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योगी सरकार का शिक्षा वर्ग पर मेगा फैसला: इलाज कैशलेस, 30 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को बड़ी सौगात दी है। योगी कैबिनेट ने गुरुवार को शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक कैशलेस मेडिकल बीमा की मंजूरी दे दी है।पांच लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त हो सकेगा। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में करीब दो घंटे तक हुुई कैबिनेट की बैठक में 32 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 30 प्रस्तावों पर मुहर लगी है। विधानसभा का बजट सत्र बुलाने पर भी मुहर लगी है। नौ फरवरी से बजट सत्र बुलाया गया है। 11 को बजट पेश होगा।   योगी सरकार ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के साथ ही रसोइयों और कार्मिकों को भी कैशलेस मेडिकल बीमा की सुविधा दी है। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों और स्ववित्तपोषित स्कूलों के शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित स्कूलों के शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षा मित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी विद्यालय के स्टाफ और रसोइयों (PM पोषण योजना) को सपरिवार कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। सरकार के फैसले से बेसिक शिक्षा के कुल 11 लाख 95 हजार 391 शिक्षकों और कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी इसी तरह माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 2 लाख 97 हजार 589 को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिल सकेगा। सीएम फैलो को राज्य लोकसेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत होने वाली भर्तियों में आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट और अनुभव के आधार पर भारांक मिलेंगे। जिलों के लिए विशेष विकास कार्य बरेली और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को अपने-अपने जनपदों में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला बनाने के लिए कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। गोरखपुर में ₹721 करोड़ और वाराणसी के 18 वार्डों के लिए ₹266 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मंजूरी दी गई है। लखनऊ-हरदोई बॉर्डर पर बनने वाले टेक्सटाइल पार्क के लिए ₹458 करोड़ से अधिक की जलापूर्ति योजना को पास कर दिया गया है। मानवीय और अन्य निर्णय पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास के लिए भूमि और सुविधाओं की व्यवस्था को मंजूरी मिली है। उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा और सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) नियमावली में संशोधन के प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई है।  

UGC के विवादित नियम पर SC की रोक, जातिगत विवादों को रोकने की कोशिश

नई दिल्ली   सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा से जुड़े यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की. सीजेआई ने कहा कि रेगुलेशन में जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं उनसे यह लगता है कि इस रेगुलेशन का दुरुपयोग किया जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट जाति भेदभाव की परिभाषा से जुड़े यूजीसी के नियम पर रोक लगा दी. कोर्ट ने जाति भेदभाव की परिभाषा से जुड़े नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किया. इस दौरान कोर्ट ने कहा, हम एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन में फ्री, बराबर और सबको साथ लेकर चलने वाला माहौल चाहते हैं. साथ ही कहा कि हम सिर्फ संवैधानिकता और वैधता की सीमा पर इसकी जांच कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा, हम एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन में फ्री, बराबर और सबको साथ लेकर चलने वाला माहौल चाहते हैं. 2012 के नियम फिर से होंगे लागू चीफ जस्टिस ने आदेश देते हुए कहा कि 2012 के नियम फिर से लागू होंगे. शीर्ष अदालत ने कहा कि रेगुलेशन में जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं उनसे यह लगता है कि इस रेगुलेशन का दुरुपयोग किया जा सकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि हम समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब 3 E पहले से मौजूद है, तो 2C  कैसे प्रासंगिक हो जाता है? कोर्ट की तीखी टिप्पणी गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि वो हम UGC एक्ट की धारा 3( C) को चुनौती दे रहे हैं और ये असंवैधानिक है. सुनवाई के दौरान जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश जातियों के जंजाल से नहीं निकल पाया है तो वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने अमेरिका वाली स्थिति का जिक्र कर दिया. बागची ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि हम उस स्थिति तक नहीं पहुंचेंगे जहां अमेरिका की तरह अलग-अलग स्कूल हों जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ना पड़ता था. याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन  – हम UGC एक्ट की धारा 3( C) को चुनौती दे रहे हैं  – ⁠ये असंवैधानिक है  – ⁠ये सिर्फ धारणा पर आधारित है कि सामान्य श्रेणी के छात्र भेदभाव करते हैं CJI सूर्य कांत – हम केवल प्रावधानों की कानूनी वैधता और संवैधानिकता की ही जांच कर रहे हैं विष्णु: सुप्रीम कोर्ट ने पहले जो भी आदेश दिया है ये उस भावना के खिलाफ है. इससे समाज में वैमनस्य बढ़ेगा. ये संविधान में दिए गए समानता के सिद्धांत के खिलाफ है. CJI सूर्य कांत की बड़ी टिप्पणी   – आजादी के 75 साल बाद भी  हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं याचिकाकर्ता की बड़ी मांग  याचिकाकर्ता ने यूजीसी के रेगुलेशन को रद्द किए जाने की मांग की और इस पर तुरंत रोक लगाए जाने की मांग की. याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर हमें इजाजत मिले तो इससे बेहतर रेगुलेशन बनाकर दे सकते हैं. UGC पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां CJI सूर्य कांत ने कहा कि 75 साल बाद क्या हम एक वर्गहीन समाज बनने के लिए जो कुछ भी हासिल कर पाए हैं, क्या हम उससे पीछे जाते हुए प्रतिगामी समाज बनते जा रहे हैं? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने समाज में बढ़ती वर्गीय और पहचान आधारित विभाजन की प्रवृत्तियों पर गंभीर चिंता जताई .रैगिंग पर टिप्पणी करते हुए CJI ने कहा कि रैगिंग में सबसे बुरा यह हो रहा है कि दक्षिण भारत या पूर्वोत्तर से आने वाले बच्चे अपनी संस्कृति लेकर आते हैं और जो लोग उस संस्कृति से परिचित नहीं होते, वे उन पर टिप्पणियां करने लगते हैं. इसपर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्य कांत ने कहा कि  “भगवान के लिए! आज हमारे समाज में अंतर-जातीय शादियां भी हो रही हैं, हम खुद हॉस्टल में रहे हैं — जहां सभी लोग एक साथ रहते थे. चीफ जस्टिस ने कहा कि हम चाहते है कि कुछ कानूनविदों की कमेटी इसपर विचार करें.  UGC के नए नियम अस्पष्ट यूजीसी के नए नियम पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने चिंता जताते हुए कहा. इस तरह की स्थिति का शरारती तत्वों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने यूजीसी के नियमों का बचाव कर रहीं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह से  टिप्पणी की. हम पीछे नहीं जा सकते CJI बोले, एक कमेटी बनाने पर हो विचार CJI ने SG तुषार मेहता से कहा कुछ प्रतिष्ठित लोगों की एक कमेटी बनाने पर विचार हो, जो इस पूरे मुद्दे की समीक्षा करे ताकि समाज बिना किसी तरह के विभाजन के साथ आगे बढ़ सके और सभी मिलकर विकास कर सकें क्या है विवाद यूजीसी को लेकर नया नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही बनाए गए थे. भेदभाव की शिकायतों की जांच और समता को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समता समिति गठित करने को अनिवार्य करने वाले नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के तहत इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया था. इसमें सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व पर कुछ भी नहीं कहा गया था. याचिका में कहा गया कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव तक सीमित कर दिया गया है. इन नियमों के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जहां छात्र समूह और संगठन इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

मंदसौर में आज सीएम मोहन यादव का विशेष कार्यक्रम, श्री पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण

मंदसौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज मंदसौर में श्री पशुपनिनाथ लोक का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में दूसरी बार बदलाव किया गया है। इससे पहले 28 जनवरी को जारी हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मल्हारगढ़ के कार्यक्रम में ही शामिल होने वाले थे। बाद में कार्यक्रम में बदलाव हुआ। वे दोपहर 1:30 बजे मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में प्रदेश के 7 लाख किसानों के खाते में भावांतर राशि का सिंगल क्लिक से भुगतान करेंगे। साथ ही मल्हारगढ़ के बीच से निकल रहे महू-नीमच राजमार्ग पर फोरलेन फ्लाई ओवर का भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही पिपलियामंडी में अंडरपास, मल्हारगढ़ में रेलवे स्टेशन रोड पर पुलिया का भी भूमिपूजन करेंगे। उनके साथ उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी रहेंगे। दोपहर में मल्हारगढ़ पहुंचेंगे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में मल्हारगढ़ पहुंचेंगे। इसके बाद वह पहेड़ा रोड पर शासकीय महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां पर वह प्रदेश स्तरीय भावांतर भुगतान योजना के कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे जिले को करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री द्वारा मल्हारगढ़ से भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत प्रदेश के 7.10 लाख किसानों के खातों में कुल 1492 करोड़ रुपये उनके खातों में भेजेंगे। इसमें मंदसौर जिले के 27 हजार 500 किसान भी शामिल होंगे। इन किसानों ने कुल 47,283.03 टन सोयाबीन का विक्रय किया है इसके बदले में किसानों के खातों में 43 करोड़ रुपये भावांतर राशि भेजी जाएगी।

50,000 कारें बनीं Skoda Kylac की, जानें कब हुई थी इसकी शुरुआत

मुंबई   कार निर्माता कंपनी Skoda Auto India ने दिसंबर 2024 में अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी Skoda Kylaq का प्रोडक्शन शुरू किया था, जिसके एक साल से कुछ ज़्यादा समय बाद कंपनी ने अपने चाकन प्लांट से इस एसयूवी की 50,000वीं यूनिट रोल आउट की है. Skoda Kylaq भारत में चेक कार निर्माता के लिए बिक्री में एक अहम योगदान देने वाली कार रही है, जिसने CY2025 में कंपनी को 72,000 से ज़्यादा यूनिट्स की अब तक की सबसे अच्छी बिक्री हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है. Skoda Auto Volkswagen India के MD और CEO पीयूष अरोड़ा ने कहा कि, "Skoda Kylaq के लिए 50,000 यूनिट का माइलस्टोन हमारे ग्राहकों के इस प्रोडक्ट के प्रति गहरे भरोसे और प्यार को दिखाता है." उन्होंने आगे कहा कि, "हमारे भरोसेमंद MQB-A0-IN प्लेटफॉर्म पर बनी Skoda Kylaq की सफलता इस बात का पक्का सबूत है कि भारत में, भारत और दुनिया दोनों के लिए डिज़ाइन की गई गाड़ियां, देश और दुनिया भर में ग्राहकों से तारीफ और भरोसा हासिल कर रही हैं." Skoda ने दिसंबर 2025 की शुरुआत तक भारत में Skoda Kylaq की 40,000 से ज़्यादा यूनिट्स बेचने की रिपोर्ट दी है. साल 2025 की शुरुआत में भारत में लॉन्च हुई Skoda Kylaq, सबकॉम्पैक्ट SUV मार्केट में स्कोडा की पहली कार है और, एक दशक पहले Skoda Fabia के बंद होने के बाद यह कंपनी का पहला सबकॉम्पैक्ट मॉडल है. इंजन की बात करें तो इस कार में कंपनी का भरोसेमंद 1.0-लीटर, TSI टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जाता है, जिसके साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प दिया जाता है. अपने इस सेटअप के साथ Skoda Kylaq पहले साल में ही Skoda के लिए एक पॉपुलर मॉडल साबित हुई है. हाल ही में कंपनी ने इस SUV के दो नए वेरिएंट पेश किए हैं और मिड-स्पेक मॉडल के लिए फीचर्स को भी बेहतर बनाते हुए एक बड़ा अपडेट भी दिया है. खास बात यह है कि साल के आखिर में एक तीसरा Sportline वेरिएंट भी आने वाला है.

बॉर्डर 2 बॉक्स ऑफिस: सातवें दिन भी कमाई में टॉप, 1 बजे तक का आंकड़ा जारी

मुंबई  सनी देओल स्टारर फिल्म 'बॉर्डर 2' की गणतंत्र दिवस की छुट्टी के बाद बेशक कमाई घट गई है लेकिन ये अब भी इंडियन बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है, रिलीज के छठे दिन यानी मंगलवार को तो इसने एक और मील का पत्थर पार कर लिया और ये 200 करोड़ी बन गई. वहीं गुरुवार को इस फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज हुए एक हफ्ता पूरा हो जाएगा. इसी के साथ चलिए आपको बताते हैं कि गुरुवार को यानी सातवें दिन बॉर्डर 2  के कलेक्शन और ऑक्यूपेंसी के बारे में  'बॉर्डर 2' की 6 दिनों की कितनी रही कमाई?   'बॉर्डर 2' बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा रही है, इस फिल्म का कलेक्शन शानदार है इसने अपने रिलीज के 6 दिनों में धुरंधर के एक हफ्ते के 207 करोड़ के कलेक्शन को भी पीछे छोड़ दिया है. इसी के साथ  'बॉर्डर 2' की कमाई की बात करें तो      'बॉर्डर 2' ने 30 करोड़ से दमदार ओपनिंग की थी. फिर दूसरे दिन फिल्म ने 36.5 करोड़ जुटा लिए थे.     तीसरे दिन फिल्म की कमाई 54.5 करोड़ रुपये रही.     वहीं चौथे दिन इस फिल्म को गणतंत्र दिवस की छुट्टी का पूरा फायदा मिला और इसने 59 करोड़ कमाए, जो इसका अब तक का सबसे ज्यादा सिंगल डे कलेक्शन है.       पांचवें दिन फिल्म की कमाई में वर्किंग डेज होने के चलते मंदी देखी गई और इसने 20 करोड़ कमाए.     वहीं छठे दिन का कलेक्शन और घट गया और इसकी बुधवार की कमाई 13 करोड़ रुपये रही.    'बॉर्डर 2' के 7वें दिन की एडवांस बुकिंग, बॉक्स ऑफिस प्रीडिक्शन बॉर्डर 2 ने 7वें दिन इंडियन बॉक्स ऑफिस पर लगभग 3.95 करोड़ रुपये के ग्रॉस टिकट बेचे हैं. बता दें कि छठे दिन के 4.65 करोड़ रुपये के ग्रॉस कलेक्शन की मुकाबले इसके 7वें दिन की प्री-सेल्स में 15.05% की गिरावट आई है, जो कि नॉर्मल है. प्री-सेल्स और स्पॉट बुकिंग से दर्शकों की अच्छी भीड़ को देखते हुए, बॉर्डर 2 के 7वें दिन इंडियन बॉक्स ऑफिस पर करीब 13 करोड़ नेट कमाने की उम्मीद है. 'बॉर्डर 2' का 7वें दिन का कलेक्शन (Border 2 Box Office Day 7)  ट्रेड आंकड़ें देने वाली वेबसाइट सैकनिल्क (Sacnilk) के मुताबिक बुधवार को फिल्म की कमाई की रफ्तार धीमी दिख रही है. रात 10 बजे तक इस फिल्म ने 13.00 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया और इसी कमाई  के साथ 'बॉर्डर 2' का इंडिया नेट कलेक्शन 213.00 करोड़ हो चुका है. बॉर्डर 2     बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (छठा दिन) पहला दिन     30  करोड़ दूसरा दिन     36.5 करोड़ तीसरा दिन     54.5 करोड़ चौथा दिन     59 करोड़ पांचवा दिन     20 करोड़  छठा दिन     13.00 करोड़  सातवां दिन      1.25  करोड़ (दोपहर 1.30 बजे तक के आंकड़े)  टोटल कलेक्शन     214.25 करोड़ (फाइनल आंकड़े रात 10 बजे के बाद अपडेट)  'बॉर्डर 2' फिल्म की 7वें दिन की ऑक्यूपेंसी  गुरुवार, 29 जनवरी, 2026 को मॉर्निंग शोज में बॉर्डर 2 की  हिंदी ऑक्यूपेंसी  6.67% दर्ज की गई. मॉर्निंग शोज की ये ऑक्यूपेंसी 6 दिनों के मुकाबले अब तक की सबसे कम ऑक्यूपेंसी है.  'बॉर्डर 2' के दूसरे वीकेंड में अच्छी कमाई की उम्मीद तरन आदर्श ने एक्स पर लिखा है- बॉर्डर 2 की शानदार कमाई जारी है… यह फ़िल्म मास सर्किट और हार्टलैंड मार्केट में सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रही है, जो कुल बिज़नेस में बड़ा कॉन्ट्रिब्यूट कर रहे हैं. इस शुक्रवार को कई नई फ़िल्में रिलीज़ होने के बावजूद, अच्छी माउथ पब्लिसिटी की वजह से बॉर्डर 2 के वीकेंड पर अच्छी कमाई करने की उम्मीद है. 'बॉर्डर 2' स्टार कास्ट आपको बता दें कि इस बॉलीवुड एपिक एक्शन वॉर फिल्म में सनी देओल के अलावा वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह और सोनम बाजवा भी अहम किरदारों में हैं. इसे अनुराग सिंह ने डायरेक्ट किया है और भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जे. पी. दत्ता और निधि दत्ता ने टी-सीरीज़ फिल्म्स और जे. पी. फिल्म्स बैनर के तहत प्रोड्यूस किया गया है. यह फिल्म 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी.

शिक्षा में तकनीकी क्रांति: CM मोहन ने घोषणा की 200 नए सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत, AI-Coding पर फोकस

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युग बदले, सदियां बदलीं पर शिक्षकों का सम्मान कभी कम नहीं हुआ। शिक्षक उस दीपक के समान होते हैं, जो खुद जलकर दूसरों के जीवन को आलोकित करते हैं। शिक्षकगण सदैव सम्मानित थे, हैं और आगे भी रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि इनके सद्प्रयासों से ही प्रदेश के शासकीय स्कूलों का परीक्षा परिणाम ऐतिहासिक रूप से बेहतर से और बेहतर हुए हैं। बच्चों के प्रवेश, शाला नामांकन दर में भी रिकार्ड वृद्धि हुई है। साथ ही प्रदेश में बच्चों की ड्राप-आउट दर भी शून्य हो गई है। इसमें शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है, वंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के प्रांगण में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश स्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन में कहा कि हमारे सांदीपनि विद्यालय और पीएमश्री विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता के नए-नए मानक स्थापित कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों की सफलता से हम सब अभिभूत हैं। इसलिए प्रदेश में इसी सत्र से 200 नए सांदीपनि विद्यालय खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 को लागू करने में मध्यप्रदेश देश के पहले राज्यों में हैं। हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए ए.आई., कोडिंग और कौशल आधारित शिक्षा की दिशा में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इसमें शिक्षकों का बहुमूल्य योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के हित में सरकार ने कोई कमी नहीं रखी है। आगे भी जो कुछ हित लाभ बचा है, वह भी जल्द ही देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ एवं सरस्वती पूजन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय की छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में अनेक शिक्षक हितैषी निर्णयों के लिए संघ द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनंदन किया गया। सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान कर लिया आशीर्वाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवानिवृत्त व्याख्याता कोकिला सेन, बद्री प्रसाद तिवारी, बृजमोहन आचार्य, देवकृष्ण व्यास, किशनलाल नाकड़ा को सम्मानित किया। कोकिला सेन ने उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भौतिक शास्त्र की शिक्षा दी थी। मुख्यमंत्री ने अपनी गुरु का सम्मान कर उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसी तरह बद्री प्रसाद तिवारी ने नरसिंहपुर में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह को स्कूल में पढ़ाया था।  कैलेंडर, डायरी और पुस्तिका का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुभाष स्कूल में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ की विकास यात्रा पर केन्द्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के वार्षिक कैलेंडर, 'हमारा विद्यालय-हमारा तीर्थ' नामक पुस्तिका, टेबल कैलेंडर एवं डायरी का भी विमोचन किया।  हर काल में शिक्षकों के मार्गदर्शन में युवा बने महान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे मन के भावों से शिक्षा पद्धति और शिक्षकों से जुड़े हुए हैं। यह सम्मेलन भाव विभोर कर देने वाला है। एक शिक्षक हमारे अंदर विद्मान प्रतिभाओं को निखारने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व में अपनी एक नई पहचान बना रहा है। हर युग में गुरु और शिक्षकों ने अपने शिष्यों के माध्यम से ही समाज को उसके सभी प्रश्नों/समस्याओं के उत्तर दिलवाए हैं। उन्होंने कहा कि हर काल में मध्यप्रदेश की धरती सौभाग्यशाली रही है। हमारा संबंध भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण से भी जुड़ता है। झाबुआ से निकलकर एक बालक चंद्रशेखर आजाद बनता है। मध्यप्रदेश की धरती पर सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज ने शासन किया। हर काल में युवाओं ने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में बड़ी-बड़ी भूमिकाएं अदा की हैं।  विकसित भारत का लक्ष्य पाने में प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का एक अर्थ 'सहकार' भी होता है। यह परस्पर सामंजस्य से ही संभव है। सरकार के लक्ष्य उच्चतम होने चाहिए। उसके समाज के सभी प्रश्नों और समस्याओं के समाधान की मंशा और ऐसा सामर्थ्य भी होना चाहिए। चुनी हुई सरकार हर वर्ग के कल्याण का ध्यान रखती है। विकसित भारत का लक्ष्य पाने में मध्यप्रदेश अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश के प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री भी शासकीय विद्यालयों से ही पढ़कर यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के 22 हजार से अधिक शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण बड़ी सरलता से हुआ है।  कुलपति को कुलगुरू का दिया नाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू करने में मध्यप्रदेश देश के पांच राज्यों में से एक है। मध्यप्रदेश भारत के सबसे कम बेरोजगारी दर वाले तीन राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालय बन रहे हैं। हमारी सरकार ने शिक्षकों को महंगाई भत्ते का भी लाभ दिया है। करीब डेढ़ लाख शिक्षक इससे लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति को हमने कुलगुरु का नया नाम दिया है। हमारी सरकार गुरूजनों के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ रही। 

डांसिंग कॉप रंजीत सिंह को सजा, इंदौर पुलिस ने किया डिमोशन, विवादित चैट मामले में कार्रवाई

इंदौर  डांसिंग कॉप के नाम से प्रसिद्ध ट्रैफिक पुलिस आरक्षक रंजीत सिंह को वापस से आरक्षक बना दिया गया है. पिछले दिनों उनके काम को देखते हुए उन्हें कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद पर पुलिस के ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पदस्थ किया गया था, लेकिन लखनऊ की एक महिला द्वारा जिस तरह से उन पर गंभीर आरोप लगाए गए, उसको देखते हुए उनको वापस से आरक्षक के पद पर पुलिस के ही वरिष्ठ अधिकारियों ने पदस्थ कर दिया है. जो की एक बड़ी सजा मानी जा रही है. डांसिंग कॉप पर महिला ने लगाए आरोप इंदौर के हाईकोर्ट चौराहे पर अपने अनोखे डांस स्टेप के जरिए ट्रैफिक को कंट्रोल करने को लेकर सुर्खियों में आए थे. उनका ट्रैफिक को कंट्रोल करने और नियमों का पालन करने का तरीका सभी को पसंद आया था. इसे देखते हुए इंदौर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ किया था, लेकिन इसी बीच डांसिंग कॉप रंजीत को लेकर लखनऊ की एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए. इंदौर पुलिस लाइन में थे पदस्थ कार्यवाहक प्रधान आरक्षक क्रमांक 146 रंजीत सिंह वर्तमान में रक्षित केंद्र इंदौर में पदस्थ थे। विभागीय अनुशासनात्मक प्रक्रिया के आधार पर उनका प्रधान आरक्षक का कार्यवाहक प्रभार वापस लेते हुए उन्हें मूल पद पर भेज दिया गया है। इस संबंध में एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के कार्यालय से मीडिया को जानकारी उपलब्ध कराई गई है। मुंबई की युवती ने लगाए थे आरोप गौरतलब है कि कुछ दिन पहले राधिका सिंह नाम की एक युवती ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर रंजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। युवती का कहना था कि रंजीत ने उसे दोस्ती का ऑफर दिया इंदौर बुलाने की बात कही और फ्लाइट टिकट व होटल बुक कराने की बात कही थी । राधिका ने वीडियो में कहा कि इस तरह का व्यवहार उसे पसंद नहीं आया इसलिए उसने सोशल मीडिया पर वीडिया डालकर आपत्ति जताई थी। मिलने के लिए बुलाया था इंदौर वीडियो सामने आने के बाद ट्रैफिक हवलदार रंजीत सिंह ने अपनी सफाई में कहा था कि लगभग डेढ़ साल पहले एक युवती ने खुद को उनका फैन बताते हुए उनसे लाइव ड्यूटी देखने की इच्छा जताई थी। उस दौरान उन्होंने मजाक में कहा था कि अगर वह इंदौर आती हैं तो वे फ्लाइट और होटल की व्यवस्था कर देंगे ताकि वह उन्हें लाइव ड्यूटी करते देख सकें। महिला ने लगाए थे कई आरोप रंजीत सिंह की सफाई के बाद राधिका सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक अन्य वीडियो शेयर की। इसमें रंजीत सिंह के बारे में उल्टी सीधी बातें की थी। महिला डांसिंग कॉप के बारे में कहती है कि भाई तू कॉन्स्टेबल है, तेरे को कौन देखना चाहेगा, शक्ल देखी है अपनी…तुमसे एक बात समझ में आ गई है कि मर्द समाज में डर का माहौल है। लोगों को बुरा लग रहा है। वही लोग तुम्हें डिफेंड कर रहे हैं। राधिका सिंह ने कहा कि कुछ लोगों को मेरे सिगरेट पीने और मेरे छोटे कपड़े पर सवाल उठा रहे हैं। क्या सिगरेट पीने से मेरा चरित्र खराब हो जाएगा। कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद से हटे डांसिंग कॉप मामला बढ़ता देख रंजीत सिंह के खिलाफ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एक विभागीय जांच बैठाई. जहां विभागीय जांच में कई तरह की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची. इन सब चीजों को देखते हुए वापस से रंजीत सिंह को आरक्षक के पद पर पदस्थ किया गया. जिसे एक तरह से अधिकारियों द्वारा दी उन्हें सजा माना जा रहा है. मामले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर आरके सिंह का कहना है कि "पिछले कुछ दिनों से लगातार उनके काम की मॉनिटरिंग की जा रही थी. जिस तरह से उनके काम को देखते हुए कार्यवाहक प्रधान आरक्षक बनाया गया था, लेकिन कार्यवाहक प्रधान आरक्षक बनने के बाद वह उस स्तर पर पुलिस का काम नहीं कर रहे थे. जिसके चलते उन्हें वापस से आरक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है." बताया जा रहा है कि इंदौर पुलिस द्वारा लगातार ऐसे पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया जा रहा है, जो अपने काम में लापरवाही बरत रहे हैं. पूर्व में भी ऐसी कई सजा अन्य पुलिसकर्मियों को भी मिल चुकी है.

‘मेरे चाचू की शादी में शराब पीकर आए तो नो एंट्री’ वाला कार्ड हुआ वायरल

झज्जर. शादी का यह कार्ड जिन भी लोगों को मिला, उसे पढ़कर वो मुस्कुरा भी रहे हैं और ठिठक भी। वजह है कार्ड में आमंत्रण के साथ एक शर्त। आमतौर पर जिन कार्डों में ‘डिनर के बाद’ का संकेत ढूंढा जाता है, वहां लाइन छपी है-शराब पीकर शुभ विवाह को खराब करने वाले शादी में न आएं। यह कार्ड गांव रेढूवास निवासी और झज्जर के प्रतिष्ठित कारोबारी पंडित ओम प्रकाश वशिष्ठ के पौत्र अनिल के विवाह का है। परिवार ने तय किया कि शादी खुशी का उत्सव होगी, बोतलों का नहीं। ये कार्ड इंटरनेट मीडिया पर बहु प्रसारित हो रहा है। लोग कर रहे इस संदेश-प्रयास की खूब सराहना समाज के बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा इस कदम को ‘साहसिक’ बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि हर परिवार इसी तरह नशे के प्रति सख्ती दिखाए, तो शादियों में होने वाले विवादों और सड़क दुर्घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। हमारी आने वाली नस्ल नशे से बची भी रह सकती है। सनातन और शिक्षा का अद्भुत समन्वय है वशिष्ठ परिवार पं. ओम प्रकाश वशिष्ठ, जो इलाके में अपनी विशिष्ट पहचान ‘चोटी वाले’ के रूप में रखते हैं, ने पौत्र की शादी के निमंत्रण पत्र पर यह साहसी संदेश छपवाया है। कार्ड के मुख्य पृष्ठ पर मोटे अक्षरों में लिखा है ‘शराब पीकर शुभ विवाह को खराब करने वाले शादी में न आएं।’ परिवार का कहना है कि शराब पीकर अक्सर लोग गरिमा खो देते हैं, जिससे मंगल उत्सव का आनंद फीका पड़ जाता है। ऐसे में वो बारात का माहौल या परिवार की प्रतिष्ठा धूमिल नहीं होने देंगे। परिवार का हर पुरुष सदस्य रखता है शिखा वशिष्ठ परिवार की खास बात यह है कि परिवार के सभी बच्चे ‘शिखा’ (चोटी) रखते हैं। परिवार के जो बच्चे चंडीगढ़ जैसे शहरों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वे भी गर्व से अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति से जुड़े हुए हैं।

जज पद पर प्रमोशन के लिए 7 साल का अनुभव जरूरी

बिलासपुर. विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स में बड़ा बदलाव करते हुए न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति और आरक्षण व्यवस्था में जरूरी संशोधन किए हैं। इस संबंध में हायर ज्यूडिशियल सर्विस (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 2006 में बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। विधि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू की गई है। नए नियमों के तहत ज्यूडिशियल सर्विस में पदोन्नति के मानदंडों को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है। संशोधित नियमों के अनुसार अब सिविल जज (जूनियर और सीनियर कैटेगरी) को पदोन्नति के लिए कम से कम सात वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं, पद पर बने रहने की न्यूनतम समय-सीमा को पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। हायर ज्यूडिशियल सर्विस में भर्ती कोटा के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां 65 प्रतिशत और 10 प्रतिशत का प्रावधान था, उसे संशोधित कर क्रमशः 50 प्रतिशत और 25 प्रतिशत कर दिया गया है। नए नियमों के तहत दिव्यांगों के लिए चार प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। इसमें दृष्टिबाधित और अल्प दृष्टि के लिए एक प्रतिशत, श्रवण बाधित (बधिर को छोड़कर) के लिए एक प्रतिशत तथा चलने में निशक्तता, कुष्ठ रोग मुक्त, बौनापन, तेजाब हमला पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए एक प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है।

बच्चों की समस्याओं का हल करने वाला छात्र, CM ने साझा किए यादगार किस्से, स्कूल में पसंद थी बायोलॉजी

भोपाल  हमेशा अनुशासन में रहने वाला कक्षा 9 का छात्र हमारे पास अक्सर अन्य बच्चों की समस्याएं लेकर आता था। उसके दोस्तों को भी यदि शिक्षकों तक कोई बात पहुंचानी होती थी, तो वे उसी को आगे करते थे। आज वही छात्र मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री है। उन्होंने कहा कि ‘मैंने स्कूल के दिनों से ही डॉ. मोहन यादव में नेतृत्व क्षमता देखी थी। न तो वे बदमाशी करते थे और न ही शिक्षकों से बचते थे। पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रिय रहते थे और शिक्षकों के प्रति सम्मान का भाव रखते थे। इन्हीं गुणों ने उन्हें आगे चलकर राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंचाया।’ बुधवार को राजधानी भोपाल में प्रदेश स्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी शिक्षिका कोकिला सेन का सम्मान किया। सम्मान समारोह के बाद उनकी शिक्षिका कोकिला सेन ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। स्कूल में ही दिखने लगी थी नेतृत्व क्षमता उज्जैन की शासकीय जीवाजीगंज स्कूल में 1979 से 1981 तक शिक्षिका कोकिला सेन ने फिजिक्स पढ़ाया। वह बताती हैं कि कक्षा 9 से 12 तक मोहन यादव पढ़ाई में गंभीर और व्यवहार में जिम्मेदार छात्र रहे। यदि किसी दोस्त को टीचर तक कोई बात पहुंचानी होती, तो बाकी बच्चे उसी को आगे करते थे। शांत, विनम्र और अनुशासित बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ी कोकिला सेन बताती हैं कि मोहन यादव कभी शोरगुल या शरारत नहीं करते थे। क्लास में समय पर बैठना, ध्यानपूर्वक सुनना और टीचर्स का सम्मान करना उनकी आदतों में शामिल था। वे हंसते हुए कहती हैं कि ऐसे बच्चों को शिक्षक बदलते नहीं, बल्कि प्रोत्साहित करते हैं। स्पोर्ट्स और अन्य गतिविधियों में भी आगे शिक्षिका के अनुसार, डॉ. मोहन यादव केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि खेल और अन्य गतिविधियों में भी हिस्सेदारी करते थे। वे मैदान में भी सक्रिय थे और लैब में भी। यह संतुलन बहुत कम बच्चों में देखने मिलता है। बायोलॉजी थी पसंदीदा विषय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फिजिक्स से ज्यादा रुचि बायोलॉजी में दिखाई। कोकिला सेन बताती हैं कि बायोलॉजी लैब फिजिक्स लैब के बगल में थी, जहां वे अक्सर जाकर मॉडल और प्रैक्टिकल देखते। “फिजिक्स और मैथ्स को बच्चे अकसर ‘डरावना’ विषय मानते हैं, लेकिन मोहन हर विषय को सीखने का प्रयास करते थे।” शिक्षिका ने कहा था- बहुत कुर्सियां इंतजार कर रही हैं कोकिला सेन ने एक रोचक किस्सा बताते हुए कहा कि जब वे शिक्षा मंत्री बने थे, एक कार्यक्रम में मेरी उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने कहा मैं शिक्षा मंत्री हूंं। मैंने जवाब दिया कि अभी तो यह शुरुआत है, आगे बहुत कुर्सियां बेटा आपका इंतजार कर रही हैं। आज वह बात सच हो चुकी है। हम लोग बच्चों में जो गुण देखते हैं, वह जीवन भर उनके साथ रहता है। स्कूल के दिनों से लेकर आज तक, शिक्षकों के प्रति सम्मान उनकी आदत का हिस्सा रहा है। कोकिला सेन कहती हैं कि जब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी मुझसे मुलाकात हुई, तो उनका व्यवहार वही था जो स्कूल में था।