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छात्रों को राहत: स्कूल स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप बढ़ी, अब दोगुना लाभ मिलेगा

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई  कैबिनेट की अहम बैठक हुई। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों से जुड़ा रहा। राज्य सरकार ने SC-ST प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना की राशि दोगुनी करने का फैसला लिया है। कक्षा 1 से 10 तक की छात्रवृत्ति में बड़ी बढ़ोतरी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा किए गए संशोधन के तहत कक्षा 1 से 10 तक पढ़ने वाले SC-ST विद्यार्थियों को मिलने वाली वार्षिक छात्रवृत्ति में उल्लेखनीय इजाफा किया गया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार: कक्षा 1 से 4 तक: ₹1200 वार्षिक कक्षा 5 से 6 तक: ₹2400 वार्षिक कक्षा 7 से 10 तक: ₹3600 वार्षिक कक्षा 1 से 10 तक के छात्रावासी विद्यार्थी: ₹6000 वार्षिक सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2011 से लागू छात्रवृत्ति दरें वर्तमान समय की महंगाई और शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई थीं, इसी को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया गया है। ₹519.64 करोड़ सालाना खर्च, 27 लाख छात्रों को सीधा फायदा इस संशोधित योजना पर राज्य सरकार हर वर्ष ₹519.64 करोड़ खर्च करेगी। इससे बिहार के करीब 27 लाख SC-ST छात्र-छात्राओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। छात्रवृत्ति का लाभ सरकारी, स्थायी मान्यता प्राप्त और स्थापना स्वीकृत विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से वंचित वर्गों के छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखने और ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। पिछड़ा-अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान भी हुआ दोगुना कैबिनेट बैठक में पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को भी बड़ी राहत दी गई। “मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान योजना” के तहत मिलने वाली राशि को ₹1000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹2000 प्रति माह प्रति छात्र कर दिया गया है। 8150 छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ इस फैसले से विभाग के अधीन संचालित छात्रावासों में रहने वाले लगभग 8150 छात्र-छात्राएं लाभान्वित होंगे। अनुदान राशि में वृद्धि के कारण इस योजना पर अनुमानित वार्षिक व्यय ₹19.56 करोड़ होगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई अनुदान राशि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।  

युद्ध की चेतावनी: ट्रंप के सैन्य कदम पर ईरान ने कहा—पूरी ताकत से जवाब देंगे

नई दिल्ली मिडल ईस्ट इस समय युद्ध की कगार पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खुली सैन्य टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और देश के भीतर जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर दबाव बढ़ाते हुए युद्धपोतों को ईरान के नजदीक भेजने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने और तेहरान पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए उठाया गया है। लेकिन ईरान ने इस तैनाती को सीधे युद्ध की धमकी करार देते हुए स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह “पूरी ताकत से” जवाब देगा। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी हमले से केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में झुलस सकता है। तेहरान का कहना है कि वह आत्मरक्षा में न केवल जवाबी कार्रवाई करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया होगी, जिससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो सकता है। इस संकट के बीच तुर्किये मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इज़राइल और सऊदी अरब वॉशिंगटन पर दबाव बना रहे हैं कि ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इज़राइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता रहा है, वहीं सऊदी अरब भी क्षेत्र में ईरानी प्रभाव को सीमित करना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में एक भी गलत फैसला या सैन्य चूक पूरे क्षेत्र को पूर्ण पैमाने के युद्ध में धकेल सकती है। पहले से ही गाजा युद्ध, यमन संकट और लेबनान-इज़राइल तनाव से जूझ रहा मध्य पूर्व अब एक और बड़े टकराव की दहलीज पर खड़ा है। ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका की सैन्य धमकियों का उद्देश्य केवल परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान के भीतर जारी सरकार-विरोधी आंदोलनों को कमजोर करना भी है। हालांकि, तेहरान का दावा है कि वह आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर दबाव झेलने के लिए तैयार है।  

लाल आतंक से रूके विकास को अब मिल रही है गति

रायपुर. नारायणपुर जिले को मिली 351 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर के नारायणपुर जिले के दो दिवसीय प्रवास पर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां पर उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर जिलावासियों को अनेक सौगातें दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हाई स्कूल मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में 351 करोड़ 49 लाख 45 हजार रूपए के 357 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री   साय ने इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लाल आतंक समाप्ति की ओर है, जिससे विकास को गति मिल रही है। माओवाद के कारण यह क्षेत्र लम्बे समय से विकास से अछूता रहा, अब यहां नवाचार हो रहे है।     नारायणपुर के हाई स्कूल मैदान में आयोजित आज अपराह्न में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री   साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री   अमित शाह के दृढ़ संकल्प से प्रदेश सरकार ने माओवाद मुक्त करने के लगातार प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से चलते बस्तर के 400 से अधिक गांवों में विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों के विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में उन्हें कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आजीविका प्राप्त करते हुए आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही बस्तर को विकास के सभी आयामों से जोड़ने यहां पर्यटन विकास, खेती-बाड़ी, पशुपालन जैसे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया।   साय ने यह भी कहा कि आदिवासी संस्कृति और पारम्परिक विरासतों को सहेजने व संजोकर रखने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार बस्तर पण्डुम का आयोजन कर रही है। उन्होंने उपस्थित जनों से जनजातीय सभ्यता और धरोहरों की जड़ों से जुड़कर रहने का आह्वान किया।  मुख्यमंत्री ने की 332 करोड़ के छह निर्माण कार्यों की घोषणा इस दौरान मुख्यमंत्री ने 06 निर्माण कार्यों की घोषणा की, जिनकी अनुमानित लागत 332 करोड़ रूपए है। इसमें 125 किलोमीटर लम्बे मार्ग नारायणपुर के ओरछा-आदेर-लंका-बेदरे -कुटरूमैमेड जिसकी लागत राशि-250 करोड़ रूपए है। यह नारायणपुर जिले को बीजापुर जिले से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के अंदरूनी क्षेत्र के ईदवाया, एडजुम, आदेर, कुड़मेल, ढोढरीबेड़ा, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका जैसे ग्राम जुड़ते हैं। इसी तरह राजनांदगांव-बैलाडिला मार्ग में सतह मजबूतीकरण कार्य की घोषणा की, इसकी लंबाई 28 कि.मी जो लगभग 34 करोड़ से तैयार होगी। यह नारायणपुर जिले को दंतेवाड़ा जिले में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसी तरह नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर 28 किमी के सतह मजबूतीकरण कार्य, लंबाई 28 कि.मी. की घोषणा (राशि-34 करोड़ 12 लाख) – यह मार्ग जिले को महाराष्ट्र बार्डर तक जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के ब्रेहबेड़ा, कुरूषनार, बासिंग, सोनपुर ग्राम जुड़ते हैं। इसके अलावा ब्रेहबेड़ा (नारायणपुर)-कंदाड़ी-कीहीकाड़-मुरनार-बेचा मार्ग पर घुड़साल नाला पर उच्चस्तरीय सेतुमय पहुंच मार्ग निर्माण कार्य, जिसकी लंबाई 80 मीटर तथा लागत राशि-12 करोड ़ 42 लाख है। साथ ही नारायणपुर जिला अंतर्गत अबुझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों में प्रारंभ किये गए 10 वैकल्पिक प्राथमिक शाला ‘घमण्डी, वाला, जटवर, नेलनार, रोहताड़, हितावाड़ा, मोडनार, तोके, कोडटामरका एवं कोडोली‘ के स्कूल सेटअप एवं भवन, तथा तोके में आश्रम शाला भवन की स्वीकृति की घोषणा की, जो 01 करोड़ 06 लाख रूपए से तैयार होगा। इसी तरह जिले के एज्युकेशन हब, गरांजी मे खेल मैदान की घोषणा की घोषणा की जिसका निर्माण 50 लाख रूपए की लागत से होगा।      कार्यक्रम में वन मंत्री  केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री   अमित शाह जी के सशक्त और निर्णायक नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश से सशस्त्र माओवाद के आतंक का पूर्णतः अंत हो जाएगा। नारायणपुर जिला भी शीघ्र ही नक्सल मुक्त होकर शांति, विकास और समृद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री   साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से हर गांव, हर टोले को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राजस्व मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री   टंकराम वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री   साय ने जिले को 351 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी है। उनके नेतृत्व में राज्य सफलता की नित नई उंचाइयों को छू रहा है और हर क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। इसके पहले, बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बस्तर की संस्कृति और विरासत की पूरे विश्व में अलग पहचान है। आज की नई पीढ़ी हमारी सस्कृति और परंपरा को सहेजकर रखने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री   साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के 12 विधाओं में जनजातीय संस्कृति के प्रदर्शन के माध्यम से सरकार द्वारा इन परंपराओं को सहेजने और संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक के माध्यम से युवाओं को प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से आदिवासी संस्कृति व परंपरा आगे बढ़ेगी और बस्तर विकास और शांति के पथ पर सतत् आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित माओवादी नव दम्पति को दिया आशीर्वाद मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आदिवासी व्यंजन, वेशभूषा, आभूषण तथा प्राचीन धरोहरों का अवलोकन कर संरक्षित करने की बात कही। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत माओवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटे 04 जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से आशीर्वाद प्राप्त करने वाले जोड़ों में ग्राम पोदावाड़ा की कमला गोटा तथा ग्राम ऐनमेटा के सुकलाल जुर्री, ग्राम कुर्सींग की सुशीला कोवाची और ग्राम तुषवाल के सन्नी सलाम, ग्राम पूसालामा की रीता कोवाची और इसी ग्राम के मासो मण्डावी तथा ग्राम डूंगा की कोसी मण्डावी एवं इसी ग्राम के अर्जुन सिंह शामिल थे। मुख्यमंत्री ने सभी विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने की बधाई दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज और नगरीय संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।

नाबालिग एक्ट्रेस से आपत्तिजनक सीन शूट? शो के मेकर्स पर भड़का जनआक्रोश

मुंबई टीवी की दुनिया में इन दिनों एक नया विवाद छाया हुआ है। दंगल टीवी पर हाल ही में प्रीमियर हुए शो 'रिमझिम: छोटी उम्र बड़ा सफर' का एक सीन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस सीन को देखने के बाद कई दर्शकों ने शो को ऑफ एयर करने की मांग की है। शो में हिमांशु अवस्थी और याशिका शर्मा मुख्य भूमिकाओं में हैं। वायरल सीन में समीर (हिमांशु अवस्थी) अपनी शेरवानी उतारकर रिमझिम (याशिका शर्मा) को अपनी तरफ खींचते हैं और उसके ब्लाउज खुला होने पर उसे शेरवानी पहनाते हैं। इस सीन को देखकर दर्शक नाराज हैं और इसे नैतिकता के खिलाफ बता रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे रेडिट और एक्स पर यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। लोगों का कहना है कि 15 साल की याशिका शर्मा और 24 साल के हिमांशु अवस्थी के बीच इस तरह का रोमांटिक और इंटीमेट एंगल गलत संदेश देता है। दर्शकों ने इसे बच्चों और किशोरों के लिए हानिकारक बताया है और इंडस्ट्री में नैतिकता के सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि टीवी और फिल्म इंडस्ट्री को नाबालिग कलाकारों की सुरक्षा और मर्यादा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। बच्चों के साथ ऐसे सीन समाज और दर्शकों के लिए गलत संदेश फैलाते हैं। कई लोगों का मानना है कि TRP की दौड़ में शो मेकर्स ने नैतिकता को दरकिनार कर दिया है। इस विवाद के बाद दर्शक अब टीवी चैनल और शो मेकर्स से इस तरह के सीन को रोकने की मांग कर रहे हैं।

भारत को झटका! किर्गिस्तान ने रोका एनिमल प्रोडक्ट आयात, कहा– जोखिम बेहद गंभीर

किर्गिस्तान किर्गिस्तान ने निपाह वायरस के खतरे के मद्देनजर भारत से जानवरों और पशु उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक और दूसरे सबसे बड़े शहर ओश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर आने वाले यात्रियों की जांच भी कड़ी कर दी गई है। रूस की समाचार एजेंसी तास के अनुसार, "भारत में फैल रहे निपाह वायरस को देखते हुए बिश्केक और ओश आने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों के लिए सख्त संक्रमण नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं।"   किर्गिस्तान के जल संसाधन, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रेस सेवा ने कहा कि ये कदम भारत में निपाह वायरस के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं। बिश्केक के मानस हवाई अड्डे पर आने वाले सभी यात्रियों की विशेष कंप्यूटरों के जरिए तापमान जांच की जा रही है। बुधवार को किर्गिस्तान के अधिकारियों ने भारत से जानवरों और पशु उत्पादों के आयात पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी। किर्गिस्तान के मंत्रालय ने यह भी कहा कि निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। 

चेसबोर्ड पर देसी टक्कर! टाटा स्टील मास्टर्स में गुकेश बनाम अरविंद चिदंबरम

विज्क आन जी (नीदरलैंड) विश्व चैंपियन डी गुकेश तुर्की के यागिज कान एर्दोगमस पर जीत के बाद टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट के 11वें दौर में हमवतन अरविंद चिदंबरम का सामना करेंगे। साल के पहले सुपर टूर्नामेंट में अब केवल तीन दौर का खेल बाकी हैं। दस दौर का खेल होने के बाद उज्बेकिस्तान के नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव 6.5 अंकों के साथ आगे चल रहे हैं। उनके साथी खिलाड़ी जावोखिर सिंदारोव, जर्मनी के मैथियास ब्लूबाउम और स्थानीय स्टार जॉर्डन वैन फोरस्ट उनसे आधे अंक पीछे हैं। अमेरिका के हंस मोके नीमन और एर्दोगमस 5.5 अंकों के साथ संयुक्त पांचवें स्थान पर हैं। गुकेश, जर्मनी के विंसेंट कीमर और स्लोवेनिया के व्लादिमीर फेडोसेव के पांच-पांच अंक हैं। भारत के आर प्रज्ञाननंदा और अनीश गिरी 4.5 अंकों के साथ अर्जुन एरिगैसी से आधे अंक आगे हैं। अरविंद 3.5 अंकों के साथ चेक ग्रैंडमास्टर थाई दाई वान गुयेन से आधे अंक आगे हैं। विश्व चैंपियन बनने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी गुकेश 12वें दौर में नीमन और अंतिम दौर में कीमर से भिड़ेंगे। इस साल के अंत में होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी प्रज्ञाननंदा ने शुरुआती दो मैचों में हार के बाद अभी तक अपनी लय हासिल नहीं की है। उनका अगला मुकाबला कीमर से होगा। एरिगैसी और चिदंबरम का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में निराशाजनक रहा है और उन्हें सम्मानजनक स्थिति में पहुंचने के लिए बाकी बचे तीनों मुकाबले जीतने होंगे।  

स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार प्रदान कर रही है, बल्कि दशकों से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। ग्रामीण स्वामित्व को मिली कानूनी मजबूती स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिक प्रमाण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अब तक 72,961 ग्रामों में प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा चुके हैं, जो सर्वे योग्य ग्रामों का लगभग 80.59 प्रतिशत है। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने मकान और भूमि पर स्पष्ट कानूनी स्वामित्व प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय सुविधाओं के लिए भी मान्य आधार बन गया है। घरौनी बनी आर्थिक सुरक्षा की कुंजी राजस्व विभाग द्वारा सहमति के आधार पर अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण ग्रामीण परिवारों को किया जा चुका है। घरौनी केवल स्वामित्व का प्रमाण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसके जरिए ग्रामीण परिवार अब औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण ले पा रहे हैं तथा सामाजिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ स्वामित्व योजना के प्रभाव से गांवों में भूमि और मकान से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। स्पष्ट रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों के कारण फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगी है। इससे न केवल ग्रामीण स्तर पर शांति और विश्वास बढ़ा है, बल्कि न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है। योगी सरकार की यह पहल सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। निरंतर जारी है वितरण प्रक्रिया सरकार द्वारा घरौनियों के वितरण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। 18 जनवरी 2025 के बाद 13,12,456 नई घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनका वितरण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। आने वाले समय में लाखों और ग्रामीण परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस योजना से वंचित न रहे। ड्रोन तकनीक से सर्वे की संभावनाएं स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,10,344 अधिसूचित ग्रामों में से 90,530 ग्राम ऐसे हैं, जहां ड्रोन सर्वे कराया जाना तकनीकी रूप से संभव है। इन ग्रामों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से सर्वे कर सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति के अनुरूप यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी। कुल मिलाकर, स्वामित्व योजना के माध्यम से योगी सरकार ने ग्रामीण समाज को संपत्ति अधिकार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का मजबूत आधार प्रदान किया है, जो उत्तर प्रदेश को देश में भूमि सुधार और ग्रामीण सशक्तिकरण का अग्रणी राज्य बना रहा है।

अल्कोहल के साथ ये चीजें खाना है खतरे की घंटी, जानिए कौन-से फूड्स हैं सबसे खतरनाक

जाम का आनंद लेने वाले अक्सर इस बात पर तो ध्यान देते हैं कि वे क्या पी रहे हैं, लेकिन बोतल के साथ रखी प्लेट में क्या है, इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जिसे हम बड़े चाव से 'चखना' कहते हैं, वही कभी-कभी हमारे शरीर के लिए एक 'साइलेंट किलर' बन सकता है। शराब खुद शरीर के लिए एक चुनौती है, और गलत भोजन के साथ इसका मेल सेहत के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है। अक्सर पार्टियों में हम बेधड़क होकर कुछ भी खाने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गलत फूड पेयरिंग लिवर और पाचन तंत्र पर बुरा असर डालती है। आयरन से भरपूर चीजें (दाल, बीन्स और मूंगफली) सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सेहतमंद मानी जाने वाली दालें और बीन्स भी शराब के साथ घातक हो सकती हैं। खासकर रेड वाइन के साथ आयरन वाली चीजें खाने से बचना चाहिए। वाइन में मौजूद 'टेनिन' शरीर को आयरन सोखने से रोकता है, जिससे पेट में ऐंठन और पोषण की कमी हो सकती है। मीठा और चॉकलेट मिठाई या चॉकलेट के शौकीनों के लिए यह बुरी खबर है। चॉकलेट में पाया जाने वाला कैफीन और अधिक चीनी, शराब के साथ मिलकर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को जन्म देती है। यह न केवल आपके नशे को अनियंत्रित तरीके से बढ़ा सकती है, बल्कि अगले दिन गंभीर हैंगओवर का कारण भी बनती है। फास्ट फूड (पिज्जा और बर्गर) मैदे से बने ये भारी भोजन पेट में एसिड रिफ्लक्स की समस्या पैदा करते हैं। पिज्जा में इस्तेमाल होने वाला सॉस और टमाटर, अल्कोहल के साथ मिलकर सीने में जलन और गैस्ट्रिक अल्सर जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। यह मिश्रण आपके पाचन तंत्र को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकता है। सॉल्टी और स्पाइसी स्नैक्स: प्यास और पेट की आफत अत्यधिक नमक वाले चिप्स या मसालेदार कुरकुरे स्नैक्स शराब के साथ सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। लेकिन ये 'सोडियम बम' आपके शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करते हैं। शराब वैसे ही शरीर से पानी सोखती है, ऊपर से नमक की अधिक मात्रा प्यास बढ़ाती है और एसिडिटी का कारण बनती है।  बेकरी उत्पाद (ब्रेड और सैंडविच) अगर आप शराब के साथ सैंडविच या पिज्जा बेस जैसी ब्रेड वाली चीजें खा रहे हैं, तो रुक जाइए। ब्रेड में मौजूद यीस्ट और शराब का मेल पेट में 'गैंडिडा' जैसे बैक्टीरिया को बढ़ा सकता है। इससे न केवल पाचन धीमा होता है, बल्कि पेट फूलने और लिवर पर दबाव पड़ने की समस्या भी हो सकती है।

मुख्यमंत्री, म.प्र. संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के राज्य स्तरीय सम्मेलन में हुए शामिल

संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास के आधार पर ही जनकल्याणकारी योजनाएं उतार रही हैं धरातल पर संविदाकर्मी राज्य सरकार का कार्यबल ही नहीं, हमारा आत्मबल भी हैं   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास पर ही राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो रही है। संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है। आपके श्रम और साझेदारी ने ही शासन-प्रशासन की व्यवस्था बनाई रखी है। संविदाकर्मी अनुबंध से अवश्य आते हैं, किन्तु व्यवस्थाओं के प्रबंधन में विराट भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा, पंचायत, नगरीय निकाय या तकनीकी सेवाएं मैदानी स्तर पर सर्वे, मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन में संविदा भाई-बहन हर जगह व्यवस्था के भरोसेमंद स्तंभ बनकर खड़े हैं। संविदाकर्मियों ने जिस निष्ठा से काम किया है, उसने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा पद से बड़ी है। संविदाकर्मी राज्य सरकार का कार्यबल ही नहीं, हमारा आत्मबल भी हैं। भारतीय मजदूर संघ के 'देश के हित में करेंगे काम' के वाक्य को हमारे साथी चरितार्थ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को टीटी नगर दशहरा मैदान में भारतीय मजदूर संघ द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के 'संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मेलन' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भारत माता और श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल आगमन पर पुष्प वर्षा कर और बड़ी माला पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारी सरकार संविदा कर्मियों के अधिकारों के लिए सदैव सकारात्मक भाव के साथ खड़ी है। राज्य सरकार द्वारा संविदा कर्मियों के सेवा सुधार, पारिश्रमिक सुधार, कार्य परिस्थिति और भविष्य के सुधारों पर पहले भी सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं, भविष्य में भी उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा। हमारी सरकार संविदा कर्मियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सभी मुद्दों का समाधान निकालेगी। संविदा कर्मचारियों के लिए जो भी निर्णय हो सकते हैं, उससे अधिक करने का प्रयास करेंगे। नियम, न्याय और वित्तीय संतुलन के दायरे में रहते हुए संविदाकर्मियों की कठिनाइयों का हल निकाला जाएगा। मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के साथ समन्वय करते हुए सभी कठिनाइयों का समाधान इस प्रकार किया जाएगा, जिससे संविदाकर्मियों का सम्मान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों। संविदाकर्मियों की उचित मांगों पर राज्य सरकार संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ उनका सहयोग करेगी। संविदाकर्मियों की मांगों पर रखा जायेगा पूरा ध्यान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव     10 वर्ष से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 प्रतिशत पदों के लिए प्रक्रिया जारी है, इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा।     सामान्य प्रशासन विभाग संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी कंडिकाओं का केंद्र और राज्य पोषित परियोजनाओं में अक्षरश: क्रियान्वयन किया जाएगा। राज्य शासन के निगम मंडल इसे लागू करेंगे।     संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए एनपीएस, ग्रेज्युटी, स्वास्थ्य बीमा लाभ, अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्र पोषित-राज्य पोषित समस्त योजनाओं-परियोजनाओं में एक साथ क्रियान्वयन तथा संविदा कर्मियों के लिए प्रावधान सीसीए रूल 1965, 1966 को पूर्णत: लागू करने के संबंध में नीतिगत निर्णय कराया जाएगा।     विभिन्न विभागों, योजना, परियोजना में पदस्थ संविदा कर्मचारियों की विसंगतिपूर्ण समकक्षता के निर्धारण के लिए अभ्यावेदनों का निराकरण, संविदा के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा समय-सीमा में किया जाएगा।     कृषि विभाग की आत्मा योजना, जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी, जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्रों में संविदा नीति-2023 के तहत समकक्षता का निर्धारण किया जाएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का श्री कुलदीप सिंह गुर्जर, श्री दिनेश सिंह तोमर, श्री गोविंद श्रीवास्तव, श्री दुर्गेश तिवारी तथा संयुक्त संघर्ष मंच के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। श्री दिनेश तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच में प्रदेश के 34 विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कर्मचारी हित में निरंतर कार्य कर रही है। भारतीय मजदूर संघ ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों की मांगों को समझा है। प्रदेश महामंत्री श्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रदेशभर से पधारे संविदा अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप युवाओं को हुनरमंद ही नहीं, जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को केवल कौशल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी नागरिक बनाने की दिशा में लगातार नए नवाचार कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने एक अभिनव निर्णय लेते हुए प्रदेश के सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर दैनिक समाचार-पत्र पठन को अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश के 75 जिलों में संचालित 800 से अधिक कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर वर्तमान में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अब ये युवा कौशल विकास के साथ-साथ देश-दुनिया की घटनाओं, समसामयिक विषयों और सामान्य ज्ञान से भी नियमित रूप से जुड़ेंगे। योगी सरकार की सोच, हुनर के साथ जागरूकता प्रदेश के  व्यावसायिक शिक्षा,  कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश का युवा केवल तकनीकी रूप से दक्ष ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक परिदृश्य की समझ रखने वाला भी बने। इस निर्णय का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों की एम्प्लॉयबिलिटी (रोजगार-क्षमता) बढ़ाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, संवाद कौशल और विश्लेषणात्मक सोच का विकास करना है। कक्षा की शुरुआत अब खबरों के साथ नए निर्देशों के अनुसार स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना और प्रोजेक्ट प्रवीण सहित सभी योजनाओं के अंतर्गत संचालित बैचों में कक्षा की शुरुआत समाचार-पत्र पठन से होगी। इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं (टीपी) और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन एजेंसियों (पीआईए) को अपने-अपने केंद्रों पर प्रतिदिन कम से कम एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। सॉफ्ट स्किल्स को मिलेगी मजबूती मिशन का मानना है कि अखबार पढ़ने से प्रशिक्षार्थियों का सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स मजबूत होगा, जो सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में चयन के लिए आवश्यक है। संपादकीय और लेखों के अध्ययन से भाषा शैली, शब्दावली और विचार अभिव्यक्ति में सुधार होगा। समाचारों के विश्लेषण से युवाओं में समालोचनात्मक चिंतन विकसित होगा, जिससे वे निर्णय लेने में अधिक सक्षम बनेंगे। वहीं, पहेलियों, सांस्कृतिक लेखों और प्रेरक कथाओं से छात्रों में एकाग्रता, धैर्य और संवेदनशीलता जैसे मानवीय गुण भी विकसित होंगे। सख्त निगरानी, तत्काल प्रभाव से लागू आदेश यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसकी निगरानी के लिए जिला समन्वयक, एमआईएस मैनेजर, डीपीएम और बीपीएम को निर्देशित किया गया है कि वे अपने मासिक निरीक्षण के दौरान इस गतिविधि की विशेष समीक्षा करें और रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख करें। उल्लेखनीय है कि इस पहल के लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे प्रशिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना गया है। युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में कदम मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, योगी सरकार के मार्गदर्शन में कौशल विकास को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रखा गया है। दैनिक समाचार-पत्र पठन को पाठ्यक्रम में शामिल कर युवाओं में समालोचनात्मक सोच, वैश्विक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे डिजिटल युग के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।