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बसंत पंचमी का खास संयोग: तीन साल बाद शुक्रवार को, 2032 में फिर बनेगा

धार धार की भोजशाला में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार का संयोग शांति के साथ बीत गया। पिछले चौबीस साल में जब भी यह खास मौका आया, तब धार में हालात काफी चुनौतीपूर्ण रहे। इतिहास के पन्नों को देखें तो चार बार ऐसे मौके आए जब प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े और उनमें से तीन बार तो शहर को पथराव और कर्फ्यू जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा,लेकिन इस साल शहरवासियों और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि पूजा और नमाज दोनों ही बिना किसी टकराव के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए। भोजशाला की मिल्कियत का मामला फिलहाल हाई कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट के आदेश पर पुरातत्व विभाग ने करीब तीन महीने तक यहां सर्वे का काम किया और पुरानेे अवशेषों  की खोजबीन की। हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि आने वाले समय में कोर्ट का फैसला उनके हक में आएगा। विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी यह बात कही गई है कि भोजशाला के निर्माण को जल्द ही एक हजार साल पूरे होने वाले हैं और तब तक वे कानूनी तरीके से अपनी कोशिशें जारी रखेंगे। आने वाले वक्त की बात करें तो पंडितों का अनुमान है कि साल 2029 में एक बार फिर बसंत पंचमी और शुक्रवार का मेल होगा। इसके बाद साल 2032 और फिर साल 2052 में भी यही स्थिति बनेगी। हालांकि इस बार का उत्सव शांति से निकल गया, फिर भी पुलिस प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। धार में 27 जनवरी तक भारी पुलिस बल शहर में तैनात रखने का फैसला लिया गया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।  

इंदौर में सफेद गिद्धों की बढ़ी संख्या, 9 साल बाद हुआ ‘आकाश के रक्षक’ का आगमन

इंदौर  इंदौर के आकाश से लगभग गायब हो चुकी इजिप्शियन वल्चर यानी सफेद गिद्धों की प्रजाति एक बार फिर शहर के बाहरी इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। नेचर एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एंड अवेयरनेस सोसायटी द्वारा हाल ही में किए गए एक विस्तृत सर्वे में यह सुखद जानकारी सामने आई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ये दुर्लभ सफेद गिद्ध विशेष रूप से देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड और कंपेल के आसपास के क्षेत्रों में उड़ान भरते देखे गए हैं। सर्वे के आंकड़ों में हुआ सुधार देवगुराड़िया पहाड़ी का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से इन गिद्धों का प्राकृतिक वास स्थल रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इनकी आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। एनजीओ एनडब्ल्यूसीएस द्वारा हर साल दिसंबर और जनवरी के महीनों में गिद्धों की गणना के लिए सर्वे किया जाता है। इस वर्ष के सर्वे में उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। करीब डेढ़ महीने तक चली इस प्रक्रिया के बाद क्षेत्र में 15 सफेद गिद्धों की पहचान की गई है। यदि पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो यह संख्या 7 अधिक है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह सुधार अभी शुरुआती है क्योंकि 9 साल पहले इसी क्षेत्र में गिद्धों की संख्या 83 हुआ करती थी। नगर निगम आयुक्त को सौंपा जाएगा प्रस्ताव गिद्धों के संरक्षण को लेकर संस्था अब ठोस कदम उठाने की तैयारी में है। एनडब्ल्यूसीएस के अध्यक्ष रवि शर्मा ने जानकारी दी कि वे लंबे समय से इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। संस्था की योजना है कि इंदौर नगर निगम मौजूदा डंपिंग यार्ड के अलावा शहर से लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर एक ऐसा स्थान चिन्हित करे, जहां कचरे की प्रोसेसिंग खुले में की जा सके। इससे गिद्धों को कचरे में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने और भोजन प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इस प्रस्ताव को लेकर जल्द ही निगमायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। कचरा प्रबंधन और आबादी का गहरा संबंध विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या कम होने का मुख्य कारण खुले क्षेत्रों में कचरा डंपिंग का बंद होना था। चूंकि सफेद गिद्ध कचरे से अपना भोजन खोजने में सक्षम होते हैं, इसलिए भोजन की कमी ने इन्हें पलायन के लिए मजबूर किया। अब पिछले दो वर्षों में भोजन की उपलब्धता में मामूली सुधार होने से इनकी संख्या फिर बढ़ने लगी है। हालांकि, वन्यजीव प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कचरे की प्रोसेसिंग पूरी तरह से बंद और कवर्ड प्लांट्स में होने लगी, तो इन गिद्धों के अस्तित्व पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। 

उज्जैन शहर में होगा बुलडोजर ऑपरेशन, 18 बीघा जमीन जल्द होगी खाली

उज्जैन  सिंहस्थ को देखते हुए सरकार जहां उज्जैन में शिप्रा सहित सभी जल स्रोतों में साफ पानी के लिए योजनाएं बना रही है। दावे कर रही है, लेकिन सप्तसागर से दो साल में न तो कब्जे हटे और न सीवेज मिलना रुक पाया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नाराजगी जाहिर की है। कहा है, उज्जैन नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर ने पहले जारी निर्देशों का न तो सही से पालन किया और न प्रगति के संबंध में समय पर हलफनामा दाखिल किया। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश निर्देशों का पालन करने में प्रतिबद्धता व ईमानदारी की कमी को एनजीटी हल्के में नहीं लेगा। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे कलेक्टर व निगम कमिश्नर को निर्देशित कर तालाबों से अतिक्रमण हटवाएं। पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्रवाई करें। पर्यावरण विभाग के पीएस निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करें। शासन से भी दो हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। 36 में से 18 बीघा पर अतिक्रमण सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई कर यह निर्देश दिए। याचिका में बताया गया कि उज्जैन जिले के सप्तसरोवर-रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धनसागर, रत्नाकर सागर, विष्णुसागर और पुरुषोत्तम सागर का धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। राजस्व रिकॉर्ड में यह तालाब गोवर्धन सागर के नाम से खसरा 1281 पर 36 बीघा जमीन में दर्ज हैं। 18 बीघा पर अतिक्रमण हो चुका है। एनजीटी के अगस्त 2024 के आदेश में समिति से जांच कराई थी। अतिक्रमण और सीवेज मिलने की पुष्टि हुई थी।

रेलवे ने शुरू की डिजिटल व्यवस्था, अब ट्रेनों में बैठे-बैठे मिलेगा स्वादिष्ट खाना

भोपाल  ट्रेन के सफर के दौरान यात्रियों को अब गर्म ताजा भोजन, मिनरल वाटर या जरूरी यात्रा जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल मंडल (Bhopal Rail Division) में एकीकृत मोबाइल ऐप सेवा को एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म सर्विस प्रोवाइडर सर्वर से कनेक्ट कर दिया है। इस आधुनिक डिजिटल पहल से रेल यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो गई है। सीट पर बैठे-बैठे मिलेगी सुविधा सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यात्रा से जुड़ी अनेक सेवाओं को एक ही मोबाइल ऐप प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया है। इस ऐप के माध्यम से यात्री अपनी सीट पर बैठे-बैठे ट्रेन की लाइव लोकेशन, रिजर्वेशन चार्ट, टिकट विवरण, पीएनआर स्टेटस और ट्रेन के रनिंग स्टेटस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मिलेगा गर्म भोजन एकीकृत मोबाइल ऐप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग भी आसानी से कर सकते हैं। इसके साथ ही ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे स्टेशन पर अनावश्यक पूछताछ और भीड़ से राहत मिलती है। यात्रा के दौरान भोजन की समस्या को दूर करने के लिए इस ऐप में ई-कैटरिंग सेवा को भी शामिल किया गया है। यात्री अब अपनी पसंद का गर्म और ताजा भोजन, साथ ही मिनरल वाटर, सीधे अपनी सीट पर ऑर्डर कर सकते हैं। यह सेवा समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करती है, जिससे यात्रियों का सफर अधिक आरामदायक बनता है। 

Post Office की धाकड़ स्कीम से हर महीने ₹20,500 की कमाई, बुढ़ापे के लिए सुरक्षित भविष्य

 नई दिल्ली     रिटायरमेंट के बाद जिंदगी मौज में कटे और पैसों की कोई टेंशन न रहे. इसके लिए हर कोई अपनी कमाई में से कुछ न कुछ बचत (Savings) करके ऐसी जगह निवेश (Investment) करना चाहता है, जहां उसका पैसा सुरक्षित भी रहे और रिटर्न भी जोरदार मिले. कुछ लोगों की ये निवेश प्लानिंग होती है कि रिटायर होने के बाद उन्हें नियमित आय (Reguler Income) होती रहे. इस लिहाज से पोस्ट ऑफिस की एक सेविंग स्कीम्स (Post Office Schemes) खासी पॉपुलर है. हम बात कर रहे हैं पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (Post Office SCSS Scheme) की, जो विशेष रूप से सीनियर सिटीजंस के लिए है और इसमें निवेश पर हर महीने 20500 रुपये की कमाई पक्की कर सकते हैं.  रिस्क जीरो, ब्याज धुआंधार  Post Office की सेविंग स्कीम्स पर निवेशक इसलिए भी भरोसा करते हैं, क्योंकि ये रिस्क फ्री निवेश (Risk Free Investment) माना जाता है. इसका कारण ये है कि इसमें किए गए हर छोटे-बड़े निवेश पर सुरक्षा की गारंटी खुद सरकार देती है. सरकारी स्कीम (Govt Scheme) पोस्ट ऑफिस सीनियर सिटीजन सेविंग्स पर मिल रहे ब्याज की बात करें, तो बैंक एफडी (Bank FD) भी फेल हैं, POSCSS में निवेश पर सरकार शानदार 8.2 फीसदी की दर से ब्याज ऑफर कर रही है.  1000 रुपये से शुरुआत, Tax छूट भी  इस सरकारी स्कीम (Govt Scheme) में सिर्फ 1000 रुपये से निवेश की शुरुआत की जा सकती है. रेगुलर इनकम, सुरक्षित निवेश के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पोस्ट ऑफिस की ये स्कीम टैक्स छूट (Tax Benefits) का लाभ भी देती है. POSCSS में निवेश करने वाले व्यक्ति को इसमें आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की सालाना टैक्स छूट दी जाती है. इस सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में अधिकतम निवेश की सीमा 30 लाख रुपये तय की गई है. रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियली फिट रहने में ये पोस्ट ऑफिस स्कीम कारगर साबित हो सकती है. इसमें 60 साल या उससे अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति या पति/पत्नी के साथ जॉइंट अकाउंट खोला जा सकता है. अगर आयु सीमा की बात करें, तो कुछ मामलों में छूट दिए जाने का भी प्रावधान है. VRS लेने वाले व्यक्ति की उम्र खाता खुलवाते समय 55 साल से अधिक और 60 साल से कम हो सकती है, वहीं डिफेंस से रिटायर हुए कर्मचारी 50 साल से अधिक और 60 साल से कम उम्र में निवेश कर सकते हैं. 5 साल मैच्योरिटी, पहले खाता बंद कराना महंगा Post Office Senior Citizen Scheme में निवेश के लिए मैच्योरिटी पीरियड पांच साल का है, इसका मतलब है कि आपको इस स्कीम का पूरा लाभ लेने के लिए 5 साल तक निवेश करना होगा. वहीं अगर इस अकाउंट को इस अवधि से पहले बंद किया जाता है, तो नियमों के मुताबिक खाताधारक को पेनल्टी देनी होती है. इस सरकारी योजना में निवेश पर ब्याज राशि का पेमेंट हर तीन महीने में किए जाने का प्रावधान है. मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने से पहले खाताधारक की मृत्यु होने पर अकाउंट क्लोज कर दिया जाता है और सारी रकम दस्तावेजों में दर्ज नॉमिनी को सौंप दी जाती है.   हर महीने कैसे 20500 रुपये की कमाई? आप किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर अपनी SCSS अकाउंट आसानी से खुलवा सकते हैं. इसमें सिंगल अकाउंट से 15 लाख एकमुश्‍त और जॉइंट अकाउंट से 30 लाख रुपये अधिकतम निवेश किया जा सकता है.  अगर किसी व्यक्ति ने 30 लाख रुपये Post Office SCSS में ज्‍वाइंट अकाउंट के तहत निवेश किया तिमाही आधार पर उसे सिर्फ ब्‍याज से 61500 रुपये मिलेंगे और यह पूरे 5 साल तक मिलता रहेगा. पांच साल बाद आप 30 लाख मूल राशि भी निकाल सकते हैं या फिर 3 साल के लिए और बढ़ा सकते हैं. इसे मंथली बेसिस के आधार पर कैलकुलेट करें, तो…  सालाना ब्याज से कमाई: ₹30,00,000 का 8.2% = ₹2,46,000 तिमाही ब्याज से कमाई:  ₹2,46,000/4 = ₹61,500 मंथली ब्याज से कमाई:    ₹2,46,000/3 = ₹20,500 गौरतलब है कि एक बार निवेश करने के बाद, आपकी मैच्‍योरिटी अवधि के लिए यही ब्याज दर लागू रहती है, भले ही सरकार तिमाही आधार पर किए जाने वाले संशोधन के तहत आगे चलकर ब्याज दरें क्यों न बदल दे.

300वीं जयंती के मौके पर कर्तव्य पथ पर गूंजेगा अहिल्या के सुशासन का संदेश, प्रदेश की झांकी पेश

 इंदौर  राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में दिल्ली के कर्तव्य पथ पर चलने वाली मध्य प्रदेश की झांकी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती को समर्पित है। राज्य शासन ने गणतंत्र दिवस परेड 2026 में प्रदेश की भव्य झांकी ‘पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर’ के गौरवशाली व्यक्तित्व, सुशासन, आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया है।   झांकी के अग्र भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई की चिर-परिचित प्रतिमा को दर्शाया गया है, जिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यता, गरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। झांकी के मध्य भाग में लोकमाता अहिल्याबाई अपने मंत्रि-गण एवं सैनिकों के साथ दिखाई गई हैं, जो उनके सुदृढ़ प्रशासन और न्यायप्रिय शासन व्यवस्था को दर्शाता है। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होलकर साम्राज्य द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का चित्रण है, जहां एक सैनिक पहरा देते हुए सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है। अंतिम भाग में देवी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, मंदिर एवं किले को प्रदर्शित किया गया है। नीचे पवित्र नर्मदा नदी, घाट एवं नौकाओं का दृश्य अंकित है। झांकी के अंतिम छोर पर महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर दिखाई देते हैं। वहीं भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैं, जो उनके काल में नारी सशक्तीकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण है। झांकी के साथ चलते लोक कलाकारों का पारंपरिक नृत्य इस प्रस्तुति को जीवंत, रंगीन और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली बनाता है। 

सफेद मौत अमेरिका में फैल रही, 23 करोड़ लोग प्रभावित, सिर्फ 10 मिनट बाहर रहना खतरनाक

वॉशिंगटन  अमेरिका में इस वक्त मौसम वैज्ञानिकों के हाथ-पांव फूल हुए हैं. हाल ही में कुदरत के कहर की चेतावनी जारी की गई है. जिसमें 23 करोड़ से ज्यादा लोगों के सिर पर ‘सफेद मौत’ का साया मंडरा रहा है. ये वॉर्निंग विंटर स्टॉर्म फर्न को लेकर की गई है, जो कई राज्यों में तबाही मचाने वाला है. दावा किया जा रहा है कि इस बार पिछले साल तक के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. इस तूफान की वजह से इंसानों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. बताया जा रहा है कि इस सफेद तूफान का सामना करने वाले का शरीर 10 मिनट में फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आ जाएगा. कितने राज्यों में ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ यह कोई मामूली बर्फबारी नहीं है बल्कि यह बर्फ, जमा देने वाली बारिश और ‘आर्कटिक कोल्ड’ का वो जानलेवा मिश्रण है जो पूरे अमेरिका को ठप कर देगा. बताया जा रहा है कि ये भयानक तूफान 2,300 मील लंबा मौत का रास्ता तय करने वाला है. यानी इसकी चपेट में टेक्सास से लेकर न्यूयॉर्क तक, करीब 15 राज्य आने वाले हैं. आने वाला खतरा देखते हुए यहां की सरकारों ने ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ घोषित कर दी है. टूट जाएंगे Winter Storm के सारे रिकॉर्ड न्यूयॉर्क सिटी और फिलाडेल्फिया जैसे शहरों में पिछले 4 साल की सबसे बड़ी बर्फबारी होने की आशंका है. रविवार का दिन इन शहरों के लिए सबसे खतरनाक होगा, जब बर्फीले तूफान की रफ्तार और तीव्रता अपने चरम पर होगी. सोमवार तक चलने वाला यह तूफान अपने पीछे 1 फुट से ज्यादा बर्फ और जानलेवा पाला यानी जमी हुई बर्फ छोड़ जाएगा. इस खतरे को देखते हुए शनिवार के लिए 1,400 से ज्यादा उड़ानें पहले ही रद्द की जा चुकी हैं. डलास और फोर्ट वर्थ जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर सन्नाटा पसरने वाला है. इसके अलावा भारी बर्फ की वजह से बिजली की लाइनें टूटने का खतरा है. दक्षिण के राज्यों में 2 इंच तक की बर्फ की परत जम सकती है. इसकी वजह से हजारों घर अंधेरे में डूब सकते हैं. 10 मिनट बाहर रहे तो… इस तूफान के साथ ‘पोलर वोर्टेक्स’ (Polar Vortex) की ठंडी हवाएं भी मिक्स हो जाएंगी यानी दोगुनी तबाही का अंदेशा है. शिकागो और मिडवेस्ट के इलाकों में तापमान -30 से -46 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. इतनी ठंड में सिर्फ 10 मिनट बाहर रहने पर ‘फ्रॉस्टबाइट’ का खतरा है. यानी इंसान का शरीर सुन्न पड़ जाएगा. फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आए शरीर के अंग काले पड़ जाते हैं. कंडीशन ज्यादा सीरियस होने पर फ्रॉस्टबाइट अंगों को गला सकती है.

Budget 2026 में हो सकता है होम लोन पर बड़ा बदलाव, NAREDCO ने 5 लाख की ब्याज छूट की मांग की

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर की शीर्ष संस्था नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने होम लोन पर मिलने वाली ब्याज कटौती की सीमा बढ़ाने, किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है. NAREDCO का कहना है कि मौजूदा आर्थिक और शहरी परिस्थितियों को देखते हुए आवास क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है, ताकि ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सके. होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने की मांग NAREDCO के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की छूट सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह सीमा करीब 12 वर्ष पहले तय की गई थी, जबकि इस दौरान प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में काफी वृद्धि हो चुकी है. जैन के अनुसार, ब्याज छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी, जिससे आवासीय मांग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट 2026 में इस प्रस्ताव को शामिल किया जाए. किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव जरूरी NAREDCO ने किफायती आवास की मौजूदा परिभाषा को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की है. संगठन का कहना है कि वर्तमान में 45 लाख रुपये तक के घरों को किफायती आवास माना जाता है, लेकिन बढ़ती भूमि कीमतों और निर्माण लागत के कारण यह सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है. संस्था ने सुझाव दिया कि 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. इससे अधिक संख्या में परियोजनाएं इस श्रेणी में आ सकेंगी और खरीदारों को एक प्रतिशत जीएसटी जैसी कर राहत का लाभ मिलेगा. रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने पर जोर NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र देश की जीडीपी, रोजगार सृजन और शहरी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके बावजूद अब तक इसे उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलता है, तो डेवलपर्स को सस्ते ऋण, बेहतर वित्तीय संसाधन और निर्माण से जुड़े कच्चे माल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी. इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और आवास की आपूर्ति बढ़ेगी. किराये के आवास को बढ़ावा देने की जरूरत NAREDCO ने किराये के आवास को प्रोत्साहन देने की भी मांग की है. प्रवीण जैन ने बताया कि मौजूदा समय में किराये से मिलने वाला रिटर्न मात्र एक से तीन प्रतिशत के बीच है, जिससे रियल एस्टेट कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में निवेश करना आकर्षक नहीं रह गया है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार कर छूट, वित्तीय प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन के जरिए किराये के आवास को बढ़ावा दे सकती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा किया जा सके. सरकारी जमीन और PPP मॉडल का प्रस्ताव निरंजन हीरानंदानी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार अपने पास उपलब्ध खाली पड़ी जमीन का उपयोग किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास निर्माण के लिए करे. इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे तेजी से आवासीय परियोजनाओं का विकास संभव होगा. 2030 तक 1000 अरब डॉलर का सेक्टर NAREDCO का अनुमान है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2030 तक 1,000 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है. संगठन का मानना है कि यदि बजट में आवास ऋण, कर ढांचे और नीति सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि को और गति देगा.

भारत की आर्थिक प्रगति: अगले 5 साल में प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर, चीन से बराबरी करेगा देश

नई दिल्ली भारत के पड़ोसी चीन की जीडीपी भले ही अभी भारत से अधिक हो, लेकिन कई आर्थिक संकेतकों में भारत अब उसके बराबर पहुंचने या उससे तेजी से नजदीक आने की स्थिति में है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक भारत ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी में शामिल हो जाएगा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन और इंडोनेशिया की बराबरी कर लेगा. यह रिपोर्ट भारत की आय संरचना में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है. इनकम में चीन की बराबरी करेगा भारत   एसबीआई के अनुसार, अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. भारत की आय में यह बढ़ोतरी लंबी और क्रमिक प्रक्रिया का नतीजा है. आजादी के बाद भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लग गए और यह मुकाम 2007 में हासिल हुआ. इस दौरान प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 में जहां मात्र 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई, यानी सालाना औसतन 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद भारत की आर्थिक रफ्तार में तेजी आई. आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग छह दशक लगे, लेकिन 2014 तक भारत दो ट्रिलियन डॉलर, 2021 तक तीन ट्रिलियन डॉलर और फिर सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया. इसके साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती है. 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर भारत SBI की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा ग्रोथ ट्रेंड जारी रहा तो भारत अगले दो साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है. भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में करीब छह दशक लगे, लेकिन इसके बाद रफ्तार तेज हो गई.     दूसरा ट्रिलियन सिर्फ 7 साल में जुड़ा     तीसरा ट्रिलियन 2021 तक     चौथा ट्रिलियन 2025 तक हासिल होने का अनुमान     2027 के आसपास 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य संभव प्रति व्यक्ति आय में तेज उछाल SBI के मुताबिक, भारत को लो-इनकम देश से लोअर-मिडिल इनकम देश बनने में करीब 60 साल लगे.     1962 में प्रति व्यक्ति आय: 90 डॉलर     2007 में: 910 डॉलर     2009 में: 1,000 डॉलर     2019 में: 2,000 डॉलर     2026 तक अनुमान: 3,000 डॉलर 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर (करीब 3.64 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही भारत अपर-मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां फिलहाल चीन और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार का संकेत देगा. 2047 का बड़ा लक्ष्य सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक हाई-इनकम देश बने. इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को करीब 13,936 डॉलर तक ले जाना होगा. SBI का मानना है कि अगर भारत 7.5% की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि बनाए रखता है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. हालांकि, अगर हाई-इनकम की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो देश को और तेज रफ्तार से विकास करना होगा. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, उद्योग, निर्यात और संरचनात्मक सुधारों पर विशेष जोर देना जरूरी होगा. वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से बेहतर रही है. ग्लोबल ग्रोथ रैंकिंग में भारत 95वें परसेंटाइल में पहुंच चुका है, यानी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 में जहां केवल 39 देश हाई-इनकम थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या बढ़कर 87 हो गई है. भारत भी अब तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है. साल दर साल आय में इजाफा प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी यही रुझान देखने को मिला है. साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची और अगले दस वर्षों में, यानी 2019 तक, यह दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई. अनुमान है कि 2026 तक यह बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे देश की खपत क्षमता और मध्यम वर्ग का आकार और मजबूत होगा. इसी पृष्ठभूमि में रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. मूडीज का मानना है कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा, जिसका सीधा असर बीमा जैसे क्षेत्रों की मांग पर पड़ेगा. एजेंसी के अनुसार, तेज ग्रोथ, बढ़ता डिजिटलीकरण, कर सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव बीमा प्रीमियम में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देंगे, जिससे उद्योग की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है.

सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट, किसानों को डिजिटल पहचान से सुविधा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार खाद की बिक्री को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एग्री स्टैक (Agri Stack) का सहारा लेने वाली है। इसके तहत, यूरिया की बिक्री को धीरे-धीरे डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ा जाएगा। यह वही आईडी है जिसका उपयोग वर्तमान में पीएम-किसान योजना (PM Kisan Yojana) के पंजीकरण के लिए किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाली खाद केवल वास्तविक भू-स्वामियों या अधिकृत बटाईदारों तक ही पहुंचे। यूरिया की रिकॉर्ड खपत और सब्सिडी का गणित सरकार के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण फर्टिलाइजर सब्सिडी का बढ़ता हुआ खर्च है।     बजट अनुमान: सरकार ने चालू वित्त वर्ष (FY26) के लिए ₹1.68 ट्रिलियन की सब्सिडी का अनुमान लगाया था।     संशोधित अनुमान: यूरिया की रिकॉर्ड मांग के कारण यह खर्च ₹1.91 ट्रिलियन को पार कर सकता है।     खपत में वृद्धि: अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4% अधिक है। सात जिलों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक कार्ययोजना तैयार की है। पहले चरण में देश के सात चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहाँ पहले से ही बड़ी संख्या में किसानों की डिजिटल आईडी बन चुकी है। इस ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या आईडी के जरिए खाद बेचने से कालाबाजारी रुकती है और सब्सिडी का सही उपयोग होता है। एग्री स्टैक और फार्मर आईडी     एग्री स्टैक एक डिजिटल फाउंडेशन है जो किसानों, डेटा और डिजिटल सेवाओं को एक मंच पर लाता है। इसका लक्ष्य डेटा के आधार पर किसानों को बेहतर निर्णय लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करना है।     4 दिसंबर, 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।     यह आईडी किसान की डेमोग्राफिक प्रोफाइल, जमीन की जानकारी और खेती के तरीकों को सुरक्षित रखती है। किसान अपनी डिजिटल आईडी कैसे बनवाएं? सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तेजी से आईडी बनाने पर काम कर रही है। किसान भाई इसे दो तरीकों से बनवा सकते हैं: ऑनलाइन प्रक्रिया     राज्य के एग्री स्टैक पोर्टल या फार्मर रजिस्ट्री ऐप पर जाएं।     अपना आधार नंबर दें और eKYC की प्रक्रिया पूरी करें।     जमीन का सर्वे नंबर और खेत की अन्य डिटेल्स दर्ज करें।     डेटा उपयोग के लिए सहमति (Consent) दें और ई-साइन करें।     वेरिफिकेशन के बाद आपकी यूनिक डिजिटल आईडी जेनरेट हो जाएगी। ऑफलाइन प्रक्रिया किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी अपनी आईडी बनवा सकते हैं। इस कदम से किसे होगा फायदा? अधिकारियों के अनुसार, इस एकीकरण से खाद की उस चोरी को रोका जा सकेगा जो अक्सर औद्योगिक इकाइयों की ओर डाइवर्ट कर दी जाती है। इससे केवल वही व्यक्ति खाद खरीद पाएगा जो वास्तव में खेती कर रहा है या जिसके पास जमीन का अधिकार है।