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मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के धान खरीदी आंदोलन पर साधा निशाना, कहा– मुद्दाविहीन राजनीति कर रही है कांग्रेस

रायपुर धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश में गर्म है. इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दाविहीन है, इसलिए इस तरह का आंदोलन कर रही है. कांग्रेस का धर्म ही विरोध करना है. नारायणपुर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज धान खरीदी की अंतिम तारीख है, धान खरीदी अच्छे से हो रही है. दो दिन पहले ही समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि किसानों का धान समय पर बिके और टोकन मिलने में देर न हो. अधिकारी लगातार इस पर काम कर रहे हैं. वहीं जमीन गाइडलाइन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि गाइडलाइन में संशोधन किए गए हैं. सुझाव भी मांगे गए थे. अभी इस पर वर्किंग चल रही है. वहीं निजी अस्पतालों के आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं करने के ऐलान पर उन्होंने कहा कि जो भी बकाया है, उसे जारी किया जाएगा. बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नारायणपुर में दो दिन के प्रवास पर रहेंगे. राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी मुख्यमंत्री के साथ जा रहे हैं. इस दौरान 361 करोड़ के अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होगा.

मुख्यमंत्री साय ने किया कुरूसनार से बस में यात्रियों के साथ सफर

रायपुर. मुख्यमंत्री साय ने किया कुरूसनार से बस में यात्रियों के साथ सफर राज्य के दूरस्थ और सीमांत जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बस सेवा अब नारायणपुर जिले में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय ने जिले के प्रवास के दौरान कुरूसनार से लगभग 4 किमी तक ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा की।  मुख्यमंत्री का बस सेवा से सफर करना इस योजना की विश्वसनीयता और जनोन्मुखी सोच को रेखांकित करता है। उन्होंने अपने सह यात्रियों से अब इस नक्सल प्रभावित इलाके में बस सेवा शुरू होने से हुए फायदों के बारे में भी ग्रामीणों से पूछा। मुख्यमंत्री का यह दौरा और बस सेवा से किया जाने वाला सफर नारायणपुर जिले में विकास, विश्वास और सुशासन की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।  वर्तमान में नारायणपुर जिले में मुख्यमंत्री बस सेवा के अंतर्गत चार बसें संचालित की जा रही हैं, जिनमें से तीन बसें नियद नेल्ला नार मार्गों पर नियमित परिवहन सेवाएं प्रदान कर रही हैं। ये बसें उन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं, जो बीते एक दशक से माओवादी उग्रवाद के कारण सार्वजनिक परिवहन से लगभग वंचित रहे थे। पहला मार्ग नारायणपुर-नेलंगूर का है, जिसके अंतर्गत डूमरतराई, कुकडाझोर, आंकाबेडा, कस्तूरमेटा, मोहंदी, कोडलियार, कुत्तूल, बेडमाकोटी तथा नेलंगूर ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं। दूसरा मार्ग नारायणपुर-कुतूल का है, जिसमें कच्चापाल, कोडलियार एवं कुतूल के साथ कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, कोहकामेटा और इरकभट्टी ग्रामों को परिवहन सुविधा मिल रही है। तीसरा मार्ग नारायणपुर-गारपा का है, जिससे कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, सोनपुर, मसपुर और होरादी ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं। यह बस सेवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें संचालन की जिम्मेदारी एक निजी बस ऑपरेटर को सौंपी गई है, जबकि शासन द्वारा मार्ग निर्धारण और निगरानी की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमांत जनजातीय समुदायों को विश्वसनीय, सुलभ और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बालक आश्रम के निरीक्षण के दौरान मौके पर ही दी स्वीकृति

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बालक आश्रम के निरीक्षण के दौरान मौके पर ही दी स्वीकृति मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय आज अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कुरुषनार स्थित बालक आश्रम पहुंचकर छात्रों से रूबरू हुए आश्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री   साय ने छात्रों की मांग पर यहां एक नए हॉस्टल निर्माण की स्वीकृति प्रदान की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यहां उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण किया। इस मौके पर राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा और वन मंत्री   केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री   साय ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि कहा आप सभी खूब पढ़ाई करें और अपने माता पिता सहित देश प्रदेश का नाम गौरव करें। उन्होंने आश्रम में रहने वाले विद्यार्थी रामजी से कहा की आप पढ़ लिखकर क्या बनना चाहते हैं तब रामजी ने कहा की मैं बड़ा होकर शिक्षक बनना चाहता हूँ। तब मुख्यमंत्री ने उनकी प्रशंसा की और मेहनत से पढ़ाई करने की समझाइश दी। इसी तरह छात्र सोप सिंह ने मुख्यमंत्री को पहाड़ा सुनाया। स्कूली बच्चों से संवाद के दौरान कक्षा दूसरी में पढ़ने वाला आदित्य ने मुख्यमंत्री से पूछा आपको स्कूल जाने में कैसा लगता था? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था। बचपन में पढ़ाई को भरपूर समय दे, बड़ा आदमी बनने के लिए पढ़ाई आवश्यक है। मुख्यमंत्री   साय ने बच्चों से पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता की जानकारी ली और कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री को अंतरिक्ष अभियान के मॉडल की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने मॉडल प्रदर्शित करने वाले सभी विद्यार्थियों को खूब पढ़ाई करने और वैज्ञानिक बनने का प्रयास के लिए बधाई दी। उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय ने शासकीय कार्यक्रमों की क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत देखने कुरूषनार के शासकीय उचित मूल्य दुकान पहुंचे। उचित मूल्य दुकान में मौजूद राशनकार्डधारियों ने मुख्यमंत्री   साय को बताया कि उन्हें नियमित रूप से समय पर राशन मिल रहा है।  मुख्यमंत्री ने उचित मूल्य दुकान में मौजूद डुटाखार के मेहरो, दशरी, तिलो एवं सुनिता, गुमियाबेड़ा की रजनी बाई एवं अनिता और ग्राम कंदाड़ी की वीणाबाई से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की और उनके परिवार के सदस्यों की जानकारी भी ली। इन सभी ने बताया कि उन्हें हर माह चांवल मिल रहा है और इसकी गुणवत्ता अच्छी है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान उचित मूल्य दुकान में स्टॉक की उपलब्धता, रखरखाव , साफ सफाई, स्टॉक रजिस्टर, भंडारण क्षमता आदि की जानकारी ली। गौरतलब है कि शासकीय उचित मूल्य दुकान से आसपास के 12 गांव आलवर, कंदाड़ी, कुरुषनार, कोडोली (विरान), गुमियबेड़ा, जिवलापदर, अरसगढ़, डुटाखार, कंकाल, जामपारा, कावड़वार और नदीपारा संलग्न है तथा 408 राशन कार्ड धारकों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के अवसरों का बढ़ा दायरा

अब जापान ही नहीं, अन्य देशों में भी मिलेगी नौकरी भोपाल मध्यप्रदेश कैबिनेट ने ‘पिछड़ा वर्ग के बेरोजगार युवक-युवतियों को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना–2022’ में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। अब यह योजना ‘अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिये विदेश में रोजगार नियोजन योजना–2026’ के नाम से संचालित की जाएगी। सरकार ने इस योजना के अंतर्गत जापान के साथ अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जापान के साथ अन्य देशों में भी मिलेंगे अवसर प्रदेश के युवाओं को जापान के साथ दुनिया के अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। युवाओं को अलग-अलग मान्य कार्यक्रमों के माध्यम से विदेश भेजा जाएगा। योजना के तहत हर वर्ष पिछड़ा वर्ग के 600 युवाओं को विदेश भेजने का लक्ष्य रखा गया है। पहले युवाओं को केवल 'टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम'  के अंतर्गत जापान भेजा जाता रहा है। योजना के लिए पात्रता इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य है। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का नॉन-क्रीमीलेयर जाति प्रमाण-पत्र आवश्यक होगा। प्रशिक्षण के चयन के समय आयु 17 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए, जबकि विदेश में नौकरी जॉइन करते समय न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूर्ण होना आवश्यक है। आवेदक के विरुद्ध कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज या विचाराधीन नहीं होना चाहिए तथा संबंधित ट्रेड/कौशल के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता अनिवार्य होगी। महिलाओं और दिव्यांगजनों को आरक्षण, प्रशिक्षण शुल्क सरकार वहन करेगी योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत सीटें बेटियों के लिए और 6 प्रतिशत सीटें दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित की गई हैं। प्रति युवा अधिकतम 2 लाख रुपये तक का प्रशिक्षण शुल्क सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्णतः आवासीय होगा। यदि हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं होती है, तो प्रशिक्षुओं को 2,000 रुपये प्रतिमाह किराया भत्ता प्रदान किया जाएगा। सर्टिफिकेशन परीक्षा के पहले प्रयास की फीस भी संस्था द्वारा वहन की जाएगी। 12 माह का समग्र प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को कुल 12 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें सॉफ्ट स्किल्स, डोमेन-स्पेसिफिक स्किल्स तथा संबंधित देश की विदेशी भाषा का प्रशिक्षण शामिल होगा। योजना के वित्तपोषण के लिए बजट के अतिरिक्त सोशल इम्पैक्ट बॉण्ड (SIB) और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का भी उपयोग किया जाएगा।

संघर्ष से सफलता तक: पीवीटीजी महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर. पीवीटीजी महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) की महिलाएं स्व-सहायता समूहों (एसएचजी), सरकारी योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के दम पर आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल कायम कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत संचालित केशोडार वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) के माध्यम से इन महिलाओं को आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध हो रहे हैं।  केशोडार वन-धन विकास केंद्र की स्थापना सहकारी समिति मर्यादित, गरियाबंद द्वारा की गई है। वर्तमान में इस केंद्र से 8 स्वयं सहायता समूहों की कुल 87 पीवीटीजी महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाएं अपने पारंपरिक औषधीय ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग कर आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र में निर्मित उत्पादों को आयुष निदेशालय से औषधि निर्माण का लाइसेंस प्राप्त है, जिससे इन उत्पादों को वैधानिक पहचान मिली है। यहां 13 से अधिक आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें महाविषगर्भ तेल, भृंगराज तेल, तुलसी पाउडर, अश्वगंधा, शतावरी, आंवलक्यादि चूर्ण, पुनर्नवा पाउडर, कृमिघ्न, प्रदरांतक एवं वैश्वानर पाउडर प्रमुख हैं। साथ ही कई क्लासिकल आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण की अनुमति भी केंद्र को प्राप्त है। केशोडार वन धन विकास केंद्र की विशेष पहचान पारंपरिक ‘तेल पाक पद्धति’ है, जिसमें औषधीय जड़ी-बूटियों को सात दिनों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस पद्धति से औषधीय गुण सुरक्षित रहते हैं और उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। पीएम जनमन योजना एवं छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से केंद्र को आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उत्पादों का विपणन ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के अंतर्गत संजीवनी स्टोर्स के माध्यम से किया जा रहा है। जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच केंद्र द्वारा लगभग 159.59 लाख रूपए का विक्रय किया गया, जिससे करीब 10 लाख रूपए का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ है। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं।  इस उपलब्धि पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री   केदार कश्यप ने कहा कि गरियाबंद की पीवीटीजी महिलाओं द्वारा संचालित केशोडार वन धन विकास केंद्र आत्मनिर्भर भारत की सोच को साकार कर रहा है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार से जोड़कर जनजातीय महिलाओं को सशक्त बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह केंद्र अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत है। उल्लेखनीय है कि राज्योत्सव 2025 के अवसर पर प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सराहना से महिलाओं को प्रात्साहन मिला और उनका उत्साह बढ़ा है। आज केशोडार वन- धन विकास केंद्र न केवल गरियाबंद बल्कि पूरे प्रदेश के लिए जनजातीय सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का सफल मॉडल बन चुका है।

राहुल गांधी को नॉर्थ-ईस्ट से दिक्कत क्यों? अमित शाह के सवाल से गरमाई राजनीति, कांग्रेस बैकफुट पर

डिब्रूगढ़ केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने असम में कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए गमछा विवाद को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि जब राहुल गांधी ने गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में असम की पारंपरिक पहचान गमछा नहीं पहना, तो असम कांग्रेस इस पर चुप क्यों है? डिब्रूगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “पूरे कार्यक्रम में केवल राहुल गांधी ही ऐसे नेता थे जिन्होंने नॉर्थ ईस्ट का गमछा नहीं पहना। आखिर उन्हें नॉर्थ ईस्ट से ऐसी क्या दुश्मनी है?” अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने न केवल देश में, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी ये गमछा पहनकर नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति का सम्मान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक नेता के व्यवहार से नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति कमजोर नहीं होगी। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी चाहे जो करें, नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति हमेशा फलती-फूलती रहेगी।” उन्होंने कहा कि भाजपा इस क्षेत्र की संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। क्या है गमछा विवाद? गणतंत्र दिवस के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में राहुल गांधी कुछ समय बाद गमछा पहने हुए नजर नहीं आए, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने इसे असम और नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति का अपमान बताया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा समेत कई भाजपा नेताओं ने इसे राहुल गांधी की “नॉर्थ ईस्ट विरोधी सोच” करार दिया। कांग्रेस का जवाब कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने कार्यक्रम की शुरुआत में गमछा (पटका) पहना था और बाद में बैठने के दौरान उसे उतार दिया। पार्टी ने यह भी कहा कि उस समय कई अन्य नेता, जिनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल थे, गमछा पहने हुए नहीं दिखे। कांग्रेस ने भाजपा पर चुनिंदा राजनीति करने और एक औपचारिक कार्यक्रम को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। अवैध घुसपैठ पर भी कांग्रेस को घेरा गमछा विवाद के अलावा अमित शाह ने कांग्रेस पर अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध प्रवासियों को राजनीतिक वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया। शाह ने कहा, “अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देकर कांग्रेस ने सिर्फ अपना वोट बैंक मजबूत किया है।” उन्होंने कहा कि राज्य में बनने वाली अगली भाजपा सरकार असम से चुन-चुनकर घुसपैठियों को भगाएगी। डिब्रूगढ़ को दूसरी राजधानी बनाने की सराहना अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी बनाने का फैसला ऐतिहासिक है। उन्होंने बताया कि यहां 250 एकड़ में नए विधानसभा परिसर की आधारशिला रखी जा चुकी है। शाह का दांव क्या? गमछा को लेकर उठा विवाद अब सांस्कृतिक सम्मान बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है। भाजपा इसे नॉर्थ ईस्ट की अस्मिता से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे बेवजह का राजनीतिक मुद्दा बता रही है। आने वाले चुनावों के मद्देनज़र यह बहस असम की राजनीति में और तेज होने की संभावना है। दरअसल, अमित शाह और भाजपा चाहती है कि असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गमछा विवाद जोर पकड़े ताकि उनकी पार्टी के लोग असमिया लोगों को यह समझा सकें कि कांग्रेस असम और पूर्वोत्तर की संस्कृति के संरक्षक नहीं है, इसलिए उन्हें आगामी चुनावों में करारी शिकस्त दी जाए। भाजपा की यह रणनीति कांग्रेस को टेंशन दे सकती है। संभव है कि कांग्रेस इसकी काट में असमिया संस्कृति के प्रति अपने लगाव का सार्वजनिक प्रदर्शन भी करे ताकि भाजपा को इस मुद्दे पर माइलेज न मिल सके। इसके अलावा बांग्लादेशी घुसपैठियों का मसला उठाकर भी भाजपा मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिशों में जुटी है।  

टी20 विश्व कप 2026 के लिए न्यूजीलैंड ने बेन सियर्स को रिजर्व खिलाड़ी के तौर पर शामिल किया

वेलिंगटन तेज गेंदबाज बेन सियर्स को 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका में शुरू होने वाले टी20 विश्व कप के लिए न्यूजीलैंड टीम में रिजर्व खिलाड़ी के तौर पर शामिल किया गया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने इसकी जानकारी शुक्रवार को दी। सियर्स रविवार को मुंबई में टी20 विश्व कप टीम से जुड़ेंगे। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा कि सियर्स काइल जैमीसन की जगह लेंगे, जिन्हें पिछले सप्ताह एडम मिल्ने के हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण बाहर होने के बाद टीम में शामिल किया गया था। मिल्ने को एसए20 में गेंदबाजी करते समय चोट लगी थी, जिसके बाद हुए स्कैन से चोट की गंभीरता का पता चला। सियर्स न्यूजीलैंड के घरेलू सुपर स्मैश कॉम्पिटिशन में वेलिंगटन के लिए अच्छी फॉर्म में हैं। हेड कोच रॉब वाल्टर ने कहा कि सियर्स ने हैमस्ट्रिंग इंजरी से अच्छी वापसी की है, जिसकी वजह से वह होम समर की शुरुआत से बाहर हो गए थे। उन्होंने कहा, “बेन ने खुद को वापस मैदान पर लाने के लिए कड़ी मेहनत की है, और उसे वापस खेलते और अच्छा परफॉर्म करते देखना बहुत अच्छा रहा है। उसने फायरबर्ड्स के साथ पूरा सुपर स्मैश कैंपेन खेला, जहां वह अपने नौ मैचों में 15 विकेट लेकर राउंड-रॉबिन स्टेज से कॉम्पिटिशन का संयुक्त रूप से दूसरा सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला गेंदबाज था।” वाल्टर ने कहा, “बेन का भारत में हमारे साथ होना और विश्व कप में किसी के चोटिल होने पर असर डालने के लिए तैयार रहना बहुत अच्छा होगा।” न्यूजीलैंड को ग्रुप डी में अफगानिस्तान, कनाडा, साउथ अफ्रीका और यूएई के साथ रखा गया है। कीवी टीम का पहला मैच 8 फरवरी को चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ होगा। विश्व कप के लिए न्यूजीलैंड स्क्वाड: मिशेल सेंटनर (कप्तान), फिन एलन, माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे, जैकब डफी, लॉकी फर्ग्यूसन, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, डेरिल मिशेल, जेम्स नीशम, ग्लेन फिलिप्स, रचिन रवींद्र, टिम सीफर्ट, ईश सोढ़ी रिजर्व: बेन सियर्स  

राहुल और खरगे से मुलाकात के बाद थरूर की सफाई, बोले— ‘मेरे रुख को गलत समझा गया’

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके रुख को मीडिया द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन के रूप में भले ही देखा जाए, लेकिन वह इसे केवल सरकार या भारत के समर्थन के रूप में देखते हैं। थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उन्हें राजनीति के बारे में बात करना पसंद नहीं है और इसके बजाय वह देश के बारे में बात करना पसंद करते हैं। थरूर ने बीते दिनों कांग्रेस लीडरशिप मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने कहा था कि सबकुछ ठीक है।   तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘यह कोई नयी बात नहीं है, मैं हमेशा से यही कहता आया हूं।’’ पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद की गई राजनयिक पहल पर उनकी टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनकी मंशा पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा था। थरूर ने पत्रकारों से बातचीत में यह भी स्वीकार किया कि पार्टी के किसी सदस्य को पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं संसद में हमेशा पार्टी के साथ खड़ा रहा हूं, इसलिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।’’ जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि वह कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ेंगे, तो थरूर ने कहा, ‘‘मैं कह सकता हूं कि मैं कांग्रेस में ही रहूंगा और कहीं नहीं जा रहा हूं। मैं (केरल में) चुनाव प्रचार का हिस्सा रहूंगा और यूडीएफ की जीत के लिए काम करूंगा।’’ उन्होंने पूछा, ‘‘लेकिन, मुझे इस तरह के बयान देने के लिए क्यों कहा जा रहा है?’’ थरूर ने अपनी शिकायतों के निवारण के लिए बृहस्पतिवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने कहा कि ‘‘सब ठीक है’’ और ‘‘सब एक साथ हैं।’’ थरूर हाल ही में कोच्चि में एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए व्यवहार और केरल में कुछ नेताओं द्वारा उन्हें ‘दरकिनार’ करने के प्रयासों से नाराज बताए जा रहे थे। यह मुलाकात केरल विधानसभा चुनावों से पहले हुई है, जो कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस पिछले 10 साल से राज्य में विपक्ष में है और इस बार वह जीत हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।  

देशभर में गुरु रविदास जयंती पर छुट्टी की मांग तेज, सांसद चन्नी ने संसद में उठाया मुद्दा

चंडीगढ़ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने केंद्र सरकार से एक अहम मांग की है। उन्होंने कहा है कि 1 फरवरी 2026 को श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व के मौके पर पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर चन्नी ने लोकसभा स्पीकर को एक औपचारिक पत्र भी लिखा है। चन्नी का कहना है कि श्री गुरु रविदास जी सिर्फ एक संत ही नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, भाईचारे और मानवता के प्रतीक हैं। उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं। ऐसे में उनके प्रकाश पर्व पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि उस दिन संसद के कामकाज में बदलाव किया जाए। सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पत्र में लिखा, "मैं सम्मानपूर्वक निवेदन करता हूं कि 1 फरवरी 2026 को पूजनीय संत, दार्शनिक और समाज सुधारक श्री गुरु रविदास जी महाराज की पवित्र जयंती है, जिनकी समानता, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की शिक्षाएं भारत के सभ्यतागत और संवैधानिक मूल्यों का एक अभिन्न अंग हैं।" उन्होंने आगे लिखा, "गुरु रविदास जी महाराज का पूरे भारत में बहुत सम्मान किया जाता है, और उनकी जयंती कई राज्यों में, खासकर सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी के साथ-साथ पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में बहुत श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर लाखों भक्त धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।" चरणजीत सिंह चन्नी ने बताया कि यह दिन वैसे तो प्रतिबंधित छुट्टी के रूप में अधिसूचित है और रविवार को भी पड़ रहा है। हालांकि, 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश किया जाना है, जिसके लिए संसद सदस्यों को सदन में उपस्थित होना होगा, जिससे वे इस राष्ट्रीय महत्व के अवसर में भाग नहीं ले पाएंगे। उन्होंने कहा, "पूरे भारत में सम्मान, गुरु रविदास जी महाराज की सामाजिक और आध्यात्मिक विरासत, और लाखों अनुयायियों की भावनाओं को देखते हुए, मैं सरकार से सम्मानपूर्वक अनुरोध करता हूं कि 1 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए, और तदनुसार संसदीय कामकाज में आवश्यक समायोजन किया जाए।"

एआई और डिजिटल सुरक्षा पर फोकस: श्रम विभाग की ‘लैब-राइट’ कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर. श्रम विभाग की राज्य स्तरीय ‘लैब-राइट’ कार्यशाला संपन्न, डिजिटल सुरक्षा और एआई पर केंद्रित रहा सत्र छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा इंडस एक्शन के सहयोग से आयोजित “लैब-राइट” कार्यशाला श्रृंखला के अंतर्गत आज एकदिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अपर श्रम आयुक्त  सविता मिश्रा, उप श्रम आयुक्त श्री एस. एस. पैकरा और श्री डी.पी. तिवारी सहित छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत 20 नवंबर 2025 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जिला श्रम अधिकारियों और श्रम निरीक्षकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। कार्यशाला के दौरान गैर-तकनीकी उपयोगकर्ताओं को डेटा सुरक्षा प्रणाली से परिचित कराने हेतु विशेष सत्र आयोजित किए गए। विधि एवं नीति विशेषज्ञ श्री के के प्रह्लाद ने सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से डेटा संरक्षण और गोपनीयता जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मोबाइल नंबर, ईमेल और लोकेशन जैसी व्यक्तिगत जानकारियां दैनिक जीवन में साझा होती हैं और उनके दुरुपयोग की क्या संभावनाएं हो सकती हैं। सत्र में विशेष रूप से डेटा साझा करने, सहमति लेने और डेटा ब्रीच जैसी स्थितियों में विभागीय सावधानियों पर गहन चर्चा की गई। तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आधारभूत जानकारी, एलिजिबिलिटी इंजन और मोबाइल ऐप के व्यावहारिक उपयोग के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इसके साथ ही ई-केवाईसी की प्रक्रिया, नवीन विभागीय पोर्टल की विशेषताओं और आवेदनों के त्वरित निराकरण हेतु अपनाई जाने वाली नई कार्यप्रणालियों का पुनरावलोकन किया गया। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों ने श्रम योजनाओं के सरलीकरण और पारदर्शिता बढ़ाने हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव और फीडबैक भी साझा किए। यह आयोजन राज्य में श्रमिक सेवाओं को पूरी तरह तकनीक-सक्षम और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।