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पाकिस्तान से हार का ग़म नहीं! मिचेल मार्श बोले– असली टारगेट टी20 विश्व कप ट्रॉफी

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के कप्तान मिचेल मार्श को पाकिस्तान के भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच का बहिष्कार करने और बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के बारे में सवालों का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इन दोनों मसलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका पूरा ध्यान इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने पर है। मार्श सोमवार रात को लाहौर में मेजबान टीम के हाथों टी20 श्रृंखला में 0-3 से मिली हार के बाद पाकिस्तान के मीडिया से रूबरू थे। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान से टीम के प्रदर्शन के अलावा मैदान से बाहर चल रही गतिविधियों के बारे में भी सवाल पूछे गए जिनके कारण भारत और श्रीलंका में सात फरवरी से शुरू होने वाले टी20 विश्व कप को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मार्श से जब 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के खिलाफ होने वाले मैच का पाकिस्तान द्वारा बहिष्कार करने के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘इस समय मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हम विश्व कप में सिर्फ अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने जा रहे हैं। बाकी चीजें अपने आप सुलझ जाएंगी।’ पत्रकारों ने उनसे बांग्लादेश को 'सुरक्षा चिंताओं' के कारण भारत आने से इनकार करने पर प्रतियोगिता से बाहर किए जाने के बारे में भी सवाल पूछा गया जिस पर उनकी प्रतिक्रिया पहले जैसी ही थी। उन्होंने कहा, ‘मेरी पिछली प्रतिक्रिया भी यही थी। हम विश्व कप जीतने की कोशिश करने जा रहे हैं और हमारा पूरा ध्यान इसी पर केंद्रित है। ऑस्ट्रेलियाई टीम के रूप में हमें वहां के लोगों पर भरोसा है कि वे हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। मैं बस इतना ही कहूंगा।’ ऑस्ट्रेलिया विश्व कप के शुरुआती चरण के दौरान श्रीलंका में रहेगा। वह इस दौरान श्रीलंका, आयरलैंड, जिम्बाब्वे और ओमान का सामना करेगा। मार्श ने पाकिस्तान के खिलाफ मिली हार और स्पिनरों के सामने हुई परेशानी को बहुत अधिक तवज्जो नहीं दी। ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज मोहम्मद नवाज, शादाब खान और अबरार अहमद की स्पिन तिकड़ी के सामने बगलें झांकते हुए नजर आए, जिन्होंने मिलकर 17 विकेट लिए। मार्श ने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि इस श्रृंखला में हमने संघर्ष किया, लेकिन पिछले 18 महीनों में हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक रहे हैं और हमने स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है। हम यहां मिले अनुभव का विश्व कप में फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। हम जानते हैं कि इस तरह की परिस्थितियों में हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम है और इसलिए हम विश्व कप को लेकर बेहद उत्साहित हैं।’

एसीएस उच्‍च शिक्षा राजन गोवा की समिट में हुए शामिल

भोपाल. गोवा में आयोजित क्यूएस इंडिया समिट-2026 में मध्यप्रदेश ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को मजबूती से रखा। अपर मुख्य सचिव (एसीएस), उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने इस समिट न्यूजीलैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के डेलीगेट्स से वन-टू-वन संवाद कर शोध, नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक सहयोग पर सार्थक चर्चा की। एसीएस राजन ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मध्यप्रदेश को उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान-प्रदान बेहद आवश्यक हैं। समिट में सस्टेनेबिलिटी, रिसर्च-ओरिएंटेड लर्निंग और नवोन्मेषी शिक्षण पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया। वर्ष 1873 में स्थापित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी न्यूजीलैंड की अग्रणी रिसर्च यूनिवर्सिटी है। यह विश्व की शीर्ष 300 यूनिवर्सिटियों में शामिल है। कला, वाणिज्य, कानून, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विषयों में इसकी वैश्विक पहचान है। तीन दिवसीय क्यूएस इंडिया समिट-2026 में एसीएस राजन की सक्रिय सहभागिता से मध्यप्रदेश ने फॉरेन यूनिवर्सिटीस के साथ सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण को लेकर अपनी ठोस रणनीति प्रस्तुत की। यह पहल प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। समिट में आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, विशेष कर्तव्‍यस्‍थ अधिकारी डॉ. सुनील सिंह, राकेशवास्तव, मनोज अग्निहोत्री सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। 

रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि: डीआरडीओ ने विकसित की नई एयर-टू-एयर मिसाइल

नई दिल्ली डीआरडीओ ने एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है। ओडिशा के तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। इस तकनीक की मदद से अब देश लंबी दूरी की एयर-टू-एयर में मार करने वाली मिसाइलें विकसित कर सकेगा, जिससे दुश्मनों पर रणनीतिक बढ़त मिलेगी। इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। डीआरडीओ के अनुसार, यह महत्वपूर्ण परीक्षण मंगलवार सुबह 10.45 बजे हुआ। परीक्षण के दौरान मिसाइल को पहले जमीन से लगाए गए बूस्टर की मदद से तेज रफ्तार दी गई। इसके बाद उसके सभी अहम हिस्सों ने बिल्कुल उम्मीद के मुताबिक काम किया। इसमें बिना नोजल वाला बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम शामिल थे। पूरी उड़ान के दौरान मिले आंकड़ों से यह साफ हुआ कि सिस्टम ने सही तरीके से काम किया। इस परीक्षण पर बंगाल की खाड़ी के किनारे तैनात कई आधुनिक उपकरणों से लगातार नजर रखी गई। इस लॉन्च को डीआरडीओ की अलग-अलग प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने देखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता के लिए डीआरडीओ और इससे जुड़े उद्योगों की तारीफ की। वहीं, डीआरडीओ प्रमुख और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने भी पूरी टीम को इस सफल उड़ान परीक्षण के लिए बधाई दी। यह परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है। बता दें कि इससे पहले इसी माह हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की चुका थी। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) की सहायता से हासिल की गई थी। यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम माना जा रहा है। डीआरडीएल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की हैदराबाद स्थित अग्रणी प्रयोगशाला है। इस सफल परीक्षण ने भारत को उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं की वैश्विक अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया था। यह महत्वपूर्ण परीक्षण 9 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसने स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन प्रदर्शित किया। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक, अर्थात 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती है।

राजस्थान विधानसभा में उठा सीमावर्ती जर्जर सड़कों का ‘मुद्दा’

जयपुर. राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सरहदी जिले बाड़मेर की सड़कों की खस्ताहाली का मुद्दा छाया रहा। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर जिले, विशेषकर अपने विधानसभा क्षेत्र शिव की सड़कों की मरम्मत और निर्माण को लेकर राज्य सरकार को घेरा। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य करवा रही है और बाड़मेर की सड़कों का विशेष परीक्षण करवाया जाएगा। वर्तमान स्थिति पर माँगा जवाब विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर की ग्रामीण सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि आखिर कब तक सीमावर्ती क्षेत्र के लोग गड्ढों भरी सड़कों पर चलने को मजबूर रहेंगे? भाटी ने बाड़मेर जिले में सड़कों की मरम्मत के लिए प्रस्तावित कार्यों और उनकी वर्तमान स्थिति पर जवाब माँगा। '17 में से 7 कार्य पूरे, बाकी प्रगति पर' विधायक भाटी के सवाल का लिखित और मौखिक जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बाड़मेर की सड़कों का पूरा कच्चा चिट्ठा सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रति विधानसभा क्षेत्र 15 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के कार्य स्वीकृत किए गए थे। बाड़मेर में कुल 17 सड़कों के कार्य प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से 7 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। शेष कार्य वर्तमान में प्रगति पर हैं और उन्हें समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बाड़मेर की सड़कों का होगा नया 'परीक्षण' रविंद्र सिंह भाटी ने जब अधूरी सड़कों और खराब गुणवत्ता का मुद्दा उठाया, तो उपमुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भाटी द्वारा उठाए गए मुद्दों का विभाग द्वारा परीक्षण (Verification) करवाया जाएगा। दिया कुमारी ने स्पष्ट किया कि जहाँ भी सड़क निर्माण की तकनीकी आवश्यकता होगी और जहाँ परीक्षण में सड़कें बदहाल पाई जाएंगी, वहां सरकार प्राथमिकता से बजट आवंटित कर नई सड़कें बनाएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष विजन सदन में दिया कुमारी ने यह भी संकेत दिया कि पश्चिमी राजस्थान और सीमावर्ती जिले जैसे बाड़मेर और जैसलमेर, सरकार की 'विकसित राजस्थान' रणनीति का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से सड़कों का मजबूत होना अनिवार्य है। जहाँ सड़कें टूटी हैं, उन्हें सुधारने के लिए भी विभाग कार्ययोजना बना रहा है। 'युवा जोश' और 'अनुभव' की जुगलबंदी ! सदन में रविंद्र सिंह भाटी के सवाल पूछने के अंदाज और दिया कुमारी के धैर्यपूर्ण जवाब ने सभी का ध्यान खींचा। जहाँ एक ओर युवा विधायक अपने क्षेत्र की जनता की आवाज बन रहे थे, वहीं उपमुख्यमंत्री सरकार की ओर से विकास का रोडमैप रख रही थीं। दिया कुमारी ने आश्वस्त किया कि विकास कार्यों में किसी भी विधायक के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और बाड़मेर की सड़कों की सूरत जल्द बदली जाएगी।

राजनीतिक बदलाव: मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी युमनाम खेमचंद सिंह को

इंफाल. मणिपुर विधायक दल की बैठक में भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही खेमचंद के मणिपुर के नए सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है। मणिपुर में इस महीने 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म हो रहा था। इससे पहले राज्य में भाजपा ने नए मुख्यमंत्री चुनने की कवायद तेज कर दी थी। केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ ने पटका पहनाकर युमनाम खेमचंद का स्वागत किया। इस मौके पर मणिपुर स्टेट प्रेसिडेंट और नॉर्थ ईस्ट के इंचार्ज संबित पात्रा मौके पर मौजूद थे। मणिपुर में नई सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी के विधायक सोमवार को दिल्ली पहुंच गए थे। मणिपुर में पिछले साल 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है, जो पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा के बीच लागू हुआ था। बीरेन सिंह के राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के चार दिन बाद, पिछले साल 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। बता दें कि 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, को निलंबित रखा गया था। इस बीच नई सरकार के गठन की कवायद में भाजपा संसदीय बोर्ड ने मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया। इससे पहले, पिछले साल 14 दिसंबर को, मणिपुर भाजपा विधायक दल ने नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में शांति प्रक्रिया और हिंसाग्रस्त राज्य से संबंधित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और राज्य विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रता सिंह सहित 34 से अधिक भाजपा विधायकों के साथ-साथ बीएल संतोष, संबित पात्रा और मणिपुर भाजपा अध्यक्ष शारदा देवी भी उपस्थित थीं

स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अभियान में शामिल करने के दिए निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति और कार्ययोजना की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्टेट टास्क फ़ोर्स की बैठक में निर्देश दिए कि सभी विभाग अंतर्विभागीय समन्वय और जागरूकता से फायलेरिया को जड़ से ख़त्म करने हेतु अपने दायित्वों का निर्वहन करें। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल कर आमजन को दवाओं के सेवन के प्रति जागरूक करने में सहयोग लें। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न विभाग मैदानी अमलों से 10 फ़रवरी से प्रारंभ हो रहे मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) जमीनी कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण सुनिश्चित करें साथ ही अभियान में आम जन की सहभागिता सुनिश्चित करें। बैठक में स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, जनसंपर्क, वन, नगरीय निकाय, महिला एवं बाल विकास और आवास सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। नागरिक वितरित दवाओं का अवश्य करें सेवन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्टेट टास्क फ़ोर्स की बैठक में वर्तमान में प्रदेश में लिम्फेटिक फायलेरियासिस बीमारी की स्थिति, मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एम.डी.ए) चक्र-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक्शन प्लान और फायलेरिया उन्मूलन गतिविधियों के संचालन हेतु अन्य विभागों से अपेक्षायें एवं सहयोग के विषयों की वृहद् समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर से प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि एमडीए अभियान में वितरित दवाओं का अवश्य सेवन करें। फायलेरिया के उन्मूलन में सहयोग करें। मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि एमडीए 2026 में मध्यप्रदेश के 8 जिलों छतरपुर, पन्ना, उमरिया, मउगंज, टीकमगढ़, निवाड़ी, शहडोल और भिंड के 12 ब्लॉक में एम.डी.ए अभियान का संचालन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एमडीए 2025 में मध्य प्रदेश के 9 जिलों के 23 ब्लॉक में एमडीए का क्रियान्वयन किया गया था। एमडीए 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की योजना प्रदेश में 10 फरवरी से 8 जिलों के 12 चिन्हित विकासखण्डों में प्रशिक्षित दवा सेवकों के माध्यम से बूथ डे एवं घर-घर भ्रमण के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन समस्त पात्र हितग्राहियों को कराया जाएगा। एमडीए के सघन और सफल क्रियान्वयन करने हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 दिन का माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसके तहत 4 दिन बूथ स्तर पर, 7 दिन घर-घर अभियान और 4 दिन में शेष रह गई जनता के लिए मॉप-अप गतिविधि की जायेंगी। शत-प्रतिशत दवा सेवन के लिए उच्च/वर्तमान संचरण क्षेत्रों में आमजन को जागरूक और प्रेरित किया जाएगा। विभिन्न विभागों से ज़मीनी सहयोग प्राप्त करने के लिए विभागवार अपेक्षाओं को कार्ययोजना में शामिल किया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त धनराजु एस, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। फायलेरिया लक्षण और बचाव फायलेरिया संक्रमित मच्छर (क्यूलेक्स) के द्वारा फैलने वाली बीमारी है। यह बीमारी एक धागे के समान कृमि वुचरेरिया बेनक्रफ्टाई से होती है। प्रदेश में फायलेरिया बीमारी संक्रमण हेतु क्यूलेक्स क्वींक्वीफेसियेटस प्रमुख वाहक मच्छर है। यह मच्छर सामान्यतः गंदे एवं रूके हुए पानी में प्रजनन करता है। फायलेरिया बीमारी के प्रमुख लक्षण प्रारंभिक अवस्था में लगातार बुखार, प्रभावित अंगों (पैरों/हाथ/अण्डकोष/स्तन) में दर्द एवं सूजन है, जो कि धीरे-धीरे हाथी पांव के समान हो जाती है। संक्रमण के 8 से 10 वर्षों के बाद भी उपरोक्त लक्षण प्रकट हो सकते है। राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन हेतु मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए), मोर्बिडिटी मैनेजमेंट ऐंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) गतिविधियाँ की जा रही हैं। एमडीए में प्रत्येक वर्ष में 1 बार 2 साल से अधिक उम्र (2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर) के जनसमुदाय को निर्धारित मात्रा में डी.ई.सी (डाय इथाईल कार्बामैज़ीन) एवं एल्बेण्डाजोल दवा का सेवन कराया जाता है। खाली पेट दवा का सेवन नहीं कराया जाना है। नवीन नीति अनुसार चिन्हित जिलों में इन दो दवाओं के साथ आईवरमेक्टिन दवा का भी उपयोग किया जा रहा है जिसे आईडीए का नाम दिया गया है।  

नरवणे की जान को जोखिम? संजय राउत के बयान से मचा सियासी हड़कंप

नई दिल्ली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के नेता संजय राउत अपने आक्रामक अंदाज के लिए चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने एक और चौंकाने वाला बयान देते हुए पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा को ही खतरा होने की बात कह दी है। संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी ने संसद में पूर्व आर्मी चीफ का हवाला देकर बात की और सरकार ने उन्हें रोक दिया। वह सही नहीं था। इस घटनाक्रम के चलते मुझे नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक ऐसा मुद्दा लाने की कोशिश की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है।   संजय राउत ने कहा कि जब देश पर संकट आता है या पड़ोसी मुल्क हमला करने की तैयारी में भारत की सीमा पर पहुंचता है तो उस वक्त राजनीतिक नेतृत्व को निर्णय लेना चाहिए। जनरल नरवणे बार-बार कोशिश कर रहे थे कि हमें आदेश दीजिए। उनका पूछना था कि चीन के इस अतिक्रमण के जवाब में हमें आदेश दीजिए। लेकिन 56 इंच का सीना रखने वाले भाग गए। उन्होंने कहा कि अब मुझे मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उनके साथ क्या होगा, यह मैं कह नहीं सकता। उनकी सिक्योरिटी बढ़ जानी चाहिए। इससे पहले ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। इसलिए सुरक्षा दी जानी जरूरी है। संजय राउत का सवाल- आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था उन्होंने कहा कि आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था। उन्होंने भी तो सीमा की सुरक्षा का मसला उठाया था। दरअसल सोमवार को लोकसभा में उस वक्त काफी हंगामा हुआ था, जब मनोज मुकुंद नरवणे की गैर-प्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी बोलने लगे थे। उन्होंने डोकलाम में भारतीय सीमा के पास चीनी टैंकों के पहुंचने का कथित प्रकरण उठाया था। इस पर विवाद तब बढ़ गया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐतराज जताया। उनका कहना था कि संसद में ऐसी किसी पुस्तक को कोट नहीं किया जा सकता, जो प्रकाशित ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुस्तक तथ्य सही होते तो वह प्रकाशित ही हो जाती। उस पर किसी तरह की रोक लगाने की जरूरत नहीं थी।  

जम्मू-कश्मीर में आतंक पर प्रहार: उधमपुर एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद का दहशतगर्द ढेर

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। मजलता इलाके के बसंतगढ़ में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी को मार गिराया है। फिलहाल इलाके में 2-3 अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, जिसके चलते ऑपरेशन अभी भी जारी है। खुफिया इनपुट के बाद शुरू हुआ जॉइंट ऑपरेशन सुरक्षाबलों को उधमपुर के चिगला बलोता और बसंतगढ़ के ऊपरी इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की सटीक सूचना मिली थी। इसके बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) ने एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया।     मुठभेड़ की शुरुआत: मंगलवार शाम करीब 4 बजे जब जवानों ने आतंकियों को घेरा, तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया।     घेराबंदी: सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और ड्रोन व आधुनिक उपकरणों की मदद से अन्य आतंकियों की तलाश की जा रही है। सेना और व्हाइट नाइट कॉर्प्स का बयान सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया (X) पर जानकारी साझा की। सेना के अनुसार, यह एक 'इंटेलिजेंस आधारित जॉइंट ऑपरेशन' है। बसंतगढ़ के दुर्गम इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी को देखते हुए अतिरिक्त जवानों की टुकड़ियों को मौके पर भेजा गया है।   बढ़ाई गई सुरक्षा और सतर्कता उधमपुर के जोफड़ और आसपास के जंगली इलाकों में पिछले कुछ दिनों से संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही थीं। रविवार रात से ही इलाके में अलर्ट जारी था। ताजा मुठभेड़ के बाद पूरे उधमपुर जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

रूस से तेल खरीद पर यू-टर्न? कंपनियों की गुहार के बाद क्या बदलेगा फैसला

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। समझौते के तहत, भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और बदले में अमेरिका व वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, भारतीय तेल कंपनियों का कहना है कि रूसी तेल के आयात को पूरी तरह रोकने के लिए उन्हें समय चाहिए होगा ताकि वे इस बदलती व्यवस्था के साथ तालमेल बिठा पाएं। कंपनियों का कहना है कि फरवरी में बुक किए गए रूसी तेल के कार्गो मार्च में भारत पहुंच रहे हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से रूसी तेल आयात बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। समझौते की मुख्य शर्तें और असर? सोमवार को घोषित इस व्यापार सौदे के केंद्र में टैरिफ और ऊर्जा नीति है। अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को 50% से घटाकर 18% कर देगा। इसके बदले में भारत को रूसी तेल की खरीद बंद करनी होगी और अपनी व्यापारिक बाधाओं को कम करना होगा। भारत अब अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा। रिफाइनरों की चुनौतियां और मौजूदा स्थिति रिफाइनिंग से जुड़े दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर आयात रोकने का लिखित आदेश नहीं मिला है। रिफाइनरों के सामने कुछ तकनीकी और व्यापारिक अड़चनें हैं।     भारतीय कंपनियों ने पहले ही फरवरी में लोड होने वाले और मार्च में भारत पहुंचने वाले कार्गो बुक कर लिए हैं। इन समझौतों को पूरा करने के लिए समय चाहिए।     नयारा एनर्जी का संकट: रूस समर्थित इस रिफाइनरी की क्षमता 4 लाख बैरल प्रतिदिन है। यह पूरी तरह रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है क्योंकि इराक और सऊदी अरब ने पहले ही हाथ खींच लिए हैं।     सूत्रों का कहना है कि नयारा अप्रैल में अपनी रिफाइनरी को मेंटेनेंस के लिए बंद कर रही है, जिससे उस दौरान रूसी तेल का आयात स्वतः ही शून्य हो जाएगा। रूसी तेल पर नहीं बोले पीएम मोदी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। अमेरिका का उद्देश्य रूस के राजस्व को कम करना है ताकि युद्ध के लिए उसकी फंडिंग को रोका जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमने व्यापार और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने सहित कई विषयों पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक खरीद करने पर सहमत हुए हैं। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर टैरिफ कम होने पर प्रसन्नता तो व्यक्त की, लेकिन रूसी तेल आयात बंद करने के विषय पर सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया। भारत पहले से ही धीरे-धीरे अपनी तेल आपूर्ति में विविधता ला रहा है। पिछले दो वर्षों में दिसंबर में रूसी तेल का आयात सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। भारतीय आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि भारत रूसी तेल की कमी को पूरा करने के लिए वेनेजुएला से तेल खरीदना फिर से शुरू कर सकता है। भारत के लिए यह समझौता एक तरफ अमेरिकी बाजार में सस्ते पहुंच का रास्ता खोलता है, तो दूसरी तरफ अपनी रिफाइनरियों के लिए ऊर्जा के नए और स्थायी स्रोत तलाशने की चुनौती पेश करता है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार किस तरह से रूसी तेल पर अपनी निर्भरता को शून्य पर ले जाती है।

छात्र-छात्राओं को भी शोध पत्र लेखन के लिये करें प्रोत्साहित : मंत्री परमार

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, भोपाल स्थित निवास कार्यालय में मंगलवार को शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल द्वारा संकलित शोध पत्रों पर प्रकाशित शोध जर्नल (RJMLB) का विमोचन किया। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों एवं उनकी गुणवत्ता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों द्वारा भी इस प्रकार के शोध प्रकाशन किए जाना चाहिये। मंत्री परमार ने छात्र-छात्राओं को भी शोध पत्र लेखन के लिये प्रोत्साहित किये जाने को कहा। परमार ने भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित आलेख का भी समुचित समावेश किये जाने पर जोर दिया ताकि नयी पीढी भारतीय समृद्ध पुरातन ज्ञान एवं संस्कृति से परिचित हो सकें। ज्ञातव्य है कि शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल द्वारा पर्यावरण से संबंधित राष्ट्रीय स्तर का वेबीनार का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 250 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुये थे। प्रतिभागियों की ओर से दिये गये शोध पत्रों की समीक्षा उपरांत चयनित शोध पत्र एवं महाविद्यालय द्वारा आमंत्रित अन्य शोध पत्रों का संकलन कर, महाविद्यालय द्वारा शोध जर्नल (RJMLB) प्रकाशित किया गया है। इस अवसर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. प्रवीण तामोट, विभागाध्यक्ष प्राणीशास्त्र डॉ. मीनल फडनीस एवं डॉ. संजय सिंह उपस्थित थे।