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ट्रंप के ‘जंगल कानून’ के खिलाफ 57 मुस्लिम देशों के साथ आया चीन

बीजिंग. मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका–ईरान के बीच तीखी बयानबाज़ी के बीच चीन ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। चीन के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार (26 जनवरी) को 57 देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के महासचिव के साथ बीजिंग में अहम बातचीत की है। चीनी विदेश मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब मिडिल-ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और सैन्य टकराव की आशंकाएं बढ़ रही हैं। यह बैठक उस पृष्ठभूमि में हुई है जब एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी कि “ईरान पर किसी भी हमले को पूर्ण युद्ध के रूप में देखा जाएगा।” दरअसल, एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान की ओर एक “आर्माडा” यानी बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेजा है, जो “एहतियात के तौर पर” तैनात किया जा रहा है। ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों की हत्या या परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करने के खिलाफ चेतावनी भी दी थी। ईरान में विरोध प्रदर्शन और मौतों का दावा इसी बीच, क्षेत्र में मौजूद एक ईरानी अधिकारी ने रविवार को दावा किया कि आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे हालात की गंभीरता और बढ़ गई है। चीन का संदेश: सुरक्षा साझेदारी और राजनीतिक समाधान इस तनातनी के बीच, सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस्लामिक सहयोग संगठन के महासचिव से बातचीत में मध्य पूर्व के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारी के निर्माण, और संवेदनशील मुद्दों के राजनीतिक समाधान पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, चीन का मानना है कि टकराव और सैन्य कार्रवाई के बजाय संवाद और सहयोग से ही क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है। दुनिया एक 'जंगल के कानून' की ओर बढ़ रही रिपोर्ट के मुताबिक, वांग ने कहा, 'चीन इस्लामी देशों के साथ मिलकर विकासशील देशों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "चीन दुनिया को जंगल के कानून की ओर लौटने से रोकने के लिए तैयार है।" चीनी विदेश मंत्री ने ये भी कहा है कि क्षेत्र के हॉटस्पॉट मुद्दों का राजनीतिक समाधान किया जाना चाहिए न कि सैन्य अभियान से। चीनी विदेश मंत्री के मुताबिक, ट्रंप की नीतियों की वजह से दुनिया एक 'जंगल के कानून' की ओर बढ़ रही है जिसमें ट्रंप जब चाहे, जिसपर चाहे टैरिफ लगा देते हैं। अमेरिकी सैन्य तैनाती जारी उधर, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि आने वाले दिनों में एक एयरक्राफ्ट कैरियर, और कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर युद्धपोत मध्य पूर्व क्षेत्र में पहुंचने वाले हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, इस सैन्य तैनाती और कूटनीतिक गतिविधियों के बीच चीन की OIC से बातचीत यह संकेत देती है कि बीजिंग खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और संभावित मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में चीन की यह पहल आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘अमेरिका के बिना यूरोप की सुरक्षा एक सपना है’: नाटो प्रमुख

वाशिंगटन. अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच गहराते तनाव के बाद अब नाटो प्रमुख ने एक बड़ा बयान दिया है। नाटो के महासचिव मार्क रूट ने सोमवार को जारी अपने इस बयान में कहा है कि अमेरिका के बिना यूरोप कभी खुद को बचा नहीं सकता और यह महज सपने की तरह है। नाटो चीफ ने यह भी कहा कि अगर यूरोप को खुद की रक्षा खुद करनी है उसे मौजूदा सैन्य खर्च के लक्ष्यों को दोगुना से भी ज्यादा बढ़ाना होगा। रूट ने ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के सांसदों से कहा, "अगर यहां कोई सोचता है कि यूरोपीय संघ या पूरा यूरोप अमेरिका के बिना खुद का बचाव कर सकता है, तो सपने देखते रहो। तुम नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है। नाटो चीफ ने आगे कहा, "अगर आप सच में अकेले चलना चाहते हैं, तो भूल जाइए कि आप 5 फीसदी रक्षा बजट के साथ कभी वहां पहुंच सकते हैं। आपको यह 10 फीसदी करना होगा। आपको अपनी खुद की परमाणु क्षमता बनानी होगी। इसमें अरबों यूरो खर्च होंगे।" ट्रंप की धमकियों से बढ़ा तनाव बता दें कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को लेकर नाटो के भीतर तनाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड को हासिल करना बहुत जरूरी है। वहीं नाटो सदस्यों द्वारा ट्रंप ने इस कदम का खुलकर विरोध किए जाने के बाद ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा भी कर दी थी। हालांकि बाद में ट्रंप ने अपना यह फैसला वापस ले लिया। बजट को लेकर क्या विवाद? इससे पहले ट्रंप यूरोपीय देशों के रक्षा बजट को लेकर भी हमलावर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि ये देश रक्षा बजट को नहीं बढ़ा रहे हैं और अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं। उन्होंने कई मौकों पर यह कहा है कि अमेरिका यूरोप के लिए बहुत पैसे खर्च करता है लेकिन बदले में अमेरिका को कुछ नहीं मिलता। बीते जुलाई में द हेग में नाटो शिखर सम्मेलन में, यूरोपीय देशों और कनाडा ने ट्रंप की इस मांग पर सहमति व्यक्त की कि वे एक दशक के भीतर अपनी जीडीपी का उतना ही प्रतिशत रक्षा पर निवेश करेंगे जितना अमेरिका करता है। उन्होंने 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद का 3.5 फीसदी बजट रक्षा पर और अतिरिक्त 1.5% सुरक्षा-संबंधित बुनियादी ढांचे पर खर्च करने का वादा किया था।

बांग्लादेश चुनाव में ”हिंदुओं को मार डालो’ बोलकर भड़का रहे उम्मीदवार

ढाका. बांग्लादेश में मु. यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार को रोकने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मुहैया कराने में पूरी तरह नाकाम रही है। इस बीच फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले देश में माहौल और अधिक सांप्रदायिक हो गया है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की खबरें आम हो गई हैं और यूनुस सरकार एक्शन लेने की बजाय इन्हें छिटपुट घटनाएं बताकर जिम्मेदारी लेने से बचने की कोशिश कर रही है। इन सब के बीच अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चुनाव में वोट के लिए बांग्लादेशी उम्मीदवार हिंदुओं पर हमलों को जानबूझकर बढ़ावा दे रहे हैं। खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि वोट पाने के लिए हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने की एक सोची-समझी रणनीति बनाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में बीते दिनों इस तरह की सांप्रदायिक आक्रामकता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह डर और चेतावनी के बल पर वोट हासिल करने के लिए तैयार की गई एक योजना है। शीर्ष खुफिया सूत्रों ने पड़ोसी देश के मौजूदा हालातों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। सूत्रों ने कहा कि कट्टर मौलवियों और स्थानीय नेताओं के बीच सांठगांठ बनी है और इन मौलवियों को कई मौकों पर नफरत भरे बयान देते और जनता से हिंदू या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट ना देने की अपील करते देखा गया है। सांसद उम्मीदवार का कबूलनामा रिपोर्ट में बांग्लादेश के एक सांसद उम्मीदवार का भी हवाला दिया गया है। इसके मुताबिक उम्मीदवार ने स्वीकार किया है कि कई सालों से, देश के राजनेताओं ने चुनाव जीतने के लिए हिंदू इलाकों पर हमले और यहां तक की हिंदुओं को मार डालने के लिए भड़काने की रणनीति का इस्तेमाल किया है। बांग्लादेशी का कहना है कि इन हमलों को अंजाम देने वालों को अब ‘इस्लाम के सैनिक’ बोल कर इनका महिमामंडन भी किया जा रहा है।

ईरान पर हमले की आशंकाओं के बीच पहुंचा US एयरक्राफ्ट

वॉशिंगटन. अमेरिका का USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट मिडल ईस्ट पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट में तीन गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर भी हैं। कहा जा रहा है कि इस एयरक्राफ्ट के पहुंचने से ईरान पर हमला करने की अमेरिका की क्षमता में इजाफा हो जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार इस एयरक्राफ्ट को क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने और सुरक्षा की स्थिति मजबूत करने के लिए भेजा गया है। ईरान में हजारों प्रदर्शनकारियों का कत्ल किए जाने के आरोप लगाते हुए अमेरिका आक्रामक है। उसका कहना है कि यदि ईरान ऐसे ही प्रदर्शनकारियों को सजाएं देता रहा तो हम सैन्य दखल दे सकते हैं। इस बीच ईरान के अयातुल्लाह खामेनेई शासन ने भी अमेरिका को बड़ी चुनौती देते हुए उसे कमजोर बताया है। ईरान के एक सीनियर सैन्य अधिकारी ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के बूते की बात नहीं है कि वह ईरान पर सरप्राइज अटैक करे या फिर निर्णायक हमला कर सके। ईरान की Mehr न्यूज एजेंसी के अनुसार अधिकारी ने कहा कि अमेरिका का ऐसा आकलन गलत है कि वह हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी कमजोर आकलन के आधार पर अमेरिका यदि हमला करता है और सीमित कार्रवाई जैसी जो बात वह कर रहा है, वैसा कुछ किया तो चीजें हाथ से निकल जाएंगी। हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम ने इस बीच ईरान के समर्थन का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका ने कोई कदम उठाया तो हम ईरान के साथ रहेंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे। इस बीच हिजबुल्लाह के ऐलान को लेकर लेबनान में ही मतभेद हैं। लेबनान के सांसद और काताएब पार्टी के नेता सैमी गेमायेल ने कहा कि हमें जंग में झोंकने की जरूरत नहीं है। हिजबुल्लाह से बोला लेबनान- आपको सुसाइड करनी है तो करिए उन्होंने हिजबुल्लाह को चेतावनी दी और कहा कि आपको जो करना है करिए, लेकिन इसमें लेबनान को दांव पर लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने हिजबुल्लाह के ऐलान को सुसाइड जैसा बताया। उन्होंने कहा कि यदि आप अपने बॉस यानी ईरान को बचाना चाहते हैं तो जाएं। आप सुसाइड करना चाहते हैं तो करें, लेकिन लेबनान को इससे दूर रखें। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबियों का कहना है कि ऐसी कई रिपोर्ट्स मिली हैं, जिनमें कहा गया है कि ईरान की सरकार कमजोर हो रही है।

भारत और यूरोप के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से US को लगी मिर्ची

वाशिंगटन. ट्रंप प्रशासन के प्रमुख सहयोगी और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय संघ (EU) की भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर तीखी आलोचना की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए यूरोप की तुलना में कहीं अधिक बलिदान दिए हैं। बेसेंट ने दावा किया कि अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए, जबकि पिछले सप्ताह यूरोपीय देशों ने भारत के साथ बड़ा व्यापार समझौता कर लिया। उन्होंने इसे यूरोप की दोहरी नीति करार दिया और कहा कि US ने रूस से ऊर्जा अलगाव के लिए ज्यादा आर्थिक और रणनीतिक कीमत चुकाई है। ट्रंप के नेतृत्व में युद्ध समाप्त करने की दिशा में प्रयास जारी हैं, लेकिन यूरोप इस दिशा में कमजोर कदम उठा रहा है। स्कॉट बेसेंट ने भारत के रूसी तेल व्यापार पर आधारित अमेरिकी टैरिफ नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रूसी कच्चा तेल भारत में आता है, वहां रिफाइन होकर उत्पाद बनते हैं और यूरोपीय देश इन्हें खरीदते हैं। इससे यूरोप अनजाने में खुद के खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं, जिसमें रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंड शामिल है। बेसेंट ने इससे पहले कहा था कि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीद काफी कम कर दी है और टैरिफ हटाने का रास्ता हो सकता है, लेकिन अब वे टैरिफ को सफल बताते हुए इसका समर्थन कर रहे हैं। भारत और EU के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स' डोनाल्ड ट्रंप के करीबी ने यूरोप पर आरोप लगाया कि वे भारत के साथ व्यापार समझौता करने के लिए रूसी तेल पर टैरिफ नहीं लगाना चाहते थे। यह टिप्पणी भारत और EU के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहे जाने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के ठीक समय पर आई है। यह समझौता 2007 से चल रही बातचीत का नतीजा है और भारतीय निर्यात (जैसे टेक्सटाइल और ज्वेलरी) को ट्रंप के हाई टैरिफ से राहत दे सकता है। 16वीं भारत-EU शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसकी औपचारिक घोषणा की। बेसेंट की आलोचना से अमेरिका-EU के बीच व्यापार और रूस-यूक्रेन मुद्दे पर मतभेद उजागर हुए हैं, जबकि भारत अपनी ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर चला रहा है।

नए कानून को वापस लेने UGC मुख्यालय पर छात्रों का भारी प्रदर्शन

नई दिल्ली. दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) मुख्यालय के बाहर आज सुबह से ही प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा हो गई। हाथों में तख्तियां थामे और जोर-जोर से नारे लगाते युवा छात्रों ने UGC के नए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026' के खिलाफ अपना रोष जाहिर किया। यह नियम 15 जनवरी 2026 से लागू हुआ है, जिसे लेकर देशभर में विवाद गहरा गया है। क्या है विवाद का केंद्र? UGC ने इन नियमों को उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए लाया है। इसमें शिकायत निवारण तंत्र, असमानता के खिलाफ कार्रवाई और वंचित वर्गों को समर्थन के प्रावधान शामिल हैं। लेकिन विरोध करने वाले, खासकर सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि यह नियम 'उल्टा भेदभाव' पैदा कर सकता है। वे दावा करते हैं कि इसमें झूठी शिकायतों पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं है, जिससे निर्दोष छात्र या शिक्षक फंस सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दिया। सुबह 10 बजे के आसपास शुरू हुए इस प्रदर्शन में सैकड़ों छात्र शामिल हुए। वे 'सवर्ण विरोधी UGC', 'नियम वापस लो', 'उच्च शिक्षा में समानता नहीं, विभाजन' जैसे नारे लगा रहे थे। पुलिस ने भारी संख्या में जाब्ता तैनात किया हुआ है।

शंकराचार्य होने का सबूत मांगना गलत: उमा भारती

भोपाल. यूपी सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव और खींचतान को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में ही मतभेद के सुर उभरने लगे हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता उमा भारती ने 'शंकराचार्य' होने के सबूत मांगे जाने की आलोचना की है। प्रशासन के अधिकारों और मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए उमा भारती ने पोस्ट में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी टैग किया है। उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार के बीच सकारात्मक समाधान निकलने की उम्मीद जाहिर करते हुए प्रशासन की ओर से शंकराचार्य का सबूत मांगने को गलत बताया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार को एक्स पर लिखा, 'मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा, किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।' इस पोस्ट में उमा भारती ने बीजेपी एमपी, बीजेपी यूपी, यूपी सीएम ऑफिस और ज्योतिर्मठ को टैग किया है। माघ मेला प्रशासन ने भेजा था नोटिस मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में हुई घटनाओं को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अनशन शुरू किया था, जिसे लेकर श्रद्धालुओं और संत समाज के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय की नोटिस का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। शंकराचार्य ने क्या कहा था स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इसका जवाब देते हुए कि था कि शंकराचार्य वह है जिसे बाकी अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने दावा किया है कि बाकी दो पीठों द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हे शंकराचार्य कहते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि पिछले माघ मेले में उन्हे साथ लेकर दोनों शंकराचार्य स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि जब श्रृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य यह कह रहे हैं कि वह ही शंकराचार्य हैं, तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं।

दिल्ली भीगी, पहाड़ों पर भारी बर्फबारी

दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में आज (मंगलवार) मौसम ने करवट ली है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते दिल्ली-एनसीआर में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं और कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। वहीं, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी का दौर जारी है, जिससे मैदानी इलाकों में भी ठिठुरन बढ़ गई है। आइए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और निजी मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमानों के आधार इस सप्ताह की वेदर रिपोर्ट जानते हैं। दिल्ली-एनसीआर: बारिश और हवाओं का दौर आज, 27 जनवरी को दिल्ली और आसपास के इलाकों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। आज का मौसम: आसमान में बादल छाए रहेंगे। 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है। इससे प्रदूषण (AQI) में कुछ सुधार हो सकता है, जो पिछले कुछ दिनों से 'खराब' श्रेणी में बना हुआ था। तापमान: आज न्यूनतम तापमान 11°C और अधिकतम 20°C के आसपास रहने का अनुमान है। कल (26 जनवरी) दिल्ली में पिछले 5 सालों की सबसे सर्द गणतंत्र दिवस सुबह दर्ज की गई थी। पहाड़ी राज्य: भारी बर्फबारी का 'ऑरेंज अलर्ट' पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ का सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर: कुल्लू, चंबा और लाहौल-स्पीति जैसे जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। मनाली, शिमला और कश्मीर की घाटियों (जैसे गुलमर्ग) में ताजा बर्फबारी हुई है, जिससे पर्यटकों के चेहरे खिल गए हैं लेकिन कई रास्ते बंद होने की भी खबर है। उत्तराखंड: बद्रीनाथ, केदारनाथ, औली और मसूरी की ऊंची चोटियों पर साल की पहली अच्छी बर्फबारी दर्ज की गई है। देहरादून और निचले इलाकों में बारिश जारी है। मैदानी इलाके: पंजाब, हरियाणा और यूपी में बारिश पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी साफ है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान: इन राज्यों में आज गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। यहां 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में आज बारिश का जोर रहेगा, जबकि पूर्वी यूपी में 27 और 28 जनवरी को बारिश होने की संभावना है। उत्तर भारत में सक्रिय इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अब देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों की ओर भी बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में आज और कल गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई है, जिससे विदर्भ तक तापमान में गिरावट आ सकती है। जैसे-जैसे यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, 28 से 29 जनवरी के बीच बिहार, झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी बादल छाने और हल्की वर्षा होने के आसार हैं। वहीं, पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अलर्ट है, जबकि दक्षिण भारत के तमिलनाडु और केरल के कुछ तटीय इलाकों में हल्की बूंदाबांदी को छोड़कर शेष प्रायद्वीपीय भारत में मौसम मुख्यत: शुष्क रहेगा। पूरे हफ्ते का वेदर फोरकास्ट 27 जनवरी (मंगलवार): पश्चिमी विक्षोभ अपने चरम पर है। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी जारी रहेगी। 28 जनवरी (बुधवार): पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में बारिश जारी रह सकती है, लेकिन दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में मौसम धीरे-धीरे साफ़ होने लगेगा। हालांकि, बादल छाए रह सकते हैं। 29 – 30 जनवरी (गुरुवार-शुक्रवार): मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बारिश थमने के बाद हवा में नमी होने के कारण सुबह के समय घना कोहरा छाने की प्रबल संभावना है। तापमान में गिरावट आ सकती है और 'कोल्ड डे' जैसी स्थिति बन सकती है। 30 जनवरी की रात से: एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की तरफ बढ़ रहा है। 31 जनवरी – 2 फरवरी: नए विक्षोभ के प्रभाव से महीने के आखिरी दिनों और फरवरी की शुरुआत में एक बार फिर पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बूंदाबांदी का दौर देखने को मिल सकता है। पहाड़ों पर जाने वाले पर्यटक सड़कों की स्थिति जांच कर ही निकलें, क्योंकि बर्फबारी से कई रास्ते बंद हो सकते हैं। मैदानी इलाकों में बारिश के कारण सड़कों पर फिसलन हो सकती है। कुल मिलाकर जनवरी का अंत कड़ाके की ठंड और बारिश के साथ हो रहा है।

वास्तु के अनुसार पर्दों के ये रंग बदल देंगे किस्मत, पॉजिटिव एनर्जी से भर जाएगा घर

वास्तु शास्त्र में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना महत्व होता है। अक्सर हम घर की दीवारों के रंग और फर्नीचर पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन पर्दों को केवल सजावट की वस्तु समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु के अनुसार, पर्दे केवल धूप को नहीं रोकते, बल्कि वे घर में आने वाली ऊर्जा के प्रवाह को भी नियंत्रित करते हैं। सही दिशा में सही रंग के पर्दे लगाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार पर्दों के रंगों का चयन कैसे करें और उनके नियम क्या हैं। दिशा के अनुसार पर्दों के रंगों का चुनाव वास्तु शास्त्र पंचतत्वों पर आधारित है। हर दिशा का एक प्रतिनिधि तत्व और रंग होता है। पूर्व दिशा पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है, जो विकास और सामाजिक संबंधों का प्रतीक है। यहां हरे या हल्के नीले रंग के पर्दे लगाने चाहिए। हरा रंग ताजगी और विकास का प्रतीक है, जो परिवार के सदस्यों के बीच खुशहाली लाता है। पश्चिम दिशा यह दिशा लाभ और प्राप्ति की दिशा मानी जाती है। यहां सफेद, सुनहरा या पीले रंग के पर्दे सबसे अच्छे होते हैं। सफेद रंग शांति का प्रतीक है और यह दिशा में ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखता है। उत्तर दिशा उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है जो धन और करियर के अवसरों को दर्शाती है। यहां नीले या आसमानी रंग के पर्दे लगाने चाहिए। नीला रंग जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो धन के आगमन के नए मार्ग खोलता है। दक्षिण दिशा यह दिशा अग्नि तत्व और यश की दिशा है। यहां लाल, नारंगी या गुलाबी रंग के पर्दे लगाना उत्तम रहता है।  ये गहरे रंग आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और घर के मुखिया के मान-सम्मान में वृद्धि करते हैं। कमरों के अनुसार पर्दों का चयन ड्राइंग रूम यह वह स्थान है जहां मेहमान आते हैं और परिवार एक साथ समय बिताता है। यहां क्रीम, हल्का पीला या भूरा रंग इस्तेमाल किया जा सकता है। यह रंग स्थिरता और मेलजोल को बढ़ावा देते हैं। बेडरूम दांपत्य जीवन में मधुरता और अच्छी नींद के लिए बेडरूम में गुलाबी, हल्का बैंगनी या पीच रंग के पर्दे लगाने चाहिए। लाल रंग के पर्दों से यहां बचना चाहिए क्योंकि यह उग्रता बढ़ा सकते हैं। पूजा घर पूजा घर में पवित्रता का होना अनिवार्य है। यहां पीले या केसरिया रंग के पर्दे सबसे शुभ माने जाते हैं। पीला रंग ज्ञान और एकाग्रता का प्रतीक है।  

कवि कुमार विश्वास ने भी यूजीसी रूल्स पर जताया आक्रोश

नई दिल्ली. देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूजीसी रूल्स 2026 लागू किए गए हैं। इसका एक वर्ग विरोध कर रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रेंड हो रहा है और यूपी के बरेली शहर के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने तो इसके विरोध में पद से इस्तीफा देने का ही ऐलान कर दिया है। इस बीच कवि कुमार विश्वास ने भी इस मसले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने दिवंगत रमेश रंजन मिश्र की कविता शेयर करते हुए अपनी राय जाहिर की है। कवि कुमार विश्वास ने जो पंक्तियां शेयर की हैं, वह इस प्रकार हैं- ''चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।'' इन पंक्तियों के साथ ही कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack भी पोस्ट के साथ साझा किया है। इस तरह उन्होंने उन आवाजों के साथ स्वर मिलाया है, जो यूजीसी रूल्स को वापस लेने या फिर उनमें संशोधन की मांग कर रहे हैं। कुमार विश्वास की इस पोस्ट पर भी लोगों ने कई तरह के कॉमेंट्स किए हैं। कुछ लोगों ने कुमार विश्वास को लेकर कहा है कि आपके प्रति हमारा सम्मान और बढ़ गया है। वहीं कुछ लोगों ने उनके बयान पर सवाल भी उठाए हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि हमें उम्मीद थी कि आप जरूर इस मसले पर अपनी राय रखेंगे। यूपी में यह मसला और पकड़ रहा तूल, PCS अधिकारी का इस्तीफा बता दें कि यह मामला बीते कुछ दिनों से लगातार तूल पकड़ रहा है। खासतौर पर सत्ताधारी भाजपा के लिए इससे मुश्किल खड़ी हो रही है। एक तरफ सवर्णों में नाराजगी की बात कही जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ यदि इसमें कुछ बदलाव किया गया तो ओबीसी, एससी-एसटी वर्ग में भी गुस्सा भड़क सकता है। इस बीच यूपी में मामला और तूल पकड़ रहा है, जहां पीसीएस अधिकारी और फिलहाल सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहे अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है। सबसे ज्यादा विरोध इस बात को लेकर हो रहा है कि आखिर इन नियमों में यह प्रावधान क्यों नहीं जोड़ा गया है कि यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाएगी तो फिर उस पर क्या ऐक्शन होगा। इसे एक वर्ग सवर्णों के खिलाफ प्रतिशोध बता रहा है।