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पीरियड्स के दौरान दर्द और थकान से परेशान? जानें फिट रहने के आसान तरीके

 पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान या चिड़चिड़ापन महसूस होना बहुत आम बात है और हर लड़की या महिला कभी न कभी इससे गुजरती है। पेट के निचले हिस्से में ऐंठन, कमर दर्द, सिर दर्द, उलझन या बिना किसी खास वजह के मूड खराब होना हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है। इस समय शरीर थोड़ा कमजोर भी महसूस करता है, इसलिए खुद को समझना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। सबसे पहले खाने-पीने पर ध्यान देना चाहिए। पीरियड्स के दिनों में हल्का, पोषण से भरपूर खाना जैसे हरी सब्जियां, फल, दालें और आयरन से भरपूर चीजें शरीर को ताकत देती हैं। खूब पानी पीना भी बहुत जरूरी है, इससे पेट की सूजन और थकान कम होती है। ज्यादा नमक, जंक फूड, चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक से दूरी बनाकर रखना बेहतर रहता है क्योंकि ये दर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही आराम और हल्की-फुल्की गतिविधि का संतुलन भी जरूरी है। बहुत ज्यादा बिस्तर पर पड़े रहना भी शरीर को सुस्त बना देता है, इसलिए हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या योग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। हालांकि, भारी एक्सरसाइज या ज्यादा थकाने वाला काम करने से बचना चाहिए। अगर मन करता है तो गुनगुने पानी से नहाना या पेट पर गर्म पानी की थैली रखना भी काफी आराम देता है। नींद पूरी लेना भी जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से मूड स्विंग्स और थकान बढ़ सकती है। पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। समय-समय पर सैनिटरी पैड या साफ कपड़ा बदलना चाहिए, आमतौर पर हर 6 घंटे में। इस्तेमाल किए गए पैड को ठीक से लपेटकर फेंकें और अंडरगारमेंट्स रोज बदलें। अंडरगारमेंट्स को अच्छे से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कीटाणु न पनपें। इस दौरान गंदे या नम कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। हाथों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें और बार-बार हाथ धोते रहें। मानसिक सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक सेहत का। पीरियड्स के समय भावनाएं जल्दी आहत हो सकती हैं, गुस्सा या उदासी बिना वजह महसूस हो सकती है। ऐसे में खुद पर ज्यादा सख्त न हों। मनपसंद काम करें, हल्का संगीत सुनें, किताब पढ़ें या किसी अपने से बात करें। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या पीरियड्स बहुत अनियमित हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

दालें प्रोटीन का सबसे बढ़ा स्रोत, इसकी उत्पादकता और पोषण बढ़ाने के लिए आगे आएं किसान

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के विकास और कल्याण के लिए 4 श्रेणियां गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण बताई हैं। हमारी भारतीय सभ्यता में कृषि आधारित जीवन शैली विकसित हुई। आधुनिक समय में खेती में कई प्रकार के विकार आ गए। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से हमारी जीवन शैली में बदलाव आया। प्रधानमंत्री  मोदी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। अमेरिका जैसे देश ने भारत की बात मानी। उन्होंने कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा और हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्यप्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केन्द्र सरकार के साथ हम-कदम होकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना से सोयाबीन की उपज की 1500 करोड़ रूपये से अधिक राशि किसानों के खातों में पहुंची है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन उपयुक्त प्रबंधन के अभाव में प्रदेश का बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था। हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। देश की पहली केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश में सिंचाई का रकबा और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने आने वाले सालों में प्रदेश का सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है। दलहन उत्पादन में अग्रणी है मध्यप्रदेश : केन्द्रीय मंत्री  चौहान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। उन्होंने अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने कहा कि देश का कृषि मंत्रालय अब दिल्ली से नहीं, गांव और खेतों से चल रहा है। हमारे कृषि वैज्ञानिक प्लांट टिशू कल्चर के माध्यम से मसूर सहित अन्य दलहन फसलों की नई और उन्नत किस्में तैयार हो रही हैं। किसानों को ज्यादा उत्पादन वाले और रोग रहित बीच उपलब्ध कराना है। दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 … Read more

अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में शानदार प्रदर्शन से विहान मल्होत्रा ने खींचा सबका ध्यान

पटियाला. अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2026 में विहान मल्होत्रा ने अपने शानदार और जिम्मेदाराना प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। प्रतिभाशाली ऑलराउंडर बल्लेबाज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 109 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया। वहीं विहान ने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में बांग्लादेशी बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर ऐसा फंसाया कि चार ओवर में चार विकेट चटका दिए। इसी से उन्हें दोनों मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। संकट की स्थिति में टीम को संभालने की उनकी क्षमता, संयमित बल्लेबाजी और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की कला ने उन्हें भारतीय अंडर-19 टीम के भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। जिम्बाब्वे के खिलाफ शतक उनकी तकनीक, धैर्य और मैच फिनिश करने की क्षमता का बेहतरीन उदाहरण रहा, जिसने उन्हें टूर्नामेंट के उभरते सितारों में शामिल कर दिया। उनके कोच व अन्य क्रिकेटरों ने अंडर-19 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट जीतने वाली टीम के सदस्य पटियाला के विहान मल्होत्रा की पटियाला में क्रिकेट कोचिंग अकेडमी क्रिकेट हब में भारतीय जीत का जश्न मनाया।

भागवत का बयान: ‘हिंदू शब्द विदेशी मूल का, रामायण में भारत में नहीं है उल्लेख’

 मुंबई  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं. इसके उपलक्ष्य में आज मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस आयोजन का नाम ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ है. उन्होंने इस संबोधन में साफ किया कि संघ कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोग पॉलिटिक्स में हैं. उन्होंने संघ की परिभाषा, संघ के कार्य, हिंदू शब्द की उत्पति और सभी धर्मों के भाव के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि क्या भारतीय होना, केवल नागरिक होना नहीं है, यह एक स्वभाव का होना है. ये जोड़ने वाला स्वभाव है, जिसे हमें अनुशासनबद्ध हो कर बड़ा करना होगा.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. जिसको आप RSS कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं. बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं. वे RSS के प्रधानमंत्री हैं. तो बता दें कि उनकी एक पॉलिटिकल पार्टी है, बीजेपी है, जो अलग है. उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी है.     संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है. हमारा काम बिना किसी के विरोध किए है. संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं. उन्हें करने के लिए संघ है. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना. ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे. संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है.     भागवत ने बताया– संघ में भारतीय रागदरबारी के आधार पर घोष की धुनें बजती है. व्यक्तिगत गीत होते हैं, सांगिक गीत होते हैं. लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय संगीत शाला नहीं है. संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी है. लेकिन संघ पॉलिटिकल पार्टी नहीं है. कई बातें ऊपर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी. और इसलिए संघ को जानना है तो संघ का अनुभव लेना है. संघ को अंदर से देखना है. चीनी कैसे, इस पर व्याख्यानमाला हो सकती है. प्रश्नोत्तर भी हो सकते हैं. लेकिन, एक चम्मच चीनी खा लेंगे तो इस सब की आवश्यकता ही नहीं है. परंतु ऐसा कुछ खाना है तो कम से कम वो ठीक है. उसकी परीक्षा करने में कोई खतरा नहीं है. इतना तो पता होना चाहिए. इसलिए फिर एक बार 100 साल के बाद हम आपको बता रहे हैं.     ये संघ क्या है? क्योंकि, संघ का जो काम है, वो संघ के लिए नहीं है, वो पूरे देश के लिए है. भारतवर्ष के लिए। संघ क्या है जानना है तो पहले संघ क्या नहीं है ये जानना चाहिए. संघ किसी दूसरे संगठन की कंपटीशन में निकला नहीं और नहीं है. संघ किसी एक विशिष्ट परिस्थिति की रिएक्शन में प्रतिक्रिया में नहीं चला है. संघ किसी के विरोध में नहीं चला है. हमारा काम सर्वेषाम अविरोधेन बिना किसी का विरोध किए करने का काम है, चलने वाला काम है. संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए. संघ को पॉवर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम एक अनोखा काम हैं. पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं हैं. संघ को देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं. देश के गतिविधियों के केंद्र में संघ का नाम आता हैं, इसलिए वो देखने आते हैं. कोई भी इसे देखने के बाद एक प्रश्न पूछता हैं. हमारे जवान पीढ़ी में ऐसा कुछ करने की इच्छा हैं , ये पद्यति आप हमको सीखा सकते है क्या. संघ को ऊपर से और दूर से देखेंगे तो भी गलतफहमी होती हैं. संघ के स्वयंसेवकक रूट मार्च करते हैं, लेकिन संघ पैरामिलिटरी आर्गेनाइजेशन नहीं हैं. संघ के स्वयंसेवक राजनीती में भी हैं, लेकिन संघ राजनितिक पार्टी नहीं हैं. इसलिए संघ को जानना है, तो संघ को अंदर से आ कर देखना होगा. संघ का काम पूरे देश के लिए हैं. संघ किसी दूसरे संगठन के कंपटीशन में निकला नहीं हैं. संघ किसी के विरोध में नहीं चला हैं. संघ को पॉपुलरीटी, पावर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने भाषण में कहा, ‘RSS न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है और न ही कोई पॉलिटिकल पार्टी. संघ से जुड़े लोग भले ही पॉलिटिक्स में एक्टिव हों, लेकिन संगठन खुद पॉलिटिकल नहीं है. यह कोई रिएक्शनरी संगठन भी नहीं है. संघ किसी के खिलाफ नहीं है. संघ को पब्लिसिटी, पावर या पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए.’     संघ के कार्यक्रम को आप यहां देख सकते हैं- इस कार्यक्रम में साधु-संत के साथ-साथ कई गणमान्य जुटे हुए हैं. आयोजन की शुरुआत वंदे मातरम के गायन के साथ हुई. क्यों अहम है आज का भाषण? दिल्ली में दिए गए उनके हालिया भाषणों की तर्ज पर, उम्मीद जताई जा रही है कि डॉ. भागवत आज कई ज्वलंत मुद्दों पर बात करेंगे. इसमें हाल ही में हुई बड़ी ट्रेड डील्स (Trade Deals), वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत, आगामी चुनाव और देश के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर उनकी टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण होगी. क्या भागवत आज के भाषण में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं? हम उनके भाषण का पूरा प्रसारण नहीं, बल्कि मुख्य अंश (Highlights) और ब्रेकिंग हेडलाइंस अपने दर्शकों के लिए लेकर आएंगे. मुंबई के सियासी और कारोबारी गलियारों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त चर्चा है.

सुशासन और सुरक्षा का यूपी मॉडल देश के लिए मिसाल’: पुष्कर सिंह धामी

सुशासन व सुरक्षा का यूपी मॉडल देश के लिए उदाहरण: पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने खुलकर प्रशंसा की यूपी के सीएम की, कहा- योगी आदित्यनाथ साधना से तपे संन्यासी, उनका जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा गांव की मिट्टी में पले-बढ़े योगी आदित्यनाथ ने साधारण से असाधारण बनने की यात्रा तय की यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल  पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुले मन से सराहना करते हुए उन्हें सनातन संस्कृति का रक्षक, सुशासन का प्रतीक और प्रेरणास्रोत बताया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि योगी आदित्यनाथ का सान्निध्य प्रदेश को बार-बार प्राप्त हो रहा है। वह इसी क्षेत्र की मिट्टी से निकले हैं और उनका इस पूरे अंचल से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। यही कारण है कि वह उत्तराखंड को कभी भूलते नहीं और समय-समय पर यहां के शिक्षा संस्थानों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती देने के लिए सहयोग करते रहे हैं। साधारण राजनेता नहीं, साधना से तपे संन्यासी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि साधना से तपे संन्यासी हैं। उनके जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। समाज में योगी आदित्यनाथ के प्रति जो सम्मान है, वह उनके व्यक्तित्व, आचरण और कार्यशैली का परिणाम है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस प्रकार सुशासन स्थापित हुआ है, वह आज पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुका है। कभी गुंडाराज व माफिया संस्कृति के लिए बदनाम रहा उत्तर प्रदेश आज सुरक्षा, कानून व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। गांव की मिट्टी से निकलकर शिखर तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि योगी आदित्यनाथ ने इसी क्षेत्र में सामान्य परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण की। गांव की मिट्टी में पले-बढ़े योगी जी ने अपने अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प से असाधारण ऊंचाइयों को छुआ। आज वह देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे हैं। वह राज्य जिसे कभी बीमारू राज्य के रूप में देखा जाता था, लेकिन योगी जी ने अपनी नीतियों और विजन से उसे आज देश में अग्रिम राज्यों की पंक्ति में पहुंचा दिया है। योगी आदित्यनाथ का जीवन विद्यार्थियों के लिए जीवंत उदाहरण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो, तो हर चुनौती अवसर में बदल जाती है। उत्तराखंड से योगी का भावनात्मक रिश्ता मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जहां भी रहे, उन्होंने अपनी जन्मभूमि और देवभूमि उत्तराखंड से नाता कभी नहीं तोड़ा। भारतीय परंपरा में कहा गया है कि “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” और योगी जी इस भाव को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं। पिछले वर्षों में योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में कई विद्यालयों का लोकार्पण हुआ, जहां आधुनिक शिक्षा सुविधाएं, कंप्यूटर लैब और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए गए। योगी आदित्यनाथ का जीवन यह सिखाता है कि सादा जीवन, उच्च विचार और कठोर परिश्रम से कोई भी व्यक्ति राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चीता परिवार में 5 शावकों के जन्म पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की गई है। मादा चीता आशा ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत के चीता पुनर्स्थापन अभियान को नई मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि कूनो में कुल चीतों की संख्या 35 तक पहुँच गई है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को देश में वन्य जीव संरक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती है। इस सफलता का श्रेय समर्पित वन अमले और पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और अथक मेहनत को जाता है। कूनो में हो रहा यह सकारात्मक विकास भारत की जैव-विविधता संरक्षण यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।  

योगी सरकार ने चालक-परिचालकों को 14 पैसे प्रति किमी अतिरिक्त भुगतान का लिया निर्णय

योगी सरकार का ग्रामीण परिवहन को संबल, मुख्यमंत्री जनता सेवा बसों के चालकों-परिचालकों के मानदेय में बढ़ोतरी योगी सरकार ने चालक-परिचालकों को 14 पैसे प्रति किमी अतिरिक्त भुगतान का लिया निर्णय ग्रामीण यात्रियों को साधारण बसों से 20% कम किराये का मिलेगा लाभ प्रदेश भर के 20 क्षेत्रों में 395 मार्गों पर 299 बसों का किया जा रहा संचालन ग्रामीण परिवहन को मजबूत और टिकाऊ बनाना है योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा संचालित मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत चल रही बसों के संचालन हेतु चालकों व परिचालकों को दिए जाने वाले मानदेय में 14 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की गई है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस फैसले से एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बस संचालन से जुड़े कर्मियों को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर आम ग्रामीण यात्रियों को कम किराये में सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा निरंतर उपलब्ध होती रहेगी। मानदेय बढ़ोतरी से मिलेगा संचालन को बल परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मुख्यमंत्री जनता सेवा के अंतर्गत संविदा चालकों और परिचालकों को 2.18 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जा रहा था। ताजा निर्णय के तहत अब यह दर बढ़ाकर 2.32 रुपये प्रति किलोमीटर कर दी गई है। मानदेय में की गई यह वृद्धि बस संचालकों और सेवा प्रदाताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बसों का नियमित, सुरक्षित और सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। ग्रामीण यात्रियों को 20 प्रतिशत कम किराया परिवहन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत संचालित बसों का किराया साधारण बसों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम रखा गया है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले यात्रियों को मिल रहा है, जिन्हें कम किराये में अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण अंचलों में रहने वाले नागरिकों को भी शहरी क्षेत्रों के समान किफायती और सुलभ परिवहन सुविधाएं मिलें। प्रदेशभर में 299 बसें कर रही हैं सेवा परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 20 क्षेत्रों में कुल 395 अनुमन्य मार्गों पर 299 बसों का संचालन किया जा रहा है। यह योजना ग्रामीण परिवहन को सशक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार का एक बड़ा और प्रभावी कदम मानी जा रही है। इस योजना से ग्रामीण इलाकों में न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

रायपुर. तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  संतोष पांडेय, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, विधायक  मोतीलाल साहू,  राजेश मूणत, मुख्य सचिव  विकास शील, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह)  मनोज पिंगुआ तथा रायपुर  पुलिस कमिश्नर  संजीव शुक्ला उपस्थित थे।

5वीं-8वीं के परीक्षा केंद्रों को 5 किमी दूर भेजने से बच्चों और अभिभावकों को बढ़ी मुश्किलें

भोपाल  प्रदेश में 5वीं और 8वीं की बोर्ड पैटर्न परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस परीक्षा में करीब 25 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए प्रदेश भर में लगभग 12 हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ये परीक्षा केंद्र मूल विद्यालय से पांच किलोमीटर दूर के विद्यालयों में बनाए जाने से परीक्षार्थी और अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। परीक्षा 20 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की जाएगी और इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के अनुसार छोटे विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्कूल से कम दूरी पर बनाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो। राज्य शिक्षा केंद्र ने एक से तीन किमी के अंदर तक केंद्र बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई जगहों पर केंद्र चार से पांच किलोमीटर दूरी पर बनाए जाने की शिकायत सामने आ रही हैं। 5वीं व 8वीं की यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के पैटर्न पर आयोजित की जा रही है। इसमें सरकारी, निजी स्कूलों तथा मदरसों के विद्यार्थी शामिल होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि वहां परिवहन की सुविधा सीमित रहती है। छोटे बच्चों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए अधिक समय और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। अभिभावकों का कहना है कि अधिक दूरी होने से बच्चों की सुरक्षा और समय पर पहुंचने की चिंता बढ़ जाती है। निजी स्कूलों को अधिक बनाए गए केंद्र भोपाल जिले में 201 केंद्रों पर करीब 78 हजार बच्चे शामिल होंगे। इसमें पुराने शहर में जनशिक्षा केंद्र प्रभारी एवं जनशिक्षक के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर विकासखंड स्रोत समन्वयकों ने सरकारी के बदले निजी स्कूलों को केंद्र बना दिया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि केंद्र विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं।  

जनजातीय परंपराओं की समृद्ध विरासत से रूबरू हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

रायपुर.  द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली। राष्ट्रपति  मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की। बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया। एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया। जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए। बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति  मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया। लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।