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मेले में सुरक्षा चूक: शिवरीनारायण में आकाश झूले की कुर्सी टूटी, दो घायल

जांजगीर चांपा शिवरीनारायण में चल रहे माघी मेले में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया। नगर पंचायत कार्यालय के सामने संचालित आकाश झूले की कुर्सी टूटकर नीचे खड़ी दो युवतियों पर गिर गई, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गईं। एक युवती को बिलासपुर रेफर किया गया है। घटना के बाद मेला परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी। जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब चार बजे उमेश गुप्ता द्वारा संचालित आकाश झूले में यह हादसा हुआ। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम मल्दा से मेला देखने आई दो युवतियां मेला ग्राउंड में झूले के नीचे खड़ी थीं। इसी दौरान अचानक आकाश झूले की एक कुर्सी टूटकर नीचे गिर गई, जो सीधे दोनों युवतियों पर आ गिरी। हादसे में चंद्रकांती कश्यप (15 वर्ष) एवं भूमिका कश्यप (21 वर्ष), निवासी ग्राम मल्दा, गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से शिवरीनारायण स्थित शबरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार चंद्रकांती कश्यप की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि भूमिका कश्यप की स्थिति गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर रेफर कर दिया गया है। इस घटना के बाद मेले में लगे झूलों एवं अन्य मनोरंजन साधनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में झूलों और मौत के कुएं जैसे खेलों की फिटनेस जांच को लेकर लापरवाही बरती जाती है। वहीं नगर पंचायत और संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण एवं सख्त कार्रवाई न होने को भी हादसे का कारण बताया जा रहा है। फिलहाल घटना के बाद पुलिस और मेला प्रशासन हरकत में आया है और मामले की जांच की बात कही जा रही है। हादसे ने मेला में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। एसडीओपी यदुमणि सिदार ने बताया कि झूला संचालक को नोटिस जारी कर तकनीकी जांच प्रमाणपत्र की मांग की गई है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभी झूला को एहतियात के तौर पर बंद करा दिया गया है।  

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को EPF की राहत, विधान परिषद में गूंजा मुद्दा

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मंगलवार को भारतीय जनता पाटर्ी (भाजपा) के एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने नियम 115 के अंतर्गत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जा रही ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कटौती की राशि कर्मचारियों के खातों में अनिवार्य रूप से जमा कराए जाने की मांग उठाई। उन्होंने इस विषय को लोक महत्व का बताते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य में आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का शोषण आम बात थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की है। कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही थी ईपीएफ की राशि उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती तो नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन संबंधित धनराशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही है। इस स्थिति से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे लगातार संबंधित विभागाध्यक्षों से शिकायत कर रहे हैं। कर्मचारियों की मूल समस्या का अब होगा समाधान विजय बहादुर पाठक ने सदन को अवगत कराया कि विभागीय अधिकारी अक्सर ठेकेदारों और सेवा प्रदाता कंपनियों पर जिम्मेदारी डालकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। कई स्थानों पर यह विषय आंदोलन का रूप ले चुका है और कहीं-कहीं ठेकेदार या एजेंसी बदल दी जाती है, लेकिन कर्मचारियों की मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।  कर्मचारियों के खाते में अब पूरी राशि समय से जमा होगी उन्होंने बताया कि बरेली, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित कई नगर निगमों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। लखनऊ नगर निगम में तो कर्मचारियों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी ईपीएफ राशि एजेंसी, ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पी जा रही है। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने सरकार से मांग की कि इस गंभीर और तात्कालिक लोक महत्व के विषय पर ठोस कारर्वाई करते हुए ऐसी सुनिश्चित व्यवस्था की जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जाने वाली ईपीएफ कटौती की पूरी राशि समय से उनके खातों में जमा हो सके।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को मिला शैक्षणिक भ्रमण का अवस

रायपुर. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप वनांचल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सुकमा जिला प्रशासन की पहल पर ‘नियद नेल्लानार’ योजना के अंतर्गत माध्यमिक शाला मिसमा और बालक आश्रम सामसट्टी के 40 विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को साइंस पार्क ले जाया गया, जहाँ उन्होंने विज्ञान से जुड़े विभिन्न प्रयोगों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। न्यूटन के नियम, ऊर्जा के रूपांतरण, ध्वनि के सिद्धांत, धूप घड़ी से समय मापन, पेंडुलम की गति तथा दर्पणों से जुड़े प्रयोगों ने बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई। इससे विद्यार्थियों को किताबों में पढ़े विषयों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला। भ्रमण के दौरान विद्यार्थी कलेक्टर कार्यालय भी पहुंचे, जहाँ उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन और मेहनत के महत्व के बारे में बताया तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को तुंगल बांध भी ले जाया गया, जहाँ उन्होंने प्राकृतिक वातावरण, जैव विविधता और जल संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हुआ। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से शासन द्वारा वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए सार्थक पहल की जा रही है।

योगी सरकार में दिव्यांगजन पेंशन तीन गुना से अधिक बढ़ी, कोई भी पात्र वंचित नहीं

लखनऊ.   योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को सामाजिक न्याय की धुरी बनाते हुए पेंशन, सहायता योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। सरकार की पारदर्शी, ऑनलाइन और समयबद्ध व्यवस्था के चलते आज प्रदेश में कोई भी पात्र दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं है। विधानपरिषद में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार में दिव्यांगजनों के लिए धन की कोई कमी नहीं है और जो भी पात्र है, उसे शत-प्रतिशत लाभ मिलेगा। तीन गुना से अधिक बढ़ी दिव्यांगजन पेंशन, सीधा खाते में भुगतान मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2017 से पूर्व दिव्यांग पेंशन मात्र 300 रुपये  प्रतिमाह थी, जिसे योगी सरकार ने बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। यह पेंशन पात्र लाभार्थियों के खातों में पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की जाती है, जिससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती। यूडीआईडी कार्ड से लेकर पेंशन तक पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था उन्होंने बताया कि भारत सरकार के स्वावलंबन पोर्टल के माध्यम से यूडीआईडी कार्ड जारी किए जाते हैं। आकांक्षी जनपद सिद्धार्थनगर में 31 जनवरी 2026 तक 24,414 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14,356 पात्र दिव्यांगजनों को पेंशन, 153 कुष्ठावस्था पेंशन और 321 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। 31 दिसंबर 2025 तक कोई भी पात्र लाभार्थी लंबित नहीं है। पात्रता के आधार पर लाभ, यूडीआईडी कार्ड से स्वतः पेंशन नहीं मंत्री कश्यप ने स्पष्ट किया कि यूडीआईडी कार्ड धारक सभी दिव्यांगजन स्वतः पेंशन के पात्र नहीं होते। पेंशन के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता, ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से कम वार्षिक आय तथा अन्य किसी पेंशन योजना का लाभ न लेना अनिवार्य है। आवेदन एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाता है, जिसकी जांच जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी द्वारा की जाती है। दलालों और भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने दो टूक कहा कि विभाग में दलालों और भ्रष्टाचारियों के लिए कोई स्थान नहीं है। यदि किसी स्तर पर शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो दिव्यांगजन स्वयं कार्यालय नहीं आ सकते, उनके घर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कराई जाए। विशेष विद्यालयों और पदोन्नति प्रक्रिया पर भी सदन को दी जानकारी उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के विशेष विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में चयनित शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे जा चुके हैं और इस पर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मंत्री कश्यप ने यह भी स्पष्ट किया कि वितरण कार्यक्रमों में वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभी जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना अनिवार्य है।

पेंशन बढ़ेगी या नहीं? 8th Pay Commission पर राज्यसभा में स्पष्ट संकेत

नई दिल्ली अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं या रिटायर हो चुके हैं, तो आपकी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर संसद से एक बड़ी खबर आई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही तमाम अटकलों और पेंशन संशोधन के सवालों पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में स्थिति साफ कर दी है। इस जानकारी से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर होने वाले हैं या पेंशन में होने वाले बदलावों को लेकर चिंतित थे। वेतन आयोग की तैयारी: शुरू हुआ फीडबैक का दौर सरकार ने स्पष्ट किया है कि 8th Pay Commission अब कागजों से निकलकर एक्शन मोड में आ गया है। 3 नवंबर 2025 को इसके गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद अब आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च कर दी है। इतना ही नहीं, 'MyGov' पोर्टल के जरिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से उनकी राय और सुझाव मांगे जा रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके आधार पर वेतन, भत्ते और पेंशन की नई दरों का फैसला होगा। रिटायरमेंट की तारीख और पेंशन का गणित सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के दायरे में आएंगे? सरकार ने साफ किया है कि पेंशन में किसी भी तरह का बदलाव या बढ़ोतरी 'पेंशन नियम 2021' और आयोग की सिफारिशों के आधार पर जारी होने वाले सामान्य आदेशों से तय होती है। फाइनेंस बिल 2025 के जरिए किसी की पेंशन में अपने आप कोई बदलाव नहीं होता, बल्कि यह एक व्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया है। क्या फाइनेंस एक्ट से बदल जाएंगे नियम? सांसद आनंद भदौरिया के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि फाइनेंस एक्ट 2025 मौजूदा पेंशन नियमों को सिर्फ मजबूती देता है, वह वर्तमान में मिल रही सिविल या डिफेंस पेंशन के ढांचे में कोई सीधा बदलाव नहीं करता। पेंशन में संशोधन तभी लागू होता है जब सरकार वेतन आयोग जैसी विशेषज्ञ संस्था की सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है। यानी, जो भी बदलाव होंगे, वे तय नियमों के तहत सभी पात्र श्रेणियों पर लागू किए जाएंगे। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान आयोग के जरिए मिलने वाले फीडबैक और डेटा पर है, ताकि आने वाले समय में एक संतुलित और मजबूत वेतन ढांचा तैयार किया जा सके।

मणिपुर के उखरूल में हिंसा: 5 दिन के लिए इंटरनेट बंद, कर्फ्यू लागू

 इंफाल मणिपुर के उखरूल में हिंसा भड़कने की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि कुछ सशस्त्र बदमाशों ने लिटन सारेइखोंग गांव में कई घरों को आग लगा दी. इस घटना के बाद स्थिति बिगड़ने की आशंका में प्रशासन ने पूरे जिले में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, ताकि आगे की हिंसा और अफवाहों को रोका जा सके. अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र समूहों ने पहाड़ी गांव के पास हवा में कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. कई ग्रामीण आवश्यक सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिले के सुरक्षित क्षेत्रों की ओर भाग गए, जबकि तांगखुल गांव के कई ग्रामीणों के भी इलाका छोड़ने की जानकारी मिली है. '5 दिन के लिए इंटरनेट सेव बंद' बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मणिपुर सरकार के गृह आयुक्त ने सार्वजनिक सुरक्षा और शांति को खतरा होने के कारण उखरूल जिले में तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित करने का आदेश जारी किया है.  आदेश में कहा गया है कि हाल की घटनाओं से काफी अशांति फैली है और गलत सूचनाओं के प्रसार से तनाव बढ़ सकता है. इसलिए स्थिति को नियंत्रित करने और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं. वहीं, आगजनी की घटनाओं के बाद उखरुल जिले के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया और आगे की हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई. शनिवार को हुई हिंसा की शुरुआत प्रशासन का कहना है कि उखरूल में हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को हुई जब लीटन गांव में सात-आठ लोगों ने तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की. हालांकि, मामला सुलझने की उम्मीद थी, लेकिन रविवार की बैठक नहीं हो सकी. इसके बाद सोमवार आधी रात को कुछ हथियारधारी बदमाशों ने लीटन सारईखोंग में तांगखुल नागा समुदाय के घरों को आग लगा दी, जिसके बाद नाग समुदाय ने कुकी समुदाय के घरों को निशाना बनाया. पुलिस के अनुसार, के. लुंगविराम गांव में भी एक घर को आंशिक रूप से जलाया गया है. पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार को रात करीब 12:10 बजे के. लुंगविराम गांव में एक छोटी-सी आग लगने की घटना हुई, जिससे एक आवासीय घर को आंशिक नुकसान पहुंचा. सुरक्षाबलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया. पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारण की जांच की जा रही है और स्थिति सामान्य है.

सिंचाई व्यवस्था का हो रहा सुदृढ़ीकरण, 74.33 करोड़ रुपये की लागत से 7 नई ड्रेनेज परियोजनाओं का होगा निर्माण

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जल प्रबंधन को बेहतर बनाने, बाढ़ की समस्या को कम करने और किसानों की आय में बढ़ोतरी के उद्देश्य से ड्रेनेज व्यवस्था के विस्तार और ड्रेनों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं का निर्माण करा रहा है। साथ ही जल प्रबंधन और खेतों तक सुचारू रूप से जल की पहुंच को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बहराइच, बिजनौर, गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में बन रही हैं 7 नई ड्रेन वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में एक-एक ड्रेन परियोजना को मंजूरी दी गई है, जबकि बिजनौर और बहराइच में दो-दो ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। जिन पर कुल 74.33 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय करने की स्वीकृति मिली है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ होगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हर खेत को पानी के विजन को साकार करने में मजबूती मिलेगी। मार्च 2026 तक पूरा होगा ड्रेनों की सफाई का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक सफाई का कार्य भी नियमित तौर पर कराया जाता है। बाढ़ एवं साल भर ड्रेनों के परिचालन से इनमें भारी मात्रा में गाद और सिल्ट जमा हो जाती है, जो खेतों तक जल की पहुंच में बाधा उत्पन्न करती है। इस क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 11,065 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। शेष कार्य मार्च 2026 तक पूरा किया जाना है। विभाग द्वारा कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण हो सके। इससे न केवल किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, बल्कि जलभराव और बाढ़ की समस्या में भी कमी आएगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।

टीम मैनेजमेंट की मांग BCCI ने ठुकराई, T20 World Cup में भारतीय खिलाड़ियों को लगा झटका

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 की शुरुआत में ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भारतीय खिलाड़ियों की एक मांग को ठुकरा दिया है। टीम मैनेजमेंट की ओर से बीसीसीआई से पूछा गया था कि क्या भारतीय खिलाड़ी टी20 विश्व कप में अपने परिवार के साथ ट्रेवल कर सकते हैं तो इस अनुरोध को बोर्ड ने ठुकरा दिया। बीसीसीआई ने पहले ही नियम बना दिए थे कि खिलाड़ियों के साथ उनका परिवार कब कितने दिन तक ठहर सकता है। इसी पॉलिसी के मुताबिक, T20 वर्ल्ड कप कैंपेन के दौरान इंडियन क्रिकेटरों के साथ उनके परिवारों को रहने की इजाजत नहीं होगी। एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो टीम मैनेजमेंट ने क्रिकेटरों के परिवारों को उनके साथ रहने की इजाजत देने के बारे में जानकारी मांगी थी। BCCI की वैसे कोई रोक नहीं है, लेकिन समय-सीमा जरूर निर्धारित की हुई है। खिलाड़ियों को उनके परिवारों (पार्टनर और बच्चों) को ज्यादा से ज्यादा 14 दिनों तक अपने साथ रखने की इजाजत देता है, लेकिन इसके लिए शर्त ये है कि कोई विदेशी दौरा 45 दिनों से ज्यादा का हो। भारत में टी20 विश्व कप खेला जा रहा है और एक महीने तक ही ये टूर्नामेंट चलने वाला है तो बोर्ड ने टीम मैनेजमेंट की ओर से आई इस सिफारिश को खारिज कर दिया। BCCI के एक सोर्स ने इंडियन एक्सप्रेस को कन्फर्म किया, “इंडियन टीम मैनेजमेंट ने BCCI से पूछा था कि क्या पत्नियां और मंगेतर टीम के साथ ट्रैवल कर सकती हैं और क्या वे उनके साथ रह भी सकती हैं? बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परिवार प्लेयर्स के साथ नहीं रहेंगे। हालांकि, अगर वे चाहें तो अलग से इंतजाम कर सकते हैं।” बीसीसीआई ने पिछले साल ही कई गाइडलाइन्स खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए बनाई थीं, जिन पर बोर्ड अभी भी अड़िग है। टीम इंडिया की बात करें तो लीग फेज में भारत को चार मुकाबले खेलने थे। इनमें से एक मैच खेला जा चुका है। एक मैच कोलंबो में है और दो मैच ही भारत में भारतीय टीम के लीग फेज के बाकी हैं। इसके बाद सुपर 8 के मैच शुरू हो जाएंगे। वर्ल्ड कप से पहले कई द्विपक्षीय सीरीज भी खेली गई थीं। उनमें भी खिलाड़ियों को अपने परिवार को साथ रखने की इजाजत नहीं थी। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान प्राइवेट चार्टर प्लेन से ट्रेवल करने वाली है। कुछ खिलाड़ियों के पर्सनल शेफ भी साथ में ट्रेवल कर रहे हैं, लेकिन वे नजदीक के होटल में ठहरते हैं।

पं. दीनदयाल उपाध्यायः एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता और समर्थ भारत निर्माण के चिंतक -डॉ. मोहन यादव

भोपाल  व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले, विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।  पं. दीनदयाल जी का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना। उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन, संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। पं. दीनदयाल जी ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है। यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है। यही दर्शन व्यष्टि से समष्टि की रचना करता है। इसमें श्रीकृष्ण के वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से लेकर आज के वैश्विक परिदृश्य का समावेश है। पं. दीनदयाल जी भारत के भविष्य की कल्पना चतुर्पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के आधार पर की। उनका विश्वास था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जा सकता है। यदि व्यक्ति और समाज को विकास के समान अवसर दिए जाएँ, तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण संभव है। पं. दीनदयाल जी का मानना था कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सशक्त, समरस और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण है। उनका विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था। वे चाहते थे कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, तभी वह सच्चा विकास कहलाएगा। यही अंत्योदय का भाव है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है, उसके मूल में पं. दीनदयाल जी का चिंतन है। विरासत से विकास, आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और सबका साथ – सबका विकास, यह सभी एकात्म मानव दर्शन के आधुनिक रूप हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का संकल्प है कि वर्ष 2047, स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए। यह संकल्प पं. दीनदयाल जी के स्वप्निल भारत की ही साकार अभिव्यक्ति है। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रदेश के प्रत्येक अंचल को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के हर क्षेत्र की क्षमता, मेधा और दक्षता को अवसर प्रदान करने के लिए जहां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का नवाचार किया गया, वहीं भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से स्थानीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। निवेश के लिये हमने यूके, जर्मनी, जापान और दावोस आदि यात्राएं कीं और हैदराबाद, कोयंबटूर सहित मुंबई में रोड-शो के माध्यम से उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। यह क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक उद्योग को जोड़ने का पहला सशक्त प्रयास है। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चिंतन को व्यवहार में उतारने का प्रयत्न किया जा रहा है। समरस, संवेदनशील और उत्तरदायी शासन के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं और विकास के लक्ष्य धरातल पर पहुंच रहे हैं। प्रदेश में गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर 4 मिशन के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। इससे समाज के सभी वर्गों के कल्याण का लक्ष्य पूर्ण होगा।  पं. दीनदयाल जी ने आर्थिक विकास के लिए कृषि, उद्योग, परिवहन, व्यापार समाज, सुरक्षा एवं सेवा का एक स्पष्ट और व्यावहारिक क्रम बताया। इस क्रम में कृषि प्रधान देश भारत में खेती को प्रथम स्थान देने की आवश्यकता व्यक्त की। उनका मानना था यदि देश में कृषि सुदृढ़ होगी, तो किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण जीवन में स्थिरता आएगी और उद्योगों को कच्चा माल एवं श्रम दोनों सहज रूप से उपलब्ध होगा। इससे किसान, उपभोक्ता और समाज तीनों का संतुलन बना रहेगा। पं. दीनदयाल जी खेती की मजबूती और किसानों की समृद्धि को समग्र विकास का आधार मानते थे। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में किसानों के स्वाभिमान, सुरक्षित जीवन और आत्मनिर्भरता को केन्द्र में रखकर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। कृषि आजीविका के साधन के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2025-26 किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा। प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा। प्रदेश में श्रीअन्न, सरसों और चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। इन केंद्रों के जरिए फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पॉवर पम्प दिये जायेंगे। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 65 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर किये जाने का लक्ष्य है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी और विश्व कल्याण में अग्रणी भारत की कल्पना की थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका जीवन और दर्शन हम सबको राष्ट्रधर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर करता रहेगा।  राष्ट्र निर्माण के अमर साधक पं. दीनदयाल जी की पुण्यतिथि पर पुनः कोटिशः वंदन।   

कृषक कल्याण वर्ष में मत्स्य पालकों की आर्थिक समृद्धि के लिए बनाई जाए कार्य योजना संभाग स्तर पर बनेंगे मछली घर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के सभी किसानों और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है, इसके साथ हमें मत्स्य उत्पादन में भी सक्रियता से कार्य कर आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रदेश में मछली पालन के साथ ही एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भी कार्य किया जाए। प्रदेश में ऐसा इको सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे मछुआरों का आर्थिक सशक्तिकरण हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण को समर्पित करते हुए यह वर्ष मना रही है। मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करें। मछुआ सम्मेलन आयोजित कर मत्स्य पालन में बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। सीड प्रोडक्शन बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। प्रदेश में संचालित मत्स्य महासंघ के सुव्यवस्थित उपयोग के लिए भी कार्य करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि कम भू-जल स्तर वाले जिलों में फॉर्म पॉन्ड मॉडल के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए एक जिले को मॉडल के रूप में तैयार किया जाए, जिसमें मत्स्य उत्पादन के साथ ही सिंघाड़ा, कमल गट्टा, मखाना सहित अन्य एक्वाकल्चर आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मध्यप्रदेश केज कल्चर नीति पर कार्य किया जा रहा है। इसमें 10 हजार केज हितग्राही मूलक योजना में और 90 हजार केज उद्यमी मॉडल के अंतर्गत तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के विषय में भी अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी। बैठक में भोपाल में प्रस्तावित विशेष प्रोजेक्ट इंटीग्रेडेट एक्वा पार्क एंड रिसर्च सेंटर की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संभाग स्तर पर मछली घर तैयार करने की कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के विभागीय योजनाओं की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड की प्रगति, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विशेष प्रोजेक्ट, केज कल्चर इंदिरा सागर जलाशय, टेक्नोलॉजी डिफ्यूशन सेंटर, रिजर्वायर कलस्टर आधारित मत्स्य पालन और समन्वित मछली घर एवं अनुसंधान केंद्र का बैठक में रिव्यू किया। इस अवसर पर मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई एवं अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।