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पार्टी बचाने की रणनीति! कुशवाहा का मास्टरस्ट्रोक, असंतुष्ट आलोक को सौंपी प्रदेश कमान

पटना पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में चल रही खटपट को दूर करने की कवायद की है। कुशवाहा ने दिनारा से विधायक आलोक सिंह को RLM का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। कुर्मी और कोइरी (लव-कुश) की राजनीति करने वाले कुशवाहा ने राजपूत समाज से आने वाले विधायक को बिहार में पार्टी की कमान सौंपी है। आलोक सिंह पूर्व में पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे। कुशवाहा ने इसके अलावा, दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए हैं। वहीं, अभी तक प्रदेश अध्यक्ष का प्रभार संभाल रहे मदन चौधरी को RLM के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई है। रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। दरअसल, बीते नवंबर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद से रालोमो में खटपट चल रही थी। उपेंद्र कुशवाहा द्वारा बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने से नाराज होकर कई पदाधिकारियों ने रालोमो छोड़ दी थी। इस्तीफों के सिलसिले के बीच कुशवाहा ने रालोमो की प्रदेश और जिला इकाइयों को भंग कर दिया था। रालोमो के 4 में से तीन विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो के कुशवाहा से नाराजगी की चर्चा भी खूब चली। रालोमो विधायकों की भाजपा से नजदीकी, फिर मनाने की कोशिश तीनों विधायकों ने पिछले दिनों पार्टी अध्यक्ष की लिट्टी पार्टी से किनारा किया था। इसके ठीक बाद उनके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की तस्वीर सामने आई। इसने रालोमो में टूट की आशंका को और बल दे दिया था। 16 जनवरी को हुई बैठक की तस्वीर हालांकि, बीते 16 जनवरी को कुशवाहा ने माधव आनंद और आलोक सिंह को अपने आवास पर बुलाया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में रालोमो चीफ ने दोनों विधायकों की नाराजगी दूर करने के प्रयास किए। लेकिन, इस बैठक में तीसरे विधायक रामेश्वर महतो नहीं नजर आए थे। पार्टी को टूट से बचाने के लिए अब उपेंद्र कुशवाहा ने संगठनात्मक बदलाव करने का फैसला लिया है। पूर्व में नाराज चल रहे तीन में से एक विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। इससे पहले मधुबनी विधायक माधव आनंद को विधानसभा में रालोमो का सचेतक बनाया गया था। कुशवाहा का जातिगत दांव! बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीति पिछड़ा वर्ग में आने वाली कुर्मी और कोइरी जाति पर केंद्रित रही है। इसे लव-कुश समीकरण कहा जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड की राजनीति भी इन्हीं जातियों पर केंद्रित रहती आई है। बिहार के सियासी गलियारे में लव-कुश को सत्ता के लिए मजबूत समीकरण माना जाता है। 2023 की जाति आधारित गणना के अनुसार बिहार में कुशवाहा यानी कोइरी जाति की आबादी लगभग 4.2 प्रतिशत है, जबकि कुर्मी जाति की 2.87 प्रतिशत आबादी है। सवर्ण वर्ग से आने वाले राजपूत नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने को कुशवाहा का पार्टी में जातिगत संतुलन कायम रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में राजूपत की आबादी 3.45 प्रतिशत है।  

एशिया में शक्ति संतुलन पर US की नजर, भारत-चीन को लेकर होगी खुली सुनवाई

वॉशिंगटन अमेरिका के फेडरल रजिस्टर नोटिस के अनुसार अमेरिकी कांग्रेस का एक एडवाइजरी पैनल अगले महीने सार्वजनिक सुनवाई करने वाला है। इसमें भारत के चीन और अमेरिका के साथ संबंधों और ये संबंध इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को कैसे आकार देते हैं, इसकी जांच की जाएगी। अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग ने कहा कि यह सुनवाई 17 फरवरी को वॉशिंगटन में होगी। सुनवाई का मुद्दा भारत, चीन और इंडो-पैसिफिक में शक्ति का संतुलन है। नोटिस के मुताबिक, सुनवाई में चीन-अमेरिका दोनों के साथ भारत के रिश्तों से जुड़े भूराजनीतिक और सैन्य मामलों की जांच की जाएगी। इनमें विवादित इलाके को लेकर तनाव, हिंद महासागर में समुद्री पहुंच और एक अहम इंडो-पैसिफिक ताकत के तौर पर भारत की भूमिका शामिल है। आयोग ने कहा कि इस सुनवाई में भारत-चीन संबंधों के आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसमें दो एशियाई ताकतों के बीच व्यापार और निवेश संबंध शामिल हैं। इसमें अहम और उभरते तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बनाने की भारत की कोशिशों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन शामिल हैं। ये ऐसे सेक्टर्स हैं, जो सभी वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा प्रतियोगिताओं के लिए केंद्र बन गए हैं। इसके अलावा, भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अमेरिका की नीतियों की कोशिशों की समीक्षा भी की जाएगी। आयोग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, वह देखेगा कि आने वाले सालों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए चीन के साथ भारत के रिश्ते का क्या मतलब है। इस सार्वजनिक सुनवाई की अध्यक्षता कमिश्नर हैल ब्रांड्स और जोनाथन एन स्टिवर्स मिलकर करेंगे। खासकर इंडो-पैसिफिक में भारत, अमेरिका के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार के तौर पर उभरा है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है और तकनीक और सप्लाई चेन में संबंध गहरे हुए हैं। अमेरिका की नीति बनाने वाले भारत के विकल्प और क्षमता को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मान रहे हैं। अमेरिकी संसद का भारत पर कितना ध्यान है, यह इस बात से जाहिर है कि आने वाली सुनवाई में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है। अमेरिकी संसद का ध्यान इन बातों पर भी है कि चीन और अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते इंडो-पैसिफिक में भविष्य के शक्ति संतुलन पर कैसे असर डाल सकते हैं।

टीम इंडिया का दबदबा बरकरार: फिल सॉल्ट ने माना—जीत के लिए भाग्य भी चाहिए

इंग्लैंड. इंग्लैंड के बल्लेबाज फिल सॉल्ट का मानना है कि मौजूदा फॉर्म को देखते हुए टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत को हराना बेहद मुश्किल चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम को हराने के लिए थोड़ी किस्मत की जरूरत होगी। अगस्त 2023 के बाद से भारतीय टीम ने टी20 इंटरनेशनल में दमदार प्रदर्शन किया है और आक्रमक खेल दिखाया है। पिछले विश्व कप के बाद से भारतीय टीम खेल के सबसे छोटे प्रारूप में सबसे सफल टीम रही है। भारत ने 63 मैच खेलते हुए 49 में जीत दर्ज की है और सिर्फ तीन गंवाए हैं। इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज फिल साल्ट ने कहा है कि भारत इस समय टी20 क्रिकेट में सबसे मजबूत टीम है और उन्हें हराने के लिए केवल कौशल ही काफी नहीं, किस्मत का भी साथ चाहिए। इंग्लैंड के स्टार ओपनर ने एक पॉडकास्ट और हालिया इंटरव्यू में कहा, ''मुझे लगता है कि उन्हें हराने के लिए सभी को थोड़ी किस्मत की जरूरत पड़ेगी। भारत इस समय टी20 विश्व कप में सबसे मजबूत टीम है। भारत के खिलाफ खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन अगर आप उन्हें हराना चाहते हैं, तो आपको हर चीज सही करनी होगी और फिर भी थोड़ी किस्मत चाहिए।'' भारत ग्रुप ए में है, जहां उसके मुकाबले नामीबिया, अमेरिका, नीदरलैंड्स और संभावित रूप से स्कॉटलैंड या अन्य टीमों से होंगे। इंग्लैंड ग्रुप B में है और भारत से सेमीफाइनल या फाइनल में टकराव की संभावना है। टी20 विश्व कप में भारत का पहला मैच सात फरवरी को अमेरिका से है। फिल सॉल्ट ने भारत के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की भी तारीफ की है। उन्होंने कहा, ''सच तो यह है कि वह पहली ही गेंद पर उस तरह से छक्का जड़ सकता है, जिस तरह से वह पिच पर दौड़कर आता है, जिस तरह वह ऑफ-साइड के ऊपर से मारने के लिए सीधी गेंदों का मुकाबला करता है, और फिर अपने से दूर आती गेंदों को भी लेग-साइड के ऊपर से मार देता है यह पूरी तरह से अलग है। मैं कभी उसके जैसा नहीं बन पाऊंगा और वह कभी मेरे जैसा नहीं बनेगा। लेकिन मुझे उसे बल्लेबाजी करते हुए देखना बहुत पसंद है।''

PM मोदी पर ‘वशीकरण’ वाली बात से सियासत गरम, परमहंस आचार्य के बयान ने मचाई हलचल

नई दिल्ली देश में यूजीसी रूल्स को लेकर बड़ा विवाद था और इस मामले पर गुरुवार को उस वक्त विराम लग गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। इसके साथ ही अदालत ने नियमों को नए सिरे से तैयार करने और उसके लिए एक कमेटी के गठन का आदेश सरकार एवं यूजीसी को दिया है। इस बीच इसे लेकर अयोध्या के परमहंस आचार्य ने बड़ा रोचक दावा किया है, जो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। आचार्य ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी पर तंत्र-मंत्र कराए थे और उसके असर के चलते ही वह वशीकरण का शिकार हो गए थे। इसी वशीकरण के चलते यूजीसी ने ऐसा नियम बनाया था, लेकिन अब हमने वैदिक मंत्रों से उन्हें मुक्त करा लिया है। मीडिया से बात करते हुए परमहंस आचार्य ने कहा, 'हमें लगा कि आखिर ऐसा कैसे हो गया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि उनके बढ़ते हुए प्रभाव को देखते हुए जरूर दुनिया ने तंत्र-मंत्र कराकर वशीकरण किया है। इसके बाद जब मैंने ध्यान लगाया तो पता लगा कि डोनाल्ड ट्रंप ने तंत्र-मंत्र कराकर वशीकरण किया था। अब हमने यहां वैदिक मंत्रों का पाठ किया है और अब मोदी जी पर किसी भी तंत्र-मंत्र या वशीकरण का असर नहीं पड़ेगा। अब हम उम्मीद करते हैं कि नरेंद्र मोदी जी ऐसा कोई कानून ना बनाएं, जिससे देश का विकास रुक जाए। उनसे देश को बहुत ज्यादा अपेक्षाएं हैं।' उन्होंने कहा कि फिर से ऐसा कुछ ना हो, इसकी मैं आशा करता हूं। हम लोग अयोध्या से उनकी कुशलता के लिए पूजा पाठ आदि करते रहेंगे। बता दें कि यूजीसी रूल्स को लेकर परमहंस आचार्य भी बेहद आक्रामक थे और सरकार पर हमले कर रहे थे। उन्होंने इन नियमों का विरोध करते हुए कहा था कि या तो इन्हें वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए। UGC रूल्स पर भड़के थे आचार्य परमहंस, मांगी थी इच्छामृत्यु आचार्य का कहना था कि इससे देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। हिंदू इससे बंटेगा भी और कटेगा भी। ऐसे नियम के चलते भाजपा पूरे देश से समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा था कि मैं नहीं चाहता कि भाजपा हमारे सामने ही देश से खत्म हो जाए। इसलिए ऐसा देखने से पहले ही मैं मर जाना चाहता हूं और पीएम मोदी से मैं इच्छामृत्यु की मांग करता हूं। यूजीसी के इस नए नियम से पूरा देश जलेगा और लोग आपस में लड़ेंगे। उनका कहना था कि हमारी बहन-बेटियों का बलात्कार होगा। परमहंस आचार्य ने कहा कि यदि यह नियम पहले आया होता तो बिहार में भी आप 1000 फीसदी चुनाव हार गए होते। यदि आप इस नियम को वापस नहीं लेंगे तो मैं मर जाऊंगा।  

अलगाववाद का दांव उल्टा पड़ा? खालिस्तान पर नरमी अब कनाडा के लिए बन रही सिरदर्द

ओटावा कनाडा-अमेरिका तनाव के बीच यह कहना गलत नहीं होगा कि नियति का पहिया घूमकर वापस वहीं आ गया है। जिस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की आड़ में कनाडा भारत के अलगाववादी तत्वों (खालिस्तान समर्थकों) को पनाह देता रहा है आज वही तर्क उसके अपने सबसे महत्वपूर्ण प्रांत अल्बर्टा के अलगाववादी दे रहे हैं। भारत अक्सर कहता रहा है कि अलगाववाद को हवा देना एक दोधारी तलवार है। दरअसल कनाडा का तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा देश से अलग होने की मांग कर रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व 'अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट' (APP) नामक समूह कर रहा है। अब इस आग में घी डालने का काम किया है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने।   विवाद की मुख्य वजह- बागियों के साथ गुप्त बैठकें और अरबों का कर्ज सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट के नेताओं ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। इसके प्रतिनिधियों ने पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी विदेश विभाग के साथ कम से कम तीन बैठकें की हैं। फरवरी 2026 में एक और महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें अमेरिकी वित्त विभाग के शामिल होने की खबर है। अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर की ऋण सुविधा मांगी है ताकि आजादी के पहले दिन से ही अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके। कनाडा के लिए क्या है अल्बर्टा का महत्व? अल्बर्टा कनाडा का सबसे अमीर प्रांत है और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कनाडा के कुल प्रमाणित तेल भंडार का 90% और वर्तमान उत्पादन का 80% हिस्सा इसी प्रांत से आता है। अलगाववादी समूह का तर्क है कि वे केंद्र सरकार की ऊर्जा नीतियों और भारी टैक्स से परेशान हैं। वे ब्रिटिश कोलंबिया और ओटावा की मंजूरी के बिना अमेरिका के माध्यम से नए पाइपलाइन रास्ते बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं। क्या रही अब तक की कूटनीतिक प्रतिक्रिया? इस खबर के बाहर आते ही कनाडा के भीतर गुस्से की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी हर बातचीत में इस बात को मजबूती से रखते हैं। हालांकि, उन्होंने इन बैठकों को सीधे तौर पर राजद्रोह कहने से परहेज किया, ताकि तनाव और न बढ़े। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर (मुख्यमंत्री) डेविड ईबी ने इसे राजद्रोह करार दिया है। ओंटारियो के सीएम डग फोर्ड ने इसे अनैतिक बताते हुए अल्बर्टा की वर्तमान प्रीमियर डेनियल स्मिथ से इस आंदोलन की निंदा करने को कहा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इसे सामान्य मुलाकात बताया है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा अल्बर्टा को एक स्वाभाविक भागीदार कहना ओटावा के लिए चिंता का विषय बन गया है। अमेरिका में 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' यानी ट्रंप समर्थक इस स्थिति का मजा ले रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स तो मजाक में कनाडा के प्रांतों के अमेरिका में विलय की खुलकर बात कर रहे हैं। कनाडा के प्रमुख अखबारों में क्या लिखा? अखबारों ने इसे कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक वेक-अप कॉल बताया है। द ग्लोब एंड मेल के संपादकीय में तर्क दिया गया है कि विदेशी ताकतों (विशेषकर अमेरिका के MAGA गुट) का समर्थन अलगाववाद की आग में घी डालने जैसा है। ओटावा को अल्बर्टा की वास्तविक आर्थिक शिकायतों को दूर करना होगा, वरना बाहरी हस्तक्षेप की गुंजाइश बनी रहेगी। नेशनल पोस्ट अखबार का झुकाव अक्सर कंजर्वेटिव विचारों की ओर रहता है, लेकिन इसने भी विदेशी सहायता मांगने की निंदा की है। इसने $500 बिलियन की क्रेडिट लाइन की मांग को हास्यास्पद और अवास्तविक बताया गया है। अखबार के मुताबिक, अल्बर्टा का मुद्दा पूरी तरह से घरेलू है और इसमें वाशिंगटन को शामिल करना कनाडा के संघीय ढांचे के साथ खिलवाड़ है। दूसरों के मामलों में डबल स्टैंडर्ड अपनाता रहा है कनाडा कनाडा ने हमेशा भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों को सिख डायस्पोरा की चिंता बताकर नजरअंदाज किया। लेकिन जब बात अल्बर्टा की आई, तो ओटावा की भाषा रातों-रात बदल गई। भारत जब कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर चिंता जताता था, तो ओटावा इसे 'घरेलू राजनीति' कहता था। लेकिन अब जब अल्बर्टा के नेता अमेरिका जाकर मदद मांग रहे हैं, तो कनाडा के नेता इसे राजद्रोह और विदेशी हस्तक्षेप करार दे रहे हैं। खालिस्तानी उग्रवाद पर नरम रहने वाले कनाडाई राजनेता अब अल्बर्टा के अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट को देश की एकता के लिए खतरा बता रहे हैं। जिस तरह खालिस्तानी समर्थक कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करते हैं, वैसे ही अल्बर्टा के अलगाववादी अब अमेरिकी धरती का इस्तेमाल कनाडा के खिलाफ वित्तीय सहायता और मान्यता प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं। अल्बर्टा का अलग होना कनाडा के लिए आर्थिक आत्महत्या जैसा होगा, क्योंकि कनाडा की तेल संपदा का केंद्र यही प्रांत है। 

PAK पीएम के जश्न पर आकाश चोपड़ा का ट्रोल अटैक, पाकिस्तानी फैंस भी नहीं बचेंगे

नई दिल्ली पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर तीन मैच की टी20 सीरीज का शानदार आगाज किया। लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए पहले मुकाबले में सलमान आगा की टीम ने 20 रनों से जीत दर्ज की। पाकिस्तान की इस जीत पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद सोशल मीडिया पर टीम के साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया मोहसिन नकवी की तारीफ की। हालांकि पाकिस्तान के पीएम को उनके इस पोस्ट की वजह से ट्रोल होना पड़ा। सोशल मीडिया पर फैंस ने उनकी खूब टांग खींची, इनमें भारत के पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा भी शामिल थे।   पाकिस्तान की जीत पर इतरा रहे थे PM शहबाज शरीफ शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की ऑस्ट्रेलिया पर पहले टी20 में जीत के बाद X पर लिखा, ‘पहले T20I में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार परफॉर्मेंस के लिए टीम पाकिस्तान को बहुत बढ़िया। मैं PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी और उनकी पूरी टीम की भी तारीफ करता हूं, जिन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट को मजबूत बनाने के लिए अथक प्रयास किए। यह देश के लिए गर्व का पल है।’ आकाश चोपड़ा ने दिखाया आईना आकाश चोपड़ा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को आईना दिखाते हुए कहा कि बाइलेटरल सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की बी टीम को 20 रनों से हराना कोई जबरदस्त काम नहीं है। आकाश चोपड़ा ने लिखा, 'पूरी इज्जत के साथ… यह ऑस्ट्रेलिया की B टीम के खिलाफ एक बाइलेटरल T20I मैच है। कई मेन खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया है। और 170 रन के गेम में 20 रन की जीत को 'जबरदस्त' तो नहीं कहा जा सकता।' कैसा रहा PAK vs AUS पहला टी20? टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी पाकिस्तान की टीम ने 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 168 रन बोर्ड पर लगाए। इस दौरान एक भी बल्लेबाज अर्धशतक नहीं लगा पाया। सैम अयूब 40 रनों के साथ टीम के हाईएस्ट स्कोरर रहे, वहीं कप्तान सलमान आगा ने 39 रनों की पारी खेली। इस स्कोर का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया 8 विकेट के नुकसान पर 146 रन ही बना पाया। सैम अयूब ने गेंदबाजी में भी 2 विकेट चटकाए। उन्हें इस ऑलराउंड परफॉर्मेंस के लिए प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया।  

मजाक बना मौत की वजह? पति के एक शब्द से टूटी मॉडल, फांसी लगाकर दी जान

लखनऊ राजधानी लखनऊ के सहादतगंज थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है। यहां मॉडलिंग का प्रशिक्षण ले रही एक 23 वर्षीय युवती ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। शुरुआती जांच में जो वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच चल रहे हंसी-मजाक के दौरान पति ने पत्नी को 'बंदरिया' कह दिया, जिससे वह इस कदर आहत हुई कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।   चार साल पहले हुआ था प्रेम विवाह सहादतगंज के लकड़मंडी इलाके की रहने वाली 23 वर्षीय तनु सिंह ने करीब चार साल पहले इंदिरानगर (तकरोही) निवासी राहुल श्रीवास्तव के साथ प्रेम विवाह किया था। राहुल पेशे से ऑटो चालक है, जबकि तनु अपनी खूबसूरती और प्रतिभा के दम पर ग्लैमर की दुनिया में पहचान बनाने के लिए मॉडलिंग का कोर्स कर रही थी। परिजनों के मुताबिक, दोनों के बीच प्रेम था, लेकिन एक छोटी सी घटना ने सब कुछ खत्म कर दिया। मजाक बना मौत का कारण दोपहर करीब 1:30 बजे घर के माहौल में हंसी-खुशी का आलम था। राहुल और तनु के साथ तनु की बड़ी बहन और उसका बेटा भी कमरे में मौजूद थे। सभी लोग आपस में ठिठोली कर रहे थे। इसी बीच राहुल ने मजाक-मजाक में तनु को 'बंदरिया' कह दिया। मॉडलिंग की छात्रा होने के नाते तनु अपने लुक्स को लेकर काफी संवेदनशील थी। पति के इस कमेंट को उसने दिल पर ले लिया और नाराज होकर दूसरे कमरे में चली गई। रोशनदान से लटका मिला शव तनु ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उस वक्त राहुल को लगा कि वह मामूली नाराजगी है, जो थोड़ी देर में दूर हो जाएगी। वह खाना लेने के लिए घर से बाहर चला गया। करीब आधे घंटे बाद जब राहुल वापस लौटा और तनु का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। अनहोनी की आशंका होने पर उसने खिड़की से झांककर देखा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। तनु रोशनदान के सहारे कपड़े के फंदे पर लटकी हुई थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित परिजनों ने आनन-फानन में दरवाजा तोड़कर तनु को नीचे उतारा और उसे लेकर सीधे डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान दौड़े। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की सूचना पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस की जांच जारी सहादतगंज पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है जो आपसी तकरार और मानसिक संताप के कारण हुआ है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों के बीच पहले से भी कोई विवाद चल रहा था या यह घटना केवल उस वक्त के मजाक का ही परिणाम थी। एक होनहार युवती की इस तरह मौत से इलाके के लोग भी स्तब्ध हैं।  

राज्य मंत्री गौर बोली पिछड़ा वर्ग की कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

भोपाल. आज हम सब यहां एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण अवसर पर एकत्रित हुए हैं। आज पिछड़ा वर्ग महापंचायत का स्थापना दिवस है। यह न केवल एक संगठन की स्थापना का दिन है, बल्कि हमारे सामूहिक संकल्प एकता और संघर्ष की विजय का भी प्रतीक है। यह बात पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) कृष्णा गौर ने हिंदी भवन भोपाल में आयोजित पिछड़ा वर्ग महापंचायत के स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह में कहीं।  राज्यमंत्री गौर ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए उसका संगठित होना अनिवार्य है। महापंचायत ने पिछले वर्षों में पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा और उनकी आवाज को सरकार तक पहुंचने में सेतु का कार्य किया है। हाल ही में कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए 'विदेश रोजगार योजना 2025' को मंजूरी दी है, जिसके तहत हर साल 600 युवाओं को विदेशी बाजारों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।  उन्होंने कहा कि हमारी सरकार पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है । इस डेढ़ वर्ष में ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश के पिछड़े वर्गों के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने लिए हैं। मुख्यमंत्री जी का सबसे बड़ा फोकस पिछड़ा वर्ग के बच्चों को शिक्षित करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और आर्थिक मदद करना है और इस दृष्टि से लगातार ओबीसी के बच्चों को छात्रवृत्ति देने का  काम सरकार कर रही है। इस कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री चिंतामणि राठौर, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष श्याम ट्रेलर, पवन पाटीदार सहित सभी जिलों के पदाधिकारीगण मौजूद रहे।

पैक्स कम्प्यूटराईजेशन में देश में प्रथम स्थान हेतु नाबार्ड द्वारा अपेक्स बैंक पुरस्कृत

भोपाल.  राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) मध्यप्रदेश द्वारा आज मिन्टो हॉल में राज्य ऋण संगोष्ठी – स्टेट फोकस 2026-27 हेतु आयोजित कार्यक्रम में म.प्र.शासन के माननीय सहकारिता तथा खेल व युवा कल्याण मंत्री   विश्वास कैलाश सारंग, कृषि मंत्री   एंदल सिंह कंसाना, नाबार्ड, म.प्र. की मुख्य महाप्रबंधक  मती सी.सरस्वती एवं भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय संचालक  मती रेखा चंदानवेली द्वारा अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक   मनोज गुप्ता को मध्यप्रदेश की सभी पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) के कम्प्यूटराईजेशन कराने हेतु पुरस्कृत किया गया । उल्लेखनीय है कि पैक्स कम्प्यूटराइजेशन योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। प्रबंध संचालक ने इस उपलब्धि के लिए माननीय मुख्यमंत्री, माननीय सहकारिता मंत्री, प्रमुख सचिव सहकारिता एवं आयुक्त सहकारिता के मार्गदर्शन हेतु आभार व्यक्त किया। साथ की सफल क्रियान्वयन के लिए बैंक के   केटी सज्जन, डीजीएम एवं आई टी हेड अरविंद बौद्ध, ओएसडी को शील्ड सौंपकर बधाई दी। इसी प्रकार जिला सहकारी बैंक शिवपुरी एवं सतना के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को टर्न अराउण्ड प्लान के बेहतर क्रियान्वयन एवं अच्छे प्रदर्शन हेतु तथा जिला सहकारी बैंक मंदसौर व बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अंकेक्षण में उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिये भी पुरूस्कृत किया गया।  

सदन में हंगामा पड़ा भारी, स्पीकर ओम बिरला का अल्टीमेटम— बात करनी है तो बाहर जाएं

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में बातचीत कर रहे कुछ सदस्यों को टोकते हुए कहा कि उन्हें यदि लंबी वार्ता करनी है तो सदन से बाहर जाकर करनी चाहिए। प्रश्नकाल के दौरान बिरला ने कहा कि वह देख रहे हैं कि कुछ सदस्य लगातार एक दूसरे से बातचीत कर रहे हैं और व्यवधान पैदा कर रहे हैं। पीटीआई भाषा के अनुसार, उन्होंने कहा, 'इस तरह का व्यवहार सदन की मर्यादा और गरिमा के विरुद्ध है। जो सदस्य लंबी बातचीत करना चाहते हैं वह लोकसभा कक्ष से बाहर जाकर बातचीत कर सकते हैं।' अध्यक्ष ने कहा कि सदन में संक्षिप्त बातचीत तो की जा सकती है, लेकिन लंबी-लंबी वार्ताओं की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से वह बातचीत करने वाले सदस्यों के नाम आसन से पुकारेंगे। बिरला ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम पुकारते हुए कहा कि वह अपने साथी सांसदों से बातचीत नहीं करें। इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने पर बिरला ने यह भी कहा कि अब से वह प्रयास करेंगे कि सदन में प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 प्रश्न पूछे जा सकें। जब कुछ सदस्यों ने पूरक प्रश्न पूछने की मांग की तो बिरला ने कहा कि इस तरह वह सभी सदस्यों को पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति देंगे तो जिन सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हैं, उनके साथ अन्याय होगा। प्रश्नकाल के बाद बिरला ने इस बात का उल्लेख किया कि सदस्यों को आर्थिक समीक्षा की डिजिटल प्रति उनके व्हाट्एसप पर भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से कई परिवर्तन किए गए हैं जो आने वाले समय में नजर आएंगे। जेब में हाथ डालकर बात करने पर भी भड़के बिरला ने जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके को जेब में हाथ डालकर बोलने पर टोका को सांसद कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल को साथी सांसदों से बात करने से भी रोका। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जब एक सवाल का जबाब देने के लिए जनजातीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके खड़े हुए तो वह जेब में हाथ डाले हुए थे। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि मंत्रीजी जेब में हाथ डालकर मत बोलिए। मंत्री ने इसे स्वीकार किया और जेब से हाथ निकाल कर अपना जबाब पूरा किया।