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स्टेज पर गाती थीं, अब तस्करी में फंसीं: परमजीत पम्मी को पंजाब पुलिस ने किया अरेस्ट

 खन्ना पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच खन्ना पुलिस को ऑपरेशन प्रहार-2 के तहत एक बड़ी सफलता मिली है. इस कार्रवाई ने एक ऐसे नाम को फिर सुर्खियों में ला दिया, जो कभी मंचों पर गाना गाती थी, लेकिन अब आरोप है कि वह नशा तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन गई. माछीवाड़ा साहिब क्षेत्र में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पंजाबी सिंगर परमजीत कौर पम्मी और उसके भाई सरवन सिंह मिर्जा को हेरोइन समेत गिरफ्तार किया. यह कहानी उस गिरते सफर की है, जिसमें शोहरत, विवाद, जेल, जमानत और फिर दोबारा अपराध के आरोप जुड़ते चले गए. पंजाब सरकार के निर्देशों पर डीजीपी और डीआईजी लुधियाना रेंज की निगरानी में ऑपरेशन प्रहार-2 शुरू किया गया. इसका मकसद था- नशा तस्करों, गैंगस्टर नेटवर्क और उनके सहयोगियों पर एक साथ कार्रवाई. खन्ना पुलिस ने हेल्पलाइन इनपुट, लोकल इंटेलिजेंस और सर्विलांस के आधार पर संवेदनशील इलाकों की लिस्ट तैयार की. पहले ही दिन 125 से ज्यादा संदिग्ध और असामाजिक तत्वों को काबू किया गया.  कई गिरफ्तारियां हुईं, कई लोगों के खिलाफ रोकथाम कार्रवाई की गई. दो बड़े पैडलर, एक प्रमुख तस्कर और गैंगस्टर सहयोगी भी पकड़े गए. इसी कड़ी में सबसे चर्चित गिरफ्तारी रही- परमजीत कौर पम्मी और उसके भाई की. खेतों के बीच बना डेरा, वहीं से चलता था नेटवर्क पुलिस जांच में सामने आया कि परमजीत कौर पम्मी और उसका भाई खेतों के बीच एक डेरा बनाकर गतिविधियां चला रहे थे. यह जगह आम नजरों से दूर थी. आरोप है कि यहां लोगों का आना-जाना लगा रहता था, खास दिनों में भीड़ जुटती थी, और वहीं से नशे की सप्लाई का काम संचालित होता था. स्थानीय लोगों की शिकायतें लंबे समय से पुलिस तक पहुंच रही थीं. ठोस इनपुट और सही समय का इंतजार किया जा रहा था. जैसे ही पुख्ता सूचना मिली, टीम ने छापा मारा और दोनों को काबू कर लिया. तलाशी में करीब 8 ग्राम हेरोइन बरामद होने की बात सामने आई. कौन है परमजीत कौर पम्मी? परमजीत कौर पम्मी का नाम इलाके में नया नहीं है. वह पहले पंजाबी म्यूजिक सर्किट से जुड़ी रही है. सिंगिंग प्रोग्राम, स्टेज शो और रिकॉर्डिंग से उसने पहचान बनाई थी. इलाके में लोग उसे सिंगर पम्मी के नाम से जानते थे. पिछले कुछ वर्षों में उसका नाम कला से ज्यादा आपराधिक मामलों में चर्चा में आने लगा. 2023 का केस: गैर इरादतन हत्या का आरोप पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2023 में परमजीत कौर पम्मी के खिलाफ नशा तस्करी से जुड़े एक मामले में केस दर्ज हुआ था. उस केस में ड्रग ओवरडोज के कारण एक युवक की मौत हुई थी. जांच के बाद उस पर गैर इरादतन हत्या और एनडीपीएस एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं. उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और उसने महिला जेल में समय भी काटा. बाद में वह जमानत पर बाहर आ गई. पुलिस का दावा है कि जमानत के बाद उसने अपनी गतिविधियां बंद नहीं कीं, बल्कि फिर से नेटवर्क सक्रिय कर लिया. भाई का साथ: परिवार ही बना नेटवर्क का हिस्सा? ताजा कार्रवाई में उसका भाई सरवन सिंह मिर्जा भी साथ पकड़ा गया. पुलिस का कहना है कि दोनों मिलकर काम कर रहे थे. सप्लाई, संपर्क और स्थानीय स्तर पर वितरण का काम परिवार के स्तर पर ही संचालित हो रहा था. जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि क्या इनके नेटवर्क के तार बड़े सप्लायरों या क्षेत्रीय गिरोहों से भी जुड़े हैं. हेल्पलाइन इनपुट से खुला राज एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने बताया कि यह कार्रवाई हेल्पलाइन इनपुट पर आधारित थी. सेव पंजाब हेल्पलाइन और एंटी गैंगस्टर हेल्पलाइन पर मिली सूचनाओं को क्रॉस वेरिफाई किया गया. उसके बाद सर्च और रेड की प्लानिंग हुई. पुलिस का कहना है कि आम लोगों से मिल रही सूचनाएं अब ऑपरेशन का बड़ा आधार बन रही हैं. कई हॉटस्पॉट ऐसे चिह्नित हुए हैं, जो पहले रिकॉर्ड में नहीं थे. सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, हॉटस्पॉट सुधार मॉडल भी इस ऑपरेशन की खास बात सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि हॉटस्पॉट अडॉप्शन मॉडल भी है. खन्ना पुलिस और सिविल प्रशासन ने मिलकर ड्रग प्रभावित इलाकों को चिह्नित कर उन्हें गोद लेने की योजना शुरू की है. मीट मार्केट क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया गया. वहां सफाई अभियान, सैनिटेशन सुधार, स्कूल, ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, दस्तावेज बनवाकर दाखिला, सेल्फ हेल्प ग्रुप गठन, मोटिवेशनल बोर्ड और जागरूकता संदेश जैसी पहल शुरू की गई है. एसएसपी ने साफ कहा कि नशे और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस नहीं जीत सकती. इसमें जनता, मीडिया और एनजीओ का सहयोग जरूरी है. उन्होंने अपील की कि लोग डरें नहीं, हेल्पलाइन पर सूचना दें. पहचान गोपनीय रखी जाएगी.  

सड़क दुर्घटना का कहर: NH-30 पर अज्ञात वाहन ने ली DRG जवान की जान

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से सटे आसना क्षेत्र में मंगलवार की रात दर्दनाक सड़क हादसे ने सुरक्षा बल के एक जांबाज को छीन लिया. नेशनल हाइवे 30 पर अज्ञात वाहन ने जगदलपुर की ओर जा रहे डीआरजी जवान भरत भारती की बाइक को जोरदार टक्कर से मारी. हादसा इतना भीषण था कि जवान की मौके पर ही मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, घटना कोतवाली थाना इलाके की है. लोगों की सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पंहुची और शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस हादसे के कारणों और चालक की तलाश में जुट गई है. अज्ञात वाहन की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. 2022 में बस्तर फाइटर में हुथा था चयन बताया गया कि वर्ष 2022 में भरत भारती का चयन बस्तर फाइटर में हुआ था, जिसके बाद उनकी पोस्टिंग डीआरजी दस्ते में की गई थी. हादसे के बाद पुलिस महकमे और जवान के साथियों में शोक की लहर है. पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की पड़ताल तेज कर दी है.

संसद में पाकिस्तान का कबूलनामा! रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका ने किया फायदा, हमें छोड़ा मुश्किल में

 इस्लामाबाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्वीकार किया है कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और फिर उसे 'टॉयलेट पेपर से भी बदतर तरीके से फेंक दिया'. उन्होंने कहा कि अमेरिका की जंगों में शामिल होने का खामियाजा पाकिस्तान को भारी कीमत चुकाकर उठाना पड़ा. ख्वाजा आसिफ ने 1999 के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान की दोबारा सक्रिय भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस वक्त इस्लामाबाद ने एक बार फिर वॉशिंगटन के साथ खड़े होने का फैसला किया, ताकि अमेरिकी समर्थन हासिल किया जा सके. उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के लिए तबाही भरा साबित हुआ. 'जिहाद के नाम पर बड़ी गलती हुई' पाकिस्तान में वर्षों से गढ़ी गई आधिकारिक धारणाओं को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अफगान युद्धों में पाकिस्तान की भागीदारी इस्लाम की रक्षा के लिए नहीं थी. उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तानियों को जिहाद के नाम पर लड़ने और मरने भेजा गया, जो एक गलत फैसला था. ख्वाजा आसिफ ने यह भी बताया कि इन युद्धों को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान के शिक्षा पाठ्यक्रम तक में बदलाव किए गए और आज भी वे बदलाव पूरी तरह वापस नहीं लिए जा सके हैं. उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ अफगान युद्ध धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि अमेरिकी रणनीति का हिस्सा था. आसिफ के मुताबिक, रूस ने अफगानिस्तान पर इस तरह कब्जा नहीं किया था कि जिहाद का ऐलान जरूरी हो, इसके बावजूद पाकिस्तान उस युद्ध में कूद पड़ा. उन्होंने माना कि उस फैसले के दुष्परिणाम दशकों बाद भी देश भुगत रहा है. 'अमेरिका ने इस्तेमाल किया और छोड़ दिया' रक्षा मंत्री ने कहा कि 1999 के बाद अमेरिका के साथ फिर से खड़े होने की पाकिस्तान को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी, जिससे देश आज तक पूरी तरह उबर नहीं सका है. उन्होंने पूर्व सैन्य शासकों जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पाकिस्तान को ऐसी जंगों में झोंक दिया, जो उसकी नहीं थीं. संसद में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान को 'टॉयलेट पेपर से भी बदतर' तरीके से इस्तेमाल किया गया. पहले जरूरत पड़ी तो साथ लिया गया और फिर बेरहमी से छोड़ दिया गया. 11 सितंबर 2001 के बाद के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के नेतृत्व वाली वॉर ऑन टेरर में तालिबान के खिलाफ मोर्चा लिया. हालांकि बाद में अमेरिका वहां से चला गया, लेकिन उस जंग के दीर्घकालिक दुष्परिणाम आज भी पाकिस्तान झेल रहा है. ख्वाजा आसिफ ने कहा, 'इस नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती.' उन्होंने इन फैसलों को अपरिवर्तनीय गलतियां करार देते हुए कहा कि इन्हीं कारणों से पाकिस्तान दूसरों की जंगों में एक मोहरा बनकर रह गया.

206 अरब डॉलर का अमेरिकी बाजार खुला भारत के लिए, कौन-कौन से सेक्टर होंगे फायदे में

नई दिल्ली भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा मौका सामने आया है. लंबे समय से भारतीय किसान और फूड एक्सपोर्ट करने वाले अमेरिकी मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहते थे, और अब हालात उनके पक्ष में दिख रहे हैं. अमेरिका का कुल कृषि आयात बाजार करीब 206 अरब डॉलर का है, जो दुनिया के सबसे बड़े इम्पोर्ट मार्केट्स में गिना जाता है. नई ट्रेड व्यवस्था के तहत भारत को इस बड़े बाजार में एंट्री आसान होने जा रही है. कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स को पूरी तरह जीरो ड्यूटी पर एंट्री मिलेगी, जबकि कई अन्य सामानों पर पहले से कम टैरिफ देना होगा. इसका सीधा असर यह होगा कि भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में ज्यादा किफायती और कॉम्पिटिटिव हो जाएगा. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के 46 अरब डॉलर के एग्रीकल्चर इम्पोर्ट सेगमेंट में भारत को जीरो ड्यूटी का फायदा मिलेगा. इसमें मसाले, प्रोसेस्ड फूड, फल, चाय, कॉफी और एसेंशियल ऑयल जैसे अहम प्रोडक्ट शामिल हैं. इसके अलावा करीब 160 अरब डॉलर के बड़े हिस्से में भारतीय सामान 18 प्रतिशत की कम रेसिप्रोकल टैरिफ रेट पर जाएगा. यानी पहले जहां ज्यादा ड्यूटी लगती थी, अब वहां कम शुल्क लगेगा. इससे एक्सपोर्ट की लागत घटेगी और अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय प्रोडक्ट्स ज्यादा आकर्षक बनेंगे. भारत का होगा ट्रेड सरप्लस आंकड़े भी भारत के पक्ष में संकेत दे रहे हैं. साल 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 3.4 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात किए, जबकि आयात 2.1 अरब डॉलर का रहा. इस तरह भारत को करीब 1.3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर नई टैरिफ व्यवस्था सही समय पर लागू हो जाती है, तो यह सरप्लस और बढ़ सकता है. इसका फायदा सीधे किसानों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और एक्सपोर्ट कंपनियों को मिलेगा. यह जीरो ड्यूटी की सुविधा एक इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन होने के बाद लागू होगी, जिसकी संभावना मार्च के आसपास जताई जा रही है. वहीं 18 प्रतिशत की कम टैरिफ दर तब प्रभावी होगी, जब अमेरिका इस संबंध में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करेगा. उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकती है. यानी आने वाले कुछ महीनों में जमीन पर इसका असर दिखने लगेगा. मसालों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ अगर प्रोडक्ट कैटेगरी की बात करें तो मसालों के सबसे अधिक लाभ मिलने वाला है. अभी अमेरिका के कुल मसाला आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है, जिसकी वैल्यू लगभग 2.01 अरब डॉलर है. चाय और कॉफी की हिस्सेदारी फिलहाल 1 प्रतिशत से भी कम है, जबकि पूरा बाजार 9.38 अरब डॉलर का है. इसका मतलब है कि यहां ग्रोथ की बड़ी गुंजाइश मौजूद है. फलों में आम और केले जैसे प्रोडक्ट अमेरिका की कुल खरीद का सिर्फ 0.3 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. वहीं प्रोसेस्ड फलों का इम्पोर्ट लगभग 759 मिलियन डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 4.6 प्रतिशत है. साफ है कि सही रणनीति के साथ यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है. वनों वाले प्रोडक्ट्स जैसे बांस की कोपलें, वेजिटेबल वैक्स, नट्स और बीजवैक्स भी अलग-अलग सेगमेंट में 0.2 प्रतिशत से लेकर 38 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखते हैं. अब जब टैरिफ में राहत मिलेगी, तो इन प्रोडक्ट्स की डिमांड में इजाफा हो सकता है. खास तौर पर वे प्रोडक्ट्स, जिनकी क्वालिटी पहले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है, उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है. मरीन सेक्टर को भी मिलेगा फायदा 18 प्रतिशत की रेसिप्रोकल टैरिफ व्यवस्था से मरीन सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिल सकता है. खासकर झींगा जैसे उत्पाद, जिनका अमेरिकी इम्पोर्ट मार्केट करीब 25 अरब डॉलर का है. इसके अलावा बासमती और प्रीमियम चावल, तिल जैसे ऑयलसीड्स और कुछ खास फलों को भी इस रियायत का लाभ मिलेगा. अगर सप्लाई चेन मजबूत रही और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पूरे किए गए, तो भारत इस सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ सकता है. कुल मिलाकर यह कदम भारतीय एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है. लेकिन सिर्फ टैरिफ में छूट काफी नहीं होगी. सरकार और एक्सपोर्टर्स को क्वालिटी कंट्रोल, टाइमली सप्लाई, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी फोकस करना होगा. अगर इन पहलुओं पर गंभीरता से काम हुआ, तो आने वाले समय में अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी कई गुना बढ़ सकती है और इसका सीधा फायदा देश के किसानों और एग्री-बिजनेस से जुड़े लोगों को मिलेगा.

ट्रंप का गुस्सा: महिला नेता की बात से प्रभावित, देश पर बढ़ाया टैरिफ

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ बढ़ा दिया था। अब उन्होंने खुलकर इसकी वजह पर भी बात की है। उन्होंने कहा है कि उन्हें स्विट्जरलैंड की महिला नेता का बात करने का तरीका पसंद नहीं आया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि महिला नेता छोटा देश होने का हवाला देते हुए टैरिफ में राहत की मांग भी कर रही थीं। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने स्विस फेडरल काउंसिल की सदस्य कैरिन कैलर सटर से हुई बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्विस नेता को बता दिया कि छोटा देश होने के बाद अमेरिका के साथ उसका 42 बिलियन डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है। ट्रंप ने कहा, 'मैंने 30 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो काफी कम था। इसके बाद मुझे कॉल आया, जो मुझे लगा कि स्विट्जरलैंड की प्रधानमंत्री का था। और वह बहुत आक्रामक, लेकिन अच्छे से बात कर रहीं थीं। वह बहुत आक्रामक थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि सर हम छोटे से देश हैं। हम ऐसा नहीं कर पाएंगे। हम ऐसा नहीं कर सकते। वह फोन रखने को तैयार ही नहीं थीं।' ट्रंप ने कहा, 'नहीं, नहीं, हम एक छोटा देश हैं। बार-बार एक ही बात। वह फोन रखने के लिए तैयार ही नहीं थीं और टैरिफ 30 फीसदी था। और जिस तरह से उन्होंने मुझसे बात की मुझे अच्छा नहीं लगा। ऐसे में उन्हें रियायत देने के बजाए, मैंने उसे बढ़ाकर 39 प्रतिशत कर दिया था।' उन्होंने दावा किया कि स्विट्जरलैंड अपना सामान अमेरिका निर्यात कर रहा था, लेकिन कोई भी टैरिफ नहीं दे रहा था। पहले भी किया था दावा दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भी ट्रंप ने स्विट्जरलैंड की नेता से बात करने का दावा किया था। उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है प्रधानमंत्री थीं। मुझे नहीं पता राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री किसका फोन था। एक महिला थीं। वह एक ही बात बार-बार दोहरा रही थीं। वह कह रही थीं, नहीं नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते। 30 फीसदी टैरिफ। हम बहुत छोटे देश हैं। लेकिन मैंने कहा कि आप भले ही छोटे हैं, लेकिन डेफिसिट बड़ा है।' खास बात है कि स्विट्जरलैंड में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं होता। यहां सरकार की अगुवाई फेडरल काउंसिल की तरफ से की जाती है, जिसमें सात सदस्य होते हैं। भारत के साथ डील हाल ही में अमेरिका ने भारत के साथ ट्रेड डील की है, जिसके बाद टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत पर आ गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर बीते सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं।

सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत

सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत   टेलीग्राम ग्रुप से जोडऩे के बाद दिया ठगी को अंजाम  भोपाल  पिपलानी पुलिस ने एक व्यवसायी की रिपोर्ट पर अज्ञात सायबर जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने शेयर बाजार तथा अन्य कंपनियों में निवेश का लालच देकर रुपये जमा करवाए और उसके बाद करीब एक लाख साठ हजार रुपये ठग लिए। जानकारी के अनुसार जगदीश सिंह (50) कर्मवीर नगर पिपलानी में रहते हैं और आक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई करने का काम करते हैं। करीब एक महीने पहले उनके वाट्सएप नंबर पर एक लिंक आई।उन्होंने जैसे ही उसे खोला तो एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। इस गुप में कई मेंबर थे जो कि ट्रेड में निवेश का काम ऑनलाइन तरीके से कर रहे थे। वह अलग-अलग कंपनियों में पैसा लगाते थे, जिसके बाद उन्हें मुनाफा होता था। मुनाफे की बात वे इस ग्रुप पर शेयर करते थे। जगदीश सिंह ने भी जब ट्रेड में निवेश के लिए हामी भर दी तो उन्हें टेलीग्राम ऐप के एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। उन्होंने शुरूआत में 2 हजार रुपए का निवेश किया तो उन्हें फायदा हुआ। इसके बाद दो-तीन बार और उन्हें फायदा हुआ। फायदे की यह रकम ग्रुप के एडमिन द्वारा बनाए गए उनके खाते में दिखाई दे रही थी। दो दिन के भीतर ही उन्होंने 1 लाख 59 हजार रुपए का निवेश कर दिया। बाद में जब उन्होंने यह मूल राशि और मुनाफे की राशि लेना चाही तो उनसे कहा गया कि आपको और भी पैसे भरने होंगे तभी आपके पैसे मिलेंगे। जगदीश सिंह को ठगी का अहसास हुआ तथा उन्होंने मामले की शिकायत साइबर सेल को कर दी। वहां से पिपलानी थाने में शिकायत आने पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर लिया।

जबलपुर में मंदिर के भीतर पेशाब करने से विवाद, मोहम्मद रिजवान गिरफ्तार

 जबलपुर शहर के गढ़ा थाना अंतर्गत छोटी बजरिया क्षेत्र में सोमवार रात एक धार्मिक स्थल पर की गई आपत्तिजनक हरकत के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। 1963 से स्थापित एक प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे स्थित पूजनीय स्थल पर एक संप्रदाय विशेष के युवक द्वारा की गई अमर्यादित क्रिया ने स्थानीय लोगों और हिंदूवादी संगठनों को आक्रोशित कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि क्षेत्र में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है। यह है घटनाक्रम जानकारी के अनुसार, गढ़ा छोटी बजरिया में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे दशकों पुराना धार्मिक स्थल है, जहां स्थानीय नागरिक नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक पूजन-पाठ करते हैं। सोमवार की रात काजी मोहल्ला, गढ़ा निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू वहां पहुंचा और धार्मिक स्थल पर लघुशंका कर दी। इस घृणित कृत्य पर पास ही खड़े स्थानीय निवासी मोहित तिवारी की नजर पड़ गई। मोहित द्वारा आपत्ति जताने और शोर मचाने पर आरोपित रिजवान मौके से भाग निकला।     दरअसल, घटना 9 फरवरी की रात करीब 9:30 बजे गढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटी बजरिया स्थित एक शिव मंदिर की है. यहां मुजावर मोहल्ला के रहने बाले एक मुस्लिम युवक रिजवान ने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया था. लोगों ने जब उसे ऐसा करते देखा, तो पीटने लगे. इसकी सूचना हिंदूवादी संगठनों को भी मिली. वो भी वहां पहुंचे. साथ ही पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई. इससे पहले की पुलिस वहां पहुंची आरोपी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने लिया ये एक्शन पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान रिजवान खान उर्फ रिज्जु उर्फ भूरा के रूप में हुई. गढ़ा थाना पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196B, 298 और 299 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने बताया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है. साथ ही आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में शांति व्यवस्था भंग न हो. शिवलिंग का शुद्धिकरण घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मंदिर पहुंचे और विधि-विधान के साथ शिवलिंग का शुद्धिकरण किया. हनुमान चालीसा और शिव स्तोत्र का पाठ किया गया तथा गंगा और नर्मदा जल से जलाभिषेक कर मंदिर परिसर को पुनः पवित्र किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे. वहीं सुरक्षा में भी भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. इसके अलावा पुलिस की पेट्रोलिंग लगातार की जा रही है और अतिरिक्त फोर्स को भी तैनात किया गया है. मुस्लिम समुदाय ने की निंदा इधर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस घटना की निंदा की है. समुदाय के लोगों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी का समाज से कोई संबंध नहीं है और उसके कृत्य का वे समर्थन नहीं करते. ज्ञापन में आरोपी को समाज से बहिष्कृत करने की बात कही गई है. साथ ही ये भी मांग की गई कि कानून के तहत उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करने का साहस न करे. मंदिरों में पुलिस गश्त बढ़ाई महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है. मंदिरों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है. वहीं पूरे मामले में जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है. थाने का घेराव कर प्रदर्शन सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी, सदस्य और क्षेत्रीय नागरिक गढ़ा थाने पहुँच गए। आक्रोशित भीड़ ने थाने का घेराव कर जमकर नारेबाजी की और आरोपित को तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की ऐसी कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। तनाव के बाद पुलिस ने मोहित तिवारी की शिकायत पर आरोपी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे देर रात ही गिरफ्तार कर लिया।

कांग्रेस सांसदों का विवादित कदम: ओम बिरला के साथ गाली-गलौज, रिजिजू ने जताया विरोध

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र में लगातार जारी हंगामे के बीच बुधवार को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर बड़ा आरोप लगाया है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चेंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। उन्होंने यह आरोप लगाए हैं कि इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत कई सीनियर कांग्रेस नेता भी वहां मौजूद थे। बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए किरन रिजिजू ने कहा, “स्पीकर साहब बहुत आहत हैं। मैंने उनसे बात की है। स्पीकर साहब के चेंबर में जाकर गाली गलौज किया, बुरा भला कहा। फिर स्पीकर साहब ने जो फैसला सुनाया उसको नहीं माने, और फिर राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन नहीं चाहिए, वो मर्जी से बोलेंगे। ये सब रिकॉर्ड पर है। लेकिन सदन में चेयर की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “स्पीकर के चेंबर में 20,25 कांग्रेस के MPs जब घुसे, तो मैं भी वहां गया। उन्होंने जो गाली गलौज किया स्पीकर के साथ, वह मैं आपको बता नहीं सकता। स्पीकर बहुत नरम आदमी हैं। नहीं तो और कठोर कदम उठाया जा सकता था। यह कोई तरीका नहीं होता।” रिजिजू ने कहा, “जब स्पीकर को गाली दी जा रही थी तब वहां प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं, वेणुगोपाल भी मौजूद थे, कांग्रेस के सीनियर नेता वहां मौजूद थे और इसे बढ़ावा दे रहे थे।” विपक्ष ने पेश किया है अविश्वास प्रस्ताव इससे पहले विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा है। ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया है कि विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपे जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने फैसला किया है कि वह मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे और उन्होंने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। सूत्रों ने यह भी कहा कि नोटिस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सौ से ज्यादा सांसदों ने किए हस्ताक्षर जानकारी के मुताबिक निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को ओम बिरला को पद से हटाने से संबंधित नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ओम बिरला पर क्या आरोप? यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत सौंपा गया है। विपक्ष ने नोटिस में कहा, ''बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। यह कोई अकेली घटना नहीं है। करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता।'' उन्होंने दावा किया कि गत 3 फ़रवरी को, विपक्ष के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए ''मनमाने ढंग से'' निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है। विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए।

क्यों किसानों ने दूरी बनाई? रबी फसल बीमा में पंजीकरण घटा 10 फीसदी

चरखी दादरी  हरियाणा में किसानों का भरोसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से लगातार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। रबी सीजन 2025-26 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के 16 प्रमुख कृषि जिलों में बीमित किसानों की संख्या और बीमित रकबे में औसतन 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। खासतौर पर दक्षिण और पश्चिम हरियाणा के जिलों में यह रुझान ज्यादा स्पष्ट है। कृषि विभाग के संकलित आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में बीमित किसानों की कुल संख्या ही नहीं घटी, बल्कि बीमित क्षेत्रफल भी घटा है। पहले केसीसी धारकों के लिए बीमा अनिवार्य होने के चलते आंकड़े ऊंचे रहते थे, लेकिन योजना के स्वैच्छिक होने के बाद बड़ी संख्या में किसानों ने बैंक जाकर लिखित में बीमा से बाहर होने का विकल्प चुना है। हालांकि कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 31 जनवरी तक पंजीकरण का समय था। बैंकों द्वारा अंतिम डेटा अपलोड होने के बाद इन आंकड़ों में 1-2 प्रतिशत का सुधार हो सकता है। टाप जिले उठा रहे बीमा का आधे से ज्यादा भार कृषि विभाग की ओर से जो प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई है उसमें 16 जिलों के कुल बीमित किसानों में से लगभग 50% किसान सिर्फ चार जिलों सिरसा, भिवानी, हिसार और कैथल से हैं। इसी तरह, कुल बीमित रकबे का 50% से अधिक हिस्सा भी इन्हीं जिलों में केंद्रित है। इससे संकेत मिलता है कि योजना का दायरा पूरे प्रदेश में समान रूप से नहीं फैल पा रहा। नये बने जिले हांसी में भी नहीं बदले समीकरण 23वें जिले हांसी में कुल बीमित किसान 12,480 और बीमित क्षेत्र 38,900 एकड़ ही दर्ज हुआ। यह हिस्सा कुल आंकड़ों में 5% से भी कम है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक पुनर्गठन के बावजूद बीमा योजना के प्रति उत्साह नहीं बन पाया। फसल पैटर्न भी तय कर रहा बीमा रुझान करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जैसे जिलों में बासमती और गन्ने का रकबा अधिक होने के कारण गेहूं आधारित रबी बीमा में स्वाभाविक रूप से रुचि कम रही। आंकड़े बताते हैं कि जहां फसल विविधता अधिक है, वहां बीमा भागीदारी अपेक्षाकृत कम दर्ज हुई। कम प्रीमियम, फिर भी दूरी बना रहे किसान रबी फसलों के लिए 1.5% प्रीमियम दर होने के बावजूद अधिकांश जिलों में 8-10% तक की गिरावट दर्ज हुई। आंकड़े संकेत देते हैं कि समस्या प्रीमियम की नहीं, बल्कि क्लेम भुगतान की प्रक्रिया और समयबद्धता से जुड़ी है। जानें अब आगे क्या… क्लेम प्रकिया समझाने को जागरूकता कैंप लगाएंगे कृषि विभाग के अधिकारी मानते हैं कि स्वैच्छिक विकल्प के कारण संख्या कम हुई है। विभाग अब ग्राम स्तर पर शिविर लगाकर किसानों को क्लेम प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने की योजना बना रहा है। क्यों पीछे हट रहे किसान     क्लेम प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव:किसानों का आरोप है कि नुकसान का पटवारी और कंपनी द्वारा किया जाने वाला सर्वे धरातल के बजाय कागजों पर ज्यादा होता है।     प्रीमियम कटा, पर मुआवजा नहीं: ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ और बीमा पोर्टल के बीच डेटा मिसमैच होने के कारण कई किसानों का प्रीमियम कटने के बावजूद क्लेम से वंचित रहते हैं।      सैटेलाइट डेटा बनाम जमीनी हकीकत अलग:कृषि विभाग अब नुकसान के आकलन के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा ले रहा है, जबकि किसानों का तर्क है कि ओलावृष्टि या स्थानीय जलभराव जैसी स्थिति सैटेलाइट में स्पष्ट नहीं होती।  

किसानों को होली से पहले राहत, साय कैबिनेट ने अंतर की राशि एक साथ देने का लिया निर्णय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में किसानों के हित समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय     मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 के लिए राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया।     मंत्रिपरिषद द्वारा बजट अनुमान वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।     मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षाें में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी।