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पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित….

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर भाजपा का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित…. बिलासपुर  भाजपा मंडल बिलासपुर  में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके तेलीय चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक, अर्थशास्त्री एवं भारतीय जनसंघ के शीर्ष नेताओं में से थे। वे अपने दार्शनिक सिद्धांत ‘एकात्म मानव दर्शन’ के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी की विचारधारा का मूल आधार यह था कि विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित न होकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य को उन्होंने विकास का केंद्र बिंदु माना। उनके अनुसार आर्थिक नीतियों का उद्देश्य केवल उत्पादन और उपभोग बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। वे 1968 में अपने असामयिक निधन तक भारतीय जनसंघ का नेतृत्व करते रहे। भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को अंत्योदय और एकात्म मानववाद का प्रणेता बताते हुए कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का वास्तविक मापदंड है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय जी के विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। भाजपा मंडल बिलासपुर के महामंत्री ने भी उन्हें निस्वार्थ कर्मयोगी और महान विचारक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया गया अंत्योदय का मंत्र आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण की मजबूत बुनियाद है। राष्ट्र सेवा और समर्पण के उनके आदर्श सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे। कार्यक्रम में भाजपा जिला मंत्री पंकज तिवारी भाजपा मंडल बिलासपुर के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी मंडल महामंत्री विनायक तिवारी उपाध्यक्ष रवि शंकर सोनी,विजय सोनी,गोविंद सोनी,बच्चू सोनी,किश्शू महार एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने वाली हैं, 74 हजार लोकेशन की नई गाइडलाइन जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों के लिए जमीन और मकान खरीदना भी मंहगा होने जा रहा है. राजस्व और पंजीयन विभाग ने प्रदेश के करीब 74 हजार लोकेशन का विस्तृत सर्वे पूरा कर नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार कर लिया है. यह गाइडलाइन 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी. हालांकि अब इस प्रस्ताव को पहले उप जिला मूल्यांकन समिति, फिर जिला मूल्यांकन समिति में चर्चा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा. वहां से अंतिम स्वीकृति मिलते ही नई दरें प्रभावी हो जाएंगी. कलेक्टर गाइड लाइन में पहली बार एआई का प्रयोग इस बार कलेक्टर गाइडलाइन के तहत दर निर्धारण की प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से बिलकुल अलग और हाईटेक बनाई गई है. पंजीयन विभाग ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया है. एमपी इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सहयोग से जिलों की एक साल पुरानी और वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया. इससे यह स्पष्ट हुआ कि बीते एक वर्ष में किन क्षेत्रों में नया विकास हुआ है. सैटेलाइट इमेज के जरिए यह चिह्नित किया गया कि जहां पहले खाली जमीन थी, वहां अब प्लाटिंग, कॉलोनी, सड़क या व्यावसायिक निर्माण तो नहीं हो गया. जिन स्थानों पर तेजी से विकास हुआ है. डायवर्सन के डेटा का किया गया व्यापक विश्लेषण नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कृषि भूमि के आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में हुए डायवर्सन का डेटा लिया गया है. जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि का स्वरूप बदल चुका है और विकास कार्य शुरू हो गए हैं, वहां अब कृषि दरों के बजाय प्लाट के अनुरूप दरें तय की जाएंगी. कृषि विभाग से भी भूमि उपयोग से जुड़ी जानकारी लेकर क्रास वेरिफिकेशन किया गया है. इससे जमीन की दरें वास्तविक बाजार मूल्य के ज्यादा करीब तय करने का दावा किया जा रहा है. भोपाल सहित प्रदेशभर में प्राइम लोकेशन पर बढ़ोत्तरी अधिकारियों के अनुसार भोपाल की करीब 500 लोकेशन सहित प्रदेश के कई प्रमुख शहरों और ग्रामीण-शहरी सीमावर्ती इलाकों में दरों में बढ़ोतरी संभावित है. खासतौर पर उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जहां बाजार में प्रापर्टी का वास्तविक सौदा गाइडलाइन से अधिक कीमत पर हो रहा है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 55 जिलों के 60 हजार स्थानों पर औसतन 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी. तकनीकी सर्वे में यह सामने आया था कि कई क्षेत्रों में सुविधाओं और निर्माण गतिविधियों के कारण जमीन का बाजार भाव पहले से कहीं अधिक हो चुका है. कलेक्टर गाइड लाइन में एआई के प्रयोग से यह होगा लाभ राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एआई द्वारा किए गए सर्वे और सैटेलाइट इमेज के आधार पर कलेक्टर गाइडलाइन के निर्धारण से कई फायदे होंगे. इससे जहां अंडरवैल्यू रजिस्ट्रियों पर रोक लग सकेगी, वहीं नई गाइडलाइन लागू होने के बाद बाजार मूल्य के अनुरूप ही दरें तय होंगी. कृषि से आवासीय या व्यावसायिक बनी जमीन का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा. वहीं कम कीमत दिखाकर होने वाली रजिस्ट्रियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा. इससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी. साथ ही सभी जिलों में एक समान और वैज्ञानिक पद्धति से दर निर्धारण संभव होगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद होगी लागू मध्य प्रदेश पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक अमित तोमर ने बताया कि "नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार किया जा रहा है. जल्द ही संबंधित समितियों की बैठक बुलाकर प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में नई दरें लागू कर दी जाएगी. तोमर ने बताया कि नई व्यवस्था से जहां पारदर्शिता बढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं आम खरीदारों और निवेशकों के लिए प्रापर्टी सौदे पहले से महंगे हो सकते हैं.

MARUTI की रफ्तार अब रेल की पटरियों पर भी, जानें नया रिकॉर्ड

 नई दिल्ली आपने सड़क पर दौड़ती मारु़ति की रफ्तार तो खूब देखी होगी. लेकिन अब रेल की पटरियों पर भी मारुति की स्पीड देख लीजिए. मारुति सुजुकी ने साल 2025 में गाड़ियों की ढुलाई के मामले में एक नया कीर्तिमान बना दिया है. कंपनी ने कैलेंडर ईयर 2025 में रेल के जरिए 5.85 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजी हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा रेल डिस्पैच आंकड़ा है. साल 2024 के मुकाबले इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि मारुति के लॉजिस्टिक्स सिस्टम में रेलवे की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. रेल से भेजी जा रही हर चौथी कार अब मारुति सुजुकी की कुल गाड़ियों में से करीब 26 फीसदी गाड़ियां रेल के जरिए डिस्पैच हो रही हैं. साल 2016 में यह हिस्सा सिर्फ 5.1 फीसदी था. आंकड़ों के हिसाब से देखें तो पिछले 10 साल में रेल से भेजी जाने वाली गाड़ियों की संख्या सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है. 2016 में जहां यह संख्या करीब 77 हजार यूनिट थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 5.85 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई. कंपनी के मुताबिक रेल ट्रांसपोर्ट के बढ़ते इस्तेमाल से साल 2025 में करीब 88 हजार मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव हुआ. इसके साथ ही 6.8 करोड़ लीटर से ज्यादा ईंधन की बचत भी हुई. माना जा रहा है कि इससे देश के कई बड़े वाहन कॉरिडोर पर सड़क ट्रैफिक का दबाव भी कम हुआ है. साल 2025 में मारुति सुजुकी के रेल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में दो अहम बदलाव देखने को मिले. कंपनी ने अपने मानेसर प्लांट में इन प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की, जिसे भारत में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सबसे बड़ी साइडिंग बताया जा रहा है. इसके अलावा मारुति ने पहली बार कश्मीर घाटी तक रेल के जरिए गाड़ियों की डिलीवरी की. यह खेप चिनाब रेल ब्रिज के रास्ते भेजी गई. फैक्ट्री से सीधे रेल कनेक्शन का असर गुजरात और मानेसर प्लांट में मौजूद इन प्लांट रेलवे साइडिंग से भेजी गई गाड़ियों का हिस्सा 2025 में मारुति के कुल रेल डिस्पैच का 53 फीसदी रहा. यह दिखाता है कि कंपनी अब सीधे फैक्ट्री से जुड़े रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा भरोसा कर रही है. मारुति सुजुकी साल 2013 से रेलवे के जरिए वाहन ढुलाई कर रही है. उस वक्त मारुति देश की पहली कार कंपनी बनी थी, जिसे ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर का लाइसेंस मिला.  फाइनेंशियल ईयर 2014-15 से अब तक कंपनी 22 डिस्पैच लोकेशन से 28 लाख से ज्यादा गाड़ियां रेल के जरिए भेज चुकी है. ये गाड़ियां देश के 600 से ज्यादा शहरों तक पहुंचाई गई हैं. फिलहाल कंपनी के पास 45 से ज्यादा फ्लेक्सी डेक रेक हैं, जिनमें हर एक रेक करीब 260 गाड़ियां एक बार में ले जाने की क्षमता रखता है. मारुति सुजुकी का कहना है कि आने वाले सालों में वह रेल के जरिए होने वाली गाड़ियों की ढुलाई को और बढ़ाएगी. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक अपने कुल आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स में रेल का हिस्सा करीब 35 फीसदी तक पहुंचाने का है.  जाहिर है कि, इतनी भारी मात्रा में यदि कारों को आम ट्रांसपोर्ट (ट्रकों) द्वारा एक जगह से दूसरी जगह तक भेजा जाता तो इससे लाखों लीटर डीजल की खपत होती. साथ ही भारी वाहनों की सड़क पर मौजूदगी से जो ट्रैफिक जाम जैसी समस्या होती वो अलग. इसके अलावा रोड ट्रांसपोर्ट के चलते वाहनों की डिलीवरी में भी देरी होती, जिसका सीधा असर कारों के वेटिंग पीरियड पर भी देखने को मिलता. 

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार  भोपाल  वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है जिसका एक ऐतिहासिक महत्व ही नहीं देशभक्त की भावना और मातृभूमि के प्रति सम्मान प्रकट के लिए है यह गीत वकील चंद चटर्जी द्वारा रचित किया गया था यह उसे अवसर का है जब देश गुलामी की जंजीरों में झगड़ा हुआ था तब स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना इसका गायन राष्ट्रीय गौरव एवं बलिदानों की याद और देश प्रेम के समर्पण के प्रतीक स्वरूप है भारत की संविधान सभा ने वर्ष 1950 भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। शुरू में वंदे मातरम की रचना स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास "आनंदमठ" (1882 में प्रकाशित) में शामिल किया गया था। इसे पहली बार 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में भी रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। 'वंदे मातरम्' भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है। 'सुजलाम सुफलाम'  जो भारत माता की सुंदरता (स्वच्छ जल, फलदार, शीतल हवा, फसलों से हरी-भरी) का वर्णन करता है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा का स्रोत रहा है। श्री बंकिम चंद्र चटर्जी ने यह गीत बंगाल के हुगली नदी के पास वर्ष 1876 में लिखा था, और इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी फिर यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास पुस्तक 'आनंद मठ' में शामिल किया गया, जो संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित था। बंगाल विभाजन के विरोध में यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य नारा बन गया था, जिससे देशभर में स्वदेशी आंदोलन को बल मिला। इसका प्रथम गायन वर्ष 1896 में रविंद्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार लय और संगीत के साथ गाया। एवं रायहाना तैयबजी कांग्रेस के एक अधिवेशन में वंदे मातरम गाने वाली पहली मुस्लिम महिला थीं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रमुख व्यक्ति थीं और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए जानी जाती थीं वंदे मातरम विवाद के विषय में इतिहास के अनुसार यह था कि मुख्य रूप से इसके कुछ अंश को लेकर उठा था जिस पर कुछ लोगों ने आपत्ति उठाई थी 1937 में कांग्रेस ने भी राष्ट्रगान बनाने हेतु निर्णय लिया था और यह विवाद देश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बना रहा यह विवाद केवल उसे मुद्दे पर आधारित रहा जो भारत माता को देवी के रूप में चित्रित करती है सभी धर्म विशेष कर इस्लाम को भी यह गीत स्वीकार था इसलिए 24 जनवरी 1950 में भारत सरकार ने  'जन गण मन' के साथ 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। इसकी संरचना:  में छह छंद हैं, शुरु आती दो संस्कृत में और बाकी बांग्ला में हैं। इसका महत्व: यह है की यह गीत भारत के लोगों को एकता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति गहरी भक्ति सिखाता है, और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया।वंदे मातरम गीत यह शोधपत्र राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान हैदराबाद राज्य और विशेष रूप से हैदराबाद, कर्नाटक के वंदे मातरम आंदोलन पर केंद्रित है। वंदे मातरम आंदोलन हैदराबाद के निज़ाम राज्य के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रभावी और सबसे लोकप्रिय नारा था। वंदे मातरम, यह एक शब्द ऐसा है जो हमें इतिहास में ले जाता है। यह हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को, आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को यह नया साहस प्रदान करता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जिसे पूरा न किया जा सके । ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम भारतीय हासिल न कर सकें। वंदे मातरम का अर्थ है "मैं तुम्हें नमन करता हूँ, माँ" "मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, माँ," जिसमें 'माँ' भारत माता को कहां गया है जो की हमारी मातृभूमि की प्रतीक है,  जो देश के प्रति गहरे प्रेम, सम्मान और भक्ति को व्यक्त करता है, विशेषकर वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम की भावना और भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका को याद करना है। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है; यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणादायक संकल्प था भारत सरकार ने जैसा की अपेक्षा थी ऐसे वंदे मातरम गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों का सम्मान किया है जिसके लिए हम कृतज्ञ हैं डॉ.राजेंद्र प्रसाद आचार्य  पूर्व सदस्य धर्मस्य विशेषज्ञ समिति मध्य प्रदेश शासन

महाशिवरात्रि 2026 का महासंयोग: सही तिथि और शुभ मुहूर्त में शिव आराधना से पूरी होंगी मनोकामनाएं

हर साल महाशिवरात्रि का इंतजार शिवभक्तों को बेसब्री से होता है। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इसे हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस खास दिन पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव-शक्ति को पूजा जाए तो हर कामना पूरी होती है। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं। माना जाता है इस दिन की गई पूजा और इस दिन रखे गए व्रत से सुख-समृद्धि आती है और हर रूका हुआ काम पूरा हो जाता है। हर बार की तरह इस बार भी लोग महाशिवरात्रि की तारीख को लेकर कन्फ्यूज हैं।  महाशिवरात्रि की तारीख और मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल फाल्गुन महीने में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी से शुरु होगी। इसका समय शाम को 5:04 से शुरू होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 16 फरवरी की शाम साढ़े 5 बजे होगी। इस वजह के महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होगी। इसी दिन भगवान शिव की पूजा होगी और इसी दिन व्रत रखा जाएगा। बात करें पूजा के शुभ मुहूर्त की तो 15 फरवरी की शाम 5:54 बजे से लेकर रात 12:12 बजे के बीच कभी भी महाशिवरात्रि की पूजा की जा सकती है। अगले दिन दोपहर 3 बजे तक इस व्रत का पारण कभी भी किया जा सकता है। बन रहा है ये खास योग इस साल की महाशिवरात्रि कई वजह से खास होने वाली है। इस दिन कई योग एक साथ बन रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस महासंयोग से हर कामना पूरी हो सकती है। ऐसे में इस दिन व्रत रखना काफी फलदायी होगा। इस साल महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। वहीं अभिजीत मुहूर्त के साथ ही इस दिन भद्रावास योग का भी संयोग बनने वाला है। इस महासंयोग को काफी दुर्लभ माना जाता है।

US को अब भारत ही होगा भरोसेमंद साथी, अमेरिकी कंपनियों का मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनेगा देश में

नई दिल्ली  भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. अब एक और अच्छी खबर आई है. भारत अब अमेरिकी कंपनियों का सहारा बनेगा. जी हां, खुद अमेरिका का कहना है कि भारत अब चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए नया ठिकाना होगा. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक नया अड्डा हो सकता है. कारण कि यहां लोग हैं और मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए इंपोर्ट के मामले में भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है. दरअसल, फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जैमिसन ग्रीर ने ये बातें कहीं. जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही जगह है, तो उन्होंने साफ कहा कि हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन अमेरिका में हों या जितना हो सके घर के पास हों. लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन से हटते हैं तो सप्लाई चेन को बदलना पड़ता है. भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है. वहां बहुत सारे लोग हैं, मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है.’ भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां हमें दूसरे देशों से आयात करना हो, वहां भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है,बशर्ते व्यापार संतुलित और निष्पक्ष हो.’ अमेरिका का यह बयान भारत के लिए बड़ा संदेश है. अमेरिका अब भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. भारत की युवा आबादी, बढ़ती फैक्ट्री क्षमता, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे आकर्षक बनाती हैं. कई अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में प्लांट लगा रही हैं. ऐपल, गूगल, अमेजन, टेस्ला जैसे नाम इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. इससे क्या फायदा होगा? इस डील के बाद दोनों देशों को फायदा होगा. भारत को अमेरिकी बाजार में ज्यादा निर्यात का मौका मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी आएगी. वहीं, अमेरिका को सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन मिलेगी, चीन पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. साउथ एशिया में भारत अब अमेरिका का विश्वसनीय साथी बन रहा है. न सिर्फ ऊर्जा में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भी. भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर या ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है. ‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ इंटरव्यू में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: ‘संक्षिप्त उत्तर हां है. उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है.' सप्लाई चेन पर ग्रीर का पूरा बयान क्या है? फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहती हैं, तो क्या भारत सही जगह होगी, तो इस पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन यहां यूनाइटेड स्टेट्स में हों और जितना हो सके घर के पास हों. हम जानते हैं कि जब आप ग्लोबलाइज़ेशन से हटते हैं और जब आप एक ज़्यादा मज़बूत और सुरक्षित इकॉनमी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारे देश के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का एक प्रोसेस होता है. किसी न किसी पॉइंट पर आपको सप्लाई चेन को इधर-उधर करना ही होगा; भारत इसके लिए एक रास्ता हो सकता है. उनके पास वहां बहुत सारे लोग हैं, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है. बेशक, हम यह पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सबसे पहले और सबसे ज़रूरी हो और अमेरिकन वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां तक हम दूसरे देशों से इंपोर्ट करना चाहते हैं, भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है, जब तक यह बैलेंस्ड और फेयर हो.' भारत पर अब कितना टैरिफ है? भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. ट्रेड डील के साथ ही अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. एडिशनल टैरिफ भी हटा दिया है.

पालमपुर में खुला देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन, महसूस करें ‘देखा एक ख्वाब’ वाली फीलिंग

पालमपुर  हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में धौलाधार की वादियों में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन सैलानियों के लिए खोल दिया गया है. कश्मीर के बाद देश का दूसरा और प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ वर्ष पूर्व पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था. यहां पर ट्यूलिप्स की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है.  यह गार्डन हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा एवं पर्यटन को अग्रसर करने में मदद कर रहा है. गौर रहे कि कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन में चर्चित ‘देखा एक ख्वाब को सिलसिले हुए’ गाना शूट हुआ था और यह गाना ट्यूलिप से जोड़ा जाता है. जानकारी के अनुसार, पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान केंद्र सरकार और सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है. उन्होंने बताया कि 5 साल में 23 लाख ट्यूलिप तैयार करने का लक्ष्य रखा है. सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. सीएसआईआर के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने बताया कि जब से यह गार्डन खोला गया है कि तब से अब तक 4 लाख से ऊपर दर्शक यहां आ चुके हैं. इस बार भी दर्शकों  का आंकड़ा एक लाख से अधिक रहने की संभावना है. डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि  संस्थान कुछ कम्पनी के  के साथ मिलकर बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा हैं इसमें और ऑफ सीजन में ट्यूलिप लेने की कोशिश की जा रही है. इस वर्ष दिल्ली मुख्यालय में भी 1000 से ज्यादा ट्यूलिप लगाए गए है और उन्हें भी आम जनता के लिए खोला दिया गया है. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है.गौर रहे कि हालैंड में ट्यूलिप के फूलों की सबसे अधिक पैदावार होती है और वहीं से अन्य देश इन्हें आयात करते हैं. भारत में भी हालैंड से ही ट्यूलिप मंगवाए जाते रहे हैं. हालांकि, अब आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के प्रयासों से देश में फूलों की खेती में एक बड़े बदलाव हुआ है.

टी-90 टैंकों का जबलपुर फैक्ट्री में अपग्रेड, पहली बार मिलेगा नया रूप

जबलपुर वाहन निर्माणी जबलपुर सैन्य वाहनों के साथ अब युद्धक टैंक उत्पादन क्षेत्र में कदम रख चुका है। टी-72 युद्धक टैंक की सफल टेस्टिंग के बाद निर्माणी अब पहली बार टी-90 टैंक को आकार देने के अपने अभियान में जुटने जा रही है। देश में चेन्नई के बाद जबलपुर टैंकों को नया आकार देने वाला शहर बन गया है। एमआरओ प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में चेन्नई से दो टी-90 टैंक की पहली आने जा रही है। जिसे नया स्वरूप प्रदान करने निर्माणी की 150 सदस्यीय दक्ष इंजीनियरों की टीम तैयार है। टी-90 में तकनीकी सुधार के साथ विभिन्न कलपुर्जों पर कार्य निर्माणी के लिए अपनी तरह का पहला होगा। अभी तक वह सुरंगरोधी वाहन व सैन्य उपयोगी ट्रकों पर ही फोकस करती रही है। श्रमिक सूत्रों के अनुसार वीएफजे पहली बार भारतीय सेना के प्रमुख टी-90 भीष्म टैंकों के ओवरहालिंग (मरम्मत और नवीनीकरण) का कार्य करने जा रही है। घातक टैंकों को किया जा रहा अपग्रेड टी-72 टैंकों की मरम्मत में सफलता के बाद, वीएफजे अब टी-90 टैंकों की खेप को नया आकार देगा, जिससे इन टैंकों की युद्ध क्षमता और आयु में वृद्धि होगी। वीएफजे अपनी एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग) क्षमताओं का विस्तार करते हुए टी-90 जैसे घातक टैंकों को अपग्रेड करने जा रहा है। टी-72 के सफल ट्रायल के बाद, टी-90 टैंकों की ओवरहालिंग की सप्लाई चेन स्थापित की जा रही है। यह टैंक अपनी मारक क्षमता, सुरक्षा (एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर) और जैविक-रासायनिक हमलों से निपटने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे ‘भीष्म’ भी कहा जाता है। इस पहल से सेना के बख्तरबंद फॉर्मेशन की परिचालन तत्परता सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही यह कदम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। तकनीक व गुणवत्ता पर भी कार्य निर्माणी टैंकों के सफल मरम्मत को लेकर नए सिरे से कार्य कर रही है। यही कारण है कि अपनी दक्ष टीम के साथ नगर के ट्रिपल आईटीडीएम के छात्रों की मदद भी तकनीक में ली जा रही है। जिससे भविष्य में शक्तिशाली टैंक तैयार किए जा सकें। नया आकार देने के साथ इसकी गुणवत्ता का खास ख्याल रखा जा रहा है। ताकि इनका प्रदर्शन पूर्व के मुकाबले बेहतर हो और कोई त्रुटि न रहे जाए। टैंकों के लिए एमआरओ प्रोजेक्ट में नया प्लांट विकसित किया गया है।

किसानों के खाते में ₹4,000 का इंतजार खत्म, पीएम किसान सम्मान निधि से मिलेगी राहत

भोपाल  किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना की 22वीं किस्त का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। कृषि मंत्रालय ने इस किस्त के ट्रांसफर की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। क्या खास है इस बार? जिन किसानों की 21वीं किस्त रुक गई थी, उनके खाते में 21वीं और 22वीं किस्त का पैसा एक साथ आएगा। यानी ऐसे किसानों के खाते में 4-4 हजार रुपये क्रेडिट होंगे। बाकी किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये जल्द ही ट्रांसफर किए जाएंगे। कब आएगी अगली किस्त? पिछली किस्त 2025 में आई थी। सूत्रों की मानें तो होली से पहले यानी मार्च की शुरुआत में 22वीं किस्त जारी हो सकती है। इस साल होली 4 मार्च को है, इसलिए संभावना है कि सरकार इसे होली का तोहफा मानते हुए किसानों के खाते में भेज दे। किसान की किस्त का पैसा सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में आएगा। PM Kisan Yojana के तहत हर किसान को साल में तीन बार 2-2 हजार रुपये मिलते हैं। अगर पिछली किस्त रुक गई थी तो अब 4 हजार रुपये एक साथ मिलने वाले हैं। लाभार्थी सूची में नाम कैसे जांचें पीएम किसान योजना के तहत लाभार्थी सूची में नाम देखना अब बेहद आसान हो गया है। किसान घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से अपनी स्थिति जांच सकते हैं। इसके लिए पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फार्मर कॉर्नर में उपलब्ध लाभार्थी सूची के विकल्प पर जाना होता है। वहां राज्य, जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव का चयन करने के बाद पूरी सूची खुल जाती है। इस सूची में किसान अपना नाम और पिछली किस्तों की भुगतान स्थिति आसानी से देख सकते हैं, जिससे यह साफ हो जाता है कि वे अगली किस्त के लिए पात्र हैं या नहीं। ई-केवाईसी क्यों है जरूरी सरकार ने 22वीं किस्त के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया है। जिन किसानों की ई-केवाईसी पूरी नहीं है, उनकी किस्त रोकी जा सकती है। ई-केवाईसी प्रक्रिया आधार आधारित होती है और इसे पीएम किसान पोर्टल पर ओटीपी के जरिए पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा किसान का बैंक खाता आधार से लिंक होना और डीबीटी सुविधा चालू होना भी जरूरी है। कई मामलों में बैंक खाता आधार से लिंक न होने की वजह से भुगतान अटक जाता है या वापस चला जाता है। समय रहते जरूरी सुधार करें किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपनी ई-केवाईसी, बैंक डिटेल और आधार लिंकिंग की स्थिति जांच लें। अगर किसी भी तरह की गलती है तो उसे तुरंत सही करवाएं, ताकि 22वीं किस्त मिलने में कोई परेशानी न हो। सही जानकारी और समय पर अपडेट से किसान बिना किसी रुकावट के योजना का लाभ उठा सकते हैं।

AIIMS भोपाल में ‘मैजिक नाइफ’ की मदद से डेंटल सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव

भोपाल एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दांतों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला एक मल्टीपल टूल विकसित किया है, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है. यह उपकरण डेंटल इम्प्लांट और ओरल सर्जरी को आसान और कम समय में पूरा करने में मदद करेगा.  दरअसल, दांतों के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को एक ही उपकरण से  कट लगाना, पकड़ना और इम्प्लांट करना  जैसे अलग अलग काम करने होते हैं.  इससे निजात पाने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने डेंटल इम्प्लांट और माइनर ओरल सर्जरी के लिए एक मल्टीपर्पज सर्जिकल टूल बनाया है. यह एक 'स्विस नाइफ' की तरह काम करता है, जिसमें सर्जरी के तमाम स्टेपस् के लिएजरूरी  कई टूल्स एक ही डिवाइस में मिलते हैं.  इस 'स्विस नाइफ' की 5 बड़ी विशेषताएं     ऑल-इन-वन डिज़ाइन यानी सर्जरी के दौरान अलग-अलग दर्जनों औजारों की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे प्रक्रिया आसान होगी.     कम उपकरणों के उपयोग से संक्रमण का खतरा कम होगा और शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ेगी.     प्रक्रिया कम समय में पूरी होने से मरीजों को कम असुविधा होगी और उनकी रिकवरी तेज होगी.     इसका डिजाइन काफी छोटा और हल्का है, जो इसे मोबाइल क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों के लिए आदर्श बनाता है.     वहीं, महंगे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होने से दंत चिकित्सा की लागत में कमी आएगी.  विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेटेंट न केवल एम्स भोपाल के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती प्रदान करता है. आने वाले समय में यह उपकरण सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट क्लीनिकों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. इस स्वदेशी उपकरण के मुख्य आविष्कारक डॉ. अंशुल राय हैं. उनके साथ डॉ. बाबूलाल, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. ज़ेनिश भट्टी और डॉ. मोनिका राय ने सह-आविष्कारकों के रूप में इस पर काम किया. टीम का उद्देश्य सर्जरी के दौरान बार-बार उपकरण बदलने की जटिलता और उससे होने वाली मानवीय त्रुटियों को कम करना था.