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धर्म पर सीधी टक्कर: अविमुक्तेश्वरानंद बोले– पहचान साबित करें योगी, वरना…

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझसे मेरे पद और परम्परा का प्रमाणपत्र मांगा। हमने सहज भाव से वह उनको सौंप दिया। क्योंकि सत्य को साक्ष्य से भय नहीं होता। किन्तु अब समय 'प्रमाण' लेने का नहीं, बल्कि उनको 'प्रमाण' देने का है। सम्पूर्ण सनातनी समाज की तरफ से मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'हिन्दू' होने का साक्ष्य मांगता हूं। हिन्दू होना केवल भाषणों या भगवे तक सीमित नहीं है, इसकी कसौटी 'गो-सेवा' और 'धर्म-रक्षा' है। गौमाता को राज्यमाता का दर्जा देकर वह अपने हिंदू होने का प्रमाण दें अन्यथा 40 दिन बाद हम धर्म सभा करके उन्हे नकली हिन्दू घोषित करेंगे।   40 दिन का अल्टीमेटम यह बातें ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को काशी में शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि हम शासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिनों का समय दे रहे हैं। यदि इन 40 दिनों के भीतर गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं मिला और निर्यात बन्नी शासनादेश जारी नहीं हुआ तो परिणाम गम्भीर होंगे।" कहा कि यदि 40 दिन व्यर्थ गए, तो आगामी 10-11 मार्च को लखनऊ की पुण्य धरा पर सम्पूर्ण सन्त समाज का समागम होगा। उस दिन हम मुख्यमंत्री को नकली हिन्दू घोषित करने को बाध्य होंगे। जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे हिन्दू कहलाने का नैतिक अधिकार नहीं है और उस योगी को तो बिलकुल नहीं जो गुरु गोरश्वनाथ की पवित्र गद्दी का खुद को महन्त कहते हों। कहा कि लगता है स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बन्दी कानून की मांग करना ही सबसे बड़ा अपराध हो चुका है। तभी तो जब-जब जिस-जिस ने यह आवाज उठाई सरकारों ने उसे क्रूरता पूर्वक रौंद दिया। उदाहरण 1966 का दिल्ली का गोरक्षा आन्दोलन है जिसमें तत्कालीन सरकार ने जाने कितने गोभक्तों सन्तों को गोलियों से भून दिया और धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री महाराज सहित प्रमुख सनातनियों पर भी तरह-तरह के अत्याचार किये और अब उसी आवाज को बुलन्द करने के कारण हमें और हमारा इस कार्य में सहयोग कर रहे गोभक्तों पर भान्ति-भान्ति के अत्याचार और अन्याय हो रहे हैं। यहां तक कि हमसे हमारे शङ्कराचार्य होने का प्रमाण तक मांगा जा रहा है और हमारी छवि को सनातनी जनता के बीच धूमिल करने के तरह-तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। इन सबका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्तों रामभद्राचार्य आदि के माध्यम से कर रहे हैं। सत्ता के समक्ष दो स्पष्ट और अपरिहार्य शर्तें रखी जा रही हैं। गोमाता को 'राज्यमाता' का आधिकारिक दर्जा दें। जिस प्रकार हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने देशी गायों को 'राज्यमाता' घोषित किया और जिस तरह नेपाल में गाय 'राष्ट्रीय पशु है, उसी तर्ज पर उत्तरप्रदेश में भी गोमाता को 'राज्यमाता' का सम्मान मिले। निर्यात के नाम पर गोवंश की हत्या का खेल मांस निर्यात का हब भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तरप्रदेश की हिस्सेदारी 40% से अधिक है। क्या 'रामराज्य' का स्वप्न गायों के रक्त से अर्जित विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा। निर्यात का सारा डेटा भैस के मांस' (Buffalo Meat नाम पर दर्ज होता है, किंतु यह एक खुला सत्य है कि बिना DNA परीक्षण के इस मास की आड़ में गोवंश को काटा और भेजा जा रहा है। राज्य में भैंसों की संख्या और मांस निर्यात की मात्रा में भारी अन्तर है। जब तक हर वधशाला और कण्टेनर का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं होता तब तक यह सरकार द्वारा दी गई 'मौन स्वीकृति है। शंकराचार्य ने कहा कि जन-जन का आह्वान यह केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन की आत्मा की रक्षा का प्रश्न है। उत्तराखण्ड ने 'राष्ट्रमाता' का प्रस्ताव दिया, महाराष्ट्र ने 'राज्यमाता' बनाया तो फिर भगवान राम और कृष्ण की धरती 'उत्तरप्रदेश' मांस निर्यात का केन्द्र क्यों बनी हुई है।  

सौरभ भारद्वाज की विवादित टिप्पणी: आखिर LG के लिए ऐसी कठोर कामना क्यों?

नई दिल्ली दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक सौरभ भारद्वाज एलजी वीके सक्सेना पर भगवान के प्रकोप और उन्हें पीड़ा मिलने की कामना कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आप सरकार को पंगु बनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जानबूझकर ऐसे अधिकारियों की तैनाती की गई जिससे कामकाज में बाधा आए। उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी पर भी निशाना साधा है। दरअसल, सौरभ भारद्वाज की यह प्रतिक्रिया उस घटनाक्रम पर आई है जिसके तहत जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड के 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आप नेता का कहना है कि उनकी सरकार से जो अधिकार छीन लिए गए थे उसका इस्तेमाल अब भाजपा सरकार कैसे कर रही है।   'ईश्वर से मेरी प्रार्थना' शीर्षक के साथ एक पोस्ट में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले दस लंबे वर्षों से दिल्ली की AAP सरकार को जानबूझकर पंगु बना दिया गया। एक चुनी हुई राज्य सरकार की बुनियादी और जायज शक्तियों को छीनकर मोदी प्रशासन ने गवर्नेंस को एक संघर्ष में बदल दिया। उन्होंने कहा, ‘BJP और उसकी केंद्र सरकार ने बार बार यह तर्क दिया कि चूंकि दिल्ली एक राजधानी है इसलिए अधिकारियों के ट्रांसफर की शक्ति राज्य सरकार को नहीं दी जा सकती। उन्होंने चुनी हुई सरकार के प्रतिनिधियों के लिए भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक ऐक्शन लेना असंभव बना दिया।’ 'सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार लौटाए तो कानून बनाकर छीना' भारद्वाज ने कहा कि जब मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने न्यायपूर्ण तरीके से ये शक्तियां दिल्ली सरकार को लौटा दी थीं तब उन्हें एक अनैतिक और असंवैधानिक कानून के जरिए फिर से छीन लिया गया। केंद्र सरकार ने मतदाताओं की आवाज को दबा दिया। उन्होंने पूछा कि आज आज उसी कानून के रहते एक मंत्री अधिकारियों का ट्रांसफर और सस्पेंशन कैसे कर सकता है? 'भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को संरक्षण' भारद्वाज ने कहा कि एजी साब ने सिस्टेमैटिक तरीके से अकुशल और लापरवाह अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में तैनात किया था। भ्रष्टाचार और खुलेआम अनुशासनहीनता की अनगिनत शिकायतों के बावजूद उन अधिकारियों को LG द्वारा संरक्षण दिया गया और वे संवेदनशील पदों पर बने रहे। यह एक क्रूर विडंबना है कि मंत्रियों को एक चपरासी तक का तबादला करने की अनुमति नहीं दी गई फिर भी उनसे हर दिन डिलीवरी के बारे में सवाल पूछे गए। जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे गरीबों को कष्ट: भारद्वाज आप नेता ने पीएम पर निशाना साधाते हुए कहा, ‘यह श्री नरेंद्र मोदी के असली चेहरे और उनके गवर्नेंस के स्टाइल को उजागर करता है। यह एक ऐसे नेता को उजागर करता है जो राजनीतिक लाभ के लिए अपने ही देश के लोगों को दंडित करने के लिए तैयार है। इस प्रशासन ने जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे लाखों गरीब निवासियों को भारी कष्ट झेलना पड़ा। CS नरेश कुमार और हेल्थ सेक्रेटरी एसबी दीपक कुमार जैसे अधिकारियों की हरकतों ने (LG विनय सक्सेना के संरक्षण में) सबसे कमजोर वर्ग के लिए बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का गला घोंट दिया। उन्होंने कैंसर के मरीजों या डायलिसिस पर निर्भर लोगों तक को नहीं बख्शा। यह पूरी तरह से संवेदनहीन और निर्दयी है।’ भारद्वाज ने कहा- भगवान के प्रकोप का सामना करना पड़े भारद्वाज ने एलजी और अन्य अधिकारियों को पीड़ा मिलने की प्रार्थना की। उन्होंने लिखा, 'मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि गरीबों की इस पीड़ा को पैदा करने के लिए जिम्मेदार सभी लोग (एलजी दिल्ली, नरेश कुमार और एसबी दीपक कुमार और अन्य) भगवान के प्रकोप का सामना करें और उन्हें उनकी इस क्रूरता के लिए वैसी ही पीड़ा मिले।'  

सेवा को मिला सम्मान: सेवानिवृत्ति पर अवर सचिव अरूण कुमार हिंगवे, खुमान सिंह और कन्हैया लाल को दी गई विदाई

रायपुर. छत्तीसगढ़ मंत्रालय (महानदी भवन) में आज मुख्य सचिव कार्यालय के अवर सचिव अरुण कुमार हिंगवे, सामान्य प्रशासन विभाग के दफ़्तरी   खुमान सिंह ध्रुव एवं  कन्हैया लाल सोम के सेवानिवृत्त होने पर मंत्रालय में गरिमामय एवं भावभीनी विदाई समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य सचिव विकाशशील ने सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके दीर्घकालीन, निष्ठापूर्ण एवं समर्पित शासकीय सेवा के लिए धन्यवाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि शासन को उनकी सेवाओं से लंबे समय तक लाभ मिला है, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा। समारोह में मुख्य सचिव विकाशशील एवं अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ द्वारा सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों को शाल,  फल, स्मृति चिन्ह एवं अवकाश नकदीकरण की राशि भेंट की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यगण सहित मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सेवानिवृत्त साथियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। 

जैव विविधता की बड़ी पुष्टि: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नजर आया पेरेग्रीन फाल्कन

रायपुर. उदंती-सीतानदी में दिखा दुनिया का सबसे तेज़ उड़ने वाला पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन पेरेग्रीन फाल्कन दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी है, जो शिकार करते समय गोता लगाते हुए अविश्वसनीय गति प्राप्त कर सकता है। यह बाज़ प्रजाति ऊँचाई से शिकार पर झपट्टा मारने में माहिर है और इसे 'आसमान का चीता' भी कहा जाता है। पेरेग्रीन बाज़ तेज़ और बड़े शिकारी पक्षी होते हैं। इनके मज़बूत, नुकीले पीले पंजे इन्हें उड़ते हुए भी दूसरे पक्षियों को पकड़ने में सक्षम बनाते हैं। छत्तीसगढ़ अब दुनिया भर के पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है। अनुकूल जलवायु और समृद्ध जैव विविधता के कारण कई दुर्लभ पक्षी लंबी दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक अत्यंत उत्साहजनक जानकारी सामने आई है। यहां दुनिया के सबसे तेज़ उड़ने वाले पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन (स्थानीय नाम शाहीन बाज) को एक बार फिर देखा गया है। इस दुर्लभ दृश्य को वन रक्षक   ओमप्रकाश राव ने अपने कैमरे में कैद किया है। इससे पूर्व भी इस पक्षी को आमामोरा ओड़ क्षेत्र के पास शेष पगार जलप्रपात के समीप ड्रोन कैमरों में दर्ज किया गया था, जो इस क्षेत्र में इसकी सक्रिय उपस्थिति की पुष्टि करता है। उल्लेखनीय है कि पेरेग्रीन फाल्कन अपनी अद्भुत तेज़ उड़ान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शिकार का पीछा करते समय यह लगभग 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गोता लगा सकता है, जबकि सामान्य उड़ान में इसकी गति करीब 300 किमी प्रति घंटा रहती है। यह छोटे पक्षियों, कबूतरों और तोतों का शिकार करता है। ऊंचाई से तेज़ी से गोता लगाकर सटीक प्रहार करना इसकी सबसे प्रभावी शिकार तकनीक है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी न केवल अपनी गति बल्कि अपनी वफादारी के लिए भी जाना जाता है। ये आमतौर पर अकेले या जोड़े में रहते हैं और अक्सर जीवनभर एक ही साथी चुनते हैं। लगभग 12 से 15 वर्ष के जीवनकाल वाले इस पक्षी का उदंती-सीतानदी के वनों में दिखना यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ का पर्यावरण वन्यजीवों के लिए कितना अनुकूल है। हाल ही में आयोजित बर्ड सर्वे के दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य में भी दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी ऑरेंज ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन तथा ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर देखे गए हैं। गौरतलब है कि वन मंत्री   केदार कश्यप वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं। वन मंत्री के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)   अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की पूरी टीम सतत प्रयासों में जुटी है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग की यह उपलब्धि न केवल अभिलेखीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।

आईओए अध्यक्ष पी.टी. उषा के पति वेंगलिल श्रीनिवासन का निधन

कोझिकोड राज्यसभा सांसद और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) अध्यक्ष पी.टी. उषा के पति, वेंगलिल श्रीनिवासन (67) का शुक्रवार सुबह कोझिकोड जिले में अपने घर पर गिरने के बाद निधन हो गया, परिवार के सूत्रों ने बताया। पोन्नानी के रहने वाले श्रीनिवासन, थिक्कोडी के पेरुमलपुरम में अपने घर पर सुबह करीब 12.30 बजे गिर गए। उन्हें तुरंत पेरुमलपुरम के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) में इंस्पेक्टर थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी और बेटा, डॉ. उज्ज्वल विग्नेश हैं। महान पूर्व एथलीट और मौजूदा राज्यसभा मेंबर डॉ. उषा, अभी नई दिल्ली में चल रहे पार्लियामेंट सेशन में शामिल हो रही हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने श्रीनिवासन के निधन पर शोक जताया है। एक्स पर एक पोस्ट में, स्टालिन ने कहा, “इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की प्रेसिडेंट और सांसद थिरुमिगु पीटी उषा के पति थिरु. श्रीनिवासन के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। थिरुमिगु पीटी उषा और उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं, जो अपने प्रियजन के निधन पर शोक मना रहे हैं।”  

अमेरिका को बड़ा झटका? भारत-चीन-रूस साथ आए, BRICS का डिजिटल भुगतान मॉडल क्या बदल देगा खेल

नई दिल्ली BRICS देशों की मजबूती हमेशा से ही अमेरिका को परेशान करती रही है। भारत, रूस और चीन की अगुवाई वाली इस समूह पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार निशाना साधा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इस समूह का डॉलर को सीधी चुनौती देना। अब ब्रिक्स के सदस्य देश डॉलर का तोड़ लेकर आए हैं जो डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी को और बढ़ा सकती है। BRICS एक डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे भारत, चीन और रूस जैसे देशों की डिजिटल करेंसियों को इंटीग्रेट किया जाएगा। बता दें कि भारत इस साल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी रहा है। इस बीच डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर एक नए डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में ब्रिक्स की साझा करेंसी को लेकर भी चर्चाएं हुई थीं, लेकिन अब यह स्पष्ट हो हो गया है कि ये समूह नई करेंसी नहीं, बल्कि एक साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम लाने की तैयारी में है। डिजिटल करेंसी को जोड़ने का प्लान रिपोर्ट के मुताबिक इस सिस्टम में भारत के ई-रुपया, चीन की डिजिटल युआन और रूस की डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें हर देश अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगा। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि इन करेंसी के जरिए आपसी लेनदेन आसान हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए ब्रिक्स देश आपस में होने वाले व्यापार का भुगतान सीधे अपनी डिजिटल करेंसी में कर सकेंगे। इसके लिए ना तो डॉलर की जरूरत होगी और न ही स्विफ्ट जैसे डॉलर आधारित सिस्टम से होकर भुगतान करना पड़ेगा। भारत की अहम भूमिका भारत इस पूरे मॉडल को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि करेंसी को मिलाने की बजाय सिस्टम को आपस में जोड़ना बेहतर रास्ता है। इसका आधार भारत का खुद का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है, जिसने देश के अंदर डिजिटल पेमेंट को आसान बनाया है। इसके पीछे एक व्यावहारिक वजह भी है। पहले रूस के साथ व्यापार में रुपये में भुगतान हुआ, लेकिन बाद में रूस के पास इतने रुपये जमा हो गए, जिनका वह ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाया। बहुपक्षीय सिस्टम बनने से ऐसी समस्या से बचा जा सकेगा। काम कैसे करेगा ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम? ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सिस्टम दो अहम तकनीकी आधारों पर काम करेगा। पहला है सेटलमेंट साइकिल। इसका मतलब है कि हर लेनदेन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि में आयात और निर्यात का हिसाब जोड़ा जाएगा और आखिर में सिर्फ अंतर की रकम का भुगतान होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर चीन एक महीने में भारत से 500 अरब रुपये का सामान खरीदता है और भारत चीन से 450 अरब रुपये का सामान लेता है, तो सिर्फ 50 अरब रुपये का ही भुगतान करना होगा। इससे पैसों की जरूरत और ट्रांजेक्शन कॉस्ट दोनों कम होंगी। वहीं दूसरा आधार है फॉरेक्स स्वैप लाइन। अगर किसी देश को अस्थायी रूप से दूसरे देश की करेंसी की ज्यादा जरूरत पड़ती है, तो सेंट्रल बैंक आपस में करेंसी बदलकर संतुलन बना सकते हैं। क्यों डॉलर का विकल्प तलाश रहे देश? ब्रिक्स देश काफी अरसे से इस पर विचार कर रहे हैं। रूस को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर करने और उसके 300 अरब डॉलर फ्रीज करने देने के बाद कई देश इसे चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं। इससे पहले ईरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा पर भी ऐसे कदम उठाए गए थे, लेकिन रूस जैसे बड़े देश के साथ ऐसा होने से डर बढ़ गया। ऐसे में ब्रिक्स का यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक बैकअप की तरह काम कर सकता है, ताकि किसी संकट की स्थिति में व्यापार ठप न हो।

कार्लोस अल्काराज का कमाल, ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में पहुंचकर मचाई सनसनी

मेलबर्न स्पेन के कार्लोस अल्काराज ने ऑस्ट्रेलियन ओपन पुरुष एकल के फाइनल में जगह बना ली है। यह पहला मौका है जब अल्काराज ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में जगह बनाई है। शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में अल्काराज ने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराया। 22 साल के अल्काराज ने चोट के बावजूद पांच घंटे से अधिक समय तक चले मुकाबले में जर्मनी के अलेक्जेंडर जेवरेव को 6-4, 7-6(5), 6-7(3), 6-7(4), 7-5 से हराया। मैच के दौरान कार्लोस अल्काराज इंजर्ड भी हुए और इस वजह से कुछ समय के लिए टाइम आउट भी लिया। अलेक्जेंडर ज्वेरेव अल्काराज के टाइम आउट लेने से खुश नहीं थे। उनका कहना था कि स्पेन के खिलाड़ी को क्रैम्प हुआ था और उन्हें गेम के बीच में टाइम आउट लेने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। अलेक्जेंडर ज्वेरेव को अधिकारियों के साथ बहस करते हुए देखा गया। इस दौरान अल्काराज अपने फिजियो से इलाज करवाते रहे। पांच घंटे और 27 मिनट के दौरान 5 सेट में चले मैच में आखिरकार कार्लोस अल्काराज ने जीत दर्ज की और अपने पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में जगह बनाई। मैच के बाद दोनों खिलाड़ियों ने गले मिलकर मैच के दौरान हुई गिले शिकवे दूर किए। जीत के बाद अल्काराज ने कहा, "मैं हमेशा कहता हूं कि आपको खुद पर विश्वास रखना होगा, चाहे कुछ भी हो जाए। आप चाहे किसी भी चीज से जूझ रहे हों, आप किसी चीज से गुजर रहे हों, चाहे कुछ भी हो, आपको हर समय खुद पर विश्वास रखना होगा। मैं तीसरे सेट के बीच में संघर्ष कर रहा था। फिजिकली यह मेरे छोटे से करियर में खेले गए सबसे ज्यादा मुश्किल मैचों में से एक था, लेकिन मैं इस तरह के हालात में रहा हूं।" उन्होंने कहा, "मैं पहले भी इस तरह के मैच में रहा हूं। इसलिए मुझे पता था कि मुझे क्या करना है। मुझे मैच में अपना दिल लगाना था। मुझे लगता है कि मैंने यह किया। मैंने आखिरी बॉल तक लड़ाई लड़ी। मुझे पता था कि मेरे पास मौके होंगे। मैं पांचवें सेट में पैशनेट था, आप जानते हैं, लेकिन मुझे खुद पर बहुत गर्व था, जिस तरह से मैंने महसूस किया और जिस तरह से मैंने वापसी की।" नोवाक जोकोविच ने सिनर के साथ होने वाले अपने सेमीफाइनल मुकाबले से पहले अल्काराज को फाइनल में पहुंचने की बधाई दी। फाइनल में कार्लोस अल्काराज का मुकाबला दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होना है। दूसरा सेमीफाइनल जैनिक सिनर और नोवाक जोकोविच के बीच खेला जाना है। अल्काराज अगर फाइनल जीतने में कामयाब रहते हैं, तो पुरुष एकल में सबसे कम उम्र में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे।

CM का बड़ा फैसला: संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर मिली खुशखबरी

भोपाल  मध्यप्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राजधानी भोपाल में आयोजित संविदा कर्मचारियों के विशाल महासम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नियमितीकरण को लेकर बड़ा और अहम ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार एक विशेष समिति का गठन करेगी, जो उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। सरकार को संविदा कर्मियों की जरूरत, जैसे श्रीराम को हनुमान की 30 जनवरी को न्यू दशहरा मैदान में आयोजित इस महासम्मेलन में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने संविदा कर्मचारियों की भूमिका को सरकार की रीढ़ बताते हुए कहा सरकार की हर योजना को जमीन पर उतारने में संविदा कर्मचारियों का सबसे बड़ा योगदान है। सरकार को संविदा कर्मियों की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी श्रीराम को हनुमान की थी। मुख्यमंत्री के इस बयान पर सम्मेलन स्थल पर मौजूद हजारों कर्मचारियों ने तालियों के साथ स्वागत किया। संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर हुआ महासम्मेलन इस महासम्मेलन का आयोजन संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के संयुक्त आवाहन पर किया गया। कार्यक्रम के आयोजकों में प्रदेश संयोजक दिनेश तोमर, डी. के. उपाध्याय, महामंत्री सजल भार्गव,अभय वाजपेई, सुरेन्द्र रघुवंशी, संस्थापक प्रांताध्यक्ष के. के. शर्मा एवं अरविंद यादव शामिल रहे। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सम्मेलन संविदा कर्मचारियों के वर्षों पुराने संघर्ष को नई दिशा देने का काम करेगा। सभी विभागों से उमड़ा संविदा कर्मियों का सैलाब संविदा संयुक्त मंच के जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय ने बताया कि महासम्मेलन में प्रदेशभर से हजारों संविदा अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इनमें सर्व शिक्षा अभियान, स्वास्थ्य विभाग, आजीविका मिशन, मनरेगा, महिला एवं बाल विकास, वाटरशेड, कृषि विभाग सहित शासन की लगभग सभी योजनाओं और विभागों के संविदा कर्मी मौजूद रहे। ऐतिहासिक फैसलों की उम्मीद मंच का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों की एकजुटता सरकार को नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और स्थायित्व जैसे मुद्दों पर ऐतिहासिक और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए मजबूर करेगी।

‘गजनवी भारतीय लुटेरा था’—हामिद अंसारी के विवादित बयान से सियासत गरम, BJP ने कांग्रेस को घेरा

 नई दिल्ली पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है. अंसारी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि इतिहास की किताबों में जिन विदेशी आक्रांताओं और लुटेरों को दिखाया गया है, वे असल में ‘भारतीय लुटेरे’ थे. इस संदर्भ में उन्होंने महमूद गजनवी का भी उदाहरण दिया था, जिसे लेकर खासा विवाद पैदा हुआ है. अंसारी के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीकी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदांशु त्रिवेदी ने इस बयान को "बीमारी की मानसिकता" करार दिया और कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति का यह वक्तव्य देश के इतिहास और भावनाओं के प्रति अपमान है. उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं से जुड़ी इस तरह की सोच पूरी देश की बदनामी का कारण बनती है. बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा. राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अंसारी के कथित बयान का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि कांग्रेस और उसके समर्थक उन आक्रांताओं की महिमा मंडित करते हैं जिन्होंने मंदिरों को नष्ट किया. उन्होंने कहा, "गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तबाह किया था, फिर भी उसे सराहा जा रहा है." प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और आक्रांताओं के कृत्यों को नजरअंदाज करती है. उन्होंने कांग्रेस को ‘आधुनिक मुस्लिम लीग’ भी कहा. इतिहास को लेकर BJP प्रवक्ता सुदांशु त्रिवेदी ने कहा कि मुगल शासक बगदाद के खलीफा के नाम पर शासन करते थे, जैसे ब्रिटिश वायसराय ब्रिटिश राजाओं के प्रतिनिधि होते थे. उन्होंने इस बयान को देश की भावना के खिलाफ और और भ्रम फैलाने वाला बताया. इस मामले ने राजनीतिक घमासान बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ा दी है. दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और यह विवाद अभी भी जारी है.

‘कोई नया गुट नहीं चाहिए’: तुर्की का पाकिस्तान-सऊदी के ‘इस्लामिक NATO’ संबंध में स्पष्ट

 नई दिल्ली सितंबर 2025 में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) किया. इस समझौते में दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि किसी एक पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान इस संगठन को इस्लामिक देशों का NATO (North Atlantic Treaty Organization) बनाने की फिराक में है और इसी कड़ी में पाकिस्तान के करीबी दोस्त तुर्की से लगातार बातचीत चल रही है. हाल ही में खबर आई कि तुर्की के इस डिफेंस पैक्ट में शामिल होने को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. लेकिन अब तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कुछ ऐसा कह दिया है जो पाकिस्तान को हजम नहीं होगा. तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे समूह में किसी का वर्चस्व नहीं होना चाहिए बल्कि कोई भी समझौता ज्यादा समावेशी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि तुर्की कोई नया गुट नहीं बनाना चाहता. तुर्की के विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ का दिया हवाला तुर्की के विदेश मंत्री ने ये बातें गुरुवार को अल-जजीरा को दिए इंटरव्यू में कही. सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते और उसमें तुर्की की संभावित भागीदारी पर सवाल के जवाब में फिदान ने कहा, 'न तुर्की का, न अरब का, न फारसी का, न किसी और का वर्चस्व…किसी का वर्चस्व नहीं चाहिए. क्षेत्रीय देश जिम्मेदारी के साथ एक साथ आ रहे हैं. आप देखिए न कि कैसे यूरोपीय संघ ने जीरो से शुरू करके आज तक खुद को एकसाथ रखा है. हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं?' उन्होंने आगे कहा, 'हम कोई नया गुट नहीं बनाना चाहते. हम क्षेत्रीय एकजुटता का एक मंच बनाना चाहते हैं. ये समूह दो या तीन देशों से शुरू हो सकता लेकिन अगर समय के साथ यह बड़ा ढांचा बनता है तो अच्छा होगा.' उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा का जिम्मा बाहरी देशों के हाथों में नहीं सौंपना चाहिए. कहां तक बढ़ी डिफेंस पैक्ट में तुर्की के शामिल होने की बात सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बने रक्षा गठबंधन में तुर्की के शामिल होने को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी. ब्लूमबर्ग ने कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि इस मुद्दे पर तीनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है. गठबंधन में अगर तुर्की शामिल होता है तो यह ब्लॉक त्रिपक्षीय रूप ले सकता है. इससे पहले समूह में तुर्की के शामिल होने के लेकर पाकिस्तान ने टिप्पणी की थी. पाकिस्तान ने कहा था कि ब्लॉक में किसी भी तीसरे देश को शामिल करने का फैसला पाकिस्तान और सऊदी अरब, दोनों की आपसी सहमति से तय होगा.