल ली सिर्फ 6 रन ही बना सकीं. इसके बाद जेमिमा रोड्रिग्स और लॉरा वोलवार्ट ने तीसरे विकेट के लिए 52 रन की साझेदारी कर टीम को संभाला और जीत की ओर बढ़ाया. रोड्रिग्स ने 26 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 24 रन बनाए. वहीं वोलवार्ट ने अपनी नाबाद पारी में चार चौके और एक छक्का लगाया. मारिज़ाने कैप ने 15 गेंदों पर नाबाद 19 रन बनाए और श्रेयंका पाटिल की गेंद पर चौका लगाकर दिल्ली को जीत दिलाई. आरसीबी की ओर से सायली सतघरे सबसे सफल गेंदबाज रहीं, जिन्होंने 18 रन देकर दो विकेट झटके. राधा यादव को एक विकेट मिला. जानें अंक तालिका का हाल इस जीत के बाद दिल्ली कैपिटल्स छह अंकों के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है, जबकि आरसीबी 10 अंकों के साथ शीर्ष पर बनी हुई है. इससे पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी की टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही. कप्तान स्मृति मंधाना ने 34 गेंदों पर छह चौकों और एक छक्के की मदद से 38 रन बनाए और वह टीम की शीर्ष स्कोरर रहीं. उनके अलावा राधा यादव ने 17 गेंदों पर 18 रन बनाए. आरसीबी की आठ बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं. स्मृति मंधाना और ग्रेस हैरिस (9) के बीच 36 रन की ओपनिंग साझेदारी ही टीम की सबसे बड़ी साझेदारी रही. इसके बाद आरसीबी की पारी लड़खड़ा गई और टीम 14वें ओवर में 78 रन पर पांच विकेट गंवा चुकी थी. पूरी टीम 20 ओवर में 109 रन पर सिमट गई. दिल्ली कैपिटल्स की ओर से नंदिनी शर्मा ने 3 विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज रहीं. मारिज़ाने कैप, मिन्नू मणि और चिनेल हेनरी ने दो-दो विकेट लिए, जबकि श्री चरनी को एक सफलता मिली.

पटना में NEET छात्रा की मौत: कपड़ों पर मिला ‘स्पर्म’, DNA जांच से सुलझेगा मामला

पटना पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में पुलिस ने अहम जानकारी दी है. पुलिस ने आधिकारिक तौर पर माना है कि जांच में नए सबूत मिले हैं. पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में जांच के दौरान उसके कपड़ों से मानव शुक्राणु (Human sperm) मिलने की पुष्टि हुई है. अब पुलिस DNA जांच के जरिए आरोपी और अन्य संदिग्धों से इसका मिलान करेगी. वहीं, मामले में समय पर कार्रवाई न करने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस के अनुसार, मृत छात्रा के परिजनों ने 10 जनवरी 2026 को उसके कुछ कपड़े पुलिस को सौंपे थे. इन कपड़ों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेजा गया था. एफएसएल जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि घटना के समय पहने गए छात्रा के कपड़े से ह्यूमन स्पर्म मिले हैं. अब एफएसएल इन स्पर्म की डीएनए प्रोफाइल तैयार कर रही है. पुलिस ने बताया कि तैयार की जा रही डीएनए प्रोफाइल का मिलान पहले से गिरफ्तार आरोपी और एसआईटी (विशेष जांच टीम) द्वारा चिन्हित अन्य संदिग्ध लोगों के डीएनए से किया जाएगा, ताकि सच्चाई सामने आ सके. पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पटना पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं. जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में चित्रगुप्त नगर थाने की थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के अवर निरीक्षक हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. पटना एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने सूचना जुटाने और समय पर कार्रवाई करने में गंभीर चूक की, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है. फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई डीएनए रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी.क्या था मामला पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला जनवरी 2026 में सामने आया था. छात्रा शहर के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में रहती थी. उसकी अचानक मौत के बाद परिवार ने इसे सामान्य मौत मानने से इनकार किया और गंभीर आरोप लगाए. परिजनों का कहना था कि छात्रा के साथ कुछ गलत हुआ है, इसलिए पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए. परिजनों ने 10 जनवरी 2026 को पुलिस को छात्रा के कुछ कपड़े सौंपे, जिनके बारे में उनका दावा था कि छात्रा ने घटना के समय ये कपड़े पहने हुए थे. पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत इन कपड़ों को जब्त कर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा. FSL की रिपोर्ट आने के बाद मामला गंभीर FSL की रिपोर्ट आने के बाद मामला और गंभीर हो गया. रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रा के कपड़ों से मानव स्पर्म के अवशेष मिले हैं. इसके बाद FSL द्वारा डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा रही है, ताकि इस डीएनए का मिलान पहले से गिरफ्तार आरोपी और SIT द्वारा चिन्हित अन्य संदिग्ध लोगों से किया जा सके. इस मामले की जांच में शुरुआती स्तर पर लापरवाही सामने आने के बाद पटना पुलिस ने कड़ा कदम उठाया. केस की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष और कदमकुआं थाने के एक अवर निरीक्षक ने समय पर सूचना जुटाने और जरूरी कार्रवाई करने में गंभीर चूक की. इसके बाद पटना एसएसपी के आदेश पर दोनों पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.

बांग्लादेश: 23 साल के चंचल भौमिक की गैरेज में जलाकर हत्या, हिंदू समुदाय पर हमला

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का एक और गंभीर मामला सामने आया है. नरसिंदी पुलिस लाइन्स से सटे मस्जिद मार्केट इलाके में 23 साल के हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक की बेरहमी से हत्या किए जाने का आरोप है. आशंका जताई जा रही है कि चंचल को गैराज के भीतर ही जिंदा जला दिया गया. मृतक चंचल चंद्र भौमिक कुमिल्ला जिले के लक्ष्मीपुर गांव का रहने वाला था. वह पिछले कई वर्षों से नरसिंदी के एक गैराज में काम करता था और काम के सिलसिले में वहीं रह रहा था. चंचल अपने परिवार का मंझला बेटा था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य भी था. गैराज के शटर पर पेट्रोल डालकर लगा दी आग प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात जब चंचल गैराज के अंदर सो रहा था, तभी दुकान के बाहर लगे शटर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई. आग लगते ही लपटें तेजी से पूरे गैराज में फैल गईं. घटना से जुड़े एक वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति दुकान के बाहर आग लगाता है, जिसके बाद आग तेजी से अंदर फैल जाती है. एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बुझी आग घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने फायर सर्विस को सूचना दी. नरसिंदी फायर सर्विस की एक टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. आग बुझाने के बाद गैराज के अंदर से चंचल चंद्र भौमिक का जला हुआ शव बरामद किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चंचल लंबे समय तक आग में जलता रहा और उसकी बेहद दर्दनाक मौत हो गई. परिजनों ने इस घटना को पूरी तरह पूर्व नियोजित हत्या बताया है. उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है. इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल है और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. स्थानीय हिंदू नेताओं में आक्रोश पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा किए गए हैं. सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है. वहीं स्थानीय हिंदू समुदाय के नेताओं ने इस निर्मम हत्या की कड़ी निंदा की है. उन्होंने दोषियों की तुरंत पहचान और गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रशासन से इलाके में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है.

राम मंदिर शिखर का धर्म ध्वज सात महाद्वीपों तक पहुंचेगा, ऐतिहासिक संकल्प लिया गया

अयोध्या   धर्म नगरी अयोध्या से सनातन संस्कृति और प्रभु श्रीराम की भक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल शुरू हो चुकी है. राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे दुनिया के सातों महाद्वीपों तक ले जाकर फहराने का संकल्प लिया गया है. इस विशेष अभियान की विधिवत शुरुआत अयोध्या में पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की गई, जिसने इसे आध्यात्मिक के साथ साथ सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है. अयोध्या में विधिविधान से हुआ अभियान का शुभारंभ राम जन्मभूमि अयोध्या में हुए इस आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ धर्म ध्वज यात्रा का शुभारंभ किया गया. यह वही ध्वज है जो राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होगा और अब उससे पूर्व पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान का संदेश लेकर निकलेगा. आयोजन में संत समाज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस पहल को और भी पवित्र और ऐतिहासिक बना दिया. नरेंद्र कुमार कर रहे हैं नेतृत्व इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व हरियाणा के हिसार निवासी और प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र कुमार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह धर्म ध्वज केवल एक कपड़ा या प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन धर्म, प्रभु श्रीराम और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है. उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस पवित्र ध्वज को विश्व के सभी सात महाद्वीपों पर फहराया जाए, ताकि राम और सनातन संस्कृति का संदेश हर कोने तक पहुंचे. नेपाल से शुरू हुआ पहला चरण नरेंद्र कुमार के अनुसार इस यात्रा का पहला चरण नेपाल से शुरू किया गया. 21 दिसंबर को यात्रा की शुरुआत हुई और 29 दिसंबर को नेपाल में संबंधित महाद्वीप पर धर्म ध्वज फहराया गया. इसके बाद अब चरणबद्ध तरीके से अन्य महाद्वीपों की यात्रा की जाएगी. यह पूरी पहल अयोध्या से शिखर तक निकाली जा रही धर्म ध्वज यात्रा के रूप में आयोजित की जा रही है, जो अपने आप में एक अनूठा धार्मिक अभियान है. धार्मिक के साथ सामाजिक उद्देश्य भी राम मंदिर के शिखर पर लगने वाला यह धर्म ध्वज अब पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान बनेगा. इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है. नरेंद्र कुमार का मानना है कि आज का युवा वर्ग भौतिकवाद की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है. इस यात्रा के माध्यम से युवाओं को धर्म, संस्कार और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. श्रीराम के आदर्शों का वैश्विक संदेश इस यात्रा का मूल उद्देश्य प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र और आदर्शों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है. नरेंद्र कुमार का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आज भी समाज को त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और सत्य का मार्ग दिखा सकता है. अयोध्या में संपन्न हुई पूजा अर्चना के बाद यह धर्म ध्वज यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है. आने वाले समय में जब यह ध्वज सातों महाद्वीपों पर फहराएगा, तब पूरी दुनिया में राम मंदिर और सनातन संस्कृति की भक्ति का संदेश गूंजेगा.

ट्रैफिक जाम से हर साल 130 घंटे की बर्बादी, बेंगलुरु-दिल्ली समेत 10 शहरों में वाहनों की रेंगती भीड़

नई दिल्ली आप जब ऑफिस, स्कूल या अन्य किसी काम से जाने के लिए घर से बाहर निकलते हैं तो मंजिल पर पहुंचने से पहले जाम में फंसना, उसे झेलना आपकी दिनचर्या में शुमार हो गया है. ये भारत के किसी एक शहर या व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश और उसकी 1.46 अरब आबादी की है. इसी जाम की बदौलत आपका करीब 130 घंटा हर साल बर्बाद हो रहा है. ये हम नहीं बल्कि दुनिया के 492 शहरों के ट्रैफिक का अध्ययन करने वाली नीदरलैंड की कंपनी टॉमटॉम की एक रिपोर्ट कह रही है. बोस्ट ग्रुप की रिपोर्ट में देश को करीब 1.47 लाख करोड़ रुपए की हानि का भी उल्लेख किया गया है. टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स में भारत के 10 शहरों की यातायात व्यवस्था के बारे में बताया गया है. जिसमें बेंगलुरु दुनिया में दूसरे नंबर पर है. यानी दुनिया का दूसरा सबसे धीमा शहर. जहां औसत यात्रा समय 3.37 मिनट प्रति किमी है. ETV Bharat Explainer में जानते हैं अन्य शहरों में क्या स्थिति है, जाम के क्या कारण हैं और निपटने के साधन क्या हैं? खराब ट्रैफिक की टॉप-5 लिस्ट में भारत के 2 शहर: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 के अनुसार, बेंगलुरु दुनिया के सबसे खराब ट्रैफिक जाम वाले शहरों में दूसरे नंबर पर है. मतलब कि बेंगलुरु गंभीर ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है. इंडेक्स में सबसे ऊपर मेक्सिको सिटी है, आयरलैंड का डबलिन तीसरे स्थान पर है, जबकि पोलैंड का लॉड्ज चौथे स्थान पर है. पांचवें नंबर पर भारत का ही पुणे है. टॉप-5 में भारत के 2 शहरों का शामिल होना यह दर्शाता है कि शहरी विकास और निजी वाहनों पर निर्भरता ने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ट्रैफिक मैनेजमेंट पहले से कठिन हुआ: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार जैसे-जैसे शहर बढ़ते हैं और लोगों की ट्रैवलिंग बढ़ती है, नगर निगमों, नगर योजनाकारों और परिवहन अधिकारियों के सामने सड़क नेटवर्क के प्रबंधन की चुनौती बढ़ती जाती है. कंपनी ने माना है कि ट्रैफिक को ठीक से मैनेज करना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है. अमेरिका-जापान समेत कई देशों में यात्रा का समय बढ़ा: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार लंदन (इंग्लैंड), बेंगलुरु (भारत), डबलिन (आयरलैंड), मेक्सिको सिटी (मेक्सिको), बार्सिलोना (स्पेन), एथेंस (ग्रीस), मिलान (इटली), रोसारियो (अर्जेंटीना), हिरोशिमा (जापान), सैन फ्रांसिस्को (संयुक्त राज्य अमेरिका) समेत कई अन्य प्रमुख शहरों में यात्रा का समय बढ़ गया. 2023 में बेंगलुरु छठा और 2024 में तीसरा सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला शहर था. एशिया का सबसे धीमा शहर बेंगलुरु: ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार एशिया में बेंगलुरु एक बार फिर सबसे धीमा शहर बन गया है. यहां औसत यात्रा समय 3 मिनट 37 सेकंड प्रति किलोमीटर है. हालांकि, सामान्य यातायात की स्थिति में यात्रा समय घटकर 2 मिनट 4 सेकंड रह जाता है. भीड़भाड़ के स्तर के मामले में बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे भीड़भाड़ वाला शहर है, जिसका स्कोर 74.4 है, जो एक साल पहले 72.7 था. आयरलैंड का ऐतिहासिक शहर डबलिन 72.9 स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर है. जो दुनिया का छठा सबसे धीमा शहर भी है, जहां प्रति किमी यात्रा का समय 3.27 मिनट है. दक्षिण भारत के राज्यों में ट्रैफिक की स्थिति सबसे खराब: ट्रैफिक इंडेक्स ने भारत के 10 शहरों का सर्वे किया, जिसमें बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, एर्नाकुलम, अहमदाबाद शामिल हैं. इनमें 7 शहर भारत के दक्षिण से आते हैं. इस हिसाब से कहा जा सकता है कि दक्षिण के शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सबसे ज्यादा खराब है.  छोटे शहरों में भी बढ़ी जाम की समस्या: मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता यह दिखाते हैं कि महानगर भी लगातार ट्रैफिक की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. जयपुर, चेन्नई और हैदराबाद जैसे उभरते शहरों में भी ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है. यही नहीं एर्नाकुलम और अहमदाबाद जैसे छोटे शहर भी रैंकिंग में शामिल हैं, जो दर्शाता है कि ट्रैफिक की समस्या केवल महानगरों तक ही सीमित नहीं हैं. बेंगलुरु में 10 किमी की दूरी 36 मिनट में हो रही पूरी: बेंगलुरु में ट्रैफिक की स्थिति ऐसी है कि लोग 15 मिनट में केवल 4.2 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाते हैं. यानी 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 36.09 मिनट का समय लग रहा है. जो 2024 की तुलना में 2 मिनट से अधिक है. व्यस्त समय में औसत गति घटकर 13.9 किमी/घंटा रह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में पूरे 1 किमी/घंटा धीमी है. ये आंकड़े बेंगलुरु के सड़क नेटवर्क पर पड़ने वाले गंभीर दबाव को दर्शाते हैं. जहां व्यस्त समय में लगने वाला ट्रैफिक न केवल समय बर्बाद करता है, बल्कि ईंधन की खपत में कमी, प्रदूषण और यात्रियों के तनाव को भी बढ़ाता है. ये आंकड़े दुनिया के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों में मेट्रो विस्तार, कॉर्पोरेट कम्यूट, स्थायी परिवहन समाधानों की आवश्यकता पर जोर देते हैं. ट्रैफिक जाम के कारण     निजी वाहनों की बढ़ती संख्या: शहरी परिवारों में आमदनी बढ़ने से जीवन स्तर में सुधार हुआ है. आर्थिक समृद्धि ने लोगों को निजी वाहनों का मालिक बनने में सक्षम बनाया है, जिससे सड़क पर भीड़ बढ़ गई है.     सड़कों का डिजाइन बढ़ा रहा जाम: सड़कों के रेडियल डिजाइन के कारण शहरों के केंद्रीय व्यावसायिक जिलों (सीबीडी) में और उसके आसपास ट्रैफिक जाम की समस्या ज्यादा हो गई है. लोगों को अक्सर सीबीडी से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके चलते इन क्षेत्रों में भारी जाम लग जाता है.     पार्किंग की समस्या: सड़क पर सीमित जगह होने के कारण किनारे पार्किंग बढ़ जाती है. अधिकांश शहरों में सड़क से अलग पार्किंग सुविधाएं, बहुमंजिला पार्किंग स्थल या विशेष पार्किंग क्षेत्र अपर्याप्त हैं. इससे व्यावसायिक क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या और भी गंभीर हो जाती है.     ट्रैफिक नियामों की जानकारी का न होना: यातायात नियमों की जानकारी न होने के कारण भी सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है. ट्रैफिक जाम से निपटने के उपाय     सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना: जब लोग सार्वजनिक बसों, ट्रेनों और मेट्रो का उपयोग करते हैं, तो सड़कों से निजी कारों की संख्या कम होती है. बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणालियां मिलने पर लोग अपनी गाड़ियों के बजाय इन साधनों … Read more

2026 में बाजार पर दबाव, एफपीआई ने अब तक 36,500 करोड़ रुपए किए निकाले

मुंबई  इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में 2.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंताएं रहीं। इस सप्ताह के दौरान सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। इनमें रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा गिरा, जिसमें 11.33 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर भी 5 प्रतिशत से ज्यादा टूटे। हफ्ते के दौरान निफ्टी में 2.51 प्रतिशत की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.95 प्रतिशत फिसलकर 25,048 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स आखिरी दिन 769 अंक यानी 0.94 प्रतिशत गिरकर 81,537 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 2.43 प्रतिशत नीचे रहा। स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर दबाव ज्यादा देखने को मिला, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 में 4.58 प्रतिशत, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बैंक निफ्टी भी कमजोर रहा और यह एक अहम सपोर्ट लेवल 58,800 के नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में नकारात्मक संकेत मिले। विशेषज्ञों के अनुसार, हफ्ते की शुरुआत में कुछ आईटी और बैंकिंग कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से बाजार को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन बाद में कई कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों की धारणा को फिर से कमजोर कर दिया।दुनिय भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव खासकर अमेरिका की तरफ से ग्रीनलैंड और टैरिफ को लेकर सख्त बयान, ने वैश्विक बाजारों को परेशान किया। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा और बिकवाली बढ़ गई। इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ मामलों की समीक्षा को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को और भी सीमित कर दिया। 1 जनवरी 2026 से अब तक, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 36,500 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। इस बीच भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92 रुपए प्रति डॉलर के पास पहुंच गया, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी है। निवेशक अब केंद्रीय बजट 2026 और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले कुछ समय के लिए बाजार में तेजी की छोटी लहर देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन पहले से बनी हुई है। हालांकि, बाजार में स्थायी सुधार तभी आएगा जब वैश्विक हालात बेहतर होंगे, कंपनियों के नतीजे अच्छे आएंगे और बजट से निवेशकों को भरोसा मिलेगा।

महिलाओं के लिए बड़ी खबर: मुफ्त गैस कनेक्शन अब तेजी से दिए जाएंगे

गुना  गुना जिले की अनुसूचित जनजाति से जुड़ी उन महिलाओं के लिए अच्छी खबर है जिनको गैस के नवीन कनेक्शन की आवश्यकता है। उज्जवला योजना 3.0 के तहत पात्र हितग्राहियों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिलेंगे। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टोरेट सभागार में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बैठक ली। बैठक का उद्देश्य योजना के तहत निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करना रहा। बैठक के प्रारंभ में जिला आपूर्ति अधिकारी अवधेश पाण्डे द्वारा उज्ज्वला योजना 3.0 की प्रगति एवं निर्धारित लक्ष्यों के संबंध में पीपीटी के माध्यम से विस्तृत प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में बताया गया कि योजना के अंतर्गत 25 लाख नए गैस कनेक्शन जारी किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पात्र महिलाओ को प्राथमिकता देने के निर्देश कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना 3.0 का लाभ अनुसूचित जनजाति वर्ग की ऐसी पात्र महिलाओं को दिया जाए, जिनके परिवार में पहले से किसी भी सदस्य के नाम पर गैस कनेक्शन उपलब्ध न हो। कलेक्टर ने धरती आबा योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों को उज्ज्वला योजना के क्रियान्वयन में विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। 2 तारीख तक लक्ष्य पूरा करने के निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 2 तारीख तक निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है, जिससे वे पारंपरिक ईधन के स्थान पर एलपीजी गैस का उपयोग कर सकें। कलेक्टर ने दिए अहम निर्देश इसके साथ ही कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य के हर पात्र परिवार तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच सुनिश्चित हो। उज्ज्वला योजना 3.0 के माध्यम से न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि जंगलों से लकड़ी लाने की मजबूरी भी कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मैदानी स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी पात्र अनुसूचित जनजाति महिला योजना से वंचित न रहे। जिला प्रशासन, आपूर्ति विभाग और गैस एजेंसियों के समन्वय से योजना को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया, ताकि गुना सहित पूरे मध्यप्रदेश में उज्ज्वला योजना का लाभ समय पर जरूरतमंदों तक पहुंचे। 

Budget की 92 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा, अरुण जेटली ने शुरू किया था ये ऐतिहासिक कदम

  नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश करने वाली हैं. मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) लगातार 9वीं बजट पेश करने जा रही हैं. उन्होंने पहला बजट 5 जुलाई 2019 को पेश किया था. दरअसल, मोदी सरकार के दौरान कई पुरानी परंपराएं बदली हैं, जिनमें रेल बजट (Rail Budget) जुड़ी एक परंपरा भी शामिल है.  92 साल से जारी थी ये परंपरा  भारतीय बजट इतिहास (Indian Budget History) पर नजर डालें तो मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. इनमें से एक सबसे अहम है, रेल बजट से जुड़ा हुआ है, जिसे 92 साल बाद मोदी सरकार में बदला गया था आम बजट में रेल बजट का विलय  मोदी सरकार के दौरान साल 2017 में ये बड़ा बदलाव किया गया था, और सरकार ने 92 साल के बाद आम बजट और रेल बजट को अलग-अलग पेश करने की परंपरा तोड़ी थी, जिसके बाद से Union Budget-Rail Budget को एक साथ पेश किया जाने लगा. पहले अलग-अलग पेश होते थे बजट बजट इतिहास पर गौर करें तो PM Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार में साल 2017 में किए गए इस बदलाव से पहले तक देश में दो तरह के बजट पेश किए जाते थे. पहला रेल बजट (Rail Budget) और दूसरा आम बजट (Union Budget). इस दौरान आम बजट में जहां सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और देश की आर्थिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाओं के बारे में जानकारी देती थी. वहीं रेलवे से जुड़ी घोषणाओं के लिए अलग से रेलवे बजट संसद में पेश किया जाता था. 1924 से चली आ रही थी ये परंपरा रेल बजट (Rail Budget) पहली बार साल 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था. इसके बाद से ही लगातार हर साल आम बजट से एक दिन पहले रेलवे बजट (Railway Budget) पेश किए जाने की परंपरा चली आ रही थी, लेकिन मोदी सरकार ने 2017 में आम बजट और रेलवे बजट को मर्ज कर दिया और इसके बाद से संसद में 1 फरवरी को सुबह 11 बजे केवल एक ही बजट पेश किया जाने लगा. अरुण जेटली ने किया था पहला कॉमन बजट पेश वर्षों पुरानी इस परंपरा में बदलाव करने के बाद जब आम बजट और रेल बजट को मिलाकर कॉमन बजट पेश किया गया, तो इसे सबसे पहले संसद में पेश करने वाले वित्त मंत्री अरुण जेटली थे. उन्होंने 2017 में पहली बार आम बजट में ही रेलवे बजट पढ़ा था. यहां इस बात का जिक्र करना भी बेहद जरूरी है कि आखिर इस बदलाव के लिए सरकार से किसने सिफारिश की थी. तो बता दें कि नीति आयोग (Niti Aayog) ने ब्रिटिश शासन से चली आ रही इस परंपरा को खत्म करने की सलाह दी थी.

आरटीओ के चक्कर खत्म, पंजाब में घर बैठे उपलब्ध होंगी सेवाएं

चंडीगढ़  पंजाब में आरटीओ को फेसलेस करना आम आदमी के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। वर्षों से लोग ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी और वाहन पंजीकरण जैसे कामों के लिए आरटीओ दफ्तरों में लंबी कतारों, दलालों और अनावश्यक देरी से परेशान रहते थे। अब इस व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा शुरू की गई फेसलेस योजना के तहत ट्रांसपोर्ट विभाग की 56 सेवाएं अब सेवा केंद्रों से मिलेंगी। लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या 1076 नंबर पर कॉल कर सहायता ले सकते हैं। खास बात यह है कि सेवा केंद्र के कर्मचारी जरूरत पड़ने पर लोगों के घर जाकर प्रक्रिया पूरी करेंगे। इस बदलाव से लोगों का समय, पैसा और मानसिक तनाव तीनों की बचत होगी। अब किसी को छुट्टी लेकर आरटीओ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दलालों पर निर्भरता खत्म होगी और हर व्यक्ति को तय समय में सेवा मिलने की गारंटी होगी। आरटीओ दफ्तर अब केवल ड्राइविंग लाइसेंस का फोटो खिंचवाने और आरसी रिन्यू कराने जैसे जरूरी कामों के लिए ही जाना होगा। बाकी सभी सेवाएं डिजिटल और फेसलेस होंगी। यह व्यवस्था खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। सरकार का यह कदम दिखाता है कि प्रशासन अगर नागरिकों की सुविधा को केंद्र में रखकर काम करे, तो सरकारी सेवाएं भी निजी सेवाओं की तरह सरल और भरोसेमंद बन सकती हैं।