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मौसम बदलेगा मिज़ाज: 3 और 4 फरवरी को बारिश, कोहरे के साथ ठंड बढ़ेगी

रांची झारखंड में मौसम एक बार फिर बदलने वाला है। पिछले कुछ दिनों से बढ़े तापमान के कारण लोगों को गर्मी महसूस हो रही थी और गर्म कपड़े कम हो गए थे। लेकिन अब मौसम विभाग ने बारिश और ठंड बढ़ने का अनुमान जताया है। अगले तीन दिनों में तापमान फिर 2 से 3 डिग्री बढ़ने की संभावना झारखंड में आने वाले दिनों में मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 3 और 4 फरवरी को राज्य के कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आएगी, जिससे ठंड का असर फिर बढ़ जाएगा। अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। इसके बाद अगले तीन दिनों में तापमान फिर 2 से 3 डिग्री बढ़ने की संभावना है। पिछले कुछ दिनों से तापमान बढ़ने के कारण लोगों को गर्मी लगने लगी थी। बीते 24 घंटों में राज्य के 10 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। इसी वजह से लोग बिना गर्म कपड़ों के बाहर निकलने लगे थे, लेकिन अब मौसम बदलने से ठंड फिर लौट सकती है। सुबह हल्का कोहरा और दिन में बादल छाए रह सकते हैं मौसम विभाग के अनुसार 3 फरवरी को पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार और आसपास के इलाकों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। इस दौरान सुबह हल्का कोहरा छा सकता है और दिन में आंशिक बादल रहेंगे। वहीं 4 फरवरी को पश्चिमी झारखंड के अलावा सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। बाकी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। सुबह हल्का कोहरा और दिन में बादल छाए रह सकते हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में मौसम शुष्क रहा और कुछ जगहों पर हल्का कोहरा देखा गया। इस दौरान सबसे अधिक अधिकतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस चाईबासा में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस रांची के कांके में रिकॉर्ड किया गया।  

लगातार सातवें वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में प्रदेश को मिला प्रतिष्ठित पुरस्कार

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उन्नति की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश को गणतंत्र दिवस परेड में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में प्रदेश की झांकी को पॉपुलर च्वॉइस केटेगरी में द्वितीय पुरस्कार मिला। लोगों द्वारा सराही गई इस झांकी में बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास यात्रा को केन्द्रित किया गया था। उत्तर प्रदेश ने लगातार सातवें वर्ष पुरस्कार प्राप्त कर अपनी विशिष्ट सृजनात्मक पहचान कायम रखी।  कुल 30 झांकियों में प्राप्त किया दूसरा स्थान नई दिल्ली के राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अपर निदेशक अरविंद कुमार मिश्र को केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस परेड में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 13 मंत्रालयों व विभागों की कुल 30 झांकियां शामिल थीं, जिनमें लोकप्रियता के आधार पर उत्तर प्रदेश को दूसरा स्थान मिला। बुंदेलखण्ड की विरासत और आधुनिक विकास को किया गया प्रदर्शित समृद्वि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत थीम पर आधारित इस झांकी में उत्तर प्रदेश ने बुंदेलखण्ड की संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की झलक भी दिखाई थी। झांकी में बुंदेलखण्ड की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को प्रमुखता से दर्शाया गया। कालिंजर दुर्ग की शैल कला और एकमुख लिंग, क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करते दिखाई दिए। झांकी में बुंदेलखंड की मृद्भांड कला, मनका शिल्प, पारंपरिक हस्तशिल्प, एक जनपद एक उत्पाद, ब्रह्मोस मिसाइल, एक्सप्रेस नेटवर्क और आधुनिक अवसंरचना की झलक भी शामिल थी, जिसने विकास और परंपरा का संतुलित चित्र प्रस्तुत किया। सात वर्षों से जारी सम्मान की परंपरा उत्तर प्रदेश को आकर्षक झांकी के लिए लगातार सातवें वर्ष सम्मानित किया गया है। गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकियों ने वर्ष 2020 में द्वितीय तथा वर्ष 2021 और 2022 में प्रथम पुरस्कार जीता। वहीं, वर्ष 2023 में झांकी को ज्यूरी श्रेणी में तृतीय और पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला था। इसी प्रकार, झांकी को वर्ष 2024 में पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय स्थान, वर्ष 2025 में ज्यूरी श्रेणी में प्रथम तथा पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला। वर्ष 2026 में भी पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में प्रदेश की झांकी दूसरे स्थान पर रही, जिससे राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश की सृजनात्मक पहचान और मजबूत हुई।

ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन विन्ध्य की विकास रेखा है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

रेलवे परियोजना का कार्य 2028 तक पूर्ण करने के दिए निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के नवीन सर्किट हाउस सभागार में आयोजित बैठक में ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन विन्ध्य की विकास रेखा है। सीधी-सिंगरौली हाईवे और रेलवे परियोजना का कार्य पूरा होने से नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास होगा। सिंगरौली तक रेलवे लाइन के जुड़ जाने से विन्ध्य पूर्वोत्तर राज्यों से सीधे कनेक्ट हो जाएगा। लंबी दूरी की ट्रेनें चलने से आवागमन में सुविधा के साथ व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। निर्धारित लक्ष्य अनुसार 2028 तक सीधी से सिंगरौली और पन्ना से खजुराहो तक रेलवे लाइन का निर्माण कार्य हरहाल में पूरा कराएं। अप्रैल 2026 तक रीवा से सीधी स्टेशन तक का निर्माण कार्य पूरा कराएं जिससे रेवांचल एक्सप्रेस ट्रेन का सीधी तक विस्तार किया जा सके। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि रेलवे परियोजना के पूरा होने से विन्ध्य और बुंदेलखण्ड के आर्थिक विकास में तेजी आएगी। रेलवे तथा प्रशासन के अधिकारी परियोजना के निर्माण कार्यों से जुड़ी बाधाएं समन्वय से दूर करें। रेलवे के अधिकारी सीधी और सिंगरौली कलेक्ट्रेट में प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाली टीएल बैठक में उपस्थित होकर भू-अर्जन संबंधी प्रकरणों का निराकरण कराएं। कलेक्टर हर सप्ताह परियोजना के कार्यों की समीक्षा करें। भू-अर्जन के कार्यों में देरी न करें। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भू-अर्जन करें। बताया गया कि सीधी से गजरही तक का भू-अर्जन पूरा हो गया है। गजरही से गोपद नदी तथा सिंगरौली तक भू-अर्जन की कार्यवाही तेजी से पूरी करें। इनके लिए टेण्डर जारी हो गए हैं। भू-अर्जन पूरा होते ही निर्माण एजेंसी कार्य शुरू कर दे। रेलवे के अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि भू-अर्जन के बाद पूरक प्रस्ताव की आवश्यकता न रहे। पश्चिम मध्य रेलवे की महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय ने कहा कि 31 मार्च तक सीधी रेलवे लाइन का कार्य पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय से तेजी से कार्य कर रहा है। गोपद नदी से सिंगरौली तक भू-अर्जन की कार्यवाही जारी है। सिंगरौली तक रेलवे लाइन बनाने का कार्य दिसम्बर 2028 तक पूरा हो जाएगा। सतना से पन्ना जिले में सकरिया तक मार्च माह तक रेलवे लाइन बिछ जाएगी। पन्ना से अजयगढ़ तथा अजयगढ़ से खजुराहो तक लाइन बिछाने में लगभग 18 महीने का समय लग जाएगा। इस क्षेत्र में अभी वन विभाग से कार्य करने की अनुमति नहीं मिली है। महाप्रबंधक ने बताया कि पश्चिम मध्य रेलवे जोन को वर्ष 2024-25 में उत्कृष्ट कार्यों के लिए गोविंदवल्लभ पंत शील्ड प्रदान की गई है। बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति की सेक्शनवार जानकारी दी गई। बैठक में सांसद रीवा  जनार्दन मिश्र, कमिश्नर  बीएस जामोद, कलेक्टर रीवा मती प्रतिभा पाल, कलेक्टर सीधी  स्वरोचिष सोमवंशी, कलेक्टर सिंगरौली  गौरव बैनल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पश्चिम मध्य रेलवे  एमएस हाशमी, रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर: UPPSC ने जारी किया 2026-27 का परीक्षा कैलेंडर

लखनऊ.  uppsc exam calendar 2026-27 Out: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने आखिरकार 2026–27 सत्र का डिटेल्ड एग्जाम कैलेंडर जारी कर दिया है। फरवरी से दिसंबर 2026 तक चलने वाली इस परीक्षा श्रृंखला में PCS, RO/ARO, शिक्षक, मेडिकल, तकनीकी और प्रोफेशनल सेवाओं से जुड़ी लगभग सभी प्रमुख भर्तियों की तारीखें शामिल हैं। इससे अभ्यर्थियों को अपनी रणनीति, टाइम टेबल और रिवीजन प्लान तय करने में बड़ी मदद मिलने वाली है। UPPSC Exam Calendar 2026: परीक्षा चक्र की शुरुआत फरवरी से आयोग के मुताबिक, 2026 का परीक्षा चक्र 2 फरवरी 2026 (सोमवार) से शुरू होगा और साल के आखिर तक यानी दिसंबर 2026 तक चलेगा। पूरी परीक्षा सूची UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर उपलब्ध है। सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा संयुक्त राज्य / अपर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (PCS) की बात करें तो इसकी मुख्य परीक्षा यानी मेन्स 29 मार्च 2026 से चार दिनों तक चलेगी। वहीं प्रारंभिक परीक्षा यानी प्री 6 दिसंबर 2026 को तय की गई। PCS अभ्यर्थियों के लिए यह कैलेंडर खास मायने रखता है क्योंकि अब उनके पास पूरे साल की स्पष्ट योजना मौजूद है। RO/ARO और APO जैसी परीक्षाओं का शेड्यूल अन्य प्रमुख प्रशासनिक परीक्षाओं में समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) मेन्स परीक्षा 2 और 3 फरवरी 2026 को होगी। वहीं सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) की प्रारंभिक परीक्षा 22 मार्च 2026 और मुख्य परीक्षा 17 जून 2026 को निर्धारित की गई है। इसके अलावा सहायक आयुक्त की मेन्स परीक्षा 28 जून 2026 से तीन दिनों तक चलेगी। शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए 2026 रहेगा निर्णायक शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी यह साल काफी अहम रहने वाला है। कैलेंडर के अनुसार स्टाफ नर्स (प्रारंभिक) परीक्षा 17 मार्च 2026 को होगी। सहायक अध्यापक (TGT) प्रीलिम्स 5 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि विभिन्न विषयों की TGT मेन्स परीक्षाएं मई और अगस्त 2026 में होंगी। पॉलीटेक्निक और प्रोफेसर भर्तियों की टाइमलाइन UPPSC कैलेंडर में पॉलीटेक्निक लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी शिक्षण सेवाओं की परीक्षाएं भी शामिल हैं। ये परीक्षाएं अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाएंगी, जिससे उच्च शिक्षा क्षेत्र के अभ्यर्थियों को भी तैयारी का पूरा समय मिल सके। तकनीकी और मेडिकल सेवाओं की परीक्षाएं तकनीकी और मेडिकल क्षेत्र की भर्तियों का शेड्यूल भी आयोग ने जारी कर दिया है। इसमें वन सेवा परीक्षा 14 से 16 जुलाई 2026, पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा 3 अक्टूबर 2026, फूड सेफ्टी ऑफिसर 25 अक्टूबर 2026, ड्रग इंस्पेक्टर 26 अक्टूबर 2026 और मेडिकल ऑफिसर परीक्षा 18 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। टेक्निकल एजुकेशन (Teaching/Training) सर्विस परीक्षा 2023 का अहम अपडेट UPPSC ने टेक्निकल एजुकेशन (Teaching/Training) सर्विस परीक्षा 2023 को लेकर भी जरूरी सूचना दी है। यह भर्ती 46 पदों के लिए है, जिनकी लिखित परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2025 को हो चुकी है। अब परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को 30 जनवरी 2026 से पारंपरिक आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि और नियम आवेदन की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2026, शाम 5 बजे तय की गई है। अभ्यर्थियों को भरे हुए फॉर्म की प्रिंट कॉपी और सभी जरूरी दस्तावेज स्वयं सत्यापित कर रजिस्टर्ड पोस्ट से या आयोग के काउंटर नंबर 3 पर जमा करना होगा। दस्तावेजों में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।

आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि: झारखंड के राज्यपाल व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया नमन

  रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते हुए गंगवार ने कहा कि देश महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए मार्ग और उनके आदर्शों का अनुसरण करना जारी रखेगा। गंगवार ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर लोक भवन, रांची में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। बापू के सत्य, अहिंसा और सेवा के आदर्श हमें सदैव मानवता, शांति और राष्ट्र निर्माण के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देते हैं।'' मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बापू का सत्य, अहिंसा और न्याय का मार्ग हमारे लोकतंत्र और सामाजिक जीवन की आधारशिला है। सोरेन ने 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, ''महात्मा गांधी का जीवन हमें मानवता, करुणा और नैतिक साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।'' महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।  

युवा नवाचार करें, अनुसंधान करें और प्रदेश को सतत विकास की ओर ले जाने के लिये आयें आगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान और सतत विकास विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का किया शुभारंभ भोपाल प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान और सतत विकास विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अनुसंधान आधारित विकास लाभप्रद है। हमें अपनी सनातन संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहकर विकास करना होगा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के एमबीए विभाग द्वारा पं. शम्भूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित कांफ्रेंस में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आर्थिक तरक्की के लिये भारतीय मूल्यों को दाव पर न लगायें। युवा नवाचार करें, अनुसंधान करें। प्रदेश और देश को सतत विकास की ओर ले जाने के लिये आगे आयें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमें अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा से हटकर कार्य नहीं करना चाहिए यदि हम रास्ते से भटके तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। प्राकृतिक खेती अनुसंधान से ही निकला ज्ञान है जिसके माध्यम से हम अपने और परिवार के साथ ही धरती को स्वस्थ रख पायेंगे। उन्होंने कहा कि मंथन से निकला ज्ञान छात्रों के साथ ही समाज के लिये लाभदायक होगा। हमारा देश विश्वगुरू बनने की ओर अग्रसर है। हम 2047 तक विश्वगुरू तो बनेंगे ही साथ ही आने वाले समय में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बनेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की और कहा कि वह नौकरी देने वाले बनें नौकरी करने वाले नहीं। प्रभारी कुलगरू प्रो. सुनील तिवारी ने कहा कि सतत विकास ही सनातन की परिकल्पना है। लगातार हो रहे वर्ग संघर्ष के इस दौर में मानवता को संरक्षित रखने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति ही विश्व में शांति स्थापित करने में सक्षम है। उन्होंने टिकाऊ व सतत विकास की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. पद्मेश कुमार ने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने का कार्य किया गया है। प्रबंधन और वाणिज्य मुनाफे तक सीमित न रहे। प्रभाव आधारित अनुसंधान उपयोगी है। बिना नवाचार के विकास अधूरा है। अमेरिका से आयीं डॉ. प्रतिभा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आधुनिक विकास में नवीन शोध व स्थायी विकास आवश्यक है। अडानी ग्रुप की एनेट एफ विश्वास ने कहा कि मैनेजमेंट व वाणिज्य एक दूसरे को लाभ प्रदान करते हैं। विकास ऐसा हो जो आने वाली पीढ़ी के लिये वरदान बने। जिम्मेदार संस्थान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विभागाध्यक्ष एमबीए विभाग डॉ. अतुल पाण्डेय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में 110 रिसर्च स्कालर उपस्थित है और 85 ऑनलाइन जुड़ेंगे। इस दौरान 100 से अधिक शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण होगा। उन्होंने बताया कि 6 देशों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग ले रहे हैं। कुल सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह परिहार सहित देश, विदेश के विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापक तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर. सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर हुई विस्तृत चर्चा नवा रायपुर में आज हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17 वीं बैठक में परिषद के सदस्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चारों राज्यों में सामाजिक- आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित विषयों के निराकरण और बेहतर समन्वय के लिए 50 बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान मध्य क्षेत्र के इन चारों राज्यों से संबंधित प्रशासनिक, आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों का समाधान निकालने तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में मौजूद अधिकारी चारों राज्यों के नवाचारों और बेस्ट प्रेस्टिसेस से भी रू-ब-रू हुए।  मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की इस बैठक का विशेष महत्व है क्योंकि इसमें मध्य क्षेत्रीय परिषद की मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है, इसमें लिए गए निर्णय और सिफारिशें परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं। बैठक में परिषद के सदस्य राज्यों के लंबित अंतर्राज्यीय मामलों के समाधान, नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करने तथा विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर किया जाता है। मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव   विकास शील, केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव   आशीष  वास्तव, अतिरिक्त सचिव  मती शुभा ठाकुर, मध्यप्रदेश की अपर मुख्य सचिव  मती रश्मि अरुण शामी, उत्तरप्रदेश के अपर मुख्य सचिव   पार्थ सारथी सेन शर्मा और उत्तराखंड के प्रमुख सचिव   रमेश कुमार सुंधाशु सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी तथा चारों राज्यों के संबंधित विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए।  मुख्य सचिव   विकास शील ने मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में कहा कि आज चारों राज्यों एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच राज्य सरकारों और भारत सरकार से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर रचनात्मक और उपयोगी चर्चा हुई है। निरंतर संवाद और अंतर्राज्यीय सहयोग के जरिए मध्य क्षेत्र के राज्यों के साझा हितों को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव   आशीष  वास्तव ने कहा कि आज हुई चर्चा के निष्कर्षों के अनुरूप चारों राज्य तत्काल कार्यवाही प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि चारों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच विचार-विमर्श से आपसी संवाद बेहतर होंगे। केंद्र सरकार एवं मध्य क्षेत्रों के राज्यों की साझा समस्याओं के समाधान के लिए ठोस व व्यावहारिक निर्णय लेने में इससे मदद मिलेगी। इन मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़े विषयों पर हुई चर्चा      मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ ही केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, आवास और शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, खान मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल जीवन मिशन, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अभिकरण, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, वित्त सेवा विभाग, डाक विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, वाणिज्य विभाग तथा मछली पालन विभाग से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।  चारों राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस से रू-ब-रू हुए अधिकारी मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक में अंतर्राज्यीय समन्वय, विकास और सुशासन के साथ-साथ चारों राज्यों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रेक्टिसेस की भी प्रस्तुति हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड एवं उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों के नवाचारों और प्रभावी योजनाओं की जानकारी साझा की। छत्तीसगढ़ द्वारा वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 की प्रस्तुति दी गई, जिसे जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय द्वारा लॉन्च किया गया है। यह उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को एकीकृत करता है, जिससे औद्योगिक निवेश, भूमि प्रबंधन, पर्यावरणीय स्वीकृति और सब्सिडी प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा मॉडल के तहत ब्लॉक-चेन आधारित सुरक्षित भूमि अभिलेख प्रणाली और एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की अभिनव पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।    मध्यप्रदेश ने ग्रामीण पर्यटन विकास को अपनी प्रमुख बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में प्रस्तुत किया। इसके तहत 125 गांवों में होम-स्टे और स्थानीय संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही ऊर्जा बचत एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति- 2025 के माध्यम से 2030 तक 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने के लक्ष्य तथा पीएम   टूरिज्म हेली सर्विस के जरिए पर्यटन एवं क्षेत्रीय संपर्क को सशक्त बनाने की पहल की जानकारी दी गई। उत्तराखंड द्वारा किसान-से- आईटीबीपी आपूर्ति श्रृंखला योजना के माध्यम से सीमावर्ती किसानों की आय वृद्धि, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARA) द्वारा जल स्रोतों के पुनर्जीवन की पहलों का प्रस्तुतीकरण किया गया। उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने शहरी क्षेत्रों में आवासीय सुधारों की नई पहलों, श्रम न्याय सेतु पोर्टल तथा सेवा मित्र जैसे नवाचारों पर प्रस्तुतिकरण दिया।

हामिद अंसारी के ‘गजनवी’ वाले बयान पर बवाल, BJP ने कांग्रेस की सोच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की भारतीय इतिहास को लेकर की गई टिप्पणी पर एक बार फिर से बवाल हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम ही ऐसे लोगों का महिमामंडन करता है, जो कि हिंदुओं के खिलाफ थे। एक वीडियो में अंसारी यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि गजनवी और लोधी बाहर से नहीं आए थे, बल्कि वह भारतीय लुटेरे थे।   भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हामिद अंसारी की यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंसारी की टिप्पणी कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का नया उदाहरण है कि कैसे कांग्रेस “हिंदू विरोधियों का महिमामंडन करती है।” पूनावाला ने कहा, "अब कांग्रेस इकोसिस्टम और हामिद अंसारी उस ग़ज़नवी का महिमामंडन कर रहे हैं, जिसने सोमनाथ मंदिर को नष्ट और अपवित्र किया। कांग्रेस इकोसिस्टम महमूद गजनवी का गुणगान करता है। वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विरोध करते हैं और औरंगजेब व उन लोगों के अपराधों को सफेदपोश बनाते हैं जिन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार किए।” इसके अलावा इस मामले में दिल्ली दंगा के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को लपेटे में लेते हुए पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही अलगाववादी सोच रखने वाले लोगों के साथ खड़ी रही है। आपको बता दें हामिद अंसारी वर्ष 2007 में उपराष्ट्रपति पद पर नामित होने से पहले कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं। इंटरव्यू में उनकी टिप्पणियां महमूद गजनवी के संदर्भ में थीं, जिन्होंने भारत पर कई आक्रमण किए थे और वह गजनवी वंश के शासक थे। उन्होंने लोदी वंश का भी उल्लेख किया, जो दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक थे। लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने हराया था। दरअसल, उन्होंने अफगानिस्तान तक के क्षेत्र को उस जमाने में भारत का हिस्सा बताया था। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर यह हिस्सा भारत का था, तो फिर यह जो लोग वहां से आए वह भी भारतीय ही हुए।  

महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी

रायपुर. महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त जारी मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय द्वारा आज जिला नारायणपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की 68 लाख 39 हजार 592 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 641 करोड़ 34 लाख रुपए की राशि का अंतरण किया गया। मुख्यमंत्री   साय ने राशि का अंतरण करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना से छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम मिला है।   उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 21 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। योजना के शुभारंभ से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 14 हजार 954.42 करोड़ रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। यह व्यवस्था वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 24वीं किस्त के रूप में 641.34 करोड़ रुपए की राशि जारी किए जाने के पश्चात महतारी वंदन योजना के अंतर्गत कुल वितरित राशि बढ़कर 15 हजार 595.77 करोड़ रुपए हो जाएगी। यह राज्य सरकार की महिला कल्याण एवं सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि योजना से प्रदेश की लाखों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं। नारायणपुर जिले में महतारी हितग्राहियों की संख्या 27 हजार 272 है। इन हितग्राहियों के खातों में 2 करोड़ 72 लाख 72 हजार रुपए अंतरित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री   केदार कश्यप, उच्च शिक्षा मंत्री   टंकराम वर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता : मंत्री सारंग

कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देगा स्टेट फोकस पेपर : मंत्री कंषाना राज्य ऋण संगोष्ठी : नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर 2026–27 का हुआ विमोचन भोपाल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), मध्यप्रदेश द्वारा शुक्रवार को राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्टेट फोकस पेपर 2026–27 (मध्यप्रदेश) का विधिवत विमोचन किया गया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता मंत्री सारंग ने स्टेट फोकस पेपर 2026–27 के विमोचन अवसर पर कहा कि यह दस्तावेज ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आगामी वर्षों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि एवं सहकारिता है और सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि इन दोनों क्षेत्रों को सशक्त बनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। जनधन योजना के माध्यम से देश के प्रत्येक नागरिक को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे न केवल योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचा है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली भी मजबूत हुई है। कमजोर सहकारी बैंकों को सहायता से मिले सकारात्मक परिणाम मंत्री श्री सारंग ने बताया कि कुछ कमजोर जिला सहकारी बैंकों के कारण कृषकों को पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में कठिनाइयाँ आ रही थीं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 में 6 कमजोर जिला सहकारी बैंकों – रीवा, सतना, जबलपुर, ग्वालियर, शिवपुरी एवं दतिया को ₹50-50 करोड़, कुल ₹300 करोड़ की अंशपूंजी सहायता प्रदान की गई। इस सहायता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन बैंकों द्वारा गत वर्ष की तुलना में लगभग ₹675 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण 75,000 कृषकों को वितरित किया गया। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके लिए 16 विभागों को मिलाकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी कृषि क्षेत्र में निवेश धरातल पर उतरेंगे। ग्रामीण उद्यमियों तक ऋण पहुँचना आवश्यक-मंत्री श्री कंषाना मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर 2026–27 आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट है, जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दिशा प्रदान करेगा। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाना आवश्यक है। इसके लिए ग्रामीण उद्यमियों तक समय पर एवं पर्याप्त ऋण पहुँचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वर्ष 2026–27 मध्यप्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। स्टेट फोकस पेपर 2026–27 की प्रमुख विशेषताएँ स्टेट फोकस पेपर के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 में मध्यप्रदेश के लिए कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹3,75,384.29 करोड़ आंकी गई है। यह राज्य की कृषि, MSME एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी आवश्यकताओं का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। इसमें से ₹2,08,743.78 करोड़ कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित हैं, जिनमें फसल ऋण, कृषि अवसंरचना एवं सहायक गतिविधियाँ शामिल हैं। ₹1,46,269.36 करोड़ MSME क्षेत्र के लिए संभावित ऋण क्षमता के रूप में आंके गए हैं। शेष ₹20,371.15 करोड़ निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा एवं अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए अनुमानित हैं। स्टेट फोकस पेपर में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान बना हुआ है, जो राज्य के सकल घरेलू राज्य उत्पाद (GSDP) में 44.36% का योगदान देती है। विशाल कृषि योग्य भूमि एवं अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ इसे सुदृढ़ आधार प्रदान करती हैं। इसके अनुरूप SFP में कृषि ऋण क्षमता ₹1,79,589.97 करोड़, कृषि अवसंरचना के लिए ₹6,461.67 करोड़ तथा सहायक गतिविधियों के लिए ₹22,692.14 करोड़ का अनुमान लगाया गया है। मध्यप्रदेश गेहूं, चावल, सोयाबीन, चना, दालों एवं तिलहनों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जिससे फसल उत्पादन, कृषि मशीनीकरण, सिंचाई एवं वैल्यू चेन विकास के लिए संस्थागत ऋण की निरंतर आवश्यकता स्पष्ट होती है। राज्य की अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग परिदृश्य वित्तीय वर्ष 2024–25 में राज्य का GSDP ₹15.03 लाख करोड़ रहा, जिसमें 6.05% की विकास दर दर्ज की गई। इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय ₹1,52,615 रही। प्रदेश के बैंकिंग नेटवर्क में ग्रामीण, अर्ध-शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में कुल 8,779 बैंक शाखाएँ तथा 8,882 एटीएम कार्यरत हैं। मार्च 2025 तक राज्य का कुल क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 83.51% तक पहुँच गया है। ये सभी संकेतक एक मजबूत एवं सक्षम वित्तीय इकोसिस्टम को दर्शाते हैं, जो वित्तीय वर्ष 2026–27 में अनुमानित बढ़ी हुई ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है। संगोष्ठी के दौरान कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न विभागों, सहकारी बैंकों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं लघु उद्यमियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती, भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री रेखा चंदनवेली, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के संयोजक श्री धीरज गोयल सहित वरिष्ठ बैंकर, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि एवं विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।